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टायगर श्रॉफ गोळीबार प्रकरणात मोठी अपडेट; तिन्ही संशयित कोटा येथे अटकेत

मुंबई/कोटा, 20 ऑक्टोबर 2026: बॉलिवूड अभिनेता टायगर श्रॉफच्या वाहनावर झालेल्या कथित गोळीबार प्रकरणात पोलिसांना महत्त्वाचे यश मिळाले आहे. या प्रकरणातील तीन संशयितांना राजस्थानमधील कोटा येथे अटक करण्यात आली. पोलिसांच्या माहितीनुसार, संशयित मुंबईहून दिल्लीच्या दिशेने जाणाऱ्या ट्रेनमधून प्रवास करत होते. त्यानंतर नेपाळला पळून जाण्याची त्यांची योजना असल्याचा पोलिसांचा दावा आहे. कोण आहेत अटक करण्यात आलेले संशयित? पोलिसांनी दोन प्रौढ संशयितांची ओळख रेहान उर्फ सुक्का आणि ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन अशी केली आहे. तिसरा संशयित 17 वर्षांचा अल्पवयीन असल्याचे वृत्त आहे. या तिघांची गोळीबारातील नेमकी भूमिका तपासली जात आहे. ट्रेनमध्ये शोधमोहीम राबवून कारवाई मुंबई पोलिसांकडून मिळालेल्या माहितीच्या आधारे कोटा पोलिसांनी पुणे–जयपूर एक्स्प्रेसमध्ये शोधमोहीम राबवली. पोलिसांनी ट्रेनमधील बाहेर पडण्याचे मार्ग बंद करून सामान्य डब्याची तपासणी केली. त्यानंतर तिन्ही संशयितांना ताब्यात घेण्यात आले. दिल्लीमार्गे नेपाळला पळून जाण्याचा कथित प्रयत्न प्राथमिक चौकशीत संशयित दिल्लीपर्यंत पोहोचल्यानंतर नेपाळकडे जाण्याचा प्रयत्न करत असल्याचा दावा पोलिसांनी केला आहे. मात्र, त्यांच्या प्रवासाचा नेमका मार्ग आणि पळून जाण्याच्या कथित योजनेबाबत अधिक माहिती पुढील तपासानंतर स्पष्ट होणार आहे. मुंबई पोलिसांच्या ताब्यात कोटा येथे आवश्यक न्यायालयीन प्रक्रिया पूर्ण केल्यानंतर तिन्ही संशयितांना 48 तासांच्या ट्रान्झिट रिमांडवर मुंबई पोलिसांच्या ताब्यात देण्यात आल्याचे वृत्त आहे. मुंबई क्राइम ब्रँच त्यांची चौकशी करून गोळीबारामागील संभाव्य हेतू, शस्त्राचा स्रोत आणि या प्रकरणात इतर कोणाचा सहभाग आहे का, याचा तपास करणार आहे. गोळीबाराची घटना कधी घडली? मिळालेल्या वृत्तांनुसार, मुंबईतील जुहू परिसरात रविवारी सायंकाळी सुमारे 7 वाजण्याच्या सुमारास टायगर श्रॉफ एका फुटबॉल क्लबमधून बाहेर पडत असताना त्यांच्या वाहनावर गोळीबार झाल्याचा आरोप आहे. या घटनेत अभिनेता सुरक्षित असल्याचे, तर वाहनचालक आणि आणखी एक व्यक्ती जखमी झाल्याचे वृत्त आहे. गँगशी संबंध असल्याचा तपास या प्रकरणामागे संघटित गुन्हेगारी किंवा एखाद्या टोळीचा संबंध आहे का, याचाही मुंबई पोलीस तपास करत आहेत. सोशल मीडियावर विविध दावे समोर आले असले, तरी तपास पूर्ण होईपर्यंत त्यांची स्वतंत्रपणे पुष्टी झालेली माहिती म्हणून दखल घेता येणार नाही. स्रोत: ANI, PTI, Amar Ujala, LiveMint आणि ABP Live जय राष्ट्र न्यूज़

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महात्मा गांधी को 5 बार मिला Nobel Peace Prize के लिए नामांकन, फिर भी नहीं मिला सम्मान

नई दिल्ली, 20 अक्टूबर 2026: महात्मा गांधी को दुनिया भर में अहिंसा और सत्याग्रह के सबसे प्रमुख प्रतीकों में गिना जाता है। हालांकि, उनके जीवन से जुड़ा एक ऐतिहासिक तथ्य आज भी चर्चा का विषय है—गांधी को कभी Nobel Peace Prize नहीं मिला, जबकि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार उन्हें पांच अलग-अलग वर्षों में इस सम्मान के लिए नामांकित किया गया था। ये वर्ष थे 1937, 1938, 1939, 1947 और 1948। पांच बार हुआ नामांकन Nobel Prize के आधिकारिक अभिलेखों के अनुसार, महात्मा गांधी का नाम पहली बार 1937 में शांति पुरस्कार के लिए प्रस्तावित किया गया था। इसके बाद 1938 और 1939 में भी उन्हें नामांकन मिला। भारत की स्वतंत्रता के वर्ष 1947 में और फिर 1948 में भी उनका नाम पुरस्कार के लिए सामने आया। 