Jammu and Kashmir issue

Jammu and Kashmir issue: UN में दहाड़ा भारत, कहा जम्मू और कश्मीर ‘भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा’

पाकिस्तान दशकों से यूएन में कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) का राग अलाप रहा है। कश्मीर को अपना बताने का कोई मौका नहीं छोड़ता। इस बार संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि और राजदूत पी हरीश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लिया। दरअसल, भारत ने संयुक्त राष्ट्र में शांति स्थापना सुधारों पर बहस के दौरान जम्मू और कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के बार-बार दिए गए बयानों को सख्ती से खारिज किया। न सिर्फ ख़ारिज किया बल्कि उन्हें अनुचित बताते हुए स्पष्ट किया कि जम्मू और कश्मीर भारत का अभिन्न अंग था, है और हमेशा रहेगा। पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर अवैध रूप से कब्जा रखा है, जिसे उसे खाली करना ही होगा।” बता दें कि पाकिस्तानी टिप्पणी को खारिज करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने कहा कि “पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने एक बार फिर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर पर अनुचित टिप्पणी की है। इस तरह बार-बार संदर्भ देने से उनके अवैध दावे मान्य नहीं हो सकते। न ही पाकिस्तान प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को उचित ठहराया जा सकता है।” पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने फिर की भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) पर अनुचित टिप्पणी   यही नहीं, भारतीय राजदूत पार्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि “वह शांति स्थापना पर मुख्य चर्चाओं से ध्यान भटकाने का प्रयास कर रहा है।” इस दौरान उन्होंने कहा कि “भारत यह स्पष्ट करना आवश्यक समझता है कि पाकिस्तान के प्रतिनिधि ने एक बार फिर भारतीय केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर (Jammu and Kashmir issue) पर अनुचित टिप्पणी की है। ऐसे बार-बार किए गए दावे न तो उनके अवैध दावों को मान्यता देते हैं और न ही उनके राज्य-प्रायोजित सीमा पार आतंकवाद को सही ठहराते हैं।” यही नहीं, पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए हरीश ने यह भी स्पष्ट रूप से कहा कि “पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के एक हिस्से पर अवैध रूप से कब्जा किए हुए है और उसे तुरंत खाली करना चाहिए। इस पर अधिक जोर देते हुए उन्होंने कहा कि “पाकिस्तान अवैध रूप से जम्मू-कश्मीर के क्षेत्र पर कब्जा बनाए हुए है, जिसे उसे छोड़ देना चाहिए।” इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि “भारत वैश्विक मंचों पर अपनी संप्रभुता पर सवाल नहीं उठने देगा।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन म पाकिस्तान को सलाह (Jammu and Kashmir issue) देंगे कि वह इस मंच का ध्यान भटकाने की कोशिश न करे इस दरम्यान हरीश ने पाकिस्तान के अपने संकीर्ण और विभाजनकारी एजेंडे के लिए संयुक्त राष्ट्र मंच के दुरुपयोग के प्रयासों को खारिज करते हुए कहा कि “हम पाकिस्तान को सलाह (Jammu and Kashmir issue) देंगे कि वह इस मंच का ध्यान भटकाने की कोशिश न करे। इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “भारत विस्तृत प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं समझता, क्योंकि उसकी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। भारत अधिक विस्तृत उत्तर देने के अधिकार का प्रयोग करने से परहेज करेगा।” दरअसल, संयुक्त राष्ट्र सत्र शांति स्थापना में सुधारों पर केंद्रित था। इस दौरान भारत ने इस अवसर का उपयोग सशस्त्र समूहों और आधुनिक हथियारों से उत्पन्न खतरों जैसी चुनौतियों से निपटने की आवश्यकता पर जोर देने के लिए किया। बता दें कि इस दौरान हरीश ने शांति अभियानों के जनादेश को निर्धारित करने में सेना और पुलिस योगदान देने वाले देशों की महत्वपूर्ण भूमिका पर बात की और आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। Latest News in Hindi Today Hindi news Jammu and Kashmir issue IndiaAtUN #JammuAndKashmir #UnitedNations #IndiaStrong #KashmirIsIndia #IndianDiplomacy #UNSpeech #IndiaOnKashmir #GlobalPolitics

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Trump's 2025 Ukraine Strategy Impact on Zelensky's Leadership​

Trump Ukraine plan 2025: क्या जेलेंस्की को सत्ता से बेदखल कर देंगे अमेरकी राष्टपति ट्रंप? ये है पूरा प्लान

