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जय की ‘पसंदीदा’ तृषा को डिप्टी CM कब बनाएंगे? AIADMK नेता का तंज, सियासत गरम

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय को लेकर AIADMK नेता आरबी उदयकुमार की एक टिप्पणी चर्चा में है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर विजय की कथित “पसंदीदा” अभिनेत्री तृषा कृष्णन को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। यह बयान तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। AIADMK नेता ने विजय पर साधा निशाना AIADMK नेता आरबी उदयकुमार ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजय पर निशाना साधते हुए तृषा का नाम लिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि तमिलनाडु को यह देखना बाकी है कि विजय की “प्रिय” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। उनकी टिप्पणी को विजय की राजनीति और उनके निजी जीवन से जुड़े सार्वजनिक चर्चाओं पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। तृषा का नाम लेकर क्यों किया गया तंज? तृषा कृष्णन और विजय दोनों तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे हैं और दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। इसी सार्वजनिक पहचान का इस्तेमाल करते हुए AIADMK नेता ने विजय पर राजनीतिक कटाक्ष किया। हालांकि, तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात किसी आधिकारिक नियुक्ति या प्रस्ताव के रूप में सामने नहीं आई है। यह टिप्पणी राजनीतिक तंज के तौर पर की गई थी। विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सत्ता में आई और विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विजय के सत्ता में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। AIADMK और DMK जैसे पुराने राजनीतिक दल अब TVK सरकार को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। डिप्टी CM का पद अभी खाली मौजूदा विधानसभा व्यवस्था के अनुसार तमिलनाडु में डिप्टी मुख्यमंत्री का पद फिलहाल खाली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विजय सरकार में इस पद पर अभी किसी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हुई है। इसी राजनीतिक स्थिति के बीच AIADMK नेता की तृषा को लेकर की गई टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद AIADMK और TVK के बीच राजनीतिक दूरी और बयानबाजी लगातार चर्चा में है। हाल ही में AIADMK ने विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय सांसद बैठक से भी दूरी बनाई थी। बैठक का मुद्दा लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा था। ऐसे माहौल में AIADMK नेताओं की ओर से विजय पर किए जा रहे राजनीतिक हमले राज्य की बदलती सियासत को दर्शाते हैं। विजय सरकार के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के सामने सरकार चलाने के साथ-साथ विधानसभा में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। 2026 के चुनाव के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और बाद में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी। अब सरकार के सामने प्रशासन, परिसीमन और विपक्ष के साथ राजनीतिक टकराव जैसे कई मुद्दे हैं। निष्कर्ष तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK नेता आरबी उदयकुमार का विजय और तृषा को लेकर किया गया तंज चर्चा में आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि विजय की “पसंदीदा” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है और यह बयान राजनीतिक कटाक्ष के रूप में दिया गया है। Source: NDTV / Navbharat Times / Latest political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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HCL के सह-संस्थापक का बड़ा खुलासा, सिर्फ ₹1.87 लाख और 6 लोगों से शुरू हुआ था भारत का बड़ा टेक सफर