1948 में क्यों नहीं मिला Nobel Peace Prize? 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई। उसी वर्ष Norwegian Nobel Committee ने किसी भी व्यक्ति को शांति पुरस्कार नहीं दिया। समिति ने इसके पीछे यह तर्क दिया कि उस समय कोई उपयुक्त जीवित उम्मीदवार नहीं था। Nobel Prize की आधिकारिक ऐतिहासिक सामग्री में गांधी को पुरस्कार न मिलना एक महत्वपूर्ण प्रसंग के रूप में दर्ज है। उनके योगदान और उस समय की परिस्थितियों को देखते हुए यह सवाल आज भी उठता है कि यदि वे जीवित रहते, तो क्या उन्हें यह सम्मान मिल सकता था। क्या मरणोपरांत दिया जा सकता था पुरस्कार? गांधी की हत्या के बाद उन्हें मरणोपरांत Nobel Peace Prize देने की संभावना पर विचार किया गया था। हालांकि, उस समय लागू नियमों और समिति की व्याख्या के बीच कई व्यावहारिक तथा कानूनी सवाल थे। Nobel Prize की ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार, समिति के अधिकांश सदस्य मरणोपरांत पुरस्कार देने के पक्ष में नहीं थे। अंततः गांधी को यह सम्मान नहीं दिया गया। Dalai Lama को पुरस्कार के दौरान गांधी का जिक्र 1989 में Dalai Lama को Nobel Peace Prize से सम्मानित किए जाने के अवसर पर समिति के अध्यक्ष ने महात्मा गांधी की विरासत का उल्लेख किया था। इस सम्मान को गांधी की स्मृति और अहिंसा के उनके विचारों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में भी देखा गया। Nobel से कहीं बड़ी है गांधी की विरासत महात्मा गांधी को Nobel Peace Prize भले ही नहीं मिला, लेकिन अहिंसा, सत्याग्रह और शांतिपूर्ण प्रतिरोध के उनके सिद्धांतों ने दुनिया भर के आंदोलनों को प्रभावित किया। Martin Luther King Jr. और Nelson Mandela सहित कई नेताओं के विचारों और संघर्षों पर गांधी की विरासत का प्रभाव देखा जाता है। उनका जीवन इस बात का उदाहरण है कि किसी व्यक्ति के ऐतिहासिक योगदान का महत्व केवल पुरस्कारों से तय नहीं होता। गांधी के विचार आज भी शांति, समानता और नागरिक अधिकारों से जुड़ी चर्चाओं में प्रासंगिक बने हुए हैं। स्रोत: NobelPrize.org / Norwegian Nobel Committee जय राष्ट्र न्यूज़

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Mumbai Fire: दादर की Kohinoor Square बिल्डिंग के होटल में लगी आग, दमकल ने पाया काबू

मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: मुंबई के दादर वेस्ट स्थित Kohinoor Square बिल्डिंग में सोमवार सुबह एक होटल की रसोई में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। यह इमारत शिवसेना भवन के सामने स्थित है। मुंबई फायर ब्रिगेड को सुबह 9:18 बजे आग लगने की सूचना मिली, जिसके बाद सुबह 9:25 बजे इसे लेवल-1 फायर घोषित किया गया। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, घटना में किसी के घायल होने की खबर नहीं है। होटल की पहली मंजिल की रसोई में लगी आग फायर ब्रिगेड के अनुसार, आग Kohinoor Square की पहली मंजिल पर स्थित एक होटल की रसोई तक सीमित थी। घटना के सामने आए वीडियो में इमारत के अंदर धुआं दिखाई दिया। इस दौरान होटल के कर्मचारियों को बाहर निकलते हुए भी देखा गया। 50 मंजिला इमारत में मचा हड़कंप Kohinoor Square एक ग्राउंड प्लस 50 मंजिला इमारत है। आग की सूचना मिलते ही मुंबई फायर ब्रिगेड के साथ मुंबई पुलिस, BEST, PWD, नगर निगम के स्वास्थ्य विभाग, एंबुलेंस और संबंधित वार्ड के कर्मचारियों को मौके पर तैनात किया गया। ऊंची इमारत में आग लगने की खबर से आसपास के क्षेत्र में चिंता बढ़ गई। आपातकालीन टीमों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभालने के लिए कार्रवाई की। दमकल विभाग ने आग पर पाया काबू ताजा जानकारी के मुताबिक, दमकल विभाग ने