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दिल्ली में जहरीली हवा का कहर! AQI 389 पहुंचा, कई इलाकों में 400 पार; दिवाली से पहले सांस लेना हुआ मुश्किल

नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण लगातार गंभीर होता जा रहा है। शुक्रवार सुबह दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 389 दर्ज किया गया, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में AQI 400 के पार पहुंच गया है। रोहिणी और आईआईटी दिल्ली में प्रदूषण का स्तर 474 तक दर्ज किया गया। दिवाली से ठीक दो दिन पहले राजधानी में घने स्मॉग और जहरीली हवा ने लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं।

दिल्ली में AQI 389, कई इलाके गंभीर श्रेणी में

शुक्रवार, 6 नवंबर की सुबह 8 बजे दिल्ली का औसत AQI 389 दर्ज किया गया।

इससे एक दिन पहले गुरुवार को राजधानी का औसत AQI 369 था। यानी महज कुछ घंटों में प्रदूषण के स्तर में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई।

दिल्ली के विभिन्न निगरानी केंद्रों पर वायु गुणवत्ता बेहद खराब से गंभीर श्रेणी में पहुंच गई है।

सुबह 7 बजे तक दिल्ली के 59 सक्रिय निगरानी केंद्रों में से 28 पर AQI 400 से अधिक दर्ज किया गया।

प्रदूषण बढ़ने के कारण राजधानी के कई इलाकों में धुंध की मोटी परत दिखाई दी।

रोहिणी और IIT दिल्ली में AQI 474 तक पहुंचा

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सुबह के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली के कई प्रमुख इलाकों में प्रदूषण गंभीर स्तर पर दर्ज किया गया।

प्रमुख इलाकों का AQI इस प्रकार रहा:

  • रोहिणी: 474
  • आईआईटी दिल्ली: 474
  • पंजाबी बाग: 465
  • जहांगीरपुरी: 460
  • आरके पुरम: 443
  • आईटीओ: 422
  • फिरोजशाह रोड: 420
  • इंडिया गेट: 403

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि प्रदूषण का असर केवल औद्योगिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि राजधानी के रिहायशी और प्रमुख सार्वजनिक इलाकों में भी वायु गुणवत्ता गंभीर बनी हुई है।

लोगों को सांस लेने में परेशानी, आंखों में जलन

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के कारण लोगों को स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

कई निवासियों ने सांस लेने में कठिनाई, आंखों में जलन और गले में परेशानी की शिकायत की है।

शुक्रवार सुबह राजधानी के कई इलाकों में घना स्मॉग दिखाई दिया, जिससे बाहर निकलने वाले लोगों को असुविधा हुई।

प्रदूषण का सबसे अधिक असर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, हवा में मौजूद अत्यधिक सूक्ष्म पीएम2.5 कण सांस के जरिए फेफड़ों तक पहुंच सकते हैं और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

पंजाब-हरियाणा की पराली जलाने की घटनाओं का असर

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के पीछे मौसम की परिस्थितियों के साथ पड़ोसी राज्यों में पराली जलाने की घटनाओं को भी एक महत्वपूर्ण कारक माना जा रहा है।

उपग्रह आधारित आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को पंजाब और हरियाणा में पराली जलाने की कुल 226 घटनाएं दर्ज की गईं।

इससे पहले 3 और 4 नवंबर को दोनों राज्यों में प्रतिदिन 246 घटनाएं दर्ज हुई थीं।

उत्तर-पश्चिम दिशा से चलने वाली ऊपरी हवाएं इन इलाकों का धुआं दिल्ली की ओर ला सकती हैं।

हालांकि दिल्ली के प्रदूषण के लिए केवल पराली जलाने को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। वाहनों का धुआं, निर्माण गतिविधियां, सड़क की धूल और अन्य स्थानीय स्रोत भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं।

कम हवा की रफ्तार से राजधानी में जमा हुआ प्रदूषण

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, दिल्ली में गुरुवार रात हवा की रफ्तार काफी कम हो गई थी।

सफदरजंग में रात के दौरान कई बार लगभग शांत हवा की स्थिति दर्ज की गई।

कम हवा की गति के कारण प्रदूषक कण वातावरण में जमा होते रहे और उनका फैलाव सीमित हो गया।

इसके अलावा तापमान में उलटाव यानी टेम्परेचर इन्वर्जन की स्थिति भी देखने को मिली।

इस परिस्थिति में जमीन के पास ठंडी हवा के ऊपर गर्म हवा की परत बन जाती है, जिससे प्रदूषक कण ऊपर नहीं उठ पाते और निचले वातावरण में जमा रहते हैं।

इन्हीं मौसम संबंधी परिस्थितियों ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता को और खराब किया।

