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NMC की नई एडवाइजरी: डिजिटल मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित करने से पहले डॉक्टरों को सभी संबंधित दस्तावेजों की समीक्षा जरूरी

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर के जरिए मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित करने वाले डॉक्टरों के लिए नई एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत किसी मेडिकल रिपोर्ट, डिस्चार्ज समरी, पैथोलॉजी रिजल्ट या अन्य क्लिनिकल दस्तावेज को डिजिटल रूप से प्रमाणित करने से पहले डॉक्टरों को सभी संबंधित क्लिनिकल जानकारियों, जांच रिपोर्टों और मेडिकल रिकॉर्ड की समीक्षा करनी होगी। इस कदम का उद्देश्य मरीजों की सुरक्षा और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही सुनिश्चित करना है। केवल डिजिटल हस्ताक्षर करना पर्याप्त नहीं NMC ने स्पष्ट किया है कि डिजिटल हस्ताक्षर मेडिकल रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण का माध्यम है, लेकिन इससे डॉक्टर की पेशेवर, नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी कम नहीं होती। किसी दस्तावेज को प्रमाणित करने से पहले डॉक्टर को उपलब्ध जानकारी का आकलन करना और अपने स्वतंत्र चिकित्सकीय विवेक का इस्तेमाल करना होगा। अधूरी जानकारी होने पर रिकॉर्ड प्रमाणित करने से बचना होगा एडवाइजरी के मुताबिक, यदि उपलब्ध क्लिनिकल जानकारी किसी पेशेवर चिकित्सकीय राय तक पहुंचने के लिए पर्याप्त नहीं है, तो डॉक्टर को रिकॉर्ड प्रमाणित नहीं करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज, जांच या सत्यापन कराया जाना चाहिए। पर्याप्त जानकारी मिलने के बाद ही प्रमाणीकरण की प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए। डिजिटल हस्ताक्षर और लॉगिन क्रेडेंशियल डॉक्टर के नियंत्रण में रहेंगे NMC ने डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर, एक्सेस टोकन और अन्य प्रमाणीकरण संबंधी क्रेडेंशियल की सुरक्षा पर भी जोर दिया है। ये केवल संबंधित डॉक्टर के नियंत्रण में रहने चाहिए। इन्हें किसी अन्य व्यक्ति के साथ साझा करना, सौंपना या हस्तांतरित करना स्वीकार्य नहीं होगा। केवल संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे डॉक्टर एडवाइजरी के अनुसार, पंजीकृत चिकित्सक दूरस्थ रूप से उन्हीं स्वास्थ्य संस्थानों में तैयार मेडिकल रिकॉर्ड प्रमाणित कर सकेंगे, जिनसे वे नियुक्ति, पैनल में शामिल होने, अनुबंध या अन्य पेशेवर संबंध के जरिए जुड़े हुए हैं। इस प्रावधान का उद्देश्य प्रमाणीकरण की जिम्मेदारी और डॉक्टर के संबंधित संस्थान से जुड़ाव को स्पष्ट करना है। अस्पतालों को सुरक्षा व्यवस्था और ऑडिट ट्रेल बनाए रखना होगा स्वास्थ्य संस्थानों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रमाणित मेडिकल रिकॉर्ड के लिए उचित सुरक्षा उपाय, ऑडिट ट्रेल, प्रमाणीकरण लॉग, तारीख और समय की जानकारी तथा मरीजों की निजता की सुरक्षा से जुड़े प्रावधान बनाए रखने होंगे। इससे रिकॉर्ड में किए गए बदलावों और प्रमाणीकरण की प्रक्रिया का पता लगाया जा सकेगा तथा दस्तावेजों की विश्वसनीयता बनाए रखने में मदद मिलेगी। डिजिटल हेल्थकेयर के विस्तार के बीच आया फैसला टेलीमेडिसिन और डिजिटल हेल्थकेयर सेवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के साथ मेडिकल रिकॉर्ड को दूरस्थ रूप से प्रमाणित करने की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण हो गई है। NMC की नई एडवाइजरी का उद्देश्य इस प्रक्रिया में एकरूपता लाना, मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और डॉक्टरों की पेशेवर जवाबदेही स्पष्ट करना है। स्रोत: नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC), द इंडियन एक्सप्रेस, मेडिकल डायलॉग्स जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तराखंड में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन वाले पान मसाला पर एक साल का प्रतिबंध, निर्माण से बिक्री तक रोक

