Nirav Modi Mehul Choksi

Mehul Choksi Arrested in Belgium: 14,000 करोड़ रुपये डकारने वाला मेहुल चोकसी बेल्जियम में हुआ गिरफ्तार

रिपोर्ट्स के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक लोन धोखाधड़ी मामले में भगोड़े मेहुल चोकसी को बेल्जियम में पुलिस ने (Mehul Choksi Arrested in Belgium) गिरफ्तार कर लिया गया है।जानकारी के मुताबिक 65 वर्षीय चोकसी को शनिवार (12 अप्रैल) को केंद्रीय जांच ब्यूरो के अनुरोध पर गिरफ्तार किया गया है। फ़िलहाल अभी भी वो जेल में है। भारत अब बेल्जियम के अधिकारियों से उसके प्रत्यर्पण के लिए कह रहा है। गौर करने वाली बात यह कि चोकसी के खिलाफ कोई रेड नोटिस नहीं है। बता दें कि हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी और उसके भतीजे नीरव मोदी 14,000 करोड़ रुपये के पंजाब नेशनल बैंक घोटाले में आरोपी हैं। दोनों फरार चल रहे हैं। खैर, मार्च 2025 में बेल्जियम सरकार ने भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी की अपनी धरती पर मौजूदगी की पुष्टि की थी और कहा थी कि “वह इस मामले को बहुत महत्व और ध्यान दे रही है।” बेल्जियम पुलिस ने अस्पताल से किया गिरफ्तार (Mehul Choksi Arrested in Belgium)  प्राप्त जानकारी के मुताबिक चोकसी को बेल्जियम पुलिस ने एक अस्पताल से गिरफ्तार कर (Mehul Choksi Arrested in Belgium) अपनी कस्टडी में ले लिया है। वह इलाज के लिए बेल्जियम पहुंचा था। भारतीय एजेंसियों को जैसे ही उसकी मौजूदगी की खबर मिली वो एक्टिव हो गई। सीबीआई और ईडी ने 3 महीने पहले ही उसके प्रत्यर्पण के लिए एप्लिकेशन मूव की थी। मेहुल चोकसी इतना शातिर है कि बेल्जियम में शिंकजा कसता देख वह स्विट्ज़रलैंड भागने की फिराक में था। इससे पहले की वो भाग पात, भारतीय एजेंसियों के अनुरोध पर बेल्जियम प्रशासन ने उसे धर दबोचा। भारत से भागने के बाद चोकसी सीधा कैरेबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा पहुंच गया था। ख़बरों की माने तो उसने वहां की नागरिकता भी ले ली थी। इसके बाद वह वहां से डोमिनिका रिपब्लिक भी गया लेकिन वहां उसे अवैध रूप से घुसने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इन देशों से भारत कोई प्रत्यर्पण समझौता नहीं होने के कारण चोकसी भारत के चुंगल से बच निकला था। इस बार चौकसी ने गलती कर दी। जिस देश में उसमें पनाह ली उसका भारत से प्रत्यर्पण समझौता है। यह संधि 1901 से यानी अंग्रेजों के समय से चली आ रही है। इसके तहत भारत चौकसी के प्रत्यपर्ण की मांग कर सकता है।  इसे भी पढ़ें:– इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी बेल्जियम से भारत लाना है काफी (Mehul Choksi Arrested in Belgium) आसान  गौर करने वाली बात यह कि अभी महीना भर भी नहीं हुआ कि भगोड़े व्यवसायी मेहुल चोकसी और प्रीति चोकसी ने बेल्जियम का एफ रेजीडेंसी कार्ड हासिल किया था। प्रीति चोकसी बेल्जियम की निवासी हैं। दरअसल, चोकसी का पूरा परिवार बेल्जियम का है। साल 2024 में यह जोड़ा एंटीगुआ से बेल्जियम चला गया था। मेहुल के भतीजे नीरव मोदी को मई 2019 में लंदन में मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने गिरफ्तार किया था। नीरव के पास प्रत्यर्पण के लिए कानूनी विकल्प खत्म हो गए हैं, लेकिन वह मानवीय आधार पर ब्रिटेन में रहने में कामयाब रहा है। बता दें कि हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) में 13,000 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोपी है। सीबीआई ने मेहुल चोकसी और अन्य के खिलाफ 15 फरवरी, 2018 को पंजाब नेशनल बैंक से धोखाधड़ी करने का मामला दर्ज कर रखा है। देश से भागने के बाद मेहुल वर्षों तक गिरफ्तारी से बचता फिर रहा था। मजे की बात यह कि खुद ही उस देश में पहुंच गया, जहां से उसे भारत लाना काफी (Mehul Choksi Arrested in Belgium) आसान है। बेल्जियम की एक अस्पताल से गिरफ्तारी के बाद अब चोकसी भारतीय एजेंसियों की पकड़ में आ सकता है।   Latest News in Hindi Today Hindi news Mehul Choksi Arrested in Belgium #MehulChoksi #PNBScam #ChoksiArrested #BelgiumNews #FraudAlert #NiravModi #FugitiveArrest #IndiaNews #ChoksiScam #BreakingNews

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Mumbai attacks accused

Tahawwur Rana extradition: अमेरिका से लाया गया मुंबई हमले का आरोपी तहव्वुर राणा, पाकिस्तान ने झाड़ा पल्ला

