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जय राष्ट्र न्यूज

CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march से पहले Connaught Place में कड़ी सुरक्षा, Central Park बंद; traffic curbs लागू

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: CJP के ‘Lehra Do Tiranga’ march को देखते हुए Delhi Police ने Connaught Place और आसपास के इलाकों में सुरक्षा कड़ी कर दी है। Central Park को बंद किया गया है और बड़ी संख्या में police तथा paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। अधिकारियों के मुताबिक पूरे New Delhi district में लगभग 25,000 security personnel deployment का हिस्सा हैं। Central Park क्यों किया गया बंद? CJP ने Connaught Place के Central Park में gathering और march का call दिया था। इसी के मद्देनजर police ने area को secure कर दिया और entry पर restrictions लगाईं, ताकि crowd control और law-and-order situation को manage किया जा सके। करीब 25,000 personnel की deployment Reuters की report के मुताबिक Delhi में करीब 25,000 police और paramilitary personnel तैनात किए गए हैं। Connaught Place, Parliament Street, Jantar Mantar और आसपास के sensitive zones में अतिरिक्त barricading और checking की गई है। Traffic पर भी असर Security arrangements की वजह से Connaught Place के आसपास traffic diversions और restrictions लागू किए गए हैं। कई roads पर checking बढ़ाई गई है और commuters को alternate routes लेने की सलाह दी गई है। Protest का मुद्दा क्या है? CJP और उससे जुड़े groups Chief Election Commissioner Gyanesh Kumar, voter-list revision और हाल के police action के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। Protesters ने ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम को peaceful democratic protest बताया है, जबकि police law-and-order concerns का हवाला दे रही है। Delhi High Court ने protest को रोकने से किया था इनकार एक दिन पहले Delhi High Court ने Connaught Place में proposed protest को पूरी तरह restrain करने से इनकार किया था और police को gathering regulate करने की अनुमति दी थी। इससे आज के security arrangements और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। source – Reuters, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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अल्बानिया में छात्रों का उग्र प्रदर्शन, सरकारी इमारतों पर पथराव; शिक्षा मंत्रालय में लगी आग

तिराना, 16 अक्टूबर 2026: अल्बानिया की राजधानी तिराना में सरकार विरोधी छात्र प्रदर्शनों ने लगातार तीसरे दिन हिंसक रूप ले लिया। छात्रों और युवा प्रदर्शनकारियों ने सरकारी इमारतों पर पथराव किया, सुरक्षा बैरिकेड तोड़े और कई स्थानों पर आगजनी की। इससे एक दिन पहले शिक्षा मंत्रालय की इमारत में आग लगने की खबर सामने आई थी। आसपास स्थित बैंक शाखाओं को भी नुकसान पहुंचा। आखिर क्यों हो रहा है प्रदर्शन? छात्र विश्वविद्यालयों की स्थिति, शिक्षा पर बढ़ते खर्च, आर्थिक सहायता की कमी और पढ़ाई पूरी करने के बाद रोजगार के सीमित अवसरों को लेकर नाराज हैं। प्रदर्शनों में सरकार पर भ्रष्टाचार के आरोप और प्रधानमंत्री Edi Rama के इस्तीफे की मांग भी प्रमुखता से उठाई जा रही है। शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी शिकायतों के साथ राजनीतिक असंतोष ने भी आंदोलन को व्यापक रूप दिया है। शिक्षा मंत्रालय पर पथराव, इमारत में लगी आग मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने शिक्षा मंत्रालय की ओर ईंटें फेंकीं, धातु के बैरिकेड तोड़े और सड़कों पर अवरोध खड़े किए। इसी दौरान मंत्रालय की इमारत में आग लग गई। पास स्थित एक Raiffeisen Bank शाखा में भी आग लगने की खबर सामने आई। इन घटनाओं के बाद सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दंगा-रोधी पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। रिपोर्ट्स के