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Russia Attacks Ukraine With 400 Drones: रूस ने 400 ड्रोन और 40 बैलिस्टिक मिसाइलों ने मचाई यूक्रेन में तबाही, सहमे यूक्रेनी राष्ट्रपति

विगत 3 वर्षों से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध बढ़ते समय के साथ-साथ और भी आक्रामक होता जा रहा है। साल 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध 2025 आते-आते चरम पर आ पहुंचा है। यूक्रेन द्वारा रूस को दहलाने के बाद रूस ने पलटवार करना शुरू कर दिया है। इस क्रम में रूस ने यूक्रेन के लगभग सभी प्रमुख क्षेत्रों पर 400 से अधिक ड्रोन और 40 से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलों से एक के बाद एक ताबड़तोड़ भीषण हमला (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) किया। यकायक हुए इस हमले रूस ने यूक्रेन के वोलिन, टेरनोपिल, कीव, सुमी, लविवि, पोल्टावा, खमेलनित्सकी, चर्कासी और चेर्निहिव को निशाना बनाया है। रूस के उस पलटवार से डरे सहमें यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक भावनात्मक और आक्रोशित बयान जारी किया। जारी इस बयान में उन्होंने कहा कि यूक्रेनी वायुसेना ने कई मिसाइलों और ड्रोन को गिराने में सफलता पाई। तीन आपातकालीन सेवा कर्मचारियों की मौत और 49 लोगों के घायल होने की पुष्टि हो चुकी है। मलबे की सफाई और बचाव अभियान जारी है।  आम लोगों को निशाना बना रहा (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) है-  यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की  रूस के इस पलटवार पर यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने आगे कहा, रूस अपनी नीति नहीं बदल रहा है। वह आम लोगों को निशाना बना रहा (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) है। यह युद्ध अब सिर्फ यूक्रेन का नहीं, बल्कि मानवता का युद्ध बन गया है। रूस को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने कहा कि रूस को अंतरराष्ट्रीय जवाबदेही के तहत लाना चाहिए। अमेरिका, यूरोप और पूरी दुनिया को अब निर्णायक दबाव बनाना होगा। अगर वैश्विक नेता चुप हैं तो यह भी एक तरह की मिलीभगत है। अब निर्णायक कार्यवाही का समय है। केवल समर्थन से युद्ध रुकने वाला नहीं है। हालांकि यूक्रेन ने शुरू से ही यह स्पष्ट किया है कि वह अकेले लड़ते-लड़ते अब थक चुका है। उसने नाटो, यूरोपीय संघ, अमेरिका और अन्य सहयोगी देशों से अपेक्षा की है कि वे रूस पर आर्थिक प्रतिबंधों को और कठोर करें। इसके अलावा हथियारों और सैन्य संसाधनों की आपूर्ति तेज करें। राजनयिक स्तर पर दबाव बनाए और रूस को बातचीत के लिए मनाएं।  इसे भी पढ़ें:-एपस्टीन की बाल यौन शोषण की फाइल में ट्रंप का नाम, इसीलिए नहीं हो रही जारी-  एलन मस्क ने लगाया गंभीर आरोप  2022 से अब तक यूक्रेन के तकरीबन हजारों नागरिक मारे (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं बता दें कि रूस के खिलाफ युद्ध में कई लोगों ने यूक्रेन को मदद पहुंचाई है, अन्यथा रूस से लड़ पाना यूक्रेन के बस की बात ही नहीं थी। खबर के मुताबिक इस दौरान अमेरिका की तरफ से लगातार मौकों पर सुरक्षा सहायता पैकेज दिया गया। तो वहीं, यूरोप ने एडवांस एयर डिफेंस सिस्टम मुहैया कराया है और इसके अलावा नाटो की सीमाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई। हालांकि, इसके बावजूद यूक्रेनी राष्ट्रपति को लगता है कि उन्हें मिलने वाला सहयोग इस युद्ध के लिए पर्याप्त नहीं है। ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि साल 2022 से अब तक यूक्रेन के तकरीबन हजारों नागरिक मारे (Russia Attacks Ukraine With 400 Drones) गए और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं। इससे यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचा बुरी तरह प्रभावित हुआ है। असल मायनों में देखा जाये तो युद्ध से यूक्रेन को सिवाय नुकसान के कुछ भी हाथ नहीं लगा है। और तो और यूक्रेन भलींभाँति जनता भी है कि अंततः हार उसी की ही होनी है, बावजूद इसके वो न हार मानने के लिए तैयार हो रहा है और न ही शांति समझौते के लिए तैयार हो रहा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Russia Attacks Ukraine With 400 Drones #RussiaUkraineWar2025 #DroneAttack #BallisticMissile #Zelensky