पीछले तीन वर्षों से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पहल के चलते थमने जा रहा है। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि यदि दोनों देशों के बीच युद्ध विराम होता है तो यूक्रेन का क्या होगा? और इससे भी बड़ा सवाल यह कि यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की का क्या होगा (Trump Ukraine plan 2025) ? ये वो सवाल हैं जो हर किसी के मन में कौंध रहे हैं। इस बीच ट्रंप ने न सिर्फ युद्धविराम का रोडमैप तैयार कर लिया है, बल्कि जेलेंस्की और यूक्रेन के भविष्य को लेकर अंतिम फैसला कर लिया है। ट्रंप के यूक्रेन प्लान को लेकर नया और बड़ा खुलासा हुआ है। ट्रंप और उनकी टीम ने जेलेंस्की का तख्तापलट करने की तैयारी कर ली है। जेलेंस्की के बाद यूक्रेन की कमान कौन संभालेगा, ये भी तय हो गया है। जानकारी के मुताबिक यूक्रेन को लेकर अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप और जेलेंस्की ने एक ब्लूप्रिंट तैयार किया है। लेकिन उससे भी बड़ी बात यह कि उनका ये ब्लूप्रिंट लीक हो गया है। लीक हुए ब्लूप्रिंट से पता चला है कि ट्रंप किसी यूक्रेनी महिला को यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। दरअसल, ट्रंप का यह कदम युद्धविराम के बाद होने वाले चुनावों के साथ जुड़ा हुआ है।  यूक्रेन की पूर्व प्रधानमंत्री को ट्रंप सौंपना चाहते हैं यूक्रेन की कमान (Trump Ukraine plan 2025) सोचने वाली गंभीर बात यह कि आखिर वो महिला कौन है जिसे ट्रंप यूक्रेन की कमान सौंपना चाहते हैं (Trump Ukraine plan 2025)? तो वो कोई और नहीं, बल्कि यूक्रेन की पूर्व प्रधानमंत्री यूलिया तिमोशेंको हैं जिन्हें जेलेंस्की की जगह ट्रंप यूक्रेन का राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। ये वही यूलिया हैं, जो रूस के आक्रमण के बाद से ही राजनीति से नदारद थीं, लेकिन अब तीन साल बाद अचानक बेहद सक्रिय हो गई हैं। खासकर तब, जब युद्ध खत्म होने के करीब है। न सिर्फ वो राजनीति में सक्रिय हुई हैं बल्कि ट्रंप के साथ मिलकर काम भी कर रही हैं। जानकारी के मुताबिक जेलेंस्की को हटाकर ट्रंप यूलिया तिमोशेंको को यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं। मजे की बात यह कि जब ट्रंप ने युद्धविराम के लिए पूरी ताकत झोंक दी है। गौर करने वाली बात यह कि इन दिनों यूलिया कीव की राजनीति में अचानक काफी सक्रिय हो गई हैं। वो एक तरफ शांति समझौता करवाने में जुटे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफों के पुल बाँध रही हैं हैं तो दूसरी तरफ जेलेंस्की की नीतियों का खुलकर विरोध भी कर रही हैं। कहा तो यह भी जा रहा है कि ट्रंप युद्धविराम के तुरंत बाद यूक्रेन में चुनाव करवाएंगे। दरअसल, ट्रंप यूलिया को ही यूक्रेन का अगला राष्ट्रपति बनाना चाहते हैं।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर जेलेंस्की का तख्तापलट करने के लिए आधार तैयार कर रही (Trump Ukraine plan 2025) हैं यूलिया  इस बीच यूलिया बैकडोर चैनल से लगातार ट्रंप के संपर्क में हैं। वो जेलेंस्की का तख्तापलट करने के लिए आधार तैयार कर रही (Trump Ukraine plan 2025) हैं। इस हेतु वो यूक्रेन में अधिक से अधिक लोगों का समर्थन जुटा रही हैं। तो वहीं ट्रंप जेलेंस्की पर चुनाव के लिए लगातार दबाव डाल रहे हैं। इस बीच अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने बड़ा दावा किया है। विटकॉफ के मुताबिक “जेलेंस्की ट्रंप के सामने झुक गए हैं।” खबर के मुताबिक कीव राष्ट्रपति चुनाव करवाने के लिए तैयार हो गया है। इधर युद्ध खत्म होगा और उधर यूक्रेन में राष्ट्रपति चुनाव का बिगुल बज जाएगा। इसके बाद जेलेंस्की की विदाई हो सकती है। बेशक यूक्रेन में चुनाव का सीधा सा मतलब है कि जेलेंस्की और उनकी सरकार का पतन। कहने की जरूरत नहीं, यूलिया एक तरह से यूक्रेन में ट्रंप की कठपुतली राष्ट्रपति होंगी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Ukraine plan 2025 #TrumpUkrainePlan​ #ZelenskyRemoval​ #USUkrainePolicy​ #TrumpPeaceStrategy​ #UkraineCeasefire2025​ #TrumpPutinTalks​ #ZelenskyOuster​

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Pakistan occupied Balochistan

पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन

बलूचिस्तान (Balochistan) क्षेत्रफल के हिसाब से पाकिस्तान का सबसे बड़ा राज्य है और यह आकार के मामले में जर्मनी के बराबर है, लेकिन आबादी के मामले में यह राज्य विरान है। यहां की आबादी मात्र डेढ़ करोड़ है, जो जर्मनी से सात करोड़ कम है। लेकिन इस राज्य की जो सबसे बड़ी खूबी है, वह है कि यह राज्य प्राकृतिक संसाधनों से भरा पूरा है। यहां की खदानों में सोना, तांबा और तेल जैसे कई चीजें मौजूद हैं। पाकिस्तान (Pakistan) इन्हीं संसाधनों का इस्तेमाल कर देश की जरूरतों को पूरा कर रहा है। लेकिन इतना सबकुछ होते हुए बलूचिस्तान (Balochistan) सबसे पिछड़ा राज्य है। यहां के 70 फीसदी लोग गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन करने को मजबूर हैं। स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मामलों में यह राज्य न केवल पाकिस्तान (Pakistan) बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में सबसे पीछे हैं। इसी गरीबी और पिछड़ेपन के कारण ही बलूचिस्तान में पाकिस्तान (Pakistan) के खिलाफ नफरत बढ़ती जा रही है। बलूच लोग अपने हक की मांग को लेकर विद्रोह कर रहे और आए दिन पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहे हैं।  कैसे और शुरू हुआ बलूचिस्तान में विद्रोह भारत-पाकिस्तान बंटवारे के बाद से ही बलूचिस्तान (Balochistan) का इतिहास विद्रोह भरा रहा है। बंटवारे के समय चार अगस्त 1947 को दिल्ली में एक बैठक हुई थी। इसमें कलात के शासक मीर अहमद खान, जवाहर लाल नेहरू और जिन्ना के साथ ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन भी शामिल हुए थे। इस बैठक में फैसला लिया गया था कि कलात, लास बेला, खरान और मकरान को मिलाकर एक आजाद बलूचिस्तान बनाया जाएगा और 11 अगस्त को बलूचिस्तान को अलग देश घोषित कर दिया गया। बलूचिस्तान को आजाद घोषित करने के करीब एक माह बाद 12 सितंबर को इंग्लैंड ने एक प्रस्ताव पारित किया। जिसमें कहा गया कि बलूचिस्तान आर्थिक और सुरक्षा के लिहाज से अलग देश बनने की हालत में नहीं है।  पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया जिसके बाद जिन्ना ने अहमद खान से बलूचिस्तान का पाकिस्तान में विलय करने को कहा। लेकिन कलात के शासक ने यह बात नहीं मानी। जिसके बाद पाकिस्तान ने 1948 में बलूचिस्तान पर हमला कर जबरदस्ती कब्जा कर लिया। लेकिन बलूचों ने हार नहीं मानी और पाकिस्तान के खिलाफ बगावत शुरू हो गई। यह संघर्ष तभी से जारी है। बलूचों का कहना है कि यहां के प्राकृतिक संसाधनों पर उनका हक है, लेकिन पाकिस्तान ने चीन के साथ मिलकर अवैध कब्जा कर रखा है और वो इस कब्जे को हटाने के लिए लड़ रहे हैं। इस लड़ाई में अब तक हजारों बलूच मारे जा चुके हैं और हजारों गायब हो चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी बलूच हार मानने को तैयार नहीं और पाकिस्तानी सेना पर लगातार जवाबी हमले कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका ने बनाया छठी पीढ़ी का सबसे एडवांस फाइटर जेट, खूबियां सुन कांप जाएगा चीन! ट्रंप ने उठाया राज से पर्दा  औरंगजेब को भी बलूचों के सामने होना पड़ा था नतमस्तक  भारतीय राजा शेरशाह सूरी ने मुगल शासक हुमायूं को युद्ध में हरा दिया था, जिसके बाद उसने भागकर ईरान में शरण ली थी। साल 1545 में जब शेरशाह सूरी की मौत हुई तो हुमायूं फिर भारत लौट आया और बलूचों की मदद से ही साल 1555 में उसने दिल्ली पर कब्जा किया था। साल 1659 में जब औरंगजेब मुगल बादशाह बना तो बलूच सरदारों ने उसके खिलाफ विद्रोह छेड़ दिया और साल 1666 में बलूचों ने औरंगजेब की सेना को हराकर कलात और क्वेटा पर कब्जा कर दिया। इन इलाकों को औरंगजेब दोबारा कभी नहीं जीत पाया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Balochistan #BalochFreedom #PakistanOccupiedBalochistan #Balochistan #BalochRights #FreeBalochistan #BalochHistory #AurangzebRule #PakistanCrackdown #BalochStruggle #HumanRights

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Pakistan Army Chief's Alleged Coup Plot with Baloch Insurgents​

पाकिस्तान में बलूचों को मोहरा बनाकर तख्तापलट (Military takeover Pakistan) करने की फिराक में हैं आर्मी चीफ? 

ऐसे में बड़ा सवाल यह की आखिर पाकिस्तान की आवाम को मुनीर क्या संदेश देना चाहते हैं? कुल-मिलाकर उनके कहने का मतलब यही न कि शहबाज से न सिर्फ देश संभल रहा है बल्कि उग्रवाद और आतंरिक आतंकवाद से लड़ने में उनकी सरकार सक्षम नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान को एक मजबूत नेतृत्व की जरूरत है। उनके मुताबिक सेना ही जो पाकिस्तान ताकतवर बना सकती है। जानकारों की माने तो बलूचों को मोहरा बनाकर आर्मी चीफ पाकिस्तान में तख्तापलट (Military takeover Pakistan) करने की फिराक में हैं। बता दें कि भारत की ही तरह पाकिस्तान में भी लोकतंत्र का शासन है। बेशक लोकतंत्र में सरकार अपना काम करती है। देश में आर्मी का काम है देश की सुरक्षा करना। लेकिन मजे की बात यह कि अपने काम को बेहतर तरीके से करने के बजाय मुनीर उल्टा सरकार को ही नसीहत देने लगे हैं। जाहिर  तौरपर ऐसे में यह कहा जा सकता है कि वह मुनीर वही चाल चलने की साजिश कर रहे हैं जो कभी दशकों पहले परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ के साथ चली थी। ऐसे में पाकिस्तान के वर्तमान प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को भी सत्ता जाने का डर सता रहा है। दरअसल, जिस तरह मुनीर बलोचों से जंग और पाक में हो रहे हमलों का ठीकरा शहबाज शरीफ पर फोड़ रहे हैं, ठीक उसी तरह आज से तकरीबन 25 साल पहले जनरल परवेज मुशर्रफ ने भी कारगिल की हार का ठीकरा नवाज शरीफ फर फोड़ा था।  इसे भी पढ़ें: इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले पर भड़की स्वाति मालीवाल, सुप्रीम कोर्ट से की दखल देने की मांग जनरल परवेज मुशर्रफ ने सैन्य तख्तापलट के जरिए नवाज शरीफ को कर दिया था सत्ता से बेदखल  बता दें कि पकिस्तान के जनरल परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ को 12 अक्टूबर 1999 को एक सैन्य तख्तापलट के जरिए सत्ता से बेदखल कर दिया था। उस समय मुशर्रफ पाकिस्तान के सेना प्रमुख थे। गौर करने वाली बात यह कि यह तख्तापलट (Military takeover Pakistan) कारगिल युद्ध में पाकिस्तान की हार के बाद यह हुआ था। जबकि कारगिल युद्ध के मास्टरमाइंड और रणनीतिकार खुद परवेज मुशर्रफ थे। उन्होंने ही कारगिल युद्ध में अहम भूमिका निभाई थी। और उन्हीं के नेतृत्व में पाकिस्तानी सेना और एलओसी पार कर कारगिल क्षेत्र में घुसपैठ की थी। खैर, बता दें कि पाकिस्तान वर्तमान समय में बड़े संकट से गुजर रहा है। देश के अलग-अलग हिस्सों में बम धमाके हो रहे हैं, तो कहीं अज्ञात हमलावर खौफ फैला रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि पाकिस्तानी सेना हालात पर काबू पाने में नाकाम नजर आ रही है। आम जनता भुखमरी की मार झेल रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Military takeover Pakistan #PakistanArmyChief​ #BalochistanConflict​ #MilitaryCoupPakistan​ #AsimMunir​ #BalochLiberationArmy​ #PakistanPoliticalCrisis​

