जय राष्ट्र न्यूज

मराठी भाषा नियम के विरोध में मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों की 3 दिन की हड़ताल, यात्रियों की बढ़ी परेशानी

मुंबई: महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा, टैक्सी और app-based cab drivers के लिए कामचलाऊ मराठी का ज्ञान अनिवार्य किए जाने के विरोध में मुंबई के कुछ हिस्सों में ऑटो-टैक्सी चालकों ने तीन दिन की हड़ताल शुरू कर दी है। हड़ताल 24 अगस्त 2026 से शुरू हुई और 25 अगस्त को भी इसका असर कई इलाकों में देखने को मिला। यात्रियों को ऑटो और टैक्सी मिलने में दिक्कत हुई और कई जगह 40 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ा। प्रदर्शनकारी चालकों का कहना है कि उन्हें मराठी सीखने से आपत्ति नहीं है, बल्कि उनकी नाराजगी language test के तरीके, कम समय और कथित रूप से training से बाहर पूछे जा रहे सवालों को लेकर है। दूसरी तरफ महाराष्ट्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि drivers को मराठी का expert नहीं बनना है, बल्कि काम के दौरान यात्रियों से बातचीत करने लायक basic Marathi आनी चाहिए। कांदिवली में सड़क पर उतरे चालक हड़ताल का सबसे ज्यादा असर मुंबई के Kandivali क्षेत्र में देखने को मिला। सोमवार सुबह Laljipada के पास Kandivali Link Road पर दर्जनों drivers ने रास्ता-रोको प्रदर्शन किया। कुछ समय के लिए traffic भी प्रभावित हुआ और मौके पर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। Kandivali के अलावा Malad West, Santacruz, Dahisar और Andheri समेत कुछ अन्य इलाकों में भी demonstrations की खबरें सामने आईं। कई चालकों ने काम बंद करके दूसरे drivers से भी protest में शामिल होने की अपील की। क्यों हो रहा है विरोध? महाराष्ट्र Transport Department ने passenger vehicles चलाने वाले drivers के लिए working knowledge of Marathi की शर्त को सख्ती से लागू करना शुरू किया है। RTO अधिकारी drivers से बातचीत कर यह जांच रहे हैं कि वे दैनिक कामकाज के लिए जरूरी मराठी समझ और बोल सकते हैं या नहीं। Assessment process को video-record भी किया जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह शर्त नई नहीं है। Transport Minister Pratap Sarnaik के मुताबिक practical Marathi knowledge से जुड़ी requirement महाराष्ट्र में 1989 से मौजूद है, लेकिन अब इसे ज्यादा सख्ती से लागू किया जा रहा है। Drivers बोले- Marathi सीखने से आपत्ति नहीं प्रदर्शनकारी drivers का कहना है कि उनका विरोध मराठी भाषा से नहीं है। उनका आरोप है कि RTO assessment में ऐसे सवाल पूछे जा रहे हैं जो उन्हें दी गई training का हिस्सा नहीं थे। कई drivers ने यह भी कहा कि वे मराठी समझते हैं और टूटी-फूटी भाषा में बातचीत कर सकते हैं, लेकिन fluency हासिल करने के लिए उन्हें ज्यादा समय चाहिए। कुछ drivers ने यह भी कहा कि वे रोज की कमाई पर निर्भर हैं और language classes के लिए काम छोड़ना उनके लिए आर्थिक नुकसान का कारण बनता है। पहले Notice, फिर हो सकती है कार्रवाई सरकार के नियम के मुताबिक किसी driver में पर्याप्त working knowledge नहीं मिलने पर तत्काल licence cancel नहीं किया जाएगा। पहले उसे एक महीने का notice दिया जाएगा ताकि वह मराठी सीख सके। अगर एक महीने के बाद भी वह requirement पूरी नहीं करता, तो उसका badge तीन महीने के लिए suspend किया जा सकता है। इसके बाद भी जानबूझकर भाषा नहीं सीखने की स्थिति में badge और permit cancellation जैसी कार्रवाई हो सकती है। यानी किसी driver के language test में कमजोर पाए जाने भर से तुरंत permanent licence cancellation का नियम नहीं है। ₹5,000 से ₹25,000 Fine की खबरों पर सरकार की सफाई प्रदर्शन के दौरान drivers में यह डर भी फैला कि मराठी नहीं आने पर ₹5,000 से ₹20,000 या उससे ज्यादा का fine लगाया जा रहा है। Borivali RTO के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक ऐसी भारी penalty को लेकर misinformation फैलने की बात सामने आई है। Transport Minister Pratap Sarnaik ने कहा कि एक महीने की notice period पूरी होने से पहले अगर कोई RTO अधिकारी गलत तरीके से fine लगाता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार का उद्देश्य drivers को परेशान करना नहीं है, बल्कि उन्हें practical Marathi सीखने का मौका देना है। Fadnavis बोले- Marathi Expert बनाना मकसद नहीं मामला बढ़ने के बाद Maharashtra Chief Minister Devendra Fadnavis ने भी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि सरकार किसी हिंदीभाषी या गैर-मराठी driver को Marathi language expert नहीं बनाना चाहती। उनके मुताबिक driver को केवल इतनी मराठी आनी चाहिए कि वह अपने काम से जुड़े सामान्य सवाल और यात्रियों से basic बातचीत कर सके। फडणवीस ने यह भी कहा कि drivers को भाषा सीखने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया है और अभी तक किसी licence को केवल इस आधार पर cancel नहीं किया गया है। पहले दिन 8,217 Drivers की हुई जांच Transport Department के आंकड़ों के मुताबिक शुरुआती verification drive में पूरे महाराष्ट्र में 8,217 auto-rickshaw और taxi drivers की जांच की गई। इनमें 1,268 drivers को notice जारी किया गया। Mumbai Metropolitan Region में 3,995 drivers की जांच की गई, जिनमें 604 drivers working Marathi requirement पूरी नहीं कर पाए। बाकी जिलों में 4,222 drivers की जांच हुई और 664 को notice मिला। महाराष्ट्र में कुल करीब 9.65 लाख auto-rickshaw और taxi permits/badges बताए गए हैं। 1.65 लाख से ज्यादा Drivers ने ली Marathi Training सरकार के मुताबिक करीब 1.65 लाख non-Marathi auto और taxi drivers अब तक Marathi language classes में शामिल हो चुके हैं और कई को certificates भी दिए गए हैं। सरकार का तर्क है कि training programme drivers को basic conversation सीखने के लिए पर्याप्त अवसर देता है। वहीं विरोध कर रहे चालकों का कहना है कि इतनी बड़ी workforce के लिए training और assessment process को ज्यादा practical और flexible बनाने की जरूरत है। Bombay High Court पहुंचा मामला इस विवाद में 25 अगस्त को एक नया कानूनी मोड़ भी सामने आया। चार app-based cab drivers की ओर से Bombay High Court में PIL दायर किए जाने की प्रक्रिया सामने आई है, जिसमें Maharashtra government के 12 August notification को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि Marathi language requirement Articles 14, 19 और 21 के तहत उनके fundamental rights को प्रभावित कर सकती है। उन्होंने यह भी तर्क दिया है कि Motor Vehicles Act, 1988 में driving licence रखने के लिए किसी खास भाषा की…

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नेताओं की भक्ति या राजनीति का नया रूप? भगवान के स्वरूप में नेताओं की तस्वीरों से फिर छिड़ी बहस