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Elon Musk accuses authorities of hiding Epstein's files

Elon Musk accuses authorities of hiding Epstein’s files: एपस्टीन की बाल यौन शोषण की फाइल में ट्रंप का नाम, इसीलिए नहीं हो रही जारी-  एलन मस्क ने लगाया गंभीर आरोप 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशिएंसी (डीओजीई) के पूर्व प्रमुख एलन मस्क (Elon Musk) के बीच तकरार बढ़ता जा रहा है। दोनों के बीच चल रहे वार-पलटवार के बीच मस्क ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। एलन मस्क (Elon Musk) ने अपने ‘एक्स’ हैंडल पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया है कि “डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का नाम एपस्टीन की फाइल (Epstein Files) में दर्ज है, इसीलिए उसे जारी नहीं किया जा रहा है। अब समय आ गया है कि बड़ा बम गिराया जाए। आप सभी का दिन शुभ हो, डीजेटी!” उन्होंने यह भी लिखा कि, “इस पोस्ट को भविष्य के लिए मार्क कर लें, सच्चाई जल्द ही सामने आ जाएगी।” बता दें कि यह पूरा मामला यौन तस्करी के आरोपी अरबपति जेफरी एपस्टीन से जुड़ा हुआ है। एपस्टीन पर साल 2019 में यौन शोषण और तस्करी के आरोप लगे थे। इस मामले का खुलासा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली वर्जीनिया गिफ्रे ने उसी साल आत्महत्या कर ली थी। गिफ्रे ने खुलासा किया था कि वो एप्सटीन की करीबी सहयोगी घिसलीन मैक्सवेल के कारण एप्सटीन से मिली थी। इसके बाद एप्स्टीन ने उसे साल 1999 से 2002 के बीच कई बड़े लोगों के पास अनैतिक कार्य करने के लिए भेजा। गिफ्रे ने इस दौरान कई प्रभावशाली लोगों के नाम का खुलासा भी किया था।  रबपति एपस्टीन को एक समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खास दोस्त माना जाता था इनमें ब्रिटेन के प्रिंस एंड्रयू और फ्रांस के मॉडलिंग एजेंट जीन-ल्यूक ब्रनेल जैसे बड़े नाम भी शामिल थे। इस खुलासे के बाद एप्सटीन को गिरफ्तार कर लिया गया था, लेकिन वो उसी साल जेल में मृत पाए गए। ग्रिफे और एप्सटीन की मौत को आधिकारिक तौर पर सुसाइड करार दिया गया, लेकिन कई लोग दावा करते हैं कि दोनों की हत्या की गई। एप्सटीन पर यह भी आरोप था कि उसने 2002 और 2005 के बीच मैनहट्टन और फ्लोरिडा में रहने वाले अमीरों के पास नाबालिग लड़कियों को भेजता था और वहां पर उनका यौन शोषण होता था। एपस्टीन फाइल का एक हिस्सा इसी साल जारी किया गया था। इस फाइल में एपस्टीन के फाइनेंसरों और बाल यौन अपराध में शामिल कई हाई-प्रोफाइल सहयोगियों का विवरण था। अरबपति एपस्टीन को एक समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का खास दोस्त माना जाता था। हालांकि, एपस्टीन फाइल में ट्रम्प का नाम नहीं था, लेकिन एपस्टीन के साथ दोस्ती के कारण ट्रंप कई साल जांच के दायरे में रहे।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा ट्रंप ने मस्क को दी सब्सिडी बंद करने की (Elon Musk accuses authorities of hiding Epstein’s files) धमकी  बता दें कि एलन मस्क ने हाल ही में डीओजीई प्रमुख का पद छोड़ ट्रंप प्रशासन से अगल हो गए। ऐसा माना जा रहा है कि अमेरिका के नए टैक्‍स बिल को लेकर दोनों के बीच तनाव था। इसके बाद से ही ट्रंप और मस्क के बीच जुबानी जंग छिड़ी हुई है। मस्क ने ट्रंप पर “अमेरिका को दिवालिया बनाने” का आरोप लगाया था। जिसके बाद ट्रंप ने एक बयान देते हुए कहा कि ”वो मस्क की टेस्ला और एयरोस्पेस कंपनी को मिलने वाली सरकारी सब्सिडी को बंद कर सकते हैं।” जिसके बाद से टेस्ला कंपनी के शेयरों में भारी गिरावट हुई है। ट्रंप के इस घोषणा का जवाब देते हुए मस्क ने ट्रंप को कहा, ”अगर वह साथ नहीं देते तो ट्रंप राष्‍ट्रपति चुनाव नहीं जीत पाते, जो करना हो, वो कर लो।” Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump ElonMusk #TrumpEpstein #JeffreyEpstein #ChildAbuseFiles #TrumpControversy #EpsteinList #MuskVsTrump