अनुसार, विरोध प्रदर्शन तिराना से आगे दूसरे शहरों तक भी फैल गए हैं। झड़पों के दौरान पुलिसकर्मियों और नागरिकों के घायल होने तथा कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, घायलों और हिरासत में लिए गए लोगों की सटीक संख्या की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। प्रधानमंत्री Edi Rama ने इस्तीफे से किया इनकार प्रधानमंत्री Edi Rama ने प्रदर्शनकारियों की इस्तीफे की मांग खारिज कर दी है। उनका कहना है कि सरकार बदलने का रास्ता चुनाव है, न कि हिंसक प्रदर्शन। सरकार ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार को स्वीकार करते हुए सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और तोड़फोड़ की निंदा की है। इससे सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बना हुआ है। यूरोपीय संघ ने जताई चिंता बढ़ती हिंसा के बीच यूरोपीय संघ (EU) ने चिंता जताई है और अधिकारियों तथा प्रदर्शनकारियों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। EU ने पुलिस द्वारा कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग किए जाने की शिकायतों की उचित जांच पर भी जोर दिया है। अल्बानिया में बढ़ते राजनीतिक तनाव पर नजर छात्रों की शिक्षा संबंधी मांगों से शुरू हुआ आंदोलन अब सरकार के खिलाफ व्यापक विरोध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। भ्रष्टाचार के आरोप, प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग और पुलिस कार्रवाई को लेकर विवाद ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। आने वाले दिनों में सरकार की प्रतिक्रिया, प्रदर्शनकारियों के साथ बातचीत और सुरक्षा बलों की कार्रवाई इस आंदोलन की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी। स्रोत – Reuters, AP, Al Jazeera जय राष्ट्र न्यूज़

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एयर इंडिया की फ्लाइट में ‘हाइजैक अलर्ट’, बीच हवा में बदला रास्ता; जयपुर में हुई इमरजेंसी लैंडिंग

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: फ्रैंकफर्ट से दिल्ली आ रही Air India की फ्लाइट AI2030 को संदिग्ध हाइजैक अलर्ट मिलने के बाद बीच रास्ते में जयपुर डायवर्ट करना पड़ा। विमान में 293 यात्री और 13 क्रू सदस्य समेत कुल 306 लोग सवार थे। विमान जयपुर एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतर गया। बाद में की गई जांच में हाइजैक अलर्ट को फॉल्स अलार्म बताया गया। फ्लाइट में क्या हुआ था? रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह करीब 9 बजे अहमदाबाद एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) को विमान से कुछ सेकंड के लिए Squawk 7500 सिग्नल मिला। यह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त ट्रांसपोंडर कोड है, जिसका इस्तेमाल विमान के अपहरण या किसी अन्य गैरकानूनी हस्तक्षेप की स्थिति में अलर्ट देने के लिए किया जाता है। सिग्नल मिलने के बाद सुरक्षा एजेंसियों को सक्रिय किया गया और विमान की सुरक्षित लैंडिंग के लिए जरूरी कदम उठाए गए। दिल्ली की जगह जयपुर क्यों उतारा गया विमान? सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत दिल्ली एयरपोर्ट के वॉर रूम ने एहतियात के तौर पर विमान को जयपुर डायवर्ट करने का फैसला लिया। रिपोर्ट्स के अनुसार, Boeing 787-9 विमान सुबह करीब 9:35 बजे जयपुर इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर सुरक्षित उतरा। इसके बाद विमान को आइसोलेशन बे में ले जाया गया, जहां सुरक्षा जांच की गई। विमान में सवार सभी 306 लोगों की जांच फ्लाइट में 293 यात्री और 13 क्रू सदस्य मौजूद थे। लैंडिंग के बाद यात्रियों को विमान से उतारा गया और सुरक्षा संबंधी जांच की गई। विमान और क्रू की जांच के बाद फ्लाइट को दिल्ली के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई। घटना के दौरान यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी गई। हाइजैक अलर्ट कैसे आया? तकनीकी गड़बड़ी की आशंका इस घटना में सबसे बड़ा सवाल यह है कि हाइजैक अलर्ट आखिर कैसे जारी हुआ। बाद की