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में नेताओं की प्रशंसा नई बात नहीं है, लेकिन जब किसी राजनीतिक नेता को भगवान, अवतार या धार्मिक प्रतीक के रूप में प्रस्तुत किया जाने लगे तो सवाल सिर्फ समर्थकों की भावना तक सीमित नहीं रहता। यह राजनीतिक व्यक्तिपूजा, धर्म और चुनावी संदेश—तीनों के मेल पर बहस छेड़ देता है। हाल के महीनों में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं। वाराणसी में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में, हाथ में संविधान लिए दिखाया। वहीं दिल्ली के Press Club of India में एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की देवता-सदृश तस्वीर के सामने आरती और ‘मोदी चालीसा’ के वीडियो वायरल हुए। इससे पहले लखनऊ में एक पोस्टर में मोदी को श्रीकृष्ण और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में पेश किया गया था। इन घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा किया है—क्या यह सिर्फ समर्थकों की भक्ति है, या नेताओं की छवि को धार्मिक प्रतीकों के जरिए मजबूत करने की नई राजनीतिक रणनीति? अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण, हाथ में संविधान 1 जुलाई 2026 को अखिलेश यादव के जन्मदिन पर वाराणसी में समाजवादी युवजन सभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने हवन का आयोजन किया। इसी दौरान जारी किए गए पोस्टर में अखिलेश यादव को भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप में दिखाया गया और उनके हाथों में संविधान की प्रतियां दिखाई गईं। कार्यकर्ताओं ने इसे न्याय और संविधान की रक्षा का प्रतीक बताया। लेकिन BJP ने पोस्टर का विरोध करते हुए इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देखा और समाजवादी पार्टी कार्यकर्ताओं से माफी की मांग की। यहां दिलचस्प बात यह थी कि धार्मिक प्रतीक और राजनीतिक संदेश को एक ही तस्वीर में जोड़ा गया—श्रीकृष्ण का स्वरूप और संविधान। PM Modi की आरती और ‘Modi Chalisa’ अगस्त में दिल्ली से एक और विवाद सामने आया। Press Club of India में आयोजित एक कार्यक्रम के वायरल वीडियो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देवता-सदृश स्वरूप में दिखाने वाले cutout के सामने आरती की गई और ‘Modi Chalisa’ का पाठ किया गया। Press Club of India ने बाद में स्पष्ट किया कि उसने इस आयोजन को आयोजित नहीं किया था। उसके मुताबिक hall को press conference के लिए किराए पर लिया गया था और जब वहां अलग तरह की गतिविधि सामने आई तो कार्यक्रम को रोक दिया गया। इसी कार्यक्रम से जुड़े Rajan Singh ने बिहार में प्रधानमंत्री मोदी के नाम पर मंदिर बनाने की योजना की भी बात कही। उन्होंने लगभग ₹112 करोड़ की लागत और पांच एकड़ जमीन पर मंदिर का दावा किया, हालांकि सरकारी जमीन या funding के उनके दावे का स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया था। मोदी ‘कृष्ण’, योगी ‘अर्जुन’ मई 2026 में लखनऊ में लगे एक अन्य राजनीतिक पोस्टर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भगवान श्रीकृष्ण और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अर्जुन के रूप में दिखाया गया था। पोस्टर में राजनीति को महाभारत के ‘कुरुक्षेत्र’ के प्रतीक से जोड़कर पेश किया गया। इस तरह के पोस्टर बताते हैं कि धार्मिक कथाओं और पात्रों का इस्तेमाल अब केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित नहीं है; उन्हें राजनीतिक messaging में भी बार-बार इस्तेमाल किया जा रहा है। ऐसा सिर्फ एक Party में नहीं इन उदाहरणों की सबसे अहम बात यह है कि यह प्रवृत्ति किसी एक राजनीतिक दल तक सीमित नहीं है। अखिलेश यादव के समर्थक उन्हें श्रीकृष्ण के रूप में दिखाते हैं, वहीं दूसरी ओर नरेंद्र मोदी के समर्थक उन्हें राम या कृष्ण जैसे धार्मिक प्रतीकों से जोड़ते दिखाई देते हैं। इसलिए इसे केवल BJP, SP या किसी एक पार्टी की रणनीति कहना सही नहीं होगा। कई बार ऐसे पोस्टर और कार्यक्रम स्थानीय समर्थकों या कार्यकर्ताओं द्वारा आयोजित किए जाते हैं, और जरूरी नहीं कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व उन्हें आधिकारिक रूप से मंजूरी देता हो। यही अंतर समाचार रिपोर्टिंग में महत्वपूर्ण है। नेता से ‘प्रतीक’ बनने तक राजनीति में लोकप्रिय नेता अक्सर अपनी पार्टी से आगे बढ़कर एक प्रतीक बन जाते हैं। समर्थक उन्हें किसी खास विचार से जोड़ते हैं—जैसे विकास, सामाजिक न्याय, राष्ट्रवाद, संविधान, धर्म या किसी समुदाय के अधिकार। लेकिन जब यह प्रतीकात्मकता धार्मिक स्वरूप लेने लगती है तो नेता और देवता के बीच की सीमा धुंधली होने लगती है। राजनीतिक संचार के नजरिए से देखा जाए तो भगवान या धार्मिक पात्र से तुलना नेता को साधारण राजनीतिक व्यक्ति से ऊपर उठाकर नैतिक या भावनात्मक authority देने का प्रयास भी हो सकती है। सोशल Media ने बदल दिया Poster Politics का असर एक समय राजनीतिक पोस्टर किसी शहर या विधानसभा क्षेत्र तक सीमित रहते थे। अब एक छोटा पोस्टर भी कुछ घंटों में पूरे देश में वायरल हो सकता है। Instagram, X, Facebook और WhatsApp के कारण राजनीतिक कार्यकर्ता जानते हैं कि विवादित या असामान्य visual को सामान्य पोस्टर की तुलना में कहीं ज्यादा reach मिलेगी। यही कारण है कि नेता को देवता के रूप में दिखाने वाली तस्वीरें अक्सर तुरंत national debate बन जाती हैं। धार्मिक प्रतीकों वाली तस्वीरें लोगों की भावनाओं से जुड़ती हैं, इसलिए उनका engagement भी ज्यादा होता है। भक्ति और राजनीतिक Branding के बीच महीन अंतर किसी समर्थक के लिए अपने पसंदीदा नेता की पूजा करना व्यक्तिगत श्रद्धा हो सकती है। लेकिन जब उसी गतिविधि में party slogans, राजनीतिक संदेश, चुनावी narrative या organised publicity जुड़ जाती है, तो इसे केवल व्यक्तिगत आस्था कहना मुश्किल हो जाता है। उदाहरण के तौर पर अखिलेश यादव के पोस्टर में संविधान जोड़ना स्पष्ट राजनीतिक संदेश था। उसी तरह ‘Modi Chalisa’ आयोजन में प्रधानमंत्री की राजनीतिक उपलब्धियों को उनकी पूजा के औचित्य से जोड़ा गया। इसलिए कई मामलों में भक्ति और political branding एक-दूसरे में मिलती नजर आती हैं। क्या इससे धार्मिक भावनाएं आहत हो सकती हैं? विरोध करने वालों का तर्क है कि जीवित राजनीतिक नेताओं की तुलना भगवान से करना धार्मिक परंपराओं का राजनीतिक इस्तेमाल है। अखिलेश यादव को श्रीकृष्ण के रूप में दिखाए जाने पर BJP की प्रतिक्रिया इसी आधार पर थी। दूसरी ओर Modi Chalisa कार्यक्रम को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई लोगों ने धार्मिक प्रतीकों के राजनीतिक इस्तेमाल की आलोचना की। लेकिन समर्थक इसे अपनी आस्था और अभिव्यक्ति का अधिकार बताते हैं। यहीं से विवाद शुरू होता है—एक व्यक्ति के लिए सम्मान, दूसरे के लिए धार्मिक अतिशयोक्ति हो सकता…

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बाबा रामदेव बोले- ‘आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, ज्यादा बात नहीं करेंगे’; बयान चर्चा में