देहरादून, 14 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटीन युक्त अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जारी किया है। इसका उद्देश्य राज्य में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता पर रोक लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है। एक साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध जारी आदेश के अनुसार, तंबाकू या निकोटीन को सामग्री के रूप में शामिल करने वाले खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत की गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर सरकार ने इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा से जोड़ा है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान पहले से मौजूद हैं। नए आदेश के जरिए राज्य में संबंधित उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास किया जाएगा। प्रतिबंध लागू कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश आदेश को वरिष्ठ स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों तक भेजा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राज्यभर में निर्माण इकाइयों, भंडारण केंद्रों, वितरकों और खुदरा दुकानों तक नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रतिबंध के उल्लंघन पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले भी ऐसे प्रतिबंध द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड से पहले 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश गुटखा तथा तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाला उत्पादों पर इसी तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं। यह फैसला देश में ऐसे उत्पादों की बिक्री और वितरण को नियंत्रित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता गुटखा और तंबाकू युक्त उत्पादों का सेवन मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के जोखिम से जुड़ा है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा नियमों और संबंधित प्रावधानों के तहत इन उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री पर रोक लगाने के कदम उठाए जाते रहे हैं। उत्तराखंड में एक साल के इस प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों पर होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, उत्तराखंड FDA जय राष्ट्र न्यूज़

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महिलाओं की आजीविका योजना के फंड पर केंद्र से राज्यों की मांग, BJP शासित राज्य भी हुए शामिल

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: महिलाओं की आजीविका और शहरी गरीबों से जुड़ी योजनाओं के लिए फंडिंग को लेकर केंद्र सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा ने दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM) के तहत वित्तीय सहायता और योजना के भविष्य को लेकर स्पष्टता की मांग की है। इन राज्यों में भाजपा, कांग्रेस और तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) से जुड़ी सरकारें शामिल हैं। एक करोड़ से अधिक महिलाओं की आजीविका पर चिंता DAY-NULM के तहत पिछले एक दशक में एक करोड़ से अधिक महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा गया और 10 लाख से ज्यादा समूह बनाए गए। राज्यों की चिंता है कि फंडिंग को लेकर अनिश्चितता बनी रहने से इन समूहों की गतिविधियां, बैंकिंग सुविधाओं तक पहुंच और संस्थागत ऋण प्राप्त करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। भाजपा शासित राज्यों ने भी उठाई फंडिंग की मांग महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और त्रिपुरा सहित भाजपा शासित राज्यों ने भी केंद्र से वित्तीय सहायता जारी करने और योजना के भविष्य की रूपरेखा स्पष्ट करने का आग्रह किया है। कर्नाटक की कांग्रेस सरकार और तमिलनाडु की TVK सरकार ने भी इस मुद्दे पर चिंता जताई है। इससे स्पष्ट है कि शहरी आजीविका योजनाओं की निरंतरता का मुद्दा अलग-अलग राजनीतिक दलों की राज्य सरकारों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। तमिलनाडु ने मांगे 350 करोड़ रुपये मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तमिलनाडु ने लगभग 350 करोड़ रुपये, जबकि महाराष्ट्र ने करीब 81 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता मांगी है। अन्य राज्यों ने भी कर्मचारियों के वेतन, रिवॉल्विंग