आग पर काबू पा लिया है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। समय पर आपातकालीन कार्रवाई से स्थिति को नियंत्रित करने में मदद मिली। आग लगने की वजह का पता लगाया जा रहा फिलहाल आग लगने के सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। संबंधित अधिकारी आग के स्रोत और उससे हुए नुकसान का आकलन कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की वजह स्पष्ट हो सकेगी। समय पर कार्रवाई से टला बड़ा हादसा Kohinoor Square जैसी ऊंची इमारत में आग लगने के कारण शुरुआती धुएं के वीडियो ने लोगों की चिंता बढ़ा दी थी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार आग होटल की रसोई तक सीमित रही और दमकल विभाग ने उस पर काबू पा लिया। फिलहाल किसी बड़े नुकसान या जनहानि की पुष्टि नहीं हुई है। Source: PTI, Mid-Day, NDTV Marathi, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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बाबा केदार के भक्तों के लिए बड़ी खबर: भैया दूज पर बंद होंगे केदारनाथ धाम के कपाट, आधिकारिक तारीख का इंतजार

रुद्रप्रयाग, 19 अक्टूबर 2026: बाबा केदार के दर्शन की योजना बना रहे श्रद्धालुओं के लिए जरूरी खबर है। केदारनाथ धाम के कपाट हर साल सर्दियों की शुरुआत से पहले बंद किए जाते हैं। परंपरा के अनुसार, कपाट बंद करने की तिथि भैया दूज के आसपास निर्धारित की जाती है। हालांकि, 2026 के लिए कपाट बंद होने की आधिकारिक तारीख की पुष्टि मंदिर समिति की औपचारिक घोषणा के बाद ही होगी। कब बंद हो सकते हैं केदारनाथ धाम के कपाट? उपलब्ध तीर्थयात्रा कैलेंडर के अनुसार, भैया दूज 11 नवंबर 2026 के आसपास पड़ रही है। इसी आधार पर कुछ यात्रा पोर्टल केदारनाथ धाम के कपाट बंद होने की संभावित तारीख 11 नवंबर बता रहे हैं। हालांकि, मंदिर समिति की आधिकारिक घोषणा के बिना इस तारीख को अंतिम नहीं माना जाना चाहिए। सर्दियों में क्यों बंद किया जाता है मंदिर? केदारनाथ धाम हिमालय के ऊंचाई वाले क्षेत्र में स्थित है, जहां सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी और अत्यधिक ठंड की स्थिति बन सकती है। इसी वजह से हर साल शीतकाल शुरू होने से पहले मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं। कपाट बंद होने के बाद भगवान केदारनाथ की उत्सव डोली को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ले जाया जाता है। यहां सर्दियों के दौरान भगवान की पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालु दर्शन कर सकते हैं। 22 अप्रैल को खुले थे केदारनाथ धाम के कपाट 2026 में केदारनाथ धाम के कपाट 22 अप्रैल को श्रद्धालुओं के लिए खोले गए थे। इसके बाद से भक्त बड़ी संख्या में बाबा केदार के दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। अब यात्रा सीजन के समापन से पहले कपाट बंद होने की तारीख और समारोह के समय को लेकर श्रद्धालुओं की नजर आधिकारिक सूचना पर है। यात्रा पर जाने से पहले इन बातों का रखें ध्यान अगर आप अक्टूबर के आखिरी दिनों या नवंबर की शुरुआत में केदारनाथ यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो यात्रा से पहले मंदिर समिति और उत्तराखंड पर्यटन विभाग की आधिकारिक जानकारी जरूर जांचें। आधिकारिक घोषणा पर श्रद्धालुओं की नजर कपाट बंद होने की तारीख को लेकर फिलहाल संभावित तिथि की चर्चा है। श्रद्धालुओं को अंतिम जानकारी के लिए श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) की घोषणा का इंतजार करना चाहिए। आधिकारिक तारीख सामने आने के बाद कपाट बंद होने के समारोह और शीतकालीन पूजा से जुड़ी जानकारी भी स्पष्ट हो जाएगी। Source: Shri Badarinath-Kedarnath Temple Committee, Uttarakhand Tourism जय राष्ट्र न्यूज़

