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रांची में वेस्टइंडीज का ऐतिहासिक रनचेज, भारत को 6 विकेट से हराकर T20I सीरीज 1-1 से बराबर

रांची: वेस्टइंडीज ने रांची के JSCA इंटरनेशनल स्टेडियम कॉम्प्लेक्स में खेले गए दूसरे T20I मुकाबले में भारत को 6 विकेट से हराकर पांच मैचों की सीरीज 1-1 से बराबर कर दी। भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 5 विकेट पर 249 रन बनाए। जवाब में वेस्टइंडीज ने कप्तान शाई होप के नाबाद 102 रन और शेरफेन रदरफोर्ड के 84 रन की तूफानी पारियों की बदौलत 18.3 ओवर में 252 रन बनाकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। वेस्टइंडीज ने 250 रन का लक्ष्य 10 गेंद शेष रहते हासिल किया। यह पुरुष T20I क्रिकेट में टीम का अब तक का सबसे बड़ा सफल रनचेज रहा। भारत ने खड़ा किया 249 रन का विशाल स्कोर टॉस के बाद पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने आक्रामक अंदाज में रन बनाए। भारत ने निर्धारित 20 ओवर में 5 विकेट खोकर 249 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया। संजू सैमसन ने 41 गेंदों पर 82 रन की शानदार पारी खेली। ईशान किशन ने 43 रन बनाए, जबकि श्रेयस अय्यर ने 18 गेंदों पर 40 रन और तिलक वर्मा ने 18 गेंदों पर नाबाद 44 रन बनाकर टीम को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। संजू सैमसन की शानदार वापसी संजू सैमसन ने आक्रामक बल्लेबाजी करते हुए भारतीय पारी को गति दी। उनकी 82 रन की पारी ने भारत को बड़े स्कोर तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन को खास माना गया, क्योंकि हाल के दिनों में उनकी फॉर्म और प्लेइंग इलेवन में जगह को लेकर चर्चा हो रही थी। वेस्टइंडीज की शुरुआत बेहद खराब 250 रन के लक्ष्य का पीछा करने उतरी वेस्टइंडीज की शुरुआत अच्छी नहीं रही। भारतीय गेंदबाज मयंक यादव ने शुरुआती ओवर में काइल मेयर्स और शिमरोन हेटमायर को आउट कर टीम को शुरुआती झटके दिए। इसके बाद रोवमैन पॉवेल भी पवेलियन लौट गए। शुरुआती विकेट गिरने के कारण वेस्टइंडीज पर दबाव बढ़ गया, लेकिन कप्तान शाई होप और शेरफेन रदरफोर्ड ने शानदार साझेदारी कर मुकाबले का रुख बदल दिया। शाई होप ने खेली कप्तानी पारी मुश्किल परिस्थिति में कप्तान शाई होप ने जिम्मेदारी संभाली और भारतीय गेंदबाजों के खिलाफ आक्रामक बल्लेबाजी की। उन्होंने सिर्फ 45 गेंदों पर नाबाद 102 रन बनाए। उनकी पारी में 6 चौके और 9 छक्के शामिल रहे। होप ने अंत तक क्रीज पर टिके रहते हुए टीम को जीत तक पहुंचाया और इसी दौरान अपना शतक भी पूरा किया। उनकी पारी वेस्टइंडीज की ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी वजह बनी। शेरफेन रदरफोर्ड ने पलटा मैच शेरफेन रदरफोर्ड ने होप का बेहतरीन साथ दिया और भारतीय गेंदबाजी पर लगातार हमला बोला। उन्होंने 84 रन की विस्फोटक पारी खेली। दोनों बल्लेबाजों के बीच चौथे विकेट के लिए 120 रन की साझेदारी हुई, जिसने भारत की वापसी की उम्मीदों को कमजोर कर दिया। इस साझेदारी के दौरान वेस्टइंडीज ने तेजी से रन बनाते हुए लक्ष्य की ओर मजबूत कदम बढ़ाए। रदरफोर्ड का कैच छूटना भारत को पड़ा भारी रदरफोर्ड जब 38 रन पर बल्लेबाजी कर रहे थे, तब भारतीय टीम ने उनका कैच छोड़ दिया। इसके बाद उन्होंने अपनी पारी को और आक्रामक बनाया और वेस्टइंडीज की रन गति बनाए रखी। इतने बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय मिले इस मौके का रदरफोर्ड ने पूरा फायदा उठाया और भारत पर दबाव बढ़ा दिया। रोमारियो शेफर्ड ने जीत को पहुंचाया अंजाम तक रदरफोर्ड के आउट होने के बाद रोमारियो शेफर्ड ने तेज बल्लेबाजी करते हुए वेस्टइंडीज की जीत का रास्ता आसान किया। उन्होंने सिर्फ 13 गेंदों पर 34 रन बनाए। शेफर्ड की इस छोटी लेकिन प्रभावशाली पारी ने भारत की वापसी की संभावनाओं को लगभग खत्म कर दिया और वेस्टइंडीज को लक्ष्य के करीब पहुंचा दिया। 18.3 ओवर में हासिल किया 250 रन का लक्ष्य वेस्टइंडीज ने 18.3 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर 252 रन बनाकर मुकाबला 6 विकेट से जीत लिया। टीम ने 250 रन का लक्ष्य 10 गेंद शेष रहते हासिल कर लिया। भारत की ओर से बनाए गए 249 रन भी जीत के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुए, क्योंकि वेस्टइंडीज के बल्लेबाजों ने लक्ष्य का पीछा करते हुए लगातार आक्रामक रुख अपनाए रखा। वेस्टइंडीज का T20I क्रिकेट में सबसे बड़ा सफल रनचेज इस जीत के साथ वेस्टइंडीज ने पुरुष T20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अपना सबसे बड़ा सफल रनचेज दर्ज किया। यह टेस्ट खेलने वाले देशों के बीच पुरुष T20I इतिहास के सबसे बड़े सफल रनचेज में से एक भी रहा। टीम की इस उपलब्धि में होप और रदरफोर्ड की शानदार पारियों के साथ रोमारियो शेफर्ड के तेज योगदान की भी अहम भूमिका रही। ओस और बल्लेबाजी के अनुकूल पिच ने बढ़ाई गेंदबाजों की मुश्किल रांची में भारी ओस और बल्लेबाजी के अनुकूल पिच के कारण गेंदबाजों के लिए परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण रहीं। मुकाबले में दोनों टीमों की ओर से कुल 33 छक्के और 46 चौके लगाए गए। इन आंकड़ों से मैच में बल्लेबाजों के दबदबे का अंदाजा लगाया जा सकता है। ओस के कारण गेंद को नियंत्रित करना भी गेंदबाजों के लिए मुश्किल रहा। रोस्टन चेज की किफायती गेंदबाजी हाई-स्कोरिंग मुकाबले में वेस्टइंडीज के रोस्टन चेज ने प्रभावशाली गेंदबाजी की। उन्होंने 4 ओवर में सिर्फ 24 रन देकर 3 विकेट हासिल किए। उनकी गेंदबाजी ने भारतीय पारी के दौरान रन गति पर अंकुश लगाने में मदद की और वेस्टइंडीज को लक्ष्य का पीछा करने से पहले जरूरी राहत दिलाई। सीरीज 1-1 से बराबर सीरीज का पहला T20I भारत ने लखनऊ में 8 विकेट से जीता था। लेकिन रांची में वेस्टइंडीज की शानदार वापसी ने मुकाबले को बराबरी पर ला दिया। पांच मैचों की सीरीज अब 1-1 से बराबर है। ऐसे में अगले मुकाबले में दोनों टीमों की नजर बढ़त हासिल करने पर होगी। 11 अक्टूबर को इंदौर में तीसरा मुकाबला भारत और वेस्टइंडीज के बीच सीरीज का तीसरा T20I मुकाबला 11 अक्टूबर को इंदौर में खेला जाएगा। रांची में मिली जीत के बाद वेस्टइंडीज आत्मविश्वास के साथ मैदान पर उतरेगी, जबकि भारतीय टीम वापसी कर सीरीज में फिर बढ़त बनाने की कोशिश करेगी। स्रोत: रॉयटर्स / द इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

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रुपये को संभालने के लिए RBI का बड़ा कदम, सरकारी तेल कंपनियों के लिए स्पेशल डॉलर विंडो; फॉरेक्स सट्टेबाजी पर भी सख्ती