रिपोर्ट्स के मुताबिक, क्रू ने कथित तौर पर कहा कि उन्होंने हाइजैक कोड को मैन्युअल रूप से सक्रिय नहीं किया था। इसी वजह से अब यह जांच की जा रही है कि कहीं ATC सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी या किसी तकनीकी त्रुटि के कारण गलत सिग्नल तो नहीं मिला। हालांकि, तकनीकी खराबी को अभी अंतिम कारण नहीं माना जा सकता। बम की धमकी भी निकली फर्जी इस फ्लाइट को संदिग्ध बम धमकी से जुड़ी रिपोर्टों में भी शामिल किया गया था। सुरक्षा जांच के दौरान विमान में किसी खतरे का पता नहीं चलने के बाद धमकी को फर्जी माना गया। Air India की ओर से बताया गया कि विमान सुरक्षित उतरा और निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन किया गया। DGCA और अन्य एजेंसियां कर रही हैं जांच नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि Squawk 7500 सिग्नल कैसे उत्पन्न हुआ। जांच में संभावित तकनीकी खराबी, ATC से जुड़ी समस्या और प्रक्रियागत त्रुटि जैसे पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि यह अलर्ट किस कारण आया और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किन कदमों की जरूरत होगी। स्रोत – India Today, NDTV, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी का बड़ा दावा—“मोदी सरकार के 200 अधिकारी हमारे संपर्क में”, ED-CBI और विदेश मंत्रालय के अफसरों का भी किया जिक्र

नई दिल्ली: कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और अंदरूनी जानकारी साझा कर रहे हैं। राहुल गांधी के मुताबिक, इन अधिकारियों में प्रवर्तन निदेशालय (ED), केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और विदेश मंत्रालय से जुड़े लोग भी शामिल हैं। उन्होंने यह बयान 12 अक्टूबर को दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिया था। राहुल गांधी ने क्या कहा? Rahul Gandhi ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा कि केंद्र सरकार के करीब 200 अधिकारी विपक्ष के संपर्क में हैं और लगातार जानकारी दे रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें अधिकारियों की ओर से नियमित रूप से संदेश और इनपुट मिल रहे हैं। हालांकि, राहुल गांधी के इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि के लिए अब तक कोई सार्वजनिक साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों की पहचान भी सार्वजनिक नहीं की गई है। ED, CBI और विदेश मंत्रालय के अधिकारियों का जिक्र राहुल गांधी ने कहा कि उनके संपर्क में रहने वाले अधिकारियों में Enforcement Directorate (ED), Central Bureau of Investigation (CBI) और Ministry of External Affairs (MEA) से जुड़े लोग शामिल हैं। उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन अधिकारियों ने किस तरह की जानकारी साझा की है या वे किन विभागों में कार्यरत हैं। इसलिए इस दावे को फिलहाल कांग्रेस नेता के बयान के रूप में ही देखा जा रहा है। CEC और ‘वोट चोरी’ विवाद के बीच आया बयान यह बयान उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आया, जिसमें राहुल गांधी ने INDIA गठबंधन के साथ मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कही थी। इस दौरान उन्होंने केंद्र सरकार पर विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप भी लगाया और दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था तथा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाए। सरकार की ओर से दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं राहुल गांधी के 200 अधिकारियों के संपर्क में होने संबंधी दावे को लेकर फिलहाल कोई सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। अधिकारियों के नाम, साझा की गई जानकारी और संपर्क की प्रकृति का विवरण भी सामने नहीं आया है। ऐसे में इस बयान को एक राजनीतिक दावा मानना जरूरी है, जिसकी पुष्टि के लिए स्वतंत्र साक्ष्य और संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया अहम होगी। स्रोत – The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली में Neha Bora, Abhijeet Dipke और Prakash Raj की प्रेस कॉन्फ्रेंस, CEC और SIR प्रक्रिया पर उठाए सवाल