फंड, ब्याज सब्सिडी और स्वयं सहायता समूहों को सहयोग देने के लिए धन की जरूरत बताई है। NULM 2.0 को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं DAY-NULM वर्ष 2024 में समाप्त हो गया था। इसके बाद उत्तराधिकारी कार्यक्रम के रूप में एक पायलट पहल शुरू की गई, लेकिन पूर्ण स्तर पर NULM 2.0 या नई राष्ट्रीय शहरी आजीविका योजना को लेकर अब तक स्पष्टता नहीं है। राज्यों का कहना है कि नई योजना की समयसीमा और वित्तीय प्रावधानों की जानकारी जरूरी है, ताकि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों और उनसे जुड़ी आजीविका गतिविधियों को बिना रुकावट जारी रखा जा सके। केंद्र सरकार का क्या कहना है? रिपोर्टों के मुताबिक, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय का कहना है कि उसके पास फंड जारी करने से संबंधित कोई लंबित मांग नहीं है। मंत्रालय ने प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (PM SVANidhi) और अन्य योजनाओं के माध्यम से शहरी गरीबों को मिल रहे सहयोग का भी उल्लेख किया है। हालांकि, राज्यों की चिंता है कि महिलाओं के स्वयं सहायता समूहों के लिए समर्पित आजीविका सहायता और फंडिंग की व्यवस्था को लेकर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। आने वाले समय में इस मुद्दे पर केंद्र और राज्यों के बीच बातचीत योजना की निरंतरता के लिहाज से अहम होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द फाइनेंशियल एक्सप्रेस, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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Parwinder Singh Jhota murder case में main accused Rajasthan से गिरफ्तार, Punjab Police को मिली बड़ी सफलता

मानसा, 14 अक्टूबर 2026: Punjab के Mansa में anti-drug activist Parwinder Singh Jhota की गोली मारकर हत्या के मामले में मुख्य आरोपी को Rajasthan से गिरफ्तार कर लिया गया है। Police के मुताबिक आरोपी Ashwani Kumar को Salasar इलाके से पकड़ा गया। Jhota की हत्या के बाद से आरोपी फरार था और उसकी तलाश कई राज्यों में की जा रही थी। Rajasthan से पकड़ा गया main accused Police teams ने technical surveillance और location inputs के आधार पर आरोपी को trace किया। इसके बाद Rajasthan में operation चलाकर उसे हिरासत में लिया गया। अब आरोपी को Punjab लाकर आगे की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई की जा रही है। Medical store विवाद से जुड़ा है मामला यह मामला Mansa के एक medical store से जुड़ा है, जहां Jhota कथित drug trade और नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल उठा रहे थे। इसी दौरान विवाद बढ़ा और firing हुई, जिसमें Jhota की मौत हो गई थी। घटना camera पर हुई थी record Jhota अक्सर alleged drug sellers का सामना करते समय videos और live streams करते थे। हत्या वाली घटना भी camera पर record हुई, जिसके बाद मामला तेजी से पूरे Punjab में चर्चा का विषय बन गया। Punjab में विरोध और गुस्सा जारी Jhota की मौत के बाद anti-drug groups और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। कई जगह protests और demonstrations भी हुए। लोगों का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वालों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। Police अब motive और network की जांच में Main accused की गिरफ्तारी के बाद police अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना अचानक हुए विवाद का नतीजा थी या इसके पीछे कोई बड़ा network और पहले से बनी साजिश थी। आरोपी के contacts और financial links भी जांच के दायरे में हो सकते हैं। source – The Indian Express, Punjab Police जय राष्ट्र न्यूज़

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Denmark Open 2026: पीवी सिंधु पहले दौर में बाहर, श्रीकांत और तन्वी शर्मा ने दूसरे दौर में बनाई जगह

