16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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नागालैंड के नन्हे रॉकस्टार ‘याटो’ ने जीता देशवासियों का दिल, राष्ट्रगान की आवाज ने मचाई धूम

नई दिल्ली: नागालैंड के महज 5 साल के याटो वांगनाओ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका ‘जन गण मन’ गाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे सुनकर देशभर के लोग उनकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की जमकर तारीफ कर रहे हैं। याटो के राष्ट्रगान ने मचाई धूम याटो का राष्ट्रगान गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। छोटी सी उम्र में जिस आत्मविश्वास और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया, उसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास तौर पर राष्ट्रगान के अंतिम हिस्से ‘जय हे’ को जिस अंदाज में याटो ने गाया, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने वीडियो को बार-बार देखने और सुनने की बात कही। आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित याटो की प्रतिभा से प्रभावित होकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने याटो की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए नागालैंड की खूबसूरती और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। महिंद्रा ने याटो के वीडियो को नागालैंड के लिए एक तरह का अनौपचारिक टूरिज्म प्रमोशन बताते हुए कहा कि इस छोटे बच्चे ने जिस तरह लोगों का ध्यान नागालैंड की ओर खींचा, वह बेहद खास है। छोटी उम्र, बड़ा आत्मविश्वास याटो की सबसे खास बात उनकी उम्र के मुकाबले उनका आत्मविश्वास है। महज पांच साल की उम्र में राष्ट्रगान को इस तरह पूरे जोश और भाव के साथ प्रस्तुत करना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आया। उनके वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी प्रतिभाएं किस तरह सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत तक पहुंच सकती हैं। नागालैंड की संस्कृति भी चर्चा में याटो की वायरल प्रस्तुति के साथ नागालैंड भी चर्चा में आ गया है। पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने नागालैंड को अपनी Travel Bucket List में शामिल करने की बात कही। सोशल मीडिया पर मिल रहा प्यार याटो के वीडियो पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग उनकी आवाज, मासूमियत और देशभक्ति की भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने याटो को भविष्य का बड़ा कलाकार बताते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की अपील भी की है। निष्कर्ष नागालैंड के 5 वर्षीय याटो वांगनाओ ने अपनी प्यारी आवाज और जोशीले अंदाज में राष्ट्रगान गाकर देशवासियों का दिल जीत लिया है। उनका वायरल वीडियो न सिर्फ उनकी प्रतिभा को सामने ला रहा है, बल्कि नागालैंड की खूबसूरती और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर में चर्चा में ला रहा है। Source: Times of India, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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झारखंड में बड़ा फैसला! TDPL से जुड़ी परीक्षाएं, परिणाम और नियुक्तियां रद्द

