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Women’s Asia Cup Final में Mohsin Naqvi होंगे Chief Guest, Trophy Presentation को लेकर फिर बढ़ी चर्चा

दुबई, 7 सितंबर 2026: Women’s Asia Cup 2026 के final से पहले trophy presentation को लेकर चर्चा तेज हो गई है। Reports के मुताबिक Asian Cricket Council (ACC) President और Pakistan Cricket Board Chairman Mohsin Naqvi 13 सितंबर को Dubai में होने वाले tournament final की closing ceremony में chief guest के तौर पर मौजूद रह सकते हैं। 13 सितंबर को खेला जाएगा Final Women’s Asia Cup 2026 का final 13 सितंबर को Dubai में खेला जाएगा। Harmanpreet Kaur की कप्तानी वाली भारतीय टीम group stage में शानदार प्रदर्शन करते हुए semifinal में पहुंच चुकी है। भारत ने Thailand, Hong Kong और Pakistan के खिलाफ अपने तीनों group matches जीते और Group A में unbeaten रहते हुए knockout stage में जगह बनाई। India अभी Final में नहीं पहुंचा इस खबर में यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Team India ने अभी final के लिए qualification हासिल नहीं किया है। भारत को पहले 10 सितंबर को semifinal मुकाबला खेलना है। Final और संभावित trophy presentation का सवाल भारत के semifinal जीतने की स्थिति में ही सामने आएगा। Mohsin Naqvi की मौजूदगी से क्यों बढ़ी चर्चा? Mohsin Naqvi ACC President होने के साथ PCB Chairman और Pakistan के Interior Minister भी हैं। अगर India final में पहुंचकर Asia Cup जीतता है और Naqvi trophy presentation में शामिल होते हैं, तो पिछले साल जैसा विवाद दोबारा खड़ा होने की आशंका जताई जा रही है। 2025 Men’s Asia Cup में क्या हुआ था? पिछले साल Men’s Asia Cup final में India ने Pakistan को हराकर title जीता था, लेकिन Indian team ने Mohsin Naqvi के हाथों trophy स्वीकार नहीं की थी। इसके बाद presentation ceremony लंबी देर तक रुकी रही और भारतीय खिलाड़ियों ने podium पर बिना trophy के जीत का जश्न मनाया। यही वजह है कि Women’s Asia Cup final से पहले एक बार फिर trophy presentation चर्चा का विषय बन गई है। BCCI ने अभी साफ नहीं किया अपना रुख फिलहाल BCCI या Indian women’s team की ओर से कोई official statement नहीं आया है कि अगर India tournament जीतता है और Naqvi presentation ceremony में trophy देने आते हैं, तो टीम का क्या रुख होगा। इसलिए अभी किसी नए “trophy refusal” को तय मानना सही नहीं होगा। Pakistan को बड़े अंतर से हरा चुका है India इस tournament के group stage में India और Pakistan पहले ही आमने-सामने हो चुके हैं। India ने Pakistan को सिर्फ 55 runs पर all out करने के बाद लक्ष्य 8.4 overs में हासिल कर सात विकेट से बड़ी जीत दर्ज की थी। फिलहाल Focus Semifinal पर Trophy presentation को लेकर चर्चाएं जरूर तेज हैं, लेकिन Team India का पहला लक्ष्य semifinal जीतकर final में जगह बनाना होगा। Mohsin Naqvi की संभावित मौजूदगी से जुड़ा ceremonial सवाल तभी वास्तविक रूप लेगा जब India 13 सितंबर के title clash में पहुंचे और जीत दर्ज करे। source – Times of India / Hindustan Times / India Todayजय राष्ट्र न्यूज़

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Private-Sector Push पर ISRO की सफाई—‘हमारी भूमिका कम नहीं होगी, यह Privatisation नहीं Ecosystem Expansion है’

