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Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror: इस देश के सामने गिड़गिड़ाए शहबाज शरीफ, कहा- पीओके-आतंकवाद सारे मसले सुलझाएंगे, बस भारत से बात करवा दो

ऑपरेशन सिंदूर के बाद से पाकिस्तान की अकड़ इस कदर ढीली हुई है कि वो भारत से बात करने के लिए लालायित बैठा है। दरअसल, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ भारत से बात करके पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर, आतंकवाद और व्यापार से जुड़े मुद्दा सुलझाना चाहते हैं। इस हेतु उन्होंने सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान अब्दुलअजीज अल सउद से कहा (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) है कि वह हर हाल में भारत से बात करने के लिए तैयार हैं। पाकिस्तानी न्यूज चैनल एआरवाई न्यूज की माने तो, शहबाज शरीफ की मोहम्मद बिन सलमान से फोन पर बात हुई। इस दौरान उन्होंने सऊदी अरब से कहा कि “पाकिस्तान पीओके, सिंधु जल संधि, व्यापार और आतंकवाद पर भारत के साथ बात करने के लिए तैयार है।” भारत ने पाकिस्तान नागरिकों की वापसी के साथ अटारी वाघा बॉर्डर बंद कर दिया (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) था गौरतलब हो कि 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले के बाद से भारत ने पाकिस्तान को लेकर सख्त कदम उठाए थे। भारत ने पाकिस्तान नागरिकों की वापसी के साथ अटारी वाघा बॉर्डर बंद कर दिया (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) था। इस कड़ी में भारत ने न सिर्फ पाकिस्तानियों को सार्क वीजा की छूट देना बंद कर किया था बल्कि  पाकिस्तान हाई कमीशन में स्टाफ की संख्या भी कम कर दी थी। यही नहीं, भारत ने सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को सस्पेंड कर दिया था। आतंकवाद को लेकर भारत का एकदम रुख साफ है। भारत के मुताबिक जब तक पाकिस्तान आतंकवाद और पीओके का मामला नहीं सुलझाएगा, तब तक उसके साथ किसी और मुद्दे पर भी चर्चा नहीं की जाएगी।  पाकिस्तान ने ओआईसी में 57 मुस्लिम देशों के सामने (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) रखा सिंधु जल संधि का मुद्दा  गौरतलब हो कि 65 साल पहले 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी के पानी के बंटवारे को लेकर समझौता हुआ था। यह समझौता दोनों देशों को मान्य था। हुए समझौते के तहत पश्चिमी नदियों- सिंधु, झेलम और चिनाब के पानी पर पाकिस्तान का और पूर्वी नदियों- रावी, ब्यास और सतलज के पानी पर भारत का अधिकार है। इस तरह भारत को 20 फीसदी और पाकिस्तान को 80 फीसदी पानी मिलता है। इस लिहाज से पानी की इस पर ज्यादा निर्भरता है। इस बीच बात न बनती और भारत के कड़े रुख को देखते हुए पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा ओआईसी में 57 मुस्लिम देशों के सामने (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) रखा। यही नहीं, ऑपरेशन सिंदूर के बाद अलग-अलग देशों की यात्रा पर भेजे गए बिलावल भुट्टो जरदारी के डेलीगेशन ने भी पानी का मुद्दा उठाया। यह सब इसलिए ताकि भारत पर दबाव बनाया जा सके। मजे की बात यह कि पाकिस्तान की सभी कोशिशें नाकाम रहीं और किसी भी देश ने घास तक नहीं डाली।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) की थी  बता दें कि जम्मू-कश्मीर स्थित पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर चलाकर पाकिस्तान में स्थित लश्कर-ए-तैयबा, हुए हिज्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के नौ ठिकानों को तबाह कर दिया था। इससे तिलमिलाए पाकिस्तान ने भारत के सैन्य ठिकानों पर हमला करने की कोशिश (Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror) की। जिसके जवाब में भारत ने पाकिस्तान पर जवाबी कार्रवाई की। भारत की कार्रवाई में पाकिस्तान के नूर खान जैसे बड़े एयरबेस को काफी नुकसान हुआ था। कहने की जरूरत नहीं, पहलगाम आतंकी हमले के बाद से दोनों देशों के बीच तनाव काफी बढ़ गया है। अब इस बढ़े हुए तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री दुनिया के कई देशों में सामने भारत से बात कर समझौता करने की दुहाई दे चुके हैं। भारत ने साफ़ कर दिया है कि बात अब होगी तो सिर्फ पीओके और आतंकवाद पर ही होगी। देखना दिलचस्प होगा कि आगे चलकर क्या भारत पाकिस्तान के प्रति नरम रुख अख्तियार करता है या फिर आपने रुख में कोई बदलाव न कर पाकिस्तान को नाकों चने चबवाने के लिए और मजबूर करता है।  Latest News in Hindi Today Hindi Shehbaz Sharif Seeks Talks With India Over PoK, Terror #shahbazsharif #pokissue #terrorism #indiapakistantalks #bilateraltalks #indiaupdates #pakistannews

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Iranian Nuclear Sites Survive US Bombs

अमेरिकी बमों से नष्ट नहीं हुए ईरानी परमाणु ठिकानें, पेंटागन के खुफिया रिपोर्ट से हुआ चौंकाने वाला बड़ा खुलासा