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Trump Executive Order Causes 5.32 Lakh Homeless Crisis

Trump executive order: ट्रंप के इस फरमान से 5.32 लाख लोग हुए बेघर 

जब से अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से वह देश में रह रहे अवैध प्रवासियों को निकालने में लगे हुए हैं। एक के बाद एक वो चौंकाने वाले फैसले कर रहे हैं। अपने इन्हीं फैसलों में वह अमेरिका के भीतर अवैध रूप से रह रहे लोगों के खिलाफ पहले ही अभियान चला चुके हैं। राष्ट्रपति ने अवैध आप्रवासियों के खिलाफ अभियान तेज (Trump executive order) किया है। इस सिलसिले में उन्होंने भारत सहित दुनिया के कई देशों के हजारों लोगों को पकड़कर उनके देश भेजने का काम किया है। इस सभी कार्रवाई को उनकी सरकार अमेरिका को फिर से महान बनाने की रणनीति के लिए जरूरी बता रही है। इस पूरे मामले पर उनका कहना है कि “बाहरी लोगों ने अमेरिकियों का हक मार लिया है और इस कारण अमेरिका में अमेरिकियों के लिए रोजगार के अवसर कम हो गए हैं। “ ट्रंप के इस फैसले से तकरीबन 5,32,000 लोग (Trump executive order) प्रभावित होंगे हालिया लिए फैसले में अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने कहा है कि “वह क्यूबा, हैती, निकारागुआ और वेनेजुएला के लाखों लोगों से कानूनी सुरक्षा छीन लेगा। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इससे तकरीबन 5,32,000 लोग प्रभावित (Trump executive order) होंगे। उन्हें महीने भर के भीतर देश छोड़ना पड़ सकता है। दरअसल, यह फैसला उन लोगों पर लागू होगा, जो अक्टूबर साल 2022 के बाद अमेरिका आए थे। जानकारी के लिए बता दें कि ये लोग वित्तीय सहायकों के साथ आए थे और उन्हें अमेरिका में दो साल तक रहने और काम करने की अनुमति मिली थी। इस मामले पर होमलैंड सिक्योरिटी सचिव क्रिस्टी नोएम ने कहा कि “इन लोगों का कानूनी दर्जा 24 अप्रैल को खत्म हो जाएगा। इसके बाद फेडरल रजिस्टर में यह नोटिस छपने के 30 दिन बाद इनको देश छोड़ना पड़ेगा। कहने की जरूरत नहीं यह नई नीति खास तौरपर उन लोगों पर असर डालेगी जो पहले से अमेरिका में रह रहे हैं और ह्यूमैनिटेरियन पैरोल प्रोग्राम के तहत आए थे। बता दें कि यह प्रोग्राम पहले ट्रंप प्रशासन ने खत्म किया था, क्योंकि उनका मानना था कि “इसका गलत इस्तेमाल हो रहा था।” ध्यान देने वाली बात यह कि यह कानूनी तरीका लंबे समय से उन लोगों को अस्थायी रूप से अमेरिका में रहने की इजाजत देता था, जिनके देशों में युद्ध या राजनीतिक अस्थिरता थी।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे बता दें कि अपने चुनाव अभियान में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वादा किया था कि वह अवैध रूप से अमेरिका में रह रहे लाखों लोगों को देश से (Trump executive order) निकालेंगे। राष्ट्रपति बनने के बाद अब आप्रवासियों के लिए उन्होंने कानूनी रास्ते भी बंद करने शुरू कर दिए हैं। इस नए आदेश से पहले, इस प्रोग्राम के लाभार्थी अपने पैरोल की अवधि तक अमेरिका में रह सकते थे, लेकिन प्रशासन ने उनके शरण, वीजा या अन्य अनुरोधों को प्रोसेस करना बंद कर दिया। हलाँकि इस फैसले को पहले ही संघीय अदालतों में चुनौती दी जा चुकी है। कुछ अमेरिकी नागरिकों और आप्रवासियों के समूह ने ट्रंप प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया है। दरअसल, वे ह्यूमैनिटेरियन पैरोल को फिर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। विदित हो कि बाइडन प्रशासन ने इन चार देशों से हर महीने 30,000 लोगों को दो साल के लिए अमेरिका आने की अनुमति दी थी, साथ में काम करने का अधिकार भी दिया था।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump executive order #TrumpExecutiveOrder #USHomelessCrisis #TrumpPolicyImpact #HomelessnessSurge #PoliticalDebate #USHousingCrisis #TrumpNews #PolicyEffects #BreakingNews #USPolitics

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Pakistan Terror Attack Pak Army Captain Martyred

Terror attack in Pakistan: आतंकवाद से खुद परेशान हुआ पाकिस्तान, पाकिस्तानी सेना का कैप्टन शहीद, 10 आतंकवादी ढेर