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेक कंपनियों में शामिल HCL की शुरुआत कितने छोटे स्तर से हुई थी, इसका दिलचस्प खुलासा कंपनी के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने किया है। HCL के 50 साल पूरे होने के मौके पर चौधरी ने 1976 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि महज 6 लोगों और ₹1.87 लाख की पूंजी से एक ऐसा सपना शुरू हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर बदल दी। छह लोगों ने छोड़ी नौकरी और शुरू किया अपना सफर अजय चौधरी के मुताबिक, साल 1976 में छह युवा इंजीनियरों ने अपनी नौकरियां छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा, डीएस पुरी और अजय चौधरी शामिल थे। उस समय भारत में आज की तरह स्टार्टअप संस्कृति, वेंचर कैपिटल या टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क नहीं था। इसके बावजूद इन लोगों को भरोसा था कि माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया बदल देंगे। ₹1.87 लाख जुटाकर शुरू किया कारोबार चौधरी ने बताया कि छह संस्थापकों ने मिलकर शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹1.87 लाख जुटाए थे। इस रकम को बचत, उधार और दूसरे निजी संसाधनों से जुटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूंजी को इकट्ठा करने के लिए एक संस्थापक ने अपनी कार तक बेच दी थी। आज के हजारों करोड़ रुपये के टेक कारोबार को देखते हुए यह शुरुआती रकम बेहद छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय इसी सीमित पूंजी से छह लोगों ने भारत में कंप्यूटर बनाने का सपना देखा था। दिल्ली के छोटे से ऑफिस से शुरू हुआ सपना HCL का शुरुआती सफर दिल्ली के गोल्फ लिंक इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे से शुरू हुआ। उस समय कंपनी का नाम Microcomp रखा गया था। इन छह लोगों का लक्ष्य भारत में अपना कंप्यूटर तैयार करना था। लेकिन शुरुआत में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास कंप्यूटर बनाने के लिए आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उस दौर में कंप्यूटर भारत के लिए नई चीज था 1970 के दशक में कंप्यूटर आज की तरह आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। भारत में कंप्यूटर तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और बहुत कम लोगों को इसकी वास्तविक संभावनाओं का अंदाजा था। छह संस्थापकों ने इसी दौर में यह समझ लिया था कि माइक्रोप्रोसेसर आधारित तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका लक्ष्य केवल कंप्यूटर बेचने का नहीं था, बल्कि भारत में कंप्यूटर तकनीक विकसित करने का था। HCL ने आगे चलकर रचा टेक इतिहास छोटी शुरुआत के बाद HCL ने भारतीय कंप्यूटर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, 1978 में HCL ने भारत में स्वदेशी कंप्यूटर HCL 8C तैयार किया, जिसे कंपनी अपने शुरुआती तकनीकी मील के पत्थरों में गिनती है। इसके बाद HCL ने कंप्यूटर शिक्षा, UNIX आधारित सिस्टम, डेटाबेस तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भारत से निकलकर वैश्विक टेक बाजार तक पहुंचा। 50 साल बाद संस्थापक ने याद की शुरुआत HCL के पांच दशक पूरे होने के मौके पर अजय चौधरी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने इस सफर की शुरुआत को केवल एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने की कहानी बताया। उनके मुताबिक, उस समय छह लोगों के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन भविष्य को लेकर विश्वास और कुछ नया करने की इच्छा थी। छोटी पूंजी, बड़ा सपना HCL की शुरुआती कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किसी बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। छह लोगों ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और आगे चलकर भारतीय टेक उद्योग में अपनी पहचान बनाई। अजय चौधरी ने अपनी पोस्ट के अंत में युवाओं को बड़े सपने देखने, जोखिम लेने और लगातार आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। निष्कर्ष ₹1.87 लाख, छह लोग और एक बड़ा सपना—यही HCL की शुरुआती कहानी थी। 1976 में एक छोटे से दिल्ली ऑफिस से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण कहानियों में शामिल है। HCL के सह-संस्थापक अजय चौधरी द्वारा साझा की गई पुरानी यादों ने एक बार फिर दिखाया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत कभी-कभी बेहद छोटे संसाधनों से होती है। छह संस्थापकों का वह प्रयोग आगे चलकर भारतीय तकनीकी क्षेत्र की एक बड़ी कहानी बन गया। Source: India Today / HCL Group जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा, लैंडस्लाइड में 2 लोगों की मौत; कई लोगों के दबे होने की आशंका