रांची: झारखंड सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई विशेष कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने TSR Data Processing Private Limited (TDPL) से जुड़ी परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का ऐलान किया है। इसमें JSSC-CGL परीक्षा भी शामिल है। 2014 से TDPL से जुड़ी परीक्षाओं की होगी जांच सरकार ने TDPL के माध्यम से 2014 से आयोजित परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं की समीक्षा और जांच का फैसला लिया है। सरकार का कहना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में अगर किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी जिम्मेदारी तय की जाएगी। TDPL से जुड़ी परीक्षाओं में JPSC और JSSC की कई महत्वपूर्ण भर्तियां शामिल रही हैं। इनमें JSSC-CGL, फील्ड वर्कर, वनरक्षक और PGT शिक्षक भर्ती जैसी परीक्षाओं का भी उल्लेख किया गया है। JSSC-CGL भी हुई रद्द सरकार के फैसले का सबसे बड़ा असर JSSC Combined Graduate Level (JSSC-CGL) परीक्षा पर पड़ा है। परीक्षा रद्द होने से उन अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ है, जिन्होंने परीक्षा पास कर चयन प्रक्रिया पूरी की थी। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 2,000 उम्मीदवारों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर आगे की प्रक्रिया तय करना होगी। छात्रों के लंबे आंदोलन के बाद फैसला यह फैसला झारखंड में चल रहे लंबे छात्र आंदोलन के बीच आया है। छात्र संगठन भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग कर रहे थे। छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत किया है। रिपोर्ट के अनुसार, TDPL और JSSC-CGL को रद्द करने के निर्णय के बाद उन्होंने अपनी 16 दिन की भूख हड़ताल समाप्त कर दी। हालांकि, छात्रों की सभी मांगें पूरी नहीं हुई हैं। आंदोलनकारी अब भी पूरे मामले में CBI जांच की मांग पर कायम हैं। लगभग 15 बड़ी परीक्षाएं सवालों के घेरे में उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार TDPL की भूमिका JPSC और JSSC की करीब 15 बड़ी परीक्षाओं में रही है। इनमें JPSC की विभिन्न सिविल सेवा परीक्षाओं के अलावा Civil Judge, Assistant Public Prosecutor, JET और अन्य भर्ती परीक्षाएं शामिल हैं। JSSC की जिन परीक्षाओं का उल्लेख किया गया है, उनमें: शामिल हैं। सरकार परीक्षा व्यवस्था में सुधार करेगी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भर्ती परीक्षाओं में सुधार के लिए एक नई व्यवस्था की दिशा में भी कदम उठाने की बात कही है। सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है जिसमें पेपर लीक और अन्य गड़बड़ियों की गुंजाइश कम से कम हो और अभ्यर्थियों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सके। सरकार ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों से परीक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर सुझाव लेने के लिए एक पोर्टल की व्यवस्था की घोषणा भी की है। आगे क्या होगा? TDPL से जुड़ी परीक्षाओं और परिणामों को रद्द किए जाने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल है कि प्रभावित परीक्षाओं का दोबारा आयोजन कब और किस एजेंसी के माध्यम से होगा। इसके अलावा जिन उम्मीदवारों का चयन हो चुका था या जो नियुक्त होकर सेवा में आ चुके हैं, उनके मामले में भी सरकार को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने होंगे। इस फैसले से प्रभावित उम्मीदवारों के कानूनी विकल्पों पर भी नजर रहेगी। निष्कर्ष झारखंड सरकार का TDPL से जुड़ी परीक्षाओं, परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला राज्य की भर्ती व्यवस्था में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। JSSC-CGL के रद्द होने से हजारों अभ्यर्थियों का भविष्य सीधे प्रभावित हुआ है। अब निगाह इस बात पर है कि सरकार दोबारा परीक्षा और प्रभावित उम्मीदवारों के लिए क्या व्यवस्था करती है। Source: The New Indian Express, NDTV, DD India, Times of India, Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दीपके की डिग्री और स्कॉलरशिप पर सवाल, बोले—“मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार”

नई दिल्ली: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और उसकी फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। दीपके ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने BJP नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। Boston University की पढ़ाई पर उठे सवाल विवाद तब शुरू हुआ जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने दीपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी की गई और यह सवाल उठाया गया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा हुआ। दीपके ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। “मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार हूं” अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वह अपनी Boston University की डिग्री दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन के दस्तावेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके ने दावा किया है कि उन्हें Boston University से Dean’s Scholarship मिली थी और पढ़ाई के बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया गया था। PM मोदी की डिग्री पर भी उठाया सवाल दीपके ने अपने बचाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना है कि यदि उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो राजनीतिक नेताओं को भी अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। विरोधियों को भी दिया जवाब 17 अगस्त को सामने आए एक वीडियो में दीपके ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनकी Boston University की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी डिग्री दिखा देंगे और साथ ही अपने आलोचकों से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की। विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना यह मामला केवल दीपके की शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है। उनके CJP आंदोलन और सरकार के खिलाफ उनके बयानों के कारण यह विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी दीपके की ओर से प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी की आलोचना की और इसे अहंकार से जोड़कर देखा। निष्कर्ष अभिजीत दीपके की Boston University की डिग्री और विदेश में पढ़ाई की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने साफ कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उनके सवालों ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। Source: PTI, India Today, ThePrint, ABP News, Navbharat Live जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग, VIDEO आया सामने; 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया

मुंबई: दक्षिण मुंबई के चर्चगेट इलाके में स्थित आयकर भवन (Aayakar Bhavan) के बेसमेंट में सोमवार दोपहर आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग से निकलने वाला घना धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिसके बाद दमकल विभाग ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। करीब 2 बजे लगी आग मुंबई फायर ब्रिगेड को सोमवार दोपहर करीब 2:01 बजे आयकर भवन में आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग मुख्य रूप से भवन के बेसमेंट तक सीमित बताई गई, जहां बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, रिकॉर्ड और अन्य सामान रखा था। पूरी इमारत में भर गया धुआं आग के कारण बेसमेंट से निकलने वाला धुआं केंद्रीय एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के जरिए इमारत के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दमकलकर्मियों को धुआं बाहर निकालने के लिए कुछ खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। 28 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू दमकल विभाग ने इमारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 28 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें ऊपरी मंजिलों और टेरेस पर फंसे लोग भी शामिल थे। कुछ लोगों को सीढ़ियों और विशेष सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। 20 फायर टेंडर मौके पर पहुंचे आग पर काबू पाने के लिए करीब 20 फायर टेंडर और कई अन्य दमकल वाहन तैनात किए गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने की वजह की जांच जारी फिलहाल आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और उपकरणों से जुड़ी संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारण की पुष्टि होगी। VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल आयकर भवन में लगी आग और धुएं का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में इमारत के आसपास धुआं और मौके पर मौजूद दमकल की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। निष्कर्ष चर्चगेट स्थित मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग ने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। दमकल विभाग की तेजी से कार्रवाई के कारण 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है। आग के कारणों और संपत्ति को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। Source: Mumbai Fire Brigade, Mid-Day, Rediff, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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FIH हॉकी वर्ल्ड कप में भारत की शानदार शुरुआत, Wales पर 3-1 की जीत के बाद अगले मुकाबले पर नजर

नई दिल्ली: भारत ने FIH Hockey World Cup 2026 में शानदार शुरुआत करते हुए Wales को 3-1 से हरा दिया। शुरुआती मुकाबले में जीत के बाद भारतीय टीम का आत्मविश्वास बढ़ा है और अब उसकी नजर अगले मैच में बेहतर प्रदर्शन के साथ टूर्नामेंट में अपनी स्थिति मजबूत करने पर है। भारत ने Wales को 3-1 से हराया भारत ने मुकाबले में आक्रामक शुरुआत की और लगातार Wales के डिफेंस पर दबाव बनाए रखा। कप्तान Harmanpreet Singh ने शानदार प्रदर्शन करते हुए दो गोल दागे, जबकि भारत की ओर से एक और गोल ने टीम को 3-1 की जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। Wales ने भी मुकाबले में वापसी की कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने दबाव के बावजूद अपनी बढ़त बनाए रखी। Harmanpreet Singh का शानदार प्रदर्शन भारतीय कप्तान Harmanpreet Singh एक बार फिर टीम के लिए महत्वपूर्ण साबित हुए। उनके दो गोलों ने भारत को मुकाबले में निर्णायक बढ़त दिलाई। उनकी ड्रैग-फ्लिक और पेनल्टी कॉर्नर को भारतीय टीम की सबसे बड़ी ताकतों में माना जा रहा है। टूर्नामेंट के आगे बढ़ने के साथ भारत को उनसे इसी तरह के प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी। जीत के बावजूद टीम के लिए सुधार की गुंजाइश Wales के खिलाफ जीत भारत के लिए सकारात्मक शुरुआत रही, लेकिन टीम को अगले मुकाबलों से पहले कुछ क्षेत्रों में सुधार करने की जरूरत होगी। खासकर फिनिशिंग, पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलने की क्षमता और गेंद पर कब्जा बनाए रखने पर टीम का फोकस रहेगा। World Cup जैसे बड़े टूर्नामेंट में मजबूत टीमों के खिलाफ छोटी गलतियां भी भारी पड़ सकती हैं। अगले मुकाबले की तैयारी तेज पहले मैच में जीत हासिल करने के बाद भारतीय टीम का ध्यान अब अगले मुकाबले पर है। टीम मैनेजमेंट खिलाड़ियों की फिटनेस, रणनीति और विपक्षी टीम की कमजोरी का विश्लेषण कर रहा है। भारत की कोशिश होगी कि शुरुआती जीत की लय को बरकरार रखते हुए अगले मैच में भी तीन अंक हासिल किए जाएं। World Cup में भारत की उम्मीदें घरेलू परिस्थितियों और हाल के प्रदर्शन को देखते हुए भारतीय टीम से इस World Cup में काफी उम्मीदें हैं। टीम का लक्ष्य केवल शुरुआती मुकाबले जीतना नहीं बल्कि टूर्नामेंट के अंतिम चरण तक पहुंचकर खिताब की मजबूत दावेदारी पेश करना होगा। Wales के खिलाफ जीत ने भारत को अच्छी शुरुआत दी है, लेकिन असली चुनौती टूर्नामेंट के अगले दौर में मजबूत विपक्षियों के खिलाफ होगी। निष्कर्ष भारत ने FIH Hockey World Cup 2026 में Wales को 3-1 से हराकर शानदार आगाज किया है। Harmanpreet Singh के दो गोलों ने जीत में अहम भूमिका निभाई। अब भारतीय टीम की नजर अगले मुकाबले पर है, जहां वह जीत की लय बरकरार रखते हुए World Cup अभियान को और मजबूत करना चाहेगी। Source: FIH, Hockey India जय राष्ट्र न्यूज़

