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रियाद एयरपोर्ट पर मिसाइल हमले से मचा हड़कंप, 12 की मौत और 309 घायल होने का दावा; हूती समूह पर आरोप

रियाद: सऊदी अरब की राजधानी रियाद स्थित किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर 10 अक्टूबर को हुए कथित मिसाइल हमले को लेकर भारी तनाव की खबरें सामने आईं। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, हमले में शुरुआती तौर पर 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। सऊदी अधिकारियों ने हमले के लिए यमन के ईरान समर्थित हूती समूह को जिम्मेदार ठहराया। घटना के बाद हवाई अड्डे के संचालन और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर पड़ने की खबरें भी सामने आईं। एयरपोर्ट पर लगातार तीसरे हमले की रिपोर्ट रिपोर्टों में दावा किया गया कि उसी सप्ताह रियाद एयरपोर्ट पर यह तीसरा बड़ा हमला था। इससे पहले भी हवाई अड्डे और आसपास के विमानन ढांचे को निशाना बनाए जाने की खबरें सामने आई थीं। हालांकि, इन घटनाओं और उनकी जिम्मेदारी से संबंधित दावों की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी। 12 लोगों की मौत और 309 के घायल होने का दावा प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के नागरिक उड्डयन प्राधिकरण के हवाले से हमले में 12 लोगों की मौत और 309 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई। घायलों में कई की हालत गंभीर होने और उन्हें रियाद के विभिन्न अस्पतालों में भर्ती कराने की बात भी कही गई। कई देशों के नागरिकों के प्रभावित होने की खबर रिपोर्ट में मृतकों में सऊदी अरब के अलावा बांग्लादेश, अमेरिका, जॉर्डन, फिलिस्तीन, सीरिया, सूडान और मिस्र के नागरिकों के शामिल होने का दावा किया गया। बाद की एक रिपोर्ट में एक भारतीय नागरिक की भी घायल होने के बाद मौत होने की बात कही गई, जिससे मृतकों की संख्या 13 होने का उल्लेख किया गया। इन आंकड़ों में अंतर के कारण अंतिम मृतक संख्या की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। हवाई अड्डे का संचालन प्रभावित होने की खबर हमले के बाद किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का संचालन अस्थायी रूप से रोकने की खबर सामने आई। कुछ उड़ानों को दूसरे हवाई अड्डों की ओर मोड़े जाने और कई उड़ानों के रद्द होने का दावा किया गया। अधिकारियों द्वारा रनवे और टर्मिनल सहित विमानन ढांचे को हुए संभावित नुकसान का आकलन किए जाने की भी जानकारी दी गई। हूती समूह पर हमले की जिम्मेदारी का आरोप रिपोर्ट में यमन के हूती समूह द्वारा हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया गया। समूह की कथित चेतावनी के अनुसार, सऊदी विमानन ढांचे को उसके सैन्य लक्ष्यों में शामिल किया जा सकता है। ऐसे दावों की पुष्टि संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों से की जानी चाहिए। सऊदी गठबंधन ने हमले को बताया युद्ध अपराध सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने कथित हमले की निंदा करते हुए इसे युद्ध अपराध करार दिया। गठबंधन के प्रवक्ता ने सऊदी अरब की ओर से निर्णायक जवाब दिए जाने की बात भी कही। यह गठबंधन की प्रतिक्रिया थी; किसी घटना को कानूनी रूप से युद्ध अपराध घोषित करने के लिए संबंधित तथ्यों और लागू अंतरराष्ट्रीय कानून का आकलन जरूरी होता है। अमेरिकी राष्ट्रपति की प्रतिक्रिया का दावा रिपोर्ट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से हमले को गंभीर बताते हुए प्रतिक्रिया दिए जाने का उल्लेख है। इसमें यह संकेत भी बताया गया कि अमेरिका हूती समूह के खिलाफ संभावित सऊदी सैन्य कार्रवाई में शामिल होने के विकल्प पर विचार कर सकता है। इस संबंध में किसी आधिकारिक बयान की पुष्टि आवश्यक है। भारतीय दूतावास ने घायलों पर नजर रखी हमले के बाद रियाद स्थित भारतीय दूतावास द्वारा सऊदी अरब के अस्पतालों में भर्ती भारतीय नागरिकों की स्थिति पर नजर रखने की खबर सामने आई। रिपोर्ट के अनुसार, दूतावास के अधिकारियों ने घायलों से संपर्क किया और जरूरत पड़ने पर कांसुलर सहायता उपलब्ध कराने की बात कही। अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर असर सुरक्षा चिंताओं के बीच कई अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों की उड़ानों पर प्रतिबंध, रद्दीकरण या परिचालन संबंधी बदलाव होने की खबरें आईं। रिपोर्ट में एयर इंडिया और इंडिगो सहित कुछ कंपनियों के रियाद परिचालन पर पाबंदियों का भी उल्लेख किया गया। यात्रियों के लिए उड़ानों की स्थिति की पुष्टि संबंधित एयरलाइन की आधिकारिक सूचना से करना जरूरी है। ऊर्जा क्षेत्र और अंतरराष्ट्रीय आयोजनों पर असर रियाद में सुरक्षा स्थिति को लेकर बढ़ती चिंताओं का असर बड़े कारोबारी और ऊर्जा क्षेत्र के आयोजनों पर पड़ने की भी रिपोर्ट सामने आई। फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, BP, Shell, ExxonMobil और TotalEnergies जैसी कंपनियों के कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने वर्ल्ड पेट्रोलियम कांग्रेस में भागीदारी से दूरी बनाई या उसे रद्द किया। सऊदी एयर डिफेंस पर उठे सवाल लगातार मिसाइल हमलों की खबरों के बाद सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली की प्रभावशीलता पर सवाल उठाए जाने का दावा किया गया। यह जांच का विषय है कि यदि हमला हुआ, तो संबंधित मिसाइल या प्रोजेक्टाइल को रोकने में क्या चुनौतियां आईं और नागरिक विमानन ढांचे की सुरक्षा के लिए कौन-से कदम उठाए गए। अगले दिन फिर हमले की रिपोर्ट 11 अक्टूबर को रियाद एयरपोर्ट पर एक और प्रोजेक्टाइल हमले की खबर सामने आई। डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, इस कथित हमले में एक पाकिस्तानी निवासी की मौत और 11 लोगों के घायल होने का दावा किया गया। यदि इसकी पुष्टि होती है, तो यह क्षेत्र में सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर बना सकता है। मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका रियाद एयरपोर्ट पर कथित हमलों की खबरों ने यमन संघर्ष और व्यापक मध्य पूर्व की सुरक्षा स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। विमानन सेवाओं, नागरिकों की सुरक्षा और ऊर्जा बाजारों पर संभावित असर के बीच घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित सरकारों के आधिकारिक बयानों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। स्रोत: रॉयटर्स, एसोसिएटेड प्रेस, अल जज़ीरा, सऊदी जनरल अथॉरिटी ऑफ सिविल एविएशन जय राष्ट्र न्यूज़

