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कोलकाता दुर्गा पूजा पंडाल भगदड़ में 19 लोगों की मौत, 7 गिरफ्तार; SIT करेगी जांच

कोलकाता, 18 अक्टूबर 2026: उत्तर कोलकाता के चोरबागान सार्वजनिक दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 19 हो गई है, जबकि कम से कम 25 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद कोलकाता पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। कैसे हुआ हादसा? रिपोर्टों के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 7:30 बजे चोरबागान इलाके में भगदड़ मची। उस समय पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे। बारिश, संकरी गलियों और प्रवेश तथा निकास मार्गों पर भीड़ के दबाव ने स्थिति को और मुश्किल बना दिया। प्रारंभिक जांच में भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी संभावित खामियों की पड़ताल की जा रही है। हालांकि, हादसे के सटीक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। पंडाल खाली करने की घोषणा से बढ़ी घबराहट? पुलिस एक कथित घोषणा की भी जांच कर रही है, जिसमें लोगों से पंडाल खाली करने के लिए कहा गया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, घोषणा में पंडाल की हालत खराब होने और उसके गिरने की आशंका जताए जाने की बात सामने आई है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घोषणा किसने की, उसके पीछे क्या कारण था और क्या इससे भीड़ में घबराहट बढ़ी। फिलहाल, इसे भगदड़ का अंतिम कारण मानना जल्दबाजी होगी। सात लोगों की गिरफ्तारी पुलिस ने मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इनमें दुर्गा पूजा आयोजन समिति से जुड़े पदाधिकारी, पंडाल निर्माण से संबंधित लोग और निजी सुरक्षा कर्मी शामिल हैं। इससे पहले पुलिस ने पूछताछ के लिए 14 लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें से सात की गिरफ्तारी की गई। गिरफ्तार लोगों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी का निर्धारण जांच के आधार पर होगा। SIT करेगी सुरक्षा व्यवस्था की जांच विशेष जांच दल हादसे से जुड़े विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगा। इसमें भीड़ नियंत्रण की योजना, प्रवेश और निकास मार्गों की व्यवस्था, सुरक्षा कर्मियों की तैनाती, आपातकालीन प्रबंधन और आयोजकों की जिम्मेदारी शामिल हैं। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया है। जांच के दौरान उपलब्ध वीडियो फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और अन्य साक्ष्यों की भी पड़ताल की जा सकती है। गैर-इरादतन हत्या से जुड़ी धाराओं में मामला दर्ज मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत गैर-इरादतन हत्या से जुड़े मामले में केस दर्ज किया है। जांच में यह निर्धारित किया जाएगा कि हादसे में कथित लापरवाही, सुरक्षा संबंधी खामियों या किसी घोषणा की क्या भूमिका रही। अन्य दुर्गा पूजा पंडालों में भी सुरक्षा समीक्षा हादसे के बाद चोरबागान पंडाल को बंद कर दिया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, कोलकाता के कुछ अन्य अधिक भीड़ वाले दुर्गा पूजा पंडालों में भी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए अस्थायी रूप से प्रवेश रोका गया। जांच के नतीजों पर टिकी नजर इस दर्दनाक हादसे ने बड़े धार्मिक आयोजनों में भीड़ प्रबंधन, आपातकालीन निकासी और सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब SIT की जांच से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि भगदड़ किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए किसकी जिम्मेदारी बनती है। स्रोत: The Indian Express, Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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India-West Indies 5th T20I बारिश से रद्द, सीरीज 2-2 से ड्रॉ; भारतीय गेंदबाजी और स्पिन अटैक पर उठे सवाल