26/11 मुंबई आतंकी हमले के एक बड़े आरोपी तहव्वुर राणा को  कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच दिल्ली लाया (Tahawwur Rana extradition) जा चुका है। इस खूंखार आतंकी को अमेरिका से एनआईए की 7 सदस्यीय टीम दिल्ली लेकर पहुंची है। दिल्ली एयरपोर्ट पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वह यहां पहुंचा। इस बीच सबसे पहले तहव्वुर राणा का मेडिकल कराया जाएगा और फिर एनआईए उसे कोर्ट में पेश करेगी। खबर है कि राणा को अमेरिका से भारत लाए जाने के बाद तिहाड़ जेल के हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जा सकता है। बता दें कि 64 वर्षीय तहव्वुर राणा को दिल्ली की तिहाड़ जेल में एक हाई सिक्योरिटी वार्ड में रखा जाएगा। राणा को रखने के लिए जेल में सभी आवश्यक सभी तैयारी पहले से ही कर ली गई थी। राणा साल 2008 के मुंबई आतंकवादी हमलों के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक डेविड कोलमेन हेडली उर्फ दाऊद गिलानी का करीबी सहयोगी भी है। राणा को लेकर एक विशेष चार्टर्ड विमान बुधवार को अमेरिका से भारत के लिए रवाना हुआ था। 2008 के आतंकी हमले में 166 लोग मारे गए थे। मुंबई ले जाने पर तहव्वुर राणा को (Tahawwur Rana extradition) ऑर्थर रोड जेल में रखा जाएगा तहव्वुर राणा पर कई धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं, जिनमें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना, आपराधिक साजिश, हत्या, जालसाजी और गैरकानूनी गतिविधियां अधिनियम इत्यादि शामिल हैं। हालांकि, मुंबई पुलिस को अभी तक उसके शहर में स्थानांतरण के बारे में कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है। लेकिन माना जा रहा है कि उसे मुंबई ले जाने पर ऑर्थर रोड जेल के उसी सेल में रखा जाएगा, जहां आतंकी कसाब को रखा गया था। कहा जाता है कि डेविड कोलमेन हेडली का सहयोगी राणा के पाकिस्तान की इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) और आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के साथ करीबी संबंध थे। बता दें कि राणा के प्रत्यर्पण की घोषणा (Tahawwur Rana extradition) अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फरवरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के व्हाइट हाउस दौरे के दौरान की थी। इस घोषणा के बाद राणा ने सुप्रीम कोर्ट में प्रत्यर्पण को रोकने की कोशिश की थी, लेकिन उसकी सभी कानूनी अपीलों को खारिज कर दिया गया था। इसे भी पढ़ें:– इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने तहव्वुर राणा को बताया कनाडाई नागरिक (Tahawwur Rana extradition) प्राप्त जानकारी के मुताबिक तहव्वुर राणा को अमेरिका से भारत लाने में लंबी कानूनी लड़ाई के बाद प्रत्यर्पित किया जा रहा है। खबर है कि राणा को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की हिरासत में लिया जाएगा, जो रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के साथ मिलकर उसके प्रत्यर्पण का कोर्डिनेशन कर रही है। फिर उसे दिल्ली की एक अदालत में पेश किया जा सकता है। कुल-मिलाकर मुंबई आतंकी हमले के आरोपी तहव्वुर राणा को जांच एजेंसी एनआईए की टीम अमेरिका से लेकर भारत आ चुकी है। इस बीच मजे की बात यह कि तहव्वुर राणा के भारत प्रत्यर्पण की खबर सुनते ही पाकिस्तान बुरी तरह घबरा गया है। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने उसे कनाडाई नागरिक बताते हुए उसका पाकिस्तान कनेक्शन होने से पल्ला झाड़ने की कोशिश की है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Tahawwur Rana extradition #TahawwurRana #MumbaiAttacks #Extradition #26November #USIndiaRelations #Terrorism #PakistanNews #IndiaNews #BreakingNews #GlobalSecurity