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शत्रुघ्न सिन्हा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले—“चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का पूरा फायदा उठाया गया”

आसनसोल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP ने चुनाव आयोग का “पूरा फायदा” उठाया है और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उसे लाभ मिला। सिन्हा ने कहा कि वह लंबे समय तक BJP में रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। “BJP चुनाव आयोग का पर्याय बन गई” शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP और चुनाव आयोग के बीच अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह वर्षों तक BJP में रहे हैं और इस दौरान पार्टी के नेताओं तथा उनकी कार्यशैली को करीब से समझा है। ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर लगाया आरोप TMC सांसद ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का फायदा उठाया है। हालांकि, सिन्हा ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। 2024 के बाद के चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल सिन्हा ने 2024 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें गैर-कानूनी बताया। यह उनका राजनीतिक दावा है। किसी अदालत द्वारा 2024 के बाद हुए सभी चुनावों को अवैध घोषित किए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के रुख का समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों से सहमति जताई। SIR विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से BJP को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP, कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की खबरें सामने आईं। BJP ने आरोपों को खारिज किया BJP ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान में कहा था कि BJP की मदद “ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी” कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया। BJP का दावा—संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र BJP का कहना है कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी पार्टी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रही हैं। CJP आंदोलन से गरमाया विवाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का यह दावा कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का “पूरा फायदा” उठाया, एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्थापित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने BJP को अनुचित चुनावी लाभ पहुंचाया है। BJP और चुनाव आयोग पक्षपात के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। स्रोत: पत्रिका, नवभारत टाइम्स, रॉयटर्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल, हिरासत में कथित दुर्व्यवहार की जांच की मांग

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। 10 और 11 अक्टूबर को मध्य दिल्ली में हुए प्रदर्शनों के बाद सामने आए वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों में महिला प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा पकड़कर वाहनों में ले जाते हुए देखा गया। विपक्षी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग और कथित दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं। हालांकि, सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित बदसलूकी के आरोप CPI(M) के नेताओं ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शन के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस ने सख्ती से पेश आते हुए उन्हें लंबे समय तक पुलिस वाहनों में रखा। पार्टी के महासचिव एम.ए. बेबी ने यह भी दावा किया कि कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस वाहनों के भीतर मारपीट हुई। इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष सामने आना अभी बाकी है। हिरासत के दौरान सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने का दावा इसी प्रदर्शन के दौरान CPI(M) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास के घायल होने की खबर भी सामने आई। पार्टी के अनुसार, हिरासत में लिए जाने के दौरान हुई धक्का-मुक्की में उन्हें चोट लगी, जिसके बाद उन्हें राम मनोहर लोहिया अस्पताल में चिकित्सकीय जांच के लिए ले जाया गया। बंगला साहिब के पास पुलिस कार्रवाई पर भी विवाद गुरुद्वारा बंगला साहिब के आसपास हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। नॉर्थ अमेरिकन पंजाबी एसोसिएशन (NAPA) ने दावा किया कि वहां महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार हुआ और मदद की अपील पर ध्यान नहीं दिया गया। संगठन ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग की है। वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस का स्पष्टीकरण बंगला साहिब से जुड़े वायरल वीडियो पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि पुलिसकर्मी उस सामान्य रास्ते से गुजर रहे थे, जिसका इस्तेमाल श्रद्धालु जूते उतारने वाले स्थान तक पहुंचने के लिए करते हैं। हालांकि, एसोसिएशन ने पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता के लिए बिना संपादन वाले वीडियो और अन्य संबंधित साक्ष्यों की जांच कराने की मांग की है। आरोपों और पुलिस के स्पष्टीकरण की निष्पक्ष जांच से ही घटनाओं की पूरी स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। पहले भी महिला प्रदर्शनकारी को लेकर उठा था विवाद 7 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के विरोध प्रदर्शन के दौरान भी एक महिला पुलिस अधिकारी और प्रदर्शनकारियों के बीच कथित टकराव को लेकर विवाद हुआ था। उस घटना पर भाजपा ने राहुल गांधी पर महिला पुलिस अधिकारी को धक्का देने की कोशिश करने का आरोप लगाया था। यह भाजपा का आरोप था, जिसे घटना के स्वतंत्र रूप से स्थापित निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने की रिपोर्ट 10 अक्टूबर को CJP के प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने बड़े पैमाने पर एहतियाती हिरासत की कार्रवाई की। रिपोर्ट के अनुसार, 3,500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को अलग-अलग हिरासत केंद्रों में ले जाया गया था। हिरासत केंद्रों के भीतर भी जारी रहे नारे रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए कई प्रदर्शनकारियों ने केंद्रों के भीतर भी नारेबाजी और विरोध जारी रखा। कुछ प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि उन्हें जंतर-मंतर तक नहीं पहुंचने दिया गया, तो वे हिरासत केंद्रों को ही विरोध स्थल बना देंगे। महिला सुरक्षा और पुलिस प्रक्रिया पर बहस महिला प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के तरीके, उन्हें पुलिस वाहनों में ले जाने और कथित सख्ती ने पुलिस की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। महिला पुलिसकर्मियों की पर्याप्त मौजूदगी, बल का उचित इस्तेमाल और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता जैसे पहलुओं पर भी ध्यान देने की मांग की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के स्वतः संज्ञान को लेकर सवाल 12 अक्टूबर को प्रकाशित एक कानूनी विश्लेषण में यह सवाल उठाया गया कि बड़े पैमाने पर हिरासत और पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों के बावजूद सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान क्यों नहीं लिया। विश्लेषण में पहले के मामलों का हवाला देते हुए अदालत के हस्तक्षेप की भूमिका पर चर्चा की गई। यह न्यायिक कार्रवाई को लेकर उठाया गया सवाल है, न कि अदालत की ओर से किसी उल्लंघन की पुष्टि। आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो और राजनीतिक आरोपों के आधार पर किसी विशिष्ट पुलिसकर्मी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। हालांकि, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार और हिरासत के दौरान बल प्रयोग से जुड़े आरोप गंभीर हैं। इनकी निष्पक्ष जांच, संबंधित पक्षों के बयान और उपलब्ध साक्ष्यों की समीक्षा से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। विरोध प्रदर्शनों के बीच पुलिस की भूमिका पर बढ़ती चर्चा दिल्ली में लगातार विरोध प्रदर्शन, हिरासत और पुलिस-प्रदर्शनकारी टकराव की खबरों के बीच बहस अब केवल मुख्य चुनाव आयुक्त और SIR प्रक्रिया तक सीमित नहीं है। प्रदर्शन करने के अधिकार, पुलिस की शक्तियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्रोत: द प्रिंट, PTI, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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कनॉट प्लेस में प्रदर्शनकारियों से मारपीट का आरोप, IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी संदिग्धों की पहचान