पडोसी मुल्क पाकिस्तान में दिन-ब-दिन आतंकवादी हमलों की घटना है कि बढ़ती ही जा रही है। हाल ही में क्वेटा में जफ़र एक्सप्रेस ट्रेन हाईजैक की घटना ने देश में हड़कंप मचा दिया था। बता दें कि बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने 400 से अधिक यात्रियों को बंधक बना लिया था। हालांकि इस मामले में पाकिस्तानी सेना और बीएलए दोनों ने अलग-अलग दावे किए। सेना की माने तो उसने 33 आतंकवादियों को मारकर लगभग सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया। तो वहीं दूसरी बीएलए ने दावा किया कि उसने 214 बंधकों और कई पाकिस्तानी सैनिकों को मार गिराया। खैर, इस बीच पाकिस्तान में आतंकवादी हमलों की बढ़ती घटनाओं के बीच सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में 10 आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया है। जानकारी के मुताबिक़ यह मुठभेड़ गुरुवार को उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र में (Terror attack in Pakistan) हुई। इस मुठभेड़ में सात आतंकवादी मारे गए। हालांकि इस कार्रवाई के दौरान पाकिस्तानी सेना का एक कैप्टन भी शहीद हुआ। दरअसल, यह ऑपरेशन खुफिया जानकारी के आधार पर दक्षिण वजीरिस्तान की सीमा से लगे डेरा इस्माइल खान जिले के कर्री मलंग इलाके में चलाया गया था। कहने की जरूरत नहीं, पाकिस्तानी सेना ने आतंकवाद के खतरे को जड़ से खत्म करने की खा ली है। खैबर पख्तूनख्वा में हुई मुठभेड़ (Terror attack in Pakistan) में सेना के एक कैप्टन समेत कम से कम 10 आतंकवादी मारे गए खैर, इस पूरे मामले में पाकिस्तानी सेना ने बताया कि “खैबर पख्तूनख्वा के डेरा इस्माइल खान जिले में एक मुठभेड़ (Terror attack in Pakistan) हुई, जिसमें सेना के एक कैप्टन समेत कम से कम 10 आतंकवादी मारे गए।” सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) के मुताबिक यह मुठभेड़ बृहस्पतिवार को एक खुफिया अभियान के दौरान हुई। इलाके में आतंकवादियों की मौजूदगी की सूचना मिलने के बाद इसे अंजाम दिया गया। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच भीषण मुठभेड़ में कैप्टन हसनैन अख्तर की मौत हो गई। पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर के मुताबिक, इस अभियान में कई आतंकवादी मारे गए। मारे गए आतंकवादियों के पास से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया गया है। यही नहीं,आईएसपीआर ने बताया कि ये आतंकवादी न केवल सुरक्षा एजेंसियों पर हमलों में लिप्त थे, बल्कि आम नागरिकों की हत्याओं में भी शामिल थे। मुठभेड़ के बाद इलाके में तलाशी अभियान जारी है। अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी (Terror attack in Pakistan) आई है ध्यान देनी वाली बात यह कि साल 2021 में अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से पाकिस्तान में आतंकवादी घटनाओं में तेज़ी (Terror attack in Pakistan) आई है। खास तौरपर खैबर पख्तूनख्वा और बलूचिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को लगातार निशाना बनाया जा रहा है। कल तक दुनिया भर में आतंकियों को पनाह देने वाला देश पाकिस्तान आज स्वयं दहशतगर्दी का शिकार बन गया है।  इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर Terror attack in Pakistan: Pakistan itself troubled by terrorism, Pakistani Army Captain martyred, 10 terrorists killed The incidents of terrorist attacks are increasing day by day in the neighboring country Pakistan. Recently, the incident of Jaffar Express train hijack in Quetta created a stir in the country. Let us tell you that the Balochistan Liberation Army (BLA) had taken more than 400 passengers hostage. However, both the Pakistani Army and BLA made different claims in this matter. If the army is to be believed, it killed 33 terrorists and rescued almost all the hostages safely. On the other hand, BLA claimed that it killed 214 hostages and many Pakistani soldiers. Well, meanwhile, amid the increasing incidents of terrorist attacks in Pakistan, the security forces have claimed to have killed 10 terrorists in Khyber Pakhtunkhwa province. According to the information, this encounter took place on Thursday in the northwestern region (Terror attack in Pakistan). Seven terrorists were killed in this encounter. However, during this operation, a captain of the Pakistani army was also martyred. Actually, this operation was carried out in the Karri Malang area of ​​​​Dera Ismail Khan district bordering South Waziristan on the basis of intelligence information. Needless to say, the Pakistani army is determined to root out the threat of terrorism. Latest News in Hindi Today Hindi news Terror attack in Pakistan #PakistanTerrorAttack #PakArmy #Terrorism #PakistanNews #SecurityCrisis #PakistanViolence #TerrorAttack #PakArmyMartyr #GlobalTerror #PakistanUpdates

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Trump Zelensky ceasefire talks

Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire: पुतिन के बाद ट्रंप ने जेलेंस्की से की युद्धविराम पर बात, जल्द खत्म होगी जंग

