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Railway कर्मचारियों के लिए 78-day productivity-linked bonus मंजूर, 11.4 लाख non-gazetted staff को मिलेगा फायदा

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: Union Cabinet ने Indian Railways के करीब 11.4 लाख non-gazetted employees के लिए 78 दिनों के Productivity Linked Bonus (PLB) को मंजूरी दे दी है। Eligible कर्मचारियों को अधिकतम लगभग ₹17,951 तक bonus मिलने की उम्मीद है। किन कर्मचारियों को मिलेगा bonus? यह bonus Railway के eligible non-gazetted employees को दिया जाएगा। इसमें विभिन्न operational, technical और support categories के कर्मचारी शामिल होंगे। 78 दिनों का PLB Cabinet ने 78 days के productivity-linked bonus को मंजूरी दी है। PLB का उद्देश्य कर्मचारियों के contribution और Railway performance को reward करना है। अधिकतम कितना मिलेगा? Eligible employee को अधिकतम करीब ₹17,951 तक bonus मिल सकता है। Actual amount salary calculation और eligibility norms पर निर्भर करेगा। 11.4 लाख कर्मचारियों को फायदा सरकार के मुताबिक इस फैसले से लगभग 11.4 लाख Railway employees को benefit मिलेगा। Festival season से पहले यह घोषणा कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। क्यों दिया जाता है PLB? Indian Railways में productivity-linked bonus operational performance और workforce contribution से जुड़ा incentive है। इसे आमतौर पर eligible non-gazetted staff को annual basis पर दिया जाता है। source – Union Cabinet, Ministry of Railways जय राष्ट्र न्यूज़

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एंटी-CEC प्रदर्शन के बाद नया विवाद: तीन पत्रकारों के खिलाफ SC/ST एक्ट में FIR, क्राइम ब्रांच करेगी जांच

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 3 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन के बाद विवाद और गहरा गया है। प्रदर्शन के दौरान एक पुलिस अधिकारी पर यौन उत्पीड़न और कथित मारपीट के आरोप लगाने वाले तीन पत्रकारों के खिलाफ अब एफआईआर दर्ज की गई है। यह मामला एसीपी विवेक भगत की शिकायत पर दर्ज हुआ है। उन्होंने पत्रकारों पर जातिसूचक टिप्पणियां करने, मानहानि और सरकारी कामकाज में बाधा डालने के आरोप लगाए हैं। किन धाराओं में दर्ज हुई FIR? पुलिस के मुताबिक, तीनों पत्रकारों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के साथ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 221, 356(2) और 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है। एसीपी विवेक भगत ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनकी नेमप्लेट और जातिगत पहचान का उल्लेख करते हुए अपमानजनक टिप्पणियां की गईं। इन आरोपों की सत्यता जांच के अधीन है। पत्रकारों ने पहले पुलिस अधिकारी पर लगाए थे आरोप इससे पहले एक महिला पत्रकार ने प्रदर्शन के दौरान एसीपी विवेक भगत पर यौन उत्पीड़न और कथित दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था। अन्य पत्रकारों ने भी पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायतें की थीं। इन शिकायतों में लगाए गए आरोपों की अभी अंतिम पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों और पत्रकारों के विरुद्ध दर्ज एफआईआर को अलग-अलग शिकायतों के आधार पर जांचा जा रहा है। क्राइम ब्रांच को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने यौन उत्पीड़न के आरोपों और संबंधित शिकायतों की जांच क्राइम ब्रांच को सौंप दी है। जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और प्रदर्शन के समय रिकॉर्ड किए गए वीडियो सहित अन्य साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है। जांच का उद्देश्य घटना के दौरान हुई गतिविधियों और दोनों पक्षों की शिकायतों से जुड़े तथ्यों को स्पष्ट करना है। सुप्रीम कोर्ट ने भी जताई चिंता महिला पत्रकारों के साथ कथित दुर्व्यवहार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने आरोपों पर जवाब के लिए दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी की मौजूदगी मांगी थी। दोनों पक्षों के आरोपों की जांच जारी इस मामले में अब दोनों पक्षों की ओर से गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पत्रकारों ने पुलिस अधिकारी पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं, जबकि एसीपी विवेक भगत ने जातिसूचक टिप्पणियों, मानहानि और सरकारी काम में बाधा डालने की शिकायत की है। फिलहाल, किसी भी पक्ष के आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की स्थिति जांच के निष्कर्षों और न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर स्पष्ट होगी। Source – The Indian Express, The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल के त्रिशूर में डबल मर्डर से सनसनी, पत्नी और 4 साल के बेटे की हत्या का आरोप; आरोपी ने की आत्महत्या की कोशिश