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इंडोनेशिया में फिर कांपी धरती, 5.7 तीव्रता के भूकंप से दहशत; कुछ दिन पहले आए 7.7 के झटकों के बाद फिर आफ्टरशॉक

जकार्ता: इंडोनेशिया में सोमवार को एक बार फिर भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। 5.7 तीव्रता का भूकंप देश के पूर्वी हिस्से में एंडे के उत्तर-उत्तर-पश्चिम में दर्ज किया गया। यह झटका उस शक्तिशाली 7.7 तीव्रता के भूकंप के कुछ ही दिन बाद आया है, जिसने पूर्वी इंडोनेशिया में भारी तबाही मचाई थी। लगातार महसूस हो रहे हैं भूकंप के झटके 15 अगस्त को पूर्वी इंडोनेशिया में आए 7.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद क्षेत्र में लगातार आफ्टरशॉक्स दर्ज किए जा रहे हैं। Reuters के अनुसार सोमवार तक करीब 1,600 आफ्टरशॉक्स रिकॉर्ड किए जा चुके थे, जिनमें से एक झटका 5.6 तीव्रता का भी था। ऐसे में सोमवार का 5.7 तीव्रता का नया भूकंप प्रभावित इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता बढ़ाने वाला है। फिलहाल नई बड़ी तबाही की सूचना नहीं ताजा 5.7 तीव्रता के भूकंप के बाद तत्काल किसी नई बड़ी क्षति या अतिरिक्त मौत की रिपोर्ट सामने नहीं आई है। हालांकि, पहले से प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी होने के कारण प्रशासन और स्थानीय लोग अतिरिक्त झटकों को लेकर सतर्क हैं। 7.7 तीव्रता के भूकंप में भारी नुकसान 15 अगस्त को आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने पूर्वी इंडोनेशिया के East Nusa Tenggara क्षेत्र को बुरी तरह प्रभावित किया था। भूकंप के कारण घरों और अन्य इमारतों को नुकसान पहुंचा, भूस्खलन हुए और कई सड़कें बाधित हो गईं। Reuters के मुताबिक, इस आपदा में कम से कम 53 लोगों की मौत और 130 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। हजारों लोग अब भी राहत शिविरों में भूकंप प्रभावित इलाकों में हजारों लोग अपने घरों से बाहर रहने को मजबूर हैं। कई परिवार स्कूलों, सरकारी इमारतों और अस्थायी शिविरों में शरण लिए हुए हैं। लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण लोग क्षतिग्रस्त घरों में वापस जाने से भी डर रहे हैं। राहत एजेंसियां प्रभावित क्षेत्रों तक जरूरी सामान और चिकित्सा सहायता पहुंचाने में जुटी हैं। भूकंप के बाद भी खतरा बरकरार इंडोनेशिया Pacific Ring of Fire पर स्थित है, जिसके कारण यहां भूकंप और ज्वालामुखीय गतिविधियां सामान्य हैं। मौजूदा स्थिति में लगातार आफ्टरशॉक्स ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। निष्कर्ष इंडोनेशिया में 5.7 तीव्रता का नया भूकंप ऐसे समय आया है जब देश अभी 7.7 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप से उबर रहा है। फिलहाल नए झटके से किसी बड़ी अतिरिक्त क्षति की सूचना नहीं है, लेकिन लगातार आफ्टरशॉक्स के कारण प्रभावित इलाकों में दहशत और सावधानी दोनों बनी हुई हैं। Source: Reuters, The Times of India, LiveMint जय राष्ट्र न्यूज़