पिछले तीन साल से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे युद्ध को रोकने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर संभव कोशिश कर रहे हैं। अच्छी बात यह कि उनकी कोशिश रंग भी ला रही है। इस सिलसिले में मंगलवार जो रूसी राष्ट्रपति पुतिन से बातचीत करने के बाद अगले दिन ही डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) से घंटे भर बात की। इस बातचीत में उन्होंने शांति समझौते के लिए रूस और यूक्रेन के अनुरोधों और जरूरतों पर चर्चा की। यही नहीं, इस बातचीत की जानकारी उन्होंने ट्रुथ सोशल पर पर साझा करते हुए कहा कि “अधिकांश चर्चा मंगलवार को राष्ट्रपति पुतिन के साथ की गई बातचीत पर ही आधारित थी, ताकि रूस और यूक्रेन दोनों को उनके अनुरोधों और जरूरतों के अनुसार एक साथ लाया जा सके।” ट्रंप ने कहा कि “हम पूरी तरह से सही रास्ते पर हैं।” बता दें कि ट्रंप के साथ फोन पर हुई बातचीत में पुतिन ने ट्रंप के 30 दिनों के पूर्ण युद्धविराम के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था। लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि “वह केवल यूक्रेन के ऊर्जा संयंत्रों पर 30 दिनों के लिए हमले रोकने पर सहमत होंगे।” गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप इसी प्रस्ताव को यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेंलेस्की ने तुरंत स्वीकार कर लिया। इससे यह उम्मीद लगाई जा रही है कि तीन वर्ष से चल रहा रूस-यूक्रेन युद्ध जल्द ही समाप्त हो सकता है।  दोनों नेताओं ने इस बातचीत को बढ़िया बताया (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire)  जानकारी के मुताबिक, रूसी राष्ट्रपति पुतिन की ओर से ट्रंप के 30 दिन के पूर्ण युद्ध विराम के प्रयास को ठुकराने के बाद आंशिक युद्ध विराम समझौता हुआ। पुतिन के बाद ट्रंप ने बुधवार को यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की से लगभग एक घंटे की बातचीत की। दोनों नेताओं ने इस बातचीत को बढ़िया बताया। बातचीत (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) के बाद जेलेंस्की ने कहा कि “इस वीकेंड सऊदी अरब में होने वाली तकनीकी वार्ता में यह तय करने की कोशिश की जाएगी कि समझौते के तहत किस प्रकार के बुनियादी ढांचे की रक्षा की जाएगी।” मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी और रूसी नेताओं के बीच मंगलवार को हुई टेलीफोन वार्ता में पुतिन ने प्रस्तावित 30 दिवसीय पूर्ण युद्धविराम को अस्वीकार कर दिया, जिसे यूक्रेन स्वीकार कर चुका है। इस बातचीत पर जेलेंस्की ने कहा कि “मैं वास्तव में नियंत्रण चाहता हूं, लेकिन मेरा मानना ​​है कि इस नियंत्रण का मुख्य एजेंट संयुक्त राज्य अमेरिका होना चाहिए।” इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “कीव युद्ध विराम के लिए प्रतिबद्ध होने के लिए तैयार होगा।” इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर बातचीत  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) घंटे भर बाद रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर किये हवाई हमले  हैरान करने वाली बात यह कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मंगलवार को फोन पर हुई बातचीत  (Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire) को कुछ घंटे भी नहीं हुए कि रूस और यूक्रेन ने एक-दूसरे पर हवाई हमले कर दिए। दोनों देशों ने ऊर्जा संयंत्रों पर हमले रोकने को लेकर नए समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। खैर, राष्ट्रपति ट्रंप ने दोनों देशों को फिलहाल आंशिक युद्ध विराम के लिए राजी कर तो लिया है लेकिन देखना दिलचस्प होगा कि यह कब लागू होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump and Zelensky Discuss War Ceasefire #TrumpZelensky #UkraineWar #WarCeasefire #TrumpDiplomacy #ZelenskyTalks #PutinUkraine #RussiaUkraineWar #PeaceTalks #GlobalPolitics #CeasefireEfforts

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Netanyahu on Gaza

Netanyahu on Gaza: गाजा हमले में 400 लोगों की मौत के बाद नेतन्याहू ने कहा, अभी तो ये शुरुआत भर है

तकरीबन दो महीने तक इजरायल (Israel) और हमास के बीच चला युद्धविराम आखिरकार टूट गया। दरअसल, हमास द्वारा शेष बंधकों की रिहाई नहीं किए जाने के चलते मंगलवार को इजरायल ने (Netanyahu on Gaza) गाजा पट्टी पर एक के बाद एक ताबड़तोड़ बमबारी की। इस बमबारी में तकरीबन 400 से ज्यादा फलस्तीनी नागरिक मारे गए और 560 से अधिक घायल हुए हैं। इस हमले को तब अंजाम दिया गया जब रजमान के दौरान लोग तड़के सहरी की तैयारी कर रहे थे। विदित हो कि जनवरी में युद्ध विराम प्रभावी होने के बाद गाजा पर इजरायल का यह सबसे बड़ा हवाई हमला है। कहने की जरूरत नहीं इजरायली हमलों से गाजा में एक बार फिर लोग दहशत में हैं। गाजा के अस्पतालों में शवों का अंबार लग गया है। जानकारी के मुताबिक गाजा में “हमास द्वारा संचालित स्वास्थ्य मंत्रालय ने बताया कि 404 लोगों की मौत हुई है और 560 ज्यादा घायल हुए हैं। कहा जा रहा है कि इस हमले से पहले इजरायल ने ट्रंप प्रशासन और व्हाइट हाउस के साथ विचार-विमर्श किया था। वाशिंगटन में व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने कहा कि “हमास युद्ध विराम को आगे बढ़ाने के लिए बंधकों को रिहा कर सकता था, लेकिन उसने इन्कार कर दिया और युद्ध का रास्ता चुना।”  प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा (Netanyahu on Gaza) कि “पूर्व में हुई रिहाई से साबित होता है कि बंधकों की रिहाई के लिए सैन्य दवाब जरूरी है इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि (Netanyahu on Gaza) इजरायल ने युद्धविराम को कई सप्ताह तक बढ़ाया, जिस दौरान हमें बंधक नहीं मिले।” उन्होंने आगे कहा कि “बातचीत करने वाली टीमों को कतर और मिस्र भेजा गया, लेकिन इससे कोई फायदा नहीं हुआ। हमास को और अधिक बंधकों को रिहा करने के लिए राजी करने की कोशिश हुई, लेकिन कोई रिजल्ट नहीं निकला, जिसके कारण यह आखिरी उपाय था।” नेतन्याहू ने कहा कि “हमास ने बंधक रिहाई का पहला चरण खत्म होने के बाद अभी भी 59 लोगों को रिहा करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया। इनमें से 24 के जिंदा होने की उम्मीद है।” यही नहीं, प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि “पूर्व में हुई रिहाई से साबित होता है कि बंधकों की रिहाई के लिए सैन्य दवाब जरूरी है।” उन्होंने जोर देते हुए आगे कहा कि “गाजा पर हवाई हमले सिर्फ शुरुआत हैं। युद्ध विराम के लिए सभी वार्ताएं युद्ध के दौरान ही होंगी।” एक बयान में उन्होंने  यह भी कहा कि “इजरायल तब तक आगे बढ़ता रहेगा जब तक वह युद्ध के अपने सभी लक्ष्यों को हासिल नहीं कर लेता। इन लक्ष्यों को हासिल करने से इजरायल को कोई नहीं रोक सकता। बता दें कि इन लक्ष्यों में हमास का सफाया और उसके कब्जे से सभी बंधकों की रिहाई शामिल है।”  जब तक जरूरत होगी, तब तक जारी रहेंगे हमले (Netanyahu on Gaza) इस बीच इजरायली सेना ने कहा कि “उसने दर्जनों लक्ष्यों पर हमला (Netanyahu on Gaza) किया। हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक जरूरत होगी।” इसके अलावा सेना ने लोगों को पूर्वी गाजा खाली करने का निर्देश दिया है। बेशक इससे आशंका जताई जा रही है कि संभवतः इजरायली सेना गाजा में फिर से जमीनी कार्रवाई शुरू कर सकती है। इजरायल ने कहा है कि वह हमास के कब्जे से बंधकों को मुक्त कराने के लिए और ज्यादा बल का प्रयोग करेगा। तो वहीं, हमास ने इजरायल पर युद्ध विराम का उल्लंघन करने और स्थायी शांति के लिए मध्यस्थों के प्रयासों को खतरे में डालने का आरोप लगाया है। यही नहीं, इजरायल ने पिछले दो सप्ताह से गाजा के लिए सहायता आपूर्ति रोक रखी है। इसकी वजह से मानवीय संकट गहरा गया है।  इसे भी पढ़ें:- इजराइल ने युद्धविराम तोड़ गाजा पर किया हवाई हमला, 200 से अधिक लोगों की हुई मौत अगर हमास अगले कुछ दिनों में बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो और भी तेज होगा ऑपरेशन  बता दें कि सात अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजरायल पर अचानक हमला किया था। हमास के इस हमले में करीब 1,200 लोग मारे गए थे। 251 लोगों को बंधक बना लिया गया था। इसके बाद इजरायल ने हमास के सफाए के लिए गाजा में सैन्य अभियान चला रखा था। 15 महीने तक चले इस अभियान में गाजा में तकरीबन 48 हजार से ज्यादा फलस्तीनी मारे जा चुके हैं। इस नरसंहार के बाद जनवरी में इजरायल और हमास के बीच छह सप्ताह के लिए युद्धविराम और बंधकों की रिहाई के लिए समझौता हुआ था। बता दें कि अभी भी हमास के कब्जे में 59 बंधक हैं। इजरायली अधिकारियों ने कहा कि “अगर हमास अगले कुछ दिनों में बातचीत के लिए तैयार नहीं होता, तो ऑपरेशन (Netanyahu on Gaza) और भी तेज हो जाएगा।” Latest News in Hindi Today Hindi news Netanyahu on Gaza Israel #IsraelGazaConflict #GazaUnderAttack #Netanyahu #MiddleEastCrisis #WarNews #BreakingNews #Palestine #Israel #GazaCrisis #GlobalConflict