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस: नेपाल भागने की कोशिश कर रहे 3 संदिग्ध कोटा से पकड़े गए, एक नाबालिग भी शामिल

कोटा/मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: बॉलीवुड अभिनेता Tiger Shroff की कार पर फायरिंग के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को पकड़ा है। कोटा पुलिस के मुताबिक, तीनों दिल्ली पहुंचने के बाद नेपाल भागने की योजना बना रहे थे। पकड़े गए लोगों में एक 17 वर्षीय नाबालिग भी शामिल है। ट्रेन से पकड़े गए तीनों संदिग्ध मुंबई पुलिस से मिली सूचना के बाद कोटा पुलिस ने Pune-Jaipur Express की तलाशी ली और ट्रेन के जनरल कोच से तीनों संदिग्धों को हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, सूचना मिलने के करीब 15 से 20 मिनट के भीतर कार्रवाई की गई। दो पर फायरिंग करने का आरोप, तीसरा बाइक-टैक्सी राइडर कोटा पुलिस के मुताबिक, पकड़े गए लोगों में से दो पर कथित तौर पर Tiger Shroff की कार पर फायरिंग करने का आरोप है, जबकि तीसरा बाइक-टैक्सी राइडर बताया जा रहा है। तीनों की भूमिका और घटना में उनकी भागीदारी को लेकर आगे की जांच की जा रही है। कौन हैं पकड़े गए संदिग्ध? पुलिस ने दो वयस्क संदिग्धों की पहचान हरियाणा के सोनीपत निवासी Rehan उर्फ Sukka और मूल रूप से बिहार के बेगूसराय के रहने वाले Hritik Kurmi उर्फ Roshan के रूप में बताई है। Hritik के मुंबई में रहने की जानकारी भी सामने आई है। तीसरा संदिग्ध 17 वर्षीय नाबालिग है, जिसकी पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। दिल्ली से नेपाल भागने की थी योजना कोटा की पुलिस अधीक्षक Tejaswani Gautam के मुताबिक, शुरुआती पूछताछ में पता चला कि तीनों दिल्ली पहुंचने के बाद नेपाल भागने की तैयारी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि फिलहाल उनके पास से कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। Lawrence Bishnoi नेटवर्क से संबंध की जांच पुलिस के अनुसार, Rehan पहले Anil Pandit के संपर्क में था। Anil Pandit को कथित तौर पर Lawrence Bishnoi नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि, इस मामले में गैंग से संबंध, फायरिंग के पीछे की वजह और अन्य लोगों की भूमिका की जांच अभी जारी है। किसी भी कथित गैंग कनेक्शन को फिलहाल स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। मुंबई पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कोटा पुलिस ने तीनों संदिग्धों को हिरासत में लेने के बाद मुंबई पुलिस को सौंपने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मुंबई क्राइम ब्रांच उनसे हथियारों की व्यवस्था, हमले की योजना, संभावित सहयोगियों और घटना के पीछे की साजिश से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ करेगी। फिलहाल, मामले में जांच जारी है और पुलिस की आगे की कार्रवाई से फायरिंग की पूरी घटना तथा संदिग्धों की कथित भूमिका को लेकर और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, India Today, Hindustan Times, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP ने Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर देरी का लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने किया इनकार