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली के कनॉट प्लेस और आसपास के इलाकों में कुछ प्रदर्शनकारियों के साथ कथित मारपीट के वीडियो सामने आए हैं। इंडियन यूथ कांग्रेस (IYC) ने सोशल मीडिया पर तस्वीरें और वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि युवाओं और महिलाओं को निशाना बनाया गया, जबकि मौके पर पुलिस की मौजूदगी थी। संगठन ने वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी मांगी है। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वीडियो में प्रदर्शनकारियों के साथ मारपीट के दृश्य मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, सामने आए वीडियो में कुछ पुरुष प्रदर्शनकारियों को धक्का देते, थप्पड़ मारते और लात-घूंसे चलाते दिखाई दे रहे हैं। एक वीडियो में काली, फटी हुई टी-शर्ट पहने एक युवक को कई लोगों से घिरा हुआ देखा गया। वहीं, एक अन्य क्लिप में एक पुरुष और महिला के साथ कथित मारपीट के दृश्य सामने आए। इन वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) महिला को जमीन पर गिराने का आरोप इंडियन यूथ कांग्रेस की ओर से साझा किए गए एक वीडियो में एक महिला को कथित तौर पर धक्का देकर जमीन पर गिराते और उसके साथ मारपीट करते हुए दिखाया गया है। IYC ने सवाल उठाया कि भारी पुलिस तैनाती के बावजूद ऐसी घटना कैसे हुई। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और इसमें शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। IYC ने तस्वीरें साझा कर मांगी पहचान इंडियन यूथ कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर कुछ संदिग्ध व्यक्तियों की तस्वीरें साझा करते हुए लोगों से उनकी पहचान के संबंध में जानकारी देने की अपील की। संगठन ने कथित हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। (फ्री प्रेस जर्नल) दिल्ली पुलिस ने शुरू की जांच मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कहा कि वह वीडियो में दिखाई दे रहे लोगों और कथित पीड़ितों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पुलिस ने शिकायत मिलने पर आवश्यक कार्रवाई करने की बात कही थी। (द टाइम्स ऑफ इंडिया) वायरल वीडियो से जुड़े मामले में चार लोग पकड़े गए फ्री प्रेस जर्नल की एक बाद की रिपोर्ट के अनुसार, वायरल वीडियो से जुड़े कथित हमले के मामले में दिल्ली पुलिस ने चार लोगों को पकड़ा था। पुलिस ने घटनास्थल को डीडीयू मार्ग के उस हिस्से से जोड़ा, जो कमला मार्केट पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आता है। शुरुआती रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि उस समय कथित पीड़ित या किसी संगठन की ओर से औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई थी। इसके बावजूद, वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। (फ्री प्रेस जर्नल) सुरक्षा के लिए 35 हजार से अधिक कर्मियों की तैनाती की रिपोर्ट 10 अक्टूबर के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बलों और उत्तर प्रदेश तथा हरियाणा पुलिस सहित 35,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई थी। ऐसे में कथित मारपीट के वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठाया गया कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी के बावजूद ऐसी घटनाएं कैसे हुईं। कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को विरोध प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को एहतियातन हिरासत में लिए जाने और जंतर-मंतर पर बड़ी सभा को रोकने की खबरें सामने आई थीं। अधिकारियों ने सुरक्षा प्रतिबंधों को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपाय बताया, जबकि विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। (रॉयटर्स) 12 अक्टूबर को भी दिल्ली में प्रदर्शन 12 अक्टूबर को इंडियन यूथ कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ बाराखंभा रोड से मार्च निकाला। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, कनॉट प्लेस से मंडी हाउस जाने वाले मार्ग पर छात्र और राजनीतिक कार्यकर्ता बैठकर विरोध प्रदर्शन करते दिखाई दिए। (अमर उजाला) कथित मारपीट के मामले में जांच अहम IYC और कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन घटनाओं को सुनियोजित हिंसा बताया है। हालांकि, इस व्यापक आरोप की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मारपीट से जुड़े वीडियो सामने आए और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की। कुछ लोगों को पकड़े जाने की भी खबर है। घटना की वास्तविक परिस्थितियों, कथित पीड़ितों के बयानों और आरोपित व्यक्तियों की भूमिका के संबंध में जांच के निष्कर्ष महत्वपूर्ण होंगे। स्रोत: द टाइम्स ऑफ इंडिया, फ्री प्रेस जर्नल, रॉयटर्स, अमर उजाला जय राष्ट्र न्यूज़

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प्रकाश राज का सरकार पर निशाना—“आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” CJP आंदोलन के समर्थन में उठाई आवाज