हरिद्वार: योग गुरु बाबा रामदेव एक बार फिर अपने बयान को लेकर चर्चा में हैं। हरिद्वार में मीडिया से बातचीत के दौरान रामदेव ने कहा, “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे।” उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर किया गया और इसे हाल के दिनों में उनके खिलाफ हुई बयानबाजी और विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है। रामदेव ने इसी बातचीत में देश में चल रहे आंदोलनों, सामाजिक सम्मान, आरक्षण, ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ और वंदे मातरम समेत कई मुद्दों पर अपनी राय रखी। किस मौके पर दिया बाबा रामदेव ने बयान? यह बयान 23 अगस्त 2026 को हरिद्वार में सामने आया था। यहां ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर आयोजित संत सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, बाबा रामदेव और कई प्रमुख संत शामिल हुए थे। कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत में रामदेव से अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक विवादों को लेकर सवाल किए गए। इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि आजकल लोग उन्हें काफी निशाने पर ले रहे हैं, इसलिए वह ज्यादा बात नहीं करेंगे। हाल में Kangana Ranaut से हुआ था विवाद रामदेव का यह बयान ऐसे समय आया जब BJP सांसद और अभिनेत्री कंगना रनौत के साथ उनकी जुबानी जंग चर्चा में रही। विवाद की शुरुआत कंगना रनौत द्वारा Gen-Z को लेकर की गई टिप्पणी से हुई थी। बाबा रामदेव ने कंगना के बयान की आलोचना करते हुए उनके qualification, अतीत और निजी जीवन से जुड़ी टिप्पणियां की थीं। इसके जवाब में कंगना ने भी रामदेव पर तीखा हमला किया और कहा कि उन्हें उनके निजी जीवन और चरित्र पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए। कंगना ने पतंजलि से जुड़े पुराने कानूनी विवादों का भी जिक्र किया। इसके बाद मामला लगातार सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना रहा। बाद में बोले- ‘ओछी सोच वालों पर कुछ नहीं कहना’ हरिद्वार में जब बाबा रामदेव से कंगना रनौत और अन्य आलोचनाओं को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने ज्यादा प्रतिक्रिया देने से बचने का रुख अपनाया। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रामदेव ने कहा कि वह ‘ओछी और घटिया सोच’ वाले लोगों पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते। इसके बाद उनका “लोगों ने हमें खूब पेल रखा है” वाला बयान सामने आया, जिसे सोशल मीडिया पर उनके पहले के आक्रामक बयानों की तुलना में बदले हुए अंदाज के रूप में देखा गया। हालांकि इसे किसी औपचारिक माफी या अपने पुराने बयानों से पीछे हटने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। आंदोलनों को लेकर भी दिया बड़ा बयान बाबा रामदेव ने देश में चल रहे अलग-अलग आंदोलनों को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में हर व्यक्ति को अन्याय के खिलाफ अपनी आवाज उठाने का अधिकार है, लेकिन सड़क और संसद में लगातार हंगामा कर लोकतांत्रिक व्यवस्था को बाधित नहीं किया जाना चाहिए। रामदेव ने कहा कि कुछ लोग आंदोलन और हंगामे के जरिए देश की सत्ता हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन लोकतांत्रिक व्यवस्था में ऐसा संभव नहीं है। बच्चों को आंदोलन में उतारने का किया विरोध रामदेव ने आंदोलनों में नाबालिग बच्चों की भागीदारी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि अगर किसी वयस्क को अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना है तो वह लोकतांत्रिक तरीके से खुद अपनी लड़ाई लड़े, लेकिन बच्चों को आंदोलनों में आगे नहीं करना चाहिए। उनका यह बयान हाल में दिल्ली में छात्र आंदोलनों और आरक्षण से जुड़े विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में सामने आया। SC-ST के साथ Brahmin सम्मान पर भी बोले बाबा रामदेव ने सामाजिक सम्मान और संविधान का जिक्र करते हुए कहा कि यदि SC-ST समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान संविधान के खिलाफ माना जाता है तो ब्राह्मण समुदाय के किसी व्यक्ति का अपमान भी उसी दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों को समान सम्मान और अधिकार देता है और किसी भी समुदाय के साथ भेदभाव नहीं होना चाहिए। रामदेव का यह बयान आरक्षण और जातिगत मुद्दों को लेकर चल रही बहस के बीच आया था। One Nation One Election का किया समर्थन हरिद्वार के कार्यक्रम में बाबा रामदेव ने केंद्र सरकार की ‘One Nation, One Election’ पहल का खुलकर समर्थन किया। उन्होंने कहा कि देश में सालभर किसी न किसी राज्य में चुनाव चलते रहते हैं, जिससे सरकारी मशीनरी और प्रशासन पर दबाव बढ़ता है। रामदेव ने तर्क दिया कि चुनावों में बड़ी संख्या में शिक्षकों की duty लगाई जाती है, जिससे पढ़ाई भी प्रभावित होती है। अगर देशभर में एक साथ चुनाव हों तो प्रशासनिक संसाधनों और समय का बेहतर इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने ‘One Nation, One Education’ की जरूरत पर भी जोर दिया और शिक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की वकालत की। Vande Mataram पर भी रखी अपनी बात बाबा रामदेव ने वंदे मातरम और भारत माता के मुद्दे पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भारत माता को आस्था, शक्ति, ज्ञान और कर्तव्य का प्रतीक बताते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति की मूल भावना को समझने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र और संस्कृति से जुड़े विषयों को राजनीतिक विवाद के बजाय व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण से देखा जाना चाहिए। क्यों वायरल हुआ ‘पेल रखा है’ वाला बयान? रामदेव अक्सर सार्वजनिक मंचों पर तीखे और बेबाक बयानों के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में उनका यह कहना कि “आजकल लोगों ने हमें खूब पेल रखा है, तो हम ज्यादा बात नहीं करेंगे” सोशल मीडिया यूजर्स का ध्यान खींच गया। हाल के दिनों में कंगना रनौत के साथ विवाद और दूसरे राजनीतिक मुद्दों पर आलोचना के कारण भी इस टिप्पणी को ज्यादा चर्चा मिली। हालांकि रामदेव ने यह नहीं कहा कि वह अपने किसी पुराने बयान को वापस ले रहे हैं। इसलिए इसे केवल उनकी बातचीत के दौरान की गई टिप्पणी के रूप में देखना अधिक उचित होगा। नोट: यह बयान 23 अगस्त 2026 का है। इसे 25 अगस्त की ताजा घटना के रूप में प्रकाशित न करें। स्रोत – इंडिया डेली, आजतक, नवभारत टाइम्स जय राष्ट्र न्यूज़

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6 सितंबर को दिल्ली में सजेगा Luxe Aura Couture Week 2026, Fashion Grace की Dipanwita Das Dutta संभालेंगी आयोजन की कमान

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली सितंबर में फैशन, ग्लैमर और उभरती प्रतिभाओं के एक बड़े आयोजन की गवाह बनने जा रही है। Luxe Aura Couture Week 2026 का आयोजन 6 सितंबर 2026 को पश्चिम विहार, नई दिल्ली में किया जाएगा। इस फैशन इवेंट को Fashion Grace द्वारा प्रस्तुत और आयोजित किया जा रहा है, जबकि आयोजन की मुख्य जिम्मेदारी Fashion Grace की Founder Dipanwita Das Dutta संभाल रही हैं। आयोजकों ने Luxe Aura Couture Week को दिल्ली के बड़े fashion runway events में से एक के रूप में प्रस्तुत किया है। कार्यक्रम की मूल भावना “Empowering Confidence, Celebrating Elegance, Creating Opportunities” रखी गई है, यानी फैशन और एलिगेंस के साथ-साथ नए टैलेंट के लिए अवसर तैयार करना भी आयोजन का अहम उद्देश्य है। Dipanwita Das Dutta के नेतृत्व में होगा Luxe Aura Couture Week Luxe Aura Couture Week 2026 के केंद्र में Dipanwita Das Dutta हैं, जिन्हें आधिकारिक event presentation में Founder of Fashion Grace और Founder & Organizer के तौर पर पेश किया गया है। उनकी संलग्न professional portfolio भी fashion और modelling space से उनके जुड़ाव की झलक देती है। Portfolio में contemporary western styling से लेकर traditional Indian attire और runway-oriented fashion looks तक कई अलग-अलग presentations दिखाई गई हैं। यही अनुभव Luxe Aura Couture Week के उस उद्देश्य से भी जुड़ता है, जिसके तहत established names के साथ emerging models और fashion talent को भी मंच देने की तैयारी की गई है। कार्यक्रम में Kirti Saxena को Co-Organizer के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा Maneesh Mall, Director of BigGMNM Event, और Saim Ali, Founder of Unscripted Models Agency, supporting partners के रूप में कार्यक्रम से जुड़े हैं। क्या है Fashion Grace? Fashion Grace खुद को fashion, beauty और lifestyle से जुड़ी ऐसी organisation के रूप में प्रस्तुत करता है, जिसका उद्देश्य aspiring models, influencers, entrepreneurs और beauty queens को पहचान दिलाना और उनके लिए नए अवसर तैयार करना है। Organisation की vision talent, confidence, leadership और personal excellence के लिए एक मजबूत मंच तैयार करना है। वहीं इसकी mission fashion, grooming, media exposure और national-level recognition के जरिए प्रतिभाओं को आगे बढ़ाना है। Fashion Grace से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए इसकी आधिकारिक वेबसाइट fashiongrace.in भी उपलब्ध है। Shahbaz Khan होंगे Celebrity Guest कार्यक्रम में मनोरंजन जगत की मौजूदगी भी खास रहने वाली है। अभिनेता Shahbaz Khan को Luxe Aura Couture Week 2026 का Celebrity Guest घोषित किया गया है। Shahbaz Khan भारतीय टेलीविजन और फिल्मों का जाना-पहचाना नाम हैं। Event presentation में उनके प्रमुख कामों में Chandrakanta और The Great Maratha जैसे television shows के साथ Ziddi, Arjun Pandit और Agent Vinod जैसी फिल्मों का उल्लेख किया गया है। 500+ मॉडल्स, 20+ डिजाइनर्स और 75+ मेकअप आर्टिस्ट Luxe Aura Couture Week 2026 को बड़े स्तर पर आयोजित करने की तैयारी है। Organisers द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, event ecosystem में 20 से ज्यादा designers, 75 से ज्यादा makeup artists और 500 से ज्यादा models की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा fashion-conscious consumers, influencers, content creators, business professionals, emerging talent, media networks और industry experts को भी इस platform से जोड़ने की योजना है। इतनी बड़ी संख्या में fashion और beauty professionals की मौजूदगी इसे केवल एक runway presentation नहीं, बल्कि networking, exposure और talent discovery platform के रूप में भी स्थापित करने की कोशिश को दर्शाती है। Talent और Gifting Partners भी जुड़े Luxe Aura Couture Week ने अलग-अलग क्षेत्रों के partners को भी अपने साथ जोड़ा है। Evoke Casting by Jack को event का Official Talent Partner बनाया गया है, जबकि Pinnacle Horizon को Official Gifting Partner के रूप में शामिल किया गया है। Event presentation में Fashion Grace के साथ अन्य partner organisations को भी कार्यक्रम के pillars के रूप में दिखाया गया है। सिर्फ रनवे नहीं, ब्रांड्स और नए टैलेंट के लिए भी प्लेटफॉर्म Luxe Aura Couture Week का दायरा केवल models और designers की runway presentation तक सीमित नहीं रखा गया है। Organisers इसे brands, creators और industry professionals के लिए भी networking और visibility platform के रूप में विकसित कर रहे हैं। Event में national exposure, social media reach, celebrity association, premium brand visibility, on-ground branding और content creation opportunities जैसे elements भी शामिल किए गए हैं। अलग-अलग sponsorship categories के तहत award category ownership, stage mentions, gifting opportunities, official partner designation और social media recognition जैसी branding possibilities भी उपलब्ध कराई गई हैं। 6 सितंबर को पश्चिम विहार में फैशन का बड़ा मंच Fashion Grace और मुख्य आयोजक Dipanwita Das Dutta के नेतृत्व में होने वाला Luxe Aura Couture Week 2026 fashion, beauty, entertainment और emerging talent को एक मंच पर लाने की तैयारी में है। 6 सितंबर 2026 को पश्चिम विहार, नई दिल्ली में होने वाला यह आयोजन designers और models के लिए runway opportunity देने के साथ makeup artists, creators, industry professionals और brands के बीच नए connections तैयार करने का भी प्रयास करेगा। Fashion Grace की आधिकारिक वेबसाइट: fashiongrace.in Sponsorship Enquiries: Dipanwita Das DuttaPhone: +91 89107 47245Email: fashiongrace111@gmail.comInstagram: @fashiongrace111

