नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट और दूरसंचार सेवाओं को लेकर बड़ा बदलाव हो सकता है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 5 नवंबर को सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क के लिए नया नियामकीय ढांचा प्रस्तावित किया है। इसके तहत एक नई श्रेणी की सैटेलाइट नेटवर्क कंपनियों को दूरसंचार ऑपरेटरों और अधिकृत सेवा प्रदाताओं को नेटवर्क सुविधा देने की अनुमति होगी, लेकिन वे सीधे आम ग्राहकों को टेलीकॉम सेवाएं नहीं दे सकेंगी। इस प्रस्ताव में मोबाइल फोन को सीधे सैटेलाइट से जोड़ने वाली तकनीक के लिए भी रास्ता खोलने की सिफारिश की गई है।
TRAI ने सैटेलाइट इंटरनेट के लिए जारी की नई सिफारिशें
भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण ने 5 नवंबर 2026 को ‘सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रोवाइडर ऑथराइजेशन और स्पेक्ट्रम आवंटन’ से संबंधित अपनी सिफारिशें जारी कीं।
प्राधिकरण ने दूरसंचार अधिनियम 2023 के तहत सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क (SCN) प्रोवाइडर नाम से एक नई अधिकृत श्रेणी बनाने का प्रस्ताव दिया है।
इस व्यवस्था में सैटेलाइट नेटवर्क संचालित करने वाली कंपनियां अपनी नेटवर्क क्षमता अन्य पात्र टेलीकॉम और इंटरनेट सेवा प्रदाताओं को उपलब्ध करा सकेंगी।
हालांकि नई SCN श्रेणी के तहत अधिकृत कंपनियों को सीधे अंतिम उपभोक्ताओं को दूरसंचार सेवाएं देने की अनुमति नहीं होगी।
कंपनियां सीधे ग्राहकों को क्यों नहीं बेच सकेंगी सेवाएं?
TRAI ने सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क ऐज ए सर्विस (SCNaaS) मॉडल अपनाने की सिफारिश की है।
इस मॉडल में सैटेलाइट नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली कंपनियां और अंतिम उपभोक्ताओं को इंटरनेट या टेलीकॉम सेवा देने वाली कंपनियां अलग-अलग भूमिकाएं निभाएंगी।
सैटेलाइट नेटवर्क कंपनी बुनियादी ढांचा, क्षमता और कनेक्टिविटी उपलब्ध कराएगी।
इसके बाद पात्र दूरसंचार या इंटरनेट सेवा प्रदाता उस नेटवर्क का इस्तेमाल करके ग्राहकों तक सेवाएं पहुंचा सकेंगे।
इसका अर्थ यह नहीं है कि भारत में सभी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों पर सीधे ग्राहकों को सेवाएं देने की पूर्ण रोक लगाई जा रही है। प्रस्तावित प्रतिबंध विशेष रूप से नई SCN नेटवर्क प्रदाता श्रेणी पर लागू होगा।
अन्य उपयुक्त लाइसेंस और सरकारी अनुमतियों के तहत उपभोक्ता सेवाओं का संचालन अलग नियमों के अनुसार हो सकता है।
मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट से हो सकेंगे कनेक्ट
TRAI की नई सिफारिशों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा डायरेक्ट-टू-डिवाइस (D2D) कनेक्टिविटी है।
इस तकनीक की मदद से भविष्य में मोबाइल फोन सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ सकेंगे।
इससे उन स्थानों पर संपर्क स्थापित करने में मदद मिल सकती है, जहां मोबाइल टावर या पारंपरिक नेटवर्क उपलब्ध नहीं हैं।
TRAI ने इस तकनीक के लिए दो प्रमुख व्यवस्थाओं का प्रस्ताव दिया है।
पहली व्यवस्था में मोबाइल सैटेलाइट सर्विस (MSS) के लिए निर्धारित स्पेक्ट्रम का उपयोग किया जा सकेगा।
दूसरी व्यवस्था में सामान्य मोबाइल नेटवर्क के लिए आवंटित स्पेक्ट्रम के माध्यम से सैटेलाइट कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने का विकल्प शामिल है।
हालांकि यह तकनीक लागू होने के बाद भी सभी मौजूदा स्मार्टफोन में अपने आप उपलब्ध नहीं होगी। इसके लिए उपयुक्त हार्डवेयर, नेटवर्क समर्थन और नियामकीय मंजूरी जरूरी होगी।
Starlink, OneWeb और Jio Satellite पर क्या असर पड़ेगा?