मुंबई: मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। बारिश के कारण हुए लैंडस्लाइड में कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। भारी बारिश के बीच हुआ हादसा मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित हुआ है। इसी बीच पहाड़ी/ढलान वाले इलाके में मिट्टी और मलबा खिसकने से यह हादसा हुआ। लैंडस्लाइड के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता मलबे के नीचे फंसे लोगों को लेकर है। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अंधेरा, लगातार बारिश और गीली मिट्टी के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें भी सामने आ सकती हैं। बचावकर्मी सावधानी से मलबा हटाने में जुटे हैं ताकि किसी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। दो लोगों की मौत की खबर प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे में दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि, मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है। प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और बचाव अभियान जारी है। मुंबई में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण हर साल निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और सड़क यातायात प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लैंडस्लाइड की घटना ने बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर मौजूद हैं। मलबा हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी और बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे संभावित लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना और घायलों को अस्पताल पहुंचाना है। बारिश के बीच लोगों से सावधानी बरतने की अपील मुंबई में भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है। खासकर पहाड़ी ढलानों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। लैंडस्लाइड वाले इलाकों में बढ़ी चिंता लगातार बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने से ढलान वाले इलाकों में मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। मुंबई और आसपास के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन के सामने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। निष्कर्ष मुंबई में भारी बारिश के बीच हुए लैंडस्लाइड ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया है। हादसे में दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन की चुनौती अब मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाके में आगे किसी दुर्घटना को रोकने की है। मामले में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। Source: स्थानीय प्रशासन / पुलिस एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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मतदाता सूची से मेरा नाम गायब!” प्रकाश राज का दावा, चुनाव अधिकारियों ने दिया स्पष्टीकरण

बेंगलुरु: अभिनेता और पूर्व लोकसभा उम्मीदवार प्रकाश राज ने दावा किया है कि कर्नाटक में चल रही Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया है। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर इसे लेकर सवाल उठाए और कहा कि वह उन मतदाताओं में शामिल हैं जिनका नाम सूची से हट गया है। हालांकि, चुनाव अधिकारियों की ओर से इस मामले में स्पष्टीकरण सामने आया है। बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन के मुताबिक प्रकाश राज का नाम मतदाता सूची से डिलीट नहीं किया गया है, बल्कि सत्यापन के दौरान उन्हें उनके पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। प्रकाश राज ने वीडियो जारी कर उठाए सवाल प्रकाश राज ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा करते हुए दावा किया कि SIR प्रक्रिया के बाद बेंगलुरु की मतदाता सूची में उनका नाम नहीं दिख रहा है। उन्होंने कहा कि उनका जन्म इसी निर्वाचन क्षेत्र में हुआ, उन्होंने यहीं पढ़ाई की और थिएटर से अपने करियर की शुरुआत भी यहीं की। उन्होंने यह भी बताया कि वह 2019 में बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ चुके हैं। उन्होंने अपने वीडियो में सवाल किया कि मतदाता सूची में अपना नाम वापस दर्ज कराने के लिए उन्हें अब कौन-कौन से दस्तावेज जमा करने होंगे। चुनाव अधिकारियों ने क्या कहा? मामले में बेंगलुरु सेंट्रल सिटी कॉरपोरेशन ने स्पष्ट किया कि प्रकाश राज का नाम डिलीट नहीं किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, SIR के दौरान बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) द्वारा घर-घर सत्यापन किया गया। इस प्रक्रिया में