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संसद का मानसून सत्र समाप्त, FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया; हंगामे के बीच कई अहम फैसले

नई दिल्ली: संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त 2026 को समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान कई मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक और हंगामा देखने को मिला। सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा हुई, जबकि विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को विस्तृत जांच और विचार के लिए संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेज दिया गया। FCRA संशोधन विधेयक JPC के पास भेजा गया सत्र के अंतिम चरण में FCRA संशोधन विधेयक सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाले मुद्दों में शामिल रहा। लोकसभा ने विधेयक को दोनों सदनों की संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव को मंजूरी दी। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य विदेशी योगदान से जुड़े नियमों को मजबूत करना और राष्ट्रीय सुरक्षा तथा पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। वहीं विपक्ष और कुछ नागरिक संगठनों ने विधेयक के कई प्रावधानों पर गंभीर आपत्ति जताई है। विधेयक को लेकर विपक्ष ने जताई आपत्ति विपक्षी दलों ने FCRA संशोधन विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उनका कहना है कि प्रस्तावित बदलावों से विदेशी सहायता प्राप्त करने वाले गैर-सरकारी संगठनों और सामाजिक संस्थाओं के कामकाज पर सरकार की निगरानी और नियंत्रण बढ़ सकता है। कुछ संगठनों ने विशेष रूप से उन प्रावधानों पर चिंता जताई है जिनके तहत FCRA पंजीकरण रद्द या समाप्त होने की स्थिति में विदेशी योगदान से खरीदी गई संपत्तियों को लेकर सरकार को अधिक अधिकार मिल सकते हैं। सरकार ने सुरक्षा और पारदर्शिता को बताया आधार सरकार की ओर से विपक्ष की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा गया कि विधेयक का उद्देश्य किसी विशेष समुदाय या संगठन को निशाना बनाना नहीं है। सरकार का तर्क है कि विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है तथा यदि विदेशी योगदान का इस्तेमाल नियमों के विपरीत होता है तो उसके खिलाफ प्रभावी कार्रवाई की व्यवस्था होनी चाहिए। JPC में अब होगी विस्तृत जांच विधेयक को JPC के पास भेजे जाने के बाद अब समिति इसके विभिन्न प्रावधानों की विस्तार से जांच करेगी। समिति संबंधित मंत्रालयों, विशेषज्ञों, संगठनों और अन्य हितधारकों से सुझाव ले सकती है। इसके बाद समिति अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी। रिपोर्ट में विधेयक को मौजूदा रूप में आगे बढ़ाने या उसमें बदलाव करने की सिफारिशें की जा सकती हैं। मानसून सत्र में कई विधेयक आगे बढ़े मानसून सत्र के दौरान संसद में कई विधायी कार्य हुए। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार सत्र में 10 महत्वपूर्ण विधेयक पारित हुए, जबकि कुछ प्रस्तावित कानूनों को आगे की जांच के लिए संसदीय समितियों के पास भेजा गया। सत्र के दौरान FCRA के अलावा खनन, सहकारी क्षेत्र और अन्य प्रशासनिक विषयों से जुड़े विधेयकों पर भी महत्वपूर्ण कार्रवाई हुई। सत्र में हंगामा भी रहा प्रमुख मुद्दा मानसून सत्र के दौरान कई दिनों तक विपक्ष और सरकार के बीच अलग-अलग मुद्दों को लेकर टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने कई विषयों पर चर्चा की मांग की, जबकि कई मौकों पर सदन की कार्यवाही बाधित भी हुई। इसके बावजूद सरकार ने अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी और सत्र के अंतिम दिनों में कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर कार्रवाई हुई। महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े विधेयक भी चर्चा में रहे सत्र के दौरान संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026, केंद्रशासित प्रदेश कानून संशोधन विधेयक और परिसीमन विधेयक भी लोकसभा में पेश किए गए। इन प्रस्तावों का संबंध लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने के लिए परिसीमन से जुड़ी व्यवस्था से था। हालांकि संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका और उससे जुड़े अन्य विधेयकों पर भी आगे कार्रवाई नहीं हुई। अब आगे क्या होगा? संसद का सत्र समाप्त होने के बाद अब सबसे ज्यादा नजर FCRA संशोधन विधेयक की JPC जांच पर रहेगी। समिति की रिपोर्ट आने के बाद सरकार विधेयक को दोबारा संसद में आगे बढ़ा सकती है। इस दौरान विपक्ष और संबंधित संगठनों की ओर से दिए जाने वाले सुझावों और आपत्तियों का भी महत्व रहेगा। निष्कर्ष 13 अगस्त 2026 को संसद का मानसून सत्र समाप्त हो गया, लेकिन सत्र के दौरान उठे कई मुद्दों पर राजनीतिक बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है। इनमें FCRA संशोधन विधेयक सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में शामिल है, जिसे अब संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया गया है। अब JPC की जांच और उसकी रिपोर्ट यह तय करने में अहम भूमिका निभाएगी कि FCRA संशोधन विधेयक किस रूप में आगे बढ़ता है। वहीं संसद के अगले सत्र में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच फिर से तीखी बहस देखने को मिल सकती है। Source: संसद/संसदीय कार्य मंत्रालय से संबंधित जानकारी, PTI, Indian Express और अन्य ताजा रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP की बैठक के लिए दिल्ली में हॉल नहीं मिला? अभिजीत दीपके का गंभीर आरोप, BJP पर लगाया दबाव बनाने का दावा

नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने दिल्ली में पार्टी की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल नहीं मिलने को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। दीपके का दावा है कि पार्टी ने कई जगहों पर हॉल की तलाश की, लेकिन कई संचालकों ने कथित तौर पर “ऊपर से दबाव” होने की बात कहते हुए जगह देने से इनकार कर दिया। उनका आरोप है कि आखिरकार जिस हॉल को बुक किया गया था, उसके मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। करीब 10 जगहों पर तलाशने का दावा अभिजीत दीपके के अनुसार, CJP को 12 अगस्त को दिल्ली में अपने वॉलंटियर्स की बैठक करनी थी। इसके लिए पार्टी की ओर से कई स्थानों पर हॉल तलाशे गए। दीपके का कहना है कि करीब 10 जगहों पर संपर्क करने के बावजूद उन्हें हॉल नहीं मिला। उनके मुताबिक, कुछ हॉल मालिकों ने कथित तौर पर कहा कि उन पर “ऊपर से दबाव” है। बुकिंग के बाद भी रद्द हुई बैठक दीपके ने दावा किया कि काफी कोशिशों के बाद आखिरकार एक हॉल बुक किया गया और उसके लिए भुगतान भी किया गया। उनके पास बुकिंग की रसीद होने की बात भी उन्होंने कही। हालांकि, उनका आरोप है कि बैठक से ठीक पहले हॉल मालिक को कथित तौर पर धमकी भरे फोन आए और इसके बाद बैठक आयोजित करने में परेशानी खड़ी हो गई। “उल्टा लटका दिया जाएगा” का लगाया आरोप CJP संस्थापक ने आरोप लगाया कि हॉल मालिक को धमकी दी गई कि अगर वहां CJP की बैठक होने दी गई तो उसे “उल्टा लटका दिया जाएगा।” दीपके ने इन कथित धमकियों के पीछे भाजपा का हाथ होने का आरोप लगाया है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में भाजपा की ओर से इस आरोप का कोई आधिकारिक जवाब सामने नहीं आया है। दीपके बोले—धमकियों से नहीं डरेंगे अभिजीत दीपके ने कहा कि इस तरह की कथित धमकियों से CJP के कार्यकर्ता पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि अगर किसी राजनीतिक संगठन की सामान्य बैठक के लिए निजी स्थान उपलब्ध कराने वालों पर दबाव बनाया जा रहा है, तो यह लोकतांत्रिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी की गतिविधियों को रोकने की कोशिशों के बावजूद CJP अपने कार्यक्रम जारी रखेगी। CJP ने दिल्ली पुलिस पर भी उठाए सवाल CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने भी मामले को लेकर दिल्ली पुलिस पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि यदि हॉल मालिकों को धमकियां दी गईं, तो पुलिस इस मामले में क्या कार्रवाई कर रही है। रांका ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए यह भी पूछा कि क्या दिल्ली पुलिस केवल भाजपा के लिए काम कर रही है। फिलहाल दिल्ली पुलिस की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। “जंतर-मंतर सीजन-2” का ऐलान हॉल विवाद के बीच अभिजीत दीपके ने CJP के आंदोलन को लेकर भी बड़ा संकेत दिया है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर लोग लगातार पूछ रहे हैं कि “जंतर-मंतर सीजन-2” कब शुरू होगा। दीपके ने दावा किया कि इसका दूसरा चरण जल्द शुरू किया जाएगा। इससे संकेत मिलता है कि CJP आने वाले दिनों में दिल्ली में फिर से सार्वजनिक आंदोलन शुरू करने की तैयारी कर रही है। देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ की भी तैयारी CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि पार्टी अब देशभर में ‘लिसनिंग टूर’ शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसका उद्देश्य अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर लोगों की समस्याओं और सुझावों को सुनना बताया गया है। पार्टी ने शिक्षा को प्रमुख मुद्दा बताते हुए सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सोशल ऑडिट और स्थानीय समस्याओं को रिकॉर्ड करने की अपील भी की है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि हॉल मालिकों को धमकी देने और भाजपा की ओर से दबाव बनाए जाने के आरोप फिलहाल CJP और अभिजीत दीपके की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। निष्कर्ष दिल्ली में CJP की प्रस्तावित बैठक के लिए हॉल बुकिंग को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। अभिजीत दीपके ने आरोप लगाया है कि कई हॉल मालिकों पर दबाव बनाया गया और बुक किए गए हॉल के मालिक को भी कथित तौर पर धमकी दी गई। मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जहां CJP ने इसे दबाव और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर सवाल उठाए हैं, वहीं भाजपा और दिल्ली पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है। इसी बीच CJP ने “जंतर-मंतर सीजन-2” और देशव्यापी ‘लिसनिंग टूर’ की तैयारी का संकेत दिया है। Source: अमर उजाला / जनसत्ता / NDTV / आजतक रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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नन्हे कदम, बड़ा सवाल! सड़क की मांग लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर में सड़क की खराब स्थिति को लेकर कुछ स्कूली बच्चों का जिला प्रशासन के कार्यालय पहुंचना चर्चा का विषय बन गया। बच्चों ने अधिकारियों के सामने अपने इलाके की सड़क से जुड़ी समस्या रखी और बेहतर सड़क निर्माण की मांग की। बच्चों के इस कदम ने स्थानीय प्रशासन के साथ-साथ लोगों का भी ध्यान खींचा है। सड़क की समस्या लेकर बच्चों ने उठाई आवाज जानकारी के