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Punjab के Mansa में anti-drug activist Parwinder Singh Jhota की गोली मारकर हत्या, पूरी घटना camera पर रिकॉर्ड

मानसा, 13 अक्टूबर 2026: पंजाब के Mansa में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले activist Parwinder Singh Jhota की मंगलवार सुबह कथित तौर पर एक medical store owner ने गोली मारकर हत्या कर दी। Jhota उस समय दुकान मालिक से कथित अवैध नशीली दवाओं की बिक्री को लेकर सवाल कर रहे थे। पूरी घटना उनके Facebook Live में रिकॉर्ड हो गई। Medical store owner से हुआ था विवाद रिपोर्ट्स के मुताबिक, Jhota एक बुजुर्ग व्यक्ति के साथ medical store पहुंचे थे और दावा किया था कि उस व्यक्ति ने वहां से नशीला पदार्थ खरीदा था। इसी बात को लेकर Jhota और दुकान मालिक के बीच बहस शुरू हो गई। वीडियो में दुकान मालिक को pistol पकड़े हुए भी देखा गया, जिसके कुछ देर बाद गोलियां चल गईं। Facebook Live में रिकॉर्ड हुई हत्या Jhota अक्सर suspected drug sellers का सामना करते हुए Facebook Live करते थे। उनकी आखिरी live video में भी पूरी बहस और firing की आवाज रिकॉर्ड हुई। Indian Express के मुताबिक, Jhota ने video में यह भी कहा था कि आरोपी अपने पीछे हथियार छिपाए हुए है। एक साथी भी गंभीर रूप से घायल Firing में Jhota के एक साथी को भी गंभीर चोटें आईं और उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्ट्स में घायल लोगों की संख्या को लेकर अंतर है, लेकिन पुलिस ने Jhota की मौत और कम से कम एक associate के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि की है। आरोपी की तलाश में जुटी पुलिस Police ने आरोपी medical store owner की पहचान Ashwani Kumar के रूप में की है। घटना के बाद वह मौके से फरार हो गया और उसकी तलाश जारी है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और घटना के video समेत दूसरे evidence खंगाले जा रहे हैं। लंबे समय से चला रहे थे anti-drug campaign Parwinder Singh Jhota लंबे समय से Mansa और आसपास के क्षेत्रों में drugs के खिलाफ अभियान चला रहे थे। वह कथित तौर पर illegal drug sale करने वालों के खिलाफ videos बनाते और social media पर मामले उठाते थे। घटना के कुछ दिन पहले ही उन्होंने synthetic drugs की कथित बिक्री को लेकर CBI से Mansa में कार्रवाई की मांग भी की थी। source – Indian Express, India Today, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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HCLTech के मजबूत नतीजों से शेयर बाजार में जोरदार तेजी; Nifty 50 करीब 1.6% चढ़ा, Nifty IT में 5.2% का उछाल

मुंबई, 13 अक्टूबर 2026: भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार को जोरदार तेजी देखने को मिली। HCLTech के मजबूत तिमाही नतीजों से IT stocks में भारी खरीदारी हुई, जिसके चलते Nifty 50 करीब 1.6% बढ़कर 22,721.95 पर बंद हुआ। वहीं Sensex 1,109.10 अंक यानी 1.54% चढ़कर 73,033.78 पर पहुंच गया। IT sector इस तेजी का सबसे बड़ा driver रहा। Nifty IT में 5.2% की तेजी Nifty IT index में लगभग 5.2% की बढ़त दर्ज की गई, जो पिछले 17 महीनों से ज्यादा समय की इसकी सबसे मजबूत एक दिन की तेजी रही। HCLTech के साथ TCS, Infosys और Wipro जैसे बड़े IT stocks में भी खरीदारी देखने को मिली। HCLTech का शेयर 8% से ज्यादा चढ़ा HCLTech का शेयर करीब 8.4% उछला, जो सितंबर 2020 के बाद कंपनी के शेयर की सबसे बड़ी single-day gain रही। कंपनी के बेहतर margins, मजबूत deal wins और AI business में बढ़ोतरी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया। Q2 में मुनाफा 21% बढ़कर ₹5,132 करोड़ HCLTech ने FY27 की दूसरी तिमाही में ₹5,132 करोड़ का consolidated net profit दर्ज किया, जो सालाना आधार पर लगभग 21% ज्यादा है। कंपनी की revenue 11.5% बढ़कर ₹35,620 करोड़ रही, जबकि EBIT margin बढ़कर 18.2% पर पहुंच गया। TCS और दूसरे IT shares में भी तेजी HCLTech के अलावा TCS का शेयर करीब 6.8%, Infosys लगभग 4.4% और Wipro करीब 4.5% मजबूत हुआ। बेहतर-than-expected IT earnings ने पूरे sector में buying sentiment को मजबूत किया। Broader market में भी दिखी मजबूती IT stocks के अलावा financial services, auto, FMCG और metal shares में भी बढ़त देखने को मिली। Midcap index करीब 1.1% चढ़ा, जबकि smallcap index में हल्की तेजी रही। हालांकि Middle East tensions और ऊंचे crude oil prices अभी भी बाजार के लिए risk बने हुए हैं। source – Reuters, HCLTech जय राष्ट्र न्यूज़

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IIT Kharagpur ने लॉन्च किया Free AI Tutor, GATE-JAM की तैयारी भी होगी मुफ्त; 13 करोड़ से ज्यादा Learning Resources का Access

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर 2026: IIT Kharagpur ने छात्रों के लिए NDLI-FERMI AI Tutor और Free Online GATE-JAM Preparation Platform लॉन्च किया है। इन दोनों पहलों का उद्देश्य छात्रों को बिना महंगी कोचिंग के personalised learning support और competitive exams की तैयारी के लिए गुणवत्तापूर्ण resources उपलब्ध कराना है। National Digital Library of India (NDLI) पर मौजूद 13 करोड़ से ज्यादा digital learning resources का भी छात्रों को फायदा मिलेगा। NDLI-FERMI AI Tutor से मिलेगी Personalised Learning IIT Kharagpur ने Fermi AI के सहयोग से NDLI-FERMI AI Tutor तैयार किया है। यह सामान्य AI tools की तरह केवल सीधे जवाब देने के बजाय students को hints, guided questions और explanations के जरिए खुद problem solve करने के लिए प्रेरित करता है। यह सुविधा registered NDLI users के लिए मुफ्त उपलब्ध है। ‘Scan & Ask’ से सवाल की फोटो डालकर ले सकेंगे मदद AI Tutor में ‘Scan & Ask’ फीचर दिया गया है। इसके जरिए छात्र Physics, Chemistry, Mathematics और Biology से जुड़े सवाल या अपनी attempted solution upload करके AI से guidance ले सकते हैं। Tool गलतियों की पहचान करने, concepts को बेहतर समझने और problem-solving skills विकसित करने में मदद करेगा। GATE और JAM की