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IIT Bombay ने PhD पूरी करने के लिए तय की Maximum 8 साल की सीमा, नए Registrations पर सख्त होगा Rule

मुंबई: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान बॉम्बे यानी IIT Bombay ने PhD programmes को लंबे समय तक लंबित रहने से रोकने के लिए समय-सीमा को सख्ती से लागू करने का फैसला किया है। संस्थान के मौजूदा नियमों के मुताबिक सामान्य PhD registration की अवधि छह साल होती है, जिसे आवश्यक मंजूरी के बाद अधिकतम 8 साल तक बढ़ाया जा सकता है। इसके बाद सामान्य श्रेणी के शोधार्थी का registration स्वतः समाप्त हो सकता है। यह कदम उस internal review के बाद चर्चा में आया है जिसमें IIT Bombay ने पाया कि कुछ PhD scholars एक दशक से भी ज्यादा समय से अपना doctoral programme पूरा नहीं कर पाए थे। संस्थान का उद्देश्य research की quality से समझौता किए बिना अनावश्यक देरी को कम करना और students तथा supervisors दोनों के लिए स्पष्ट timeline तय करना है। IIT Bombay के Official Rules क्या कहते हैं? IIT Bombay के 2026-27 PhD Rules के मुताबिक सामान्य PhD programme की registration validity joining date से छह साल है। Masters + PhD programmes के लिए यह अवधि सामान्य तौर पर सात साल निर्धारित की गई है। अगर student इस निर्धारित अवधि में thesis submit नहीं कर पाता, तो उसे Annual Progress Seminar यानी APS के समय registration extension के लिए आवेदन करना होता है। Extension मिलने के बाद भी सामान्य PhD और Masters+PhD students का registration अधिकतम आठ साल तक ही जारी रह सकता है। आठ साल पूरे होने के बाद registration स्वतः cancel किए जाने का प्रावधान है। सभी PhD Students के लिए 8 साल की Limit नहीं इस नियम में एक महत्वपूर्ण exception भी है। External और College Teacher category में registered PhD students के लिए registration अधिकतम 10 साल तक extend किया जा सकता है। इसलिए “हर PhD student को आठ साल में programme पूरा करना होगा” कहना पूरी तरह सही नहीं होगा। Eight-year ceiling मुख्य रूप से regular और अधिकांश अन्य PhD categories पर लागू होती है। 12 से 16 साल से चल रही थीं कुछ PhDs IIT Bombay ने लंबे समय से pending PhD cases की समीक्षा भी की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक institute को ऐसे scholars मिले जो 12, 14 और यहां तक कि 16 वर्षों से doctoral programme में registered थे। एक institutional review में करीब 100 से 125 ऐसे cases सामने आए थे जिनकी PhD आठ साल से ज्यादा समय से लंबित थी। Institute ने इन students से delays की वजह पूछी और अलग-अलग मामलों को resolve करने की प्रक्रिया शुरू की। Guide की समस्या हुई तो Supervisor भी बदला समीक्षा के दौरान PhD पूरा होने में देरी के अलग-अलग कारण सामने आए। कुछ मामलों में research supervisor से जुड़ी समस्याएं थीं, जबकि कुछ scholars दूसरी नौकरी या professional commitments में चले गए थे। Covid-19 के दौरान laboratory access, field work और faculty interaction प्रभावित होने से भी research timelines पर असर पड़ा। जहां delay का कारण research guide से जुड़ा पाया गया, वहां institute ने कुछ मामलों में guide बदलने की सुविधा भी दी। Careers360 की रिपोर्ट के मुताबिक आठ साल से ज्यादा समय से pending 100-125 cases को review करने के बाद अब ऐसा कोई backlog नहीं बचा है। Registration Terminate करने की भी चेतावनी लंबे समय से PhD कर रहे scholars को institute ने साफ संदेश दिया कि programme को अनिश्चित समय तक जारी नहीं रखा जा सकता। रिपोर्ट के मुताबिक 12 साल से doctoral programme में मौजूद कुछ scholars को registration terminate किए जाने की चेतावनी दी गई थी। IIT Bombay का उद्देश्य छात्रों को programme से बाहर करना मात्र नहीं था, बल्कि delay के वास्तविक कारणों की पहचान कर PhD completion को तेज करना था। Record 620 PhD Degrees Award PhD backlog कम करने की इस exercise के बीच IIT Bombay ने एक नया record भी बनाया है। Academic year 2025-26 में IIT Bombay ने 620 PhD degrees award कीं, जो institute के इतिहास में सबसे अधिक हैं। IIT Bombay के मुताबिक किसी IIT द्वारा एक साल में 600 से ज्यादा PhD degrees दिए जाने का यह पहला मौका है। Institute की 64वीं Convocation और Departmental Degree Award Functions के दौरान पूरे academic year में कुल 3,763 degrees प्रदान की गईं। इनमें: शामिल थीं। Director Shireesh Kedare ने क्या कहा? IIT Bombay के Director Prof. Shireesh Kedare ने कहा कि institute PhD completion time कम करने पर काम कर रहा है। उनके मुताबिक pending PhDs की समीक्षा इसलिए की गई ताकि यह पता लगाया जा सके कि students किन वजहों से programme पूरा नहीं कर पा रहे हैं और उन bottlenecks को कैसे हटाया जा सकता है। Institute research output बढ़ाने के साथ faculty-student interaction बेहतर करने पर भी ध्यान दे रहा है। PhD की सामान्य Funding कितने समय मिलती है? IIT Bombay के official admission information के मुताबिक Teaching Assistantship और Research Assistantship जैसी कई categories में institute-supported financial assistance सामान्य तौर पर अधिकतम पांच साल या thesis submission तक, जो भी पहले हो, उपलब्ध होती है। Teaching Assistantship category में पहले दो वर्षों के लिए ₹37,000 प्रति माह और उसके बाद निर्धारित अवधि के लिए ₹42,000 प्रति माह assistantship दी जाती है। Research Assistantship category में शुरुआती दो वर्षों के लिए ₹42,000 और बाद के वर्षों में ₹47,000 प्रति माह का प्रावधान है। इस तरह funding period और maximum registration period अलग-अलग हैं। आठ साल तक registration संभव होने का मतलब यह नहीं है कि institute assistantship भी पूरे आठ साल तक देगा। Annual Progress Seminar से होगी Research की निगरानी IIT Bombay में PhD scholars के लिए Annual Progress Seminar यानी APS research monitoring का महत्वपूर्ण हिस्सा है। Research Progress Committee student के काम की नियमित समीक्षा करती है। Poor performance की स्थिति में repeat APS कराया जा सकता है। Official rules के मुताबिक लगातार दो खराब performance reports या बिना अनुमति APS प्रस्तुत न करने जैसी स्थितियों में PhD registration cancel भी किया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल अंतिम deadline लागू करना नहीं, बल्कि programme के दौरान ही research progress पर लगातार नजर रखना है। PhD में ज्यादा समय क्यों बनता है समस्या? Doctoral research की अवधि subject और research problem के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।…