मुंबई: भारतीय रुपये पर लगातार बने दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने 10 अक्टूबर 2026 को कई अहम कदमों की घोषणा की है। केंद्रीय बैंक ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और भारत पेट्रोलियम की दैनिक डॉलर जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष डॉलर विंडो शुरू करने का फैसला किया है। इसके साथ ही रुपये से जुड़े विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव लेनदेन के नियम भी सख्त किए गए हैं, ताकि डॉलर की सट्टा मांग और जरूरत से ज्यादा हेजिंग पर अंकुश लगाया जा सके। 12 अक्टूबर से शुरू होगी स्पेशल डॉलर विंडो RBI की नई सुविधा 12 अक्टूबर से प्रभावी होगी। इसके तहत तीनों सरकारी तेल विपणन कंपनियों की दैनिक डॉलर जरूरत नामित बैंकों के माध्यम से सीधे केंद्रीय बैंक पूरी करेगा। यह व्यवस्था बाजार की परिस्थितियों के आधार पर अगले आदेश तक जारी रहेगी। इस कदम का उद्देश्य तेल कंपनियों की डॉलर खरीद के कारण स्पॉट फॉरेक्स बाजार पर पड़ने वाले अतिरिक्त दबाव को कम करना है। किन कंपनियों को मिलेगा फायदा? RBI की इस विशेष सुविधा का लाभ फिलहाल तीन सरकारी तेल कंपनियों को मिलेगा: इन कंपनियों को कच्चे तेल के आयात का भुगतान करने के लिए बड़ी मात्रा में अमेरिकी डॉलर की जरूरत होती है। डॉलर की मांग बढ़ने पर रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। स्पॉट फॉरेक्स बाजार पर कम हो सकता है दबाव आमतौर पर तेल कंपनियां अपनी डॉलर जरूरतों को विदेशी मुद्रा बाजार से पूरा करती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आने पर आयात बिल बढ़ता है और कंपनियों को अधिक डॉलर खरीदने पड़ते हैं। RBI की नई व्यवस्था से इन तीनों कंपनियों की डॉलर मांग का एक बड़ा हिस्सा सीधे केंद्रीय बैंक के जरिए पूरा होगा। इससे खुले बाजार में डॉलर की अतिरिक्त मांग कम करने और रुपये में उतार-चढ़ाव नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। डॉलर के मुकाबले रुपये पर क्यों बढ़ा दबाव? 2026 में अब तक भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 7 प्रतिशत से अधिक कमजोर हो चुका है। इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, वैश्विक बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी, विदेशी निवेशकों की निकासी और आयातकों की लगातार डॉलर मांग जैसे कारक बताए जा रहे हैं। हाल के दिनों में रुपया 97 रुपये प्रति डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब पहुंच गया था। इससे आयात की लागत और विदेशी मुद्रा बाजार में अस्थिरता को लेकर चिंताएं बढ़ीं। फॉरेक्स डेरिवेटिव के नियम भी सख्त रुपये को सहारा देने के लिए RBI ने विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव बाजार के नियमों में भी बदलाव किए हैं। इन कदमों में रद्द किए गए कॉन्ट्रैक्ट को दोबारा बुक करने पर प्रतिबंध और बिना वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम का प्रमाण दिए जाने वाले डेरिवेटिव सौदों की सीमा घटाना शामिल है। केंद्रीय बैंक का उद्देश्य वास्तविक कारोबारी जरूरतों के लिए हेजिंग की सुविधा बनाए रखते हुए सट्टेबाजी से पैदा होने वाले अतिरिक्त दबाव को सीमित करना है। 100 मिलियन डॉलर की सीमा घटाकर 5 मिलियन डॉलर रिपोर्टों के अनुसार, कंपनियां अब वास्तविक विदेशी मुद्रा जोखिम का प्रमाण दिए बिना अधिकतम 5 मिलियन डॉलर तक की फॉरेक्स डेरिवेटिव पोजिशन ले सकेंगी। पहले यह सीमा 100 मिलियन डॉलर थी। इस बदलाव से बिना अंतर्निहित कारोबारी जरूरत के बड़े डेरिवेटिव सौदे करना अधिक सीमित होगा। RBI को उम्मीद है कि इससे रुपये के खिलाफ सट्टा पोजिशन बनाने की गुंजाइश कम होगी। बड़े विदेशी मुद्रा सौदों पर 20 प्रतिशत रिजर्व की शर्त RBI ने कुछ बड़े विदेशी मुद्रा लेनदेन के लिए 20 प्रतिशत नकद रिजर्व की आवश्यकता भी लागू की है। इस कदम का उद्देश्य आक्रामक डॉलर खरीद और सट्टा कारोबार की लागत बढ़ाना है। हालांकि, इस प्रावधान का वास्तविक असर संबंधित नियमों के दायरे और बाजार में कारोबार करने वाली संस्थाओं की प्रतिक्रिया पर निर्भर करेगा। आयातकों की हेजिंग में तेज बढ़ोतरी रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में भारतीय आयातकों ने करीब 77 अरब डॉलर की हेजिंग की, जो एक साल पहले की तुलना में 80 प्रतिशत से अधिक थी। वहीं, निर्यातकों की हेजिंग लगभग 41 अरब डॉलर रही। आयातकों और निर्यातकों की हेजिंग में इस अंतर को विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर की मांग बढ़ने और रुपये पर दबाव के प्रमुख कारकों में से एक माना जा रहा है। कच्चे तेल की कीमतें बनीं बड़ी चिंता भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ने से देश का आयात बिल बढ़ जाता है और डॉलर की अधिक जरूरत पड़ती है। मध्य पूर्व में तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड की कीमत हाल में 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गई थी। महंगा तेल भारत के व्यापार संतुलन और रुपये, दोनों के लिए चुनौती पैदा कर सकता है। RBI पहले भी कर चुका है डॉलर बाजार में हस्तक्षेप रुपये को समर्थन देने के लिए RBI पिछले कुछ हफ्तों में स्पॉट डॉलर बिक्री और विदेशी मुद्रा स्वैप जैसे उपायों का इस्तेमाल करता रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, सितंबर में अपने उच्च स्तर से भारत का विदेशी मुद्रा भंडार करीब 50 अरब डॉलर घटकर 734.6 अरब डॉलर रह गया। विदेशी मुद्रा बाजार में केंद्रीय बैंक के हस्तक्षेप को इस गिरावट के संभावित कारणों में शामिल किया गया है। रेपो रेट में बढ़ोतरी के बाद भी दबाव बरकरार 7 अक्टूबर को RBI ने रेपो रेट में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया था। रिपोर्ट के मुताबिक, यह लगभग चार वर्षों में पहली दर वृद्धि थी। हालांकि, ब्याज दर बढ़ाने के बावजूद रुपये पर दबाव पूरी तरह कम नहीं हुआ। इसके बाद केंद्रीय बैंक ने डॉलर की मांग और विदेशी मुद्रा डेरिवेटिव गतिविधियों को सीधे प्रभावित करने वाले उपायों की घोषणा की। क्या अब मजबूत होगा रुपया? विश्लेषकों के मुताबिक, RBI के नए कदम निकट अवधि में डॉलर की मांग को नियंत्रित करने और रुपये में तेज उतार-चढ़ाव कम करने में मदद कर सकते हैं। सरकारी तेल कंपनियों की डॉलर जरूरतों को सीधे पूरा करने से स्पॉट बाजार पर दबाव भी घट सकता है। हालांकि, रुपये की दीर्घकालिक दिशा कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के प्रवाह, वैश्विक ब्याज दरों और भारत के व्यापार संतुलन जैसे कारकों पर निर्भर करेगी। इसलिए इन उपायों से रुपये में तत्काल और स्थायी मजबूती की…

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CJP Protest के चलते दिल्ली से जुड़ी 245 ट्रेनें रद्द, राजधानी-शताब्दी समेत कई प्रीमियम सेवाएं प्रभावित