नई दिल्ली: अभिनेता प्रकाश राज ने CJP आंदोलन के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की हिरासत और पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। 10 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो में उन्होंने सवाल किया, “Fraand… how long will you stop a river?” यानी, “दोस्त, आखिर कब तक एक नदी को रोकोगे?” उनकी यह टिप्पणी विरोध प्रदर्शनों और उन्हें रोकने के लिए उठाए जा रहे कदमों के संदर्भ में सामने आई। (हिंदुस्तान) प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर जताई नाराजगी प्रकाश राज ने दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने और सुरक्षा व्यवस्था के तहत पुलिस की भारी तैनाती की आलोचना की। अपने वीडियो संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनता की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। उनके अनुसार, पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के बावजूद विरोध की आवाज को रोकना आसान नहीं होगा। “आखिर कब तक नदी को रोकोगे?” प्रकाश राज ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट के कैप्शन में लिखा, “Fraand… how long will you stop a river…” इस रूपक के जरिए उन्होंने आंदोलन को रोकने की कोशिशों पर सवाल उठाया। उनका संदेश इस विचार को व्यक्त करता है कि लगातार बढ़ते जनविरोध को केवल पुलिस कार्रवाई और प्रतिबंधों के जरिए दबाना मुश्किल हो सकता है। सरकार पर डरने का लगाया आरोप प्रकाश राज ने अपने वीडियो में सत्ता पक्ष पर डरने का आरोप भी लगाया। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस, बैरिकेडिंग और हिरासत जैसी कार्रवाई का जिक्र किया। हालांकि, सरकार की मंशा को लेकर उनकी टिप्पणियां राजनीतिक आरोप हैं, न कि स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य। Bengaluru में भी CJP प्रदर्शन में हुए थे शामिल प्रकाश राज इससे पहले बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में आयोजित CJP प्रदर्शन में शामिल हुए थे। इस दौरान उन्होंने SIR प्रक्रिया को समाप्त करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग का समर्थन किया था। (जनसत्ता) ध्रुव राठी और अभिजीत दिपके भी थे मौजूद बेंगलुरु में हुए प्रदर्शन में प्रकाश राज के साथ YouTuber ध्रुव राठी और CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके भी मौजूद थे। यह कार्यक्रम 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए प्रदर्शन से पहले चलाए जा रहे CJP अभियान का हिस्सा था। (जनसत्ता) “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा” दिल्ली में पुलिस कार्रवाई के बाद प्रकाश राज ने एक अन्य वीडियो संदेश में कहा कि यदि लोगों को जंतर-मंतर पर अपनी आवाज उठाने से रोका जाएगा, तो “पूरा देश जंतर-मंतर बन जाएगा।” उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार आखिर किसे बचाने की कोशिश कर रही है—चुनाव आयोग को या अपनी सत्ता को। यह बयान उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में सामने आया। (जनसत्ता) कई शहरों तक फैला CJP आंदोलन CJP और उससे जुड़े समूहों के प्रदर्शन दिल्ली के अलावा मुंबई, पुणे और बेंगलुरु सहित कई शहरों में भी हुए। इन प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। 11 अक्टूबर को भी दिल्ली में चुनाव प्रमुख के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी रहने की सूचना दी गई। (रॉयटर्स) दिल्ली में प्रदर्शन और मार्च की कोशिश 12 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन जारी रहे। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च करने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में रोक दिया। विरोध प्रदर्शनों के मद्देनजर कुछ मेट्रो स्टेशन बंद करने और यातायात पर प्रतिबंध लगाने की भी खबरें आईं। (रॉयटर्स) CJP ने दिल्ली पुलिस को दिया 24 घंटे का अल्टीमेटम CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रंका ने दिल्ली पुलिस से जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए तारीख और समय तय करने की मांग की है। संगठन ने 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि यदि पुलिस की ओर से कोई तारीख तय नहीं की गई, तो वह दोबारा प्रदर्शन की घोषणा करेगा। (जनसत्ता) SIR प्रक्रिया को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल CJP और विपक्षी दलों ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल उठाए हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलत तरीके से हट गया है, तो वह दोबारा पंजीकरण करा सकता है। (रॉयटर्स) प्रकाश राज की टिप्पणी राजनीतिक प्रतिक्रिया प्रकाश राज का “नदी को कब तक रोकोगे?” वाला बयान CJP आंदोलन और प्रदर्शन पर लगाई जा रही पाबंदियों के संदर्भ में उनकी राजनीतिक प्रतिक्रिया है। इसे उनके विचार और आंदोलन के समर्थन के रूप में देखा जाना चाहिए। स्रोत: हिंदुस्तान, रॉयटर्स, जनसत्ता जय राष्ट्र न्यूज़

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नेहा बोरा की हिरासत पर उठे सवाल, महिला प्रदर्शनकारियों से पुलिस के व्यवहार का वीडियो वायरल