मुताबिक, बच्चों का कहना था कि उनके इलाके में सड़क की स्थिति खराब होने के कारण उन्हें स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है। बारिश के दौरान समस्या और बढ़ जाती है, जिससे रास्ते पर कीचड़ और पानी जमा होने से आवाजाही मुश्किल हो जाती है। बच्चों ने इसी समस्या को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखने का फैसला किया। जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे बच्चे बच्चे अपनी मांग को लेकर जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे। उनका उद्देश्य अधिकारियों तक यह संदेश पहुंचाना था कि सड़क की समस्या का जल्द समाधान किया जाए। बच्चों के इस कदम को देखकर कार्यालय में मौजूद लोगों का भी ध्यान उनकी ओर गया। इतनी कम उम्र में अपनी बुनियादी जरूरत के लिए प्रशासन के सामने आवाज उठाने की तस्वीरें और वीडियो चर्चा में हैं। बारिश में बढ़ जाती है परेशानी स्थानीय लोगों के अनुसार, खराब सड़क की समस्या बारिश के दौरान और गंभीर हो जाती है। पानी जमा होने और सड़क पर कीचड़ होने के कारण पैदल चलने वाले बच्चों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है। स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए रोजाना इस रास्ते से गुजरना मजबूरी है। ऐसे में सड़क की स्थिति में सुधार की मांग लंबे समय से उठती रही है। बच्चों ने प्रशासन के सामने रखा सवाल बच्चों का जिला प्रशासन तक पहुंचना सिर्फ सड़क निर्माण की मांग नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं को लेकर एक बड़ा सवाल भी माना जा रहा है। जब स्कूली बच्चों को खुद अपनी समस्या लेकर सरकारी कार्यालय पहुंचना पड़े, तो यह स्थानीय स्तर पर सड़क और नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय लोगों को कार्रवाई की उम्मीद बच्चों की शिकायत सामने आने के बाद स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन सड़क की स्थिति का निरीक्षण कराकर जल्द जरूरी कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि सड़क की मरम्मत या निर्माण होने से बच्चों के साथ-साथ आसपास रहने वाले सभी लोगों को राहत मिलेगी। बच्चों की पहल बनी चर्चा का विषय अपनी समस्या को लेकर सीधे जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचने वाले बच्चों की पहल ने यह संदेश दिया है कि अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए आवाज उठाने की कोई उम्र नहीं होती। बच्चों की मांग अब प्रशासन के सामने है और लोगों की नजर इस बात पर है कि संबंधित विभाग सड़क की समस्या के समाधान के लिए कब तक कार्रवाई करता है। निष्कर्ष सोलापुर में सड़क की समस्या को लेकर बच्चों का जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचना चर्चा में है। बच्चों ने प्रशासन के सामने खराब सड़क और स्कूल आने-जाने में होने वाली परेशानी को रखा और सड़क सुधार की मांग की। अब उम्मीद है कि प्रशासन इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मौके का निरीक्षण करेगा और सड़क की समस्या का स्थायी समाधान निकालेगा। Source: स्थानीय रिपोर्ट्स / जिला प्रशासन से संबंधित जानकारी जय राष्ट्र न्यूज़

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सोलापुर में जिला परिषद स्कूल का स्लैब गिरा, 13 छात्र और 2 शिक्षक घायल

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब अचानक गिर गया। हादसे में 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक गिरा स्लैब, बच्चों में मची अफरा-तफरी जानकारी के अनुसार, हादसा 10 अगस्त 2026 को दोपहर के समय हुआ। स्कूल के पोर्च की छत की एक परत अचानक नीचे गिर गई और मलबा छात्रों के ऊपर जा गिरा। मलबा गिरते ही स्कूल में चीख-पुकार मच गई। मौजूद शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। 13 छात्र घायल, 2 शिक्षकों के घायल होने की भी खबर हादसे में कुल 13 छात्रों के घायल होने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्ट में 2 शिक्षकों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है। घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और उपचार के बाद घायल छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। करीब 25 साल पुरानी है स्कूल की इमारत बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन करीब 25 साल पुराना है। यह सोलापुर जिला परिषद द्वारा संचालित कन्नड़ माध्यम का स्कूल है, जिसमें पहली से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल भवन के एक हिस्से का अचानक गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस के साथ जिला परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल बच्चों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लैब गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठे सवाल हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की पुरानी इमारत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरानी इमारत को गिराकर नई स्कूल बिल्डिंग बनाने की मांग उठाई है। सवाल यह भी है कि यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में भवन के किसी हिस्से का गिरना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि स्कूल की इमारत की पूरी तरह जांच कराई जाए और जब तक भवन सुरक्षित घोषित न हो, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती हादसे के बाद प्रशासन के सामने स्कूल भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है। यदि भवन के अन्य हिस्से भी कमजोर पाए जाते हैं, तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण भी जरूरी माना जा रहा है। निष्कर्ष सोलापुर के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब गिरने से 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है और घायल छात्रों की स्थिति स्थिर बताई गई है। लेकिन इस हादसे ने करीब 25 साल पुराने स्कूल भवन की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच और स्कूल भवन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। Source: ABP News / TV9 Bharatvarsh / स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली–पुणे SpiceJet फ्लाइट में AC फेल, बढ़ती गर्मी से यात्रियों का हंगामा; उड़ान से पहले विमान लौटाया गया