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2026: Cockroach Janta Party (CJP) ने अपने नेताओं Ashutosh Ranka और Saurav Das की रिहाई में जानबूझकर प्रक्रियात्मक देरी किए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि कई जमानतदारों के दस्तावेज और श्योरिटी बॉन्ड जमा करने के बावजूद दोनों की रिहाई की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई। वहीं, दिल्ली पुलिस ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन किया जा रहा है। CJP ने क्या आरोप लगाए? CJP की कानूनी टीम के मुताबिक, रिहाई की प्रक्रिया के दौरान बार-बार नई प्रक्रियात्मक आपत्तियां उठाई गईं। पार्टी ने आरोप लगाया कि कई श्योरिटी को बिना स्पष्ट कारण स्वीकार नहीं किया गया और जरूरी दस्तावेजों को आगे बढ़ाने में भी देरी हुई। पार्टी का कहना है कि सभी आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बावजूद दोनों नेताओं की रिहाई में बाधाएं बनी रहीं। दिल्ली पुलिस ने क्या सफाई दी? दिल्ली पुलिस ने जानबूझकर देरी किए जाने के आरोपों से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक, जमा किए गए श्योरिटी बॉन्ड में कुछ समस्याएं थीं और संबंधित स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष प्रक्रिया पूरी करना आवश्यक था। इस तरह, रिहाई में देरी को लेकर CJP और पुलिस के दावों में विरोधाभास बना हुआ है। मजिस्ट्रेट को कथित धमकियों का मामला मामले में उस समय एक और घटनाक्रम सामने आया, जब स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने कथित तौर पर जान से मारने की धमकियां मिलने की शिकायत की। इस शिकायत के आधार पर अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। हालांकि, धमकियों के पीछे कौन लोग हैं और उनका इस मामले से क्या संबंध है, यह जांच का विषय है। जमानत और रिहाई की सुनवाई भी टली रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोनों नेताओं की जमानत या रिहाई से संबंधित सुनवाई टल गई। इसके बाद संबंधित मजिस्ट्रेट के मामले से अलग होने की खबर सामने आई। बताया गया कि उन्होंने अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। इन घटनाक्रमों के कारण रिहाई की प्रक्रिया और लंबी हो गई। जंतर-मंतर प्रदर्शन से जुड़ा है मामला Ashutosh Ranka और Saurav Das को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में हिरासत में लिया गया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों ने पहले दिए गए शांति बनाए रखने संबंधी बॉन्ड की शर्तों का उल्लंघन किया। दूसरी ओर, CJP इस कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला बता रही है। 19 अक्टूबर को रिहाई पर नजर 19 अक्टूबर को दोनों नेताओं की हिरासत की अवधि समाप्त होने के करीब होने के बीच उनकी रिहाई को लेकर स्थिति महत्वपूर्ण बनी हुई है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग कर सकती है, जबकि CJP दोनों नेताओं की तत्काल रिहाई पर जोर दे रही है। फिलहाल, रिहाई में देरी को लेकर पार्टी और पुलिस के अलग-अलग दावे सामने हैं। मामले की आगे की कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। Source: The Indian Express, Hindustan Times, India Today, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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MP में अवैध रेत खनन पर NGT पैनल की गंभीर टिप्पणी, स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका

भोपाल, 19 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से जुड़ी एक जांच समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पैनल ने संकेत दिया है कि लगातार कार्रवाई और निगरानी के दावों के बावजूद अवैध खनन जारी रहना स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका पैदा करता है। स्पेशल टास्क फोर्स के बावजूद जारी है अवैध खनन रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में कार्रवाई प्रभावी नहीं रही। पैनल ने सवाल उठाया कि लगातार शिकायतों और कार्रवाई के