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन और मध्य दिल्ली में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भारतीय रेलवे ने दिल्ली से शुरू होने या दिल्ली में समाप्त होने वाली कुल 245 ट्रेनों को रद्द कर दिया। इनमें 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। रद्द की गई सेवाओं में राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर जैसी प्रीमियम ट्रेनें भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, रेलवे ने यह फैसला दिल्ली के रेलवे स्टेशनों के आसपास संभावित भारी यातायात जाम और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए लिया। इस कदम से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों की यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं। 245 ट्रेनों की सेवाएं रद्द रेलवे के फैसले के तहत 10 अक्टूबर को कुल 245 ट्रेन सेवाएं रद्द की गईं। इनमें नई दिल्ली, पुरानी दिल्ली, हजरत निजामुद्दीन और दिल्ली के अन्य प्रमुख स्टेशनों से चलने वाली या यहां पहुंचने वाली ट्रेनें शामिल हैं। बड़े पैमाने पर सेवाएं रद्द होने से लंबी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों को भी वैकल्पिक इंतजाम करने पड़े। राजधानी, शताब्दी, तेजस और हमसफर भी प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने का असर केवल सामान्य यात्री सेवाओं तक सीमित नहीं रहा। कई राजधानी और शताब्दी एक्सप्रेस सेवाओं के साथ तेजस और हमसफर एक्सप्रेस भी प्रभावित हुईं। इन प्रीमियम ट्रेनों के रद्द होने से विभिन्न शहरों से दिल्ली आने और राजधानी से दूसरे शहरों की ओर जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। 75 मेल/एक्सप्रेस और 170 यात्री ट्रेनें रद्द रिपोर्ट के मुताबिक, रद्द की गई 245 ट्रेनों में 75 मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें तथा 170 यात्री ट्रेनें शामिल हैं। यह फैसला दिल्ली से जुड़े रेल परिचालन पर अस्थायी रूप से बड़े पैमाने पर असर डालने वाला कदम रहा। सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे तक की सेवाएं प्रभावित रेलवे की योजना के तहत 10 अक्टूबर को सुबह 4 बजे से दोपहर 2 बजे के बीच दिल्ली पहुंचने या दिल्ली से रवाना होने वाली कई ट्रेनें रद्द की गईं। इस अवधि में रेलवे स्टेशनों के आसपास भारी यातायात, भीड़ और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां पैदा होने की आशंका जताई गई थी। केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ ट्रेनें चालू रहीं हालांकि, सभी ट्रेन सेवाएं बंद नहीं की गईं। रिपोर्ट के अनुसार, केरल एक्सप्रेस जैसी कुछ चुनिंदा ट्रेनें निर्धारित योजना के तहत परिचालन में रहीं। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई कि वे यात्रा शुरू करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि जरूर करें, क्योंकि अलग-अलग सेवाओं पर अलग-अलग फैसले लागू किए गए थे। दो ट्रेनें रीशेड्यूल, नौ सेवाएं आंशिक रूप से प्रभावित ट्रेनों को रद्द करने के अलावा रेलवे ने कुछ सेवाओं के समय और संचालन में भी बदलाव किया। रिपोर्ट के अनुसार, दो ट्रेनों को रीशेड्यूल किया गया, जबकि नौ सेवाओं को उनके निर्धारित गंतव्य से पहले समाप्त करने या शुरुआती स्टेशन में बदलाव के साथ चलाने का निर्णय लिया गया। इन बदलावों के कारण संबंधित यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना में संशोधन करना पड़ा। कई राज्यों से दिल्ली आने वाले यात्रियों पर असर ट्रेनों के रद्द होने से उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों से दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों पर असर पड़ा। गुजरात के अहमदाबाद से दिल्ली आने वाली स्वर्ण जयंती राजधानी एक्सप्रेस भी प्रभावित सेवाओं में शामिल रही। रेलवे स्टेशनों के आसपास जाम की आशंका बनी वजह रिपोर्टों के मुताबिक, रेलवे ने ट्रेनों को रद्द करने के पीछे संभावित भारी सड़क यातायात और यात्रियों की आवाजाही में आने वाली दिक्कतों को प्रमुख कारण बताया। मध्य दिल्ली में बैरिकेडिंग, यातायात प्रतिबंध और बड़े पैमाने पर सुरक्षा बलों की तैनाती के चलते यात्रियों के लिए रेलवे स्टेशनों तक पहुंचना मुश्किल होने की आशंका थी। CJP ने ट्रेनें रद्द करने के फैसले पर उठाए सवाल CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने बड़े पैमाने पर ट्रेनें रद्द किए जाने की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कदम से प्रदर्शन में शामिल होने के इच्छुक लोगों की भागीदारी सीमित हो सकती है। हालांकि, यह CJP की ओर से लगाया गया आरोप है। रेलवे के फैसले को लेकर सामने आई रिपोर्टों में परिचालन संबंधी परिस्थितियों और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं का उल्लेख किया गया है। सुप्रीम कोर्ट में भी उठा परिवहन प्रतिबंधों का मुद्दा दिल्ली में लगाए गए प्रतिबंधों और परिवहन व्यवस्था पर उनके असर का मुद्दा सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार, अदालत ने सुरक्षा उपायों में आनुपातिकता बनाए रखने और आम लोगों को होने वाली असुविधा कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी असर रेलवे के अलावा दिल्ली मेट्रो और नमो भारत सेवाओं पर भी प्रतिबंधों का असर पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली मेट्रो के कुछ स्टेशनों पर प्रवेश और निकास संबंधी पाबंदियां लगाई गईं। इसके साथ ही सराय काले खां और न्यू अशोक नगर स्थित नमो भारत स्टेशनों को भी 10 अक्टूबर को बंद रखने का फैसला किया गया। यात्रियों को ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह ट्रेनों के रद्द होने, समय बदलने और कुछ सेवाओं के आंशिक रूप से संचालित होने के कारण यात्रियों को यात्रा से पहले अपनी ट्रेन का ताजा स्टेटस जांचने की सलाह दी गई है। यात्रियों को स्टेशन के लिए निकलने से पहले रेलवे की आधिकारिक जानकारी से अपनी ट्रेन की स्थिति की पुष्टि करनी चाहिए, ताकि अंतिम समय में होने वाली परेशानी से बचा जा सके। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / भारतीय रेलवे जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP Protest से पहले गृह मंत्रालय का अलर्ट, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय के निर्देश