त्रिशूर, 15 अक्टूबर 2026: केरल के त्रिशूर जिले में एक व्यक्ति पर अपनी 24 वर्षीय पत्नी विस्मया और चार साल के बेटे धक्षिन की हत्या करने का आरोप लगा है। घटना के बाद आरोपी ने कथित तौर पर आत्महत्या करने की कोशिश की, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। फिलहाल उसका इलाज जारी है और पुलिस मामले की जांच कर रही है। रात करीब 12:30 बजे हुई घटना पुलिस के मुताबिक, यह घटना रात करीब 12:30 बजे वलप्पाड बीच के पास विस्मया के घर में हुई। विस्मया और उसका बेटा धक्षिन नाट्टिका के रहने वाले थे। पत्नी और बेटे की हत्या का आरोप प्रारंभिक जांच में पुलिस इस मामले को दोहरी हत्या के रूप में देख रही है। आरोपी पर अपनी पत्नी और बेटे की हत्या करने का आरोप है। हालांकि, वारदात के पूरे घटनाक्रम और उससे जुड़े अन्य तथ्यों की जांच अभी जारी है। वारदात के बाद आत्महत्या की कोशिश पुलिस के अनुसार, घटना के बाद आरोपी ने कथित तौर पर अपनी जान लेने की कोशिश की। उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसकी स्वास्थ्य स्थिति और पूछताछ से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद जांच में आगे की प्रगति हो सकती है। हत्या की वजह अब तक स्पष्ट नहीं फिलहाल पुलिस हत्या के पीछे के कारणों का पता लगाने में जुटी है। जांचकर्ता परिवार से जुड़े हालात, घटना से पहले की परिस्थितियों और संबंधित लोगों के बयानों की पड़ताल कर रहे हैं। अभी तक हत्या के कथित मकसद की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। इलाके में फैली सनसनी एक ही परिवार के दो सदस्यों की मौत की खबर से स्थानीय इलाके में सनसनी फैल गई है। पुलिस घटनास्थल से मिले साक्ष्यों और संबंधित लोगों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना से जुड़ी पूरी जानकारी स्पष्ट हो सकेगी। Source – The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों से कथित अभद्रता का वीडियो वायरल, पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड; CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

भोपाल, 15 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। मामले में मिसरोद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद यह घटना 13 अक्टूबर को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर आदिवासी छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छात्र इकाई से जुड़े थे और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध जता रहे थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। ‘जय जोहार’ के नारों के बीच कथित अभद्र टिप्पणी रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरासत में लिए गए छात्र पुलिस वाहन में ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां करते दिखाई दे रहे हैं। आदिवासी संगठनों ने इन कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे समुदाय की गरिमा और पहचान का अपमान हुआ है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस इंस्पेक्टर निलंबित भोपाल पुलिस के डीसीपी जोन-2 ने 14 अक्टूबर को इंस्पेक्टर के निलंबन का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यवहार प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है और इससे विभाग की छवि प्रभावित हो सकती है। CM मोहन यादव ने दिए जांच के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि जांच के दौरान यदि अन्य पुलिसकर्मी भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। आदिवासी संगठनों ने FIR की मांग की कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने इंस्पेक्टर के निलंबन को पर्याप्त नहीं बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) से जुड़े नेताओं ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के तहत भी कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल, मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। Source – The Indian Express, Times of India, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP को लेकर कांग्रेस के रुख में बदलाव के संकेत? राहुल गांधी की हाई टी के लिए अभिजीत दिपके को मिला न्योता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: कांग्रेस नेता राहुल गांधी की ओर से आयोजित हाई टी बैठक के लिए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के नेता अभिजीत दिपके को आमंत्रित किए जाने से राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। इसे कांग्रेस और CJP के बीच संवाद बढ़ने के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, इस निमंत्रण से दोनों के बीच किसी औपचारिक राजनीतिक गठबंधन या रणनीतिक समझौते की पुष्टि नहीं होती। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह बैठक विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं के साथ-साथ नागरिक समाज और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। राहुल गांधी की हाई टी बैठक का क्या था उद्देश्य? यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इन मुद्दों पर अलग-अलग छात्र संगठनों, नागरिक समूहों और विपक्षी दलों ने अपनी आपत्तियां उठाई हैं। ऐसे में हाई टी बैठक को विभिन्न समूहों के बीच संवाद और संभावित समन्वय बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। कांग्रेस और CJP के बीच पहले क्यों थी दूरी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस के भीतर CJP को लेकर पहले कुछ आरक्षण थे। पार्टी के एक वर्ग में इस संगठन के आम आदमी पार्टी (AAP) से संभावित संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए थे। हालांकि, हाल के विरोध प्रदर्शनों और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक गतिविधियां तेज होने के बीच कांग्रेस की ओर से अभिजीत दिपके तक पहुंचने की खबर सामने आई है। यह घटनाक्रम दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना दिखाता है, लेकिन कांग्रेस की आधिकारिक नीति में व्यापक बदलाव हुआ है या नहीं, यह स्पष्ट होने के लिए पार्टी की ओर से औपचारिक बयान जरूरी होगा। CJP के प्रदर्शनों पर राहुल गांधी का रुख राहुल गांधी हाल के दिनों में विरोध प्रदर्शन कर रहे युवा नेताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठा चुके हैं। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार के आरोपों को भी उठाया है। विपक्षी दलों और विभिन्न नागरिक समूहों की ओर से चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण और विरोध प्रदर्शन के अधिकार जैसे मुद्दों पर आवाज उठाई जा रही है। इन घटनाक्रमों के बीच CJP के नेता को आमंत्रित किया जाना विपक्षी नेताओं और स्वतंत्र रूप से सक्रिय युवा समूहों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है। अभिजीत दिपके ने क्या संकेत दिया? रिपोर्टों के अनुसार, अभिजीत दिपके ने कांग्रेस की ओर से संपर्क किए जाने पर आभार जताया। साथ ही, CJP की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने पर भी जोर दिया। CJP खुद को किसी राजनीतिक दल के विस्तार के बजाय एक स्वतंत्र दबाव समूह के रूप में पेश करना चाहता है। ऐसे में कांग्रेस के साथ संवाद बढ़ने के बावजूद संगठन की स्वतंत्र राजनीतिक पहचान और भविष्य की रणनीति महत्वपूर्ण बनी रहेगी। विपक्षी एकजुटता के लिए क्यों अहम है यह घटनाक्रम? CJP ने हाल के मुख्य निर्वाचन आयुक्त और SIR विरोधी प्रदर्शनों के दौरान युवा कार्यकर्ताओं की भागीदारी के जरिए सार्वजनिक चर्चा में जगह बनाई है। कांग्रेस की ओर से दिपके को आमंत्रित किया जाना इस संभावना की ओर संकेत करता है कि विपक्षी दल पारंपरिक राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ छात्र समूहों और नागरिक समाज की आवाजों से भी संवाद बढ़ाना चाहते हैं। हालांकि, किसी बैठक का निमंत्रण अपने आप में साझा राजनीतिक कार्यक्रम, चुनावी गठबंधन या भविष्य के संयुक्त आंदोलन का प्रमाण नहीं है। इसके वास्तविक राजनीतिक महत्व का आकलन आगे होने वाली बातचीत और दोनों पक्षों के आधिकारिक रुख से किया जा सकेगा। आगे क्या होगा? फिलहाल, कांग्रेस और CJP के बीच संपर्क बढ़ने की खबर ने राजनीतिक बहस को नया विषय दिया है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या यह संवाद केवल एक बैठक तक सीमित रहता है या दोनों पक्ष चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों पर आगे भी साथ काम करते हैं। Source – The Indian Express, Jansatta और The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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Supreme Court में DMRC ने मांगी unconditional apology, कहा—10 October की Metro restrictions Delhi Police के निर्देश पर लगी थीं