तैयारी के लिए Free Online Platform इसके साथ IIT Kharagpur ने GATE और JAM aspirants के लिए अलग free online preparation platform भी शुरू किया है। इसमें syllabus mapping, NPTEL और SWAYAM lectures तथा academic notes जैसे resources उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका खास फोकस उन छात्रों पर है जो ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं या महंगी coaching afford नहीं कर सकते। NDLI पर 13 करोड़ से ज्यादा Learning Resources Ministry of Education द्वारा समर्थित National Digital Library of India के एक करोड़ से ज्यादा learners हैं और platform पर 130 million यानी 13 करोड़ से अधिक learning resources उपलब्ध हैं। नई AI-based initiative के जरिए IIT Kharagpur इस बड़े digital education ecosystem को personalised learning के साथ जोड़ रहा है। Platinum Jubilee के मौके पर हुई शुरुआत इन initiatives को 12 अक्टूबर 2026 को IIT Kharagpur के Research Park, Rajarhat, Kolkata में Union Minister of State for Education Sukanta Majumdar ने लॉन्च किया। यह कार्यक्रम IIT Kharagpur की Platinum Jubilee celebrations का हिस्सा था। source – IIT Kharagpur, NDLI जय राष्ट्र न्यूज़

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US-Iran War: ट्रंप बोले—ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने में अमेरिका शायद “बहुत आगे” निकल गया, Gulf में उड़ानें प्रभावित

वॉशिंगटन, 13 अक्टूबर 2026: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि ईरान के नेतृत्व को निशाना बनाने की अमेरिकी रणनीति शायद जरूरत से ज्यादा आगे बढ़ गई। उनके मुताबिक, कई वरिष्ठ ईरानी अधिकारियों के मारे जाने के बाद संभावित शांति वार्ता के लिए यह तय करना मुश्किल हो रहा है कि तेहरान में किससे बातचीत की जाए और किसके पास फैसले लेने का अधिकार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष के बीच कूटनीतिक प्रयास अनिश्चित बने हुए हैं। वहीं, खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं के कारण हवाई और समुद्री परिवहन पर भी असर पड़ रहा है। ट्रंप बोले—ईरान में किससे बातचीत करें, यह स्पष्ट नहीं ओहायो के यंग्सटाउन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रंप ने कहा कि ईरानी नेतृत्व को निशाना बनाने के मामले में अमेरिका शायद “बहुत आगे” चला गया है। उन्होंने संकेत दिया कि वरिष्ठ अधिकारियों के मारे जाने से संभावित वार्ता के लिए उपयुक्त प्रतिनिधियों की पहचान करना कठिन हो सकता है। ट्रंप की टिप्पणी से संकेत मिलता है कि सैन्य कार्रवाई के साथ-साथ बातचीत के लिए ईरान में प्रभावी नेतृत्व और निर्णय लेने वाले अधिकारियों की पहचान भी अमेरिकी प्रशासन के सामने एक चुनौती हो सकती है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन जुलाई 2024 से पद पर हैं। हालांकि, ट्रंप ने ईरानी नेतृत्व की मौजूदा स्थिति और संभावित वार्ताकारों को लेकर अनिश्चितता जताई। ईरान की सैन्य क्षमता को लेकर ट्रंप के दावे ट्रंप ने रैली के दौरान दावा किया कि युद्ध में ईरान की वायुसेना और नौसैनिक क्षमता को भारी नुकसान पहुंचा है। उन्होंने ईरान के सभी 159 नौसैनिक जहाजों के नष्ट होने का भी दावा किया। हालांकि, इन आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। इसलिए इन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति के दावों के रूप में ही देखा जाना चाहिए। खाड़ी क्षेत्र में विमान सेवाओं पर असर ईरान युद्ध और क्षेत्र में बढ़ते सुरक्षा जोखिमों का असर खाड़ी क्षेत्र की हवाई सेवाओं पर भी पड़ रहा है। सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास हमलों की खबरों के बाद कई एयरलाइंस ने सऊदी अरब जाने वाली उड़ानें रद्द या अस्थायी रूप से निलंबित की हैं। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एतिहाद और कतर एयरवेज समेत कई विमानन कंपनियों की सेवाएं प्रभावित हुई हैं। यात्रियों को उड़ानों की स्थिति और संभावित बदलावों के लिए संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना देखने की सलाह दी जाती है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ी समुद्री सुरक्षा की चिंता फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के आसपास वाणिज्यिक जहाजों से जुड़ी सुरक्षा घटनाओं ने समुद्री परिवहन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इस क्षेत्र से वैश्विक ऊर्जा व्यापार का महत्वपूर्ण हिस्सा गुजरता है, इसलिए यहां किसी भी तरह का व्यवधान तेल आपूर्ति, माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को प्रभावित कर सकता है। समुद्री सुरक्षा से जुड़ी घटनाओं और जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंधों या जोखिमों का असर केवल क्षेत्रीय देशों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजारों और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी पड़ सकता है। शांति वार्ता पर अनिश्चितता बरकरार अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दे कूटनीतिक प्रयासों के केंद्र में बने हुए हैं। ट्रंप की ताजा टिप्पणी सैन्य कार्रवाई और कूटनीति के बीच संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण संकेत है। हालांकि, इससे किसी औपचारिक वार्ता की शुरुआत या समझौते की संभावना की पुष्टि नहीं होती। फिलहाल, संघर्ष का आगे का रुख दोनों देशों के फैसलों, क्षेत्रीय सुरक्षा की स्थिति और कूटनीतिक संपर्कों पर निर्भर करेगा। खाड़ी क्षेत्र में उड़ानों और समुद्री परिवहन पर पड़ रहे असर के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर हालात पर बनी हुई है। Source: Reuters / Al Jazeera / The Indian Express / The Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन स्थल सील, CJP कार्यकर्ताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन के बीच 13 अक्टूबर को कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के कई कार्यकर्ता भारी बैरिकेडिंग के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंच गए। दिल्ली पुलिस ने CJP नेताओं सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे समेत करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। यह कार्रवाई दिल्ली पुलिस की ओर से जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने और वहां प्रवेश पर प्रतिबंध कड़े किए जाने के एक दिन बाद हुई। इस घटनाक्रम ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर बहस तेज कर दी है। बैरिकेडिंग पार कर प्रदर्शन क्षेत्र में पहुंचे कार्यकर्ता 13 अक्टूबर की सुबह CJP के कुछ कार्यकर्ता बैरिकेडिंग और प्रतिबंधित प्रवेश व्यवस्था के बावजूद जंतर-मंतर के प्रदर्शन क्षेत्र तक पहुंचने में सफल रहे। वहां उन्होंने तिरंगा लहराया और “भारत माता की जय” तथा “इंकलाब जिंदाबाद” जैसे नारे लगाए। इसके बाद पुलिस ने कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। घटना के दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। सौरव दास और आशुतोष रंका समेत करीब 20 लोग हिरासत में पुलिस ने CJP के प्रमुख नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका को हिरासत में लिया। अजिंक्य शिंदे समेत अन्य कार्यकर्ताओं को भी पुलिस वाहनों में ले जाया गया। रिपोर्टों के मुताबिक, इस कार्रवाई में करीब 20 कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब CJP पहले से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति और स्थल पर लागू प्रतिबंधों का विरोध कर रही थी। हिरासत में पुलिस बस से सौरव दास ने साझा किया वीडियो हिरासत में लिए जाने के बाद सौरव दास ने पुलिस बस के अंदर से एक वीडियो साझा किया। वीडियो में उन्होंने दावा किया कि CJP के कार्यकर्ता पहले जंतर-मंतर के भीतर पहुंचने में सफल हुए और इसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया। यह विवरण दास के दावे पर आधारित है। घटना के पूरे क्रम की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है। जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं दिल्ली पुलिस ने 12 अक्टूबर को घोषणा की थी कि जंतर-मंतर को अब आधिकारिक रूप से निर्धारित प्रदर्शन स्थल के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके विकल्प के रूप में रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और पूर्वी दिल्ली के CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। पुलिस की ओर से इस बदलाव को प्रदर्शन प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ा कदम बताया गया है। हालांकि, जंतर-मंतर को विरोध प्रदर्शन के लिए महत्वपूर्ण स्थान मानने वाले संगठनों ने इस फैसले पर सवाल उठाए हैं। CJP का जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल बनाने का ऐलान CJP ने पुलिस के फैसले का विरोध करते हुए जंतर-मंतर को दोबारा प्रदर्शन स्थल के रूप में स्थापित करने की बात कही है। संगठन का तर्क है कि इस ऐतिहासिक स्थान को प्रशासनिक आदेश के जरिए विरोध और असहमति के लिए बंद नहीं किया जाना चाहिए। CJP इसे नागरिक अधिकारों और लोकतांत्रिक विरोध से जुड़ा मुद्दा बता रही है। दूसरी ओर, प्रशासन सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रहा है। अभिजीत दीपके ने सरकार की कार्रवाई की आलोचना की CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने कार्यकर्ताओं की हिरासत और जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थलों की सूची से हटाने के फैसले की आलोचना की। उन्होंने कहा कि सरकार विरोध की आवाज को रोक नहीं सकती और किसी स्थान को प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने से असहमति समाप्त नहीं हो जाती। दीपके की प्रतिक्रिया CJP के राजनीतिक रुख को दर्शाती है। इस मामले में पुलिस और संगठन के बीच मुख्य मतभेद प्रदर्शन के लिए स्थान और वहां लागू प्रतिबंधों को लेकर है। भारी सुरक्षा के बीच सीमित रहा प्रवेश जंतर-मंतर और आसपास के इलाके में पुलिस बल की तैनाती, बैरिकेडिंग और निगरानी बढ़ाई गई थी। रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली के इस हिस्से में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने के कारण जंतर-मंतर तक सामान्य पहुंच भी सीमित रही। पुलिस की ओर से उठाए गए कदमों का उद्देश्य प्रतिबंधित क्षेत्र में भीड़ जुटने से रोकना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना बताया गया। 10 अक्टूबर को भी प्रदर्शनकारियों को रोका गया था 10 अक्टूबर को CJP ने जंतर-मंतर पर बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई थी, लेकिन पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को वहां पहुंचने से रोक दिया था। इसके बाद कुछ समूहों ने INA और अन्य स्थानों पर विरोध प्रदर्शन किए। 13 अक्टूबर की घटना ने इस विवाद को फिर चर्चा में ला दिया है। CJP का कहना है कि वह अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखेगी, जबकि पुलिस निर्धारित नियमों और प्रतिबंधों के पालन पर जोर दे रही है। CJP की मुख्य मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े आरोपों की जांच की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाए गए। वहीं, निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है और कहा है कि पात्र मतदाता निर्धारित प्रक्रिया के जरिए अपना नाम दोबारा जुड़वा सकते हैं। मतदाता सूची से जुड़े आरोप और उनके जवाब इस राजनीतिक विवाद का प्रमुख हिस्सा बने हुए हैं। पुलिस का पक्ष: प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश दिल्ली पुलिस की कार्रवाई के पीछे प्रमुख आधार यह बताया गया कि जंतर-मंतर अब निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं है और कार्यकर्ता प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश कर वहां जुटे थे। पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों को हटाया और कई नेताओं तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया। इस मामले में पुलिस की कार्रवाई और विरोध प्रदर्शन के अधिकार को लेकर अलग-अलग पक्षों के तर्क सामने आए हैं। हिरासत में लिए गए सभी लोगों के खिलाफ आगे की कानूनी स्थिति का विवरण उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है। वायरल वीडियो को लेकर भी फैक्ट-चेक आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया पर जंतर-मंतर पर हजारों लोगों की भीड़ दिखाने वाले कुछ वीडियो भी प्रसारित हुए। फैक्ट-चेक रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वीडियो पुराने या असंबंधित घटनाक्रमों से जुड़े थे, जिनमें फिलीपींस के एक उत्सव और 2021 के किसान आंदोलन के दृश्य भी शामिल बताए गए। इसलिए सोशल मीडिया पर साझा किए जा रहे वीडियो को मौजूदा प्रदर्शन…