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War threat Iran

US warns Iran: इस वजह से अमेरिका ने ईरान को दी सैन्य हमला करने की धमकी

अमेरिका और ईरान की अदावत किसी से छुपी नहीं है। आये दिन दोनों एक दूसरे को देख लेने की धमकी देते (US warns Iran) रहते हैं। अमेरिका को डर है कि कहीं ईरान परमाणु बम न बना ले। इसके चलते अमेरिका ने ईरान को चेतावनी देते हुए ये साफ कहा है कि “अगर ईरान परमाणु हथियार कार्यक्रम नहीं छोड़ता तो उसके खिलाफ सैन्य हमले का अगुवा इजराइल होगा।” अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, “अगर इसके लिए सेना की आवश्यकता होगी तो हम वह भी करेंगे। इसमें स्पष्ट रूप से इजराइल बहुत अधिक शामिल होगा। वे इसके नेता होंगे। लेकिन कोई भी हमारा नेतृत्व नहीं करता है और हम वही करते हैं जो हम करना चाहते हैं।” तो वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति की धमकी के बाद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा है कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा, अमेरिकी निवेश पर आपत्ति नहीं।” ट्रंप ने यह टिप्पणी ओमान में अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच होने वाली वार्ता से पहले बुधवार को की। इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रंप ने कहा था कि वार्ता प्रत्यक्ष होगी, जबकि ईरान ने इस अमेरिका के साथ प्रस्तावित बातचीत को अप्रत्यक्ष बताया है।  ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा- ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन (US warns Iran)  दरअसल, अमेरिका इस बात से चिंतित है (US warns Iran) कि तेहरान पहले से कहीं अधिक एक कारगर हथियार के करीब है। कारण यही जो ट्रंप ने बुधवार को कहा कि “वार्ता के समाधान पर पहुंचने के लिए उनके पास कोई निश्चित समयसीमा नहीं है।” अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली वार्ता के पहले बुधवार को ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने कहा कि “ईरान परमाणु बम नहीं बना रहा।” उन्होंने यह भी कहा कि “दोनों देशों के बीच कोई समझौता होने पर ईरान में अमेरिकी निवेश पर भी कोई ऐतराज नहीं है।” दरअसल, राष्ट्रपति पेजेशकियन की टिप्पणियां विश्व शक्तियों के साथ 2015 के परमाणु समझौते के बाद ईरान के रुख में बदलाव को दर्शाती हैं। बता दें कि उस समझौते में तेहरान ने अमेरिकी विमान खरीदने की मांग की थी, लेकिन प्रभावी रूप से अमेरिकी कंपनियों को देश में आने से रोक दिया था। इसे भी पढ़ें:– डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से बजार में आई तेजी, इन तीन लोगों ने की बंपर कमाई 100 बार सत्यापन कर लिया है, चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें (US warns Iran) इस बीच तेहरान में दिए गए भाषण में पेजेशकियन ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का जिक्र करते हुए कहा कि “उन्हें ईरान में अमेरिकी निवेशकों के निवेश से कोई आपत्ति नहीं है।” उन्होंने आगे कहा कि “अमेरिकी निवेशक ईरान आएं और निवेश करें।” बेशक इस तरह के व्यावसायिक प्रस्ताव से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समझौते में दिलचस्पी बढ़ सकती है। बता दें कि राष्ट्रपति के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में विश्व शक्तियों के साथ ईरान के परमाणु समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था और अब देश के साथ एक नया समझौता करना चाहते हैं। गौरतलब हो कि पिछले साल अपने चुनाव के दौरान पश्चिमी देशों तक पहुंच बनाने के लिए प्रचार करने वाले पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “शनिवार को ओमान में ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरघची और पश्चिम एशिया के लिए अमेरिका के राजदूत स्टीव विटकॉफ के बीच होने वाली वार्ता अप्रत्यक्ष रूप से होगी। ट्रंप ने कहा है कि वार्ता प्रत्यक्ष रूप से होगी और ईरान ने (US warns Iran) इससे इनकार भी नहीं किया है। हालांकि पेजेशकियन ने यह भी कहा कि “हम परमाणु बम नहीं बना रहे। आपने 100 बार इसका सत्यापन कर लिया है। चाहिए तो इसे 1,000 बार फिर से कर लें।”  Latest News in Hindi Today Hindi news US warns Iran #USIranTensions #MiddleEastConflict #IranWarning #MilitaryStrike #Geopolitics #USDefense #GlobalSecurity #IranNews #WarThreat #PentagonAlert

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Trump’s Announcement Sparks Market Rally

Donald Trump announcement: डोनाल्ड ट्रंप के इस ऐलान से बजार में आई तेजी, इन तीन लोगों ने की बंपर कमाई

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ी राहत (Donald Trump announcement) देते हुए टैर‍िफ पर अगले 90 दिनों तक रोक लगा दी है। यह ऐलान होते ही कई द‍िन से ग‍िरावट से जूझ रहे शेयर बाजार में अचानक से बड़ी उछाल देखी गई। इस राहत के सबसे अधिक असर अमेरिकी शेयर बाजार पर पड़ा। शेयर बाजार में आई तेजी का सबसे अधिक ललाभ दुन‍िया के चुन‍िंदा अरबपत‍ियों को हुआ। आपको बता दें कि ज‍िन कारोबार‍ियों को सबसे ज्‍यादा लाभ हुआ है उनमें एलन मस्क, मार्क जुकरबर्ग और जेफ बेजोस का नाम शामिल है। गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप के ऐलान के बाद शेयर बाजार में आई तेजी के दम पर इन तीनों ने चंद घंटों में तकरीबन 80 अरब डॉलर कमा ल‍िये। इस ऐलान का सबसे ज्‍यादा असर टेस्ला, अमेजन और मेटा समेत कई दिग्गज टेक कंपन‍ियों के शेयरों पर देखाा गया। ब्‍लूमबर्ग ब‍िलेन‍ियर इंडेक्‍स की माने तो एलन मस्‍क को सबसे अधिक 35.9 ब‍िल‍ियन डॉलर का फायदा हुआ। इस लाभ के साथ उनकी संपत्‍त‍ि बढ़कर 326 अरब डॉलर हो गई। दुन‍ियाभर के अरबपत‍ियों में मुकेश अंबानी 17वें पायदान पर हैं और उनकी संपत्‍त‍ि इस समय तकरीबन 84 ब‍िल‍ियन डॉलर है।  ट्रंप के ऐलान के बाद (Donald Trump announcement) मस्क ने एक ही द‍िन में 35.9 अरब डॉलर (3,08,883.6 करोड़ रुपये) कमाए  ब्लूमबर्ग बिलेनियर इंडेक्स के मुताबिक (Donald Trump announcement) मस्क ने एक ही द‍िन में 35.9 अरब डॉलर (3,08,883.6 करोड़ रुपये) कमा ल‍िये। इसके अलावा मार्क जुकरबर्ग को 25.9 अरब डॉलर का फायदा हुआ तो वहीं जेफ बेजोस को 18.5 अरब डॉलर का मुनाफा हुआ। यही नहीं, लैरी एल‍िसन को भी 15 अरब डॉलर का फायदा हुआ। बता दें कि 107 अरब डॉलर की ग‍िरावट के बाद भी एलन मस्क टॉप पर बने हुए हैं। उनकी कुल नेटवर्थ 326 ब‍िलियन डॉलर पर पहुंच गई है। इस ल‍िस्‍ट में जेफ बेजोस 210 ब‍िल‍ियन डॉलर के साथ दूसरे नंबर पर है। उन्‍हें शुरुआती तीन महीने में 28.7 ब‍िल‍ियन डॉलर का नुकसान हुआ है।  इसे भी पढ़ें:– क्या सच में जानबूझकर मार्केट गिरा रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप? ट्रंप द्वारा दी गई राहत (Donald Trump announcement) का सबसे ज्‍यादा असर टेक शेयरों पर देखने को मिला यही नहीं, इस ल‍िस्‍ट में तीसरे नंबर पर मार्क जुकरबर्क हैं। उनकी कुल 207 ब‍िल‍ियन डॉलर की संपत्‍त‍ि है। इस साल उन्‍हें 723 म‍िल‍ियन डॉलर का नुकसान हुआ। बुधवार को टेस्ला के शेयर में करीब 23 प्रत‍िशत का बंपर उछाल देखा गया। ट्रंप द्वारा दी गई राहत (Donald Trump announcement) का सबसे ज्‍यादा असर टेक शेयरों पर देखने को मिला। बता दें कि नैस्डैक में 12.2% की बढ़त दर्ज की गई। इस बढ़त का असर मेटा और अमेजन के शेयर पर भी दिखा। दोनों के शेयरों में क्रमश: 15 प्रत‍िशत और 12 प्रत‍िशत की बढ़त देखी गई।  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump announcement #DonaldTrump #TrumpAnnouncement #StockMarket #MarketRally #EconomicNews #WallStreet #InvestorsGain #TrumpEffect #USPolitics #FinancialNews