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: भारत के space sector में private companies की बढ़ती भागीदारी को लेकर कर्मचारियों की चिंताओं के बीच Indian Space Research Organisation (ISRO) ने स्पष्ट किया है कि agency का निजीकरण करने या उसकी भूमिका कम करने की कोई योजना नहीं है। ISRO ने कहा कि space-sector reforms का उद्देश्य एक बड़ा और ज्यादा competitive national space ecosystem तैयार करना है, जिसमें private industry ISRO की capabilities को complement करेगी। ‘ISRO का न तो Privatisation होगा, न Importance कम होगी’ ISRO ने अपने official statement में कहा कि ऐसी अटकलें पूरी तरह गलत हैं कि agency को privatise किया जा रहा है या उसकी जिम्मेदारियां सीमित की जाएंगी। Agency ने स्पष्ट किया कि वह advanced space research, technology development, national और strategic missions, space science, exploration तथा critical frontier capabilities में भारत की प्रमुख संस्था बनी रहेगी। Private Sector का काम ISRO को Replace करना नहीं ISRO के मुताबिक private-sector participation का उद्देश्य उसकी भूमिका कम करना नहीं, बल्कि mature technologies को industry के जरिए बड़े पैमाने पर manufacture और commercialise करना है। इससे ISRO के वैज्ञानिक और technical teams को next-generation technologies, advanced research और complex national missions पर ज्यादा ध्यान देने का अवसर मिलेगा। ‘Ecosystem Expansion and Capability Multiplication’ ISRO ने साफ कहा कि reforms को privatisation नहीं, बल्कि ecosystem expansion और capability multiplication के रूप में देखा जाना चाहिए। 2020 से शुरू हुए space-sector reforms और Indian Space Policy 2023 के तहत startups, private industry और academia को launch vehicles, satellites, propulsion, communication और space applications जैसे क्षेत्रों में ज्यादा भागीदारी दी जा रही है। कर्मचारियों के Letter के बाद आई सफाई यह clarification तब आया जब ISRO के विभिन्न centres से जुड़े नौ employee associations ने Chairman V. Narayanan को पत्र लिखकर private-sector shift पर written clarity मांगी थी। कर्मचारियों ने सवाल उठाया था कि अगर rockets और satellites की mature manufacturing private industry को transfer होती है, तो भविष्य में ISRO की core role, recruitment और workforce पर क्या असर पड़ेगा। IN-SPACe Chief ने भी दिया भरोसा IN-SPACe Chairman Pawan Goenka ने भी कर्मचारियों की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ISRO भारत के space sector का “bedrock” बना रहेगा। उन्होंने कहा कि ISRO frontier research, next-generation missions, strategic capabilities और advanced technology development में central role निभाता रहेगा, जबकि private industry mature systems की manufacturing और scaling में बड़ी भूमिका निभाएगी। 2030 तक 50 Launches सालाना का लक्ष्य Pawan Goenka के मुताबिक भारत का लक्ष्य 2030 तक सालाना 50 space launches करने का है। इतने बड़े scale को सिर्फ एक organisation के जरिए हासिल करना मुश्किल होगा, इसलिए government agencies और private companies दोनों को मिलकर काम करना होगा। Gaganyaan और Bharatiya Antariksh Station पर रहेगा ISRO का Focus ISRO का कहना है कि उसका focus आने वाले वर्षों में human spaceflight, next-generation launch systems, deep-space और planetary missions जैसी advanced capabilities पर और मजबूत होगा। इनमें Gaganyaan, 2035 तक प्रस्तावित Bharatiya Antariksh Station, 2040 तक Indian crewed Moon mission और sustained lunar तथा planetary exploration जैसे बड़े programmes शामिल हैं। Critical Space Infrastructure सरकार के Control में रहेगा ISRO ने यह भी स्पष्ट किया कि strategic और nationally critical space infrastructure का ownership और control सरकार के पास ही रहेगा। Private companies को जहां उपयुक्त होगा वहां operations और services में भागीदारी दी जाएगी, लेकिन national security और safety requirements लागू रहेंगी। 450 से ज्यादा Space Startups ISRO के मुताबिक 2020 में भारत में केवल कुछ ही space startups थे, लेकिन अब इनकी संख्या 450 से ज्यादा हो चुकी है। ये कंपनियां launch vehicles, satellites, propulsion, Earth observation और communication जैसे क्षेत्रों में काम कर रही हैं। ISRO का संदेश साफ है कि आने वाले वर्षों में private sector की भूमिका बढ़ेगी, लेकिन इसका मतलब agency को छोटा करना नहीं है। नई व्यवस्था में ISRO advanced science और frontier missions को lead करेगा, जबकि industry mature technologies को बड़े scale पर आगे बढ़ाएगी। source – ISRO / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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Hospitals में Syringes के भारी Margins पर Maharashtra FDA सख्त, 747% तक का अंतर मिला; Price Control का Proposal