बेंगलुरु, 18 अक्टूबर 2026: भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांचवां और निर्णायक टी20 अंतरराष्ट्रीय मुकाबला बारिश की भेंट चढ़ गया। इसके साथ ही पांच मैचों की सीरीज 2-2 से ड्रॉ पर समाप्त हुई। बारिश के कारण मुकाबले को छोटा किया गया था, लेकिन खेल दोबारा बाधित होने के बाद आगे नहीं बढ़ सका और मैच का परिणाम नहीं निकल पाया। बारिश के कारण 9 ओवर का हुआ मुकाबला लगातार बारिश के चलते टॉस में देरी हुई और मुकाबले को दोनों टीमों के लिए 9-9 ओवर का कर दिया गया। भारतीय टीम ने 7.4 ओवर में 5 विकेट के नुकसान पर 118 रन बना लिए थे, तभी दोबारा बारिश शुरू हो गई। इसके बाद खेल शुरू नहीं हो सका और मुकाबले को नो रिजल्ट घोषित कर दिया गया। सीरीज 2-2 से बराबर पांच मैचों की सीरीज में दोनों टीमों ने दो-दो मुकाबले जीते। निर्णायक मैच बारिश से रद्द होने के कारण सीरीज बराबरी पर समाप्त हुई। वेस्टइंडीज का भारत में पहली द्विपक्षीय टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज जीतने का इंतजार भी जारी रहा। शाई होप बने प्लेयर ऑफ द सीरीज वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने सीरीज में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 261 रन बनाए और उन्हें प्लेयर ऑफ द सीरीज चुना गया। वहीं, कीमो पॉल ने 8 विकेट लेकर गेंदबाजी में अपनी टीम के लिए अहम योगदान दिया। भारतीय गेंदबाजी और स्पिन अटैक पर सवाल सीरीज के बाद भारतीय टीम की डेथ ओवर गेंदबाजी और स्पिन आक्रमण को लेकर चर्चा तेज हो गई है। द इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण के मुताबिक, वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने कई मौकों पर भारतीय स्पिनरों पर दबाव बनाया। वहीं, अंतिम ओवरों में गेंदबाजों की लाइन, लेंथ और रणनीति को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि, एक सीरीज के प्रदर्शन के आधार पर पूरे गेंदबाजी आक्रमण का आकलन करना उचित नहीं होगा, लेकिन आगामी मुकाबलों से पहले इन पहलुओं पर काम करना टीम के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हार्दिक पांड्या की कमी भी चर्चा में टीम के संतुलन को लेकर हार्दिक पांड्या जैसे तेज गेंदबाजी करने वाले ऑलराउंडर की भूमिका भी चर्चा में रही। ऐसे खिलाड़ी की मौजूदगी बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में विकल्प उपलब्ध कराती है। विश्लेषण में उनकी अनुपस्थिति को टीम संयोजन से जुड़ा एक महत्वपूर्ण पहलू बताया गया। घरेलू सीरीज में भारत का रिकॉर्ड बरकरार सीरीज ड्रॉ होने के साथ भारत का घरेलू मैदान पर द्विपक्षीय टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज नहीं हारने का सिलसिला जारी रहा। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, भारत ने फरवरी 2019 के बाद से घर पर कोई द्विपक्षीय टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज नहीं गंवाई है। बारिश ने निर्णायक मुकाबले का रोमांच जरूर छीन लिया, लेकिन सीरीज के प्रदर्शन ने भारतीय टीम के गेंदबाजी संयोजन और डेथ ओवर रणनीति पर आगे विचार करने का मौका दिया है। स्रोत: ICC, The Indian Express, India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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UP में 6 साल की बच्ची से रेप के दोषी को उम्रकैद, POCSO Court ने सुनाई सख्त सजा

उत्तर प्रदेश, 18 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश की एक विशेष POCSO Court ने 6 साल की बच्ची से rape के मामले में दोषी ठहराए गए आरोपी को life imprisonment की सजा सुनाई है। Court ने मामले की गंभीरता और पीड़िता की कम उम्र को देखते हुए कड़ी सजा दी। आरोपी पर क्या था आरोप? Prosecution के मुताबिक आरोपी ने नाबालिग बच्ची के साथ sexual assault किया था। घटना के बाद परिवार की शिकायत पर मामला दर्ज हुआ और investigation के बाद chargesheet court में दाखिल की गई। POCSO Court ने क्या कहा? Special court ने evidence और witness statements के आधार पर आरोपी को दोषी माना। Court ने कहा कि child sexual abuse जैसे मामलों में सख्त punishment जरूरी है, ताकि deterrence का clear message जाए। Life imprisonment के साथ fine भी Reports के मुताबिक आरोपी को उम्रकैद के साथ financial penalty भी लगाई गई है। Fine की exact amount और victim compensation से जुड़ी details court order के अनुसार लागू होंगी। परिवार को मिला लंबी कानूनी लड़ाई के बाद फैसला मामले में investigation और trial के बाद conviction आया। Child sexual assault cases में speedy trial और victim protection को POCSO Act का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। POCSO Act क्या कहता है? Protection of Children from Sexual Offences Act बच्चों के खिलाफ sexual offences के लिए विशेष कानूनी framework देता है। Serious penetrative sexual assault के मामलों में लंबी imprisonment, life sentence और कुछ परिस्थितियों में और भी कठोर punishment का प्रावधान है। फैसला क्यों अहम? कम उम्र के बच्चों के खिलाफ sexual crimes में courts लगातार strict sentencing पर जोर दे रहे हैं। यह फैसला भी उसी दिशा में देखा जा रहा है, जहां victim protection और deterrence को प्राथमिकता दी गई है। source – The Indian Express, court proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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Trump ने रूस पर प्रतिबंधों को लेकर 60 दिन के रिव्यू का संकेत दिया, रूसी तेल आयात पर भारत को फिलहाल राहत