ओडेंस, 14 अक्टूबर 2026: डेनमार्क ओपन सुपर 750 बैडमिंटन टूर्नामेंट में भारतीय खिलाड़ियों का मिला-जुला प्रदर्शन देखने को मिला। दो बार की ओलंपिक पदक विजेता पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन को पहले दौर में हार का सामना करना पड़ा। वहीं, किदांबी श्रीकांत और तन्वी शर्मा ने अपने-अपने मुकाबले जीतकर राउंड ऑफ 16 में जगह बना ली। यवोन ली के खिलाफ हार के साथ सिंधु का अभियान समाप्त भारत की स्टार शटलर पीवी सिंधु ने जर्मनी की यवोन ली के खिलाफ मुकाबले की शुरुआत अच्छी की और पहला गेम 21-13 से अपने नाम किया। हालांकि, इसके बाद ली ने शानदार वापसी करते हुए दूसरा गेम 25-23 और तीसरा गेम 21-19 से जीत लिया। 65 मिनट तक चले इस मुकाबले में हार के साथ सिंधु टूर्नामेंट से बाहर हो गईं। निर्णायक गेम में बढ़त गंवा बैठीं सिंधु तीसरे गेम में सिंधु एक समय 19-15 से आगे थीं और जीत के करीब नजर आ रही थीं। लेकिन यवोन ली ने लगातार छह अंक हासिल कर मुकाबला अपने नाम कर लिया। रिपोर्ट के मुताबिक, यह सिंधु के खिलाफ ली की चार मुकाबलों में पहली जीत थी। तन्वी शर्मा ने तीन गेम के संघर्ष में दर्ज की जीत भारतीय युवा शटलर तन्वी शर्मा ने जापान की नात्सुकी निदाइरा को कड़े मुकाबले में 21-17, 16-21, 21-19 से हराया। 72 मिनट तक चले इस मैच में तन्वी ने निर्णायक गेम में संयम बनाए रखते हुए अगले दौर का टिकट हासिल किया। राउंड ऑफ 16 में तन्वी का सामना यवोन ली से होगा, जिन्होंने पहले दौर में पीवी सिंधु को हराया था। किदांबी श्रीकांत ने सीधे गेम में हराया पूर्व विश्व नंबर एक किदांबी श्रीकांत ने फ्रांस के अर्नॉड मर्कल को 22-20, 21-19 से शिकस्त दी। 46 मिनट तक चले मुकाबले में श्रीकांत ने दोनों गेम में दबाव के बीच अहम अंक हासिल किए और दूसरे दौर में प्रवेश किया। लक्ष्य सेन को चाउ तिएन चेन से मिली हार पुरुष एकल में लक्ष्य सेन का सफर भी पहले दौर में समाप्त हो गया। उन्हें चीनी ताइपे के चाउ तिएन चेन ने 21-18, 13-21, 21-15 से हराया। लक्ष्य ने दूसरा गेम जीतकर वापसी की कोशिश की, लेकिन निर्णायक गेम में चाउ ने बेहतर प्रदर्शन करते हुए मुकाबला अपने नाम कर लिया। इस तरह डेनमार्क ओपन के शुरुआती दौर में सिंधु और लक्ष्य सेन को बाहर होना पड़ा, जबकि श्रीकांत और तन्वी शर्मा ने अगले दौर में पहुंचकर भारतीय चुनौती बरकरार रखी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के नाइटक्लब में बीयर गिरने पर विवाद, 29 वर्षीय युवक की मौत; मैनेजर की पत्नी समेत 5 गिरफ्तार

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: उत्तर दिल्ली के इंद्रलोक स्थित टोर हाउस नाइटक्लब में बीयर गिरने को लेकर शुरू हुआ विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पुलिस के अनुसार, इस घटना में 29 वर्षीय कैब ड्राइवर दलजीत की कथित तौर पर पिटाई के बाद मौत हो गई। मामले में क्लब मैनेजर, उसकी पत्नी और तीन बाउंसरों समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। मैनेजर की पत्नी पर बीयर गिरने के बाद शुरू हुआ विवाद पुलिस के मुताबिक, दलजीत अपने दोस्तों के साथ नाइटक्लब गया था। इसी दौरान समूह के एक सदस्य से बीयर क्लब मैनेजर की पत्नी पर गिर गई, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस शुरू हो गई। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर मैनेजर, बाउंसरों और अन्य कर्मचारियों ने दलजीत तथा उसके दोस्तों के साथ मारपीट की। दलजीत को बेरहमी से पीटने का आरोप घटना में बचे एक व्यक्ति ने आरोप लगाया कि दलजीत को लगातार घूंसे और लातें मारी गईं, जिससे वह बेहोश हो गया। उसके दोस्तों के अनुसार, वे उसे क्लब से बाहर लेकर आए, लेकिन बाहर भी उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की गई। ऑटो में बैठाकर वहां से भेजने का आरोप शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने दलजीत और उसके दो दोस्तों को एक ऑटोरिक्शा में बैठाकर वहां से जाने के लिए मजबूर किया। बाद में दलजीत अपने घर के पास मिला। अगली सुबह बेहोशी की हालत में उसे अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मैनेजर, पत्नी और तीन बाउंसर गिरफ्तार दिल्ली पुलिस ने मामले में दिलावर, श्रवण कुमार, सनी उर्फ गौरव, विकास बालियान और हर्षिता को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में क्लब मैनेजर, उसकी पत्नी और तीन बाउंसर शामिल हैं। पुलिस मामले की जांच कर रही है। तय समय के बाद क्लब चलने पर पुलिसकर्मी पर भी कार्रवाई जांच के दौरान नाइटक्लब के निर्धारित समय के बाद भी संचालित होने का मामला सामने आया। इसके बाद इंद्रलोक पुलिस चौकी के प्रभारी को कथित ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में जिला लाइन्स भेज दिया गया। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, हिंदुस्तान टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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Jabil और Adani की AI डेटा सेंटर उपकरणों के लिए JV बनाने की तैयारी, 50:50 साझेदारी का प्रस्ताव