मुंबई, 7 सितंबर 2026: महाराष्ट्र Food and Drug Administration (FDA) ने hospitals में इस्तेमाल होने वाली syringes, IV sets, nebuliser masks और दूसरे medical consumables की कीमतों में भारी अंतर को लेकर चिंता जताई है। FDA Commissioner Tukaram Mundhe ने बताया कि विभाग की जांच में कई products की hospital purchase price और Maximum Retail Price (MRP) के बीच सैकड़ों से लेकर हजारों प्रतिशत तक का अंतर मिला है। ₹6.75 की Syringe, MRP ₹57.20 FDA की study में 10 ml Lifelong Meditech syringe की purchase price ₹6.75 पाई गई, जबकि उस पर MRP ₹57.20 दर्ज थी। यानी purchase price और MRP के बीच करीब 747% का अंतर था। IV Set में 2,841% तक Margin एक Medifusion IV set की खरीद कीमत ₹11.05 बताई गई, जबकि उसका MRP ₹325 था। FDA Commissioner के मुताबिक यह करीब 2,841% का margin बनता है। इसी तरह एक autofusion set की purchase price ₹70 और MRP ₹393 मिली, जो लगभग 461% का अंतर है। Oxygen और Nebuliser Masks में भी बड़ा अंतर जांच में nebuliser और oxygen masks की purchase price करीब ₹40–₹45 पाई गई, जबकि उनकी MRP ₹650 से ₹715 तक थी। इस हिसाब से price gap लगभग 1,300% से 1,600% तक पहुंच रहा था। NPPA को भेजा Price Regulation Proposal Maharashtra FDA ने इस समस्या को लेकर National Pharmaceutical Pricing Authority (NPPA) को policy proposal भेजा है। FDA चाहता है कि hospitals में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख devices और consumables को Drug Price Control Order, 2013 की Section 4 के तहत price regulation के दायरे में लाया जाए। Affordable Healthcare पर FDA का जोर Tukaram Mundhe ने कहा कि medicines और medical consumables की affordability public health का बड़ा मुद्दा है। उनके मुताबिक कई essential products ऐसे हैं जिन पर केवल MRP declaration की requirement है, लेकिन effective price control नहीं है। इससे patient और hospital के बीच information asymmetry पैदा होती है। Pharma Sector में पहले से तेज कार्रवाई FDA ने पिछले तीन महीनों में pharmaceutical manufacturers, blood centres, storage facilities और laboratories की 2,485 inspections की हैं। इनमें 230 establishments के licences suspend और 38 licences cancel किए गए। इसके अलावा medical shops और pharmacies की 11,780 inspections हुईं, जिनमें 2,075 licences suspend और 394 cancel किए गए। अभी Final Price Cap नहीं Patients के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि syringes या दूसरे hospital consumables पर अभी कोई नया final price cap लागू नहीं हुआ है। FDA ने फिलहाल NPPA के सामने regulatory proposal रखा है। आगे price control लागू होगा या नहीं, इसका फैसला केंद्रीय pricing authority की प्रक्रिया के बाद होगा। source – The Indian Express / Maharashtra FDAजय राष्ट्र न्यूज़

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22 साल बाद Shaurya Chakra लौटाने को तैयार शहीद की मां, सरकार पर वादे पूरे न करने का आरोप

लखनऊ, 7 सितंबर 2026: मणिपुर में आतंकवादियों से मुकाबला करते हुए शहीद हुए Shaurya Chakra विजेता पूर्व Assistant Commandant Vivek Saxena की 80 वर्षीय मां सावित्री सक्सेना ने बेटे को मिले पदक और सम्मान राशि सरकार को वापस करने की पेशकश की है। परिवार का आरोप है कि शहादत के 22 साल बाद भी जमीन और memorial park से जुड़े सरकारी आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं। 2003 में मणिपुर में शहीद हुए थे Vivek Saxena विवेक सक्सेना 8 जनवरी 2003 को मणिपुर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए थे। उनकी वीरता के लिए उन्हें बाद में Shaurya Chakra और President’s Police Medal से सम्मानित किया गया। परिवार का दावा—जमीन और Memorial Park का था वादा विवेक के बड़े भाई रंजीत सक्सेना के मुताबिक शहादत के बाद सरकार ने परिवार को rural quota के तहत जमीन देने और विवेक की स्मृति में memorial park विकसित करने का आश्वासन दिया था। परिवार का कहना है कि दो दशक से ज्यादा समय बीतने के बावजूद ये वादे पूरे नहीं हुए। 2016 में शुरू हुई थी कार्रवाई परिवार के अनुसार 2016 में तत्कालीन Lucknow District Magistrate Raj Shekhar ने मामले का संज्ञान लिया था। उन्होंने संबंधित विभागों को आवेदन पर कार्रवाई करने और Additional District Magistrate को जांच कर जमीन आवंटन तथा memorial की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के निर्देश दिए थे। Domicile को लेकर अटक गया मामला रंजीत सक्सेना का आरोप है कि जमीन आवंटन की प्रक्रिया के दौरान परिवार से Uttar Pradesh का domicile साबित करने को कहा गया। परिवार ने जरूरी affidavit और documents जमा किए, लेकिन इसके बाद भी प्रक्रिया पूरी नहीं हुई। परिवार ने सवाल उठाया कि जब राज्य सरकार पहले उसी Lucknow address पर आर्थिक सहायता दे चुकी थी, तो बाद में domicile पर आपत्ति क्यों उठाई गई। Shaurya Chakra की सम्मान राशि के लिए भी लंबा इंतजार परिवार ने यह भी आरोप लगाया कि Shaurya Chakra से जुड़ी monetary award राशि पाने के लिए उन्हें 2024 तक इंतजार करना पड़ा। रंजीत का कहना है कि file लंबे समय तक अलग-अलग सरकारी offices और desks के बीच घूमती रही। 80 वर्षीय मां बोलीं—अब दफ्तरों के चक्कर लगाने की ताकत नहीं सावित्री सक्सेना ने कहा कि 80 वर्ष की उम्र में अब उनमें बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की ताकत नहीं बची है। उन्होंने कहा कि यदि बेटे की शहादत के इतने वर्षों बाद भी परिवार को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़े, तो सरकार Shaurya Chakra, दूसरे medals और सम्मान राशि वापस ले सकती है। President और मुख्यमंत्री से मांगा मिलने का समय शहीद की मां ने अब President और Uttar Pradesh Chief Minister से मिलने का समय मांगा है। परिवार चाहता है कि लंबित जमीन और memorial से जुड़े मामलों पर अंतिम निर्णय लिया जाए। SDM ने एक सप्ताह में समाधान के दिए निर्देश मामला grievance redressal programme में उठाए जाने के बाद Sub-Divisional Magistrate ने संबंधित अधिकारियों को शिकायतों की जांच करने और एक सप्ताह के भीतर समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। फिलहाल परिवार की मांगों पर आगे की प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार है। source – India Today / ANIजय राष्ट्र न्यूज़