वॉशिंगटन/नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने रूस से जुड़े प्रतिबंधों और टैरिफ पर अंतिम फैसला लेने से पहले उनके आर्थिक प्रभावों की समीक्षा करने का रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के मुताबिक, इस प्रक्रिया में 60 दिन तक का समय लग सकता है। इस समीक्षा से भारत के रूसी तेल आयात पर संभावित अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ को लेकर फिलहाल राहत की उम्मीद बनी है। रुबियो बोले—अंतिम फैसले से पहले होगा असर का आकलन अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि ट्रंप प्रशासन रूस से संबंधित प्रतिबंधों और टैरिफ पर निर्णय लेने से पहले उनके व्यापक प्रभावों का आकलन करना चाहता है। इसमें वैश्विक ऊर्जा कीमतों, घरेलू महंगाई और रणनीतिक साझेदार देशों पर पड़ने वाले असर जैसे पहलुओं को ध्यान में रखा जा सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, समीक्षा की प्रक्रिया में लगभग 60 दिन लग सकते हैं। भारत के लिए क्यों अहम है यह फैसला? भारत रूस से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त अमेरिकी टैरिफ लगाए जाने की किसी भी योजना का असर भारतीय तेल रिफाइनरियों, आयात लागत और ऊर्जा बाजार पर पड़ सकता है। प्रस्तावित अमेरिकी उपायों को लेकर समीक्षा से फिलहाल अतिरिक्त शुल्क की आशंकाओं पर कुछ राहत मिली है। हालांकि, किसी विशेष छूट की कानूनी स्थिति और उसके लागू होने की शर्तों को संबंधित अमेरिकी आदेशों के आधार पर ही स्पष्ट किया जा सकता है। 100% तक टैरिफ की आशंका रिपोर्टों में रूसी ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने की संभावित व्यवस्था का उल्लेख किया गया है। ऐसे कदम से भारत सहित अन्य आयातक देशों के साथ अमेरिका के व्यापारिक संबंध प्रभावित हो सकते हैं। हालांकि, संभावित टैरिफ की अधिकतम सीमा और उसके वास्तविक क्रियान्वयन के बीच अंतर है। किसी शुल्क का लागू होना संबंधित कानून, कार्यकारी आदेश और प्रशासन के अंतिम फैसले पर निर्भर करेगा। वैश्विक तेल कीमतें भी अहम कारक रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व में तनाव के बीच ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। रूस पर अतिरिक्त प्रतिबंधों से वैश्विक तेल आपूर्ति और कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह अमेरिकी प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण मुद्दा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी का असर ईंधन लागत, परिवहन और महंगाई पर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रतिबंधों से जुड़े फैसलों में आर्थिक और रणनीतिक पहलुओं का आकलन महत्वपूर्ण है। भारत पर दबाव पूरी तरह खत्म नहीं समीक्षा की प्रक्रिया को भारत के रूसी तेल आयात को स्थायी मंजूरी मिलने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अमेरिका की आगे की नीति और संभावित टैरिफ संबंधी फैसले भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों तथा भारत की ऊर्जा खरीद रणनीति को प्रभावित कर सकते हैं। अगले 60 दिन रहेंगे महत्वपूर्ण अब नजर अमेरिकी प्रशासन की समीक्षा और उसके बाद होने वाले फैसले पर रहेगी। अंतिम निर्णय से भारत की कच्चे तेल की आयात लागत, घरेलू महंगाई, रुपये और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों पर असर पड़ सकता है। हालांकि, प्रभाव की दिशा और सीमा अंतिम नीति तथा वैश्विक तेल बाजार की परिस्थितियों पर निर्भर करेगी। स्रोत: Reuters, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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“माफ़ी मांगने से क्या होगा? कोर्ट में मिलते हैं!” ABP News पर भड़कीं नेहा सिंह राठौर, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: भोजपुरी लोक गायिका नेहा सिंह राठौर ने ABP News के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उनके बारे में प्रकाशित एक कथित गलत खबर को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है। विवाद बढ़ने के बाद ABP Network ने खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए माफी जारी की। हालांकि, नेहा सिंह राठौर का कहना है कि केवल माफी मांगने से मामला खत्म नहीं होगा और वह न्याय के लिए कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी कर रही हैं। किस खबर को लेकर शुरू हुआ विवाद? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, ABP के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित एक खबर में नेहा सिंह राठौर का नाम कथित तौर पर सेक्स रैकेट और कॉल गर्ल से जुड़े मामले के साथ गलत तरीके से जोड़ दिया गया था। इस खबर को लेकर विवाद सामने आने के बाद नेटवर्क ने स्पष्टीकरण जारी किया और स्वीकार किया कि नेहा से संबंधित खबर तथ्यात्मक रूप से गलत थी। ABP Network ने मांगी माफी ABP Network ने अपने स्पष्टीकरण में खबर को तथ्यात्मक रूप से गलत बताते हुए त्रुटि पर खेद जताया और माफी मांगी। इस घटनाक्रम के बाद मामला मीडिया की जिम्मेदारी और खबरों की तथ्यात्मक जांच को लेकर चर्चा में आ गया। नेहा सिंह राठौर ने माफी पर उठाए सवाल नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर नेटवर्क की माफी पर प्रतिक्रिया देते हुए सवाल उठाया कि किसी महिला को गंभीर और अपमानजनक आरोपों से जोड़ने वाली खबर प्रकाशित होने के बाद केवल माफी मांगना कैसे पर्याप्त हो सकता है। उन्होंने इस मामले को अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला बताया और न्याय की मांग की। “कोर्ट में मिलते हैं”, कानूनी कार्रवाई के संकेत प्रभात खबर की रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा सिंह राठौर ने ABP News के खिलाफ FIR दर्ज कराने और कानूनी कार्रवाई करने की बात कही है। उनकी प्रतिक्रिया से संकेत मिलता है कि वह इस मामले को केवल सार्वजनिक माफी तक सीमित नहीं रखना चाहतीं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर कानूनी कार्रवाई की मौजूदा स्थिति और किसी औपचारिक शिकायत या मुकदमे के दर्ज होने की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती। सोशल मीडिया पर चर्चा तेज ABP Network की माफी और नेहा सिंह राठौर की प्रतिक्रिया सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। इस मामले ने मीडिया संस्थानों की जवाबदेही, खबर प्रकाशित करने से पहले तथ्यों की जांच और किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर गलत जानकारी के संभावित प्रभाव को लेकर सवाल खड़े किए हैं। स्रोत: प्रभात खबर, स्टेट मिरर जय राष्ट्र न्यूज़

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मीरा-भायंदर महापालिका की बैठक में हंगामा, BJP पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों से मारपीट के आरोप; FIR दर्ज

मीरा-भायंदर, 18 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) की जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान हंगामे का मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट करने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की संख्या को लेकर अंतर बताया गया है। मोबाइल से रिकॉर्डिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महानगरपालिका की बैठक के दौरान दर्शक दीर्घा में मौजूद कुछ लोग मोबाइल फोन से कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसके बाद कुछ BJP पार्षद दर्शक दीर्घा तक पहुंचे, जहां नागरिकों के साथ कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। पत्रकारों से मारपीट और मोबाइल तोड़ने के आरोप बैठक की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों ने भी उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक पत्रकार का मोबाइल फोन छीनकर तोड़ने और पत्रकारों की ओर जूते-चप्पल फेंकने के आरोप भी सामने आए हैं। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस द्वारा उपलब्ध वीडियो और CCTV फुटेज की जांच किए जाने की जानकारी दी गई है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। BJP पार्षदों के खिलाफ FIR, आरोपियों की संख्या पर अलग-अलग दावे मामले में भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। Free Press Journal और कुछ मराठी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 BJP पार्षदों और एक पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं, Amar Ujala की रिपोर्ट में एक FIR में 17 पार्षदों के नाम होने की बात कही गई है। रिपोर्टों में इस अंतर के कारण आरोपियों की अंतिम संख्या और प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति पुलिस की जांच तथा आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता। पुलिस की मौजूदगी में घटना होने का दावा कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया है कि घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई और समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। घटना के दौरान पुलिस की भूमिका और सामने आए आरोपों की भी तथ्यों के आधार पर पड़ताल जरूरी है। पत्रकारों ने किया प्रदर्शन घटना के बाद पत्रकारों ने महानगरपालिका परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पत्रकार संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की। विपक्षी दलों ने भी घटना पर आपत्ति जताई और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। BJP नेतृत्व की प्रतिक्रिया BJP के समूह नेता हसमुख गेहलोत ने घटना को निंदनीय बताया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले में जवाबी शिकायतें दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। जांच के नतीजों पर टिकी नजर मीरा-भायंदर महानगरपालिका की बैठक में हुए इस विवाद ने स्थानीय निकायों की बैठकों में नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच, वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी। स्रोत: The Indian Express/भाषा रिपोर्ट्स, Loksatta, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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“प्रमाण दो या रावण दहन बंद करो!” महाकाल मंदिर के पुजारी के नोटिस से उज्जैन में नई बहस

उज्जैन, 18 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के उज्जैन में दशहरे से पहले रावण दहन की परंपरा को लेकर बहस तेज हो गई है। महाकाल मंदिर से जुड़े पुजारी महेश पुजारी ने शहर की चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को कानूनी नोटिस भेजकर सवाल उठाया है कि रावण दहन का उल्लेख किस वेद, पुराण या धार्मिक ग्रंथ में मिलता है। उन्होंने आयोजकों से सात दिनों के भीतर शास्त्रीय प्रमाण देने या इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। चार दशहरा समितियों को भेजा गया कानूनी नोटिस अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज की ओर से चार प्रमुख दशहरा आयोजन समितियों को नोटिस जारी किए जाने की बात सामने आई है। आयोजकों से धार्मिक ग्रंथों के आधार पर जवाब मांगा गया है। नोटिस में संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर न्यायालय का रुख करने की चेतावनी भी दी गई है। महेश पुजारी का क्या है तर्क? महेश पुजारी का कहना है कि वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में रावण वध का वर्णन मिलता है, लेकिन उनके अनुसार इन ग्रंथों में रावण के पुतले को सार्वजनिक रूप से जलाने की परंपरा का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। उनका तर्क है कि धार्मिक परंपराओं के शास्त्रीय आधार पर चर्चा होनी चाहिए। हालांकि, यह महेश पुजारी का धार्मिक और वैचारिक पक्ष है। रावण दहन की ऐतिहासिक उत्पत्ति और विभिन्न क्षेत्रों में इसके प्रचलन को समझने के लिए धार्मिक ग्रंथों के साथ-साथ लोक परंपराओं और ऐतिहासिक संदर्भों का अध्ययन भी महत्वपूर्ण है। “प्रमाण मिला तो विरोध वापस ले लूंगा” महेश पुजारी ने आयोजन समितियों को शास्त्रार्थ की चुनौती भी दी है। उनके मुताबिक, यदि कोई समिति धार्मिक ग्रंथों के आधार पर रावण दहन का स्पष्ट प्रमाण प्रस्तुत करती है, तो वह अपना विरोध वापस लेने के लिए तैयार हैं। वहीं, प्रमाण नहीं मिलने की स्थिति में उन्होंने इस परंपरा को बंद करने की मांग की है। रावण के विद्वान ब्राह्मण होने का भी दिया हवाला महेश पुजारी ने रावण को विद्वान और ब्राह्मण बताते हुए उसके पुतले के सार्वजनिक दहन पर आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, दशहरे पर रावण दहन देश के कई हिस्सों में भगवान राम की विजय और बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के रूप में किया जाता है। इस परंपरा के धार्मिक, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय स्वरूप अलग-अलग हो सकते हैं। उज्जैन में पोस्टर अभियान रावण दहन के विरोध में उज्जैन में पोस्टर भी लगाए गए हैं। महेश पुजारी ने अपने अभियान को विभिन्न