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Donald Trump Market Crash

Donald Trump market crash: क्या सच में जानबूझकर मार्केट गिरा रहे हैं अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप?

रेसिप्रोकल टैरिफ लागू करने के बाद से दुनियाभर के शेयर बाजार में हंगामा मचा हुआ है। अमेरिका से लेकर जापान समेत भारत भी इस आग की जद्द में आ गया है। क्या चीन क्या भारत सब टैरिफ की आग में बुरी तरह झुलस रहे हैं। एक तरफ जहां दुनियाभर के विशेषज्ञ इसे दुनिया के लिए खतरनाक बता रहे हैं वहीं दूसरी तरफ ट्रंप का कहना है कि इससे अमेरिका अमीर बन जायेगा। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ट्रंप अमेरिका को बनाने के लिए जानबूझकर बाजार गिरा (Donald Trump market crash) रहे है? इसके पीछे उनकी कोई गहरी सोची समझी साजिश है? उनकी इस हरकत एक सोशल मीडिया पोस्ट ने हवा दे दी है। दरअसल, ट्रंप ने हाल ही में ट्रुथ सोशल पर एक वीडियो साझा किया। साझा किये इस वीडियो में यह दावा किया गया कि “वे जानबूझकर अमेरिकी शेयर बाजार को गिरा रहे हैं। इस रणनीति को वीडियो में वाइल्ड चेस मूव बताया गया और कहा गया कि शेयर बाजार से पैसा निकलकर ट्रेजरी बॉन्ड्स में जाएगा, जिससे फेडरल रिजर्व पर ब्याज दरें घटाने का दबाव बढ़ेगा। नतीजतन डॉलर कमजोर होगा। मॉर्गेज दरें घटेंगी और सरकारी कर्ज सस्ता हो जाएगा।  ट्रंप बाजार पर गिरने का (Donald Trump market crash) बना रहे हैं दबाव  ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि उनके इस पोस्ट से भी साफ़ हो रहा है कि “कैसे वो बाजार पर गिरने का दबाव (Donald Trump market crash) बना रहे हैं।” और तो और ट्रंप की यह रणनीति अमेरिका के बढ़ते कर्ज बोझ के संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। क्योंकि साल 2025 में अमेरिका को लगभग $7.2 ट्रिलियन का कर्ज रिफाइनेंस करना है। अगर ब्याज दरें कम हों, तो सरकार की भुगतान क्षमता पर बड़ा फर्क पड़ सकता है। ऐसे में यदि ब्याज दरें 4.3% से घटकर 3.3% हो जाती हैं, तो अमेरिका को सालाना तकरीबन $72 बिलियन की बचत हो सकती है।  इसे भी पढ़ें:– ड्रैगन ने दिखाई आंख तो अमेरिका ने ठोक दिया 104% टैरिफ, चीन पर डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा अटैक ताकि निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे बॉन्ड्स इत्यादि में (Donald Trump market crash) लगाएं पैसा  इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप की रणनीति साफ है कि बाजार में भय का माहौल बनाओ, ताकि डर के मारे निवेशक सुरक्षित विकल्पों जैसे बॉन्ड्स इत्यादि में पैसा (Donald Trump market crash) लगाएं। सुरक्षित विकल्प में निवेश बढ़ने से यील्ड घटेगी और सरकार सस्ते ब्याज दर पर कर्ज जुटा सकेगी। ताकि इस बचत को अन्य महत्वपूर्ण योजनाओं, मसलन रक्षा या स्पेस इत्यादि में लगाया जा सके। ऐसे में बहुत मुमकिन है कि अमेरिका को महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक अनिश्चितता जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि यदि गलती से भी शेयर बाजार में गिरावट लंबी चली या उपभोक्ता विश्वास डगमगाया मुश्किलें बढ़ सकती हैं। हालांकि व्यापारिक दृष्टिकोण से देखा जाए, तो ट्रंप का यह दांव अमेरिका को दीर्घकालिक लाभ पहुंचा सकता है। यह तो ठीक, लेकिन इसकी कीमत वैश्विक बाजारों की स्थिरता और निवेशकों के विश्वास में गिरावट के रूप में चुकानी पड़ सकती है। खैर, यह तो आने वाला वक़्त ही बताएगा कि ट्रंप कहाँ तक सही साबित होते हैं। फ़िलहाल रेसिप्रोकल टैरिफ से राहत मिलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।   Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump market crash #DonaldTrump #MarketCrash #StockMarketNews #USEconomy #TrumpStrategy #WallStreet #FinancialNews #TrumpNews #MarketUpdate #EconomicCrash