ईरान-इजरायल युद्ध (Iran–Israel War) में कूदते हुए अमेरिका ने पिछले सप्ताह ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर बंकर ब्लास्टर बमों से हमला किया था। इसके बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने दावा किया था कि अमेरिकी हमले में ईरान के तीनों परमाणु संयंत्र पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। इस शक्ति प्रदर्शन के बाद ही अब शांति आएगी, लेकिन इस अमेरिकी हमले को लेकर अब चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन ने अमेरिकी खुफिया विभाग की प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर दावा किया है कि अमेरिका के हमले के बाद भी ईरान के परमाणु ठिकाने सुरक्षित हैं। इस हमले के बाद तेहरान का परमाणु कार्यक्रम कुछ महीनें भले ही पीछे चला गया है, लेकिन वह पूरी तरह से नष्ट नहीं हुआ है। सीएनएन का दावा है कि यह रिपोर्ट पेंटागन की खुफिया शाखा ने तैयार किया है। अमेरिकी हमले में ईरान की परमाणु संवर्धन ठिकानें पूरी तरह से नष्ट हो गए सीएनएन ने खुफिया सूत्र के हवाले से बताया कि ईरान पर हमले (Iran–Israel War) के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां परमाणु स्थलों को हुए नुकसान और प्रभाव का विश्लेषण कर रही हैं। सीएनएन ने कहा कि अभी जो रिपोर्ट प्रकाशित की जा रही है, वह प्रारंभिक जांच के आधार पर है और अधिक जानकारी आने के बाद इस रिपोर्ट के तत्थों में बदलाव किया जा सकता है। लेकिन अमेरिकी खुफिया विभाग की शुरुआती जांच रिपोर्ट डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के दावों से विपरीत है। ट्रंप ने कहा था कि अमेरिकी हमले में ईरान की परमाणु संवर्धन ठिकानें पूरी तरह से नष्ट हो गए। साथ ही ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को भी इससे भारी नुकसान हुआ है। अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी हमले के बाद मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि ईरान के परमाणु ठिकानें और महत्वाकांक्षाएं अमेरिका ने नष्ट कर दिया है।   ईरान का यूरेनियम भंडार अभी भी सुरक्षित सीएनएन ने इस खुफिया रिपोर्ट तैयार करने वाले दो अधिकारियों से बातचीत के आधार पर कहा कि अमेरिकी हमले में ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार नष्ट नहीं हुए हैं। जिस सेंट्रीय फ्यूज में यूरेनियम रखा जाता है, उनको कोई नुकसान नहीं हुआ है। क्योंकि संवर्धित यूरेनियम को अमेरिका के हमले से पहले ही इन ठिकानों से हटा लिया गया था। साथ ही परमाणु ठिकाने का ढांचा भी काफी हद तक सुरक्षित बचा हुआ है। कुछ माह की मरम्मत के बाद इन ठिकानों पर फिर से परमाणु संवर्धन का काम शुरू किया जा सकता है।    इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! व्हाइट हाउस ने कहा- रिपोर्ट के तथ्य गलत  व्हाइट हाउस ने भी यह खुफिया रिपोर्ट होने की बात स्वीकार की, लेकिन इसमें मौजूद तथ्यों को गलत बताया। सीएनएन से बातचीत में व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट ने कहा कि, अमेरिकी हमले की यह कथित आकलन रिपोर्ट पूरी तरह से गलत है। इस रिपोर्ट को अति गोपनीय के तौर पर संरक्षित किया गया था, लेकिन खुफिया विभाग का एक अनाम और घटिया स्तर की सोच वाले लूजर ने इसे लीक कर दिया। कैरोलिन लेविट ने कहा कि इस रिपोर्ट को लीक करना बताता है कि कोई राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) को नीचा दिखाना चाहता है। साथ ही वह ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने वाले हमारे बहादुर लड़ाकू पायलटों को भी बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। कैरोलिन लेविट ने अपने बयान में यह भी कहा कि, ‘दुनिया का हर व्यक्ति जानता है कि जब 30000 पाउंड के 14 बम कहीं पर गिरते हैं तो वहां पर क्या होता है। इसका मतलब है ‘पूर्ण विनाश’। पेंटागन की खुफिया रिपोर्ट और व्हाइट हाउस के इस बयान के आधार पर कहा जा सकता है कि संभवता अमेरिकी हमले में ईरान (Iran–Israel War) के परमाणु ठिकानों को उतना नुकसान नहीं हुआ, जितना वहा उसे बता रहा है। अगर ऐसा है तक 12 दिनों तक चले युद्ध के बाद भी इजरायल और अमेरिका अपने लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाए।   Latest News in Hindi Today Hindi Iran–Israel War #iran #pentagonleak #nuclearreport #usairstrike #middleeastconflict #iranusnews #defensestrategy

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Little Boy’s Wounds Still Bleed

Little Boy के दिए जख्म आज भी नहीं भरे: क्या दुनिया फिर उसी मोड़ पर है?