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। मंत्रालय ने आशंका जताई है कि इस प्रदर्शन के “गंभीर कानून-व्यवस्था संबंधी प्रभाव” हो सकते हैं। केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को दिल्ली पुलिस के साथ रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने और किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए समन्वय मजबूत करने को कहा है। गृह मंत्रालय के अनुसार, प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP समर्थक अलग-अलग राज्यों से दिल्ली पहुंचने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसे में संभावित भीड़, यातायात बाधित होने और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। गृह सचिव ने राज्यों के पुलिस प्रमुखों को लिखा पत्र केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के पुलिस प्रमुखों को पत्र भेजकर CJP के प्रदर्शन से संबंधित खुफिया जानकारी तत्काल दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने को कहा है। साथ ही, किसी भी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकने के लिए आपसी समन्वय बढ़ाने पर जोर दिया गया है। गृह मंत्रालय ने जताई कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका मंत्रालय ने 10 अक्टूबर को प्रस्तावित प्रदर्शन के सार्वजनिक व्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई है। उपलब्ध खुफिया सूचनाओं का हवाला देते हुए कहा गया है कि बड़ी संख्या में समर्थक दिल्ली पहुंचने का प्रयास कर सकते हैं। इससे यातायात व्यवस्था प्रभावित होने, बिना अनुमति भीड़ जुटने और सार्वजनिक सुविधाओं पर अतिरिक्त दबाव पड़ने की आशंका जताई गई है। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति नहीं दिल्ली पुलिस ने CJP को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। रिपोर्टों के अनुसार, आयोजकों ने 7 अक्टूबर को प्रदर्शन के लिए अनुरोध किया था, जबकि निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित सभा से कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना आवश्यक बताया गया है। पुलिस ने पहले हुए प्रदर्शनों के दौरान कथित तौर पर शर्तों और आश्वासनों का उल्लंघन किए जाने को भी अनुमति नहीं देने के कारणों में शामिल किया है। राज्यों को समर्थकों की आवाजाही पर नजर रखने के निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से उन समूहों की आवाजाही पर नजर रखने को कहा है, जो प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली रवाना हो सकते हैं। अधिकारियों को आयोजकों, यात्रा योजनाओं, ठहरने की व्यवस्था और प्रदर्शन के लिए जुटाए जा रहे लोगों से संबंधित जानकारी दिल्ली पुलिस के साथ साझा करने के निर्देश दिए गए हैं। रियल-टाइम इंटेलिजेंस साझा करने पर जोर मंत्रालय के निर्देशों में तत्काल खुफिया जानकारी साझा करना प्रमुखता से शामिल है। यदि किसी राज्य से बड़ी संख्या में लोग दिल्ली के लिए रवाना होते हैं या प्रदर्शन से जुड़ी असामान्य गतिविधियां सामने आती हैं, तो इसकी जानकारी तुरंत दिल्ली पुलिस तक पहुंचाने को कहा गया है। इसका उद्देश्य संभावित भीड़ और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चुनौतियों के बारे में समय रहते जानकारी जुटाना और संबंधित एजेंसियों के बीच तालमेल बनाए रखना है। निवारक कार्रवाई करने के भी निर्देश गृह मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से मौजूदा कानूनी प्रावधानों के तहत आवश्यक निवारक कदम उठाने को कहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें नोटिस जारी करना, गतिविधियों की निगरानी करना और परिस्थितियों के अनुसार अन्य कानूनी कार्रवाई करना शामिल हो सकता है। 4 अक्टूबर की बैठक में भी हुई थी चर्चा द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, 4 अक्टूबर को गृह मंत्रालय की समन्वय बैठक में भी CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन और समर्थकों की लामबंदी को लेकर चर्चा हुई थी। रिपोर्ट में राज्यों को नोटिस देने, संभावित हिरासत और संगठन की फंडिंग से जुड़े पहलुओं की जांच जैसे मुद्दों पर चर्चा किए जाने का उल्लेख किया गया है। दिल्ली पुलिस ने तैयार किया व्यापक सुरक्षा प्लान प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए व्यापक योजना तैयार की है। रिपोर्टों के अनुसार, इसमें कई स्थानों पर नाकेबंदी, हिरासत केंद्रों की व्यवस्था और विभिन्न जिलों के बीच समन्वय बढ़ाने जैसे कदम शामिल हैं। नई दिल्ली जिले में बैरिकेडिंग और निगरानी व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसी संभावित भीड़ को नियंत्रित किया जा सके और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखी जा सके। नई दिल्ली में BNSS की धारा 163 लागू नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी रिपोर्ट है। इस प्रावधान के तहत सक्षम अधिकारी सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए परिस्थितियों के अनुसार सभाओं, जुलूसों और लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा सकते हैं। CJP की समर्थकों से शांति बनाए रखने की अपील दूसरी ओर, CJP ने अपने समर्थकों के लिए एडवाइजरी जारी कर शांतिपूर्ण व्यवहार करने की अपील की है। संगठन ने बैरिकेड तोड़ने, प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रवेश करने, हिंसा करने और सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से बचने को कहा है। अभिजीत दीपके समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका समेत कई नेताओं को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शन को रोकने के लिए राजधानी में व्यापक सुरक्षा तैनाती की गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया। सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन के अधिकार पर बहस गृह मंत्रालय और दिल्ली पुलिस का पक्ष है कि सुरक्षा संबंधी कदम सार्वजनिक व्यवस्था, यातायात और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए जा रहे हैं। वहीं, CJP और उसके समर्थक इन प्रतिबंधों को शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार पर अत्यधिक रोक के रूप में देख रहे हैं। यह मामला अब सार्वजनिक सुरक्षा और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार के बीच संतुलन को लेकर बहस का विषय बन गया है। संविधान का अनुच्छेद 19(1)(b) नागरिकों को शांतिपूर्वक और बिना हथियार एकत्र होने का अधिकार देता है, हालांकि सार्वजनिक व्यवस्था सहित संवैधानिक आधारों पर इस अधिकार पर उचित प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस / हिंदुस्तान टाइम्स / रॉयटर्स जय राष्ट्र न्यूज़

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CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में बड़ा सुरक्षा अभियान, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के विरोध में 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP प्रदर्शन से पहले दिल्ली में व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए गए। इस दौरान CJP के प्रमुख नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। वहीं, मध्य दिल्ली के कई इलाकों में मेट्रो सेवाओं तक पहुंच, यातायात और मोबाइल इंटरनेट पर भी प्रतिबंध लगाए गए। दिल्ली पहुंचते ही हिरासत में लिए गए CJP नेता रिपोर्टों के मुताबिक, अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली एयरपोर्ट पर विमान उतरने के बाद हिरासत में लिया गया। CJP नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली आए थे। इस कार्रवाई के बाद प्रस्तावित प्रदर्शन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई। कई अन्य प्रदर्शनकारी भी हिरासत में दिल्ली पुलिस ने CJP समर्थकों के अलावा अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। जंतर-मंतर और आसपास के क्षेत्रों में अनधिकृत जमावड़े को रोकने के लिए सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ाई गई थी। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से किया इनकार दिल्ली पुलिस ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए आवेदन निर्धारित 10 दिन की समयसीमा के बजाय केवल तीन दिन पहले दिया गया था। अधिकारियों ने पिछले प्रदर्शनों के दौरान कानून-व्यवस्था से जुड़ी कथित समस्याओं का भी हवाला दिया। इसके बाद प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस की कार्रवाई को लेकर सवाल उठे। 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद सुरक्षा संबंधी निर्देशों के बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) ने 45 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार बंद करने की घोषणा की थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 9 बजे से 10 अक्टूबर शाम 6 बजे तक लागू रखने की जानकारी दी गई थी। हालांकि, प्रभावित स्टेशनों में से अधिकांश पर इंटरचेंज की सुविधा जारी रहने की बात कही गई। इन प्रतिबंधों का उद्देश्य संवेदनशील इलाकों में लोगों की आवाजाही नियंत्रित करना बताया गया। पहले 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध की योजना शुरुआत में 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध लगाने की योजना सामने आई थी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में इस व्यवस्था को चुनौती दी गई और व्यापक परिवहन प्रतिबंधों को लेकर चिंता जताई गई। रिपोर्टों के अनुसार, बाद में प्रतिबंधित स्टेशनों की संख्या घटाकर 45 कर दी गई। इस घटनाक्रम ने सुरक्षा व्यवस्था और आम यात्रियों की सुविधा के बीच संतुलन का सवाल खड़ा किया। मध्य दिल्ली में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित प्रदर्शन से पहले जनपथ-कर्तव्य पथ चौराहे के आसपास करीब चार किलोमीटर के दायरे में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं 24 घंटे के लिए निलंबित किए जाने की जानकारी सामने आई थी। यह प्रतिबंध 9 अक्टूबर रात 10 बजे से 10 अक्टूबर रात 10 बजे तक लागू रखने की घोषणा की गई थी। अधिकारियों ने इस कदम को सार्वजनिक सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं के संदर्भ में बताया। मध्य दिल्ली में यातायात पर भी प्रतिबंध दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने मध्य दिल्ली के करीब 30 स्थानों पर यातायात डायवर्जन और आवाजाही संबंधी प्रतिबंधों की व्यवस्था की थी। धौला कुआं से मंडी हाउस तक कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त जांच और बैरिकेडिंग की गई। यात्रियों को संभावित जाम और असुविधा को देखते हुए गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह भी दी गई थी। हजारों सुरक्षाकर्मी किए गए तैनात जंतर-मंतर, संसद मार्ग और निर्वाचन आयोग के मुख्यालय के आसपास पुलिस तथा अर्धसैनिक बलों की व्यापक तैनाती की गई। मीडिया रिपोर्टों में सुरक्षा बलों की संख्या करीब 25,000 तक बताई गई। नई दिल्ली जिले को अलग-अलग सुरक्षा क्षेत्रों में बांटकर निगरानी और आवाजाही नियंत्रण की व्यवस्था की गई थी। BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध संवेदनशील इलाकों में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू किए जाने की भी खबरें सामने आईं। इस प्रावधान के तहत निर्धारित परिस्थितियों में सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जा सकते हैं। इन आदेशों का उल्लंघन करने पर लागू कानून के अनुसार कार्रवाई हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापक प्रतिबंधों पर जताई चिंता सुप्रीम कोर्ट में मेट्रो और रेल सेवाओं पर व्यापक प्रतिबंध लगाने के मुद्दे पर सुनवाई के दौरान चिंता जताई गई। अदालत ने सुरक्षा संबंधी जरूरतों और आम लोगों की आवाजाही के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। सुनवाई में यह सवाल भी उठा कि संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए परिवहन सेवाओं को बड़े पैमाने पर प्रभावित करना कितना आवश्यक और आनुपातिक है। CJP की प्रमुख मांग क्या है? CJP मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया को लेकर विरोध कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए गए, जिससे चुनावी निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है। वहीं, निर्वाचन आयोग और भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव और उसकी प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक विवाद जारी है। अभिजीत दीपके ने आंदोलन जारी रखने की बात कही रिपोर्टों के मुताबिक, हिरासत से पहले अभिजीत दीपके ने कहा था कि प्रतिबंधों और गिरफ्तारियों के बावजूद आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अपील भी की थी। CJP के नेताओं का रुख है कि मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े सवालों को सार्वजनिक रूप से उठाया जाना चाहिए। सुरक्षा कार्रवाई पर नागरिक अधिकारों की बहस तेज CJP प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए जाने, मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध, मोबाइल इंटरनेट सेवाओं के निलंबन और व्यापक सुरक्षा तैनाती ने शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशासन इन कदमों को सुरक्षा संबंधी एहतियाती कार्रवाई के रूप में देख रहा है, जबकि CJP और उसके समर्थक इन्हें लोकतांत्रिक असहमति पर जरूरत से ज्यादा प्रतिबंध बता रहे हैं। इस विवाद में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम…