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी Jabil और Adani Enterprises ने भारत में AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण तथा असेंबली के लिए प्रस्तावित 50:50 जॉइंट वेंचर (JV) बनाने को लेकर समझौता किया है। दोनों कंपनियों ने इस संबंध में गैर-बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ रही है। AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण पर रहेगा फोकस प्रस्तावित जॉइंट वेंचर का मुख्य उद्देश्य भारत में AI और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के लिए जरूरी उपकरणों का स्थानीय स्तर पर निर्माण और असेंबली करना है। इससे देश में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना के तहत किन उपकरणों का निर्माण किया जाएगा और उत्पादन कब शुरू होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। 50:50 हिस्सेदारी वाला होगा प्रस्तावित जॉइंट वेंचर समझौते के तहत Adani Enterprises और Jabil प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की योजना बना रहे हैं। इसका अर्थ है कि दोनों कंपनियां प्रस्तावित कारोबार में बराबर भागीदारी करना चाहती हैं। फिलहाल समझौता गैर-बाध्यकारी चरण में है। इसलिए अंतिम निवेश राशि, संचालन की शर्तें, उत्पादन क्षमता और अन्य व्यावसायिक विवरण आगे होने वाले निश्चित समझौतों तथा आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेंगे। भारत में डेटा सेंटर की मांग बढ़ने के बीच समझौता भारत में AI सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल कारोबार के विस्तार से डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ रही है। इन सुविधाओं को चलाने के लिए सर्वर, नेटवर्किंग सिस्टम, बिजली प्रबंधन और अन्य विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर बाजार 2029 तक लगभग चार गुना होने का अनुमान जताया गया है। वैश्विक हाइपरस्केल कंपनियों ने भी भारत में 50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजनाएं घोषित की हैं। हालांकि, बाजार के अनुमान और घोषित निवेश योजनाएं भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती हैं; इन्हें पूरी हो चुकी परियोजनाओं या वास्तविक निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। Jabil की मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञता और Adani का इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क Jabil इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, उत्पाद विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती है। वहीं, Adani Group ऊर्जा और बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करता है। प्रस्तावित साझेदारी के जरिए दोनों कंपनियां अपनी संबंधित क्षमताओं का इस्तेमाल भारत में AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण का कारोबार विकसित करने के लिए करना चाहती हैं। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो इससे देश में डेटा सेंटर हार्डवेयर की स्थानीय आपूर्ति और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत की AI मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मिल सकता है बढ़ावा स्थानीय स्तर पर डेटा सेंटर उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और कुछ आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे संबंधित विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं से जुड़े कारोबारों के लिए भी अवसर बन सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विकास और उससे जुड़ी बिजली की खपत जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए नई नीतिगत व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रस्तावित