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CJP को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली? दिल्ली पुलिस ने बताईं ये वजहें

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में कॉकroach जनता पार्टी (CJP) ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने आवेदन खारिज कर दिया। पुलिस के अनुसार, अनुमति नहीं देने के पीछे देर से आवेदन करना, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों का कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताएं शामिल थीं। निर्धारित समय से देर से दिया गया आवेदन दिल्ली पुलिस के मुताबिक, CJP ने प्रदर्शन की अनुमति के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत पर्याप्त समय पहले आवेदन नहीं किया था। आवेदन कार्यक्रम की तारीख के काफी करीब जमा किया गया, जिससे आयोजन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था के आकलन के लिए समय सीमित रह गया। पुलिस ने समय पर आवेदन न मिलने को अनुमति अस्वीकार करने के प्रमुख कारणों में शामिल किया। पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के उल्लंघन का आरोप पुलिस ने CJP के पहले के प्रदर्शनों का रिकॉर्ड भी अपने फैसले का आधार बताया। अधिकारियों के अनुसार, पिछले आयोजनों के दौरान प्रदर्शन के लिए निर्धारित कुछ कानूनी निर्देशों और आयोजकों की ओर से दिए गए आश्वासनों का कथित रूप से पालन नहीं किया गया था। पुलिस ने इस कथित गैर-अनुपालन को भविष्य में कानून-व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ी चिंताओं के आकलन में शामिल किया। सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन की चिंता दिल्ली पुलिस ने बड़े स्तर पर लोगों के जुटने से सार्वजनिक सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के सामने आने वाली चुनौतियों का भी हवाला दिया। जंतर-मंतर मध्य दिल्ली में स्थित है और महत्वपूर्ण सरकारी तथा सुरक्षा प्रतिष्ठानों के निकट होने के कारण यहां बड़ी सभाओं के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जाती है। अधिकारियों का तर्क था कि संभावित भीड़ को नियंत्रित करने और किसी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम जरूरी हैं। यातायात पर पड़ने वाले असर का हवाला पुलिस ने यातायात व्यवस्था को भी अनुमति न देने के कारणों में शामिल किया। अधिकारियों के अनुसार, बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के पहुंचने से मध्य दिल्ली की सड़कों, कार्यालयों तक आने-जाने वाले मार्गों और सार्वजनिक परिवहन पर असर पड़ सकता था। पुलिस का कहना था कि विरोध प्रदर्शन के दौरान आम नागरिकों की आवाजाही और यातायात प्रबंधन को ध्यान में रखना आवश्यक है। गृह मंत्रालय ने भी जताई थी कानून-व्यवस्था की चिंता प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को संभावित कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभावों को लेकर सतर्क किया था। रिपोर्टों के अनुसार, मंत्रालय ने बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की संभावना को देखते हुए दिल्ली पुलिस के साथ वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करने और एहतियाती समन्वय बनाए रखने पर जोर दिया था। खुफिया सूचनाओं के आधार पर निगरानी अधिकारियों के अनुसार, खुफिया सूचनाओं में बड़ी संख्या में समर्थकों के दिल्ली पहुंचने और प्रतिबंधों के बावजूद जुटान होने की आशंका जताई गई थी। इसके बाद दिल्ली आने वाले प्रमुख मार्गों, परिवहन केंद्रों और अन्य स्थानों पर निगरानी बढ़ाने जैसे एहतियाती कदम उठाए गए। हालांकि, ये चिंताएं प्रशासन की ओर से बताए गए आकलन का हिस्सा थीं; इन्हें किसी संभावित उल्लंघन का स्वतः प्रमाण नहीं माना जा सकता। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की व्यवस्था में बदलाव रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल के रूप में जारी रखने की व्यवस्था में बदलाव का फैसला किया है। इसके विकल्प के तौर पर रामलीला मैदान, बुराड़ी और CBD ग्राउंड जैसे स्थानों का उल्लेख किया गया है। यह कदम प्रदर्शन स्थलों के निर्धारण और प्रबंधन से जुड़ी समिति की सिफारिशों से संबंधित बताया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य प्रदर्शनों को निर्धारित स्थानों पर आयोजित कराने और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का भी हवाला प्रदर्शन की अनुमति और उसके नियमन के संबंध में अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों तथा प्रक्रियात्मक नियमों का भी हवाला दिया। शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन लोकतांत्रिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा के मद्देनजर प्रशासन इस पर उचित शर्तें लागू कर सकता है। हालांकि, किसी भी प्रतिबंध की वैधता और उचित सीमा का आकलन उसके आधार, प्रभाव और संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार किया जाना चाहिए। CJP ने फैसले को लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक बताया CJP ने अनुमति नहीं दिए जाने का विरोध करते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर अनुचित प्रतिबंध बताया। पार्टी नेताओं अभिजीत दीपके और अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रशासन की कार्रवाई असहमति की आवाज को दबाने का प्रयास है। इस तरह मामले में पुलिस का पक्ष सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित है, जबकि CJP इसे लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़कर देख रही है। 13 अक्टूबर को फिर हिरासत में लिए गए CJP नेता 13 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रंका ने जंतर-मंतर पहुंचने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें फिर हिरासत में ले लिया गया। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने कहा कि वहां प्रतिबंध लागू थे और दोनों नेताओं पर हाल में रिहाई के दौरान शांति बनाए रखने से संबंधित शर्तें भी लागू थीं। इस घटनाक्रम ने प्रदर्शन की अनुमति, प्रशासनिक प्रतिबंधों और असहमति जताने के अधिकार को लेकर विवाद को और बढ़ा दिया। मामला न्यायालयों तक पहुंचा प्रदर्शन संबंधी प्रतिबंधों, आवाजाही पर असर और अनुमति नहीं दिए जाने के मुद्दों को लेकर न्यायालयों में भी याचिकाएं पहुंचने की खबरें सामने आई हैं। इस संदर्भ में मुख्य सवाल यह है कि सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगाए गए प्रतिबंध कितने आवश्यक और आनुपातिक हैं। प्रदर्शन को नियंत्रित करने का अधिकार और शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार—दोनों के बीच संतुलन बनाए रखना इस विवाद का प्रमुख कानूनी और लोकतांत्रिक पहलू है। CJP को अनुमति नहीं मिलने की मुख्य वजहें दिल्ली पुलिस के अनुसार, CJP के प्रदर्शन को अनुमति नहीं देने के प्रमुख कारण थे—देर से आवेदन, पिछले प्रदर्शनों में निर्देशों के कथित उल्लंघन, सार्वजनिक सुरक्षा संबंधी चिंताएं, यातायात पर संभावित असर और खुफिया सूचनाओं के आधार पर कानून-व्यवस्था का आकलन। दूसरी ओर, CJP इन कारणों को चुनौती देते हुए कार्रवाई को शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार पर अनुचित रोक बता रही है। मामले में प्रशासनिक सुरक्षा चिंताओं और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस जारी है। Source: The Indian Express…

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सतना में BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन, राहुल गांधी का पुतला दहन; JNU मामले पर कांग्रेस से मांगा जवाब

सतना: मध्य प्रदेश के सतना में 12 अक्टूबर की शाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा ने महिला सुरक्षा, सम्मान और न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने प्रदर्शन BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कांग्रेस सार्वजनिक रूप से महिलाओं की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन अपने नेताओं से जुड़े मामलों में उसे स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। राहुल गांधी का पुतला जलाकर जताया विरोध प्रदर्शन के दौरान BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस कार्रवाई का वीडियो स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहा और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई। JNU के मामले को लेकर विरोध यह प्रदर्शन कांग्रेस सांसद और JNU के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच के बाद 9 अक्टूबर को अकोइजाम की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, अकोइजाम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में आरोपों, जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है। 11 छात्राओं की शिकायतों का दावा BJP की ओर से दावा किया गया है कि कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजाम के खिलाफ शिकायतें की थीं। इसी मुद्दे को लेकर BJP महिला मोर्चा ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए और कांग्रेस नेतृत्व से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इन शिकायतों और आरोपों से संबंधित दावों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सुष्मिता सिंह परिहार के नेतृत्व में प्रदर्शन सतना में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व BJP महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सुष्मिता सिंह परिहार ने किया। प्रदर्शन में पूर्व महापौर विमला पांडेय, ममता पांडेय, पूर्व विधायक ऊषा चौधरी और जिला BJP अध्यक्ष भगवती पांडेय सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगने की मांग प्रदर्शनकारी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। BJP महिला मोर्चा का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस प्रकरण पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह आरोप BJP नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट नहीं है। कई राज्यों में हुए प्रदर्शन रिपोर्टों के मुताबिक, 12 और 13 अक्टूबर को दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और नाहन तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर समेत कई स्थानों पर BJP महिला मोर्चा ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर राहुल गांधी और अकोइजाम के पुतले भी जलाए गए। दिल्ली में BJP महिला मोर्चा ने अपने विरोध अभियान को “नारी शक्ति हुंकार आंदोलन” नाम दिया। संगठन ने मामले में जवाबदेही तय करने और कांग्रेस नेतृत्व से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। राजनीतिक विवाद ने पकड़ा जोर JNU से जुड़े इस मामले को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। BJP इसे महिला सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ रही है। वहीं, अकोइजाम आरोपों से इनकार कर चुके हैं। मामले में शिकायतों, आंतरिक जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक आरोपों से अलग रखते हुए देखना महत्वपूर्ण है। Source: Indian News Trust / The Indian Express / India Today / Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दिल्ली में महारैली, राहुल गांधी-प्रियंका गांधी समेत INDIA bloc के कई बड़े नेता शामिल