TRAI का प्रस्ताव भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन क्षेत्र से जुड़ी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस क्षेत्र में Starlink, Eutelsat OneWeb, Jio Satellite Communications, Amazon Leo और Tata की Nelco जैसी कंपनियां सक्रिय या संभावित भागीदार हैं।
नई व्यवस्था लागू होने पर पात्र कंपनियां आवश्यक मंजूरी लेकर अपना सैटेलाइट नेटवर्क अन्य दूरसंचार कंपनियों को उपलब्ध करा सकेंगी।
इससे सैटेलाइट नेटवर्क संचालकों और पारंपरिक टेलीकॉम कंपनियों के बीच साझेदारी के नए अवसर विकसित हो सकते हैं।
हालांकि Starlink, OneWeb और Jio Satellite जैसी कंपनियों की वाणिज्यिक सेवाओं की शुरुआत के लिए सुरक्षा संबंधी आवश्यकताओं, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य सरकारी मंजूरियों की प्रक्रिया महत्वपूर्ण बनी हुई है।
20 साल के लिए मिल सकती है अनुमति
TRAI ने प्रस्ताव दिया है कि नई सैटेलाइट कम्युनिकेशन नेटवर्क प्रदाता श्रेणी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर अनुमति दी जाए।
इस अनुमति की अधिकतम अवधि 20 वर्ष रखने की सिफारिश की गई है।
निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर इसे अगले 20 वर्षों तक नवीनीकृत करने की व्यवस्था भी प्रस्तावित है।
इससे कंपनियों को लंबे समय के लिए नेटवर्क में निवेश और बुनियादी ढांचे के विकास की योजना बनाने में मदद मिल सकती है।
इसके अलावा सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के आवंटन और उपयोग से संबंधित शर्तें भी प्रस्तावित की गई हैं।
स्पेक्ट्रम आवंटन के लिए क्या होंगे नियम?
TRAI ने सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाताओं के लिए स्पेक्ट्रम आवंटन से संबंधित वित्तीय और तकनीकी शर्तों की सिफारिश की है।
प्रस्ताव के अनुसार, सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाता को अनुमति प्राप्त करने के लिए ₹37.5 लाख का प्रवेश शुल्क देना पड़ सकता है।
कंपनियों के लिए न्यूनतम इक्विटी और नेटवर्थ ₹60 लाख निर्धारित करने की सिफारिश की गई है।
इसके अलावा समायोजित सकल राजस्व (AGR) का 8 प्रतिशत अनुमति शुल्क प्रस्तावित किया गया है।
सैटेलाइट स्पेक्ट्रम के लिए निर्धारित शुल्क भी लागू हो सकते हैं।
इन शर्तों का अंतिम स्वरूप सरकार की स्वीकृति और लागू किए जाने वाले नियमों पर निर्भर करेगा।
दूरदराज के गांवों और पहाड़ी इलाकों को हो सकता है फायदा
सैटेलाइट आधारित कनेक्टिविटी का एक प्रमुख उपयोग उन क्षेत्रों में इंटरनेट और संचार सुविधाएं पहुंचाना है, जहां पारंपरिक नेटवर्क विकसित करना कठिन होता है।
भारत के पहाड़ी, सीमावर्ती, वन क्षेत्रों और दूरदराज के गांवों में कई स्थानों पर मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता सीमित है।
यदि प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सैटेलाइट सेवाओं का विस्तार होता है, तो ऐसे इलाकों में कनेक्टिविटी बेहतर बनाने के नए विकल्प मिल सकते हैं।
इसके अलावा प्राकृतिक आपदाओं और अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में भी सैटेलाइट आधारित संचार उपयोगी हो सकता है।
हालांकि वास्तविक सेवा उपलब्धता संबंधित तकनीक, उपकरणों, नेटवर्क क्षमता और कंपनियों की व्यावसायिक योजनाओं पर निर्भर करेगी।
क्या अब सामान्य मोबाइल में बिना टावर के इंटरनेट चलेगा?