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Trump's 50% Tariff Threat Triggers China’s Warning

Trump tariff threat: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा 50% और टैरिफ लगाने की धमकी पर भड़का चीन, दी महाशक्ति को सीधे धमकी

दो अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और चीन समेत दुनियाभर के 180 देशों पर पारस्परिक टैरिफ लगाने का एलान किया था। इसी कड़ी में चीन पर भी 34 फीसदी टैरिफ लगाया था। इससे पहले भी ट्रंप 20 फीसदी टैरिफ लगा चुके हैं। इस तरह अमेरिका अब तक चीनी सामानों पर कुल-मिलाकर 54 फीसदी टैरिफ थोप चुका (Trump tariff threat) है। कारण यही जो इस टैरिफ को लेकर चीन का अमेरिका पर बेहद रुख सख्त है। चीनी विदेश मंत्रालय ने कहा कि “चीन अमेरिका के दबाव में किसी भी हाल में नहीं झुकेगा।” चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने कहा कि “अमेरिका अंतरराष्ट्रीय नियमों को दरकिनार कर रहा है।” गौर करने वाली बात यह कि ट्रंप के टैरिफ एलान के 48 घंटे के भीतर चीन ने अमेरिका को करारा जवाब दिया। उसने भी अमेरिकी सामानों पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की। कहने की जरूरत नहीं ट्रंप, चीन के इस कदम से खफा हैं। सोमवार को ट्रंप ने चीन को धमकी भरे लहजे में कहा कि “यदि बीजिंग मंगलवार तक अपने जवाबी शुल्क नहीं हटाता है, तो इसी सप्ताह चीनी आयात पर 50% अतिरिक्त टैरिफ लगाएंगे।” इस दौरान ट्रंप ने यह भी कहा कि “चीन के साथ होने वाली सभी बैठकों को भी रद कर दिया जाएगा।” अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं चीन  इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि चाहे कुछ भी हो, चीन अमेरिका के टैरिफ के आगे झुकेगा (Trump tariff threat) नहीं, बल्कि इसके खिलाफ आखिरी तक लड़ेगा। इस पूरे मामले पर चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा है कि “वे अमेरिकी टैरिफ के खिलाफ अंत तक लड़ाई लड़ेंगे। मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि “चीन पर और टैरिफ लगाने की धमकी एक गलती के ऊपर दूसरी गलती होगी। इससे अमेरिका का ब्लैकमेलिंग स्वभाग उजागर होगा। चीन इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा। अगर अमेरिका हमें अपने तरीके से चलने पर मजबूर करेगा तो चीन आखिरी तक उसका मुकाबला करेगा। और अगर अमेरिका ने टैरिफ की दर बढ़ाई तो चीन अपने अधिकारों और हितों की रक्षा में जवाबी कदम उठाएगा।” इसके साथ ही चीनी वाणिज्य मंत्रालय ने यह भी कहा कि “वह अमेरिका के साथ बातचीत करना चाहता है। ट्रेड वार में कोई विजेता नहीं होता है।” बता दें कि टैरिफ के ऐलान के बाद से ही वैश्विक बाजार में उथल-पुथल का माहौल बना हुआ है। इसे भी पढ़ें:– क्या टैरिफ से 90 दिन के लिए राहत देंगे ट्रंप? अपने सलाहकार के बयान पर व्हाइट हाउस ने दी सफाई  ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से बौखला उठा है चीन  इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि ट्रंप के टैरिफ (Trump tariff threat) से चीन बौखला उठा। बदले में उसने भी अमेरिकी सामान पर 34 फीसदी टैरिफ लगाने की घोषणा की थी। चीन की इस घोषणा से ट्रंप खफा हैं। इसके बाद खार खाए ट्रंप ने चीन पर 50 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाने की धमकी दी। कहने की जरूरत नहीं, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ युद्ध ने वैश्विक मंदी की सुगबुगाहट को तेज कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump tariff threat #TrumpTariffThreat #ChinaVsUS #TradeWar #TrumpNews #50PercentTariff #ChinaReaction #GlobalTrade #USChinaConflict #DonaldTrump #TariffHike

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Trump trade statement

Global market crash: टैरिफ वॉर के डर से भारत सहित ग्लोबल मार्केट में हाहाकार, ट्रंप ने कही यह बड़ी बात