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को दिल्ली में INDIA bloc के नेताओं, कार्यकर्ताओं और छात्र संगठनों ने बड़ा मार्च निकाला। इसमें राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा, मल्लिकार्जुन खरगे और अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के पुनरीक्षण से जुड़े आरोपों की न्यायिक समीक्षा की मांग उठाई। Supreme Court की ओर निकला बड़ा मार्च INDIA bloc के नेताओं और समर्थकों ने मध्य दिल्ली से Supreme Court की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने कई रास्तों पर बैरिकेडिंग की और आवाजाही को नियंत्रित किया। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को अदालत तक पहुंचने से पहले रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम ने चुनाव प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर याचिका दाखिल करने की कार्रवाई की। राहुल गांधी ने संभाला मोर्चा कांग्रेस नेता राहुल गांधी प्रदर्शन के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस आंदोलन से पीछे नहीं हटेगा और लोकतांत्रिक संस्थाओं तथा चुनावी पारदर्शिता से जुड़े मुद्दों को उठाता रहेगा। उन्होंने युवाओं से भी इन विषयों पर अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। प्रियंका गांधी भी रहीं साथ प्रियंका गांधी वाड्रा भी मार्च में राहुल गांधी के साथ दिखाई दीं। इससे पहले भी वह मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में शामिल रही हैं। हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान राहुल गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने की घटनाएं भी सामने आई थीं। अखिलेश यादव समेत कई विपक्षी नेता शामिल मार्च में INDIA bloc से जुड़े विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया की समीक्षा की मांग का समर्थन किया। प्रदर्शन में अलग-अलग दलों की भागीदारी ने इसे विपक्ष के साझा राजनीतिक अभियान के रूप में सामने रखा। नेहा बोरा और छात्र संगठनों की मौजूदगी प्रदर्शन में छात्र संगठनों और युवा कार्यकर्ताओं ने भी हिस्सा लिया। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हाल के दिनों में CEC और SIR विरोधी आंदोलनों में सक्रिय रही हैं। दिल्ली में हुए विभिन्न प्रदर्शनों के दौरान छात्र नेताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। मुख्य मांग—ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा विपक्ष और CJP से जुड़े समूहों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। प्रदर्शनकारियों ने इन आरोपों की जांच और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और डुप्लिकेट प्रविष्टियों सहित अपात्र नामों को हटाकर सूची को अधिक सटीक बनाना है। आयोग राजनीतिक पक्षपात के आरोपों से इनकार करता रहा है। 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटने को लेकर विवाद Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के दौरान 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए जाने का आंकड़ा सामने आया। इनमें मृत, दूसरी जगह स्थानांतरित और सत्यापन में नहीं मिल सके मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियां शामिल बताई गईं। विपक्ष का आरोप है कि इस प्रक्रिया का राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। वहीं, चुनाव आयोग का कहना है कि पात्र मतदाताओं के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम दोबारा जुड़वाने का विकल्प उपलब्ध है। नाम हटाए जाने के आंकड़े और उनके प्रभाव को समझने के लिए संबंधित राज्य, समयावधि और आधिकारिक आंकड़ों का संदर्भ महत्वपूर्ण है। राहुल गांधी ने सरकार पर लगाए आरोप राहुल गांधी ने प्रदर्शन के दौरान सरकार पर विरोध की आवाज दबाने की कोशिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार और बार-बार हिरासत में लिए जाने की घटनाओं पर भी सवाल उठाए। ये विपक्ष की ओर से लगाए गए राजनीतिक आरोप हैं; संबंधित पक्षों के जवाब और आधिकारिक विवरण को इनके साथ अलग से देखना जरूरी है। दिल्ली मेट्रो की सेवाओं पर पड़ा असर प्रदर्शन के मद्देनजर मध्य दिल्ली के कुछ मेट्रो स्टेशनों पर प्रवेश और निकास को लेकर प्रतिबंध लगाए जाने की खबरें सामने आईं। रिपोर्टों में पटेल चौक, जनपथ, राजीव चौक, मंडी हाउस, केंद्रीय सचिवालय और बाराखंभा रोड सहित छह स्टेशनों का उल्लेख किया गया। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य प्रदर्शन के दौरान भीड़ और आवाजाही को नियंत्रित करना बताया गया। Batman मास्क बने प्रदर्शन का प्रतीक मार्च के दौरान Batman मास्क भी चर्चा में रहे। रिपोर्टों के अनुसार, युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने मास्क वितरित किए और राहुल गांधी ने भी Batman मास्क के साथ अपनी तस्वीर साझा की। प्रदर्शनकारियों ने इन मास्कों को अपने राजनीतिक संदेश और विरोध के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया। CJI से मुलाकात नहीं हो सकी विपक्षी नेता भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत से मुलाकात करना चाहते थे, लेकिन बैठक नहीं हो सकी। इसके बाद राहुल गांधी ने कहा कि विपक्ष संवैधानिक और कानूनी माध्यमों से अपनी लड़ाई जारी रखेगा। Supreme Court में याचिका दाखिल मार्च के दौरान चुनाव आयोग और SIR से जुड़े मुद्दों पर Supreme Court में याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। विपक्ष न्यायिक हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। हालांकि, याचिका दाखिल होना और अदालत द्वारा आरोपों पर कोई अंतिम निष्कर्ष देना अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। कई शहरों में विरोध प्रदर्शनों से बढ़ी राजनीतिक हलचल दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु जैसे शहरों में भी मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR के विरोध में प्रदर्शनों की खबरें सामने आई हैं। हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और पुलिस की तैनाती को लेकर राजनीतिक बहस तेज हुई है। इस मुद्दे ने चुनावी पारदर्शिता, मतदाता सूची और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा को बढ़ाया है। आरोपों पर अंतिम फैसला बाकी विपक्ष ने चुनाव आयोग की निष्पक्षता और SIR के प्रभाव को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से इनकार करता है और मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया पर जोर देता है। फिलहाल, किसी न्यायिक निष्कर्ष के अभाव में इन आरोपों को आरोपों के रूप में ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए। स्रोत: Reuters / The Indian Express / Loksatta / The Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुंबई में ठाकरे परिवार का जोरदार प्रदर्शन, आदित्य-अमित ने संभाला मोर्चा