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KVS-NVS Tier-II Result 2026 जारी, PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II का Result घोषित

नई दिल्ली: Kendriya Vidyalaya Sangathan (KVS) और Navodaya Vidyalaya Samiti (NVS) भर्ती 2025 में शामिल उम्मीदवारों के लिए बड़ी अपडेट सामने आई है। Central Board of Secondary Education (CBSE) ने Tier-II Recruitment Examination 2026 के एक और चरण के नतीजे जारी कर दिए हैं। 23 अगस्त 2026 को जारी नवीनतम phase में PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II पदों का Tier-II result/shortlisting status घोषित किया गया है। उम्मीदवार recruitment application portal पर login कर अपना result देख सकते हैं। किन Posts का Result हुआ जारी? CBSE की latest result declaration में तीन प्रमुख categories शामिल हैं: इनमें PGT Physics teaching category में आता है, जबकि Vice Principal और Stenographer Grade-II अन्य recruitment categories में शामिल हैं। यह भर्ती Advertisement No. RECTT. NOTIFICATION/01/2025 के तहत KVS और NVS में teaching और non-teaching posts के लिए आयोजित की जा रही है। Candidate Login से देख सकेंगे Result उम्मीदवारों को अपना result या shortlisting status देखने के लिए KVS-NVS recruitment candidate portal पर login करना होगा। इसके लिए उम्मीदवारों को सामान्य तौर पर: Result उपलब्ध होने पर उसकी copy download करके सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है। PGT Physics Candidates के लिए आगे क्या? PGT Physics के लिए Tier-II result जारी होने का मतलब recruitment process पूरी होना नहीं है। PGT जैसे पदों में Interview भी selection process का हिस्सा है। Tier-II में निर्धारित criteria पूरा करने वाले candidates को अगले चरण यानी interview के लिए shortlist किया जाएगा। Interview का schedule और call letter बाद में candidates के respective application login के जरिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए shortlisted candidates को अपना portal नियमित रूप से check करते रहना चाहिए। Vice Principal के लिए भी होगा Interview Vice Principal post की selection process में भी interview शामिल है। Recruitment scheme के अनुसार KVS Vice Principal के लिए Tier-I और Tier-II examination के बाद shortlisted candidates को interview stage से गुजरना होगा। इस वजह से अभी जारी Tier-II result को final selection list नहीं समझना चाहिए। Interview और अन्य आवश्यक formalities पूरी होने के बाद ही final merit/selection की स्थिति स्पष्ट होगी। Stenographer Grade-II Candidates को देना होगा Skill Test Stenographer Grade-II candidates के लिए आगे की प्रक्रिया अलग है। Official recruitment scheme के मुताबिक Stenographer Grade-I और Grade-II के लिए Tier-II के बाद Skill Test आयोजित किया जाता है। Skill Test qualifying nature का होगा और final merit Tier-II में प्राप्त marks के आधार पर तैयार की जाएगी, बशर्ते candidate skill test qualify करे। इसलिए Stenographer Grade-II में shortlisted candidates को अब skill test schedule का इंतजार करना होगा। क्या सभी Candidates के Marks जारी हो गए? यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। जिन posts में Interview selection process का हिस्सा है, वहां अभी मुख्य रूप से shortlisting status जारी किया जा रहा है। ऐसे candidates की marksheet final recruitment process के बाद उपलब्ध कराई जा सकती है। Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक interview वाले posts के marks final result प्रकाशित होने के बाद निर्धारित समय में उपलब्ध कराए जाएंगे। वहीं जिन posts में interview नहीं है, उनके Tier-II marks result declaration के साथ candidate login में उपलब्ध कराए जा सकते हैं। 27 से 31 March को हुई थी Tier-II परीक्षा KVS-NVS Recruitment 2025 की Tier-II written examinations 27 March से 31 March 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। इसके बाद CBSE ने answer keys और results को phase-wise जारी करना शुरू किया। इस पूरी recruitment exercise में 15,000 से ज्यादा teaching और non-teaching vacancies शामिल हैं। 17 August से शुरू हुआ Result का Phase-wise Release CBSE ने Tier-II results को एक साथ जारी करने के बजाय अलग-अलग phases में घोषित किया है। पहला result phase 17 अगस्त 2026 को जारी किया गया था। इसमें PGT Computer Science, TGT Computer Science, Finance Officer और Stenographer Grade-I जैसे posts शामिल थे। इसके बाद अलग-अलग दिनों में अन्य teaching और non-teaching posts के results जारी किए गए। अब तक किन Subjects के Results आ चुके हैं? 17 से 23 अगस्त के बीच कई PGT और TGT subjects के results जारी किए जा चुके हैं। इनमें PGT के तहत Assamese, Urdu, Bangla, Garo, Biotechnology, Manipuri, Tamil और Telugu जैसे subjects शामिल रहे। TGT category में Marathi, Telugu, Assamese, Manipuri, Urdu, Bangla, Nepali, Gujarati, Odia, Kannada, Punjabi, Malayalam और Tamil जैसे subjects के results भी जारी किए गए हैं। 20 August को इन Posts का Result आया 20 अगस्त 2026 को CBSE ने: के Tier-II results जारी किए। 21 August को भी जारी हुए Results इसके बाद 21 अगस्त को: से जुड़े results जारी किए गए। और अब 23 अगस्त की latest phase में PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II शामिल किए गए हैं। बाकी Posts के Results कब आएंगे? CBSE अभी results को phase-wise जारी कर रहा है। जिन posts के Tier-II results अभी घोषित नहीं हुए हैं, उनके नतीजे आने वाले phases में जारी किए जाने की उम्मीद है। Candidates को किसी unofficial WhatsApp message या social media post पर निर्भर रहने के बजाय CBSE, KVS और NVS की official websites तथा अपने application login को check करते रहना चाहिए। Result के बाद कौन-कौन से चरण हो सकते हैं? Post के अनुसार selection process अलग-अलग हो सकती है। अगले चरण में इनमें से एक या अधिक process हो सकती हैं: Candidates को केवल अपने respective post के लिए जारी official instructions follow करनी चाहिए। Candidates के लिए जरूरी सलाह Result देखने के बाद candidates को अपना application number, result copy और recruitment documents सुरक्षित रखने चाहिए। अगर candidate interview या skill test के लिए shortlisted है तो application portal और registered email/mobile पर आने वाले updates को ध्यान से check करना जरूरी होगा। विशेष रूप से PGT Physics और Vice Principal candidates के लिए interview schedule तथा Stenographer Grade-II candidates के लिए skill test schedule अगली महत्वपूर्ण updates होंगी। फिलहाल 23 अगस्त 2026 को PGT Physics, Vice Principal और Stenographer Grade-II के Tier-II results जारी होने के साथ KVS-NVS Recruitment 2025 की selection process एक और महत्वपूर्ण चरण आगे बढ़ गई है। स्रोत – केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE), केंद्रीय विद्यालय संगठन (KVS), एनडीटीवी एजुकेशन, टाइम्स ऑफ…

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North Korea रूस में और सैनिक भेजने की तैयारी कर रहा? South Korea Defence Ministry का बड़ा दावा