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: Delhi Metro Rail Corporation (DMRC) ने Supreme Court को बताया कि 10 October को कुछ Metro stations पर entry-exit restrictions Delhi Police के directions पर लागू की गई थीं। यह मामला उन restrictions से जुड़ा है जो anti-CEC protests और Central Delhi में security arrangements के दौरान लगाई गई थीं। DMRC ने Court के contempt notice के जवाब में unconditional apology भी दी। DMRC ने Supreme Court में क्या कहा? DMRC ने अपने affidavit में कहा कि उसने Metro access पर restrictions independently नहीं लगाईं, बल्कि Delhi Police की advisory और security instructions के अनुसार action लिया। Corporation ने यह भी कहा कि उसका उद्देश्य law-and-order arrangements में cooperation करना था। Contempt notice क्यों जारी हुआ था? Supreme Court ने Metro stations पर access restrictions को लेकर नाराजगी जताते हुए सवाल किया था कि क्या public transport services को इस तरह restrict करना Court के पहले के directions के अनुरूप था। इसी मामले में DMRC से explanation मांगा गया और contempt notice जारी हुआ। DMRC ने मांगी unconditional apology DMRC ने Court के सामने कहा कि अगर उसके action से किसी judicial direction का उल्लंघन माना गया हो तो वह उसके लिए बिना शर्त माफी मांगता है। साथ ही उसने यह position ली कि restrictions operational decision के बजाय police instructions पर आधारित थीं। Delhi Police की भूमिका पर बढ़े सवाल DMRC के इस stand के बाद focus अब Delhi Police की उस decision-making पर भी आ गया है जिसके तहत Central Delhi में Metro entry-exit controls लगाए गए थे। Protest organisers और opposition groups पहले से ही restrictions को लेकर सवाल उठा रहे थे। 10 October को कई stations पर लगी थीं पाबंदियां Anti-CEC protest के चलते Central Delhi में heavy security deployment किया गया था। कुछ Metro stations पर gates बंद किए गए या entry-exit सीमित की गई, जिससे commuters को भी परेशानी हुई थी। इसी action को लेकर मामला Supreme Court तक पहुंचा। Court अब क्या देखेगा? Supreme Court आगे यह देख सकता है कि restrictions लगाने की legal responsibility किस authority की थी, क्या proper procedure follow हुआ और क्या public transport access को प्रभावित करने से पहले पर्याप्त safeguards मौजूद थे। source – The Indian Express, Supreme Court proceedings जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली पुलिस की हिरासत में NSUI महिला कार्यकर्ता से कथित मारपीट, राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंभीर आरोप

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: दिल्ली में NSUI कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और कथित कस्टोडियल हिंसा के गंभीर आरोप लगाए हैं। बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने घायल छात्र-कार्यकर्ताओं के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस मामले को उठाया। इस दौरान NSUI से जुड़ी छात्रा अथिरा (Athira) ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई में उसे चोटें आईं और उसकी एक कान की सुनने की क्षमता प्रभावित हुई है। राहुल गांधी ने मामले में जवाबदेही तय करने की मांग करते हुए प्रदर्शनकारियों से वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने की अपील की। हालांकि, घटना से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और जांच के अंतिम निष्कर्ष सामने आना बाकी है। महिला कार्यकर्ता अथिरा ने क्या आरोप लगाए? प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अथिरा ने दावा किया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई में उसके साथ मारपीट हुई और उसे गंभीर चोटें आईं। राहुल गांधी ने भी उसकी स्थिति का उल्लेख करते हुए कहा कि वह अब एक कान से ठीक से सुन नहीं पा रही है। यह मामला कथित हिरासत में हिंसा और प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। हालांकि, सुनने की क्षमता प्रभावित होने के दावे की चिकित्सकीय पुष्टि और घटना की परिस्थितियों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना जरूरी है। महिला प्रदर्शनकारी को बालों से खींचने का वीडियो हुआ था वायरल इस घटना से एक दिन पहले दिल्ली के राजीव चौक के पास मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान एक महिला NSUI कार्यकर्ता को कथित तौर पर बालों से खींचे जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। NSUI ने आरोप लगाया था कि हिरासत के दौरान महिला कार्यकर्ताओं के खिलाफ जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो पुलिस के सत्यापन के दायरे में था। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों की जांच से घटना की परिस्थितियों और पुलिस कार्रवाई के बारे में अधिक स्पष्टता सामने आ सकती है। राहुल गांधी ने वीडियो और सबूत सुरक्षित रखने की अपील की राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारी छात्रों से पुलिस कार्रवाई से संबंधित वीडियो, तस्वीरें और अन्य साक्ष्य सुरक्षित रखने तथा साझा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि कथित हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने और जवाबदेही तय करने के लिए सबूत महत्वपूर्ण होंगे। उन्होंने केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की आवाज दबाने का आरोप भी लगाया। ये आरोप कांग्रेस नेता और प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाए गए हैं; मामले में अंतिम जिम्मेदारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर ही तय की जा सकती है। घायल छात्रा को बताया ‘हमारी शेरनी’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने घायल महिला कार्यकर्ता के साहस की सराहना करते हुए उसे “हमारी शेरनी” कहा। उन्होंने शांतिपूर्ण विरोध जारी रखने और हिंसा के बजाय प्रेम तथा अहिंसक तरीकों से जवाब देने की बात कही। उनकी यह टिप्पणी छात्र प्रदर्शनकारियों के प्रति समर्थन जताने और कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को सार्वजनिक चर्चा में लाने के संदर्भ में आई। किस मुद्दे पर प्रदर्शन कर रहे थे NSUI कार्यकर्ता? NSUI समेत कई छात्र और विपक्षी समूह मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे तथा मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision—SIR) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। हाल के दिनों में दिल्ली में इन प्रदर्शनों को लेकर पुलिस प्रतिबंधों और हिरासत में लिए जाने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रदर्शनकारी चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों से जुड़े मुद्दों पर अपनी आपत्तियां उठा रहे हैं। पुलिस पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच अहम NSUI कार्यकर्ताओं के आरोपों ने हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार, महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा और जवाबदेही की आवश्यकता पर बहस को फिर तेज कर दिया है। हालांकि, आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति या संस्था की अंतिम जिम्मेदारी तय करना उचित नहीं होगा। घटना की निष्पक्ष जांच, संबंधित वीडियो और अन्य साक्ष्यों का सत्यापन, चिकित्सकीय दस्तावेजों की समीक्षा तथा संबंधित पक्षों का पक्ष सामने आना जरूरी है। मामले में जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि कथित घटनाक्रम में क्या हुआ और जिम्मेदारी किसकी बनती है। Source – The New Indian Express, The Indian Express, The Times of India और Reuters जय राष्ट्र न्यूज़

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यमुना नदी में फिर दिखी जहरीले झाग की मोटी परत, बढ़ते प्रदूषण ने बढ़ाई चिंता

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: दिल्ली में यमुना नदी की सतह पर एक बार फिर मोटी झाग की परत दिखाई देने से नदी के बढ़ते प्रदूषण को लेकर चिंता गहरा गई है। हालिया निगरानी रिपोर्टों में भी नदी के कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता खराब रहने के संकेत मिले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, बिना उपचार वाला सीवेज, औद्योगिक अपशिष्ट और ठोस कचरा यमुना के प्रदूषण के प्रमुख कारणों में शामिल हैं। नदी में बार-बार झाग दिखाई देना सीवेज प्रबंधन, अपशिष्ट निस्तारण और सफाई योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर सवाल खड़े करता है। सितंबर में भी कई हिस्सों में बढ़ा प्रदूषण दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर 2026 में यमुना के कई निगरानी बिंदुओं पर प्रदूषण का स्तर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक दर्ज किया गया। मानसून की बारिश के बावजूद नदी की जल गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार नहीं देखा गया। यह स्थिति संकेत देती है कि बारिश से पानी की मात्रा बढ़ने के बावजूद प्रदूषण के मूल कारणों पर प्रभावी नियंत्रण जरूरी है। बिना उपचार वाला सीवेज बना बड़ी समस्या केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) की निगरानी में यमुना में गिरने वाले कई नालों में बिना उपचार वाले सीवेज और ठोस कचरे की समस्या सामने आई है। सीवेज को नदी तक पहुंचने से पहले रोकने और उसका उपचार करने के लिए आवश्यक व्यवस्थाओं में कमियां होने पर प्रदूषक सीधे नदी में