मुंबई: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में मुंबई में प्रदर्शन तेज हो गया है। 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क और दादर इलाके में हुए विरोध प्रदर्शन में आदित्य ठाकरे, तेजस ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के नेता अमित ठाकरे समर्थकों के साथ नजर आए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान करीब 300 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया। इसके बाद ठाकरे परिवार के नेताओं ने आंदोलन और तेज करने की चेतावनी दी। शिवाजी पार्क में बड़ा प्रदर्शन 11 अक्टूबर को शिवाजी पार्क के आसपास CJP समर्थकों और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। इस कार्रवाई के बाद विरोध प्रदर्शन ने राजनीतिक रूप ले लिया और ठाकरे परिवार के नेताओं की सक्रियता बढ़ गई। आदित्य और अमित ठाकरे ने संभाला मोर्चा पुलिस की कार्रवाई के बाद शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे और MNS नेता अमित ठाकरे प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे। दोनों नेताओं ने समर्थकों के साथ विरोध जताया और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग दोहराई। उनके प्रदर्शन में शामिल होने के बाद मामला महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन गया। तेजस ठाकरे भी प्रदर्शन में शामिल आदित्य ठाकरे के भाई तेजस ठाकरे भी विरोध प्रदर्शन में मौजूद रहे। परिवार के अलग-अलग सदस्यों की भागीदारी के कारण सोशल मीडिया पर इसे ‘ठाकरे परिवार का प्रदर्शन’ कहा गया। हालांकि, सभी सदस्यों की मौजूदगी और उनकी गतिविधियों को एक ही समय की घटना मानने के बजाय संबंधित रिपोर्टों के संदर्भ में देखना जरूरी है। अमित ठाकरे गाड़ी की छत पर चढ़े मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान अमित ठाकरे एक वाहन की छत पर चढ़कर समर्थकों को संबोधित करते दिखाई दिए। उन्होंने पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शन पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर नाराजगी जताई। इस घटना के दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहे। आदित्य ठाकरे ने दी महाराष्ट्र बंद की चेतावनी आदित्य ठाकरे ने पुलिस कार्रवाई पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी दी कि यदि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इसी तरह कार्रवाई जारी रही, तो महाराष्ट्र में आंदोलन का दायरा बढ़ाया जा सकता है। रिपोर्टों में उनके हवाले से यह बयान भी सामने आया कि प्रदर्शनकारियों को हाथ लगाया गया तो महाराष्ट्र बंद कराया जा सकता है। करीब 300 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क और आसपास के इलाकों से करीब 300 लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया। बाद में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया। पुलिस की कार्रवाई को लेकर विपक्षी नेताओं ने सवाल उठाए, जबकि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन की जिम्मेदारी का हिस्सा रहा। आदित्य और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों पर मामला दर्ज 12 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने शिवाजी पार्क में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़े मामले में आदित्य ठाकरे और अमित ठाकरे समेत 25 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। यह मामला शिवाजी पार्क पुलिस स्टेशन के बाहर हुए प्रदर्शन और पुलिस आदेशों के कथित उल्लंघन से संबंधित बताया गया है। आरोप दर्ज होना अपने आप में किसी व्यक्ति के दोषी साबित होने का प्रमाण नहीं है। 4 अक्टूबर को राज और उद्धव ठाकरे भी साथ आए थे इस आंदोलन से पहले 4 अक्टूबर को राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने मुंबई में संयुक्त मार्च का नेतृत्व किया था। दोनों नेताओं ने समर्थकों से पार्टी के झंडों के बजाय केवल तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। मार्च के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों को उठाया गया। राज ठाकरे ने दिल्ली में पुलिस कार्रवाई की आलोचना की 10 अक्टूबर को राज ठाकरे ने दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई की आलोचना की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर विरोध की आवाज दबाने का आरोप लगाया और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार को लेकर सवाल उठाए। ये उनके राजनीतिक आरोप और बयान थे। SIR के मुद्दे पर एकजुट दिखे ठाकरे गुट शिवसेना (UBT) और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठाए हैं। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि मतदाता सूची में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का कहना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य सूची को अधिक सटीक बनाना और मृत, डुप्लिकेट तथा अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। इसलिए दोनों पक्षों के दावों को राजनीतिक आरोपों और आधिकारिक पक्ष के रूप में अलग-अलग समझना जरूरी है। पार्टी झंडों के बजाय तिरंगा लाने की अपील 4 अक्टूबर के संयुक्त मार्च में राज और उद्धव ठाकरे ने पार्टी के झंडों के बजाय तिरंगा लेकर आने की अपील की थी। उनका कहना था कि यह मुद्दा किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है, बल्कि चुनाव आयोग और चुनावी प्रक्रिया से जुड़ा है। आंदोलन का दायरा बढ़ाने की चेतावनी आदित्य और अमित ठाकरे की सक्रियता तथा प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद महाराष्ट्र में आंदोलन को और व्यापक बनाने की चेतावनी सामने आई। ठाकरे नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और SIR से जुड़े सवालों पर जवाब मांगे हैं। हालांकि, आगे आंदोलन किस रूप में होगा, यह संबंधित नेताओं की आगामी घोषणाओं पर निर्भर करेगा। आरोपों पर राजनीतिक विवाद जारी विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर पक्षपात के आरोप लगा रहे हैं। चुनाव आयोग इन आरोपों से असहमति जताता है। उपलब्ध विवरणों के आधार पर इन आरोपों को राजनीतिक विवाद के हिस्से के रूप में प्रस्तुत करना उचित है; इन्हें न्यायिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। स्रोत: The Indian Express / Reuters / The Times of India / Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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राहुल गांधी बने ‘ढाल’! प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के साथ मार्च का वीडियो चर्चा में