JV का वास्तविक प्रभाव निवेश, उत्पादन क्षमता, स्थानीय स्तर पर होने वाले निर्माण और परियोजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। आगे के समझौतों पर टिकी रहेंगी निगाहें Jabil और Adani Enterprises के बीच प्रस्तावित साझेदारी भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एक संभावित नई पहल है। लेकिन अभी यह समझौता शुरुआती गैर-बाध्यकारी चरण में है। अब निवेश, अंतिम समझौते, उत्पादन योजना और परियोजना की समयसीमा से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इन विवरणों के सामने आने के बाद ही इस साझेदारी के संभावित व्यावसायिक और औद्योगिक प्रभाव का अधिक स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा। Source: Reuters / Adani Enterprises / Jabil / Yahoo Finance जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत में Forward Deployed Engineer की नौकरियों में 1,807% उछाल, AI बूम से बढ़ी मांग; ₹9–16 लाख तक सालाना सैलरी

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते इस्तेमाल के बीच Forward Deployed Engineer (FDE) की नौकरियों की मांग तेजी से बढ़ रही है। Indeed के आंकड़ों के मुताबिक, जून 2025 से जून 2026 के बीच इन पदों के लिए जॉब पोस्टिंग में सालाना आधार पर 1,807% की वृद्धि दर्ज की गई। यह करीब 19 गुना बढ़ोतरी के बराबर है। इस तेजी के पीछे कंपनियों की ऐसी तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत को अहम माना जा रहा है, जो AI और सॉफ्टवेयर को विकसित करने के साथ-साथ उन्हें ग्राहकों की वास्तविक कारोबारी समस्याओं के समाधान के लिए लागू भी कर सकें। क्या होता है Forward Deployed Engineer? Forward Deployed Engineer ऐसा तकनीकी विशेषज्ञ होता है, जो सॉफ्टवेयर या AI सिस्टम विकसित करने के अलावा सीधे ग्राहकों के साथ काम करता है। उसका उद्देश्य ग्राहक की जरूरतों को समझना और तकनीक की मदद से व्यावहारिक समाधान तैयार करना होता है। इस भूमिका में प्रोग्रामिंग, सॉफ्टवेयर डिप्लॉयमेंट, समस्या समाधान और डेटा की समझ के साथ प्रभावी संवाद कौशल भी जरूरी होते हैं। FDE को तकनीकी टीम और ग्राहक के बीच समन्वय स्थापित करना पड़ सकता है, ताकि विकसित किया गया समाधान वास्तविक कारोबारी जरूरतों के अनुरूप हो। जून 2026 में दर्ज हुई सबसे तेज वृद्धि Indeed के आंकड़ों के अनुसार, FDE पदों की जॉब पोस्टिंग में मार्च 2026 से तेजी आई और जून में सालाना वृद्धि 1,807% तक पहुंच गई। रिपोर्ट के मुताबिक, जुलाई 2026 में पोस्टिंग पिछले साल की तुलना में करीब 16 गुना और अगस्त में छह गुना से अधिक स्तर पर बनी रहीं। ये आंकड़े इस भूमिका के प्रति कंपनियों की बढ़ती रुचि का संकेत देते हैं। हालांकि, जॉब पोस्टिंग में वृद्धि को वास्तविक नियुक्तियों या कुल रोजगार में समान अनुपात की बढ़ोतरी नहीं माना जाना चाहिए। कितनी मिल सकती है सैलरी? Glassdoor India के जनवरी 2026 के आंकड़ों के मुताबिक, Forward Deployed Engineer की औसत बेस सैलरी लगभग ₹12 लाख सालाना बताई गई है। रिपोर्ट की गई सैलरी रेंज करीब ₹9 लाख से ₹16 लाख प्रति वर्ष है। वास्तविक वेतन उम्मीदवार के अनुभव, तकनीकी विशेषज्ञता, कंपनी, शहर और जिम्मेदारियों के आधार पर अलग-अलग हो सकता है। इसके अलावा, बेस सैलरी और बोनस, स्टॉक या अन्य लाभों सहित कुल पैकेज में भी अंतर होता है। बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे में अवसर बेंगलुरु, हैदराबाद और पुणे जैसे प्रमुख तकनीकी केंद्रों में AI, क्लाउड कंप्यूटिंग और सॉफ्टवेयर से जुड़े पदों के अवसर मौजूद हैं। FDE की भूमिका में भी इन क्षेत्रों का ज्ञान रखने वाले पेशेवरों को फायदा मिल सकता है। हालांकि, उम्मीदवारों को केवल शहर या पदनाम के आधार पर अवसरों का आकलन करने के बजाय संबंधित कंपनियों की वास्तविक रिक्तियों, आवश्यक अनुभव और तकनीकी योग्यताओं की जांच करनी चाहिए। AI कंपनियों को क्यों चाहिए FDE? कई कंपनियों के लिए AI मॉडल तैयार करना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें ऐसे विशेषज्ञों की जरूरत होती है, जो AI आधारित समाधान को ग्राहक के मौजूदा सिस्टम में जोड़ सकें, उसकी उपयोगिता जांच सकें और लागू करने के दौरान सामने आने वाली