आज दुनिया में एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं से घिरी है—ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension), मिसाइल हमले और परमाणु शक्तियों की सक्रियता तो ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अतीत के उस खौफनाक दिन को याद करें जब विज्ञान ने मानवता को पीछे छोड़ दिया था। 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम लिटिल बॉय (Atomic Bomb Little Boy) न सिर्फ लाखों जिंदगियों खत्म कर दी, बल्कि यह एक ऐसा जख्म भी था जो आज तक भरा नहीं है।  6 अगस्त 1945 को सुबह 8:15 बजे जब जापान का शहर हिरोशिमा (Hiroshima) अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, दुकानदार खुल रही थीं और लोग अपने-अपने कामों में लगे थे। लेकिन कुछ ही पलों में ऐसा हुआ कि इंसानियत की रूह काँप उठी। आसमान में उड़ता अमेरिकी बॉम्बर विमान एनोला गे (American Bomber Aircraft Enola Gay) और उसके भीतर था लिटिल बॉय (Little Boy) एक यूरेनियम आधारित एटॉमिक बम (Atomic Bomb)। इस बम ने न सिर्फ़ शहर को तबाह किया, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी भी छोड़ गया। लिटिल बॉय: नाम से ठीक विपरीत कारनामा  लिटिल बॉय (Little Boy) नाम जितना मासूम था उसका असर उतना ही भयावह। यह मानव इतिहास का पहला परमाणु हमला था, जिसमें करीब 70,000 से अधिक लोग तुरंत मारे गए और बाद में रेडिएशन और बीमारियों से मरने वालों की संख्या लाखों में जा पहुंची। हिरोशिमा जल उठा, इंसान राख में बदल गए और कुछ की परछाइयाँ आज भी उन दीवारों पर दर्ज हैं जो आज भी खड़े हैं, इंसान की बर्बरता की गवाही देते हुए। यह हमला एक चेतावनी थी कि विज्ञान यदि मानवता के विरुद्ध खड़ा हो जाए, तो उसका अंजाम कितना विध्वंसकारी हो सकता है। आज की दुनिया और परमाणु डर आज जब हम ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension) और मिसाइल हमलों की खबरें सुनते हैं, तो मन में यह सवाल उठता है कि क्या वर्ल्ड वॉर 3 की आहट सुनाई दे रही है? आज की तकनीक, हथियारों की शक्ति और देशों के बीच की असुरक्षा को देखते हुए यह डर अनावश्यक नहीं है। कई देश आज भी परमाणु शक्ति (Atomic Power) से लैस हैं। अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल जैसे देश अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा का कवच बताते हैं, लेकिन जब कूटनीति असफल होती है और युद्धोन्माद हावी हो जाता है, तो यही कवच एक दिन तबाही बन सकता है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) क्या सीखा दुनिया ने 1945 से? इतिहास गवाह है कि हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी ने दुनिया को यह दिखा दिया था कि परमाणु युद्ध (Nuclear war) में कोई जीतता नहीं, हर कोई हारता है। इसके बावजूद आज भी दुनिया के कई हिस्सों में परमाणु ताकत को शक्ति प्रदर्शन का माध्यम समझा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बने हैं ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके। लेकिन क्या ये समझौते वास्तव में प्रभावशाली हैं? जब शक्तिशाली देश खुद इन नियमों का पालन नहीं करते, तो बाकी दुनिया से उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत से निकले हल  आज की दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि संवाद की जरूरत है। वैश्विक नेता यदि अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर मानवता की भलाई के लिए सोचें, तो शायद लिटिल बॉय जैसी घटनाएं फिर कभी न दोहराई जाएं। लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति और समझ दोनों की जरूरत है। लिटिल बॉय (Little Boy) आज सिर्फ एक बम का नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक है कि मानव विनाश की चरम सीमा का प्रतीक। यह घटना हमें बार-बार याद दिलाती है कि यदि हमने इतिहास से नहीं सीखा, तो भविष्य हमारे लिए और भी भयानक हो सकता है। जब हम हिरोशिमा की राख में बसी परछाइयों को देखते हैं, तो ये सवाल फिर सिर उठाता है कि क्या हम एक बार फिर उसी राह पर बढ़ रहे हैं?  लिटिल बॉय (Little Boy) ने जो जख्म दिए, वे आज भी दुनिया के ज़हन में ताज़ा हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि शांति कोई विकल्प नहीं, बल्कि एकमात्र रास्ता है। युद्ध चाहे किसी भी कारण से हो उसका नतीजा हमेशा विनाश ही होता है। Latest News in Hindi Today Hindi Hiroshima #littleboy #hiroshima #nuclearwar #worldwariii #globalcrisis #historyrepeats

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Trump announces end to Iran-Israel war

ट्रंप का ऐलान…खत्म हुआ ईरान-इजरायल युद्ध, तेहरान का दावा हमारा समझौता अभी फाइनल नहीं

कतर में मौजूद अमेरिका के एयरबेस पर ईरानी हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने युद्धविराम का ऐलान किया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया है कि ईरान और इजरायल पूर्ण युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के लिए सहमत हो गए हैं। पहले ईरान युद्धविराम करेगा और फिर इजरायल करेगा। अगले 24 घंटे के अंदर 12 दिनों से चल रहा युद्धविराम खत्म हो जाएगा। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के इस ऐलान पर जहां इजरायल ने सहमति जताई है, वहीं ईरान ने युद्धविराम (Iran–Israel Ceasefire) के किसी भी समझौते से इंकार किया है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने ट्रंप के दावे का खंडन करते हुए कहा कि फिलहाल अभी युद्धविराम का कोई भी समझौता फाइनल नहीं हुआ है।  12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, ‘बधाई हो सभी को! ईरान और इजरायल के बीच चल रहे युद्ध में पूर्ण सीजफायर पर सहमति बन गई है। यह सीजफायर आगामी छह घंटे के भीतर शुरू होगा और सबसे पहले ईरान इसका पालन करते हुए 12 घंटे का युद्धविराम करेगा। 12 घंटे बाद इजरायल भी 12 घंटे का सीजफायर करेगा और फिर 24 घंटे बाद युद्ध औपचारिक तौर पर खत्म हो जाएगा।’ ट्रंप ने अपने इस पोस्ट में इजरायल और ईरान के नेताओं  की सहनशक्ति और बुद्धिमत्ता की जमकर तारीफ करते हुए दावा किया कि दोनों देशों के बीच यह युद्ध सालों तक चल सकती थी, जिसके चपेट में आकर पूरा मध्य पूर्व तबाह हो सकता था। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा।  युद्ध विराम पर फाइनल समझौता नहीं- अराघची  वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची (Abbas Araghchi) ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि, फिलहाल अभी कोई समझौता फाइनल (Iran–Israel Ceasefire) नहीं हुआ है। हालांकि इस दौरान उन्होंने इजरायल की ओर से हमले रुकने पर ईरान द्वारा युद्ध रोकने की बात कही। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा है कि, इस युद्ध की शुरुआत इजरायल ने ईरान पर हमला करके किया, हमने अपने बचाव में सिर्फ जवाबी कार्रवाई की है। ऐसे में सीजफायर करने की जिम्मेदारी इजरायल पर है। इजरायल को सबसे पहले अपने हमले रोकने होंगे। अगर इजरायल हमला नहीं करता तो ईरान भी जवाबी हमला नहीं करेगा। हम अपने सैन्य अभियान को समाप्त करने पर अंतिम निर्णय बाद में लेंगे।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान ने किया था हमला  बता दें कि ईरान को परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के लिए अमेरिका ने हमला किया था। अमेरिका का दावा है कि इस हमले से ईरान का परमाणु निर्माण ढांचा पूरी तरह से खत्म हो गया है। इस हमले के बाद ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमला करने की घोषणा की थी। ईरान ने बीती रात कतर की राजधानी दोहा में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डे पर हमला बोलते हुए 14 मिसाइलें दागी। अमेरिका का दावा है कि इनमें से 13 मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया गया। वहीं एक मिसाइल ने जमीन पर हिट किया। ईरान के इस हमले से किसी भी तरह का नुकसान नहीं हुआ। कहा जा रहा है कि ईरान ने हमला करने से पहले इसकी जानकारी कतर को दे दी थी, जिसकी वजह से अमेरिका को अपने सैन्य अड्डे को खाली करने के साथ एयर डिफेंस को एक्टिव करने का मौका मिल गया।  अंतरराष्ट्रीय समाचार संस्था रॉयटर्स ने बताया कि इस हमले के बाद ट्रंप ने कतर के प्रधानमंत्री को फोन कर सीजफायर का प्रस्ताव रखा और तेहरान से बात करने को कहा। इस बातचीत के बाद ही ट्रंप ने सीजफायर का दावा किया था, लेकिन अब ईरान ने फाइनल समझौते से इंकार कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Iran–Israel Ceasefire #iranisraelwar #trumpnews #middleeastconflict #iranlatestupdate #ceasefiredeal