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Bilawal Bhutto statement 2025

Bilawal Bhutto on Kashmir, No Help from UN: कश्मीर का राग अलापते हुए बिलावल भुट्टो ने कहा- “UN से भी नहीं मिली कोई मदद”

पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री बिलावल भुट्टो जरदारी (Bilawal Bhutto) अमेरिका में एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसका काम हाल के क्षेत्रीय तनावों पर इस्लामाबाद की पक्ष को रखना है। इस प्रतिनिधिमंडल का मुख्य उद्देश्य ऑपरेशन सिंदूर के नतीजे पर दुनिया को गुमराह करना है। कहने की जरूरत नहीं जिस तरह पाकिस्तान ने अपने प्रतिनिधिमंडल को विदेशों में भेजा है उसे देखकर तो यही कहा जा सकता है कि ये हूबहू भारत की नक़ल कर रहा है। दरअसल, भारत ने अपने कई सर्वदलीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल विदेशों में भेजे हैं। जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले और ऑपरेशन सिंदूर पर नई दिल्ली के स्टैंड को दुनिया के सामने रखना है। मजे की बात यह कि पाकिस्तान भी ठीक इसी तर्ज पर अपना प्रतिनिधि मंडल विदेशों में भेजा है। इसी क्रम में सोमवार को न्यूयॉर्क पहुंचने के बाद से बिलावल भुट्टो के प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस, सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट और महासभा के अध्यक्ष फिलेमोन यांग से मुलाकात (Bilawal Bhutto on Kashmir, No Help from UN) की है। दौरान उन्होंने  चीन, रूस, संयुक्त राज्य अमेरिका और फ्रांस के स्थायी प्रतिनिधियों, सुरक्षा परिषद के चार अन्य स्थायी सदस्यों के साथ-साथ गैर-स्थायी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ भी बातचीत की। संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाने के इस्लामाबाद के प्रयासों को लगातार असफलताओं का सामना (Bilawal Bhutto on Kashmir, No Help from UN) करना पड़ा है इस दौरान पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार (Bilawal Bhutto on Kashmir, No Help from UN) किया है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों, मुख्यतः संयुक्त राष्ट्र में कश्मीर मुद्दे को उठाने के इस्लामाबाद के प्रयासों को लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा है। बता दें कि मंगलवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन में अपनी बात रखते हुए भुट्टो ने कहा, जहां तक ​​​​संयुक्त राष्ट्र के भीतर और सामान्य तौर पर कश्मीर मुद्दे का सवाल है, हम जिन बाधाओं का सामना करते हैं, वे अभी भी मौजूद हैं। इस बीच संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और राजनयिकों के साथ बातचीत के दौरान भुट्टो ने कहा, जल विवाद और आतंकवाद जैसे विषयों पर पाकिस्तान बात करने को तैयार है।  इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर कश्मीर मुद्दे पर अपने अभियान में कोई प्रगति नहीं की-  बिलावल भुट्टो (पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष) यही नहीं, न्यूयार्क में संवाददाता सम्मेलन में भुट्टो (Bilawal Bhutto) ने कश्मीर का राग (Bilawal Bhutto on Kashmir, No Help from UN) अलापा। डेलीगेशन की अगुवाई कर रहे बिलावल भुट्टो माना है कि उनके देश ने संयुक्त राष्ट्र और अन्य जगहों पर कश्मीर मुद्दे पर अपने अभियान में कोई प्रगति नहीं की है। इस मुद्दे पर उन्होंने आगे कहा, जहां तक ​​संयुक्त राष्ट्र और सामान्य तौर पर कश्मीर मुद्दे का सवाल है, हमारे सामने आने वाली बाधाएं अभी भी मौजूद हैं। इस पर उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और राजनयिकों के साथ अपनी बैठकों में उन्हें आतंकवाद और जल जैसे मुद्दों पर तो मदद मिली, लेकिन यह कश्मीर तक नहीं पहुंची।  Latest News in Hindi Today Hindi news Bilawal Bhutto #BilawalBhutto #KashmirIssue #UNStatement #PakistanPolitics #IndiaPakistan #KashmirDispute #UNNews

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Russia Ukraine conflict escalation

Putin destroy Ukraine to prove his power: रूस ने निकाला परमाणु हथियारों का जखीरा, महाविनाश तय, यूक्रेन बर्बाद कर के ही मानेंगे पुतिन?