नई दिल्ली: दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet की फ्लाइट में बुधवार को उड़ान भरने से पहले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के केबिन में एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन की समस्या के कारण तापमान बढ़ गया। कई यात्रियों ने घुटन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की, जिसके बाद विमान में हंगामा शुरू हो गया। विमान के अंदर बढ़ने लगा तापमान रिपोर्टों के मुताबिक, यात्रियों के विमान में सवार होने के बाद केबिन का तापमान लगातार बढ़ता गया। गर्मी और उमस के कारण कई यात्री पसीने से परेशान हो गए। विमान में बच्चे और बुजुर्ग यात्री भी मौजूद थे। कुछ यात्रियों ने सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत की। एक यात्री ने स्थिति की तुलना बेहद गर्म और दमघोंटू माहौल से की। यात्रियों ने किया हंगामा हालात बिगड़ने के बाद यात्रियों ने विमान में विरोध शुरू कर दिया। यात्रियों का कहना था कि जब केबिन में गर्मी और घुटन बढ़ रही थी, तब उड़ान भरना सुरक्षित नहीं होगा। कई यात्रियों ने विमान के दरवाजे खोलने और उन्हें बाहर निकालने की मांग की। स्थिति को देखते हुए विमान को वापस बे पर लाया गया और यात्रियों को विमान से उतारा गया। 100 से ज्यादा यात्रियों ने उड़ान से इनकार किया Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से अधिक यात्रियों ने असहज परिस्थितियों में यात्रा जारी रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद विमान को वापस बे पर लाना पड़ा। रिपोर्ट में इस समस्या की वजह विमान के एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में खराबी बताई गई है। सांस लेने में भी हुई परेशानी यात्रियों के अनुसार, विमान के अंदर पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। गर्मी बढ़ने के साथ कुछ यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई। एक यात्री के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि AC नहीं चल रहा था और वेंटिलेशन भी नहीं था, जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानी हुई। बड़ा हादसा टला? घटना के बाद सोशल मीडिया पर यात्रियों के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें विमान के अंदर यात्रियों को परेशान देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में किसी गंभीर चोट या मौत की पुष्टि नहीं हुई है। विमान को उड़ान से पहले वापस बे पर लाए जाने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। SpiceJet की उड़ानों पर फिर उठे सवाल यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब एयरलाइन संचालन, उड़ानों में देरी और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर SpiceJet पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। दिल्ली–पुणे रूट पर SpiceJet की उड़ानें संचालित होती हैं और कंपनी के शेड्यूल में SG 939 और SG 105 जैसी उड़ानें दर्ज हैं। ताजा घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा और विमान के तकनीकी रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम विमान के टेक-ऑफ से पहले केबिन में तापमान और वेंटिलेशन की समस्या सामने आने के बाद उड़ान रोकना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर गर्म मौसम में विमान के अंदर एयर कंडीशनिंग और उचित वेंटिलेशन यात्रियों के आराम के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। निष्कर्ष दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet फ्लाइट में AC और वेंटिलेशन की समस्या के कारण केबिन का तापमान बढ़ गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई। बच्चों और बुजुर्गों समेत कई यात्रियों ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की और विरोध किया। स्थिति को देखते हुए विमान को उड़ान से पहले वापस बे पर लाया गया और यात्रियों को उतारा गया। 100 से ज्यादा यात्रियों के उड़ान जारी रखने से इनकार करने की रिपोर्ट सामने आई है। Source: NDTV / NDTV Profit / Times of India / अन्य रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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Zepto और Blinkit पर खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई, बेंगलुरु में वेयरहाउस सील और मुंबई में लाइसेंस निलंबित