यह पाया गया कि प्रकाश राज अपने पुराने पते पर अब नहीं रह रहे हैं। इसके बाद उनके रिकॉर्ड को “Shifted” के तौर पर चिह्नित किया गया। पुराने पते पर दर्ज था नाम अधिकारियों के मुताबिक 16 जून 2026 को SIR के लिए मतदाता सूची का डेटा फ्रीज किए जाने के समय प्रकाश राज का नाम 163-शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र के एक पते पर दर्ज था। BLO के सत्यापन में उनके पुराने पते पर स्थायी रूप से स्थानांतरित होने की जानकारी मिलने के बाद रिकॉर्ड में बदलाव किया गया। इसका मतलब यह है कि चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के अनुसार मामला मतदाता का नाम पूरी तरह समाप्त करने का नहीं, बल्कि पते में बदलाव/स्थानांतरण की स्थिति दर्ज करने का है। SIR प्रक्रिया के बीच सामने आया मामला कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया चल रही है। इस प्रक्रिया के दौरान BLOs घर-घर जाकर मतदाताओं के विवरण का सत्यापन कर रहे हैं। राज्य में बड़ी संख्या में मतदाताओं को ASDDO—Absent, Shifted, Duplicate, Dead and Others जैसी श्रेणियों में चिह्नित किया गया है। हालांकि किसी मतदाता का ASDDO श्रेणी में होना अपने आप में अंतिम रूप से मतदाता सूची से नाम हटने के बराबर नहीं है। प्रकाश राज ने सरकार पर साधा निशाना प्रकाश राज ने अपने बयान में सरकार पर सीधे तौर पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या सत्ता में बैठे लोग ऐसे नागरिकों को मतदान से रोक सकते हैं जो उन्हें दोबारा सत्ता में नहीं चुनना चाहते। उन्होंने अपने अंदाज में कहा कि वोट देने के अधिकार को प्रभावित करने की कोशिश की जा सकती है, लेकिन लोगों को सत्ता से हटाने से नहीं रोका जा सकता। उनके बयान के बाद यह मामला राजनीतिक बहस में भी आ गया है। 2019 में चुनाव लड़ चुके हैं प्रकाश राज प्रकाश राज का बेंगलुरु से राजनीतिक जुड़ाव पुराना है। उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव में बेंगलुरु सेंट्रल से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा था। इसी राजनीतिक पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उन्होंने मतदाता सूची में अपने नाम की स्थिति पर सवाल उठाया है। SIR की प्रक्रिया अभी जारी कर्नाटक में SIR प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। उपलब्ध कार्यक्रम के अनुसार घर-घर सत्यापन का चरण 17 अगस्त तक चलेगा। इसके बाद 24 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने का अवसर 24 अगस्त से 23 सितंबर तक रहेगा। इसके बाद प्रक्रिया पूरी होने पर 27 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जानी है। नाम को लेकर आगे क्या होगा? प्रकाश राज के मामले में चुनाव अधिकारियों के स्पष्टीकरण के बाद अब मुख्य मुद्दा उनके मतदाता रिकॉर्ड को सही पते पर अपडेट करने का है। यदि किसी मतदाता का नाम या पता गलत तरीके से दर्ज हुआ है, तो SIR की निर्धारित प्रक्रिया के तहत संबंधित व्यक्ति दावा या आपत्ति दर्ज कर सकता है और आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध करा सकता है। निष्कर्ष प्रकाश राज ने दावा किया कि SIR प्रक्रिया के दौरान बेंगलुरु की मतदाता सूची से उनका नाम गायब हो गया, जिसके बाद उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। हालांकि, चुनाव अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उनका नाम डिलीट नहीं किया गया, बल्कि BLO के सत्यापन के बाद पुराने पते से “Shifted” के रूप में दर्ज किया गया है। अब SIR प्रक्रिया के अगले चरण में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रकाश राज का मतदाता रिकॉर्ड किस तरह अपडेट होता है। साथ ही, ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद वह अपने रिकॉर्ड को लेकर दावा या आपत्ति दर्ज करा सकते हैं। Source: Bengaluru Central City Corporation / Election-related reports / Latest reports जय राष्ट्र न्यूज़

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संसद में ‘मंगल मिलन’! PM मोदी समेत NDA नेताओं ने लहराया तिरंगा, एकजुटता का दिया संदेश

नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र के बीच मंगलवार को NDA संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक आयोजित हुई। संसद भवन परिसर में हुई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत NDA के कई सांसद और केंद्रीय मंत्री शामिल हुए। बैठक के दौरान नेताओं ने हाथों में तिरंगा लहराकर देशभक्ति और गठबंधन की एकजुटता का संदेश दिया। PM मोदी का हुआ जोरदार स्वागत ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहुंचने पर NDA सांसदों और केंद्रीय मंत्रियों ने उनका स्वागत किया। इस दौरान ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे देशभक्ति के नारे भी लगाए गए। बैठक का उद्देश्य संसद सत्र के दौरान NDA के घटक दलों और सांसदों के बीच बेहतर समन्वय और एकजुटता बनाए रखना है। नेताओं ने हाथों में थामा तिरंगा बैठक की सबसे खास तस्वीरें उस समय सामने आईं जब PM मोदी और NDA के कई नेताओं ने तिरंगा हाथों में लेकर एक साथ अपनी एकजुटता प्रदर्शित की। तिरंगा लहराते नेताओं के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहे हैं। संसद भवन परिसर में हुआ कार्यक्रम यह ‘मंगल मिलन’ कार्यक्रम संसद भवन परिसर के GMC Balayogi Auditorium में आयोजित किया गया। NDA की ऐसी बैठकें संसद सत्र के दौरान गठबंधन के सांसदों के बीच संवाद और रणनीतिक समन्वय के लिए आयोजित की जाती हैं। NDA की एकजुटता पर जोर बैठक में तिरंगा लेकर एक साथ खड़े होना राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। NDA नेतृत्व की ओर से लगातार गठबंधन की एकजुटता और सरकार के एजेंडे को लेकर सांसदों के बीच समन्वय पर जोर दिया जाता रहा है। संसद के मानसून सत्र में विभिन्न मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। ऐसे समय में NDA सांसदों का यह सामूहिक कार्यक्रम गठबंधन की एकता दिखाने वाला संदेश माना जा रहा है। ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंजा परिसर कार्यक्रम के दौरान देशभक्ति के नारों से माहौल उत्साहपूर्ण नजर आया। रिपोर्टों के अनुसार NDA सांसदों ने ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाए। तिरंगा लहराने की तस्वीरों ने कार्यक्रम को और खास बना दिया और इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गईं। संसद सत्र के बीच राजनीतिक गतिविधियां तेज मानसून सत्र के दौरान संसद में कई मुद्दों पर लगातार हंगामा और राजनीतिक बयानबाजी हो रही है। विपक्ष सरकार से विभिन्न मुद्दों पर जवाब मांग रहा है, जबकि NDA सांसद सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को लेकर अपना पक्ष रख रहे हैं। ऐसे माहौल में NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक को सांसदों के बीच समन्वय और रणनीति मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निष्कर्ष संसद भवन परिसर में हुई NDA की ‘मंगल मिलन’ बैठक में PM नरेंद्र मोदी समेत गठबंधन के कई नेताओं ने तिरंगा लहराकर एकजुटता और देशभक्ति का संदेश दिया। ‘वंदे मातरम्’ और ‘भारत माता की जय’ के नारों के बीच हुए इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। Source: DD News / News On AIR / Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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“शिक्षा शेरनी का दूध है, लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है…” — आचार्य सूर्य सागर जी

आचार्य सूर्य सागर जी का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने शिक्षा और आरक्षण की तुलना करते हुए बेहद आपत्तिजनक और विवादित भाषा का इस्तेमाल किया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इस तरह की भाषा और तुलना पर आपत्ति जताई है। नोट: यह कथन आचार्य सूर्य सागर जी के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इसके मूल वीडियो और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। #AcharyaSuryaSagar#Reservation#Education#SocialJustice#ControversialStatement BreakingNews JayRashtraNews

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₹167 लीटर पेट्रोल! आखिर आम आदमी को कितना और निचोड़ा जाएगा? महंगे प्रीमियम ईंधन पर बढ़ी बहस