रूस तकरीबन पिछले 2 वर्षों से युद्ध में उलझा हुआ है। इस बीच यूक्रेन-रूस युद्ध दिन-ब-दिन घातक होता जा रहा है। ऐसे में दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की आहट को अनदेखा नहीं कर सकती। इसके पीछे की वजह यह कि पुतिन ने परमाणु हथियारों का जखीरा निकाल लिया है। इस कदम से रूस और यूक्रेन की जंग अब विश्व युद्ध में तब्दील होती दिखायी दे रही है। दरअसल, एक न्यूज रिपोर्ट में दावा किया गया था कि रूस ने 50 हजार सेना के जवान तैनात किए हैं। ये कीव पर बड़ा हमला कर सकते हैं। इससे पहले की रूस कुछ करता यूक्रेन ने रूस पर भीषण ड्रोन अटैक कर दिया। इस हमले से रूस को बड़ा भारी नुकसान पहुंचा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले में रूस के 2 एयरबेस के अलावा मॉस्को स्थित परमाणु स्टेशन पर भी ड्रोन अटैक हुए हैं। यूक्रेन द्वारा रूस में बड़ा ड्रोन हमला करके उसके 5 एयरबेस पर तबाही मचाने के बाद रूस ने यह कदम (Putin destroy Ukraine to prove his power) उठाया है। इस तबाही से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) के धैर्य की सीमा टूट चुकी है। यहाँ तक कि पुतिन ने यूक्रेन पर ओरेशनिक वारहेड्स से अटैक करने की धमकी दी है। रूस ने आरपार की लड़ाई का मूड बना लिया है। बहुत मुमकिन है कि जल्द ही पुतिन भी इस ड्रोन हमले का करारा जवाब दें। कारण यही जो रूस ने फाइटर परमाणु स्टेशन को हाई अलर्ट पर रखा है।  हमारे ओरेशनिक वारहेड्स सूर्य के तापमान तक पहुंचते हैं, यह बेहद विनाशकारी (Putin destroy Ukraine to prove his power) होते हैं यही नहीं, यूक्रेन के ड्रोन हमले के बाद रूसी राष्ट्रपति (Vladimir Putin) का पहला बयान भी आ गया है। पुतिन ने कहा, हम यूक्रेन पर ऐसे वारहेड से जवाबी हमला करेंगे, जो जिनकी गर्मी सूर्य के तापमान तक पहुंच (Putin destroy Ukraine to prove his power) जाती है। सख्त लहजे में पुतिन ने आगे कहा कि हमारे ओरेशनिक वारहेड्स सूर्य के तापमान तक पहुंचते हैं। यह बेहद विनाशकारी होते हैं। पुतिन ने यूक्रेन को खतरनाक तीखी चेतावनी जारी करते हुए कहा, रूस अब लक्ष्य चुन रहा है और यह लक्ष्य यूक्रेन की सीमाओं से भी परे हो सकते हैं। इस बात से कतई इंकार नहीं किया जा सकता कि यदि रूस यूक्रेन पर हमले के लिए ओरेशनिक वारहेड्स का इस्तेमाल करता है, तो भयानक तबाही मच सकती है। पुतिन के इस बयान को पश्चिमी सहयोगियों, अमेरिका और नाटो के लिए एक सीधी धमकी माना जा रहा है। खैर, इस बीच ब्रिटिश एक्टिविस्ट जिम फार्ग्यूसन की माने तो, रूस ने एंटी मिसाइल एयर डिफेंस सिस्टम को भी एक्टिव कर दिया है। इसके अलावा उन्होंने बताया कि सैटेलाइट डेटा से मिली जानकारी के अनुसार, वारहेड मार्गों पर असामान्य सैन्य गतिविधि के संकेत मिल रहे हैं। फार्ग्यूसन के मुताबिक इस तरह की गतिविधियां क्यूबा मिसाइल संकट के बाद कभी नहीं देखी गयीं। इस दौरान उन्होंने कहा, यह सिर्फ परमाणु धमकी तक सीमित नहीं है, बल्कि नाटो-गठबंधन वाले यूक्रेन और रूस के बीच परमाणु युद्ध के संकेत हैं। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा ओरेशनिक वारहेड्स रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलें (Putin destroy Ukraine to prove his power) हैं बता दें कि ओरेशनिक वारहेड्स रूस की हाइपरसोनिक मिसाइलें हैं। ये किसी भी देश के मौजूदा एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देकर बेहद तेज़ और सटीक हमले करने में सक्षम हैं। यह ध्वनि की गति से 5 गुना अधिक तेज चलती हैं। जानकारी के मुताबिक रूस के पास ऐसे ओरेशनिक वारहेड्स हैं जो 3 किलोमीटर प्रति सेकंड की रफ्तार से उड़ते हैं और टारगेट पर गिरते समय उनका तापमान 4000 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। जोकि लगभग सूर्य की सतह के तापमान के बराबर है। यह रूस की अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल वॉरहेड्स (Putin destroy Ukraine to prove his power) हैं। यह महाविनाश और भयानक तबाही लाने के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में यदि पुतिन यूक्रेन पर ओरेशनिक वारहेड्स से हमला करते हैं तो, यह दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध में भी धकेल सकता है। पुतिन के इस बयान के बाद अमेरिका, ब्रिटेन और नाटो बड़े चिंतित हो गए हैं। जानकारों का मानना है कि पुतिन (Vladimir Putin) का यह संदेश सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति भी है। खैर, इस बीच संयुक्त राष्ट्र समेत कई यूरोपीय देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और युद्ध को और आगे बढ़ने से रोकने की अपील की है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Putin destroy Ukraine to prove his power #Putin #UkraineWar #NuclearWeapons #RussiaUkraineConflict #WW3 #GlobalTensions #Zelensky #RussiaNews