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नई टैरिफ पॉलिसी लागू होने के बाद से दुनियाभर के शेयर बाजारों में कोहराम (Global market crash) मचा हुआ है। पिछले कुछ दिनों में दुनिया भर के शेयर बाजारों से करीब 6 ट्रिलियन डॉलर की वैल्यू जलकर स्वाहा हो गई है। इसकी सबसे बड़ी वजह है अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी। ट्रंप की तरफ से लगाए गए भारी इम्पोर्ट टैक्स के जवाब में चीन ने भी अमेरिका पर सख्त टैरिफ लगा दिए। इस ट्रेड वॉर के डर से दुनिया भर के निवेशक डर के मारे शेयर बेचने लगे हैं। आज यानी सोमवार, 7 अप्रैल को एशियाई शेयर बाजार भारी गिरावट के साथ खुले। हॉन्ग कॉन्ग, ऑस्ट्रेलिया, जापान जैसे बड़े मार्केट्स में जबरदस्त गिरावट दर्ज की गई। बात करें ग्लोबल मार्किट की तो गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की आई है गिरावट (Global market crash) ध्यान देने वाली बात यह कि इस गिरावट (Global market crash) के बाद जापान में फ्यूचर ट्रेडिंग को रोकना पड़ा, यानी सर्किट ब्रेकर लगाना पड़ा। इस तरह की गिरावट मार्केट में डर और पैनिक का साफ संकेत देती है। दरअसल, ये सब इसलिए हो रहा है क्योंकि इन्वेस्टर्स को लग रहा है कि ट्रेड वॉर की वजह से ग्लोबल ग्रोथ पर असर पड़ेगा और कंपनियों के मुनाफे में बड़ी गिरावट हो सकती है। सिर्फ एशियाई मार्केट ही नहीं, बल्कि अमेरिका के शेयर फ्यूचर्स में भी बड़ी गिरावट देखी गई। गोल्ड की कीमत में भी 0.7% की गिरावट आई है और यह 3,013 डॉलर प्रति औंस तक आ गया है।  ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी (Global market crash)  शेयर बाजार में जारी गिरावट (Global market crash) पर रविवार को ट्रंप ने यह इनकार किया कि “वो जानबूझकर शेयर बाजार में गिरावट ला रहे हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “उन्हें मार्केट रिएक्शन का अंदाजा नहीं था और जब तक दूसरे देशों के साथ व्यापार घाटे का समाधान नहीं होता, तब तक वो कोई डील नहीं करेंगे। ट्रंप ने कहा, कभी-कभी किसी चीज को ठीक करने के लिए दवा लेनी ही पड़ती है। दरअसल, ट्रंप का कहना है कि “ये मार्केट में गिरावट सिर्फ मेडिसीन की तरह है, जो लॉन्ग टर्म में फायदा पहुंचाएगी। चाहे कुछ भी हो, लेकिन इन्वेस्टर्स को फ़िलहाल नुकसान ही दिख रहा है। बता दें कि एयर फाॅर्स वन में रिपोर्टर्स से बात करते हुए ट्रंप ने बताया कि “उन्होंने इस मसले पर दुनिया के कई नेताओं से बातचीत की है और कहा कि वो सब डील करने को बेताब हैं।” इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ ट्रंप के फैसले के बाद से भारतीय शेयर बाजार में देखने मिल रही है गिरावट (Global market crash) गोलबल मार्किट के साथ-साथ भारतीय शेयर बाजार भी अब पूरी तरह से इसकी चपेट में (Global market crash) आ गया है। सोमवार, 7 अप्रैल को भारतीय शेयर बाजार का प्रमुख इंडेक्स बीएसई सेंसेक्स 3914.75 अंकों की गिरावट के साथ 71,449.94 अंकों पर खुला। एनएसई का निफ्टी 50 इंडेक्स भी आज 1146 अंकों की गिरावट के साथ 21,758.40 अंकों पर खुला। ट्रंप के फैसले के बाद से अमेरिकी शेयर बाजार में गिरावट देखने को मिल रही है। बता दें कि कोविड के बाद भारतीय शेयर बाजार में ये अभी तक की सबसे बड़ी गिरावट है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Global market crash #GlobalMarketCrash #TariffWar #TrumpTradePolicy #StockMarketNews #IndianMarkets #USChinaTensions #EconomicCrash #SensexToday #MarketPanic #GlobalRecession

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iPhone price increase

iPhone price increase: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ के चलते बढ़ सकती हैं आईफोन की कीमतें