नई दिल्ली: Chief Election Commissioner (CEC) ज्ञानेश कुमार और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में 12 अक्टूबर को INDIA bloc के Supreme Court मार्च के दौरान राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा का एक वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। कुछ मीडिया रिपोर्टों में राहुल गांधी को दोनों महिला नेताओं के आगे और आसपास चलते हुए ‘ढाल’ की तरह पेश किया गया। हालांकि, ‘ढाल’ इस दृश्य की मीडिया और सोशल मीडिया में की गई व्याख्या है, किसी आधिकारिक सुरक्षा आकलन का निष्कर्ष नहीं। Supreme Court की ओर निकला INDIA bloc का मार्च 12 अक्टूबर को INDIA bloc के कई नेताओं और छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं ने दिल्ली में Supreme Court की ओर मार्च किया। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष की आपत्तियों के बीच आयोजित किया गया था। राहुल, प्रियंका और नेहा बोरा एक साथ नजर आए मार्च के दौरान सामने आए वीडियो में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा भी दिखाई दीं। नेहा बोरा हालिया CEC और SIR विरोधी प्रदर्शनों में सक्रिय रही हैं और विभिन्न विरोध प्रदर्शनों के दौरान उन्हें हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई हैं। क्यों कहा जा रहा है राहुल गांधी को ‘ढाल’? वायरल वीडियो में राहुल गांधी भीड़ और सुरक्षा व्यवस्था के बीच प्रियंका गांधी और नेहा बोरा के करीब चलते दिखाई देते हैं। इसी दृश्य को कुछ मीडिया रिपोर्टों ने इस अंदाज में पेश किया कि राहुल गांधी दोनों महिला नेताओं के लिए ‘शील्ड’ यानी ढाल की तरह आगे बढ़ रहे थे। हालांकि, केवल वीडियो के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा कि उस समय दोनों नेताओं को किसी विशेष शारीरिक खतरे का सामना करना पड़ रहा था। ‘ढाल’ शब्द इस दृश्य की प्रतीकात्मक व्याख्या के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो मार्च के दौरान सामने आए इस दृश्य को सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से साझा किया गया। राहुल गांधी के समर्थकों ने इसे एकजुटता और साथ खड़े रहने के संकेत के रूप में देखा, जबकि राजनीतिक विरोधियों ने प्रदर्शन को विपक्ष की राजनीतिक लामबंदी से जोड़कर पेश किया। Barricades पर रोका गया मार्च मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, INDIA bloc के मार्च को Supreme Court पहुंचने से पहले भगवान दास रोड के पास लगाए गए बैरिकेड्स पर रोक दिया गया। इसके बाद वकीलों की एक टीम Supreme Court पहुंची और चुनाव से संबंधित आरोपों को लेकर याचिका दाखिल किए जाने की खबर सामने आई। राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने की बात कही प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी ने आंदोलन जारी रखने और पीछे नहीं हटने की बात कही। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक संस्थाओं और मतदान के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर अपनी आवाज उठाने की अपील भी की। प्रियंका गांधी भी प्रदर्शनों में सक्रिय प्रियंका गांधी वाड्रा हाल के दिनों में CEC और SIR के विरोध में आयोजित प्रदर्शनों में सक्रिय दिखाई दी हैं। 6 अक्टूबर को हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी और प्रियंका गांधी सहित विपक्षी सांसदों तथा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने की खबरें भी सामने आई थीं। नेहा बोरा आंदोलन का प्रमुख युवा चेहरा AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा हालिया विरोध प्रदर्शनों में लगातार सक्रिय रही हैं। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस द्वारा उन्हें विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर आई थी। इससे पहले RK आश्रम इलाके में उनसे मिलती-जुलती दिखने वाली एक अन्य महिला को पुलिस द्वारा गलती से नेहा बोरा समझे जाने का मामला भी रिपोर्ट किया गया था। मल्लिकार्जुन खरगे भी मार्च में शामिल कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे भी 12 अक्टूबर के मार्च में शामिल हुए। प्रदर्शन के दौरान उनका Batman मास्क पहने दिखाई देने वाला दृश्य भी सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा और विरोध प्रदर्शन के प्रतीकात्मक दृश्यों में शामिल हो गया। SIR को लेकर विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच विवाद विपक्ष और कुछ संबंधित समूहों का आरोप है कि SIR प्रक्रिया के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए और इसका राजनीतिक प्रभाव पड़ सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग का पक्ष है कि मतदाता सूची को अद्यतन करने का उद्देश्य मृत, डुप्लिकेट और अपात्र प्रविष्टियों को हटाना है। पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत उन्हें दोबारा शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। BJP ने आरोपों को बताया राजनीतिक भारतीय जनता पार्टी ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग को एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था बताया है। BJP का आरोप है कि विपक्ष चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाकर जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश कर रहा है। ‘ढाल’ वाला दृश्य बना चर्चा का विषय राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और नेहा बोरा का साथ चलते हुए वीडियो INDIA bloc के प्रदर्शन से जुड़ी प्रमुख चर्चाओं में शामिल हो गया है। हालांकि, इस दृश्य को ‘राहुल गांधी बने ढाल’ कहना मीडिया और सोशल मीडिया की व्याख्या है। वीडियो से अपने आप किसी विशिष्ट खतरे या सुरक्षा घटना की पुष्टि नहीं होती। स्रोत: Reuters / The Economic Times / The Times of India / Navbharat Times / The Indian Express / Loksatta जय राष्ट्र न्यूज़

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