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Iran US tensions

Iran: Military Will Decide Response to US Actions: अमेरिका को कब, कहां और कैसे जवाब देना है? ये अब सेना तय करेगी- ईरान

रविवार को ऑपरेशन मिडनाइट हैमर के तहत अमेरिका ने अपने B2 बॉम्बर्स से ईरान के तीन परमाणु संयंत्रों नातांज, फोरदो और इस्फहान पर हमले किए। हमले के बाद ईरान ने अमेरिका से इस हमले का बदला लेने का संकेत दिया है। रिपोर्ट्स के मुताबीक संयुक्त राष्ट्र में इसका ऐलान करते हुए ईरानी राजदूत ने कहा, हम कब-कहां और कैसे बदला लेंगे, ये ईरानी सेना तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी। वहीं ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने अमेरिका का नाम लिए बिना कहा कि दुश्मन ने बड़ी भारी भूल की है, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी। खामेनेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, हम दुश्मन पर हमले तेज करेंगे। गुनहगारों को सजा मिलकर रहेगी। यहूदी देश ने बड़ी भयंकर भूल की है। उसे सजा मिलनी चाहिए और ये उसे मिलकर रहेगी। उसे सजा मिल भी रही है।  ईरानी सेना अमेरिका पर ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमले के बाद ईरान में तबाही मची है। इस हमले के बाद ईरान ने बड़ा बयान दिया है और कहा है कि अमेरिका ने देश के परमाणु कार्यक्रम पर हमला करके कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया और अब ईरानी सेना अमेरिका पर ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) करेगी। बता दें कि रविवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक आपातकालीन बैठक में ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत आमिर सईद इरावानी ने कहा कि अमेरिका द्वारा उसके तीन परमाणु प्रतिष्ठानों पर हमला करने के बाद ईरान ने युद्धोन्मादी अमेरिकी शासन को बार-बार चेतावनी दी थी कि वह इस दलदल में न फंसे। राजदूत ने बैठक में कहा, हम सभी आवश्यक उपाय करेंगे। ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला करके कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया और अब ईरानी सेना ईरान की उचित प्रतिक्रिया के समय, प्रकृति और पैमाने को तय करेगी। इस बीच संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को घेरते हुए इरावानी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को तुरंत ऐसे अन्याय और कानूनों के उल्लंघन के मामले में कदम उठाना चाहिए। ऐसा नहीं होता है तो यूएन खुद अपनी हैसियत खो देगा।  इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! संयुक्त राज्य अमेरिका एक और महंगे और निराधार युद्ध में फंस गया (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) है ईरान के संयुक्त राष्ट्र राजदूत इरावानी यहीं नहीं रुके, उन्होंने ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पश्चिम का घटिया काम करने और अमेरिकी विदेश नीति को हाईजैक करने में सफल होने का आरोप लगाया, जिससे संयुक्त राज्य अमेरिका एक और महंगे और निराधार युद्ध में फंस गया (Iran: Military Will Decide Response to US Actions) है। हमले के बाद उनका गुस्सा इस कदर था कि उन्होंने ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की आक्रामकता को अंतर्राष्ट्रीय कानून का स्पष्ट और घोर उल्लंघन करार दिया। इरावानी ने कहा कि इस सप्ताह ईरान के विदेश मंत्री ने कई यूरोपीय समकक्षों के साथ बातचीत की, संयुक्त राज्य अमेरिका ने उस कूटनीति को नष्ट करने का फैसला किया। हालांकि इस दौरान उन्होंने यह भी पूछा कि इस स्थिति से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है? पश्चिमी देशों के दृष्टिकोण से, ईरान को बातचीत की मेज पर वापस लौटना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने एक बार फिर बिना सोचे समझे अपनी सुरक्षा को सिर्फ इसलिए दांव पर लगाया है कि नेतन्याहू को बचाया जा सके, लेकिन ईरान को अपनी आत्मरक्षा का वैधानिक अधिकार है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Iran: Military Will Decide Response to US Actions #iran #usairstrikes #middleeastcrisis #iranmilitary #geopolitics #breakingnews #worldnews #irannews #tensionsrise

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Indus Waters Treaty

भारत सिंधु जल संधि बहाल करे, नहीं तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर करेगा कब्जा- बिलावल भुट्टों की गीदड़भभकी

भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवादों में रही सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को भारत की तरफ से स्थगित करने के बाद से पाकिस्तान लगातार दर्द से बिलबिला रहा है। इस मुद्दे पर अब पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने भारत को युद्ध की धमकी देते हुए कहा है कि भारत के पास सिर्फ दो विकल्प हैं। बिलावल का यह बयान गृह मंत्री अमित शाह (Amit shah) के एक बयान के बाद आया है। अमित शाह ने एक इंटरव्यू में बात करते हुए कहा कि भारत का सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को बहाल करने का कोई इरादा नहीं है। शाह के इस बयान के बाद से ही पाकिस्तान के राजनीतिक गलियारों में हडकंप मची हुई है।  अगर भारत सिंधु जल संधि को बहाल नहीं करता, तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने भी अमित शाह (Amit shah) के इसी बयान का जवाब देते हुए एक रैली में भारत को सीधे तौर पर युद्ध की धमकी दी। बिलावल ने कहा, “भारत के पास अब केवल दो विकल्प हैं, या तो वह सिंधु जल संधि को मानते हुए हमारे साथ सहयोग करे या पाकिस्तान से युद्ध के लिए तैयार रहे।” बिलावल यहीं तक नहीं रुके, उन्होंने कहा कि अगर भारत सिंधु जल संधि को बहाल नहीं करता, तो पाकिस्तान हमला करके सभी छह नदियों पर कब्जा कर सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बिलावल भुट्टो का यह बयान पाकिस्तान की बौखलाहट को दिखाता है। भारत ने जब से सिंधु जल संधि पर रोक लगाया है, पाकिस्तान तभी से इस तरह की गीदड़भभकी दे रहा है।  हम सिंधु सभ्यता के संरक्षक हैं और इसकी रक्षा के लिए युद्ध का रास्ता भी अपनाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने यह भी कहा कि भारत द्वारा सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को निलंबित करना “शांति को खत्म करने जैसा कदम” है। यह सिर्फ जल संकट नहीं, बल्कि पाकिस्तान के अस्तित्व का सवाल है और पाकिस्तान की सरकार इसके लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। बिलावल ने धमकी देते हुए कहा, “हम सिंधु सभ्यता के संरक्षक हैं और इसकी रक्षा के लिए युद्ध का रास्ता भी अपनाना पड़ा तो पीछे नहीं हटेंगे।” बता दें कि बिलावल भुट्टों इससे पहले भी इस तरह का भड़काऊ बयान दे चुके हैं। ऑपरेशन सिंदूर से पहले बिलावल ने भारत को धमकी देते हुए कहा था, “या तो नदियों में पानी बहेगा, या फिर भारत का खून।” इस तरह के बयान न केवल भारत-पाक के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना रहे हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की छवि को भी प्रभावित कर रहे हैं। इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमित शाह के बयान के बाद बौखलाया पाकिस्तान गृहमंत्री अमित शाह (Amit shah) ने हाल में एक इंटरव्यू दिया था, जिसमें कहा था कि, भारत सिंधु जल समझौते को बहाल नहीं करेगा। शाह ने कहा, “भारत को अब अपने अधिकारों को जानने और उन पर अमल करने का समय आ गया है।” शाह के इस बयान को पाकिस्तान के लिए कड़ा संदेश माना जा रहा है कि भारत अब अपनी जल कूटनीति को रणनीतिक रूप से इस्तेमाल करने को तैयार है। इस बयान के तुरंत बाद पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने भी तीखी प्रतिक्रियाएं दीं। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे “अंतरराष्ट्रीय संधि का उल्लंघन” बताया और वैश्विक मंचों पर भारत की शिकायत करने की चेतावनी दी। वहीं बिलावल भुट्टों भारत को युद्ध की धमकी देने लगे। लेकिन भारत ने अब तक इस मुद्दे पर संयम दिखाया है और कभी भी युद्ध जैसी कोई भाषा नहीं अपनाई, लेकिन पाकिस्तान के राजनीतिक वर्ग द्वारा बार-बार युद्ध की धमकी देना कहीं न कहीं उनकी राजनीतिक अस्थिरता और आंतरिक दबावों को दर्शाता है। सिंधु जल संधि: क्या है विवाद की जड़? बता दें कि सिंधु जल संधि भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में हुई थी। इस संधि के तहत छह नदियों का पानी दोनों देशों में बांटा गया। भारत को रावी, ब्यास, सतलुज का पानी मिला था और पाकिस्तान को सिंधु, झेलम, चिनाब का पानी मिला था। इस संधि के तहत भारत पाकिस्तान की नदियों के पानी को रोक नहीं सकता, लेकिन सीमित सिंचाई, जल-विद्युत और घरेलू उपयोग के लिए संरचनाएं बना सकता है। हालांकि, भारत हमेशा से इस संधि को गलत मानता रहा, लेकिन कभी रोक नहीं लगाया। लेकिन पहलगाम हमले के बाद भारत ने इस संधि को स्थगित कर दिया है। भारत का कहला है कि पाकिस्तान के साथ यह संधि अच्दे रिश्ते और शांति के लिए किए गए थे, लेकिन बदले में पाकिस्तान ने भारत में आतंकवाद और हिंसा फैलाई। पानी और खून अब एक साथ नहीं बह सकता। इसलिए पाकिस्तन जब तक आतंकवाद को खत्म नहीं करता, तब तक यह संधि स्थगित रहेगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Amit shah Bilawal Bhutto #IndusWatersTreaty #BilawalBhutto #IndiaPakistan #RiverDispute #SouthAsiaTensions #Geopolitics #BreakingNews #PakistanThreat

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Iran nuclear strikes

Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes: ईरान के न्यूक्लियर साइट्स तबाह करने के बाद इस वजह से ट्रंप ने दिए खामेनेई को सत्ता से बेदखल करने के संकेत 