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Russia-Ukraine शांति प्रयासों में भारत की बड़ी भूमिका क्यों जरूरी—Moscow से Kyiv तक Diplomacy पर नई बहस

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: Russia-Ukraine war को खत्म करने की नई diplomatic कोशिशों के बीच भारत की संभावित भूमिका पर चर्चा तेज हो गई है। हाल के दिनों में प्रधानमंत्री Narendra Modi की Vladimir Putin से बातचीत, विदेश मंत्री S. Jaishankar की Kyiv यात्रा और Moscow तथा Kyiv दोनों के साथ लगातार संपर्क ने यह सवाल फिर सामने ला दिया है कि क्या भारत दोनों पक्षों के बीच meaningful dialogue आगे बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। Moscow और Kyiv दोनों तक भारत की सीधी पहुंच भारत की सबसे बड़ी diplomatic strength यह है कि उसके Russia और Ukraine दोनों के साथ working relations बने हुए हैं। Jaishankar ने हाल में स्पष्ट कहा कि भारत दोनों पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है और ऐसे ideas तलाश रहा है जो conflict को कम करने या अंततः समाप्त करने में मदद कर सकें। Kyiv में उन्होंने President Volodymyr Zelenskyy से मुलाकात कर भारत की ओर से किसी भी उपयोगी भूमिका के लिए तैयार रहने की बात भी कही। Modi ने Putin से कहा—युद्ध को खत्म करने की दिशा में बढ़ना होगा 31 अगस्त को Bishkek में SCO summit के दौरान PM Narendra Modi ने Russian President Vladimir Putin से कहा कि लगातार युद्ध मानवता को पीछे ले जाता है और दुनिया को hostilities खत्म करने की दिशा में बढ़ना चाहिए। Modi ने यह भी दोहराया कि भारत हर credible peace effort का समर्थन करेगा। US ने भी फिर तेज की Peace Diplomacy इस समय भारत अकेला देश नहीं है जो diplomatic रास्ता तलाश रहा है। अमेरिकी envoys Steve Witkoff और Jared Kushner ने Moscow में Putin से बातचीत करने के बाद Kyiv जाकर Zelenskyy से मुलाकात की है। US negotiators ने जल्द नई trilateral talks की उम्मीद जताई है, हालांकि अभी तक कोई निर्णायक breakthrough नहीं हुआ है। ऐसे में भारत क्यों हो सकता है अहम? भारत पश्चिमी देशों की तरह Ukraine का military ally नहीं है और Russia के खिलाफ sanctions regime का हिस्सा भी नहीं है। साथ ही New Delhi ने Ukraine की territorial integrity और dialogue-diplomacy की जरूरत पर लगातार जोर दिया है। इसी strategic balance के कारण भारत उन चुनिंदा बड़े देशों में है जो Moscow और Kyiv—दोनों से उच्च स्तर पर बातचीत कर सकता है। सिर्फ Ceasefire नहीं, Confidence-Building Measures भी जरूरी तत्काल comprehensive peace agreement मुश्किल हो सकता है क्योंकि Russia और Ukraine के बीच territory, Donbas और security guarantees जैसे मूल मुद्दों पर अभी बड़ा अंतर है। ऐसे में शुरुआती कदम के तौर पर civilian infrastructure, energy facilities और Black Sea commercial shipping को हमलों से बचाने जैसे confidence-building measures आगे बढ़ाए जा सकते हैं। आज के Indian Express editorial ने भी भारत से ऐसे practical measures के लिए अधिक सक्रिय प्रयास करने की वकालत की है। आगामी BRICS Summit बन सकता है बड़ा मंच भारत के सामने आगामी BRICS summit भी एक diplomatic opportunity हो सकता है। Russia के President Vladimir Putin और China के President Xi Jinping के summit में शामिल होने की उम्मीद है। ऐसे में New Delhi ceasefire और confidence-building measures पर broader international consensus तैयार करने की कोशिश कर सकता है। भारत के सामने चुनौतियां भी कम नहीं भारत की भूमिका आसान नहीं होगी। Russia और Ukraine अभी भी कई core issues पर दूर हैं। Russia अपनी शर्तों पर settlement चाहता है, जबकि Kyiv territory और security guarantees को लेकर समझौता करने को तैयार नहीं दिखता। दूसरी ओर भारत की Russian oil purchases और Moscow के साथ पुराने strategic संबंधों को लेकर पश्चिम और Ukraine में समय-समय पर सवाल भी उठते रहे हैं। Mediator नहीं, Facilitator की भूमिका ज्यादा व्यावहारिक फिलहाल भारत को औपचारिक mediator कहना जल्दबाजी होगी। न Russia और न Ukraine ने भारत को formal mediator नियुक्त किया है। लेकिन दोनों से संवाद बनाए रखने वाला एक facilitator बनकर New Delhi proposals, back-channel communication और confidence-building initiatives को आगे बढ़ाने में योगदान दे सकता है। यह भूमिका भारत की मौजूदा diplomatic position के ज्यादा करीब है। युद्ध जितना लंबा, दुनिया पर उतना ज्यादा असर Russia-Ukraine conflict अब पांचवें वर्ष में है। इसका असर केवल battlefield तक सीमित नहीं है; food, fuel, fertiliser और global supply chains पर भी इसका दबाव पड़ा है। Jaishankar ने हाल में कहा कि ऐसे युद्धों में कोई वास्तविक विजेता नहीं होता और हर अतिरिक्त दिन अधिक मौत, तबाही और आर्थिक नुकसान लेकर आता है। भारत के लिए यही वह समय है जब Moscow और Kyiv दोनों तक अपनी diplomatic access का उपयोग केवल संदेश पहुंचाने के बजाय ठोस confidence-building proposals आगे बढ़ाने में किया जा सकता है। हालांकि अंतिम peace settlement रूस और यूक्रेन को ही स्वीकार करना होगा, New Delhi बातचीत की राह आसान करने वाले देशों में महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। source – The Indian Express / Reutersजय राष्ट्र न्यूज़