सियोल: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच उत्तर कोरिया और रूस की बढ़ती सैन्य साझेदारी को लेकर एक नया दावा सामने आया है। South Korea Defence Ministry ने कहा है कि North Korea रूस में अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी जारी रखे हुए है। हालांकि दक्षिण कोरियाई अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल ऐसे कोई संकेत नहीं मिले हैं कि नई troop deployment तुरंत होने वाली है। यह आकलन ऐसे समय सामने आया है जब उत्तर कोरिया के नेता Kim Jong Un की बहन Kim Yo Jong ने कुछ दिन पहले यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy के उस दावे को खारिज किया था जिसमें कहा गया था कि Pyongyang रूस की मदद के लिए हजारों अतिरिक्त सैनिक भेज सकता है। South Korea Defence Ministry ने क्या कहा? Reuters की 24 अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक South Korea Defence Ministry ने सांसद Yu Yong-weon के कार्यालय को बताया कि North Korea रूस में और सैनिक भेजने की तैयारियां कर रहा है। हालांकि Defence Ministry ने यह भी साफ किया कि अभी तक ऐसी कोई movement या operational indication नहीं मिली है जिससे यह कहा जा सके कि नई deployment बहुत जल्द होने वाली है। यानी फिलहाल मामला तैयारी और संभावित deployment का है, किसी confirmed troop movement का नहीं। Zelenskiy ने किया था 50,000 सैनिकों का दावा इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि में यूक्रेनी राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskiy का हालिया दावा भी है। Zelenskiy ने कहा था कि North Korea रूस के समर्थन में 50,000 तक अतिरिक्त सैनिक भेजने की तैयारी कर सकता है। इस दावे को Pyongyang ने सिरे से खारिज कर दिया। Kim Yo Jong ने इसे “बेबुनियाद” बताते हुए कहा कि यूक्रेन इस तरह के आरोपों के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है। इसलिए फिलहाल Seoul और Pyongyang के दावे एक-दूसरे से पूरी तरह अलग हैं। North Korea पहले भी भेज चुका है सैनिक South Korean, Ukrainian और Western assessments के मुताबिक North Korea पहले भी रूस में सैनिक भेज चुका है। Reuters के अनुसार Pyongyang ने 2024 से रूस में troops deploy करना शुरू किया था, जबकि artillery ammunition और missiles की supply 2023 से जारी बताई जाती है। North Korean सैनिकों की मौजूदगी खास तौर पर Russia के Kursk क्षेत्र से जुड़ी लड़ाइयों के संदर्भ में सामने आई थी। उत्तर कोरिया और रूस ने पहले हथियारों के transfers के आरोपों से इनकार किया था, लेकिन दोनों देशों की defence partnership पिछले दो वर्षों में काफी मजबूत हुई है। 15 Million से ज्यादा Artillery Rounds देने का दावा South Korea Defence Ministry ने सिर्फ troop deployment ही नहीं, बल्कि weapons supply को लेकर भी बड़ा दावा किया है। मंत्रालय के आकलन के मुताबिक North Korea रूस को 15 million से ज्यादा artillery ammunition rounds उपलब्ध करा चुका है। यह अनुमान 152-mm shells के equivalent में लगाया गया है। इसके अलावा Pyongyang की ओर से रूस को short-range ballistic missiles और अन्य military systems देने के भी आरोप लगाए गए हैं। अगर ये आंकड़े सही हैं तो North Korea रूस के लिए artillery ammunition के महत्वपूर्ण suppliers में शामिल हो चुका है। Ukraine War से North Korean Missiles बेहतर हुए? South Korea की Defense Intelligence Agency ने एक और महत्वपूर्ण assessment दिया है। उसके अनुसार Ukraine युद्ध में इस्तेमाल किए गए North Korean missiles ने battlefield data के जरिए अपनी accuracy में सुधार हासिल किया हो सकता है। Seoul का मानना है कि इसमें Russian technical advice और components support की भूमिका भी हो सकती है। अगर ऐसा है तो रूस और उत्तर कोरिया का सहयोग केवल ammunition supply तक सीमित नहीं रह जाता, बल्कि Pyongyang को वास्तविक युद्ध परिस्थितियों से weapons-development data भी मिल सकता है। South Korea के लिए क्यों है चिंता? North Korea की military technology में सुधार सीधे South Korea की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। Seoul के मुताबिक North Korea के कुछ ballistic missiles और multiple rocket launcher systems का development अब completion के करीब पहुंच रहा है। इन systems को Korean Peninsula पर संभावित conflict में इस्तेमाल किए जाने के लिए तैयार माना जा रहा है। इसका मतलब है कि Ukraine war में मिली operational learning भविष्य में Korean Peninsula की military balance को भी प्रभावित कर सकती है। Guam तक पहुंचने वाली Hwasong-12 Missile पर भी Update South Korean Defence Ministry ने North Korea की Hwasong-12 intermediate-range ballistic missile को लेकर भी नया assessment दिया है। मंत्रालय के मुताबिक Hwasong-12 को operational deployment के लिए तैयार किया जा रहा है। यह missile अमेरिकी territory Guam तक पहुंचने की क्षमता रखती है। Guam Pacific region में अमेरिका का एक महत्वपूर्ण military hub है और वहां US Air Force तथा Navy की strategic presence मौजूद है। इस वजह से Hwasong-12 की operational readiness केवल South Korea या Japan ही नहीं, बल्कि United States के लिए भी महत्वपूर्ण security concern है। US Mainland तक पहुंचने की क्षमता, लेकिन एक बड़ी कमी South Korea का assessment है कि North Korea की intercontinental ballistic missiles यानी ICBMs के पास इतनी flight capability है कि वे अमेरिकी mainland तक पहुंच सकती हैं। हालांकि Seoul का कहना है कि warhead re-entry technology समेत कुछ महत्वपूर्ण technical capabilities अभी independently verify नहीं की गई हैं। North Korea ने अधिकतर ICBM tests lofted trajectory पर किए हैं, जिसमें missile को बहुत ऊंचाई तक ले जाकर अपेक्षाकृत कम horizontal distance पर गिराया जाता है। इसलिए full-range operational capability को लेकर अभी भी uncertainty बनी हुई है। Russia-North Korea Partnership लगातार मजबूत Russia और North Korea के संबंध Ukraine war के बाद तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देशों ने strategic partnership बढ़ाई है और Moscow तथा Pyongyang के बीच defence, weapons और military cooperation को लेकर लगातार नई रिपोर्टें सामने आ रही हैं। 18 अगस्त को Russian Foreign Minister Sergei Lavrov ने भी Russia-North Korea relations की तारीफ करते हुए दोनों देशों की partnership को नए global order से जोड़ा था। Western और South Korean officials को चिंता है कि रूस को ammunition और manpower देने के बदले Moscow North Korea को missile, satellite या अन्य military technology में सहायता दे सकता है। क्या North Korea तुरंत सैनिक भेजने वाला…

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Devdutt Padikkal ने Colombo Test में जड़ा लगातार दूसरा Test Century, Sri Lanka के खिलाफ India मजबूत स्थिति में