दावों के बावजूद अवैध खनन पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है। अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश पैनल ने प्रवर्तन व्यवस्था में सामने आ रही कमियों की जांच करने और जहां कर्तव्य में लापरवाही साबित हो, वहां जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध खनन पर नियंत्रण में नाकामी प्रशासनिक कमजोरियों के कारण है या कहीं जानबूझकर संरक्षण दिए जाने की आशंका भी है। नियमित निगरानी समिति बनाने का सुझाव NGT पैनल ने अवैध खनन पर लगातार नजर रखने के लिए एक नियमित निगरानी समिति गठित करने की सलाह दी है। इसके साथ ही हर महीने कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने की सिफारिश भी की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाना और कार्रवाई की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों से संभावित गठजोड़ अभी जांच का विषय पैनल की टिप्पणी में संभावित गठजोड़ और कार्रवाई में कमियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन किसी विशिष्ट अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है। अधिकारियों की मिलीभगत को स्थापित तथ्य तभी माना जा सकता है, जब आगे की जांच में इसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं। पर्यावरण पर भी पड़ सकता है गंभीर असर अवैध रेत खनन से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल पुनर्भरण और आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पैनल ने केवल छापेमारी और जब्ती तक सीमित रहने के बजाय निरंतर निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। Source: The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Maharashtra MLC चुनाव से पहले Mahayuti में बढ़ी खींचतान, BJP उम्मीदवारों के खिलाफ Shinde Sena के नेताओं ने खोला मोर्चा

मुंबई/पुणे, 19 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों पर 23 अक्टूबर को होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन के भीतर BJP और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के बीच मतभेद सामने आए हैं। पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र और छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिंदे सेना के कुछ नेताओं ने BJP समर्थित उम्मीदवारों के बजाय दूसरे प्रत्याशियों का समर्थन करने का रुख अपनाया है। इससे गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठने लगे हैं। पुणे में BJP उम्मीदवार के बजाय निर्दलीय को समर्थन पुणे शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में BJP ने Kaustubh Gawade को उम्मीदवार बनाया है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, शिंदे सेना ने निर्दलीय उम्मीदवार Sachin Sanap को समर्थन देने का फैसला किया है। गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच अलग-अलग उम्मीदवारों के समर्थन से महायुति की एकजुटता पर चर्चा तेज हो गई है। संभाजीनगर में Abdul Sattar का अलग रुख छत्रपति संभाजीनगर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में शिंदे सेना के विधायक Abdul Sattar ने महायुति के उम्मीदवार के बजाय महाविकास अघाड़ी (MVA) के Satish Chavan का समर्थन करने की बात कही है। इस रुख के बीच पार्टी के अंतिम निर्णय को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में एकनाथ शिंदे के निर्देश को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अमरावती और नागपुर में भी असंतोष गठबंधन के भीतर असंतोष की स्थिति केवल पुणे और संभाजीनगर तक सीमित नहीं है। अमरावती शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र