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चुनावी खर्च का खुलासा: 5 राज्यों में कांग्रेस ने खर्च किए ₹136.94 करोड़, उम्मीदवारों पर गया सबसे ज्यादा पैसा

नई दिल्ली: पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस के चुनावी खर्च को लेकर अहम आंकड़े सामने आए हैं। चुनाव आयोग (Election Commission of India) को सौंपी गई खर्च संबंधी रिपोर्ट के मुताबिक, असम, तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल और पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इस राशि का सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित खर्च पर गया, जबकि स्टार प्रचारकों की यात्राओं और मीडिया विज्ञापनों पर भी करोड़ों रुपये खर्च किए गए। पांच राज्यों में ₹136.94 करोड़ का कुल खर्च चुनाव आयोग को सौंपे गए व्यय विवरण के अनुसार, कांग्रेस ने पांच राज्यों और केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के विधानसभा चुनावों के दौरान कुल ₹136.94 करोड़ खर्च किए। इसमें पार्टी के केंद्रीय संगठन और उम्मीदवारों से संबंधित विभिन्न चुनावी मदों का खर्च शामिल है। रिपोर्ट से पता चलता है कि पार्टी ने अपने संसाधनों का बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर लगाया। उम्मीदवारों पर खर्च हुए ₹96.42 करोड़ कांग्रेस के कुल चुनावी खर्च में सबसे बड़ा हिस्सा उम्मीदवारों से संबंधित मद का रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में पार्टी ने ₹96.42 करोड़ खर्च किए। इसमें से करीब ₹95.29 करोड़ उम्मीदवारों को एकमुश्त भुगतान के रूप में दिए गए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि चुनाव के दौरान उम्मीदवारों की जरूरतों और उनके प्रचार से जुड़े खर्चों के लिए पार्टी ने बड़ी राशि आवंटित की। सामान्य प्रचार पर ₹40.51 करोड़ खर्च पार्टी ने सामान्य चुनाव प्रचार पर करीब ₹40.51 करोड़ खर्च किए। इस श्रेणी में विज्ञापन, स्टार प्रचारकों की यात्राओं और अन्य प्रचार गतिविधियों से संबंधित खर्च शामिल थे। चुनाव के दौरान मतदाताओं तक पहुंचने और पार्टी का संदेश प्रसारित करने के लिए इन गतिविधियों पर संसाधन लगाए गए। स्टार प्रचारकों की यात्राओं पर ₹21.78 करोड़ कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारकों की यात्रा पर लगभग ₹21.78 करोड़ खर्च किए। चुनावी सभाओं, जनसंपर्क कार्यक्रमों और प्रचार अभियानों में पार्टी के प्रमुख नेताओं की भागीदारी के लिए यात्रा खर्च एक महत्वपूर्ण मद रहा। मीडिया विज्ञापनों पर करीब ₹11.95 करोड़ मीडिया प्रचार पर भी पार्टी ने बड़ी राशि खर्च की। रिपोर्ट के अनुसार, अखबारों, टेलीविजन, डिजिटल माध्यमों और अन्य विज्ञापन गतिविधियों से जुड़े खर्च पर करीब ₹11.95 करोड़ लगाए गए। मीडिया विज्ञापन चुनावी अभियान के दौरान पार्टी की नीतियों, उम्मीदवारों और राजनीतिक संदेशों को मतदाताओं तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम रहे। रैलियों और जनसभाओं पर ₹1.23 करोड़ रिपोर्ट में सार्वजनिक सभाओं, जुलूसों और रैलियों पर करीब ₹1.23 करोड़ खर्च दर्ज किया गया। यह राशि पार्टी के अन्य प्रमुख प्रचार खर्चों की तुलना में कम रही। हालांकि, चुनावी गतिविधियों के अलग-अलग मदों में खर्च का वर्गीकरण पार्टी की ओर से दाखिल विवरण पर आधारित है। वर्चुअल प्रचार पर भी खर्च कांग्रेस ने उम्मीदवारों के लिए वर्चुअल प्रचार गतिविधियों पर भी पैसा खर्च किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस मद में करीब ₹1.13 करोड़ का खर्च दर्ज किया गया। डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रचार करना भी चुनावी अभियानों का हिस्सा रहा। राज्य इकाइयों को हस्तांतरित किए गए ₹83.2 करोड़ रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के केंद्रीय संगठन ने विभिन्न राज्य इकाइयों को कुल ₹83.2 करोड़ हस्तांतरित किए। यह राशि चुनाव संबंधी गतिविधियों और संगठनात्मक जरूरतों के लिए दी गई थी। राज्य इकाइयों के खर्च में चुनावी क्षेत्र की परिस्थितियों, उम्मीदवारों की जरूरतों और स्थानीय प्रचार गतिविधियों के अनुसार अंतर दिखाई दिया। केरल कांग्रेस इकाई का खर्च सबसे ज्यादा राज्य इकाइयों के खर्च के आंकड़ों में केरल सबसे ऊपर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित राज्य इकाइयों का कुल खर्च ₹102.48 करोड़ दर्ज किया गया, जिसमें केरल कांग्रेस इकाई ने करीब ₹59.28 करोड़ खर्च किए। यह पांच राज्यों और पुडुचेरी के चुनावी अभियानों में केरल इकाई के खर्च का बड़ा हिस्सा होने को दर्शाता है। असम, तमिलनाडु, बंगाल और पुडुचेरी का खर्च रिपोर्ट में अन्य राज्य इकाइयों के खर्च का विवरण भी दिया गया है। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि विभिन्न राज्यों में कांग्रेस इकाइयों का चुनावी खर्च अलग-अलग रहा। चुनावी चक्र के अंत में ₹85.48 करोड़ का बैलेंस रिपोर्ट के अनुसार, संबंधित चुनावी चक्र के अंत में कांग्रेस के पास करीब ₹85.48 करोड़ का बैलेंस बचा था। यह आंकड़ा पार्टी की ओर से चुनाव आयोग को प्रस्तुत किए गए व्यय विवरण में दर्ज किया गया था। BJP के खर्च से तुलना उस समय संभव नहीं थी रिपोर्ट प्रकाशित होने के समय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर भाजपा का तुलनीय चुनावी व्यय विवरण उपलब्ध नहीं था। इसलिए उस समय दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के खर्च की सीधी तुलना करना संभव नहीं था। किसी भी तुलना के लिए दोनों दलों के समान अवधि, समान चुनावों और समान खर्च श्रेणियों के आंकड़ों का उपलब्ध होना जरूरी है। चुनावी खर्च में पारदर्शिता क्यों जरूरी? राजनीतिक दलों को चुनाव के बाद निर्धारित नियमों के तहत अपने चुनावी खर्च का विवरण चुनाव आयोग को देना होता है। ऐसे विवरणों से यह समझने में मदद मिलती है कि पार्टियां उम्मीदवारों, विज्ञापनों, नेताओं की यात्राओं और संगठनात्मक गतिविधियों पर अपने संसाधन किस तरह खर्च करती हैं। कांग्रेस के ₹136.94 करोड़ के खर्च का यह विवरण चुनावी अभियानों में उम्मीदवारों और प्रचार गतिविधियों पर होने वाले खर्च की तस्वीर पेश करता है। अन्य दलों के तुलनीय आंकड़े उपलब्ध होने पर चुनावी खर्च के विभिन्न पहलुओं का बेहतर आकलन किया जा सकता है। स्रोत: The Indian Express / Election Commission of India जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था पर प्रशांत भूषण के सवाल, बोले—पूरी दिल्ली को बंद नहीं किया जा सकता