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Trump Putin phone call

Trump Putin phone call: ट्रंप और पुतिन के बीच फोन पर लगभग दो घंटे हुई बात, इस शर्त पर होगी युद्ध समाप्ति

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयास में जुटे हैं। इस सिलसिले में दोनों के बीच मंगलवार को तकरीबन 2 घंटे तक फ़ोन पर (Trump Putin phone call) बातचीत हुई। जानकारी के मुताबिक इस दौरान युद्धविराम समझौते और अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की गई। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे चर्चा का हिस्सा होंगे। बड़ी बात यह कि इस बातचीत की पुष्टि व्हाइट हाउस के डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ डैन स्कैविनो ने की। उन्होंने बाकायदा ट्वीट कर बताया कि “राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ओवल ऑफिस में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ सुबह 10:00 बजे से बातचीत कर रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “चर्चा सकारात्मक दिशा में बढ़ रही है और अभी जारी है।” बता दें कि यह वार्ता तीन साल से चले आ रहे रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों का हिस्सा है। इस संघर्ष ने अब तक लाखों लोगों की जान ले ली है, करोड़ों को बेघर कर दिया है और यूक्रेन के कई क्षेत्रों को तबाह कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप और व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के प्रयासों के तहत 30 दिन के युद्धविराम प्रस्ताव पर बातचीत की। गौर करने वाली बात यह कि इस दौरान युद्ध विराम समझौते के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर भी चर्चा की गई। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर 30 दिनों के युद्धविराम समझौते को औपचारिक रूप से स्वीकार करने के लिए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को मनाने (Trump Putin phone call) की कोशिश कर रहे हैं। इसी सिलसिले में पिछले सप्ताह सऊदी अरब में हुई अमेरिका की अगुवाई वाली वार्ता के दौरान यूक्रेनी अधिकारियों ने सहमति व्यक्त की थी। इस वार्ता का नेतृत्व अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने किया था। पुतिन से फोन पर बातचीत से पहले ट्रंप ने संकेत दिया कि वार्ता के दौरान क्षेत्रीय नियंत्रण और परमाणु ऊर्जा संयंत्र जैसे प्रमुख बुनियादी ढांचे के मुद्दे चर्चा का हिस्सा होंगे। इसे भी पढ़ें:- दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई   पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की रखी है (Trump Putin phone call) शर्त  विदित हो कि सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “वे यूक्रेन युद्ध में युद्धविराम और शांति स्थापित करने के प्रयास करेंगे और उन्हें विश्वास है कि यह संभव हो सकता है।” तो वहीं दूसरी तरफ रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पिछले सप्ताह अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव का समर्थन किया था। लेकिन अब उन्होंने स्पष्ट किया कि “रूस अपनी सैन्य कार्रवाई रोकने से पहले कुछ महत्वपूर्ण शर्तों को पूरा करना चाहता है। जानकारी के मुताबिक क्रेमलिन ने क्रीमिया और पूर्वी यूक्रेन के बड़े हिस्सों सहित कब्जे में लिए गए क्षेत्रों पर अपना नियंत्रण बनाए रखने की शर्त (Trump Putin phone call) रखी है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump Putin phone call #TrumpPutin #RussiaUkraineWar #Geopolitics #GlobalDiplomacy #USRussiaRelations #TrumpNews #PutinUpdates #WarNegotiations #WorldPolitics #PeaceTalks