कोलंबो: भारतीय बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल ने श्रीलंका के खिलाफ अपनी शानदार फॉर्म जारी रखते हुए Colombo Test में लगातार दूसरी सेंचुरी जड़ दी। बाएं हाथ के बल्लेबाज ने दूसरे टेस्ट की पहली पारी में 117 रन बनाए और उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने पहले दिन का खेल समाप्त होने तक 5 विकेट पर 300 रन बना लिए। इससे पहले गॉल में खेले गए पहले टेस्ट में भी पडिक्कल ने शानदार 167 रन बनाए थे। यानी श्रीलंका दौरे की लगातार दूसरी टेस्ट पारी में उन्होंने शतक जड़कर भारतीय टीम के नंबर-3 स्थान के लिए अपनी दावेदारी और मजबूत कर दी है। 193 गेंदों में बनाए 117 रन Sinhalese Sports Club में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट में पडिक्कल ने धैर्य और आक्रामकता का शानदार मिश्रण दिखाया। उन्होंने 193 गेंदों में 117 रन की पारी खेली। उनकी पारी में 12 चौके शामिल रहे। मुश्किल परिस्थितियों में उन्होंने एक छोर संभाले रखा और श्रीलंकाई गेंदबाजों को लगातार दबाव में रखा। कोलंबो की pitch गॉल के मुकाबले तेज गेंदबाजों को ज्यादा मदद दे रही थी। गेंद में bounce और movement भी देखने को मिला, लेकिन पडिक्कल ने परिस्थितियों के मुताबिक अपनी बल्लेबाजी में बदलाव किया। शुरुआत में मिले दो जीवनदान हालांकि पडिक्कल की पारी की शुरुआत बेहद दिलचस्प रही। श्रीलंका ने उन्हें शुरुआत में ही दो बार आउट करने का मौका गंवा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक पडिक्कल को 0 और 1 रन के स्कोर पर जीवनदान मिले। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और श्रीलंकाई टीम को इन गलतियों की बड़ी कीमत चुकानी पड़ी। शुरुआती मुश्किल दौर पार करने के बाद पडिक्कल ने अपने shots पर बेहतर नियंत्रण दिखाया और धीरे-धीरे बड़ी पारी की नींव रखी। Galle के बाद Colombo में भी शतक यह इस सीरीज में पडिक्कल का लगातार दूसरा शतक है। गॉल में खेले गए पहले टेस्ट की पहली पारी में उन्होंने 167 रन बनाए थे। उस मैच में उनकी पारी भारत की जीत में बेहद महत्वपूर्ण रही और उन्हें Player of the Match भी चुना गया था। भारत ने पहला टेस्ट 165 रन से जीता था। अब Colombo में 117 रन बनाकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि गॉल की पारी केवल एक शानदार प्रदर्शन नहीं थी बल्कि वह लगातार बड़ी पारियां खेलने की फॉर्म में हैं। Sri Lanka में एक Series में दो शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीयों में शामिल लगातार दो शतक लगाते ही पडिक्कल ने एक खास उपलब्धि भी हासिल की। वह श्रीलंका की धरती पर एक ही टेस्ट सीरीज में दो शतक लगाने वाले चुनिंदा भारतीय बल्लेबाजों में शामिल हो गए हैं। इस सूची में पहले सचिन तेंदुलकर, वीरेंद्र सहवाग और शिखर धवन जैसे बड़े भारतीय बल्लेबाजों के नाम शामिल रहे हैं। पडिक्कल के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि इस सीरीज से पहले भारतीय टेस्ट टीम में उनकी जगह स्थायी नहीं मानी जा रही थी। India ने पहले दिन बनाए 300/5 पडिक्कल की सेंचुरी के दम पर भारत ने दूसरे और अंतिम टेस्ट के पहले दिन स्टंप्स तक 300 रन पर 5 विकेट बनाए। पडिक्कल के आउट होने के बावजूद टीम ने दिन का खेल मजबूत स्थिति में समाप्त किया। दूसरे दिन भारत की कोशिश पहली पारी के स्कोर को 400 रन या उससे आगे ले जाने की होगी। पहला टेस्ट जीत चुकी भारतीय टीम सीरीज में आगे है और Colombo Test में मजबूत पहली पारी बनाकर श्रीलंका पर दबाव बढ़ाने की कोशिश कर रही है। Rishabh Pant की चोट ने बढ़ाई चिंता पहले दिन भारतीय टीम के लिए एक चिंता की खबर भी सामने आई। विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को Lahiru Kumara की गेंद बाएं हाथ/कलाई के आसपास लगी, जिसके बाद उन्हें मैदान से retired hurt होना पड़ा। हालांकि भारतीय batting coach Sitanshu Kotak ने बाद में संकेत दिया कि चोट ज्यादा गंभीर नहीं लग रही है। Pant की availability को लेकर team management उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Number 3 की जगह के लिए मजबूत दावेदारी पडिक्कल की लगातार दो बड़ी पारियों ने भारतीय टेस्ट टीम के नंबर-3 batting position को लेकर चर्चा तेज कर दी है। पूर्व भारतीय ऑलराउंडर इरफान पठान ने भी पडिक्कल की बल्लेबाजी की तारीफ करते हुए उन्हें भारत के लिए नंबर-3 पर एक मजबूत विकल्प बताया है। पडिक्कल को इस दौरे पर चोटिल Sai Sudharsan की जगह मौका मिला था, लेकिन उन्होंने अपने प्रदर्शन से selection competition को दिलचस्प बना दिया है। इस Series में Padikkal का जबरदस्त प्रदर्शन पडिक्कल ने पहले टेस्ट में 167 और 44 रन बनाए थे। दूसरे टेस्ट की पहली पारी में अब उनके नाम 117 रन जुड़ गए हैं। यानी श्रीलंका दौरे पर वह लगातार भारत के सबसे प्रभावशाली बल्लेबाजों में शामिल रहे हैं। खास बात यह है कि पडिक्कल ने spin-friendly Galle और comparatively lively Colombo pitch—दो अलग तरह की परिस्थितियों में शतक लगाए हैं। India की नजर Series जीत पर भारत पहला टेस्ट जीतकर सीरीज में बढ़त बनाए हुए है। अब Colombo Test में मजबूत शुरुआत के बाद टीम के पास सीरीज जीतने का अच्छा मौका है। देवदत्त पडिक्कल की लगातार दूसरी सेंचुरी ने भारत को पहले दिन मजबूत स्थिति में पहुंचाया है। अब दूसरे दिन भारतीय बल्लेबाज पहली पारी का बड़ा स्कोर बनाने की कोशिश करेंगे, जिसके बाद गेंदबाजों पर श्रीलंका को दबाव में लाने की जिम्मेदारी होगी। फिलहाल इस Sri Lanka tour की सबसे बड़ी batting stories में से एक Devdutt Padikkal का लगातार दो टेस्ट शतक लगाना बन चुका है। स्रोत – रॉयटर्स, पीटीआई, टाइम्स ऑफ इंडिया, एनडीटीवी स्पोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित सरकारी घरों की मरम्मत पर 2025-26 में ₹92 करोड़ खर्च: RTI में खुलासा

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली के लुटियंस जोन में केंद्रीय मंत्रियों को आवंटित सरकारी बंगलों की मरम्मत, renovation और furnishing पर होने वाला खर्च रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। RTI के जरिए सामने आई जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में इन आधिकारिक आवासों पर ₹92.35 करोड़ खर्च किए गए। यह 2014-15 में दर्ज ₹27.47 करोड़ के मुकाबले तीन गुना से भी अधिक है। यह जानकारी समाचार एजेंसी PTI द्वारा दायर Right to Information यानी RTI आवेदन के जवाब से सामने आई है। इन सरकारी आवासों की देखरेख और मरम्मत का काम Central Public Works Department (CPWD) करता है। 12 साल में ₹547 करोड़ से ज्यादा खर्च RTI के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2014-15 से 2025-26 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों की मरम्मत, renovation और maintenance पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए। इस अवधि में 2025-26 का ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सबसे ज्यादा बताया गया है। आंकड़े बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में इन सरकारी बंगलों के maintenance पर होने वाला सालाना खर्च काफी तेजी से बढ़ा है। 2014-15 में खर्च था ₹27.47 करोड़ RTI में उपलब्ध year-wise data के मुताबिक 2014-15 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर ₹27.47 करोड़ खर्च हुए थे। इसके बाद खर्च इस प्रकार रहा: इस तरह पिछले वित्त वर्ष में खर्च 2014-15 के मुकाबले तीन गुना से ज्यादा हो गया। क्यों बढ़ रहा सरकारी बंगलों की मरम्मत का खर्च? अधिकारियों ने इस बढ़ते खर्च के पीछे कई कारण बताए हैं। लुटियंस दिल्ली के कई बंगले करीब 80 से 100 साल पुराने हैं। इनमें समय के साथ seepage, termites, पुरानी electrical wiring, plumbing और structural wear-and-tear जैसी समस्याएं सामने आती रहती हैं। एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से कुछ बंगलों की स्थिति ऐसी भी रही है कि उन्हें बड़े स्तर पर upgrade करने की जरूरत पड़ी। इसके अलावा construction materials और labour की बढ़ती कीमत यानी inflation को भी खर्च बढ़ने की एक वजह बताया गया है। Fans, LED Lights और Plumbing पर भी होता है खर्च एक केंद्रीय मंत्री के staff member ने PTI को बताया कि सरकारी आवासों में बार-बार आने वाली maintenance requests में electrical और plumbing से जुड़े काम प्रमुख होते हैं। इनमें fans, LED lights, plumbing repairs और कुछ वर्षों के अंतराल पर floor tiles बदलने जैसे काम शामिल हो सकते हैं। यानी ₹92.35 करोड़ का पूरा खर्च केवल बड़े renovation projects पर नहीं, बल्कि नियमित repair और furnishing जैसे अलग-अलग कामों को मिलाकर है। 2019 के बाद तेजी से बढ़ा Average खर्च आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। 2014 से 2019 के बीच केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों की repair और upgradation पर औसत सालाना खर्च करीब ₹26.78 करोड़ रहा। वहीं 2019 से 2024 के बीच यह औसत लगभग दोगुना होकर ₹50 करोड़ सालाना के करीब पहुंच गया। इसके बाद 2024-25 में ₹71.98 करोड़ और 2025-26 में रिकॉर्ड ₹92.35 करोड़ खर्च हुआ। करीब 70 से 72 Ministers के लिए Official Residences केंद्र की Council of Ministers में अलग-अलग समय पर करीब 70 से 72 Cabinet Ministers और Ministers of State शामिल रहे हैं। ₹92.35 करोड़ के कुल सालाना खर्च को केवल गणितीय औसत में देखें तो यह करीब ₹1.2 करोड़ प्रति मंत्री बैठता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हर मंत्री के घर पर ₹1.2 करोड़ खर्च हुए। वास्तविक खर्च हर bungalow की उम्र, स्थिति और वहां कराए गए काम के आधार पर काफी अलग हो सकता है। RTI में किन खर्चों की जानकारी नहीं मिली? RTI में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक residences पर हुए खर्च की जानकारी उपलब्ध कराई गई है। लेकिन CPWD ने इस अवधि के दौरान ऐसे Lok Sabha और Rajya Sabha MPs जो मंत्री नहीं हैं, उनके सरकारी आवासों पर हुए खर्च का data उपलब्ध नहीं कराया। इसी तरह Union Ministers और Ministers of State के official offices पर हुए maintenance expenditure की जानकारी भी इस RTI response में शामिल नहीं है। इसलिए ₹547.68 करोड़ का आंकड़ा सभी सांसदों और सरकारी कार्यालयों के कुल maintenance खर्च को नहीं दर्शाता। Lutyens Delhi के बंगले ऐतिहासिक भी हैं दिल्ली का Lutyens Bungalow Zone ब्रिटिश काल में नई दिल्ली को राजधानी के रूप में विकसित किए जाने के दौरान बनाया गया था। इस क्षेत्र का अधिकांश विकास 1912 से 1930 के बीच हुआ। आजादी के बाद इन बंगलों का इस्तेमाल देश के वरिष्ठ मंत्रियों और अन्य सरकारी पदाधिकारियों के आधिकारिक निवास के रूप में होने लगा। कई इमारतें अब लगभग एक सदी पुरानी हो चुकी हैं, जिसके चलते उनका maintenance आधुनिक residential buildings की तुलना में अधिक जटिल हो सकता है। 2004 से 2009 में खर्च हुए थे ₹93.50 करोड़ RTI से जुड़े पुराने आंकड़े भी खर्च में आए बदलाव की तस्वीर दिखाते हैं। सितंबर 2009 के एक RTI response के मुताबिक 2004 से 2009 के पांच साल के दौरान MPs और Union Ministers के बंगलों की maintenance और renovation पर कुल ₹93.50 करोड़ खर्च हुए थे। इसके मुकाबले केवल 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों पर खर्च ₹92.35 करोड़ तक पहुंच गया है। हालांकि दोनों आंकड़ों की category और coverage पूरी तरह समान नहीं है, इसलिए सीधे तुलना करते समय सावधानी जरूरी है। RTI के आंकड़ों ने बढ़ाई सरकारी खर्च पर चर्चा ₹92.35 करोड़ का आंकड़ा सामने आने के बाद सरकारी आवासों पर होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। एक तरफ पुराने और ऐतिहासिक बंगलों के रखरखाव, electrical safety, plumbing और structural repair की जरूरत है, वहीं दूसरी तरफ इतनी बड़ी राशि खर्च होने के कारण transparency और cost efficiency को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। फिलहाल RTI से सामने आया मुख्य तथ्य यह है कि 2025-26 में केंद्रीय मंत्रियों के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवासों की repair, renovation और furnishing पर ₹92.35 करोड़ खर्च हुए, जो पिछले 12 वर्षों में सबसे ऊंचा सालाना आंकड़ा है। स्रोत – पीटीआई, एनडीटीवी, बिजनेस स्टैंडर्ड जय राष्ट्र न्यूज़