TRAI की सिफारिशों के बाद यह सवाल महत्वपूर्ण हो गया है कि क्या सामान्य स्मार्टफोन बिना मोबाइल टावर के इंटरनेट इस्तेमाल कर सकेंगे।
प्रस्तावित D2D तकनीक के तहत भविष्य में कुछ उपयुक्त स्मार्टफोन सीधे सैटेलाइट से जुड़ सकते हैं।
हालांकि इस सुविधा का इस्तेमाल किन सेवाओं के लिए किया जा सकेगा, यह तकनीक और संबंधित नेटवर्क की क्षमता पर निर्भर करेगा।
शुरुआती चरणों में सैटेलाइट आधारित मोबाइल कनेक्टिविटी का उपयोग सीमित मैसेजिंग या आपातकालीन संचार जैसी सेवाओं के लिए भी किया जा सकता है।
सामान्य मोबाइल ब्रॉडबैंड जैसी व्यापक इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए अतिरिक्त तकनीकी क्षमता और बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होगी।
इसलिए यह कहना अभी सही नहीं होगा कि TRAI के प्रस्ताव के बाद हर मोबाइल फोन पर तुरंत बिना टावर के इंटरनेट चलने लगेगा।
दूरसंचार विभाग लेगा अंतिम फैसला
TRAI की ओर से जारी सिफारिशें फिलहाल प्रस्तावित नियामकीय ढांचे का हिस्सा हैं।
इन सिफारिशों को दूरसंचार विभाग (DoT) के पास भेजा गया है।
दूरसंचार विभाग प्रस्ताव की समीक्षा करेगा और उसके बाद केंद्र सरकार अंतिम निर्णय लेगी।
TRAI की सिफारिशें सरकार पर बाध्यकारी नहीं हैं। इसलिए प्रस्ताव में बदलाव भी किया जा सकता है।
नई व्यवस्था कब से लागू होगी, इसकी अंतिम तारीख अभी घोषित नहीं की गई है।
भारत में सैटेलाइट इंटरनेट के विस्तार का रास्ता खुल सकता है
भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन से जुड़ी नई नीति दूरसंचार क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
इसके तहत नेटवर्क उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और उपभोक्ता सेवाएं देने वाले ऑपरेटरों के बीच स्पष्ट व्यवस्था विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।
साथ ही सीधे मोबाइल से सैटेलाइट कनेक्टिविटी की संभावना भविष्य में दूरदराज के इलाकों और आपातकालीन संचार सुविधाओं के लिए उपयोगी हो सकती है।
हालांकि इन सेवाओं की वास्तविक शुरुआत, कीमतों और उपलब्धता के बारे में स्थिति सरकार की अंतिम मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगी।
फिलहाल TRAI की नई सिफारिशों ने भारत में सैटेलाइट इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी को लेकर नए नियामकीय बदलावों की दिशा तय करने का प्रस्ताव रखा है।
स्रोत: भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI), पत्र सूचना कार्यालय (PIB), प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया (PTI), मनीकंट्रोल, बिजनेस स्टैंडर्ड, लाइवमिंट, द इकोनॉमिक टाइम्स।
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