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के 180 से अधिक देशों पर लगाए गए भारी-भरकम रिसिप्रोकल टैरिफ का असर अब दुनिया में देखा जाने लगा है। दुनिया भर के बाजारों में गिरावट जारी है। इस टैरिफ ने ट्रेड वर्ल्ड वॉर की आशंका बढ़ा दी है। अब इसका असर एप्पल के आईफोन पर भी कीमतों पर भी पड़ (iPhone price increase) सकता है। रिपोर्टों के अनुसार, यदि कंपनी टैरिफ की लागत ग्राहकों पर डालती है तो ग्रहकों की जेब ढीली हो सकती है। ऐसे में इस फैसले के चलते कंपनी के पास दो विकल्प हैं, या तो वह इस अतिरिक्त शुल्क का वहन खुद वहन करे या फिर इसका बोझ ग्राहकों पर डाले। अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालती है, तो आईफोन की कीमतों में 40% तक वृद्धि हो सकती है। ऐसे में एक हाई-एंडआईफोन की कीमत लगभग 2,300 डॉलर तक पहुंच सकती है। गौर करने वाली बात यह कि एप्पल की मैन्युफैक्चरिंग मुख्य रूप से चीन में होती है। और डोनाल्ड ट्रंप ने 54% का भारी-भरकम टैक्स लगा दिया गया है। जाहिर है, आईफोन की कीमतों में भारी उछाल होना लाजमी है।  30 से 40 प्रतिशत तक की (iPhone price increase) हो सकती है बढ़ोतरी  बता दें कि ट्रंप के रिसिप्रोकल टैरिफ नीति के चलते आईफोन की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी (iPhone price increase) हो सकती है। इसे एक उदाहरण से समझते हैं। आईफोन 16 जो कि $799 लांच हुआ था, इस नीति के चलते अब वो $1,142 तक पहुंच सकता है, तो वहीं, आईफोन16 प्रो मैक्स की कीमत तकरीबन  $2,300 के आसपास जा सकती है। इतना ही नहीं, आईफोन का सबसे सस्ता मॉडल आईफोन 16e की कीमत भी $599 से बढ़कर $856 तक बढ़ सकती है। ध्यान देने वाली बात यह कि आईफोन ही नहीं, एप्पल के अन्य डिवाइसेज़ भी महंगे हो सकते हैं। कहने की जरूरत नहीं, अगर एप्पल टैरिफ का भार ग्राहकों पर डालता है, तो कंपनी की बिक्री में गिरावट आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से ही कई बाजारों में एप्पल  की सेल गिर रही है। क्योंकि इसके इसके फीचर्स ग्राहकों को अधिक प्रभावित नहीं कर पाए हैं। ऐसे में, यदि आईफोन महंगा होता है, तो ग्राहक सैमसंग, गूगल पिक्सेल और अन्य ब्रांड्स की तरफ शिफ्ट हो सकते हैं। इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का किया है ऐलान (iPhone price increase) सीएफ़आरए रिसर्च के एक्सपर्ट एंजेलो ज़िनो का मानना है कि आपले ग्राहकों पर सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत लागत ही डाल पाएगा। दावा तो यह भी किया जा रहा है कि कंपनी फिलहाल आईफोन 17 की लॉन्चिंग तक कीमतों में कोई बड़ा बदलाव नहीं करने वाली है। भले ही एप्पल कुछ निर्माण भारत और वियतनाम जैसे देशों में शिफ्ट कर रहा है लेकिन वहां भी 26% से 46% तक के टैक्स लागू हैं, जिससे लागत कम नहीं हो रही है। खैर, जानकारी के मुताबिक अगले चार वर्षों में एप्पल ने अमेरिका में 500 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान किया है। इसपर सीईओ टिम कुक ने कहा कि “हम अमेरिकी में निवेश करेंगे और इस निवेश से देश के भविष्य को और मजबूत करेंगे।” ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह निवेश आईफोन की आसमान छूती कीमतों (iPhone price increase) को रोक पाएगा भी या नहीं?  Latest News in Hindi Today Hindi news iPhone price increase #iPhonePriceHike #TrumpTariffs #iPhone2025 #USChinaTrade #ReciprocalTariff #AppleNews #iPhoneCost #TradeWarImpact #TechNews #AppleTariff

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Modi meets Muhammad Yunus

Modi meets Muhammad Yunus: 9 महीने बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मोहम्मद यूनुस ने थाईलैंड राजधानी बैंकॉक में की मुलाकात  

शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद बांग्लादेश-भारत के रिश्ते लगातार तल्ख बने हुए हैं। भले बांग्लादेश के अंतरिम लीडर लगातार भारत विरोधी स्टैंड दिखाते रहे लेकिन पीएम मोदी से मुलाकात को लेकर बेकरार भी दिखे। बांग्लादेश को उम्मीद थी कि भारत की तरफ से हरी झंडी मिलने के बाद यह द्विपक्षीय वार्तो हो जाएगी। ऐसा ही हुआ भी। हालांकि जब दोनों नेताओं की मुलाकात हुई (Modi meets Muhammad Yunus) तो, पीएम मोदी गंभीर और शांत दिखे जबकि यूनुस के चेहरे पर मुस्कान दिखी। इस बैठक में भारत की ओर से एस जयशंकर, एनएसए अजित डोभाल और अन्य सीनियर अधिकारी मौजूद थे। दरअसल, 4 अप्रैल को बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की। दोनों नेता बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के लिए थाईलैंड की यात्रा पर हैं।  40 मिनट तक चली पीएम मोदी और यूनुस के बीच यह बैठक करीब (Modi meets Muhammad Yunus)  बता दें कि बांग्लादेश की पूर्व प्रधान मंत्री शेख हसीना के तख्तापलट के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच यह पहली मुलाकात थी। बैंकॉक में दोनों के बीच द्विपक्षीय बैठक हुई है। इससे पहले गुरुवार की रात बिम्सटेक नेताओं के डीनर प्रोग्राम में भी दोनों एक-दूसरे के बगल में ही बैठे थे। सूत्रों की माने तो भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव कम करने को लेकर बातचीत हुई है। पीएम मोदी और यूनुस के बीच यह बैठक करीब (Modi meets Muhammad Yunus) 40 मिनट तक चली है। बड़ी बात यह कि ढाका ने ही बिम्सटेक बैठक से इतर नई दिल्ली के साथ द्विपक्षीय वार्ता का आग्रह किया था। बता दें कि इससे पहले पीएम मोदी और यूनुस बैंकॉक में बिम्सटेक रात्रिभोज में एक साथ बैठे नजर आए थे।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ मोहम्मद यूनुस मिलकर (Modi meets Muhammad Yunus) मोदी नहीं दिखे खुश  गौरतलब हो कि मोहम्मद यूनुस ने भारत संग दुश्मनी निभाने का कोई कसर नहीं छोड़ी है। जब से शेख हसीना की सरकार गई है, तब से बांग्लादेश ने चीन का दामन थाम रखा है। हाल ही में मोहम्मद यूनुस ने चीन का दौरा किया था और बीजिंग में उन्होंने  बांग्लादेश को समंदर का गार्जियन बताया था और पूर्वोत्तर पर बयान देकर भारत को नाराज किया था। हालांकि, जयशंकर ने बिम्सटेक के मंच से ही बांग्लादेश को अच्छे से सुनाया था। पीएम मोदी और मोहम्मद यूनुस की मुलाकात वाली इन तस्वीरों पर हैरानी इसलिए है, क्योंकि पीएम मोदी जब भी किसी राष्ट्राध्यक्ष से मिलते हैं तो उमसें गर्मजोशी दिखती है। वह खुले दिल से गले मिलते हैं। लेकिन तस्वीर देख लग नहीं रहा कि मोहम्मद यूनुस मिलकर (Modi meets Muhammad Yunus) मोदी खुश दिखे हों। संभवतः इसकी वजह भारत और बांग्लादेश की बीच तल्खी ही हो सकती है। हालांकि यूनुस और मोदी के इस मुलाकात में दोनों देशों के शीर्ष राजनयिक भी मौजूद थे। बता दें कि मोदी से मुलाकात के लिए यूनुस लगातार कोशिश कर रहे थे। आखिरकार अब जाकर उनकी मुलाकात संभव हो सकी।   Latest News in Hindi Today Hindi news Modi meets Muhammad Yunus NarendraModi #PMModi #MuhammadYunus #ModiInBangkok #IndiaThailandRelations #ModiMeetsYunus #InternationalDiplomacy