नई दिल्ली: 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली में सुरक्षा प्रतिबंधों को लेकर वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सवाल उठाए। सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान उन्होंने अन्य वकीलों के साथ मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेनों को रद्द करने और शहर में व्यापक बैरिकेडिंग किए जाने पर आपत्ति जताई। उनका तर्क था कि कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर पूरे शहर की आवाजाही को प्रभावित करना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट में उठा दिल्ली की आवाजाही पर प्रतिबंधों का मुद्दा 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में 10 अक्टूबर के प्रदर्शन से पहले लगाए गए प्रतिबंधों को चुनौती देने वाली याचिकाओं का मुद्दा उठाया गया। कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और प्रशांत भूषण समेत कई वकीलों ने मेट्रो स्टेशनों को बंद करने, ट्रेन सेवाओं को प्रभावित करने और व्यापक बैरिकेडिंग को लेकर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सुरक्षा व्यवस्था के नाम पर लगाए गए प्रतिबंधों का असर केवल प्रदर्शनकारियों पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों पर भी पड़ सकता है। प्रशांत भूषण ने पूछा—पूरी दिल्ली को बंद क्यों किया जा रहा है? प्रशांत भूषण ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के लिए लक्षित और सीमित कदम उठाए जाने चाहिए। उनका तर्क था कि किसी एक स्थान पर प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही प्रभावित करना जरूरत से ज्यादा सख्त कदम हो सकता है। उन्होंने सुरक्षा संबंधी चिंताओं और नागरिकों की सामान्य आवाजाही के अधिकार के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। 57 मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध को लेकर चिंता सुनवाई के दौरान बताया गया कि अधिकारियों ने 57 दिल्ली मेट्रो स्टेशनों पर प्रतिबंध या बंदी की योजना बनाई थी। इस व्यवस्था को लेकर याचिकाकर्ताओं ने चिंता जताई। उनका कहना था कि ऐसे प्रतिबंधों से छात्रों, कर्मचारियों, कारोबारियों और रोजाना मेट्रो से यात्रा करने वाले यात्रियों को परेशानी हो सकती है। याचिकाकर्ताओं ने सवाल उठाया कि सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या इतने व्यापक प्रतिबंध जरूरी थे। दिल्ली आने वाली ट्रेनों पर भी उठे सवाल प्रदर्शन से पहले कुछ दिल्ली आने वाली ट्रेनों को रद्द करने या उनके समय में बदलाव किए जाने का मुद्दा भी अदालत के सामने रखा गया। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि किसी प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए अंतरशहरी परिवहन सेवाओं को बड़े स्तर पर प्रभावित करने से आम यात्रियों को अनावश्यक परेशानी हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर जताई चिंता सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने आवाजाही पर व्यापक प्रतिबंध लगाने को लेकर चिंता जताई। अदालत की टिप्पणियों में आवाजाही पूरी तरह रोकने और उसे नियंत्रित करने के बीच अंतर पर जोर दिया गया। अदालत ने अधिकारियों को ऐसा समाधान तलाशने की आवश्यकता बताई, जिससे सुरक्षा व्यवस्था भी बनी रहे और आम जनता को कम से कम असुविधा हो। सुरक्षा के नाम पर अत्यधिक प्रतिबंधों पर सवाल सुनवाई के दौरान प्रतिबंधों की आनुपातिकता का मुद्दा प्रमुखता से उठा। अदालत ने संकेत दिया कि किसी संभावित गड़बड़ी से निपटने के लिए उठाए जाने वाले कदम परिस्थिति के अनुरूप होने चाहिए। मेट्रो और ट्रेन सेवाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के बजाय नियंत्रित आवाजाही की संभावनाओं पर विचार करने का मुद्दा भी सामने आया। प्रदर्शन के मद्देनजर 20 हजार से अधिक सुरक्षाकर्मियों की तैनाती 10 अक्टूबर के प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मध्य दिल्ली समेत कई इलाकों में 20 हजार से अधिक पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान तैनात किए गए। कुछ रिपोर्टों में तैनाती की संख्या लगभग 23 हजार से 25 हजार तक बताई गई। प्रशासन का उद्देश्य संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बनाए रखना था। सैकड़ों बसें और बॉडी कैमरे भी सुरक्षा योजना में शामिल रिपोर्टों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने संभावित हिरासत की स्थिति से निपटने के लिए सैकड़ों बसों की व्यवस्था की थी। पुलिसकर्मियों के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों के इस्तेमाल की योजना भी सुरक्षा प्रबंधों का हिस्सा थी। इसके अलावा, शहर के विभिन्न इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था को अलग-अलग क्षेत्रों में बांटकर वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी में तैनाती की गई। प्रशांत भूषण पहले भी प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए थे 3 अक्टूबर को मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हुए प्रदर्शन के दौरान प्रशांत भूषण भी हिरासत में लिए गए लोगों में शामिल थे। रिपोर्टों के अनुसार, उनके साथ योगेंद्र यादव, नेहा बोरा और अन्य प्रदर्शनकारियों को भी हिरासत में लिया गया था। इस घटनाक्रम के बाद प्रदर्शनकारियों की आवाजाही और पुलिस की कार्रवाई को लेकर बहस तेज हुई थी। शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार और कानून-व्यवस्था इस मामले में प्रमुख सवाल शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी के बीच संतुलन का है। एक ओर प्रशासन को संभावित गड़बड़ी रोकने और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभानी होती है। दूसरी ओर, शांतिपूर्ण विरोध और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के महत्वपूर्ण अधिकार हैं। ऐसे मामलों में प्रतिबंधों की आवश्यकता, उनका दायरा और आम नागरिकों पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार करना जरूरी होता है। व्यापक प्रतिबंधों के बजाय नियंत्रित आवाजाही पर जोर सुप्रीम कोर्ट में उठाए गए मुद्दों ने इस बहस को केंद्र में ला दिया कि सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान आवश्यक सेवाओं और सार्वजनिक परिवहन को पूरी तरह बाधित किए बिना कैसे किया जा सकता है। प्रशांत भूषण और अन्य वकीलों ने प्रतिबंधों की व्यापकता पर सवाल उठाए, जबकि अधिकारियों की ओर से सुरक्षा व्यवस्था को संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति से निपटने के उपाय के रूप में देखा गया। नागरिक स्वतंत्रता को लेकर बढ़ी बहस जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले लगाए गए सुरक्षा प्रतिबंधों ने नागरिक स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण विरोध और सार्वजनिक सुरक्षा के बीच संतुलन पर बहस तेज कर दी है। प्रशांत भूषण का मुख्य सवाल यही रहा कि किसी निर्धारित स्थान पर होने वाले प्रदर्शन की आशंका के कारण पूरे शहर की आवाजाही को किस हद तक प्रभावित किया जाना चाहिए। इस मामले ने सुरक्षा उपायों की आवश्यकता के साथ-साथ उनके दायरे और आम लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव की समीक्षा को भी महत्वपूर्ण बना दिया है। स्रोत: The Indian Express / Supreme Court proceedings /…

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अमित शाह के अलवर दौरे पर टीकाराम जूली का निशाना, भीड़ जुटाने को लेकर BJP पर लगाए आरोप