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Ukraine destroys Russian bombers

Zelensky Warns Putin: यूक्रेन ने रूस के 40 एयरक्राफ्ट बॉम्बर्स को किया तबाह, जेलेंस्की ने दी पुतिन को धमकी

लंबे समय से रूस और यूक्रेन का युद्ध काफी जारी है। दोनों देश हैं कि हार मानने का नाम ही नहीं ले रहे हैं। आये दिन दोनों एक दूसरे पर घातक बमबारी कर रहे हैं। इस बीच यूक्रेन ने रविवार को रूस पर अबतक का सबसे बड़ा हमला किया।  जानकारी के मुताबिक यूक्रेन ने रूस में करीब 4 हजार किलोमीटर अंदर ड्रोन हमले कर रूसी एयरबेस को बड़ा नुकसान पहुंचाया और करीब 40 एयरक्राफ्ट बॉम्बर्स को तबाह कर दिया। ये हमला इतना भयंकर था कि इसे रूस के सबसे बड़े नुकसान के रूप में देखा जा रहा है। बहुत मुमकिन है कि इस हमले के बाद रूस जबरदस्त पलटवार करे। कहने की जरूरत नहीं,  इस कदम से जेलेंस्की को अमेरिकी राष्ट्रपति की भी नाराजगी झेलनी पड़ (Zelensky Warns Putin) सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि इस हमले को अंजाम देने से पहले यूक्रेन की ओर से ट्रंप को जानकारी नहीं दी गई है। एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक एक प्रशासनिक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति को ड्रोन हमले के बारे में पहले से जानकारी नहीं दी गई थी, जिसके बारे में एक यूक्रेनी सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि इस हमले में रूसी क्षेत्र के भीतर 40 से अधिक विमान नष्ट हो गए हैं। यूक्रेन की इस हिमाकत के बाद रूसी राष्ट्रपति तो पुतिन ऐसे ही खार खाये बैठे हैं।  राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों में सीजफायर कराने की भरसक कोशिश (Zelensky Warns Putin) कर रहे हैं गौरतलब हो कि सत्ता संभालने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों में सीजफायर कराने की भरसक कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यूक्रेन के इस कदम ने एक फिर सीजफायर की तमाम कोशिशों पर पानी फेर दिया है। यह बात किसी से छुपी भी नहीं है कि पिछले तीन वर्षों में अमेरिका ने यूक्रेन को आर्थिक और सैन्य तौर बड़ी मदद की है। अमेरिका नहीं होता तो यूक्रेन शायद ही युद्ध इतना लम्बा खींच पाता। ऐसे में अमेरिका को नाराज करना यूक्रेन के लिए भारी पड़ सकता है। ट्रंप ने पहले रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बारे में सकारात्मक बातें की थी। वह अब उनसे भी नाराज दिख (Zelensky Warns Putin)रहे हैं। बता दें कि एक रूसी हमले के बाद ट्रंप ने कहा था कि रूस के व्लादिमीर पुतिन के साथ मेरे हमेशा बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, लेकिन उनके साथ कुछ ऐसा हुआ है। वह