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में CJP के सह-संस्थापक Abhijeet Dipke, AISA अध्यक्ष Neha Bora, अभिनेता और सामाजिक कार्यकर्ता Prakash Raj तथा वरिष्ठ अधिवक्ता Prashant Bhushan समेत कई लोगों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar, विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया और हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए गए। Abhijeet Dipke ने केंद्र सरकार पर लगाए आरोप Abhijeet Dipke ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar को बचाने के लिए सरकारी तंत्र का इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों और विपक्षी नेताओं की हिरासत, मेट्रो प्रतिबंधों तथा भारी सुरक्षा तैनाती की जरूरत पर भी सवाल उठाए। ये आरोप Dipke के राजनीतिक बयान का हिस्सा हैं और स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य नहीं हैं। Neha Bora ने पत्रकारों के साथ व्यवहार पर उठाए सवाल AISA अध्यक्ष Neha Bora ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों की रिपोर्टिंग कर रहे पत्रकारों को परेशान किया गया और कुछ के कैमरे तक छीन लिए गए। उन्होंने हाल ही में एक महिला पत्रकार द्वारा दिल्ली पुलिस के एक अधिकारी पर लगाए गए उत्पीड़न के आरोपों का भी मुद्दा उठाया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित पक्षों का जवाब मामले के तथ्यों को समझने के लिए महत्वपूर्ण है। Prakash Raj ने मतदाता सूची से नाम हटाने का आरोप लगाया अभिनेता Prakash Raj ने दावा किया कि मतदाता सूची में नाम हटाने के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 7 का उपयोग कुछ मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने के लिए किया जा रहा है। उन्होंने कर्नाटक के 23 जिलों का भी उल्लेख किया। यह दावा SIR प्रक्रिया को लेकर चल रहे व्यापक विवाद का हिस्सा है। आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित मतदाता सूचियों, शिकायतों और निर्वाचन अधिकारियों के रिकॉर्ड की जांच आवश्यक है। CEC के इस्तीफे और प्रदर्शनकारियों की रिहाई की मांग प्रेस कॉन्फ्रेंस में कई प्रमुख मांगें रखी गईं। इनमें मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar का इस्तीफा, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों की रिहाई, कथित पुलिस ज्यादती रोकने और जंतर-मंतर को फिर से विरोध प्रदर्शनों के लिए उपलब्ध कराने की मांग शामिल थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हुआ हंगामा कार्यक्रम के दौरान कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Neha Bora के बोलने के दौरान कुछ लोगों ने “बंद करो” और “बाहर जाओ” जैसे नारे लगाए, जिससे प्रेस कॉन्फ्रेंस में हंगामे की स्थिति बन गई। Connaught Place में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम CJP ने 16 अक्टूबर को शाम 5 बजे कनॉट प्लेस के सेंट्रल पार्क में ‘Lehra Do Tiranga’ कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया है। रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली पुलिस की अनुमति से जुड़े सवालों के बीच दिल्ली हाई कोर्ट ने कार्यक्रम पर रोक लगाने से इनकार किया और पुलिस को सभा को नियंत्रित करने के निर्देश दिए। कार्यक्रम के संचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। स्रोत – The New Indian Express, ThePrint, ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड, मेरठ कोर्ट का बड़ा फैसला