अलवर: राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के अलवर दौरे को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर निशाना साधा। जूली ने आरोप लगाया कि सरकार जनसभा में बड़ी भीड़ जुटाने और राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन पर ध्यान दे रही है, जबकि अलवर में सड़क, सफाई, रोजगार और प्रशासन से जुड़ी समस्याएं अब भी बनी हुई हैं। अमित शाह के दौरे को लेकर की गईं व्यापक तैयारियां अमित शाह के अलवर दौरे को लेकर प्रशासन और BJP संगठन की ओर से व्यापक तैयारियां की गई थीं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और पुलिस बल तैनात किया गया था। टीकाराम जूली ने भीड़ जुटाने पर उठाए सवाल टीकाराम जूली ने आरोप लगाया कि BJP अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने के लिए जनसभा में अधिक से अधिक लोगों की मौजूदगी सुनिश्चित करने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि किसी सभा में उमड़ने वाली भीड़ से जनता की समस्याओं का समाधान नहीं होता। उनके मुताबिक, सरकार को राजनीतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर लोगों की परेशानियों पर भी ध्यान देना चाहिए। अलवर की बुनियादी समस्याओं को लेकर सरकार पर हमला जूली ने अलवर की नागरिक सुविधाओं और बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दों को भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि शहर में सड़क, सफाई और नगर प्रशासन से संबंधित कई समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं। विपक्ष का कहना है कि सरकार को इन मुद्दों के समाधान के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, ताकि लोगों को रोजमर्रा की परेशानियों से राहत मिल सके। सफाई कर्मचारियों की नियुक्ति का मुद्दा भी चर्चा में अमित शाह के दौरे से कुछ दिन पहले अलवर में सफाई कर्मचारियों की नियुक्तियों को लेकर विवाद सामने आया था। इस मुद्दे पर राजस्थान के मंत्री संजय शर्मा भी सफाई कर्मचारियों के समर्थन में धरने पर बैठे थे। इस घटनाक्रम को लेकर कांग्रेस ने BJP सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे। विपक्ष ने इसे प्रशासनिक समन्वय से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाब मांगा। कांग्रेस ने मंत्री के धरने को लेकर भी घेरा कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि जब सत्तारूढ़ दल के मंत्री को अपनी मांगों के समर्थन में धरने पर बैठना पड़े, तो प्रशासनिक व्यवस्था और सरकार के भीतर समन्वय की स्थिति पर चर्चा होना स्वाभाविक है। हालांकि, यह विपक्ष की राजनीतिक प्रतिक्रिया थी और इसे प्रशासनिक विफलता का स्वतंत्र प्रमाण नहीं माना जा सकता। कांग्रेस नेताओं और छात्रों को हिरासत में लेने का मामला अमित शाह के दौरे से पहले कुछ कांग्रेस नेताओं और छात्रों को पुलिस ने हिरासत में लिया था। इस कार्रवाई को लेकर कांग्रेस और पुलिस के दावों में अंतर सामने आया। कांग्रेस ने दावा किया कि करीब दो दर्जन लोगों को हिरासत में लिया गया, जबकि पुलिस की ओर से बताई गई संख्या इससे कम थी। विरोध प्रदर्शन रोकने के आरोप कांग्रेस ने आरोप लगाया कि उसके कार्यकर्ताओं को संभावित विरोध प्रदर्शन से पहले ही रोक दिया गया। वहीं, पुलिस ने कार्रवाई को कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उठाया गया एहतियाती कदम बताया। इस मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आए। ऐसे में कार्रवाई के कारणों और परिस्थितियों को समझने के लिए आधिकारिक जानकारी और उपलब्ध तथ्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। जूली ने जनता से सीधे संवाद की उठाई मांग टीकाराम जूली ने मांग की कि अमित शाह को केवल पार्टी नेताओं और अधिकारियों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर स्थिति का आकलन नहीं करना चाहिए। उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व से जनता के बीच जाकर अलवर की वास्तविक समस्याओं को समझने की अपील की। उनका कहना था कि स्थानीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता होनी चाहिए और जनता को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज अमित शाह का अलवर दौरा BJP के संगठनात्मक संपर्क और राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण था। दूसरी ओर, कांग्रेस ने इस अवसर पर स्थानीय प्रशासन, नागरिक सुविधाओं और सफाई कर्मचारियों से जुड़े मुद्दों को उठाया। इस घटनाक्रम के बाद दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई। जहां BJP का कार्यक्रम संगठनात्मक गतिविधियों पर केंद्रित था, वहीं विपक्ष ने स्थानीय समस्याओं और सरकारी कामकाज को लेकर सवाल उठाए। भीड़ जुटाने के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं टीकाराम जूली की ओर से भीड़ जुटाने को लेकर लगाए गए आरोप राजनीतिक दावों की श्रेणी में आते हैं। उपलब्ध जानकारी में ऐसा कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है, जिससे यह साबित हो कि लोगों को अवैध या जबरन तरीके से जनसभा में शामिल कराया गया था। फिलहाल, अलवर दौरे को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच स्थानीय समस्याओं, सफाई कर्मचारियों के मुद्दे और पुलिस की कार्रवाई चर्चा के प्रमुख विषय बने हुए हैं। स्रोत: The Indian Express / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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चंदौली में 200 साल पुराने काली मंदिर को तोड़ते समय हादसा, गुंबद गिरने से मजदूर की मौत

चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 200 साल पुराने काली मंदिर को ध्वस्त करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का भारी गुंबद अचानक गिरने से मलबे में दबकर 45 वर्षीय मजदूर बलदेव यादव की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मंदिर को हटाने का काम लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना के तहत एक निजी ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था। सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा था मंदिर यह मंदिर जीटी रोड के चौड़ीकरण परियोजना के निर्धारित मार्ग में आ रहा था। सड़क विस्तार का काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। इसी परियोजना के तहत पुराने मंदिर को हटाने का निर्णय लिया गया था। अचानक गिरा मंदिर का गुंबद मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान बुलडोजर की मदद से संरचना का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा था। इसी बीच मंदिर का ऊपरी गुंबद अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से दो लोग मलबे में दब गए। बलदेव यादव की मौत, एक अन्य व्यक्ति घायल हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान 45 वर्षीय बलदेव यादव के रूप में हुई। बताया गया कि वह ध्वस्तीकरण के दौरान गाइड रोप संभाल रहे थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, घटना में घायल हुए दूसरे व्यक्ति को भी बचाव दल ने मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। मंदिर को पहले ही किया गया था स्थानांतरित प्रशासन के अनुसार, पुराने मंदिर को हटाने से पहले पास में नया मंदिर बनाया गया था। पुरानी संरचना से मूर्तियों को नए मंदिर में स्थानांतरित करने के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद मंदिर समिति की सहमति से पुराने मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रशासन और पुलिस को नहीं दी गई थी पूर्व सूचना जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हादसे के बाद यह पहलू भी जांच के दायरे में आया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद ध्वस्तीकरण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 फीट ऊंचे मंदिर के आसपास लगभग 20 फीट तक ही बैरिकेडिंग की गई थी। मजदूरों के हेलमेट और सुरक्षा जैकेट जैसे जरूरी उपकरण नहीं पहनने की बात भी सामने आई। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की संरचना को चरणबद्ध तरीके से तोड़ने की योजना थी। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार ने मशीनरी की मदद से संरचना को एक साथ गिराने की कोशिश की, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। DM ने PWD अधिकारियों को किया तलब हादसे के बाद चंदौली के जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब कर घटना की वजह और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। घटना के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण का काम भी रोक दिया गया। मृतक PWD का नियमित कर्मचारी नहीं था कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बलदेव यादव को PWD कर्मचारी बताया गया, लेकिन विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार वह विभाग के निजी ठेकेदार के साथ काम कर रहे मजदूर थे। इसलिए उन्हें PWD का नियमित कर्मचारी बताने के बजाय विभाग की परियोजना में कार्यरत मजदूर कहना अधिक सटीक है। सड़क परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा पर फिर सवाल इस हादसे ने सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा, पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। पुराने और ऊंचे भवनों या धार्मिक संरचनाओं को गिराते समय नियंत्रित ध्वस्तीकरण प्रक्रिया, प्रशिक्षित कर्मचारियों और उचित सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्रोत: The Indian Express / Dainik Jagran / Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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एलन मस्क का बड़ा आरोप: भारत में Starlink की एंट्री में कौन डाल रहा है अड़ंगा? सरकार ने दिया जवाब

