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Punjab में 3 लाख से ज्यादा सरकारी कर्मचारी Mass Casual Leave पर; Hospital OPD से सरकारी दफ्तरों तक काम प्रभावित

चंडीगढ़: पंजाब में आज, 27 अगस्त 2026, सरकारी कर्मचारियों की राज्यव्यापी ‘महा हड़ताल’ का बड़ा असर देखने को मिल रहा है। राज्य सरकार के अलग-अलग departments, boards और corporations से जुड़े 3 लाख से ज्यादा कर्मचारी mass casual leave पर चले गए हैं। आंदोलन में बड़ी संख्या में pensioners भी शामिल हैं। कर्मचारियों की मुख्य मांगों में लंबित Dearness Allowance (DA) और उसके arrears, Old Pension Scheme की बहाली, contractual कर्मचारियों को regular करना और वेतन से जुड़े कई पुराने मुद्दे शामिल हैं। हड़ताल के कारण सरकारी hospitals की OPD services, सरकारी offices, schools और कई public-facing departments का काम प्रभावित हुआ है। हालांकि emergency और mother-and-child healthcare services चालू रखी गई हैं। Punjab में आज बड़े स्तर पर ‘Maha Hartal’ Punjab Government के कर्मचारियों और pensioners के विभिन्न संगठनों ने मिलकर 27 अगस्त को statewide protest का आह्वान किया था। Hindustan Times के मुताबिक 3 लाख से अधिक employees government departments, boards और corporations से mass casual leave पर हैं। वहीं चार लाख से ज्यादा pensioners के भी agitation में शामिल होने की उम्मीद जताई गई थी। The Tribune ने mobilisation का आंकड़ा और बड़ा बताते हुए करीब चार लाख सरकारी कर्मचारियों और लाखों pensioners के आंदोलन में शामिल होने की बात कही है। अलग-अलग unions द्वारा दिए गए आंकड़ों में अंतर है, इसलिए कर्मचारियों की संख्या को “3 लाख से ज्यादा” कहना फिलहाल ज्यादा सुरक्षित है। Hospital OPD Services पर पड़ा सीधा असर इस हड़ताल का सबसे महत्वपूर्ण प्रभाव healthcare services पर दिखाई दिया। Punjab Civil Medical Services Association ने आंदोलन का समर्थन किया है। सरकारी hospitals की routine OPD services प्रभावित हुई हैं, जबकि emergency treatment जारी रखा गया है। Mother-and-child hospitals में भी आवश्यक सेवाओं को strike से बाहर रखा गया है। Doctors के साथ nursing, paramedical और Class-IV employees के कुछ संगठन भी protest में शामिल हैं। इसलिए patients को routine consultation के लिए परेशानी का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन इसे “पूरे Punjab में hospitals बंद” कहना गलत होगा। Government Offices में भी काम प्रभावित हड़ताल का असर कई प्रमुख सरकारी establishments पर पड़ा है। Protest से जुड़े कर्मचारियों में: समेत कई departments के staff शामिल हैं। Ludhiana समेत कई जिलों में कर्मचारी संगठनों ने पहले ही आम लोगों से 27 अगस्त को जरूरी काम न होने पर सरकारी offices आने से बचने की अपील की थी। सबसे बड़ी मांग—Pending DA Arrears आंदोलन की सबसे बड़ी वजह Dearness Allowance यानी DA का लंबित भुगतान है। Employee unions का कहना है कि Punjab के सरकारी कर्मचारियों को फिलहाल basic pay का 42% DA मिल रहा है, जबकि उनकी मांग है कि यह rate बढ़ाकर applicable higher rate के अनुरूप किया जाए और पिछले arrears का भुगतान किया जाए। Hindustan Times के मुताबिक unions का दावा है कि कुल करीब ₹20,161 करोड़ के DA arrears लंबित हैं। इसमें करीब ₹6,000 करोड़ मौजूदा वर्षों से जुड़े बताए गए हैं और बाकी पुराने dues से संबंधित हैं। हालांकि arrears की exact government-accepted liability और unions के calculations में अंतर हो सकता है। High Court के आदेश का भी हवाला Employee unions अपने आंदोलन में Punjab and Haryana High Court के आदेश का भी हवाला दे रहे हैं। Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत ने 3 अगस्त को state government को pending DA arrears के भुगतान के लिए 15 दिन का समय दिया था और 18 अगस्त तक की deadline बताई गई थी। Employees का कहना है कि deadline गुजरने के बावजूद उनकी पूरी मांग पूरी नहीं हुई है। वहीं Punjab सरकार का कहना है कि arrears का भुगतान चरणबद्ध तरीके से शुरू किया जा चुका है। Finance Minister Harpal Singh Cheema ने क्या कहा? Punjab Finance Minister Harpal Singh Cheema ने कहा है कि सरकार arrears के भुगतान पर काम कर रही है। Indian Express के मुताबिक Cheema ने कहा कि previous governments से भी बड़ी मात्रा में liabilities inherited हुई थीं और वर्तमान सरकार ने लगभग ₹5,000-6,000 करोड़ तक arrears का भुगतान किया है। बाकी dues भी जारी करने की प्रक्रिया में हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार और employee unions के बीच बातचीत से सकारात्मक समाधान निकल सकता है। इसलिए arrears के मुद्दे पर union और government के figures तथा interpretations को अलग-अलग पक्ष के रूप में देखना जरूरी है। Old Pension Scheme भी बड़ी मांग DA के अलावा employees की प्रमुख मांगों में Old Pension Scheme यानी OPS का implementation भी शामिल है। Employee unions खास तौर पर उन कर्मचारियों के लिए OPS की मांग कर रहे हैं जो नए pension framework के तहत आते हैं। इसके साथ कई अन्य service-related demands भी उठाई गई हैं। इनमें: जैसी मांगें शामिल हैं। Schools और Colleges में भी असर Government teachers के संगठन भी agitation में शामिल हैं। Indian Express के मुताबिक Punjab के 19,000 से ज्यादा government schools में करीब एक लाख teachers काम करते हैं और unions ने अनुमान लगाया था कि regular और contractual मिलाकर लगभग 80,000 teachers strike में शामिल हो सकते हैं। हालांकि वास्तविक attendance district-to-district अलग हो सकती है। इस वजह से कई सरकारी schools और educational institutions में teaching activities प्रभावित होने की आशंका जताई गई। क्या Punjab पूरी तरह बंद है? नहीं। इसे “Punjab Bandh” की तरह पेश करना misleading हो सकता है। Employee organisations ने साफ किया है कि उनका protest मुख्य रूप से government services और government establishments तक सीमित है। Markets, private businesses, factories और सामान्य private establishments को बंद करने का call नहीं दिया गया है। Highways block करने की भी statewide घोषणा नहीं की गई। इसलिए accurate description “सरकारी कर्मचारियों की statewide Maha Hartal/Mass Casual Leave” है। Bus Services पर भी पड़ सकता है असर Punjab Roadways और PEPSU Road Transport Corporation से जुड़े regular employees के आंदोलन में भाग लेने के कारण public transport के कुछ operations पर भी असर पड़ने की आशंका जताई गई थी। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे Punjab में सभी buses बंद हैं। Different depots और employee categories के participation के आधार पर impact अलग-अलग हो सकता है। Pensioners भी उतरे आंदोलन में इस agitation की खास बात यह है कि केवल serving…

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