बिल्कुल पागल हो गए हैं। यह ऑपरेशन पूरी तरह से उचित और (Zelensky Warns Putin) योग्य है इस हमले के बाद किसी भी तरह की अनहोनी से बेफिक्र यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की ने इसे एक शानदार ऑपरेशन बताते हुए कहा, दुश्मन के इलाके में, हमने केवल सैन्य उद्देश्यों को लक्षित करते हुए ऑपरेशन स्पाइडरवेब को अंजाम दिया जिससे रूस को महत्वपूर्ण नुकसान हुआ  है। जेलेंस्की ने आगे कहा, यूक्रेन की सुरक्षा सेवा के प्रमुख वसील मालियुक ने आज के ऑपरेशन के बारे में एक रिपोर्ट पेश की और कहा, यूक्रेन द्वारा हासिल किया गया यह परिणाम बेहतरीन है। योजना बनाने से लेकर प्रभावी क्रियान्वयन तक एक साल, छह महीने और नौ दिन (Zelensky Warns Putin) लगे। यह हमारा सबसे लंबी दूरी का ऑपरेशन था। ऑपरेशन की तैयारी में शामिल हमारे लोगों को समय रहते रूसी क्षेत्र से वापस बुला लिया गया। यूक्रेन की इस सफलता के लिए मैंने जनरल मालियुक को धन्यवाद दिया। इस हमले से गदगद जेलेंस्की ने कहा, यह ऑपरेशन पूरी तरह से उचित और योग्य है। हम एक पूर्ण और बिना शर्त युद्धविराम का प्रस्ताव करना जारी रखना चाहते हैं, लेकिन इसके साथ ही सभी तर्कसंगत और सम्मानजनक कदम भी उठाते हैं जो एक स्थायी और विश्वसनीय शांति की ओर ले जा सकते हैं। रूसियों के सामने हमने जो यूक्रेनी प्रस्ताव पेश किया है वह तार्किक और यथार्थवादी है। इसे भी पढ़ें:- अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा रूस चाहता क्या है? रूसियों ने अपना ज्ञापन किसी के साथ साझा नहीं किया (Zelensky Warns Putin) है यही नहीं, जेलेंस्की ने पुतिन को लेकर कहा, रूस चाहता क्या है? रूसियों ने अपना ज्ञापन किसी के साथ साझा नहीं किया (Zelensky Warns Putin) है। हमारे पास यह नहीं है। तुर्की पक्ष के पास यह नहीं है। और तो और अमेरिकी पक्ष के पास भी रूसी दस्तावेज़ नहीं है। इसके बावजूद, हम शांति की दिशा में कम से कम कुछ प्रगति हासिल करने की कोशिश करेंगे। आज, एक शानदार ऑपरेशन किया गया। इसकी तैयारी में डेढ़ साल से ज़्यादा का समय लगा। सबसे दिलचस्प बात यह है कि रूसी क्षेत्र में हमारे ऑपरेशन का कार्यालय उनके एक क्षेत्र में एफएसबी मुख्यालय के ठीक बगल में स्थित था। Latest News in Hindi Today Hindi news Zelensky Warns Putin #Zelensky #Putin #UkraineRussiaWar #RussianBombers #UkraineAirStrike #RussiaUkraineConflict #WarUpdate #VolodymyrZelensky

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Petrol bomb attack USA

Petrol Bomb Attack on Jews in US: अमेरिका में इस वजह से एक सनकी ने यहूदी भीड़ पर फेंका पेट्रोल बम, लगाया ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा

गाज़ा में इजरायल द्वारा हो रही हमास के आतंकियों पर बमबारी लगातार जारी है। इस बमबारी में कई निर्दोष नागरिकों के भी मारे जाने की खबरें हैं। इस बमबारी का असर अब दुनिया के अन्य देशों में भी दिखने लगा है। लोग और देश दो धड़ों में बट गए हैं। एक धड़ा इजरायल की इस कार्रवाई को जायज़ ठहरा रहा है तो दूसरा इसे अति करार दे रहा है। इसी क्रम में अमेरिका के कोलोराडो में एक व्यक्ति ने ‘फ्री फिलिस्तीन’ का नारा लगाते हुए भीड़ पर पेट्रोल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) बम से हमला कर दिया। इस हमले में कम से कम 6 लोग घायल होने की बात कही जा रही है। खैर, पुलिस ने संदिग्ध को हिरासत में ले लिया है। संदिग्ध की पहचान 45 वर्षीय मोहम्मद साबरी सोलिमा के रूप में हुई है। एफबीआई इसे एक्ट ऑफ टेरर (आतंकी कृत्य) करार दे रही है। एफबीआई के डायरेक्टर काश पटेल ने इसे टारगेटेड आतंकवादी हमला बताया तो वहीं कोलोराडो अटॉर्नी जनरल फिल वीजर ने कहा कि यह जिस समूह को निशाना बनाया गया था, उसे देखते हुए यह एक हेट क्राइम का मामला प्रतीत होता है। इसके आलावा एफबीआई के असिसटेंट डायरेक्टर बेन विलियमसन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, संदिग्ध यहूदी लोगों की भीड़ पर बम फेंकते समय ‘फ्री फिलिस्तीन’ चिल्लाया था।  वह आदमी बिना शर्ट के खड़ा था और उसके हाथ में कांच की बोतल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) थी- चश्मदीद चश्मदीदों में से एक कोलोराडो यूनिवर्सिटी की 19 वर्षीय ब्रुक कॉफमैन ने बोल्डर में हुई घटना को अपनी आंखों के सामने देखा। इस संबंध में उसने कहा कि उसने चार महिलाओं को पैरों पर जली हुई अवस्था में जमीन पर लेटे या बैठे देखा। उन्होंने कहा, ऐसा लगता है कि उनमें से एक के शरीर का अधिकांश हिस्सा बुरी तरह से जल गया है और उसे किसी ने झंडे में लपेट दिया है। उसने आगे कहा कि मैंने एक आदमी को देखा, जिसे उसने हमलावर बताया। वह आदमी बिना शर्ट के खड़ा था और उसके हाथ में कांच की बोतल (Petrol Bomb Attack on Jews in US) थी। वह चिल्ला रहा था। कॉफमैन ने कहा, हमले के बाद हर कोई चिल्ला रहा था, ‘पानी लाओ, पानी लाओ।’ दरअसल, गाजा में बचे इजरायली बंधकों की याद में एक प्रदर्शनी निकाली गई थी। उसी दौरान इस हमले को अंजाम दिया गया। इस पूरे मामले पर बोल्डर पुलिस के मुखिया स्टीफन रेडफर्न ने कहा, पर्ल स्ट्रीट के डाउनटाउन बोल्डर में रविवार की दोपहर यह हमला हुआ और यह काम अस्वीकार्य था। मैं आपसे अनुरोध करता हूं कि आप पीड़ितों, उन पीड़ितों के परिवारों और इस त्रासदी में शामिल सभी लोगों के लिए दुआ करें। बेशक इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि यह घटना गाजा में इजरायल के युद्ध को लेकर अमेरिका में बढ़े तनाव के बीच हुई है। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार यह हमला वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की घातक गोलीबारी के बाद हुआ (Petrol Bomb Attack on Jews in US) है यहाँ ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि गाजा युद्ध ने यहूदी विरोधी हेट क्राइम में वृद्धि हुई गई। यही नहीं, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इजरायल के रूढ़िवादी समर्थकों द्वारा फिलिस्तीन समर्थक विरोध प्रदर्शनों को यहूदी विरोधी बताने के कदमों को भी बढ़ावा दिया है। ट्रंप के प्रशासन ने युद्ध के प्रदर्शनकारियों को बिना किसी आरोप के हिरासत में ले लिया है और ऐसे प्रदर्शनों की अनुमति देने वाले कई अमेरिकी यूनिवर्सिटी को दिए जाने वाले फंड में कटौती कर दी है।  गौरतलब हो कि यह हमला पिछले महीने वाशिंगटन डीसी में इजरायली दूतावास के दो कर्मचारियों की घातक गोलीबारी के बाद हुआ (Petrol Bomb Attack on Jews in US) है। बता दें कि अमेरिकी यहूदी समिति द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे लोगों के एक समूह पर किसी ने गोलियां चला दी थीं। कहने की जरूरत नहीं गाज़ा में हो रही बमबारी और यहूदी समुदाय में हो रहे इस तरह के हमलों ने अमेरिका में गाजा में इजरायल समर्थकों और फिलिस्तीन समर्थक प्रदर्शनकारियों के बीच युद्ध को लेकर तनाव बढ़ा दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Petrol Bomb Attack on Jews in US #PetrolBombAttack #JewishCommunity #FreePalestine #USAProtests #HateCrime #AntiSemitism #USNews #GazaTensions #MiddleEastCrisis