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तारिक रहमान की भारत यात्रा पर बांग्लादेश की शर्त, शेख हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर ढाका का दबाव

नई दिल्ली/ढाका: भारत और बांग्लादेश के बीच प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक से पहले दोनों देशों के रिश्तों में नया तनाव सामने आया है। बांग्लादेश ने प्रधानमंत्री तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा के लिए अनुकूल राजनीतिक माहौल बनाने की जरूरत बताई है और इसी संदर्भ में भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग दोहराई है। ढाका ने क्या कहा? बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता AKM शाहिदुल करीम ने कहा कि भारत और बांग्लादेश के अधिकारी पिछले कई सप्ताह से तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा को लेकर संपर्क में हैं। हालांकि, ढाका का कहना है कि यात्रा के लिए एक “अनुकूल माहौल” तैयार किया जाना जरूरी है। बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना के प्रत्यर्पण संबंधी अपने अनुरोध पर जल्द कार्रवाई करने को कहा है। इसके अलावा ढाका ने भारत में मौजूद अन्य कथित फरार आरोपियों को भी सौंपने की मांग की है। शेख हसीना का मुद्दा क्यों बना अहम? शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में हुए बड़े राजनीतिक उथल-पुथल के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद बांग्लादेश की नई सरकार ने उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू की और भारत से उनके प्रत्यर्पण की मांग की। भारत को बांग्लादेश की ओर से प्रत्यर्पण अनुरोध मिल चुका है और भारतीय पक्ष ने कहा है कि मामले की कानूनी प्रक्रियाओं के तहत समीक्षा की जा रही है। तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा तारिक रहमान की भारत यात्रा अभी अंतिम रूप से तय नहीं हुई है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच संभावित दौरे को लेकर बातचीत चल रही है और यह यात्रा भारत-बांग्लादेश संबंधों को सामान्य बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकती है। इस दौरे में शेख हसीना के प्रत्यर्पण के अलावा द्विपक्षीय व्यापार, सीमा प्रबंधन और जल बंटवारे जैसे मुद्दे भी चर्चा में आ सकते हैं। भारत-बांग्लादेश रिश्तों पर असर शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में सबसे संवेदनशील विषयों में से एक बन चुका है। ढाका लगातार उनके प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है, जबकि भारत इस मामले को अपनी कानूनी प्रक्रिया के अनुसार देख रहा है। तारिक रहमान की संभावित यात्रा को दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ाने के अवसर के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन प्रत्यर्पण की मांग ने इस यात्रा को राजनयिक रूप से और संवेदनशील बना दिया है। निष्कर्ष बांग्लादेश ने तारिक रहमान की संभावित भारत यात्रा से पहले शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे को प्रमुखता से उठा दिया है। ढाका चाहता है कि नई दिल्ली उसके प्रत्यर्पण अनुरोध पर तेजी से कार्रवाई करे और यात्रा के लिए अनुकूल माहौल तैयार हो। अब नजर भारत की प्रतिक्रिया और दोनों देशों के बीच आगामी राजनयिक बातचीत पर है। Source: Reuters, NDTV, Hindustan Times, Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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