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सत्य निकेतन हादसे पर NSUI का गंभीर आरोप—“जब छात्रों की जान बचानी थी, तब प्रशासन कहां था?”

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र PG की पांच मंजिला इमारत ढहने के बाद अब प्रशासन की भूमिका को लेकर राजनीतिक और छात्र संगठनों के सवाल तेज हो गए हैं। NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने rescue response पर गंभीर सवाल उठाते हुए पूछा कि जब छात्र मलबे के नीचे जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे थे, तब पुलिस, fire brigade और प्रशासन कहां था। NSUI ने लगाया Rescue में देरी का आरोप विनोद जाखड़ ने दावा किया कि घटना की सूचना मिलते ही NSUI के कार्यकर्ता मौके पर पहुंच गए थे और उनका एक साथी भी मलबे में फंसा हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि शुरुआती समय में मौके पर पर्याप्त police, fire brigade, medical facilities और heavy rescue equipment मौजूद नहीं थे। जाखड़ ने सवाल उठाया कि इतनी गंभीर घटना में disaster preparedness क्यों कमजोर दिखाई दी और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। Official Timeline NSUI के दावे से अलग हालांकि Delhi Fire Services से जुड़ी reported timeline NSUI के दो घंटे की देरी वाले आरोप से अलग तस्वीर पेश करती है। रिपोर्ट के मुताबिक building collapse की सूचना करीब 1:33 PM पर मिली और rescue teams लगभग 1:50 PM तक घटनास्थल पर पहुंच गई थीं। इसके बाद Delhi Fire Service, Delhi Police, NDRF, DDMA, CATS और अन्य agencies ने संयुक्त rescue operation शुरू किया। इसलिए rescue में दो घंटे की देरी का NSUI का दावा अभी independently established fact नहीं है। Local Students ने भी शुरू किया था Rescue प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय छात्रों के मुताबिक building गिरने के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने खुद मलबे में फंसे लोगों की मदद शुरू कर दी थी। Students और residents ने human chain बनाई और official rescue teams के पहुंचने से पहले शुरुआती मदद की कोशिश की। हादसे में अब तक 7 लोगों की मौत सत्य निकेतन हादसे में सोमवार तक मृतकों की संख्या बढ़कर 7 हो गई है, जबकि 12 लोगों को मलबे से निकाला गया है। NDRF ने कहा है कि मलबे में फंसे लोगों की सटीक संख्या अभी स्पष्ट नहीं है और search operation जारी है। पांच MCD अधिकारी Suspend हादसे के बाद Municipal Corporation of Delhi ने South Zone के Deputy Commissioner समेत पांच अधिकारियों को suspend कर दिया है। इनमें building department से जुड़े engineering officials भी शामिल हैं। मामले में disciplinary proceedings शुरू की गई हैं। Building Owner Bhiwadi से पकड़ा गया Delhi Police ने collapsed building के owner Hariram Gupta को Rajasthan के Bhiwadi से पकड़ लिया है। पुलिस ने उसके और अन्य लोगों के खिलाफ culpable homicide और negligence से संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। हादसे की magisterial inquiry भी आदेशित की गई है। NSUI और ABVP आमने-सामने घटनास्थल पर NSUI और ABVP कार्यकर्ताओं के बीच बहस भी हुई। NSUI ने administration और building safety enforcement पर सवाल उठाए, जबकि ABVP ने MCD Commissioner के इस्तीफे और छात्र PG buildings के safety audit की मांग की। Student PG Safety पर बड़े सवाल सत्य निकेतन Delhi University South Campus के पास स्थित बड़ा student accommodation hub है। हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि पुराने और heavily modified PG buildings की structural safety की नियमित जांच क्यों नहीं हुई। Delhi government ने अब public-use buildings और student accommodations के लिए regular structural audits और safety certification policy लाने की बात कही है। source – ANI / The Economic Times / Times of Indiaजय राष्ट्र न्यूज़