मेरठ, 16 अक्टूबर 2026: चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मेरठ की जिला एवं सत्र अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। दोनों को मुस्कान के पति और मर्चेंट नेवी अधिकारी सौरभ राजपूत की हत्या करने और शव को छिपाने के मामले में दोषी ठहराया गया था। इस मामले ने मार्च 2025 में सामने आने के बाद देशभर में सुर्खियां बटोरी थीं। 30 सितंबर को दोषी ठहराए गए थे दोनों अदालत ने मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को 30 सितंबर 2026 को दोषी करार दिया था। इसके बाद जिला एवं सत्र न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा ने 14 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया। क्या था नीला ड्रम हत्याकांड? अभियोजन पक्ष के मुताबिक, सौरभ राजपूत की 3 मार्च 2025 को हत्या कर दी गई थी। आरोप था कि हत्या के बाद शव के टुकड़े किए गए और उन्हें एक नीले प्लास्टिक ड्रम में रखकर सीमेंट से सील कर दिया गया। करीब दो सप्ताह बाद मामला सामने आया, जिसके बाद यह घटना देशभर में चर्चा का विषय बन गई। मामले की जांच और सुनवाई के दौरान हत्या तथा शव छिपाने से जुड़े आरोपों पर अदालत में साक्ष्य पेश किए गए। 126 सुनवाइयों और 22 गवाहों के बाद फैसला मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले की सुनवाई लगभग 13 महीने चली। इस दौरान अदालत में 126 सुनवाइयां हुईं और अभियोजन पक्ष ने 22 गवाह पेश किए। अदालत ने दोषियों को सजा सुनाई। मृत्युदंड जैसे फैसलों में कानूनी प्रक्रिया और अपील के अधिकार भी महत्वपूर्ण होते हैं। सजा सुनाए जाने के बाद भावुक हुए दोनों रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृत्युदंड की सजा सुनाए जाने के बाद मुस्कान और साहिल भावुक हो गए। जेल से जुड़े सूत्रों के हवाले से बताया गया कि दोनों ने पहली रात ठीक से खाना नहीं खाया और बेचैनी में रहे। मुस्कान ने अपनी बेटी से मिलने की इच्छा भी जताई। हालांकि, जेल में उनकी स्थिति और मुलाकात से जुड़ी जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आए विवरणों पर आधारित है। पवन जल्लाद ने जिम्मेदारी मिलने पर जताई तैयारी 16 अक्टूबर को पवन जल्लाद ने कहा कि यदि उन्हें मुस्कान और साहिल को फांसी देने की जिम्मेदारी सौंपी जाती है, तो वह इसके लिए तैयार हैं। पवन जल्लाद का नाम इससे पहले निर्भया मामले के दोषियों को फांसी दिए जाने की प्रक्रिया से जुड़ चुका है। मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम नीला ड्रम हत्याकांड में मृत्युदंड का फैसला इस मामले का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपीलों की स्थिति यह तय करने में अहम होगी कि सजा पर अंतिम निर्णय कब और किस रूप में लागू होगा। स्रोत – The Indian Express, Times of India, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली रामलीला में CM Rekha Gupta की जुबान फिसलने पर विवाद, “हर एक राम मारा न जाए” बयान को लेकर AAP-Congress का हमला

नई दिल्ली, 16 अक्टूबर 2026: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) का रामलीला कार्यक्रम से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में मुख्यमंत्री कथित तौर पर “जब तक हर एक रावण मारा न जाए” कहने के बजाय “जब तक हर एक राम मारा न जाए” बोलती सुनाई देती हैं। इस कथित बयान को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है। वहीं, रेखा गुप्ता ने वायरल वीडियो और विपक्ष की आलोचना पर पलटवार किया है। कहां का है वायरल वीडियो? रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 13 अक्टूबर को दिल्ली के आजादपुर स्थित केवल पार्क इलाके में आयोजित श्री आदर्श कला केंद्र की रामलीला की है। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ भाजपा विधायक राज कुमार भाटिया भी मौजूद थे। क्या कहा रेखा गुप्ता ने? सोशल मीडिया पर वायरल क्लिप में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर ‘रावण’ की जगह ‘राम’ शब्द सुनाई देता है। इसी हिस्से को विपक्षी नेताओं और सोशल मीडिया यूजर्स ने साझा करते हुए सवाल उठाए हैं। वीडियो में दिखाई देने वाली टिप्पणी को जुबान फिसलने की घटना बताया जा रहा है। हालांकि, बयान के आशय को समझने के लिए पूरे भाषण और उसके संदर्भ को देखना जरूरी है। AAP और कांग्रेस ने साधा निशाना वायरल वीडियो को लेकर आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर तीखा हमला बोला और मुख्यमंत्री के कथित बयान को भगवान राम के प्रति पार्टी की सोच से जोड़ने की कोशिश की। कांग्रेस नेताओं