13 जून से ईरान-इजरायल के बीच जारी युद्ध है की थमने के नाम ही नहीं ले रहा है। तेहरान को न्यूक्लियर वेपन हासिल करने से रोकने के लिए इजरायल ने ईरान पर अचानक हमला किया था। अक्टूबर 2023 से गाजा में इजरायल के लंबे युद्ध के बाद पहले से ही चरम पर है ऊपर से ईरान और इजरायल युद्ध ने पूरे क्षेत्र में तनाव को बढ़ा दिया है। इस दरम्यान दोनों के बीच चल रहे युद्ध में अमेरिका की भी इंट्री हो गई। सरेंडर करने की हिदायत को अनदेखा करने के बाद अमेरिका ने ईरान की न्यूक्लियर साइट्स पर बी 2 बॉम्बर के जरिए अटैक किया। दरअसल, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के उद्देश्य से अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु केन्द्रों फोर्दो, नतांज और इस्फहान पर यह हमला किया। इस अटैक के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना की तारीफ की। ध्यान देने वाली बात यह कि इस हमले के कुछ घंटों बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और इजरायली सेना को अमेरिका के साथ काम करने के लिए धन्यवाद दिया। इसके अलावा सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि ट्रंप ने ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर भी बड़ा चौंकाने वाला बयान दिया (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) है। बयान के मुताबिक उन्होंने खामेनेई को सत्ता से बाहर करने का स्पष्ट संकेत दिया है।  ईरानी शासन ईरान को फिर से महान बनाने में असमर्थ है, तो क्यों (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) नहीं होगा शासन परिवर्तन? रविवार को ईरान की परमाणु साइट्स पर अमेरिका के बड़े पैमाने पर सटीक हमलों के बाद, डोनाल्ड ट्रंप ने  इस्लामी गणराज्य में शासन परिवर्तन की संभावना का न सिर्फ संकेत दिया बल्कि देश की मौजूदा नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाया। दरअसल सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर किये एक पोस्ट में ट्रंप ने कहा, शासन परिवर्तन शब्द का उपयोग करना राजनीतिक रूप से सही नहीं है, लेकिन अगर वर्तमान ईरानी शासन ईरान को फिर से महान बनाने में असमर्थ है, तो शासन परिवर्तन क्यों (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) नहीं होगा? MIGA (मेक ईरान ग्रेट अगेन) यही नहीं, अपने एक अलग पोस्ट में ट्रंप ने सेना के प्रदर्शन की सराहना करते हुए कहा, ईरान में परमाणु स्थलों को हुआ नुकसान बड़ा है। हमले कठोर और सटीक थे। हमारी सेना ने शानदार कौशल दिखाया। ट्रंप ने कहा, महान बी-2 पायलट अभी-अभी मिसौरी में सुरक्षित रूप से उतरे हैं। बेहतरीन काम के लिए धन्यवाद! डोनाल्ड जे. ट्रंप, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति। बड़ी बात यह कि ट्रंप की यह टिप्पणी अमेरिका द्वारा ऑपरेशन मिडनाइट हैमर शुरू करने के एक दिन बाद आई है।  इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! अमेरिकी राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) थे स्पष्ट आदेश- अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ इसके अलावा रविवार को अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने ईरान में अमेरिका द्वारा शुरू किए गए ऑपरेशन की सफलता की (Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes) पुष्टि की। हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने ईरानी सैनिकों या नागरिकों को निशाना नहीं बनाया। बता दें कि संयुक्त चीफ ऑफ स्टाफ एयर फोर्स के अध्यक्ष जनरल डैन कैन के साथ मीडिया से रूबरू होते हुए हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के फोर्डो, इस्फ़हान और नतांज में सफलतापूर्वक सटीक हमले किए हैं। पिछली रात, राष्ट्रपति ट्रंप के आदेश पर यूएस सेंट्रल कमांड ने ईरान के तीन परमाणु प्रतिष्ठानों- फोर्डो, इस्फहान और नतांज पर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट करने या उसे गंभीर रूप से सीमित करने के लिए आधी रात को सटीक हमला किया। यह एक अविश्वसनीय और जबरदस्त सफलता थी। हेगसेथ ने आगे कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति और कमांडर-इन-चीफ के आदेश स्पष्ट थे। उन्होंने ईरान की परमाणु महत्वाकांक्षाओं को नष्ट कर दिया। हमारे कमांडर-इन-चीफ से हमें जो आदेश मिला वह केंद्रित था, यह शक्तिशाली था, और स्पष्ट था। हमने ईरानी परमाणु कार्यक्रम को नष्ट कर दिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Hints at Ousting Khamenei After Iran Strikes #Trump #Khamenei #IranStrike #USIranTensions #NuclearSiteAttack #MiddleEastCrisis #BreakingNews

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ईरान ने इजरायल पर रात भर बरसाईं बैलिस्टिक मिसाइल, इजरायल की चेतावनी-‘भीषण और लंबे युद्ध के लिए तैयार रहो’