नई दिल्ली: देश में पेट्रोल की कीमतों को लेकर बहस के बीच अब ₹167 प्रति लीटर वाले प्रीमियम पेट्रोल की चर्चा तेज हो गई है। यह कीमत सामान्य पेट्रोल की नहीं, बल्कि Indian Oil के XP100 प्रीमियम पेट्रोल की है। 100-octane वाला यह ईंधन चुनिंदा पेट्रोल पंपों और शहरों में उपलब्ध है और सामान्य पेट्रोल की तुलना में काफी महंगा है। ₹167 वाला पेट्रोल आखिर है क्या? ₹167 प्रति लीटर का XP100 एक प्रीमियम हाई-ऑक्टेन पेट्रोल है। इसमें 100 RON ऑक्टेन रेटिंग होती है और इसे खासतौर पर ऐसे वाहनों के लिए तैयार किया गया है जिनके इंजन हाई-ऑक्टेन ईंधन से बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। रिपोर्टों के मुताबिक XP100 को लेकर हाल के दिनों में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। इसकी कीमत करीब ₹167 प्रति लीटर होने के कारण यह सामान्य वाहन चालकों के लिए महंगा विकल्प है। क्या हर पेट्रोल पंप पर ₹167 का पेट्रोल मिलता है? नहीं। यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ₹167 प्रति लीटर सामान्य पेट्रोल की कीमत नहीं है। XP100 एक प्रीमियम ईंधन है और इसकी उपलब्धता सीमित पेट्रोल पंपों पर होती है। इसलिए दिल्ली या किसी अन्य शहर में सामान्य पेट्रोल भरवाने वाले हर ग्राहक को ₹167 प्रति लीटर नहीं देना पड़ता। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर “पेट्रोल ₹167 लीटर” जैसी हेडलाइन देखने पर यह समझना जरूरी है कि बात प्रीमियम XP100 पेट्रोल की हो रही है, न कि सामान्य पेट्रोल की। E20 के बीच XP100 की मांग क्यों बढ़ी? देश में E20 पेट्रोल को लेकर चर्चा के बीच कुछ वाहन मालिक प्रीमियम और ethanol-free ईंधन की ओर भी देख रहे हैं। XP100 को E0 यानी बिना ethanol मिलाए गए पेट्रोल के रूप में पेश किया जाता है। हाल की रिपोर्टों में बताया गया है कि E20 को लेकर वाहन चालकों की चिंताओं के बीच XP100 जैसे प्रीमियम ईंधन की मांग में तेज बढ़ोतरी देखी गई है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर वाहन में XP100 डालना जरूरी है। वाहन निर्माता द्वारा सुझाए गए ईंधन और वाहन की तकनीकी जरूरतों को प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण है। ₹167 का पेट्रोल आम आदमी के लिए क्यों चर्चा में है? प्रीमियम पेट्रोल की इतनी ऊंची कीमत ने ईंधन की कीमतों और आम उपभोक्ता की जेब को लेकर बहस को फिर तेज कर दिया है। अगर कोई व्यक्ति रोजाना वाहन चलाता है और सामान्य पेट्रोल की जगह ₹167 प्रति लीटर वाला ईंधन इस्तेमाल करता है, तो उसका मासिक ईंधन खर्च काफी बढ़ सकता है। उदाहरण के तौर पर 40 लीटर का टैंक भरने पर केवल ईंधन की कीमत करीब ₹6,680 बैठती है। यही कारण है कि यह ईंधन मुख्य रूप से प्रीमियम या हाई-परफॉर्मेंस वाहनों के ग्राहकों के बीच अधिक आकर्षण रखता है। क्या महंगा पेट्रोल ज्यादा माइलेज देगा? महंगा या हाई-ऑक्टेन पेट्रोल अपने आप हर वाहन में ज्यादा माइलेज की गारंटी नहीं देता। 100-octane ईंधन का फायदा मुख्य रूप से उन इंजनों में हो सकता है जिन्हें हाई-ऑक्टेन ईंधन के लिए डिजाइन या ट्यून किया गया है। सामान्य कार या बाइक में इसे इस्तेमाल करने से कीमत के अनुपात में समान फायदा मिले, यह जरूरी नहीं है। इसलिए केवल “महंगा मतलब बेहतर” मानकर XP100 इस्तेमाल करना जरूरी नहीं है। प्रीमियम ईंधन और सामान्य पेट्रोल में बड़ा अंतर सामान्य पेट्रोल और XP100 जैसे प्रीमियम ईंधन में सबसे बड़ा अंतर ऑक्टेन रेटिंग और फ्यूल स्पेसिफिकेशन का है। XP100 की 100 RON रेटिंग इसे हाई-परफॉर्मेंस इंजन के लिए उपयुक्त बनाती है। वहीं सामान्य वाहन आमतौर पर निर्माता द्वारा निर्धारित नियमित पेट्रोल के अनुसार डिजाइन किए जाते हैं। इसलिए ग्राहक को अपने वाहन के मैनुअल में दी गई ईंधन संबंधी सिफारिश को जरूर देखना चाहिए। E20 को लेकर भी जारी है बहस भारत में ethanol blending को बढ़ाने की नीति के बीच E20 पेट्रोल को लेकर वाहन चालकों और विशेषज्ञों के बीच बहस जारी है। कुछ वाहन मालिकों ने माइलेज और वाहन प्रदर्शन को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। हालांकि इन व्यक्तिगत अनुभवों को सभी वाहनों पर लागू नहीं किया जा सकता। वाहन की उम्र, इंजन डिजाइन और निर्माता की compatibility भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। आम ग्राहक के लिए क्या जरूरी है? अगर आपका वाहन सामान्य पेट्रोल के लिए डिजाइन किया गया है तो केवल कीमत देखकर XP100 खरीदना जरूरी नहीं है। वाहन निर्माता की सलाह के अनुसार ईंधन इस्तेमाल करना सबसे सुरक्षित विकल्प है। वहीं जिन वाहनों के लिए हाई-ऑक्टेन ईंधन की सिफारिश की गई है, उनके मालिक प्रीमियम पेट्रोल के विकल्प पर विचार कर सकते हैं। निष्कर्ष ₹167 प्रति लीटर पेट्रोल की खबर ने भले ही लोगों का ध्यान खींचा हो, लेकिन यह सामान्य पेट्रोल की कीमत नहीं है। ₹167 वाला ईंधन मुख्य रूप से Indian Oil XP100 प्रीमियम पेट्रोल है, जो 100-octane और E0 स्पेसिफिकेशन के साथ चुनिंदा जगहों पर उपलब्ध है। इसकी बढ़ती चर्चा E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस से भी जुड़ी हुई है। हालांकि आम वाहन चालकों के लिए यह जरूरी नहीं कि वे ₹167 वाला प्रीमियम ईंधन ही इस्तेमाल करें। वाहन निर्माता की सिफारिश के अनुसार ईंधन चुनना सबसे महत्वपूर्ण है। Source: Latest fuel reports / Indian Oil XP100-related reports जय राष्ट्र न्यूज़