में भी BJP और शिंदे सेना से जुड़े बागी नेताओं को लेकर तनाव की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, BJP ने अपने कुछ बागी नेताओं के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की है, जबकि शिंदे सेना का रुख अपेक्षाकृत नरम रहा। दोनों सहयोगी दलों के अलग-अलग तरीकों ने गठबंधन के भीतर मतभेदों को और चर्चा में ला दिया है। Devendra Fadnavis को मतभेद सुलझने की उम्मीद मुख्यमंत्री Devendra Fadnavis ने भरोसा जताया है कि महायुति के भीतर के मतभेद सुलझा लिए जाएंगे। इस बीच, गठबंधन में अंतिम चुनावी दिशा को लेकर एकनाथ शिंदे की भूमिका अहम मानी जा रही है। Fadnavis का सांगली दौरा भी चुनावी अभियान के समन्वय और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल मजबूत करने के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 23 अक्टूबर को पांच सीटों पर मतदान महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान होना निर्धारित है। इनमें तीन स्नातक और दो शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। चुनाव से पहले सहयोगी दलों के नेताओं के अलग-अलग रुख ने महायुति के सामने विपक्ष से मुकाबले के साथ-साथ गठबंधन के भीतर तालमेल बनाए रखने की चुनौती भी खड़ी कर दी है। Source: The Indian Express, Jansatta, Loksatta, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Nvidia की अगली पीढ़ी की AI मेमोरी के लिए Samsung करेगा TSMC की 3nm टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल

सियोल, 19 अक्टूबर 2026: सेमीकंडक्टर उद्योग में एक अहम घटनाक्रम के तहत Samsung Electronics, Nvidia की अगली पीढ़ी की कस्टम हाई-बैंडविड्थ मेमोरी (HBM) चिप्स के लिए ताइवान की TSMC की 3-नैनोमीटर प्रोसेस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर सकता है। यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आई है। यदि यह व्यवस्था लागू होती है, तो HBM उत्पादन के इस चरण में Samsung और TSMC के बीच एक नई तरह का सहयोग देखने को मिलेगा। Nvidia ने सप्लायर्स को क्या निर्देश दिए? रिपोर्ट्स के मुताबिक, Nvidia ने Samsung के साथ-साथ SK Hynix और Micron को भी अपने नए NVHBM मेमोरी प्लेटफॉर्म के लिए TSMC की 3nm प्रोसेस पर बेस डाई बनाने की आवश्यकता बताई है। इसके अलावा, मेमोरी के कोर डाई के लिए छठी पीढ़ी की DRAM तकनीक इस्तेमाल करने की शर्त भी रखी गई है। क्या है Nvidia का NVHBM प्लेटफॉर्म? Nvidia ने अगस्त में NVHBM प्लेटफॉर्म पेश किया था। इस तकनीक में कंपनी का अपना मेमोरी कंट्रोलर बेस डाई में इंटीग्रेट किया जाता है। इससे अलग-अलग मेमोरी सप्लायर्स के उत्पादों में डिजाइन और तकनीकी कार्यान्वयन को अधिक मानकीकृत बनाने में मदद मिल सकती है। Samsung ने स्वीकार किया प्रस्ताव Seoul Economic Daily की रिपोर्ट के अनुसार, Samsung ने आंतरिक समीक्षा के बाद Nvidia की इस आवश्यकता को स्वीकार कर लिया है। हालांकि, कंपनी पारंपरिक HBM और अन्य ग्राहकों के लिए तैयार किए जाने वाले कस्टम उत्पादों में अपने इन-हाउस मैन्युफैक्चरिंग मॉडल को जारी रखेगी। प्रतिस्पर्धी कंपनियों के बीच सहयोग क्यों अहम? Samsung और TSMC सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में प्रमुख प्रतिस्पर्धी हैं। ऐसे में Nvidia की अगली पीढ़ी की मेमोरी के लिए Samsung द्वारा TSMC की उन्नत निर्माण तकनीक अपनाने की खबर को उद्योग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, HBM उत्पादन के इस चरण में दोनों कंपनियों के बीच यह पहली ऐसी साझेदारी होगी। AI चिप्स की दौड़ में HBM की बढ़ती भूमिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) एक्सेलरेटर