नई दिल्ली | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को हिरासत में लेने के तरीके पर सवाल उठे हैं। दिल्ली में अलग-अलग स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के वीडियो सामने आने के बाद प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस के व्यवहार और हिरासत की परिस्थितियों को लेकर बहस तेज हो गई है। नेहा बोरा और अन्य कार्यकर्ताओं ने पुलिस पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने और हिरासत के दौरान असुविधाजनक परिस्थितियों में रखने के आरोप लगाए हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। कई पुलिसकर्मियों ने प्रदर्शनकारियों को बस तक पहुंचाया 11 अक्टूबर को आरके आश्रम और मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में हुए प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को एक साथ कई पुलिसकर्मियों ने पकड़कर बसों तक पहुंचाया। इन घटनाओं के दृश्य सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई के तरीके और प्रदर्शनकारियों को संभालने में इस्तेमाल किए गए बल की आवश्यकता को लेकर सवाल उठे। नेहा बोरा दोबारा हिरासत में ली गईं नेहा बोरा को 10 अक्टूबर को दिल्ली हाट के पास हुए मार्च के दौरान हिरासत में लिया गया था। अगले दिन विरोध प्रदर्शन के दौरान उन्हें फिर से हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के विरोध में चल रहे प्रदर्शनों की प्रमुख आवाजों में शामिल हैं। हिरासत की परिस्थितियों पर नेहा बोरा के आरोप 11 अक्टूबर को हिरासत में लिए जाने के बाद नेहा बोरा ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को पुलिस बसों में बेहद तंग परिस्थितियों में रखा गया था। उन्होंने दावा किया कि बस के भीतर लोगों के लिए सांस लेने तक की पर्याप्त जगह नहीं थी। ये आरोप नेहा बोरा की ओर से लगाए गए हैं। उपलब्ध रिपोर्टों में इन विशिष्ट दावों पर दिल्ली पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं है। महिला पुलिसकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल सोशल मीडिया पर प्रसारित दृश्यों में महिला पुलिसकर्मियों को महिला प्रदर्शनकारियों को पकड़कर ले जाते देखा गया। कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया गया। वहीं, पुलिस का पक्ष है कि बिना अनुमति आयोजित सभाओं को रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। वायरल वीडियो के आधार पर किसी घटना की पूरी परिस्थितियों या बल प्रयोग की आवश्यकता के बारे में अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए स्वतंत्र जांच जरूरी है। पहले की हिरासत में भी प्रक्रिया पर विवाद 4 अक्टूबर को नेहा बोरा की एक अन्य हिरासत के दौरान AISA ने आरोप लगाया था कि उन्हें जिस वाहन में ले जाया गया, उसमें कोई महिला पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। संगठन ने इसे निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन बताया था। हालांकि, दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उस आरोप को निराधार बताया था। इस प्रकार, घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग रहे हैं। फोन और बैग को लेकर भी सामने आए दावे AISA ने पहले की हिरासत के बाद आरोप लगाया था कि नेहा बोरा का फोन और बैग उन्हें वापस नहीं किया गया। दिल्ली पुलिस ने इस दावे से इनकार किया था। इस मामले में भी आरोप और पुलिस के जवाब को अलग-अलग देखना जरूरी है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान को लेकर विवाद का स्वतंत्र निष्कर्ष स्थापित नहीं होता। महिला कंटेंट क्रिएटर ने भी लगाया था आरोप नेहा बोरा की पहले की हिरासत का वीडियो बना रही एक महिला कंटेंट क्रिएटर ने दिल्ली पुलिस के एक सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) पर मारपीट और अनुचित तरीके से छूने का आरोप लगाया था। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने शिकायत दर्ज होने की पुष्टि की थी। हालांकि, आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और मामले की अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस घटना ने प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षा और पुलिस के व्यवहार को लेकर चिंताएं बढ़ाईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस बस को घेरा 10 अक्टूबर को नेहा बोरा को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रदर्शनकारियों ने उस पुलिस बस को घेर लिया, जिसमें उन्हें ले जाया जा रहा था। प्रदर्शनकारी उनकी रिहाई की मांग करते हुए नारे लगाने लगे, जिससे इलाके में कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी गई थी और प्रतिबंधित या संवेदनशील क्षेत्रों में भीड़ एकत्र होने से रोकना जरूरी था। अधिकारियों ने सुरक्षा तैनाती, बैरिकेडिंग और हिरासत की कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उपायों के रूप में बताया। ‘गलत नेहा’ को हिरासत में लेने का मामला 11 अक्टूबर को पुलिस कार्रवाई के दौरान पहचान को लेकर भ्रम की घटना भी सामने आई। रिपोर्टों के अनुसार, आरके आश्रम इलाके में पुलिस ने पहले नेहा बोरा जैसी दिखने वाली दूसरी महिला को हिरासत में ले लिया। बाद में पता चला कि नेहा बोरा उस समय कनॉट प्लेस में प्रदर्शन कर रही थीं। उन्हें बाद में विजय चौक के पास हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। पुलिस की प्रदर्शन-प्रबंधन रणनीति पर बढ़ी निगरानी लगातार हिरासत, बसों में प्रदर्शनकारियों को रखे जाने की परिस्थितियों और महिला प्रदर्शनकारियों के साथ व्यवहार को लेकर उठे सवालों ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर ध्यान केंद्रित किया है। दूसरी ओर, पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारी प्रतिबंधों और बैरिकेडिंग के बावजूद एकत्र होने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते एहतियाती कार्रवाई आवश्यक थी। निष्पक्ष जांच की मांग कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने सामने आए वीडियो तथा पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र जांच की मांग की है। मामले में निष्पक्ष निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और पुलिस का पक्ष महत्वपूर्ण होंगे। जब तक किसी आधिकारिक या स्वतंत्र जांच में निष्कर्ष सामने नहीं आते, हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग से जुड़े दावों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, टाइम्स ऑफ इंडिया, द प्रिंट, द ट्रिब्यून, इंडिया टुडे जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन में अभिनेता इमरान खान हिरासत में, मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई