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Donald Trump Imposes 26% Tariff on Indian Goods

26% tariff on Indian goods: डोनाल्ड ट्रम्प ने लागू किया पारस्परिक टैरिफ, भारत पर लगाया 26% लगाया तो चीन और पाक को दिया तगड़ा झटका

आखिरकार 2 अप्रैल को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनिया के तमाम देशों पर पारस्परिक टैरिफ (रेसिप्रोकल टैरिफ) लागू कर दिया। ट्रम्प ने भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ (26% tariff on Indian goods) लगाया है, जबकि अचीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। दरअसल, डोनाल्ड ट्रम्प ने व्हाइट हाउस में भाषण के दौरान पारस्परिक टैरिफ की योजना की घोषणा की। देशों के एक समूह पर संयुक्त राज्य अमेरिका से वसूले जाने वाले टैरिफ की लगभग आधी दर से टैरिफ लागू किया गया है। इस दौरान ट्रम्प ने कहा कि “यह अमेरिकी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। यह हमारी आर्थिक स्वतंत्रता की घोषणा है। सालों तक, कड़ी मेहनत करने वाले अमेरिकी नागरिकों को किनारे पर बैठने के लिए मजबूर किया गया था, लेकिन अब हमारे समृद्ध होने का समय है।” इस बीच भारत को लेकर डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि “भारत, बहुत, बहुत सख्त है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभी-अभी यहां से गए हैं। वह मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं, लेकिन मैंने कहा कि आप मेरे दोस्त हैं, लेकिन आप हमारे साथ सही व्यवहार नहीं कर रहे हैं। वे हमसे 52 प्रतिशत शुल्क लेते हैं। आपको समझना होगा, हमने उनसे सालों-साल और दशकों तक कुछ भी शुल्क नहीं लिया। यह केवल सात साल पहले की बात है। जब मैं सत्ता में आया, तब हमने चीन के साथ इसकी शुरुआत की।” अमेरिका द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 26% पारस्परिक टैरिफ (26% tariff on Indian goods) के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है वाणिज्य मंत्रालय  गुरुवार को वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि “अमेरिका द्वारा भारत से आयात पर लगाए गए 26% पारस्परिक टैरिफ (26% tariff on Indian goods) के प्रभाव का विश्लेषण कर रहा है।” एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के मुताबिक “अमेरिका में सभी आयात पर एक समान 10 प्रतिशत का शुल्क 5 अप्रैल से और बाकी 16 प्रतिशत शुल्क 10 अप्रैल से लागू होगा।” उन्होंने कहा कि “एक प्रावधान है कि अगर कोई देश अमेरिका की चिंताओं का समाधान करता है, तो डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन उस देश के खिलाफ शुल्क कम करने पर विचार कर सकता है।” बता दें कि भारत पहले से ही अमेरिका के साथ द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहा है। बता दें कि मेक्सिको के बाद अमेरिका के दूसरे सबसे बड़े आयातक चीन को अब इस नई नीति के तहत 34% टैरिफ का देना पड़ेगा। बीजिंग ने यूरोपीय संघ के साथ मिलकर पहले ही जवाबी टैरिफ लगाने की धमकी दी है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन ने बार-बार अमेरिका द्वारा चीन से आयात पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने के प्रति अपनी कड़ी असहमति और मजबूत विरोध जताया है। यही नहीं,  चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि “देश अपने अधिकारों और हितों की दृढ़ता से रक्षा करने के लिए जवाबी कदम उठाएगा।” इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ फिर भी भारत कई दूसरे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है (26% tariff on Indian goods) मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत के टॉप निर्यातक संगठन, फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन के महानिदेशक और सीईओ अजय सहाय ने गुरुवार को कहा कि “अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर लगाए गए 26 प्रतिशत टैरिफ (26% tariff on Indian goods) आयात शुल्क से निस्संदेह घरेलू प्लेयर प्रभावित होंगे।” इसके अलावा अजय सहाय ने यह भी कहा कि “भारत कई दूसरे देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता, जिस पर वर्तमान में दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है, जल्द संपन्न हो जाएगा, क्योंकि इससे इन पारस्परिक टैरिफ से राहत मिलेगी। बता दें कि डोनाल्ड ट्रम्प ने बाकी देशों द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले शुल्क की आधी दर पर ही पारस्परिक शुल्क लगाया है। आने वाले समय में अमेरिका सहित कई देशों पर इसका असर देखने को मिल सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news 26% tariff on Indian goods #DonaldTrump #IndiaUSTrade #TariffWar #IndianExports #USIndiaRelations #GlobalTrade #TradePolicy #EconomicImpact #TrumpTariff #IndiaChina

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