ने भी इस टिप्पणी पर सवाल उठाए। इस घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हालांकि, विपक्ष की प्रतिक्रियाएं राजनीतिक आरोप हैं और इन्हें मुख्यमंत्री की मंशा का प्रमाण नहीं माना जा सकता। रेखा गुप्ता ने क्या दिया जवाब? विवाद के बीच रेखा गुप्ता ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि विरोधी इस बात पर नजर रखते हैं कि वह क्या बोलती हैं और क्या पहनती हैं। उन्होंने वायरल सामग्री को लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट का मुद्दा भी उठाया। मुख्यमंत्री के इस जवाब के बाद विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया। वायरल वीडियो की जांच क्यों जरूरी? वीडियो को लेकर कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे AI से बनाया गया या एडिट किया हुआ होने का दावा किया है। हालांकि, किसी वीडियो के संपादित होने या AI से तैयार किए जाने की पुष्टि के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों में मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान कथित तौर पर हुई जुबान की चूक का जिक्र है। ऐसे में वीडियो के छोटे हिस्से के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मूल और पूरा वीडियो देखना महत्वपूर्ण है। इस मामले में वीडियो की प्रामाणिकता और पूरे संदर्भ की पुष्टि विवाद को समझने के लिए अहम होगी। स्रोत – Live Hindustan, ABP News जय राष्ट्र न्यूज़

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वेस्टइंडीज ने भारत को 24 रन से हराया, T20I सीरीज 2-2 से बराबर; कीमो पॉल ने झटके 5 विकेट

हैदराबाद, 15 अक्टूबर 2026: वेस्टइंडीज ने चौथे T20I मुकाबले में भारत को 24 रन से हराकर पांच मैचों की सीरीज 2-2 से बराबर कर दी। हैदराबाद में खेले गए इस मुकाबले में वेस्टइंडीज ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 3 विकेट पर 247 रन बनाए। जवाब में भारतीय टीम 223 रन पर ऑलआउट हो गई। इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने सीरीज का रोमांच बढ़ा दिया है। शाई होप ने जड़ा शानदार शतक वेस्टइंडीज के कप्तान शाई होप ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। उनकी पारी ने टीम को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। वहीं, शेरफेन रदरफोर्ड ने भी नाबाद 49 रन की तेज पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों ने अंतिम ओवरों में भारतीय गेंदबाजों पर दबाव बनाए रखा। वेस्टइंडीज की पारी में कुल 16 छक्के लगे, जिससे टीम ने 247 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। कीमो पॉल ने पांच विकेट लेकर भारत को झकझोरा भारत की रन चेज में वेस्टइंडीज के गेंदबाज कीमो पॉल ने शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने संजू सैमसन, ईशान किशन, नीतीश रेड्डी, प्रिंस यादव और अक्षर पटेल को आउट कर पांच विकेट पूरे किए। उनकी गेंदबाजी ने भारतीय पारी की रफ्तार पर ब्रेक लगाया और नियमित अंतराल पर विकेट गिरने से भारत लक्ष्य से दूर रह गया। संजू सैमसन की तूफानी पारी बेअसर भारतीय बल्लेबाज संजू सैमसन ने आक्रामक अंदाज में बल्लेबाजी करते हुए सिर्फ 23 गेंदों पर 56 रन बनाए। उनकी तेज पारी ने भारत को लक्ष्य का पीछा करते हुए अच्छी शुरुआत दिलाई। नीतीश रेड्डी ने भी 41 रन का योगदान दिया और मध्यक्रम में साझेदारी बनाने की कोशिश की। हालांकि, बाकी बल्लेबाज बड़ी पारियां खेलने में नाकाम रहे। लगातार विकेट गिरने के कारण भारतीय टीम 223 रन पर सिमट गई। 