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लोनी विधायक नंदकिशोर गुर्जर का कथित आपत्तिजनक भाषा वाला वीडियो वायरल, विपक्षी नेताओं से विवाद के बाद गरमाई राजनीति

गाजियाबाद, 7 सितंबर 2026: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले की लोनी विधानसभा सीट से BJP विधायक नंदकिशोर गुर्जर का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में वह विपक्षी दलों के कुछ नेताओं से तीखी बहस करते और कथित तौर पर अभद्र तथा धमकी भरी भाषा का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद लोनी का राजनीतिक माहौल गरमा गया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शुरू हुआ विवाद मामला शनिवार, 5 सितंबर की शाम का बताया जा रहा है। लोनी के एक रेस्टोरेंट में विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने इलाके की समस्याओं और कानून-व्यवस्था को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की थी। इसमें पूर्व विधायक, पूर्व नगरपालिका चेयरमैन और समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं समेत कई लोग मौजूद थे। मौके पर पहुंचे नंदकिशोर गुर्जर रिपोर्ट के मुताबिक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नंदकिशोर गुर्जर अपने समर्थकों और सुरक्षाकर्मियों के साथ मौके पर पहुंचे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ गया। वायरल वीडियो में विधायक विपक्षी नेताओं से नाराजगी जताते और कथित आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल करते दिखाई दे रहे हैं। धक्का-मुक्की की भी खबर प्रेस कॉन्फ्रेंस समाप्त होने के बाद रेस्टोरेंट के बाहर विधायक समर्थकों और दूसरे पक्ष के बीच कहासुनी बढ़ गई। कुछ रिपोर्टों में धक्का-मुक्की और हाथापाई होने की भी बात कही गई है। हालात बिगड़ते देख Loni Border Police Station से भारी पुलिस बल मौके पर पहुंचा और दोनों पक्षों को अलग कर स्थिति शांत कराई। ‘लोनी को बदनाम करने’ का आरोप वीडियो में विधायक कथित तौर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल नेताओं पर लोनी को बदनाम करने का आरोप लगाते दिखाई देते हैं। पुलिसकर्मी भी उन्हें शांत करने की कोशिश करते नजर आते हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर मौजूद अलग-अलग clips पूरे घटनाक्रम का पूर्ण संदर्भ नहीं देते, इसलिए वायरल वीडियो से जुड़े हर दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो वायरल होने के बाद राजनीतिक विवाद वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी नेताओं ने विधायक की भाषा और व्यवहार पर सवाल उठाए हैं। मामले ने एक बार फिर सार्वजनिक जीवन में जनप्रतिनिधियों की भाषा और राजनीतिक मर्यादा को लेकर बहस तेज कर दी है। विधायक का विस्तृत पक्ष नहीं आया सामने Navbharat Times की रिपोर्ट के मुताबिक विधायक नंदकिशोर गुर्जर से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई थी, लेकिन उस समय उनसे संपर्क नहीं हो पाया। इस वायरल वीडियो पर उनकी ओर से कोई विस्तृत सार्वजनिक स्पष्टीकरण सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है। लोनी में पहले से तनावपूर्ण माहौल लोनी में पिछले कुछ दिनों से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विवादों के कारण तनाव बना हुआ है। पुलिस कई घटनाओं और वायरल वीडियो से जुड़े मामलों की जांच कर रही है और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई गई है। source – Navbharat Times / Amar Ujalaजय राष्ट्र न्यूज़

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महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर आधी रात साकेत थाने पहुँचीं Huda Zariwala, Delhi Police से मांगा जवाब