पहुंच सकते हैं। नालों में कचरा फेंकना और अपशिष्ट जल का उचित उपचार न होना यमुना की सफाई के प्रयासों के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। यमुना में जहरीला झाग क्यों बनता है? विशेषज्ञों के अनुसार, सीवेज और कुछ औद्योगिक अपशिष्टों में मौजूद डिटर्जेंट, फॉस्फेट और सर्फेक्टेंट जैसे पदार्थ पानी में झाग बनने की प्रक्रिया को बढ़ावा दे सकते हैं। जब ऐसा प्रदूषित पानी तेज बहाव या हलचल के संपर्क में आता है, तो उसकी सतह पर मोटी झागदार परत बन सकती है। इस तरह का झाग प्रदूषण की समस्या का दिखाई देने वाला संकेत हो सकता है। हालांकि, झाग की मौजूदगी मात्र से उसके सभी रासायनिक घटकों या विषाक्तता के स्तर का निर्धारण नहीं किया जा सकता। इसके लिए पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच आवश्यक है। कई हिस्सों में पानी की गुणवत्ता गंभीर चिंता का विषय 2026 की प्रदूषण संबंधी रिपोर्टों में दिल्ली के यमुना क्षेत्र के कुछ हिस्सों में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर बेहद कम, यहां तक कि शून्य तक दर्ज होने की बात सामने आई थी। इसके साथ ही फीकल प्रदूषण भी अधिक पाया गया। पानी में ऑक्सीजन की कमी जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती है। वहीं, सीवेज से होने वाला मलजनित प्रदूषण मानव स्वास्थ्य और नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी चिंता का विषय है। यमुना की सफाई योजनाओं पर फिर उठे सवाल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, नालों की सफाई और नदी पुनर्जीवन से जुड़ी विभिन्न योजनाओं के बावजूद झाग का बार-बार दिखाई देना उनके प्रभावी क्रियान्वयन की आवश्यकता को रेखांकित करता है। प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नालों में कचरा डालने पर रोक, सीवेज का समुचित उपचार, औद्योगिक अपशिष्ट की निगरानी और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई जरूरी है। साथ ही, नदी के विभिन्न हिस्सों में नियमित जल गुणवत्ता परीक्षण और निगरानी के निष्कर्षों को सार्वजनिक करना भी महत्वपूर्ण है। स्थायी समाधान के लिए जरूरी प्रभावी कार्रवाई यमुना में प्रदूषण की समस्या केवल नदी की सतह पर दिखाई देने वाले झाग तक सीमित नहीं है। इसके पीछे अपशिष्ट जल प्रबंधन, सीवेज उपचार और नियमों के पालन से जुड़ी व्यापक चुनौतियां हैं। जब तक प्रदूषित नालों के पानी का उचित उपचार सुनिश्चित नहीं किया जाता और ठोस कचरे को नदी में पहुंचने से नहीं रोका जाता, तब तक सफाई के प्रयासों के स्थायी परिणाम हासिल करना मुश्किल बना रहेगा। Source – केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC), The Times of India, The Indian Express और India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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भारत-कनाडा संबंधों में नई तेजी, मोदी और कार्नी के बीच व्यापार के साथ रक्षा व सुरक्षा सहयोग पर चर्चा

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: भारत और कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने के प्रयासों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, सुरक्षा और रक्षा सहयोग सहित कई अहम मुद्दों पर बातचीत की। दोनों नेताओं के बीच यह चर्चा ऐसे समय हुई है, जब पिछले कुछ वर्षों के राजनयिक तनाव के बाद दोनों देश अपने संबंधों को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। रक्षा और सुरक्षा सहयोग भी बातचीत के एजेंडे में द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों नेताओं ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग को भी द्विपक्षीय संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा माना। इससे पहले भारत और कनाडा रक्षा संवाद शुरू करने पर सहमत हुए थे। इसके तहत रक्षा उद्योगों, समुद्री क्षेत्र की निगरानी और सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषयों पर सहयोग बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है। दिसंबर में कनाडा जा सकते हैं प्रधानमंत्री मोदी कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा जाने की योजना है। दोनों नेताओं ने प्रस्तावित यात्रा से पहले संपर्क बनाए रखने और उच्चस्तरीय बातचीत को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। यह यात्रा दोनों देशों के बीच राजनीतिक संवाद और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों के लिहाज से महत्वपूर्ण हो सकती है। CEPA वार्ता जल्द पूरी करने पर जोर मोदी और कार्नी ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (Comprehensive Economic Partnership Agreement-CEPA) पर