ईरान और इजरायल के बीच पिछले सप्ताह से जारी जंग (Iran–Israel War) अब भीषण हो चुकी है। ईरान ने बीती रात इजरायल पर मिसाइलों से ताबड़तोड़ हमले किए। जवाब में इजरायल ने भी फाइटर जेड से ईरान के न्यूक्लियर और सैन्य ठिकानों के साथ इंडस्ट्रियल एरिया पर हमले किए। इन हमलों से दोनों तरफ भारी तबाही हुई है। ईरान के हमलों पर इजरायल ने दावा किया है कि वह उसके रिहायशी इलाकों पर मिसाइले दाग रहा है। इन हमलों से नाराज इजरायल ने ईरान को धमकी देते हुए कहा है कि अब ये जंग (Iran–Israel War) और भीषण और लंबी होगी। ईरान बुरे से बुरे हालात के लिए तैयार रहे।  बता दें कि इजरायल-ईरान युद्ध (Israel–Iran War) नौवें दिन में प्रवेश कर चुका है। यह युद्ध जैसे-जैसे आगे बढ़ रहा है भीषण होता जा रहा है। ईरान पीछे हटने की जगह अपने बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल पर जबरदस्त हमला बोल रहा है। युद्ध लंबा खिंचता देख इजरायली सैन्य प्रमुख इयाल जमीर ने शुक्रवार को अपने नागरिकों से कहा कि, वो “लंबे संघर्ष” के लिए तैयार रहें। साथ ही ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान को अपने एक-एक मिसाइल की भारी कीमत चुकानी पड़ेगी। क्योंकी हम ईरान पर और भी भीषण (Iran–Israel War) हमला करने जा रहे हैं।  इजरायल ने किया ईरान के एक और बड़े कमांडर को मारने का दाव  इजरायल ने दावा किया है कि उसके आईडीएफ ड्रोन (IDF Drone) हमले में एक ईरानी कमांडर मारा गया है। इजरायल ने बताया कि उसके ड्रोन ने ईरानी सैनिकों के एक ऐसे समूह पर हमला किया, जिसमें आईआरजीसी (IRGC) का कमांडर भी मौजूद था। यह कमांडर 15 मिसाइल लांचर का जिम्मेदार था। जब उ्रोन ने हमला किया, तब सैनिकों का यह समूह मिसाइल दागने की तैयारी कर रहा था, लेकिन इसके पहले सभी को मार दिया गया। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल के बीरशेबा, तेल अवीव और यरूशलेम समेत कई दूसरे शहरों पर मिसाइलें दागी। इनमें से ज्यादातर मिसाइलों को इजरायल ने हवा में ही मार गिराया। हालांकि कुछ मिसाइलें इन शहरों में भी गिरी हैं, जिससे इजरायल को भारी नुकसान हुआ है।   इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! इजरायली हमले के बीच परमाणु मसले पर बात नहीं करेगा ईरान ईरान और इजरायल (Iran–Israel) के बीच चह रहे इस युद्ध को रोकने के लिए अब कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गए हैं। शुक्रवार को ईरान के विदेश मंत्री ने ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी के विदेश मंत्री से बात की। जिसके बाद ईरान ने बयान जारी कर कहा कि वह युद्ध पर बात कर सकता है, लेकिन इजरायली हमलों के बीच वह परमाणु मसले पर समझौता करने के लिए किसी भी देश से बातचीत नहीं करेगा। वहीं यूरोपीय देशों ने ईरान को अमेरिका से बातचीत करने को कहा है। यूरोपीय देशों ने ईरान और इजरायल से युद्ध को जल्द से जल्द रोकने की अपील की है।   ईरान को ट्रंप ने दिया दो सप्ताह का समय  ईरान और इजरायल (Iran–Israel) में संघर्ष विराम को लेकर व्हाइट हाउस ने कहा है कि ईरान की मदद यूरोपीय देश नहीं कर सकते हैं। उन्हें अमेरिका से बात करनी होगी। वहीं ईरान पर हमले को लेकर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने कहा कि, ईरान पर हमले के बारे में उन्होंने अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। बातचीत के लिए ईरान के पास अभी दो सप्ताह का समय है। इसके बाद स्थितियों का आकलन करते हुए अंतिम निर्णय लिया जाएगा कि युद्ध में उतरा जाए कि नहीं। अमेरिका का कहना है कि अभी ईरान के साथ वार्ता की संभावना तलाशा जा रहा है। ईरान के साथ अगर कोई समझौता होता है तो वह अमेरिका की शर्तों पर होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Iran–Israel #IranIsrael #IranIsraelwar

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Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War: ट्रंप के बाद नेतन्याहू ने दी खामेनेई को धमकी, अमेरिका के बाद ईरान-इजरायल युद्ध में रूस की भी हुई इंट्री

बीतते समय के साथ-साथ ईरान-इजरायल तनाव लगातार जारी है। आठवें दिन भी लगातार तनाव बना हुआ है। जारी तनाव के बीच गुरुवार को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा, इजरायली हमलों से कोई भी सुरक्षित नहीं है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी निशाने पर हो सकते हैं। नेतन्याहू ने कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से करना (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए। दरअसल, नेतन्याहू ने यह टिप्पणी दक्षिणी इजरायली शहर बीरशेबा में सोरोका मेडिकल सेंटर के दौरे के दौरान प्रेस कॉन्फ्रेंस में की। गौरतलब हो कि गुरुवार सुबह ईरान ने मिसाइल हमला किया था। ईरानी हमले से तिलमिलाए नेतन्याहू ने कहा, मैंने निर्देश दिए हैं कि कोई भी इससे अछूता नहीं है। इस दौरान उन्होंने कहा कि वह कुछ बोलने में नहीं, बल्कि कार्रवाई करके दिखाने में भरोसा करते हैं।  युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चाहिए- प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हालाँकि इस बीच नेतन्याहू ने यह भी कहा कि युद्ध के दौरान शब्दों का चयन सावधानी से किया चाहिए और कार्रवाई में सटीकता होनी चाहिए। सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने बात को वहीं खत्म करते हुए कहा कि प्रेस में इस बारे में बात न करना ही बेहतर है। इस दौरान प्रधानमंत्री ने यह भी दोहराया कि ईरान में इजरायल की कार्रवाई उसके परमाणु कार्यक्रम और मिसाइल भंडार के खिलाफ थी, न कि ईरान की तरह निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने के (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) लिए। अस्पतालों पर बमबारी हुई बमबारी पर नेतन्याहू ने कहा कि वे उन अस्पतालों पर बमबारी करते हैं, जहां लोग खतरे से बच नहीं सकते। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसे कार्यशील लोकतंत्र और इन हत्यारों के बीच का अंतर है, जो कानून का पालन करता है। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी मंजूरी  बता दें कि ईरान और इजरायल युद्ध पर अमेरिका भी अपनी नजर बनाए हुए है। जारी युद्ध के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को बंद और बिना शर्त आत्मसमर्पण करने हेतु कहा था। इसके अलावा लगातार ईरान पर दबाव बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ हमले को मंजूरी दे दी (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) थी। खैर, उन्होंने अधिकारियों को अंतिम फैसले के लिए रुकने के लिए कहा था। इस पूरे मामले पर बोलते हुए व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ट्रंप अगले दो हफ्ते में ईरान को लेकर फैसला कर सकते हैं। इसे भी पइसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी- ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ध्यान देने वाली बात यह कि ट्रंप के आत्मसमर्पण के प्रस्ताव को ईरानी सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने यह कहते हुए ठुकरा था कि जो लोग ईरान के इतिहास और उसकी संघर्षशीलता से वाकिफ हैं, वे हमें कभी धमकाने की कोशिश नहीं करेंगे। ईरानी जनता कभी घुटने नहीं टेकेगी। समर्पण करना तो दूर उन्होंने ट्रंप को सीधे चेतावनी दी कि अगर अमेरिका इजरायल की मदद करने की कोशिश करता है या सैन्य हस्तक्षेप करता है, तो उसे ऐसे नुकसान उठाने पड़ेंगे जो पूरी तरह से कभी भर नहीं पाएंगे।  अमेरिका इस संघर्ष से (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) ही रहे दूर- रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन महत्वपूर्ण बात यह कि अमेरिका के बाद इजरायल-ईरान युद्ध में रूस की भी एंट्री हो (Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War) चुकी है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने डोनाल्ड ट्रंप को खुली चेतावनी देते हुए कहा, अमेरिका इस संघर्ष से दूर ही रहे। पुतिन ने ईरान पर अमेरिकी हमले की अटकलों को लेकर कहा कि हम वाशिंगटन को ऐसे काल्पनिक विकल्पों के खिलाफ भी आगाह करते हैं। ऐसा कोई भी कदम पूरे हालात को गंभीर रूप से अस्थिर कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu Threatens Khamenei, Russia Enters Iran War #Netanyahu #Khamenei #Russia #IranIsraelWar #Trump #MiddleEastConflict #GlobalTension #WW3Alert