दिल्ली में GRAP-2 की पाबंदियां लागू

राजधानी में बढ़ते प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) के दूसरे चरण के उपाय लागू हैं।

GRAP-2 के अंतर्गत सड़कों की धूल कम करने, प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों की निगरानी और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने जैसे कदम उठाए जाते हैं।

शुक्रवार सुबह इंडिया गेट के आसपास सड़कों पर पानी का छिड़काव करने वाले वाहनों को भी तैनात किया गया।

अधिकारियों का उद्देश्य हवा में उड़ने वाली धूल को नियंत्रित करना और प्रदूषण के स्थानीय स्रोतों को कम करना है।

हालांकि प्रदूषण का स्तर कम करने के लिए लगातार निगरानी और प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता बनी हुई है।

दिवाली से पहले बढ़ी चिंता

इस वर्ष दिवाली 8 नवंबर को मनाई जाएगी।

त्योहार से दो दिन पहले ही दिल्ली की वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर के करीब पहुंच गई है।

ऐसे में दिवाली के दौरान होने वाली अतिरिक्त प्रदूषणकारी गतिविधियों और मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियों को लेकर चिंता बढ़ गई है।

यदि हवा की रफ्तार कम रही और प्रदूषक कणों का फैलाव सीमित रहा, तो आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता और खराब हो सकती है।

हालांकि प्रदूषण के स्तर में वास्तविक बदलाव मौसम, उत्सर्जन और प्रदूषण नियंत्रण उपायों के प्रभाव पर निर्भर करेगा।

दिल्ली और पंजाब सरकार के बीच बयानबाजी तेज

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान के बयानों पर सवाल उठाए हैं।

सिरसा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने धान की कटाई और पराली जलाने से संबंधित आंकड़ों को लेकर गलत जानकारी दी है।

उन्होंने दावा किया कि पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं के कारण दिल्ली की हवा प्रभावित हो रही है।

दूसरी ओर, पंजाब सरकार की ओर से पराली प्रबंधन को लेकर किए जा रहे प्रयासों का उल्लेख किया जाता रहा है।

प्रदूषण में विभिन्न स्रोतों के वास्तविक योगदान का आकलन वैज्ञानिक आंकड़ों और मौसम संबंधी परिस्थितियों के आधार पर किया जाना जरूरी है।

AQI 389 कितना खतरनाक है?

भारत के राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक में AQI को छह श्रेणियों में बांटा गया है।

  • 0 से 50: अच्छा
  • 51 से 100: संतोषजनक
  • 101 से 200: मध्यम
  • 201 से 300: खराब
  • 301 से 400: बेहद खराब
  • 401 से 500: गंभीर

इस आधार पर दिल्ली का औसत AQI 389 बेहद खराब श्रेणी में है, जबकि रोहिणी और आईआईटी दिल्ली जैसे इलाकों में दर्ज AQI 474 गंभीर श्रेणी में आता है।

इस स्तर की वायु गुणवत्ता लंबे समय तक संपर्क में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

प्रदूषण से बचने के लिए क्या करें?

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतना जरूरी है।

विशेष रूप से बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और अस्थमा या अन्य सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित लोगों को अनावश्यक बाहरी गतिविधियों से बचना चाहिए।

अत्यधिक प्रदूषित इलाकों में बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाले एन95 मास्क का उपयोग किया जा सकता है।

इसके अलावा घरों में बाहरी प्रदूषित हवा के प्रवेश को सीमित रखना और अधिक प्रदूषण वाले समय में बाहर व्यायाम करने से बचना उपयोगी हो सकता है।

सांस लेने में गंभीर परेशानी या सीने में दर्द होने पर तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

दिल्ली में अगले कुछ दिन महत्वपूर्ण

दिवाली से पहले दिल्ली की वायु गुणवत्ता में लगातार गिरावट देखी जा रही है।

शुक्रवार सुबह औसत AQI 389 पहुंचने और कई इलाकों में 400 से अधिक दर्ज होने के बाद प्रदूषण नियंत्रण उपायों की प्रभावशीलता पर भी ध्यान केंद्रित हो गया है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, हवा की गति और तापमान संबंधी परिस्थितियां आने वाले दिनों में प्रदूषण की स्थिति तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

फिलहाल दिल्ली में GRAP-2 के उपाय लागू हैं और लोगों को वायु गुणवत्ता की नियमित जानकारी लेने तथा स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी जा रही है।

स्रोत: केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), हिंदुस्तान टाइम्स, टाइम्स ऑफ इंडिया, बिजनेस स्टैंडर्ड, द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया मौसम विभाग (IMD)।

जय राष्ट्र न्यूज़

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