नई दिल्ली: देश के तेजी से बढ़ते क्विक-कॉमर्स सेक्टर में खाद्य सुरक्षा को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। कर्नाटक में खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने बेंगलुरु के होस्कोटे स्थित Zepto के एक वेयरहाउस को सील कर दिया, जबकि महाराष्ट्र FDA ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। दोनों मामलों में अधिकारियों ने स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा से जुड़ी गंभीर कमियां पाए जाने की जानकारी दी है। बेंगलुरु में Zepto वेयरहाउस पर कार्रवाई कर्नाटक खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने बेंगलुरु के होस्कोटे तालुक में Zepto के एक वेयरहाउस का निरीक्षण किया। अधिकारियों के मुताबिक, वहां खाद्य पदार्थों के रखरखाव और स्वच्छता से जुड़ी कई गंभीर कमियां सामने आईं। निरीक्षण के दौरान परिसर में गंदगी, फर्श पर जमा कचरा और खाद्य सामग्री के भंडारण से जुड़ी समस्याएं पाए जाने की बात सामने आई है। अधिकारियों ने परिस्थितियों को बेहद अस्वच्छ बताया और इसके बाद वेयरहाउस को सील कर दिया। लेबलिंग और स्टोरेज को लेकर भी सवाल जांच में केवल साफ-सफाई ही नहीं, बल्कि खाद्य उत्पादों की लेबलिंग और मैन्युफैक्चरिंग संबंधी जानकारी को लेकर भी आपत्तियां सामने आईं। रिपोर्टों के मुताबिक, अधिकारियों ने कुछ उत्पादों में अनुचित लेबलिंग और मिसब्रांडिंग से जुड़े उल्लंघन पाए। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत ऐसी कमियां उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं क्योंकि पैकेज पर सही जानकारी उपलब्ध होना जरूरी है। मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर पर FDA की कार्रवाई दूसरी ओर, महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) ने मुंबई के मलाड वेस्ट स्थित Blinkit के एक डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित कर दिया। अधिकारियों के निरीक्षण में परिसर में कॉकरोच की मौजूदगी और अस्वच्छ परिस्थितियां पाए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा कुछ खाद्य उत्पादों की वैधता और स्टोरेज को लेकर भी गंभीर सवाल उठे। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने क्या पाया? मुंबई के मामले में अधिकारियों ने डार्क स्टोर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर आपत्ति जताई। रिपोर्टों के अनुसार, निरीक्षण के दौरान कॉकरोच का संक्रमण और खाद्य सामग्री के आसपास अस्वच्छ स्थिति पाई गई। ऐसी परिस्थितियां खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और उपभोक्ताओं की सुरक्षा के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं। इसी वजह से FDA ने संबंधित खाद्य लाइसेंस को निलंबित करने की कार्रवाई की। क्विक-कॉमर्स कंपनियों पर बढ़ी निगरानी Zepto और Blinkit पर हुई ताजा कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब देश में क्विक-कॉमर्स कंपनियों के डार्क स्टोर्स और वेयरहाउस में खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर नियामक निगरानी बढ़ रही है। इन प्लेटफॉर्म्स के जरिए किराना, पैकेज्ड फूड, डेयरी और अन्य खाद्य उत्पाद कुछ ही मिनटों में ग्राहकों तक पहुंचाए जाते हैं। ऐसे में स्टोरेज, तापमान, एक्सपायरी और स्वच्छता का पालन बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। ग्राहकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है मामला? ऑनलाइन ऑर्डर करते समय ग्राहक अक्सर केवल पैकेज और डिलीवरी पर ध्यान देते हैं, लेकिन खाद्य पदार्थ की गुणवत्ता इस बात पर भी निर्भर करती है कि उसे वेयरहाउस या डार्क स्टोर में किस तरह रखा गया था। अगर खाद्य उत्पाद गलत तापमान पर रखे जाएं, एक्सपायरी के बाद भी स्टॉक में मौजूद हों या अस्वच्छ वातावरण में रखे जाएं, तो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। इसी वजह से खाद्य सुरक्षा विभागों की ऐसी जांच को क्विक-कॉमर्स इंडस्ट्री के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Zepto और Blinkit पर कार्रवाई से क्या संदेश? ताजा कार्रवाई से साफ है कि तेज डिलीवरी के साथ-साथ खाद्य सुरक्षा और नियामकीय अनुपालन भी कंपनियों के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है। वेयरहाउस और डार्क स्टोर में नियमों का पालन नहीं होने पर कंपनियों को लाइसेंस निलंबन या परिसर सील किए जाने जैसी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। निष्कर्ष बेंगलुरु में Zepto के वेयरहाउस को खाद्य सुरक्षा उल्लंघनों के चलते सील किए जाने और मुंबई में Blinkit के डार्क स्टोर का खाद्य लाइसेंस निलंबित किए जाने से क्विक-कॉमर्स कंपनियों में खाद्य सुरक्षा को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक तरफ ग्राहक कुछ ही मिनटों में सामान पाने की सुविधा चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ खाद्य उत्पादों की स्वच्छता, सही स्टोरेज और एक्सपायरी की जांच भी उतनी ही जरूरी है। अब देखना होगा कि संबंधित कंपनियां इन कमियों को दूर करने के लिए क्या कदम उठाती हैं। Source: Karnataka Food Safety Department / Maharashtra FDA / Latest Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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जय की ‘पसंदीदा’ तृषा को डिप्टी CM कब बनाएंगे? AIADMK नेता का तंज, सियासत गरम