248 रन का लक्ष्य हासिल नहीं कर सका भारत वेस्टइंडीज ने भारत के सामने जीत के लिए 248 रन का लक्ष्य रखा था। भारतीय बल्लेबाजों ने शुरुआत में तेजी दिखाई, लेकिन विपक्षी गेंदबाजों ने महत्वपूर्ण मौकों पर विकेट लेकर मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। कीमो पॉल के पांच विकेट ने मुकाबले में निर्णायक अंतर पैदा किया और वेस्टइंडीज ने 24 रन से जीत दर्ज की। पांचवां T20I होगा सीरीज का निर्णायक मुकाबला चौथे मैच में जीत के बाद पांच मैचों की सीरीज अब 2-2 से बराबर है। ऐसे में पांचवां और अंतिम T20I दोनों टीमों के लिए निर्णायक होगा। भारत और वेस्टइंडीज की नजरें अब सीरीज जीतने पर रहेंगी। Source – ESPNcricinfo, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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DRDO विशेषज्ञों की चेतावनी: सेमीकंडक्टर में आत्मनिर्भरता नहीं हुई तो भविष्य के युद्धों में कमजोर पड़ सकती है भारत की रक्षा क्षमता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत की रक्षा तैयारियों को मजबूत बनाने के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण और चिप सप्लाई चेन में आत्मनिर्भरता महत्वपूर्ण होती जा रही है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) से जुड़े विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि भारत ने इस क्षेत्र में रणनीतिक आत्मनिर्भरता हासिल नहीं की, तो भविष्य के तकनीक-आधारित संघर्षों में देश की रक्षा क्षमता प्रभावित हो सकती है। आधुनिक युद्ध में चिप्स की अहम भूमिका आज के आधुनिक रक्षा तंत्र में ड्रोन, रडार, मिसाइल, संचार नेटवर्क, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर प्लेटफॉर्म और AI आधारित हथियारों का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इन प्रणालियों के संचालन और उनकी क्षमताओं को बेहतर बनाने में सेमीकंडक्टर चिप्स की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में उन्नत चिप्स के लिए दूसरे देशों पर अत्यधिक निर्भरता भारत के लिए रणनीतिक जोखिम पैदा कर सकती है। वैश्विक तनाव से बाधित हो सकती है सप्लाई चेन अंतरराष्ट्रीय संघर्ष या भू-राजनीतिक तनाव की स्थिति में सेमीकंडक्टर की वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में रक्षा उपकरणों के निर्माण, रखरखाव और तकनीकी अपग्रेड की प्रक्रिया में बाधाएं आने का खतरा है। इसलिए रक्षा क्षेत्र के लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक घटकों की विश्वसनीय और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण माना जा रहा है। स्वदेशी चिप इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर विशेषज्ञों के मुताबिक, भारत को केवल व्यावसायिक सेमीकंडक्टर फैब स्थापित करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। देश में रक्षा-उपयोग के लिए जरूरी चिप्स, सेंसर, प्रोसेसर और सुरक्षित इलेक्ट्रॉनिक्स का घरेलू इकोसिस्टम विकसित करने पर भी ध्यान देना होगा। इसके लिए चिप डिजाइन, निर्माण, परीक्षण और पैकेजिंग जैसी क्षमताओं को मजबूत करना आवश्यक है, ताकि रक्षा प्रणालियों की जरूरतों के अनुरूप तकनीक देश में ही विकसित की जा सके। आयातित तकनीक पर निर्भरता घटाना जरूरी रक्षा क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक घटकों और तकनीकों के लिए आयात पर निर्भरता एक चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक सैन्य तैयारियों और तकनीकी मजबूती के लिए स्वदेशी विकल्प विकसित करना जरूरी है। घरेलू क्षमताओं के विस्तार से आपूर्ति में संभावित व्यवधानों के जोखिम को कम करने और महत्वपूर्ण रक्षा प्रणालियों के रखरखाव में मदद मिल सकती है। India Semiconductor Mission को रक्षा जरूरतों से जोड़ने की जरूरत केंद्र सरकार India Semiconductor Mission के माध्यम से देश में चिप निर्माण को बढ़ावा दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस पहल को रक्षा क्षेत्र की विशिष्ट जरूरतों के साथ बेहतर तरीके से जोड़ना जरूरी है। इसका उद्देश्य रणनीतिक इलेक्ट्रॉनिक्स के लिए सुरक्षित घरेलू आपूर्ति विकसित करना और रक्षा उपकरणों में इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण तकनीकों की उपलब्धता को मजबूत करना है। भविष्य के युद्धों में बढ़ेगी तकनीक की भूमिका भविष्य के संघर्षों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्वायत्त प्रणालियों, साइबर युद्ध, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और सटीक निशाना लगाने वाले हथियारों की भूमिका बढ़ने की संभावना है। इन सभी क्षेत्रों में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर तकनीक महत्वपूर्ण आधार प्रदान करती है। ऐसे में चिप निर्माण की घरेलू क्षमता को केवल औद्योगिक विकास का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा तैयारियों से जुड़ी प्राथमिकता के रूप में देखना जरूरी है। Source – The Indian Express, DRDO जय राष्ट्र न्यूज़