नई दिल्ली: साकेत पुलिस स्टेशन में दो महिला पत्रकारों शाहीन खान और नफीसा खान के साथ कथित मारपीट का मामला लगातार तूल पकड़ रहा है। घटना के बाद देर रात पत्रकार और मीडिया से जुड़े कई लोग Saket Police Station पहुंचे। इनमें अंतरराष्ट्रीय मीडिया अनुभव रखने वाली पत्रकार Huda Zariwala भी शामिल थीं, जिन्होंने पुलिस अधिकारियों से मामले में जवाबदेही और कार्रवाई की मांग की। एक रिपोर्ट में उन्हें Saket Police Station में गुरुवार रात मौजूद बताया गया है, जबकि सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में वह पुलिस से सवाल करती नजर आती हैं। क्या है पूरा मामला? 4PM News Network से जुड़ी पत्रकार शाहीन खान और नफीसा खान 3 सितंबर को Saket स्थित Max Hospital में एक कार्यक्रम की coverage करने पहुंची थीं। कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah और दिल्ली की मुख्यमंत्री Rekha Gupta भी मौजूद थे। दोनों पत्रकारों का आरोप है कि उन्हें वहां से हिरासत में लेकर Saket Police Station ले जाया गया और थाने के अंदर उनके साथ मारपीट की गई। धार्मिक पहचान को लेकर भी लगाए गंभीर आरोप दोनों पत्रकारों ने आरोप लगाया कि थाने में उनका नाम और धार्मिक पहचान पूछी गई और उसके बाद उनके साथ व्यवहार और ज्यादा कठोर हो गया। पत्रकारों ने शरीर पर चोट के निशान दिखाते हुए वीडियो भी जारी किए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। आधी रात तक जारी रहा विरोध घटना के बाद पत्रकारों और समर्थकों ने Saket Police Station में FIR दर्ज करने की मांग को लेकर overnight protest किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक विरोध देर रात से अगले दिन सुबह तक जारी रहा और कई पत्रकार व सामाजिक कार्यकर्ता थाने पहुंचे। Huda Zariwala की मौजूदगी भी इसी दौरान रिपोर्ट की गई। Huda Zariwala ने पुलिस से किए सवाल सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में Huda Zariwala पुलिस अधिकारियों से पत्रकारों की शिकायत पर FIR और कार्रवाई को लेकर सवाल करती दिखाई दीं। उपलब्ध professional profile के अनुसार वह Dubai-based 99 News HD में news leadership role से जुड़ी हैं और international media experience रखती हैं। Delhi Police ने आरोपों को किया खारिज Delhi Police ने दोनों पत्रकारों के आरोपों को “factually incorrect” और “misleading” बताया है। पुलिस के मुताबिक दोनों महिलाओं ने designated VVIP route के पास scooter खड़ा किया था और बार-बार कहने के बावजूद उसे हटाने से इनकार किया। इसी कारण उन्हें further enquiry के लिए police station ले जाया गया। पुलिस ने मारपीट और धार्मिक आधार पर निशाना बनाने के आरोपों से इनकार किया है। Press Organisations ने मांगी निष्पक्ष जांच Press Club of India, Indian Women’s Press Corps, Delhi Union of Journalists, Press Association और Kerala Union of Working Journalists ने संयुक्त बयान जारी कर मामले की independent और impartial investigation की मांग की। संगठनों ने आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है। CCTV Footage की मांग 4PM News Network की ओर से कहा गया है कि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने लाने के लिए police station और आसपास के CCTV footage को सुरक्षित रखा और सार्वजनिक किया जाना चाहिए। पत्रकारों ने कानूनी रास्ता अपनाने की बात भी कही है। फिलहाल महिला पत्रकारों और Delhi Police के दो अलग-अलग versions सामने हैं। मारपीट और धार्मिक पहचान के आधार पर कथित दुर्व्यवहार के आरोपों की अंतिम पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी। source – The Indian Express / PTI / The New Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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Parandur Airport Project रद्द, अब इन 2 जगहों पर नजर; Chennai के दूसरे Airport के लिए Cheyyur और Manellore Shortlist

चेन्नई, 7 सितंबर 2026: चेन्नई के प्रस्तावित दूसरे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट को लेकर Tamil Nadu सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। Parandur में प्रस्तावित greenfield airport project को रद्द करने के बाद अब सरकार ने नए airport के लिए Cheyyur और Manellore को संभावित विकल्प के रूप में shortlist किया है। इन दोनों locations की feasibility जांचने के लिए Airports Authority of India (AAI) से अध्ययन कराने की प्रक्रिया शुरू की गई है। कहां हैं दोनों प्रस्तावित जगहें? पहली जगह Cheyyur है, जो Chengalpattu district में Chennai से करीब 100 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है। दूसरी जगह Manellore, Gummidipoondi के पास Tiruvallur district में है, जो Chennai से लगभग 50 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम दिशा में स्थित है। TIDCO ने पूरी की Preliminary Study Tamil Nadu Industrial Development Corporation (TIDCO) की टीम दोनों sites का शुरुआती अध्ययन कर चुकी है। अधिकारियों के मुताबिक दोनों locations में बड़े airport infrastructure विकसित करने की संभावनाओं को देखते हुए report तैयार कर AAI को भेजी गई है। AAI करेगी Feasibility Inspection अब Airports Authority of India की technical team दोनों proposed sites का inspection कर सकती है। इसमें land availability, airspace, runway orientation, connectivity, environmental impact और आसपास मौजूद critical infrastructure जैसे factors का अध्ययन किया जाएगा। Final site का फैसला feasibility report के बाद ही होगा। क्यों रद्द हुआ Parandur Airport Project? Tamil Nadu के मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay ने 24 अगस्त को विधानसभा में Parandur airport project को रद्द करने का ऐलान किया था। सरकार ने agricultural land, water bodies, wetlands, displacement और flooding से जुड़ी चिंताओं को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया। Parandur project को पहले लगभग 5,746 acres में विकसित करने की योजना थी और इससे 13 गांव प्रभावित होने वाले थे। स्थानीय किसानों और ग्रामीणों ने वर्षों तक project के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था। Chennai को क्यों चाहिए दूसरा Airport? Chennai में passenger traffic और cargo movement लगातार बढ़ रहा है। Automobile, electronics, manufacturing और logistics industries के विस्तार के कारण आने वाले वर्षों में existing Chennai Airport की capacity पर्याप्त नहीं रहने की आशंका है। इसी वजह से राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि Parandur project रद्द होने के बावजूद दूसरा airport बनाने की योजना जारी रहेगी। Existing Chennai Airport का भी होगा Expansion नई location पर airport तैयार होने में कई साल लग सकते हैं। इस बीच सरकार ने existing Chennai International Airport की capacity बढ़ाने की योजना बनाई है। प्रस्तावित Terminal 5 के जरिए airport की annual passenger handling capacity को आगे चलकर करीब 55 million passengers तक बढ़ाने की योजना है। दोनों नई Locations के सामने भी Challenges Cheyyur और Manellore को shortlist जरूर किया गया है, लेकिन final approval अभी बाकी है। Cheyyur के आसपास Vedanthangal Bird Sanctuary और Kalpakkam Nuclear Power Plant जैसे sensitive locations हैं, जबकि Manellore के मामले में land availability और Sriharikota के airspace से जुड़े technical मुद्दों का अध्ययन जरूरी होगा। Final Location पर अभी फैसला नहीं फिलहाल Cheyyur और Manellore सिर्फ shortlisted options हैं। AAI की feasibility study और आगे की technical एवं environmental clearances के बाद ही तय होगा कि Chennai का दूसरा international airport आखिर कहां बनाया जाएगा। source – Hindustan Times / Navbharat Times / The Indian Expressजय राष्ट्र न्यूज़