मुंबई | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में 10 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शन के दौरान बॉलीवुड अभिनेता इमरान खान को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। उनके साथ उनकी पार्टनर लेखा वॉशिंगटन और अभिनेत्री जायन मैरी भी अगस्त क्रांति मैदान के बाहर प्रदर्शन में शामिल थीं। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी, जिसके बाद शहर के अलग-अलग हिस्सों में 400 से अधिक लोगों को एहतियातन हिरासत में लिया गया। अगस्त क्रांति मैदान पहुंचे थे इमरान खान अभिनेता इमरान खान मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में CJP के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने पहुंचे थे। यह प्रदर्शन दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया था। पुलिस ने अनुमति नहीं होने का हवाला देते हुए प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेना शुरू किया। इस कार्रवाई के दौरान इमरान खान समेत कई अन्य लोग भी पुलिस की कार्रवाई की चपेट में आए। लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी भी हिरासत में इमरान खान के साथ लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। रिपोर्टों के अनुसार, जायन मैरी ने बाद में पुलिस वैन के अंदर से एक वीडियो साझा किया, जिसमें हिरासत के दौरान की स्थिति दिखाई गई। मुंबई में 400 से अधिक प्रदर्शनकारी हिरासत में मुंबई में विभिन्न स्थानों पर हुई पुलिस कार्रवाई के दौरान 400 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई। रिपोर्टों के मुताबिक, अगस्त क्रांति मैदान से ही करीब 200 लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि हुतात्मा चौक और अन्य स्थानों पर एकत्र हुए समूहों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई। तुषार गांधी भी लिए गए हिरासत में महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी को भी 10 अक्टूबर को बांद्रा से हिरासत में लिया गया था। वह ‘हम भारत के लोग’ के माध्यम से लोगों से अगस्त क्रांति मैदान में प्रदर्शन में शामिल होने की अपील कर रहे थे। पुलिस ने अनुमति नहीं मिलने का दिया हवाला मुंबई पुलिस के अनुसार, अगस्त क्रांति मैदान को निर्धारित प्रदर्शन स्थल नहीं माना गया था और वहां प्रदर्शन के लिए आवश्यक अनुमति नहीं दी गई थी। अधिकारियों ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए एहतियाती कार्रवाई की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग CEC का इस्तीफा प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा था। CJP और उसके समर्थकों ने SIR प्रक्रिया के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और हेरफेर को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि, ये आरोप विवादित हैं। चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को खारिज किया है। रिहाई के बाद इमरान खान ने कहा ‘जय हिंद’ रिपोर्टों के अनुसार, कुछ घंटों की हिरासत के बाद इमरान खान, लेखा वॉशिंगटन और जायन मैरी को रिहा कर दिया गया। बाहर निकलने के बाद इमरान खान ने मीडिया के सामने संक्षेप में “जय हिंद” कहा और वहां से चले गए। जायन मैरी ने चोट लगने का दावा किया 12 अक्टूबर को जायन मैरी ने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीरें साझा करते हुए दावा किया कि हिरासत के दौरान उन्हें चोटें आईं। यह उनका आरोप है। उपलब्ध रिपोर्टों में चोट लगने की परिस्थितियों पर पुलिस का विस्तृत जवाब स्पष्ट नहीं था। फिल्मी हस्तियों ने भी दी प्रतिक्रिया प्रदर्शनकारियों की हिरासत के बाद फिल्म जगत की कई हस्तियों ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया दी। रिपोर्टों के अनुसार, विजय वर्मा, हुमा कुरैशी, सोनाक्षी सिन्हा और फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप समेत कई लोगों ने प्रदर्शन और असहमति जताने के अधिकार से जुड़े मुद्दों पर पोस्ट साझा किए। मुंबई के कई इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई अगस्त क्रांति मैदान के अलावा शिवाजी पार्क समेत कई स्थानों पर अतिरिक्त पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे। अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य अनधिकृत जमावड़े को रोकना और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना था। दिल्ली से कई शहरों तक फैला आंदोलन 10 अक्टूबर का विरोध प्रदर्शन केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रहा। मुंबई के अलावा बेंगलुरु, चेन्नई, जयपुर और चंडीगढ़ समेत अन्य शहरों में भी प्रदर्शनों और हिरासत की खबरें सामने आईं। हिरासत में लिया जाना दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं इमरान खान और अन्य प्रदर्शनकारियों को एहतियाती हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया। किसी व्यक्ति को हिरासत में लिया जाना अपने आप में किसी आपराधिक मामले में दोष सिद्ध होने के बराबर नहीं है। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन मुंबई में भी तेज, प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया

मुंबई: Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और Special Intensive Revision (SIR) के विरोध में चल रहा CJP आंदोलन अब मुंबई में भी तेज हो गया है। शहर में प्रदर्शन के लिए जुटे कई activists और supporters को Mumbai Police ने हिरासत में लिया। पुलिस का कहना है कि gathering को निर्धारित permission नहीं मिली थी और law-and-order बनाए रखने के लिए preventive action किया गया। मुंबई में CJP समर्थकों का प्रदर्शन CJP और उससे जुड़े activists ने मुंबई में Election Commission और SIR process के खिलाफ प्रदर्शन करने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग उठाई और electoral rolls से जुड़े कथित irregularities पर सवाल किए। पुलिस ने कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया Protest शुरू होने के दौरान Mumbai Police ने कई लोगों को preventive detention में लिया। Reports के मुताबिक protesters को police vehicles में बैठाकर local police stations ले जाया गया और बाद में प्रक्रिया पूरी होने पर कई लोगों को छोड़ दिया गया। Permission नहीं मिलने का हवाला Mumbai Police का कहना है कि protest को formal permission नहीं दी गई थी। Authorities ने crowd movement, traffic disruption और public order concerns का हवाला देते हुए gathering को रोकने की कार्रवाई की। “लोकतांत्रिक अधिकारों पर रोक” का आरोप दूसरी तरफ CJP supporters ने police action की आलोचना की। उन्होंने कहा कि peaceful protest करना constitutional right है और preventive detentions के जरिए dissent को दबाया जा रहा है। यह protesters का आरोप है। Pune के बाद Mumbai में भी कार्रवाई महाराष्ट्र में CJP protest को लेकर सिर्फ Mumbai में ही नहीं, Pune में भी police action हुआ है। Pune में भी 80 से ज्यादा protesters को हिरासत में लिए जाने की रिपोर्ट सामने आई थी। इससे साफ है कि Maharashtra के कई शहरों में आंदोलन तेज हुआ है। SIR को लेकर क्या है CJP की मांग? CJP का आरोप है कि Special Intensive Revision के दौरान voter lists में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। संगठन SIR को रोकने और CEC Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रहा है। Election Commission इन आरोपों को खारिज करता रहा है और revision exercise को electoral rolls को अधिक accurate बनाने की प्रक्रिया बताता है। Delhi से शुरू हुआ आंदोलन कई शहरों तक पहुंचा 10 अक्टूबर को Delhi के Jantar Mantar protest के बाद CJP ने दूसरे शहरों में भी demonstrations जारी रखने की बात कही थी। इसके बाद Mumbai, Pune और अन्य जगहों पर supporters के जुटने और detentions की खबरें सामने आईं। Mumbai Police की अतिरिक्त तैनाती Protest को देखते हुए sensitive locations पर police deployment बढ़ाया गया। Authorities ने किसी भी unauthorized march या बड़ी gathering को रोकने के लिए barricading और monitoring बढ़ाई। आंदोलन और तेज करने का दावा CJP leaders का कहना है कि detentions के बावजूद agitation जारी रहेगा। उनका दावा है कि यह केवल एक शहर या एक दिन का protest नहीं, बल्कि electoral accountability को लेकर nationwide campaign है। आरोप और आधिकारिक पक्ष दोनों अहम Protesters police action को democratic rights पर restriction बता रहे हैं, जबकि authorities इसे public order बनाए रखने के लिए preventive measure बता रही हैं। SIR और Election Commission को लेकर लगाए जा रहे आरोप अभी राजनीतिक और कानूनी विवाद का हिस्सा हैं और इनके अंतिम निष्कर्ष स्वतंत्र जांच या judicial scrutiny से ही तय होंगे। source – The Times of India / Reuters / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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पुणे में भी CJP आंदोलन पर पुलिस की कार्रवाई, 80 से 85 प्रदर्शनकारी हिरासत में