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डेटा सेंटर को मंजूरी देने से पहले बिजली-पानी की उपलब्धता साबित करनी होगी, NITI Aayog ने सुझाए सख्त मानक

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच नीति आयोग (NITI Aayog) के फ्रंटियर टेक हब ने राज्यों के लिए नया Data Centre Evaluation Framework जारी किया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले बिजली, पानी, जमीन और सहायक बुनियादी ढांचे की वास्तविक उपलब्धता का आकलन किया जाए। केवल निवेश के वादे पर नहीं मिले मंजूरी फ्रेमवर्क के अनुसार, राज्यों को सिर्फ बड़े निवेश के वादों के आधार पर डेटा सेंटर परियोजनाओं को मंजूरी देने से बचना चाहिए। डेवलपर्स को यह साबित करना होगा कि स्थानीय बिजली ग्रिड परियोजना की अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम है। यदि इसके लिए बिजली नेटवर्क में सुधार या अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की जरूरत है, तो संबंधित अपग्रेड को समय पर पूरा करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पानी की उपलब्धता और स्थानीय जल संकट पर जोर डेटा सेंटर में कूलिंग सहित विभिन्न कामों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में नीति आयोग ने मौसमी जल उपलब्धता और संबंधित क्षेत्र में पानी की कमी की स्थिति का आकलन करने की सलाह दी है। जल संकट वाले इलाकों में वैकल्पिक जल स्रोतों और समुद्री पानी को उपयोग योग्य बनाने वाली डिसैलिनेशन तकनीक जैसे विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है। आम उपभोक्ताओं के संसाधनों पर न पड़े अतिरिक्त दबाव फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा सेंटर की भारी बिजली और पानी की मांग के कारण घरों, कारोबारों और स्थानीय समुदायों के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार के साथ बिजली की खपत को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसी बीच केंद्र सरकार एक समर्पित राष्ट्रीय डेटा सेंटर नीति पर काम कर रही है। प्रोत्साहन को रोजगार और स्थानीय लाभ से जोड़ने का सुझाव नीति आयोग ने राज्यों को सलाह दी है कि डेटा सेंटर कंपनियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों का आकलन केवल निवेश की राशि के आधार पर न किया जाए। इसके बजाय रोजगार सृजन, स्थानीय स्तर पर खरीद, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और मापे जा सकने वाले आर्थिक लाभों को भी महत्व दिया जाए। इससे राज्यों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनता को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा। AI के विस्तार से बढ़ रही डेटा सेंटर की मांग जनरेटिव AI, GPU कंप्यूटिंग और क्लाउड सेवाओं के तेजी से विस्तार ने भारत में बड़े डेटा सेंटरों की मांग बढ़ाई है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, फिलहाल डेटा सेंटर भारत की कुल बिजली खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं। आने वाले दशक में यह हिस्सा बढ़कर 1 से 2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और पानी की बढ़ती जरूरतों के कारण इन परियोजनाओं की योजना बनाते समय संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन, अनिवार्य नियम नहीं यह फ्रेमवर्क फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन के रूप में है, अनिवार्य नियमन नहीं। नीति आयोग ने डेटा सेंटरों को केवल निवेश परियोजनाओं के बजाय रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखने और उनके विकास में स्थिरता, जवाबदेही तथा स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। Source – NITI Aayog, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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