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में अभिनेता से नेता बने विजय को लेकर AIADMK नेता आरबी उदयकुमार की एक टिप्पणी चर्चा में है। उन्होंने तंज कसते हुए सवाल किया कि आखिर विजय की कथित “पसंदीदा” अभिनेत्री तृषा कृष्णन को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। यह बयान तमिलनाडु की मौजूदा राजनीतिक बयानबाजी के बीच सामने आया है। AIADMK नेता ने विजय पर साधा निशाना AIADMK नेता आरबी उदयकुमार ने पार्टी कार्यक्रम के दौरान विजय पर निशाना साधते हुए तृषा का नाम लिया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए पूछा कि तमिलनाडु को यह देखना बाकी है कि विजय की “प्रिय” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। उनकी टिप्पणी को विजय की राजनीति और उनके निजी जीवन से जुड़े सार्वजनिक चर्चाओं पर राजनीतिक हमला माना जा रहा है। तृषा का नाम लेकर क्यों किया गया तंज? तृषा कृष्णन और विजय दोनों तमिल फिल्म इंडस्ट्री के जाने-माने चेहरे हैं और दोनों कई फिल्मों में साथ नजर आ चुके हैं। इसी सार्वजनिक पहचान का इस्तेमाल करते हुए AIADMK नेता ने विजय पर राजनीतिक कटाक्ष किया। हालांकि, तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात किसी आधिकारिक नियुक्ति या प्रस्ताव के रूप में सामने नहीं आई है। यह टिप्पणी राजनीतिक तंज के तौर पर की गई थी। विजय अब तमिलनाडु के मुख्यमंत्री हैं 2026 के विधानसभा चुनाव के बाद विजय के नेतृत्व वाली Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) सत्ता में आई और विजय ने 10 मई 2026 को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। विजय के सत्ता में आने के बाद तमिलनाडु की राजनीति में नई राजनीतिक परिस्थितियां बनी हैं। AIADMK और DMK जैसे पुराने राजनीतिक दल अब TVK सरकार को लेकर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं। डिप्टी CM का पद अभी खाली मौजूदा विधानसभा व्यवस्था के अनुसार तमिलनाडु में डिप्टी मुख्यमंत्री का पद फिलहाल खाली है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक विजय सरकार में इस पद पर अभी किसी व्यक्ति की नियुक्ति नहीं हुई है। इसी राजनीतिक स्थिति के बीच AIADMK नेता की तृषा को लेकर की गई टिप्पणी ने सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी बयानबाजी विजय के मुख्यमंत्री बनने के बाद AIADMK और TVK के बीच राजनीतिक दूरी और बयानबाजी लगातार चर्चा में है। हाल ही में AIADMK ने विजय द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय सांसद बैठक से भी दूरी बनाई थी। बैठक का मुद्दा लोकसभा सीटों के परिसीमन से जुड़ा था। ऐसे माहौल में AIADMK नेताओं की ओर से विजय पर किए जा रहे राजनीतिक हमले राज्य की बदलती सियासत को दर्शाते हैं। विजय सरकार के सामने कई राजनीतिक चुनौतियां मुख्यमंत्री के तौर पर विजय के सामने सरकार चलाने के साथ-साथ विधानसभा में राजनीतिक संतुलन बनाए रखने की चुनौती भी है। 2026 के चुनाव के बाद TVK सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी थी और बाद में सहयोगी दलों के समर्थन से सरकार बनी। अब सरकार के सामने प्रशासन, परिसीमन और विपक्ष के साथ राजनीतिक टकराव जैसे कई मुद्दे हैं। निष्कर्ष तमिलनाडु की राजनीति में AIADMK नेता आरबी उदयकुमार का विजय और तृषा को लेकर किया गया तंज चर्चा में आ गया है। उन्होंने सवाल किया कि विजय की “पसंदीदा” तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री कब बनाया जाएगा। हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि तृषा को डिप्टी मुख्यमंत्री बनाने का कोई आधिकारिक प्रस्ताव सामने नहीं आया है और यह बयान राजनीतिक कटाक्ष के रूप में दिया गया है। Source: NDTV / Navbharat Times / Latest political reports जय राष्ट्र न्यूज़

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HCL के सह-संस्थापक का बड़ा खुलासा, सिर्फ ₹1.87 लाख और 6 लोगों से शुरू हुआ था भारत का बड़ा टेक सफर

नई दिल्ली: भारत की दिग्गज टेक कंपनियों में शामिल HCL की शुरुआत कितने छोटे स्तर से हुई थी, इसका दिलचस्प खुलासा कंपनी के सह-संस्थापक अजय चौधरी ने किया है। HCL के 50 साल पूरे होने के मौके पर चौधरी ने 1976 के शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि महज 6 लोगों और ₹1.87 लाख की पूंजी से एक ऐसा सपना शुरू हुआ था, जिसने आगे चलकर भारत के टेक्नोलॉजी सेक्टर की तस्वीर बदल दी। छह लोगों ने छोड़ी नौकरी और शुरू किया अपना सफर अजय चौधरी के मुताबिक, साल 1976 में छह युवा इंजीनियरों ने अपनी नौकरियां छोड़कर खुद की कंपनी शुरू करने का फैसला किया। इन छह संस्थापकों में शिव नाडर, अर्जुन मल्होत्रा, योगेश वैद्य, सुभाष अरोड़ा, डीएस पुरी और अजय चौधरी शामिल थे। उस समय भारत में आज की तरह स्टार्टअप संस्कृति, वेंचर कैपिटल या टेक कंपनियों का बड़ा नेटवर्क नहीं था। इसके बावजूद इन लोगों को भरोसा था कि माइक्रोप्रोसेसर और कंप्यूटर आने वाले समय में दुनिया बदल देंगे। ₹1.87 लाख जुटाकर शुरू किया कारोबार चौधरी ने बताया कि छह संस्थापकों ने मिलकर शुरुआती पूंजी के तौर पर ₹1.87 लाख जुटाए थे। इस रकम को बचत, उधार और दूसरे निजी संसाधनों से जुटाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूंजी को इकट्ठा करने के लिए एक संस्थापक ने अपनी कार तक बेच दी थी। आज के हजारों करोड़ रुपये के टेक कारोबार को देखते हुए यह शुरुआती रकम बेहद छोटी लग सकती है, लेकिन उस समय इसी सीमित पूंजी से छह लोगों ने भारत में कंप्यूटर बनाने का सपना देखा था। दिल्ली के छोटे से ऑफिस से शुरू हुआ सपना HCL का शुरुआती सफर दिल्ली के गोल्फ लिंक इलाके में एक छोटे से बरसाती कमरे से शुरू हुआ। उस समय कंपनी का नाम Microcomp रखा गया था। इन छह लोगों का लक्ष्य भारत में अपना कंप्यूटर तैयार करना था। लेकिन शुरुआत में उनके सामने कई बड़ी चुनौतियां थीं। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि उनके पास कंप्यूटर बनाने के लिए आवश्यक मैन्युफैक्चरिंग लाइसेंस तक नहीं था। इसके बावजूद उन्होंने अपने प्रयास जारी रखे। उस दौर में कंप्यूटर भारत के लिए नई चीज था 1970 के दशक में कंप्यूटर आज की तरह आम लोगों की जिंदगी का हिस्सा नहीं था। भारत में कंप्यूटर तकनीक अभी शुरुआती दौर में थी और बहुत कम लोगों को इसकी वास्तविक संभावनाओं का अंदाजा था। छह संस्थापकों ने इसी दौर में यह समझ लिया था कि माइक्रोप्रोसेसर आधारित तकनीक भविष्य में बड़ा बदलाव ला सकती है। उनका लक्ष्य केवल कंप्यूटर बेचने का नहीं था, बल्कि भारत में कंप्यूटर तकनीक विकसित करने का था। HCL ने आगे चलकर रचा टेक इतिहास छोटी शुरुआत के बाद HCL ने भारतीय कंप्यूटर उद्योग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। कंपनी के आधिकारिक इतिहास के मुताबिक, 1978 में HCL ने भारत में स्वदेशी कंप्यूटर HCL 8C तैयार किया, जिसे कंपनी अपने शुरुआती तकनीकी मील के पत्थरों में गिनती है। इसके बाद HCL ने कंप्यूटर शिक्षा, UNIX आधारित सिस्टम, डेटाबेस तकनीक और अन्य क्षेत्रों में भी काम किया। धीरे-धीरे कंपनी का कारोबार भारत से निकलकर वैश्विक टेक बाजार तक पहुंचा। 50 साल बाद संस्थापक ने याद की शुरुआत HCL के पांच दशक पूरे होने के मौके पर अजय चौधरी ने अपनी पुरानी यादें साझा कीं। उन्होंने इस सफर की शुरुआत को केवल एक कंपनी बनाने की कहानी नहीं, बल्कि जोखिम उठाने और बड़े सपने देखने की कहानी बताया। उनके मुताबिक, उस समय छह लोगों के पास सीमित संसाधन थे, लेकिन भविष्य को लेकर विश्वास और कुछ नया करने की इच्छा थी। छोटी पूंजी, बड़ा सपना HCL की शुरुआती कहानी इस बात का उदाहरण भी है कि किसी बड़े कारोबार की शुरुआत हमेशा बड़ी पूंजी से नहीं होती। छह लोगों ने सीमित संसाधनों के साथ शुरुआत की और आगे चलकर भारतीय टेक उद्योग में अपनी पहचान बनाई। अजय चौधरी ने अपनी पोस्ट के अंत में युवाओं को बड़े सपने देखने, जोखिम लेने और लगातार आगे बढ़ने का संदेश भी दिया। निष्कर्ष ₹1.87 लाख, छह लोग और एक बड़ा सपना—यही HCL की शुरुआती कहानी थी। 1976 में एक छोटे से दिल्ली ऑफिस से शुरू हुआ यह सफर आज भारत की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री की महत्वपूर्ण कहानियों में शामिल है। HCL के सह-संस्थापक अजय चौधरी द्वारा साझा की गई पुरानी यादों ने एक बार फिर दिखाया है कि बड़े बदलाव की शुरुआत कभी-कभी बेहद छोटे संसाधनों से होती है। छह संस्थापकों का वह प्रयोग आगे चलकर भारतीय तकनीकी क्षेत्र की एक बड़ी कहानी बन गया। Source: India Today / HCL Group जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई में भारी बारिश के बीच बड़ा हादसा, लैंडस्लाइड में 2 लोगों की मौत; कई लोगों के दबे होने की आशंका

मुंबई: मुंबई में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच एक बड़ा हादसा सामने आया है। बारिश के कारण हुए लैंडस्लाइड में कम से कम दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि मलबे में कई लोगों के दबे होने की आशंका जताई जा रही है। हादसे के बाद मौके पर राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया है। भारी बारिश के बीच हुआ हादसा मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश के कारण कई जगह जलभराव और यातायात प्रभावित हुआ है। इसी बीच पहाड़ी/ढलान वाले इलाके में मिट्टी और मलबा खिसकने से यह हादसा हुआ। लैंडस्लाइड के बाद आसपास के लोगों में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और बचाव दल मौके पर पहुंचे। मलबे में लोगों के दबे होने की आशंका हादसे के बाद सबसे बड़ी चिंता मलबे के नीचे फंसे लोगों को लेकर है। राहत एवं बचाव दल मलबा हटाकर संभावित रूप से फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। अंधेरा, लगातार बारिश और गीली मिट्टी के कारण बचाव अभियान में मुश्किलें भी सामने आ सकती हैं। बचावकर्मी सावधानी से मलबा हटाने में जुटे हैं ताकि किसी जीवित व्यक्ति को नुकसान न पहुंचे। दो लोगों की मौत की खबर प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक हादसे में दो लोगों की मौत हुई है। हालांकि, मलबे में और लोगों के फंसे होने की आशंका के चलते मृतकों और घायलों की संख्या बढ़ सकती है। प्रशासन की ओर से घटनास्थल की स्थिति का आकलन किया जा रहा है और बचाव अभियान जारी है। मुंबई में बारिश ने बढ़ाई मुश्किलें मुंबई में मानसून के दौरान भारी बारिश के कारण हर साल निचले इलाकों में जलभराव, पेड़ गिरने और सड़क यातायात प्रभावित होने जैसी घटनाएं सामने आती हैं। इस बार भी लगातार बारिश के कारण शहर के कई हिस्सों में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लैंडस्लाइड की घटना ने बारिश के दौरान संवेदनशील इलाकों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। राहत-बचाव अभियान जारी घटना के बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और आपदा राहत दल मौके पर मौजूद हैं। मलबा हटाने के लिए आवश्यक मशीनरी और बचाव उपकरणों का इस्तेमाल किया जा रहा है। अधिकारियों की प्राथमिकता मलबे में फंसे संभावित लोगों को जल्द से जल्द बाहर निकालना और घायलों को अस्पताल पहुंचाना है। बारिश के बीच लोगों से सावधानी बरतने की अपील मुंबई में भारी बारिश को देखते हुए प्रशासन की ओर से लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने और संवेदनशील इलाकों से दूर रहने की अपील की जा रही है। खासकर पहाड़ी ढलानों, निचले इलाकों और जलभराव वाले क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। लैंडस्लाइड वाले इलाकों में बढ़ी चिंता लगातार बारिश के कारण जमीन में