नई दिल्ली: SpaceX और Tesla के CEO एलन मस्क ने भारत में Starlink की कमर्शियल लॉन्चिंग में देरी को लेकर सवाल उठाए हैं। मस्क ने सोशल मीडिया पर कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूहों पर Starlink की एंट्री में बाधा डालने का आरोप लगाया। बाद में उन्होंने Reliance Industries के चेयरमैन मुकेश अंबानी की ओर भी संकेत किया। हालांकि, मस्क ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सार्वजनिक सबूत पेश नहीं किया है। दूसरी ओर, भारत सरकार ने पक्षपात के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि Starlink सहित सभी सैटेलाइट कम्युनिकेशन कंपनियों के लिए नियामकीय प्रक्रिया समान है। सरकार के मुताबिक, कमर्शियल सेवाएं शुरू करने से पहले जरूरी सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम से जुड़ी प्रक्रियाएं पूरी करना अनिवार्य है। मस्क ने किस पर लगाए आरोप? एलन मस्क ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि कुछ प्रभावशाली कारोबारी समूह भारत में Starlink की लॉन्चिंग में बाधा डाल रहे हैं। उनके मुताबिक, ऐसा करने के पीछे टेलीकॉम बाजार में अपनी मजबूत स्थिति बनाए रखने की मंशा हो सकती है। शुरुआत में मस्क ने किसी कारोबारी का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिया, लेकिन बाद की पोस्ट में मुकेश अंबानी को लेकर उनकी टिप्पणियों से विवाद बढ़ गया। फिलहाल, इन आरोपों की पुष्टि करने वाला कोई सार्वजनिक ठोस सबूत सामने नहीं आया है। मुकेश अंबानी का नाम क्यों आया? Reliance Jio भारत की प्रमुख टेलीकॉम कंपनियों में से एक है। कंपनी सैटेलाइट ब्रॉडबैंड क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाने की तैयारी कर रही है। इसी वजह से मस्क की टिप्पणियों को Reliance और दूसरे बड़े टेलीकॉम खिलाड़ियों के साथ प्रतिस्पर्धा के संदर्भ में देखा जा रहा है। हालांकि, किसी कंपनी की बाजार में मौजूदगी या प्रतिस्पर्धी हित अपने आप में यह साबित नहीं करते कि उसने Starlink की मंजूरी प्रक्रिया को प्रभावित किया है। सरकार ने आरोपों को किया खारिज केंद्रीय दूरसंचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि भारत किसी भी क्षेत्र में एकाधिकार को बढ़ावा नहीं देता। सरकार का कहना है कि सैटेलाइट इंटरनेट सेवाएं शुरू करने के लिए सभी ऑपरेटरों को निर्धारित नियमों का पालन करना होगा। सुरक्षा मंजूरी, स्पेक्ट्रम आवंटन और अन्य नियामकीय शर्तें पूरी होने के बाद ही कंपनियां अपनी सेवाएं व्यावसायिक रूप से शुरू कर सकती हैं। Starlink को किन मंजूरियों का इंतजार? Starlink को भारत में कुछ जरूरी लाइसेंस और अंतरिक्ष क्षेत्र से संबंधित मंजूरियां मिल चुकी हैं। हालांकि, कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करने से पहले सुरक्षा अनुपालन और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़ी प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण बनी हुई हैं। सरकार के अनुसार, इन प्रक्रियाओं को पूरा करना लॉन्चिंग के लिए जरूरी है। ऐसे में कंपनी की सेवाएं शुरू होने की समय-सीमा अंतिम मंजूरियों पर निर्भर करती है। सैटेलाइट इंटरनेट में सुरक्षा मंजूरी क्यों जरूरी? सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक मोबाइल नेटवर्क से अलग तकनीक पर काम करता है। इसलिए सेवाएं शुरू करने से पहले सुरक्षा और निगरानी से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करना जरूरी होता है। इनमें वैधानिक निगरानी, यूजर की पहचान और डेटा से संबंधित निर्धारित आवश्यकताएं शामिल हो सकती हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से संवेदनशील माने जाने वाले इस क्षेत्र में सरकार इन शर्तों को पूरा करने पर जोर देती है। Starlink का दावा—नियमों का पालन किया मस्क का कहना है कि Starlink ने भारत के कानूनों और नियामकीय आवश्यकताओं का पालन किया है और कंपनी लंबे समय से लॉन्चिंग की मंजूरी का इंतजार कर रही है। उनका तर्क है कि Starlink भारत के ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने में मदद कर सकती है, जहां पारंपरिक इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर स्थापित करना मुश्किल है। हालांकि, कंपनी की ओर से नियमों के अनुपालन का दावा और सरकार की ओर से अंतिम मंजूरियों की आवश्यकता—दोनों अलग-अलग पक्ष हैं। सरकार का पक्ष—सभी कंपनियों के लिए समान नियम सरकार ने पक्षपात के आरोपों को निराधार बताया है। उसका कहना है कि सैटेलाइट स्पेक्ट्रम आवंटन और सुरक्षा मंजूरी एक निर्धारित नियामकीय प्रक्रिया के तहत की जाती है। सरकार के अनुसार, किसी ऑपरेटर को विशेष लाभ देने के बजाय सभी कंपनियों को लागू नियमों और शर्तों के आधार पर मंजूरी दी जाती है। Jio और OneWeb भी सैटेलाइट इंटरनेट बाजार में भारत का सैटेलाइट ब्रॉडबैंड बाजार केवल Starlink तक सीमित नहीं है। Reliance Jio और Bharti Enterprises समर्थित Eutelsat OneWeb भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं। इस बाजार में अलग-अलग कंपनियों की मौजूदगी से प्रतिस्पर्धा बढ़ने की संभावना है। हालांकि, प्रत्येक ऑपरेटर को अपनी सेवाएं शुरू करने के लिए लागू लाइसेंसिंग, सुरक्षा और स्पेक्ट्रम संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करना होगा। मस्क-अंबानी विवाद पर बढ़ी राजनीतिक चर्चा Starlink की लॉन्चिंग में देरी को लेकर मस्क की टिप्पणियों के बाद यह मुद्दा कारोबारी प्रतिस्पर्धा से आगे बढ़कर राजनीतिक चर्चा का विषय भी बन गया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी मस्क की पोस्ट पर प्रतिक्रिया दी। इसके बाद भाजपा ने विपक्ष पर इस मुद्दे के जरिए विदेशी कारोबारी के पक्ष में विमर्श खड़ा करने का आरोप लगाया। इस तरह Starlink की मंजूरी का मामला कारोबारी और नियामकीय बहस के साथ राजनीतिक चर्चा में भी शामिल हो गया। Starlink की भारत में लॉन्चिंग की तारीख अभी तय नहीं Starlink ने भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में तैयारियां की हैं। हालांकि, अंतिम सुरक्षा मंजूरी और स्पेक्ट्रम आवंटन की प्रक्रिया पूरी हुए बिना कंपनी कमर्शियल सेवाएं शुरू नहीं कर सकती। फिलहाल, भारत में Starlink की व्यावसायिक लॉन्चिंग की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं की गई है। आगे की स्थिति संबंधित मंजूरियों और नियामकीय प्रक्रिया पूरी होने पर निर्भर करेगी। भारत के लिए क्यों अहम है सैटेलाइट ब्रॉडबैंड? भारत में सैटेलाइट इंटरनेट की संभावनाएं खासकर उन क्षेत्रों में महत्वपूर्ण मानी जाती हैं, जहां फाइबर नेटवर्क या मोबाइल टावर पहुंचाना कठिन है। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी इलाकों और सीमावर्ती क्षेत्रों में यह तकनीक कनेक्टिविटी बढ़ाने का विकल्प बन सकती है। Starlink, Jio और OneWeb जैसी कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा से इस क्षेत्र का विकास प्रभावित हो सकता है। हालांकि, सेवाओं की उपलब्धता और विस्तार इस बात पर निर्भर करेगा कि कंपनियां नियामकीय शर्तें कब पूरी करती हैं और अपनी सेवाएं किस तरह शुरू करती हैं। फिलहाल आरोप और सरकार के जवाब में अंतर एलन मस्क का आरोप है कि प्रभावशाली कारोबारी हित Starlink की भारत में एंट्री में बाधा डाल रहे हैं। वहीं,…

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