पुणे | 12 अक्टूबर: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) के विरोध में चल रहे CJP आंदोलन पर पुणे में भी पुलिस ने कार्रवाई की। रविवार को फर्ग्यूसन कॉलेज रोड स्थित कलाकार कट्टा और गुड लक चौक के पास प्रदर्शन के लिए जुटे करीब 80 से 85 कार्यकर्ताओं और समर्थकों को पुलिस ने हिरासत में लिया। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई थी और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियाती कार्रवाई की गई। बिना अनुमति जुटे प्रदर्शनकारी CJP ने पुणे में SIR प्रक्रिया और चुनाव आयोग की भूमिका के विरोध में प्रदर्शन का आह्वान किया था। आयोजकों ने डेक्कन पुलिस स्टेशन में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन पुलिस ने कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद रविवार शाम करीब 4:30 बजे प्रदर्शनकारी कलाकार कट्टा के आसपास एकत्र होने लगे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए लोगों को हिरासत में लेना शुरू कर दिया। 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया गया पुणे पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान करीब 80 से 85 लोगों को हिरासत में लिया। हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट में 85 लोगों का उल्लेख है, जबकि द इंडियन एक्सप्रेस ने लगभग 80 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी है। शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाए गए प्रदर्शनकारी हिरासत में लिए गए लोगों को पुलिस वैन से शिवाजीनगर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। पुलिस उपायुक्त कृषिकेश रावले के अनुसार, आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने के बाद प्रदर्शनकारियों को उसी रात करीब 8 बजे रिहा कर दिया गया। लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई पुणे में CJP समर्थकों के खिलाफ यह लगातार दूसरे दिन पुलिस की कार्रवाई थी। इससे पहले शनिवार को शानिवारवाड़ा से पुणे कलेक्टर कार्यालय तक मार्च निकालने की कोशिश के दौरान भी 80 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने उस मार्च को भी अनुमति नहीं दी थी। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी जुटे, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर लश्कर पुलिस स्टेशन ले जाया गया और बाद में छोड़ दिया गया। गुड लक चौक के पास कुछ देर तनाव रविवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कुछ समय के लिए तनाव की स्थिति बनी। रिपोर्टों के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए पास के गुड लक होटल में भी चले गए, जिससे वहां कुछ समय के लिए गतिविधियां प्रभावित हुईं। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल CJP कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए इसे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार पर रोक बताया। संगठन से जुड़े हर्षल लोणकर ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने के कुछ ही समय बाद हिरासत में ले लिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि रिहाई के बाद कुछ समर्थकों ने फर्ग्यूसन कॉलेज के मुख्य द्वार तक मार्च किया। पुलिस ने एहतियाती कार्रवाई बताया पुणे पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद लोगों के एकत्र होने और यातायात तथा सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका के चलते कार्रवाई की गई। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों को आवश्यक प्रक्रिया के बाद रिहा कर दिया गया। इस कार्रवाई को लेकर पुलिस और आंदोलन से जुड़े लोगों के बीच मतभेद सामने आए हैं। CEC के इस्तीफे और SIR रोकने की मांग पुणे में प्रदर्शनकारियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया रोकने की मांग उठाई। आंदोलन से जुड़े समूहों ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल किए हैं। वहीं, चुनाव आयोग ने मतदाता सूची में हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग का कहना है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अधिक सटीक बनाना और उसमें मौजूद त्रुटियों को दूर करना है। मुंबई और पुणे में भी प्रदर्शन CEC और SIR के विरोध में महाराष्ट्र के मुंबई और पुणे समेत विभिन्न शहरों में प्रदर्शन हुए हैं। इन घटनाओं के बीच आंदोलन का दायरा दिल्ली से बाहर भी चर्चा में आया है। दिल्ली में हुए प्रदर्शनों और हिरासत की घटनाओं के बाद विभिन्न शहरों में आंदोलन जारी रहने से चुनावी सूची के पुनरीक्षण और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर बहस तेज हुई है। स्रोत: हिंदुस्तान टाइम्स, द इंडियन एक्सप्रेस, रॉयटर्स, द टाइम्स ऑफ इंडिया जय राष्ट्र न्यूज़

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Manchester City के Financial Rules Verdict के बाद Liverpool मुकाबले पर बढ़ा तनाव, Premier League की बड़ी Rivalry फिर चर्चा में