नमी बढ़ने से ढलान वाले इलाकों में मिट्टी खिसकने का खतरा बढ़ जाता है। मुंबई और आसपास के कुछ हिस्सों में ऐसी घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। मौजूदा हादसे के बाद प्रशासन के सामने संवेदनशील क्षेत्रों की निगरानी और वहां रहने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है। निष्कर्ष मुंबई में भारी बारिश के बीच हुए लैंडस्लाइड ने बड़ा हादसा खड़ा कर दिया है। हादसे में दो लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका के चलते राहत और बचाव अभियान जारी है। लगातार बारिश के बीच प्रशासन की चुनौती अब मलबे में फंसे संभावित लोगों को सुरक्षित निकालने और प्रभावित इलाके में आगे किसी दुर्घटना को रोकने की है। मामले में मृतकों और घायलों की संख्या को लेकर आधिकारिक अपडेट का इंतजार है। Source: स्थानीय प्रशासन / पुलिस एवं आपदा प्रबंधन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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सोनम वांगचुक का सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप, बोले—“तस्वीरें सार्वजनिक न करने का वादा तोड़ा”

नई दिल्ली: सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के कुछ मंत्रियों पर वादा तोड़ने और उनका भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। वांगचुक के मुताबिक, 26 दिन के अनशन को खत्म करने के दौरान हुई बातचीत में यह सहमति बनी थी कि उनके अनशन समाप्त करने की तस्वीरें तब तक सार्वजनिक नहीं की जाएंगी, जब तक पूरे घटनाक्रम में विपक्ष और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी को भी शामिल नहीं किया जाता। उनका आरोप है कि इसके बावजूद तस्वीरें सार्वजनिक कर दी गईं। 26 दिन के अनशन के बाद खत्म हुआ आंदोलन सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक चले अनशन के बाद अपना अनशन समाप्त किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, यह घटनाक्रम गुरुग्राम के एक अस्पताल में हुआ, जहां केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ उनकी बातचीत हुई थी। वांगचुक का कहना है कि अनशन खत्म करने का फैसला बातचीत और सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद लिया गया था। तस्वीरें सार्वजनिक करने को लेकर विवाद वांगचुक ने दावा किया कि बैठक के दौरान इस बात पर स्पष्ट सहमति बनी थी कि उनके अनशन खत्म करने या मंत्रियों के साथ हुई बैठक की तस्वीरें तुरंत सार्वजनिक नहीं की जाएंगी। उनके अनुसार, तस्वीरें तभी जारी की जानी थीं जब इस पूरे घटनाक्रम को केवल सरकार की उपलब्धि के तौर पर पेश करने के बजाय विपक्षी नेताओं और छात्र प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दिखाई जाए। लेकिन वांगचुक का आरोप है कि तस्वीरें इससे पहले ही जारी कर दी गईं। “भरोसा टूट गया” वांगचुक ने इस घटनाक्रम पर निराशा जताते हुए कहा कि इस तरह तस्वीरें जारी किए जाने से उनका सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने इसे सिर्फ तस्वीरों का मामला नहीं, बल्कि आपसी सहमति और विश्वास का सवाल बताया। उनके मुताबिक, यदि किसी बातचीत में कोई शर्त तय होती है तो दोनों पक्षों को उसका सम्मान करना चाहिए। सरकार, विपक्ष और छात्रों की भागीदारी चाहते थे वांगचुक वांगचुक के अनुसार, लद्दाख में जब सरकार प्रदर्शनकारियों की मांगों को स्वीकार करती है, तो आमतौर पर सरकारी प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी को जूस या सूप पिलाकर अनशन समाप्त करवाते हैं। उनका कहना है कि इस बार भी प्रक्रिया ऐसी हो सकती थी, लेकिन इसे केवल सत्तारूढ़ पक्ष की उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सभी पक्षों की भागीदारी दिखाई जानी चाहिए थी। सरकार से लिखित आश्वासन पूरा करने की मांग वांगचुक इससे पहले भी सरकार से उन लिखित आश्वासनों को पूरा करने की मांग कर चुके हैं, जिनके बाद उन्होंने अपना आंदोलन समाप्त किया था। उन्होंने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं करने के आश्वासन को भी पूरा करने की अपील की है। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन के दौरान जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठाई थी। मुद्दा अब राजनीतिक बहस में भी पहुंचा तस्वीरों को लेकर वांगचुक के आरोप के बाद यह मामला राजनीतिक चर्चा में आ गया है। जहां वांगचुक इसे भरोसे और वादे का मुद्दा बता रहे हैं, वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार की ओर से सामने आने वाली आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में तस्वीरें जारी किए जाने और वांगचुक के आरोप का विवरण सामने आया है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच हुई बातचीत की पूरी रिकॉर्डिंग या लिखित सहमति का विस्तृत सार्वजनिक विवरण सामने नहीं आया है। निष्कर्ष सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार के मंत्रियों पर वादाखिलाफी और भरोसा तोड़ने का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि 26 दिन का अनशन खत्म करने के दौरान तस्वीरें सार्वजनिक न करने पर सहमति बनी थी, लेकिन इसके बावजूद तस्वीरें जारी कर दी गईं। अब नजर इस बात पर है कि सरकार इस आरोप पर क्या आधिकारिक जवाब देती है और वांगचुक द्वारा उठाए गए अन्य आश्वासनों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। Source: India Today / The Lallantop / Prabhat Khabar / ANI reports जय राष्ट्र न्यूज़

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