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Sunita Williams safe landing

Sunita Williams safe landing: दुनिया के साथ-साथ डॉल्फिन ने भी मनाया सुनीता विलियम्स की वापसी का जश्न, ट्रंप ने दी बधाई 

जून 2024 में 8 दिनों के अंतरिक्ष मिशन के रवाना हुईं भारतीय मुल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) के यान में तकनीकी खामी आ गई थीं। जिसकी वजह से उन्हें स्पेस स्टेशन में 9 माह गुजारने पड़े। इस बीच अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा समेत दुनिया भर के वैज्ञानिक सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की वापसी का इंतजार कर रहे थे। उनकी वापसी के लिए स्पेसएक्स ने क्रू-9 मिशन लॉन्च किया था। नौ महीने से अधिक समय तक अंतरिक्ष में गुजारने के बाद भारतीय मूल की अमेरिकी अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स अपने साथियों के साथ सकुशल लौट आईं (Sunita Williams safe landing) हैं। भारतीय समयानुसार, बुधवार तड़के 3:27 बजे उनका यान फ्लोरिडा तट के पास उतरा। उनके साथ क्रू-9 मिशन के अन्य दो सदस्य, निक हेग और अलेक्सांद्र गोरबुनोव भी सुरक्षित वापस आ गए। बता दें कि स्पेसएक्स का ड्रैगन कैप्सूल आईएसएस से 17 घंटे का सफर तय कर मैक्सिको की खाड़ी में पैराशूट की मदद से उतरा। ड्रैगन स्पेसक्राफ्ट की सफल लैंडिंग के बाद सुनीता विलियम्स सहित सभी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। जैसे ही वे कैप्सूल से बाहर आए, उन्होंने कैमरे की ओर हाथ हिलाकर पृथ्वी पर वापस लौटने की खुशी जाहिर की।  लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) के दौरान डॉल्फिन का झुंड पहुंचा था रिसीव करने  बता दें कि लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) के दौरान एक रोचक घटना घटी। दरअसल, ड्रैगन कैप्सूल के लैंड होते ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा की एक टीम बीच समुद्र में मौजूद पहुंची। इस दौरान उन्होंने कैप्सूल के पास डॉल्फिन का एक झुंड देखा। इसे देखकर वहां मौजूद सभी के चेहरे खिलखिला उठे। नजारा देखका ऐसा लग रहा था मानो डॉल्फिन स्वयं अंतरिक्ष यात्रियों को रिसीव करने पहुंची हैं। उन्हें खुद भी महीनों से  सुनीता विलियम्स की वापसी का इंतजार था। डॉल्फिन के इस झुंड का वीडियो तेजी से इंटरनेट पर वायरल हो रहा है। नासा के जॉनसन स्पेस सेंटर ने डॉल्फिन वाला वीडियो ‘एक्स’ पर शेयर करते हुए कहा कि “अनप्लान्ड वेलकम क्रू! क्रू-9 के पास आज दोपहर को कुछ आश्चर्यजनक आगंतुक आए।” इसे भी पढ़ें:- नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर सफलतापूर्वक लैंडिंग (Sunita Williams safe landing) पर व्हाइट हाउस ने एलन मस्क, स्पेसएक्स और नासा को दिया धन्यवाद  The unplanned welcome crew! Crew-9 had some surprise visitors after splashing down this afternoon.🐬 pic.twitter.com/yuOxtTsSLV — NASA's Johnson Space Center (@NASA_Johnson) March 18, 2025 इस सफलता (Sunita Williams safe landing)  पर व्हाइट हाउस ने एलन मस्क, स्पेसएक्स और नासा को धन्यवाद देते हुए सोशल मीडिया पर लिखा कि “जो वादा किया, वो निभाया। नौ महीने से फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित घर लाने के लिए धन्यवाद।” इसके अलावा इस सफलता के लिए नासा की पूरी टीम की सराहना की गई। मिशन के दौरान नासा ने दोनों अंतरिक्ष यात्रियों की भी प्रशंसा की। इस अवसर पर अंतरिक्ष यात्री हेग ने कैलिफोर्निया के हॉथोर्न स्थित स्पेसएक्स फ्लाइट कंट्रोल सेंटर से रेडियो पर कहा कि “यह एक अद्भुत सफर था। मैं कैप्सूल को देख रहा हूं और बेहद उत्साहित हूं।”  नौ महीने बाद हुई सकुशल (Sunita Williams safe landing) वापसी  जानकारी के लिए बता दें कि सुनीता विलियम्स और वुच विल्मोर दोनों ही अंतरिक्ष यात्रियों की 5 जून को लॉन्च हुए बोइंग के नए स्टारलाइनर क्रू कैप्सूल के लगभग एक सप्ताह बाद ही लौटना था, लेकिन स्पेस स्टेशन के रास्ते में आई तकनीकी खराबी की वजह से स्टारलाइनर को खाली वापस भेजा गया था। इस मिशन का उद्देश्य स्टारलाइनर की क्षमता को परखना था, जिसमें उसे अंतरिक्ष यात्रियों को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन तक पहुंचाकर सुरक्षित वापस लाना था। हालांकि, यह मिशन केवल आठ दिनों का था, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण उनकी वापसी में टलती गई। आखिरकार नौ महीने बाद ही, सभी की सकुशल वापसी (Sunita Williams safe landing) हो गई। नासा ने इस वापसी को योजना के अनुसार सफल बताया और कहा कि “सभी अंतरिक्ष यात्री पूरी तरह सुरक्षित हैं।” Latest News in Hindi Today Hindi news Sunita Williams safe landing Sunita Williams #SunitaWilliams #SpaceReturn #SafeLanding #NASA #AstronautLife #SpaceExploration #InspiringWomen #DolphinCelebration #ProudMoment #SpaceNews

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