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सत्य निकेतन में पांच मंजिला PG इमारत भरभराकर गिरी, 7 की मौत; मलबे में अब भी लोगों की तलाश

नई दिल्ली, 7 सितंबर 2026: दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में छात्रों के PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही पांच मंजिला इमारत के ढहने से बड़ा हादसा हो गया। रविवार दोपहर अचानक पूरी इमारत कुछ ही सेकंड में जमींदोज हो गई। आज तक हादसे में 7 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 11 लोगों को बचाया गया है। राहत एवं बचाव टीमें मलबे में फंसे अन्य लोगों की तलाश कर रही हैं। दोपहर करीब 1:30 बजे हुआ हादसा Delhi Police को 6 सितंबर को दोपहर करीब 1:30 बजे Satya Niketan में building collapse की PCR call मिली थी। सूचना मिलते ही Delhi Police, Delhi Fire Services, NDRF, DDMA और ambulance teams मौके पर पहुंचीं और बड़े स्तर पर rescue operation शुरू किया गया। CCTV में कैद हुआ इमारत गिरने का खौफनाक मंजर हादसे का CCTV footage भी सामने आया है। वीडियो में इमारत से पहले मलबा गिरता दिखाई देता है और कुछ ही सेकंड बाद पूरी building भरभराकर नीचे आ जाती है। पास मौजूद एक दुकानदार खतरा देखकर समय रहते भागता हुआ भी दिखाई देता है। Basement और Ground Floor पर चल रहा था काम पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि लगभग 40 से 50 साल पुरानी इमारत में renovation और basement से जुड़ा काम चल रहा था। अधिकारियों को आशंका है कि structural pillar या walls से छेड़छाड़ के कारण building कमजोर हुई होगी। हादसे के सही कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चलेगा। PG में रहते थे Delhi University के छात्र इस building का इस्तेमाल student PG के रूप में किया जा रहा था। Satya Niketan Delhi University के South Campus के नजदीक है और यहां बड़ी संख्या में छात्र PG और hostels में रहते हैं। हादसे के समय इमारत के अंदर कई छात्रों के मौजूद होने की आशंका जताई गई थी। Building Owner के खिलाफ FIR Delhi Police ने कथित building owner Hariram Bansal और अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। मामला BNS की धारा 105, 290 और 125(a) सहित संबंधित provisions के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस ने मालिक की तलाश के लिए कई teams बनाई हैं और उसके खिलाफ Look Out Circular भी जारी किया गया है। पांच MCD अधिकारी Suspended आज Delhi government ने हादसे के बाद बड़ी administrative कार्रवाई करते हुए MCD के पांच अधिकारियों को suspend कर दिया। इनमें South Zone के Deputy Commissioner और building department से जुड़े engineering officials शामिल हैं। आसपास की unsafe buildings की जांच और demolition की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है। PM Modi ने जताया दुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। PMO ने कहा कि authorities मौके पर राहत और सहायता उपलब्ध करा रही हैं। Rescue Operation जारी NDRF और अन्य agencies मलबा हटाकर search operation चला रही हैं। आसपास की कमजोर इमारतों को भी खाली कराया जा रहा है ताकि किसी और हादसे का खतरा न रहे। हादसे ने Satya Niketan में चल रहे student PGs की building safety और construction norms पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। source – India Today / Aaj Tak / PIBजय राष्ट्र न्यूज़

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