के लिए हाई-बैंडविड्थ मेमोरी एक महत्वपूर्ण घटक बन चुकी है। Nvidia की ओर से बेस-डाई आर्किटेक्चर को मानकीकृत करने की कोशिश से अलग-अलग सप्लायर्स के बीच तकनीकी अनुकूलता और सप्लाई विकल्पों को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। AI इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच TSMC की एडवांस्ड-नोड मैन्युफैक्चरिंग क्षमता भी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए अहम बनी हुई है। कंपनियों की आधिकारिक पुष्टि का इंतजार फिलहाल यह घटनाक्रम मुख्य रूप से Seoul Economic Daily की उद्योग सूत्रों पर आधारित रिपोर्ट पर निर्भर है। Reuters के मुताबिक, Samsung, Nvidia और अन्य संबंधित कंपनियों की ओर से इस व्यवस्था पर तत्काल विस्तृत सार्वजनिक पुष्टि नहीं की गई थी। इसलिए इस संभावित सहयोग से जुड़ी जानकारी को रिपोर्टेड डेवलपमेंट के रूप में ही देखा जाना चाहिए। Source: Reuters, The Indian Express, Seoul Economic Daily जय राष्ट्र न्यूज़

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Jio Platforms का ₹30,213 करोड़ का IPO 21 अक्टूबर से खुलेगा, बन सकता है भारत का सबसे बड़ा IPO

मुंबई, 19 अक्टूबर 2026: Reliance Industries की डिजिटल और टेलीकॉम इकाई Jio Platforms का बहुप्रतीक्षित इनिशियल पब्लिक ऑफरिंग (IPO) 21 अक्टूबर 2026 से निवेशकों के लिए खुलेगा। यह इश्यू 23 अक्टूबर को बंद होगा। कंपनी अपर प्राइस बैंड पर करीब ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू सफल रहने पर यह भारत के इतिहास का सबसे बड़ा IPO बन सकता है। ₹1,065 से ₹1,119 तय हुआ प्राइस बैंड Jio Platforms ने IPO के लिए प्रति शेयर ₹1,065 से ₹1,119 का प्राइस बैंड तय किया है। प्रस्तावित इश्यू में करीब 27 करोड़ नए शेयर शामिल हैं। अपर प्राइस बैंड के आधार पर कंपनी लगभग ₹30,213 करोड़ जुटा सकती है। एंकर निवेशकों के लिए आज होगी बोली IPO से पहले 19 अक्टूबर को एंकर निवेशकों के लिए बोली लगाने की प्रक्रिया निर्धारित है। इसके बाद आम निवेशकों के लिए सब्सक्रिप्शन 21 से 23 अक्टूबर तक खुला रहेगा। शेयरों की लिस्टिंग 28 अक्टूबर को होने की उम्मीद है। ₹108.3 अरब डॉलर तक पहुंच सकती है वैल्यूएशन Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक, अपर प्राइस बैंड पर Jio Platforms की अनुमानित वैल्यूएशन करीब 108.3 अरब डॉलर हो सकती है। इस बड़े इश्यू पर घरेलू और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों की नजर रहेगी। 53.3 करोड़ सब्सक्राइबर्स के साथ बड़ा डिजिटल नेटवर्क Jio Platforms की बाजार में मजबूत मौजूदगी इसके IPO को खास बनाती है। जून 2026 तक कंपनी के करीब 533 मिलियन यानी 53.3 करोड़ सब्सक्राइबर्स थे। कंपनी भारत के डेटा ट्रैफिक में भी बड़ी हिस्सेदारी रखती है। ब्रोकरेज फर्में 5G सेवाओं, ब्रॉडबैंड, JioFiber, JioAirFiber और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म JioBrain को कंपनी की भविष्य की वृद्धि के संभावित प्रमुख आधारों के रूप में देख रही हैं। Hyundai Motor India का रिकॉर्ड टूट सकता है करीब ₹30,213 करोड़ के प्रस्तावित इश्यू के साथ Jio Platforms का IPO Hyundai Motor India के पिछले रिकॉर्ड को पीछे छोड़ सकता है। इश्यू का आकार और कंपनी की डिजिटल व टेलीकॉम क्षेत्र में मौजूदगी इसे 2026 के प्रमुख पूंजी बाजार आयोजनों में शामिल कर रही है। हालांकि, IPO में निवेश से पहले निवेशकों को कंपनी के आधिकारिक दस्तावेजों, वित्तीय प्रदर्शन, जोखिमों और वैल्यूएशन का अध्ययन करना चाहिए। Source: Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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