राज्यों और समुदायों से समर्थन मिलने का दावा किया है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी के आधार पर नहीं की जा सकती। अब आयोजन समितियों के जवाब पर नजर कानूनी नोटिस के बाद उज्जैन में धार्मिक ग्रंथों की व्याख्या, परंपराओं के आधार और दशहरे के आयोजन को लेकर चर्चा तेज हो गई है। अब आयोजन समितियों के जवाब और आगे की कानूनी कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, नोटिस भेजे जाने से रावण दहन पर कोई प्रतिबंध स्वतः लागू नहीं होता; आगे की स्थिति संबंधित पक्षों की कार्रवाई और किसी संभावित न्यायिक आदेश पर निर्भर करेगी। स्रोत: NDTV, Amar Ujala, Navbharat जय राष्ट्र न्यूज़

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‘वोट चोरी’ के आरोपों के खिलाफ लंदन में भारतीयों का प्रदर्शन, ध्रुव राठी भी हुए शामिल

लंदन, 18 अक्टूबर 2026: भारत की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) को लेकर उठे कथित ‘वोट चोरी’ के आरोपों के विरोध में लंदन में प्रदर्शन हुआ। शनिवार को संसद स्क्वायर स्थित महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास भारतीय छात्रों और प्रवासी भारतीयों ने जुटकर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। इस प्रदर्शन में यूट्यूबर ध्रुव राठी भी शामिल हुए। ‘Stop Vote Chori’ के नाम से आयोजित हुआ प्रदर्शन प्रदर्शन का आयोजन इंडियन ओवरसीज कांग्रेस की यूथ विंग और ब्रिटेन में सक्रिय भारतीय छात्र संगठनों ने किया। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI)-UK सहित अन्य प्रवासी भारतीय संगठनों के सदस्यों ने भी इसमें भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण की प्रक्रिया और चुनावी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। ध्रुव राठी भी प्रदर्शन में हुए शामिल यूट्यूबर और एक्टिविस्ट ध्रुव राठी ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी विदेशी हस्तक्षेप की मांग करना नहीं, बल्कि भारतीयों और प्रवासी भारतीयों के बीच कथित चुनावी अनियमितताओं के मुद्दे को उठाना है। मोदी समर्थकों ने किया विरोध प्रदर्शन इसी स्थान पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के समर्थकों का एक समूह भी पहुंचा। इस दौरान समर्थकों ने ‘मोदी, मोदी’ के नारे लगाए। लंदन की मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने दोनों समूहों को अलग रखा। हालांकि, कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर जवाबदेही की मांग की। भारत में भी इस मुद्दे पर विपक्षी दलों और विभिन्न संगठनों की ओर से विरोध दर्ज कराया गया है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा इन आरोपों को खारिज करते रहे हैं। ऐसे में ‘वोट चोरी’ से जुड़े दावों और उनके जवाबों को राजनीतिक आरोपों के रूप में देखा जाना चाहिए; इनकी पुष्टि के लिए संबंधित तथ्यों और साक्ष्यों का स्वतंत्र मूल्यांकन जरूरी है। लंदन में प्रदर्शन से मुद्दे को मिली अंतरराष्ट्रीय चर्चा लंदन में हुए प्रदर्शन ने भारत की चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर चल रही बहस को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा में ला दिया है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों द्वारा लगाए गए आरोपों और उनके समर्थन में प्रस्तुत साक्ष्यों का आकलन अलग-अलग किया जाना आवश्यक है। स्रोत: PTI, ThePrint, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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गाजियाबाद में चलती Mahindra XUV300 में लगी भीषण आग, बड़ा हादसा टला; सभी सवार सुरक्षित

गाजियाबाद, 18 अक्टूबर 2026: दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर इंदिरापुरम के पास गौर बिज पार्क के सामने एक चलती Mahindra XUV300 में अचानक भीषण आग लग गई। घटना रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि कार में सवार सभी लोग समय रहते बाहर निकल गए। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। देखते ही देखते आग की लपटों में घिरी कार प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार से अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। कुछ ही मिनटों में पूरा वाहन आग की लपटों से घिर गया। इस घटना के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समय रहते बाहर निकले कार सवार कार में मौजूद लोगों ने स्थिति को भांपते हुए समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। उनकी तत्परता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। दमकल की टीम ने आग पर पाया काबू घटना की सूचना मिलने के बाद वैशाली फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। हालांकि, आग पर काबू पाए जाने तक कार काफी हद तक जल चुकी थी। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं कार में आग लगने की सटीक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट जैसी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, लेकिन आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित घटना के दौरान मेरठ की ओर जाने वाली लेन पर कुछ समय के लिए यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। दमकल विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य कराई गई। स्रोत: Amar Ujala, IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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रातभर हिरासत के बाद AISA अध्यक्ष Neha Bora रिहा, दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 18 अक्टूबर 2026: All India Students’ Association (AISA) की अध्यक्ष Neha Bora को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए जाने के बाद शनिवार तड़के रिहा कर दिया गया। दिल्ली पुलिस के अनुसार, Delhi Police Act की धारा 65 के तहत आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उन्हें छोड़ा गया। रिहाई के बाद Bora ने प्रदर्शनकारियों, खासकर महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने की आवश्यकता और पुलिस की कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। Neha Bora ने हिरासत पर क्या सवाल उठाए? रिहाई के बाद Neha Bora ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को पूरी रात हिरासत में रखने की कानूनी जरूरत क्या थी। उन्होंने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान उन्हें कई घंटों तक वकील तक पहुंच नहीं दी गई। उनके बयानों ने पुलिस हिरासत की प्रक्रिया, कानूनी सहायता तक पहुंच और नागरिक स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है। महिलाओं को रातभर हिरासत में रखने पर सवाल Bora ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि महिलाओं को सूर्यास्त के बाद हिरासत में रखने की प्रक्रिया पर स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए। उनकी आपत्ति हिरासत की अवधि और उसके दौरान अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर थी। हालांकि, हिरासत की वैधता और कानूनी प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। ‘Lehra Do Tiranga’ प्रदर्शन के दौरान हुई थी हिरासत Neha Bora को 16 अक्टूबर को CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ विरोध प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में निषेधाज्ञा तथा भीड़ नियंत्रण से जुड़े प्रतिबंध लागू किए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई घटनाओं के बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शन से जुड़े मामलों में तीन FIR दर्ज दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन से जुड़ी घटनाओं के संबंध में कम से कम तीन प्राथमिकी (FIR) दर्ज की हैं। इनमें निषेधाज्ञा के उल्लंघन और सरकारी कर्मचारियों को उनके कर्तव्यों के निर्वहन से रोकने जैसे आरोप शामिल हैं। इन मामलों में दर्ज आरोपों की जांच जारी है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं है। Abhijeet Dipke भी रिहा CJP के संस्थापक Abhijeet Dipke को भी निवारक हिरासत के बाद विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया गया। रिपोर्टों के अनुसार, शांति बनाए रखने से संबंधित बॉन्ड भरने के बाद उन्हें रिहा कर दिया गया। यह कार्रवाई प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का हिस्सा थी। दिल्ली पुलिस का पक्ष दिल्ली पुलिस का कहना है कि कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की गई थी। दूसरी ओर, Neha Bora और अन्य प्रदर्शनकारियों ने हिरासत की अवधि, वकील तक पहुंच और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी और हिरासत के दौरान कानूनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर बहस को फिर तेज कर दिया है। स्रोत: The Indian Express, The Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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