चल रही बातचीत को जल्द पूरा करने की प्रतिबद्धता दोहराई। इस समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को बढ़ावा देना है। समझौते पर प्रगति से कारोबार, निवेश और विभिन्न क्षेत्रों में आर्थिक साझेदारी के नए अवसर खुल सकते हैं। हालांकि, वार्ता पूरी होने और समझौते को अंतिम रूप दिए जाने की प्रक्रिया अभी महत्वपूर्ण बनी हुई है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और समुद्री सहयोग पर भी ध्यान भारत और कनाडा के बीच रक्षा साझेदारी में हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा, समुद्री सहयोग और पेशेवर सैन्य आदान-प्रदान जैसे विषय शामिल हैं। कनाडा ने अपने रक्षा क्षेत्र में साझेदारियों का विस्तार करने और भारत के साथ रक्षा उद्योग से जुड़े व्यावसायिक संबंध बढ़ाने में रुचि दिखाई है। दोनों देशों के बीच इन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ने से रणनीतिक संवाद को व्यापक बनाने का अवसर मिल सकता है। राजनयिक तनाव के बाद संबंध सुधारने की कोशिश भारत और कनाडा के संबंध वर्ष 2023 में गंभीर राजनयिक तनाव से गुजरे थे। इसके बाद वर्ष 2025 से दोनों देशों ने उच्चायुक्तों की वापसी और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच बातचीत के माध्यम से संबंध सुधारने की दिशा में कदम उठाए। मोदी और कार्नी के बीच मौजूदा बातचीत इसी प्रक्रिया का हिस्सा है। अब व्यापार समझौते, रक्षा सहयोग और प्रस्तावित उच्चस्तरीय यात्रा पर होने वाली प्रगति से यह तय होगा कि दोनों देश अपने संबंधों को किस तरह आगे बढ़ाते हैं। स्रोत: रॉयटर्स, द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन की आलोचना के बाद रणवीर शौरी को जान से मारने की धमकी, मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज

मुंबई, 14 अक्टूबर 2026: अभिनेता रणवीर शौरी ने दावा किया है कि दिल्ली में हुए कॉकroach जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की आलोचना करने के बाद उन्हें ईमेल के जरिए जान से मारने की धमकियां मिलीं। अभिनेता ने कथित धमकी भरे संदेशों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर साझा किए और बाद में मुंबई पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने की जानकारी दी। CJP प्रदर्शन पर रणवीर शौरी ने क्या कहा था? रणवीर शौरी ने 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए CJP प्रदर्शन की आलोचना करते हुए कहा था कि राजनीतिक असहमति को सड़कों पर टकराव में बदलने के बजाय संसद, चुनाव और अदालतों जैसे लोकतांत्रिक संस्थानों के माध्यम से उठाया जाना चाहिए। उनकी टिप्पणियों के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आईं। इसके बाद अभिनेता ने दावा किया कि उन्हें धमकी भरे ईमेल मिलने लगे। ईमेल में लोकेशन ट्रैक करने और हमले की धमकी का दावा अभिनेता द्वारा साझा किए गए स्क्रीनशॉट में कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने के साथ उनकी लोकेशन ट्रैक करने और उन पर हमला करने की धमकियां दिखाई गईं। शौरी ने सोशल मीडिया पर साइबर सुरक्षा से जुड़े आधिकारिक मंच साइबर दोस्त और महाराष्ट्र साइबर सेल को भी टैग करते हुए अधिकारियों से मदद मांगी। मुंबई पुलिस में दर्ज कराई औपचारिक शिकायत रणवीर शौरी ने बाद में बताया कि उन्होंने इस मामले में पुलिस में औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी है। इससे पहले मुंबई पुलिस ने उनके सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उनसे संपर्क संबंधी जानकारी सीधे संदेश के जरिए साझा करने को कहा था। फिलहाल, धमकी भरे ईमेल भेजने वाले व्यक्ति या समूह की पहचान की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है। CJP प्रदर्शन को लेकर पहले से जारी है विवाद CJP हाल के दिनों में चुनाव आयोग और मतदाता सूची में संशोधन की प्रक्रिया के खिलाफ प्रदर्शन कर रही है। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर भी राजनीतिक विवाद जारी है। रिपोर्टों के मुताबिक, CJP के दो नेताओं को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। इसी राजनीतिक घटनाक्रम के बीच रणवीर शौरी की टिप्पणियों और उन्हें कथित तौर पर मिली धमकियों का मामला सामने आया है। धमकी भरे ईमेल की जांच अहम मामले में अधिकारियों के सामने ईमेल भेजने वाले की पहचान, डिजिटल रिकॉर्ड और संदेशों की प्रामाणिकता की जांच अहम होगी। हालांकि, धमकियों के पीछे किसका हाथ है, इस बारे में अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, द टाइम्स ऑफ इंडिया, रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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