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‘भारत के हमले से नूर खान और शोरकोट एयरबेस तबाह…’ पाकिस्तान के डिप्टी पीएम ने कबूला सच्चाई, खोली अपने ही झूठ की पोल

पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) से हुए भारी नुकसान को छुपाने की लाख कोशिश कर ले, लेकिन उनके नेताओं के मुंह से सच निकल ही जाता है। अब एक बार फिर पाकिस्तान ने भारत के सफलता का खुलासा कर दिया है। इस बार पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार (Ishaq Dar) ने सच को स्वीकार्य किया है। डार ने पाकिस्तान के GEO न्यूज को इंटरव्यू देते हुए भारत के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ (Operation Sindoor) की सफलता का खुलासा किया। उन्होंने माना कि भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान के दो सबसे अहम एयरबेस- नूर खान और शोरकोट को भारी नुकसान हुआ है। भारत के इस विध्वंसक हमले के कारण पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई की योजना पूरी तरह से ध्वस्त हो गई। इशाक डार (Ishaq Dar) का यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पाकिस्तान इस सैन्य संघर्ष को अपनी जीत के रूप में पेश कर रहा है और अभी तक अपने नुकसान को सार्वजनिक रूप से स्वीकार्य नहीं किया है।  Pakistani deputy PM Ishaq Dar claims India hit Nur Khan and Shorkot airbases. He says Saudi Prince Faisal bin Salman asked if he could tell Jaishankar that Pakistan is ready to stop— revealing that it wasn't just the US that Pakistan went to at that the time to convince India… pic.twitter.com/uV3wU7av13 — Shubhangi Sharma (@ItsShubhangi) June 19, 2025 हम पलटवार की तैयारी में थे, लेकिन उससे पहले भारत ने कर दिया हमला- डार इशाक डार (Ishaq Dar) ने इस इंटरव्यू में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइलों से उसके ऐयरबेस पर हमला किया, तब पाकिस्तान खुद भारत पर एक जवाबी सैन्य कार्रवाई की योजना बना रहा था। लेकिन भारत ने जिस तरह से सटीक हमला किया उससे पाकिस्तान (Shehbaz Sharif) की रणनीति निष्प्रभावी हो गई। क्योंकि भारत के हमले में दोनों एयरबेस को काफी नुकसान पहुंचा और वे किसी भी सैन्य ऑपरेशन लायक नहीं रह गए। इशाक डार ने यह भी स्वीकार्य किया कि भारत का यह हमला पाकिस्तान के लिए “सामरिक रूप से बेहद चौंकाने वाला” था।  सऊदी अरब से की थी मध्यस्थता की अपील  इशाक डार ने इस दौरान यह भी खुलासा किया कि भारत के इस हमले से हालात इतने तनावपूर्ण हो चुके थे कि हमें तुरंत अमेरिका और सऊदी अरब से मदद मांगनी पड़ी। उन्होंने कहा कि कुछ समय बाद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान का उनके पास फोन आया और उन्होंने पूछा कि क्या मैं इस संघर्ष को रोकने के लिए व्यक्तिगत रूप से भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बात करूं और उनसे कहूं कि पाकिस्तान सीजफायर के लिए तैयार है? इशाक डार ने बताया कि क्राउन प्रिंस की बात पर उन्होंने तुरंत सहमति व्यक्ति कर दी और कहा कि हां प्लीज आप एस. जयशंकर से बात करके बताईए कि पाकिस्तान सीजफायर चाहता है।  इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! एयर डिफेंस तबाह हुआ तो घुटनों पर आया पाक इशाक डार द्वारा यह सच्चाई स्वीकार्य करने से एक बात साफ हो गई है कि भारत के हमले से पाकिस्तान बेहद डर गया था और समझ गया था कि अगर सीजफायर नहीं होता तो भारत उसका नामो निशान मिटा देगा। भारत पहले ही पाकिस्तान के एयर डिफेंस को तबाह कर चुका था। इसलिए  वह भारत के हमले को रोकने में सक्षम ही नहीं था। इशाक डार को पाकिस्तान के बरबोले नेताओं में गिना जाता है। उन्होंने कहा कि सऊदी प्रिंस ने खुद उन्हें फोन किया था, लेकिन जिस तरह के हालात थे, उससे ऐसा लगता नहीं है। पाकिस्तान उस समय जिस तरह घुटनों पर बैठा हुआ था, उससे तो यही लगता है कि पाकिस्तान ने खुद ही सऊदी अरब को फोन लगाकर सीजफायर की गुहार लगाई होगी। भारत के इस हमले से पाकिस्तान का नूर खान एयरबेस अभी भी आईसीयू में है। यह एयरबेस अभी भी पूरी तरह से बंद पड़ा है और यहां पर मरम्मत का कार्य चल रहा है। बता दें कि इससे पहले पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने भी स्वीकार किया था कि भारत के हमले में उनके कई एयरबेस को भारी नुकसान हुआ है। वहीं पाकिस्तानी सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर (Asim Munir) भी हाल ही में वॉशिंगटन में बयान दे चुके हैं कि भारत अब “न्यू नॉमर्ल” सैन्य सिद्धांत स्थापित करना चाहता है, जो क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक गंभीर चुनौती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Shehbaz Sharif #IndiaPakistanConflict #AirstrikeTruth #NoorKhanAirbase #ShorkotAirbase #PakistanNews #BreakingNews

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