लिवरपूल: Manchester City के खिलाफ Premier League के वित्तीय नियमों के 100 से अधिक कथित उल्लंघनों पर आए फैसले के बाद फुटबॉल जगत की नजर अब 11 अक्टूबर 2026 को Anfield में होने वाले Liverpool और Manchester City के मुकाबले पर है। एक स्वतंत्र आयोग ने City को कई वित्तीय नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया है। हालांकि, क्लब ने इस फैसले को चुनौती देते हुए अपील की है और संभावित सजा पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है। इस विवाद के बीच Manchester City का अगला Premier League मुकाबला Liverpool के खिलाफ होना इस मैच को और अहम बना रहा है। पिछले कई वर्षों में दोनों क्लबों के बीच खिताब के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली है। अब मैदान पर होने वाली भिड़ंत के साथ वित्तीय नियमों और खेल की निष्पक्षता को लेकर बहस भी चर्चा में है। 100 से अधिक वित्तीय उल्लंघनों में दोषी पाया गया City स्वतंत्र आयोग ने Manchester City को 2009-10 से 2017-18 के बीच Premier League के वित्तीय नियमों के 100 से अधिक उल्लंघनों का दोषी पाया है। आयोग ने जांच के दौरान सहयोग से जुड़े एक अलग आरोप पर भी क्लब के खिलाफ निष्कर्ष दिया। हालांकि, Manchester City इन निष्कर्षों को स्वीकार नहीं करता और फैसले के खिलाफ अपील कर चुका है। इसलिए मामले का अंतिम परिणाम अपील प्रक्रिया और आगे होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगा। संभावित सजा पर अभी अंतिम फैसला नहीं Manchester City को दोषी ठहराए जाने के बाद संभावित कार्रवाई को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। पॉइंट्स में कटौती, आर्थिक जुर्माना और अन्य खेल संबंधी प्रतिबंध संभावित विकल्पों के तौर पर चर्चा में हैं। हालांकि, किसी भी संभावित सजा को अंतिम नहीं माना जा सकता, क्योंकि अपील की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। आगे आने वाला फैसला क्लब और Premier League की प्रतिस्पर्धा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। फैसले के बाद पहला लीग मुकाबला Liverpool से वित्तीय विवाद के बीच Manchester City का अगला Premier League मुकाबला Liverpool से होना खास महत्व रखता है। दोनों टीमें 11 अक्टूबर को Anfield में आमने-सामने होंगी। यह मुकाबला पहले से ही Premier League के प्रमुख मैचों में गिना जाता है। लेकिन वित्तीय फैसले और उसके बाद उठे सवालों ने इस बार मैच के इर्द-गिर्द चर्चा को और बढ़ा दिया है। Liverpool और Manchester City की प्रतिद्वंद्विता क्यों है खास? Pep Guardiola और Jurgen Klopp के दौर में Liverpool और Manchester City के बीच Premier League खिताब के लिए कई रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। दोनों टीमों ने कई सीजन में शानदार प्रदर्शन किया और अंक तालिका में बेहद कम अंतर से खिताब का फैसला हुआ। Liverpool ने कुछ सीजन में 90 से अधिक अंक हासिल किए, लेकिन इसके बावजूद खिताब की दौड़ में Manchester City से पीछे रह गया। इसी इतिहास के कारण मौजूदा वित्तीय विवाद के बाद पुराने सीजन और दोनों क्लबों की उपलब्धियां एक बार फिर चर्चा का विषय बन गई हैं। Guardiola के दौर में Liverpool ने दी कड़ी चुनौती Manchester City के मजबूत दौर में Liverpool उन टीमों में शामिल रहा जिसने उसे लगातार कड़ी टक्कर दी। दोनों क्लबों के बीच प्रतिस्पर्धा Premier League तक सीमित नहीं रही, बल्कि घरेलू कप प्रतियोगिताओं और यूरोपीय मुकाबलों में भी दोनों टीमें आमने-सामने आईं। यही वजह है कि दोनों क्लबों के बीच होने वाले मुकाबले को केवल तीन अंकों की लड़ाई के रूप में नहीं देखा जाता। प्रशंसकों के लिए यह मैच लंबे समय से चली आ रही प्रतिद्वंद्विता का भी प्रतीक है। Enzo Maresca ने क्लब का किया बचाव Manchester City के मैनेजर Enzo Maresca ने फैसले के बाद क्लब के नेतृत्व पर भरोसा जताया। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने City के पुराने खिताबों को विवादित मानने से इनकार किया और कहा कि खिलाड़ियों ने मैदान पर प्रदर्शन के दम पर उपलब्धियां हासिल कीं। क्लब की ओर से यह रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब वित्तीय नियमों के उल्लंघन से जुड़े निष्कर्षों के बाद उसकी उपलब्धियों पर बहस तेज हो गई है। Erling Haaland ने प्रशंसकों से एकजुट रहने की अपील की Manchester City के स्टार स्ट्राइकर Erling Haaland ने भी फैसले के बाद समर्थकों को संदेश दिया। उन्होंने प्रशंसकों से सकारात्मक बने रहने और क्लब के साथ एकजुटता बनाए रखने की अपील की। अपील और संभावित कार्रवाई पर अंतिम निर्णय आने तक क्लब के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी रह सकती है। ऐसे में टीम और उसके समर्थकों की नजर अब मैदान पर प्रदर्शन के साथ मामले की कानूनी प्रक्रिया पर भी रहेगी। Liverpool को Isak और Gakpo की चोट से झटका मुकाबले से पहले Liverpool को Alexander Isak और Cody Gakpo की चोटों के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों खिलाड़ी Manchester City के खिलाफ मुकाबले में उपलब्ध नहीं होंगे। इन खिलाड़ियों की अनुपस्थिति से Liverpool के आक्रमण के विकल्प प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में टीम को अपनी रणनीति और शुरुआती एकादश में बदलाव करने पड़ सकते हैं। Haaland मुकाबले के लिए उपलब्ध Manchester City के लिए राहत की बात यह है कि Erling Haaland के Anfield मुकाबले के लिए फिट होने की खबर है। उनकी मौजूदगी टीम के आक्रमण को मजबूती दे सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, मुकाबले से पहले City लीग में अपराजित थी और Liverpool से छह अंक आगे चल रही थी। ऐसे में यह मैच अंक तालिका के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। Anfield में तीखे माहौल की संभावना वित्तीय विवाद के बाद Anfield में Manchester City को प्रशंसकों की ओर से तीखी प्रतिक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। Liverpool और City के समर्थकों के बीच पहले से ही कड़ी प्रतिद्वंद्विता रही है। हालांकि, स्टेडियम का वास्तविक माहौल मैच के दौरान ही स्पष्ट होगा। इतना तय है कि वित्तीय नियमों से जुड़ा विवाद इस मुकाबले की चर्चा में अहम भूमिका निभाएगा। पुराने खिताबों और उपलब्धियों पर फिर बहस आयोग के फैसले के बाद Manchester City के पुराने खिताबों और उपलब्धियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस मामले में ट्रॉफियां वापस लेने या पुराने लीग परिणामों को बदलने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। क्लब की अपील का परिणाम आगे की…

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