समस्याओं को दूर कर सकें। FDE इसी जरूरत को पूरा करने वाली भूमिका है। इसमें तकनीकी विकास के साथ कारोबारी प्रक्रियाओं की समझ, ग्राहकों से संवाद और तेजी से समाधान लागू करने की क्षमता महत्वपूर्ण होती है। इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कौन-सी स्किल्स जरूरी हैं? FDE की भूमिका में प्रवेश करने के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए कुछ प्रमुख कौशल उपयोगी हो सकते हैं: केवल सैद्धांतिक जानकारी के बजाय वास्तविक प्रोजेक्ट पर काम करने का अनुभव भी इस भूमिका के लिए उपयोगी हो सकता है। AI बूम के बीच उभरता करियर विकल्प FDE जॉब पोस्टिंग में दर्ज तेज वृद्धि बताती है कि कंपनियों की जरूरत केवल AI तकनीक विकसित करने तक सीमित नहीं है। वे ऐसे पेशेवरों की भी तलाश कर रही हैं, जो तकनीक को व्यावसायिक परिणामों में बदल सकें। हालांकि, इस क्षेत्र में करियर चुनने से पहले उम्मीदवारों को उपलब्ध रिक्तियों, अपेक्षित कौशल, अनुभव और वेतन संबंधी शर्तों की तुलना करनी चाहिए। जॉब पोस्टिंग के आंकड़े बढ़ती मांग का संकेत देते हैं, लेकिन वे भविष्य में रोजगार या वेतन की गारंटी नहीं देते। Source: Indeed / The Indian Express / IANS / Glassdoor India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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ट्रंप बोले—चीन और रूस ईरान की मदद नहीं कर रहे; अमेरिकी खुफिया आकलन से अलग बयान

वॉशिंगटन, 14 अक्टूबर 2026: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उन्हें नहीं लगता कि चीन और रूस ईरान के साथ जारी युद्ध में किसी महत्वपूर्ण तरीके से उसकी मदद कर रहे हैं। उनका यह बयान अमेरिकी खुफिया आकलनों से अलग है, जिनमें बीजिंग और मॉस्को की ओर से ईरान को सैन्य सहायता दिए जाने की बात कही गई है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका, चीन और रूस के बीच ईरान को लेकर कूटनीतिक तनाव बना हुआ है और क्षेत्र में जारी संघर्ष के अंतरराष्ट्रीय प्रभावों पर नजर रखी जा रही है। ट्रंप ने क्या कहा? ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान की किसी महत्वपूर्ण तरीके से मदद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि ऐसी सहायता दी जा रही होती, तो अमेरिकी प्रशासन को इसकी जानकारी मिल जाती। ट्रंप का यह बयान दोनों देशों की भूमिका को लेकर उनके सार्वजनिक आकलन को दर्शाता है। हालांकि, इससे यह स्वतंत्र रूप से साबित नहीं होता कि ईरान को किसी भी प्रकार की बाहरी सहायता नहीं मिल रही है। अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों में क्या दावा किया गया? रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया ब्रीफिंग में चीन और रूस की ओर से ईरान को सहायता मिलने की बात सामने आई है। रिपोर्टों में कथित तौर पर उपग्रह तस्वीरों, हथियारों के कलपुर्जों और अन्य सैन्य सहायता का उल्लेख किया गया है। इस तरह ट्रंप के सार्वजनिक बयान और रिपोर्ट किए गए खुफिया आकलनों के बीच अंतर दिखाई देता है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर सहायता की पूरी मात्रा, स्वरूप और दोनों देशों की प्रत्यक्ष भूमिका के सभी विवरण स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं किए जा सकते। शी जिनपिंग से बातचीत का भी किया गया था जिक्र ट्रंप पहले भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान ईरान को चीन की संभावित सहायता का मुद्दा उठा चुके हैं। सितंबर में अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि ट्रंप ने चीन की ओर से ईरान की मदद किए जाने पर आपत्ति जताई थी। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, इस बातचीत में ईरान को समर्थन देने के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। हालांकि, किसी कूटनीतिक आश्वासन और जमीन पर वास्तविक गतिविधियों के बीच अंतर हो सकता है। चीन और रूस का अलग-अलग रुख चीन ने अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को ईरान की संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में प्रस्तुत किया है। वहीं, रूस ने मध्य पूर्व में जारी युद्ध के व्यापक सुरक्षा प्रभावों को लेकर चिंता जताई है और चेतावनी दी है कि क्षेत्रीय संघर्ष परमाणु हथियारों की प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा दे सकता है। ट्रंप इससे पहले भी शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को ईरान संघर्ष के संदर्भ में तटस्थ बताया चुके हैं। दोनों देशों के सार्वजनिक बयानों और उनकी कथित सहायता से जुड़े खुफिया आकलनों को अलग-अलग संदर्भों में देखना जरूरी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बयान के मायने ईरान से जुड़े संघर्ष के बीच चीन और रूस की भूमिका अंतरराष्ट्रीय कूटनीति का अहम मुद्दा बनी हुई है। वॉशिंगटन के लिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि तेहरान को बाहरी सैन्य या तकनीकी सहायता किस स्तर पर मिल रही है, जबकि बीजिंग और मॉस्को इस संकट को लेकर अपने-अपने कूटनीतिक रुख रखते हैं। ट्रंप के ताजा बयान और अमेरिकी खुफिया आकलनों के बीच अंतर इस बात को रेखांकित करता है कि संघर्ष में बाहरी देशों की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बयानों और सुरक्षा एजेंसियों के आकलनों में भिन्नता हो सकती है। फिलहाल, चीन और रूस की ओर से ईरान को कथित सहायता के दावों तथा इस संबंध में अमेरिकी आकलनों पर अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। Source: Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस पर गंभीर आरोप; महिला कार्यकर्ता से मारपीट का वीडियो वायरल, NSUI ने जांच की मांग की

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: दिल्ली में Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच Delhi Police पर एक महिला NSUI कार्यकर्ता से मारपीट और बदसलूकी के आरोप लगे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हिरासत के दौरान एक महिला कार्यकर्ता और महिला पुलिसकर्मी के बीच थप्पड़ और बाल खींचने जैसी झड़प दिखाई देती है। हालांकि घटना की शुरुआत किसने की, इसकी स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। Rajiv Chowk के पास protest के दौरान हुआ विवाद मंगलवार, 13 अक्टूबर को NSUI कार्यकर्ता Rajiv Chowk Metro Station के पास CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे और कथित “vote chori” के मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे। Police ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और इसी दौरान महिला कार्यकर्ता तथा महिला पुलिसकर्मी के बीच टकराव हुआ। वायरल वीडियो में थप्पड़ और बाल खींचने की घटना वायरल footage में दोनों पक्षों के बीच physical scuffle दिखाई देती है। कुछ reports में NSUI की national secretary Ritu Barala का नाम सामने आया है। वीडियो के आधार पर यह साफ है कि हाथापाई हुई, लेकिन किस पक्ष ने पहले violence शुरू किया, इसे लेकर अलग-अलग दावे हैं। NSUI ने Delhi Police पर लगाए गंभीर आरोप NSUI ने आरोप लगाया है कि detention के दौरान उसकी महिला कार्यकर्ताओं के साथ excessive force और बदसलूकी की गई। संगठन ने Connaught Place Police Station के बाहर प्रदर्शन कर मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की। Police side से भी सामने आए आरोप दूसरी ओर, reports में police side से यह दावा किया गया है कि महिला police personnel के साथ भी हाथापाई हुई। इसी वजह से वायरल clip को एकतरफा police assault मानने के बजाय पूरे video sequence और अन्य evidence की जांच जरूरी है। पहले भी protesters ने लगाए थे assault के आरोप हाल के CJP protests के दौरान कम से कम तीन detainees ने भी Delhi Police पर custody में मारपीट के आरोप लगाए थे। कुछ मामलों में medical records में injuries दर्ज होने की बात सामने आई, जबकि Police ने कहा था कि formal complaint मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। Viral videos की verification बनी बड़ी चुनौती हालिया protests से जुड़े कई पुराने और unrelated videos भी social media पर नए घटनाक्रम बताकर circulate किए गए हैं। इसलिए इस घटना समेत किसी भी viral footage के पूरे context, समय और location की स्वतंत्र verification जरूरी है। source – The Federal, NewsX, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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