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अमृतसर के Military Bases पर Pakistan-based Gang की नजर? Intelligence Input के बाद Punjab में High Alert

चंडीगढ़/अमृतसर: पंजाब में सुरक्षा एजेंसियों को एक संवेदनशील intelligence input मिलने के बाद High Alert जारी किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान में मौजूद कथित gangster-terror handler Shahzad Bhatti के network से जुड़े लोगों की नजर अमृतसर क्षेत्र के कुछ संवेदनशील सैन्य प्रतिष्ठानों पर हो सकती है। इसके बाद Punjab Police और अन्य security agencies को सुरक्षा बढ़ाने और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने को कहा गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि कोई हमला तत्काल होने वाला है। फिलहाल इसे preventive intelligence alert के तौर पर गंभीरता से लिया जा रहा है। Intelligence Input में क्या सामने आया? 24 अगस्त 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक intelligence agencies ने Punjab Police और अन्य संबंधित agencies के साथ एक संवेदनशील input साझा किया है। इसमें पाकिस्तान में मौजूद दो कथित operatives के नाम Rana Bhai और Malik बताए गए हैं। Intelligence input में संदेह जताया गया है कि अमृतसर क्षेत्र के कुछ संवेदनशील military installations को लेकर reconnaissance यानी रेकी किए जाने की कोशिश हुई हो सकती है। इस जानकारी के बाद संबंधित सुरक्षा एजेंसियों को alert रहने और sensitive installations के आसपास सुरक्षा मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। किन Military Installations का जिक्र? मीडिया रिपोर्ट में intelligence input के हवाले से Khasa Cantonment, Amritsar और Beas क्षेत्र के एक military establishment का जिक्र किया गया है। हालांकि सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील operational details सार्वजनिक नहीं की गई हैं और ऐसी जानकारी को लेकर agencies अतिरिक्त सतर्कता बरत रही हैं। स्थानीय स्तर पर surveillance और preventive security measures बढ़ाए जाने की संभावना है। Shahzad Bhatti Network पर क्यों है Agencies की नजर? Shahzad Bhatti का नाम पिछले कुछ समय में भारत की विभिन्न security investigations में सामने आया है। भारतीय एजेंसियों का आरोप है कि वह पाकिस्तान से अपने associates और स्थानीय recruits के जरिए भारत में terror और organised crime से जुड़ी गतिविधियों को संचालित करने की कोशिश करता रहा है। हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी एक Pakistan-backed network के खिलाफ बड़ी कार्रवाई का जिक्र किया था। Agencies के मुताबिक इस network से जुड़े मामलों में कई राज्यों में लोगों को हिरासत या गिरफ्तार किया गया और संभावित हमलों की योजनाओं को विफल किया गया। Punjab में पहले भी पकड़े गए Cross-Border Modules Punjab Police ने अगस्त की शुरुआत में दो कथित ISI-backed cross-border modules का भंडाफोड़ करने का दावा किया था। पुलिस के मुताबिक नौ आरोपियों को पकड़ा गया था, जिनमें चार नाबालिग भी शामिल थे। इनके पास से हथियार और अन्य आपत्तिजनक सामग्री बरामद करने का दावा किया गया। Punjab Police ने कहा था कि preliminary investigation में foreign handlers द्वारा स्थानीय युवाओं को भर्ती करने और उनसे संवेदनशील स्थानों की रेकी कराने की कोशिश सामने आई थी। Khasa Cantonment के पास पहले भी हुआ था Blast ताजा intelligence alert इसलिए भी गंभीर माना जा रहा है क्योंकि 5 मई 2026 को Khasa Cantonment की boundary के पास एक low-intensity blast हुआ था। Punjab Police ने बाद में कहा था कि घटना में एक IED का इस्तेमाल किया गया था। विस्फोट से perimeter के पास एक tin sheet को नुकसान पहुंचा था। हालांकि अधिकारियों ने साफ किया है कि मई में हुए blast और मौजूदा intelligence input के बीच अभी कोई स्थापित संबंध नहीं है। इसलिए दोनों घटनाओं को सीधे एक-दूसरे से जोड़ना फिलहाल सही नहीं होगा। Chandigarh में भी 3 संदिग्ध पकड़े गए इसी बीच 24 अगस्त को Chandigarh से भी एक अलग सुरक्षा कार्रवाई की खबर सामने आई है। Chandigarh Police ने तीन लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से suspected explosive-making material और एक firearm बरामद करने का दावा किया है। Preliminary investigation में आरोपियों के एक अन्य Pakistan-based handler से कथित संबंधों की जांच की जा रही है। यह मामला फिलहाल अलग जांच का हिस्सा है और इसे अमृतसर के ताजा intelligence alert से जोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। Cross-Border Arms Network पर भी कार्रवाई Amritsar Counter Intelligence ने 23 अगस्त को एक अन्य कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार कर 10 sophisticated pistols, magazines और ammunition बरामद करने का दावा किया। Punjab Police के मुताबिक preliminary investigation में आरोपी एक foreign-based handler के संपर्क में थे और सीमा पार से हथियारों की consignments हासिल करने के आरोपों की जांच की जा रही है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के कारण पंजाब में cross-border arms और terror networks को लेकर security agencies की निगरानी बढ़ी हुई है। क्या Amritsar में हमला होने वाला है? फिलहाल ऐसा कोई आधिकारिक दावा नहीं है कि अमृतसर में हमला imminent यानी तुरंत होने वाला है। Intelligence input किसी संभावित threat की जानकारी देता है, जिसके आधार पर सुरक्षा एजेंसियां preventive measures अपनाती हैं। इसका अर्थ यह नहीं होता कि हमला निश्चित रूप से होगा। इसी वजह से agencies ने इस input को गंभीरता से लेते हुए संवेदनशील जगहों पर vigilance बढ़ाने को कहा है। लोगों को घबराने की जरूरत नहीं सुरक्षा एजेंसियों की ऐसी कार्रवाई का उद्देश्य संभावित खतरे को पहले ही पहचानना और उसे रोकना होता है। Punjab और Chandigarh से हाल में सामने आए अलग-अलग terror और arms-smuggling investigations के बीच security agencies local recruits, foreign handlers, हथियारों की movement और suspicious reconnaissance जैसी गतिविधियों की जांच कर रही हैं। फिलहाल अमृतसर के military installations से जुड़ा मामला intelligence-based preventive alert है। आगे की जांच से ही साफ होगा कि alleged reconnaissance किसने किया, उसके पीछे क्या उद्देश्य था और Shahzad Bhatti network से उसका संबंध कितना मजबूत है। नोट: Intelligence alert किसी हमले की पुष्टि नहीं करता। Shahzad Bhatti, Rana Bhai और Malik से जुड़े विवरण मीडिया द्वारा intelligence inputs के हवाले से रिपोर्ट किए गए हैं और मामले की जांच जारी है। स्रोत – एनडीटीवी, टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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