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रांची में छात्रों के प्रदर्शन पर वाटर कैनन का इस्तेमाल, पुलिस कार्रवाई का वीडियो वायरल

रांची: झारखंड की राजधानी रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी, जिसके बाद भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। घटना के वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। छात्रों के प्रदर्शन के दौरान बढ़ा तनाव रांची में बड़ी संख्या में छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शनकारियों की ओर से सरकार और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखी गईं। प्रदर्शन के दौरान भीड़ बढ़ने और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की कोशिश की प्रदर्शन स्थल पर पुलिस की ओर से सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रखी गई थी। प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेड लगाए गए थे। जब प्रदर्शनकारी बैरिकेड के करीब पहुंचे तो पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए वाटर कैनन चलाया। वायरल वीडियो में प्रदर्शनकारियों पर पानी की तेज धार छोड़े जाने का दृश्य दिखाई दे रहा है। पुलिस कार्रवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तेजी से शेयर किए जा रहे हैं। वीडियो में पुलिस द्वारा प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए वाटर कैनन का इस्तेमाल करते हुए देखा जा सकता है। हालांकि सोशल मीडिया पर वायरल होने वाले वीडियो के संदर्भ और पूरे घटनाक्रम को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। इसलिए किसी वीडियो के आधार पर पूरे घटनाक्रम का निष्कर्ष निकालने से पहले आधिकारिक जानकारी का इंतजार करना जरूरी है। छात्र अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन पर अड़े प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उनकी मांगों को सरकार और प्रशासन को गंभीरता से सुनना चाहिए। छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। प्रदर्शनकारियों की ओर से प्रशासन से बातचीत और उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग की जा रही है। सुरक्षा व्यवस्था के बीच पुलिस की कार्रवाई प्रदर्शन को देखते हुए रांची में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई। पुलिस और प्रशासन की ओर से भीड़ को नियंत्रित रखने के लिए बैरिकेडिंग समेत अन्य व्यवस्थाएं की गईं। वाटर कैनन का इस्तेमाल पुलिस की ओर से भीड़ को तितर-बितर करने और स्थिति को नियंत्रण में रखने की कार्रवाई के तौर पर किया गया। वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस वाटर कैनन की कार्रवाई का वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। कुछ लोग पुलिस की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स छात्रों पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठा रहे हैं। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस और प्रशासन का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आगे की कार्रवाई पर नजर घटना के बाद अब छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत तथा प्रदर्शन की आगे की स्थिति पर नजर बनी हुई है। यदि छात्रों की मांगों को लेकर कोई बातचीत या प्रशासन की ओर से कोई निर्णय सामने आता है, तो उससे आंदोलन की दिशा स्पष्ट हो सकती है। निष्कर्ष रांची में छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा वाटर कैनन के इस्तेमाल का वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में आ गया है। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने पानी की बौछार की, जिसके वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहे हैं। फिलहाल मामले में प्रदर्शनकारियों की मांगों, पुलिस कार्रवाई और प्रशासन के आधिकारिक पक्ष पर नजर बनी हुई है। वायरल वीडियो के आधार पर किए जा रहे दावों की स्वतंत्र पुष्टि किए बिना उन्हें अंतिम तथ्य मानना उचित नहीं होगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / वायरल वीडियो / पुलिस-प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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