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Musk Trump disagreement

Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt: एलन मस्क ने छोड़ा ट्रंप सरकार का साथ, इस वजह से दोस्ती में आई दरार

टेस्ला के मालिक एलन मस्क ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच सब कुछ सही नहीं चला रहा है। इससे पहले भी दोनों के रिश्तों में तल्खी देखी गयी थी। अततः एलन मस्क ने ट्रंप के विशेष सलाहकार पद से इस्तीफा दे (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) दिया है। डोनाल्ड ट्रंप के बेहद खास माने जाने वालों में से एक एलन मस्क ने ऐलान किया है कि “वह ट्रंप प्रशासन से बाहर हो रहे हैं। संघीय नौकरशाही को कम करने और उसमें सुधार लाने के प्रयासों का नेतृत्व करने के बाद एलन मस्क राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शीर्ष सलाहकार के रूप में अपनी सरकारी भूमिका छोड़ रहे हैं। उन्होंने बुधवार को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर बताया कि “वे सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख के रूप में अपना कार्यकाल पूरा कर चुके हैं।” इसके साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति ट्रंप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि “उन्होंने उन पर विश्वास किया और उन्हें अपने प्रशासन में एक विशेष सरकारी कर्मचारी के तौर पर शामिल किया।”  राष्ट्रपति द्वारा इसे एक शानदार बिल कहना निराशाजनक (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) है- एलन मस्क गौर करने वाली बात यह कि मस्क का यह बयान ऐसे समय पर आया है, जब लंबे समय से ये चर्चा चल रही थी कि दोनों के बीच रिश्ते ठीक नहीं हैं। हालाँकि मस्क ने कुछ दिन पहले ही ट्रंप के एक फैसले की आलोचना करते हुए कहा था कि “राष्ट्रपति द्वारा इसे एक शानदार बिल कहना निराशाजनक (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) है। मस्क के मुताबिक, यह फैसला खर्चों में भारी बढ़ोतरी करेगा, जिससे संघीय घाटा बढ़ेगा।” बता दें कि एलन मस्क को अमेरिकी सरकार में विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में नामित किया गया था। इसके तहत वह हर साल 130 दिनों तक सरकार के काम में अपनी सलाह देते। ध्यान देने वाली बात यह कि 20 जनवरी को ट्रंप के शपथ ग्रहण से मई के अंत में ये सीमा पूरी हो रही है। जानकारी के मुताबिक व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने समाचार आउटलेट सेमाफोर को बताया कि “विशेष सरकारी कर्मचारी के रूप में मस्क की ऑफबोर्डिंग बुधवार रात से शुरू होगी। इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार मैं राष्ट्रपति ट्रंप को फिजूलखर्ची को कम करने के अवसर के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा- एलन मस्क गौरतलब हो कि उन्होंने इस ऐलान से पहले बाकायदा ट्रंप के सुंदर बिल की आलोचना की थी। मस्क ने कहा था कि “वह इस बिल से निराश (Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt) हैं। इस विधेयक में कर कटौती और आव्रजन प्रवर्तन में वृद्धि का मिश्रण शामिल है। मस्क ने इसे एक बहुत बड़ा व्यय विधेयक बताया जो संघीय घाटे को बढ़ाता है और उनके सरकारी दक्षता विभाग, जिसे डीओजीई के नाम से जाना जाता है, के काम को कमजोर करता है। उन्होंने सोशल मीडिया एक्स पर एक पोस्ट कर लिखा कि “मैं राष्ट्रपति ट्रंप को फिजूलखर्ची को कम करने के अवसर के लिए धन्यवाद देना चाहूंगा। डीओजेई मिशन समय के साथ और मजबूत होगा क्योंकि यह सरकार चलाने का एक तरीका बन जाएगा।” खैर, कुल-मिलकर बात यह कि मास्क ट्रम्प के कुछ फैसलों से नाराज चल रहे थे। उन्होंने ट्रंप द्वारा टैक्स में कटौती और इमिग्रेशन सुधार के फैसले को लेकर सीबीएस के साथ बातचीत में कहा कि “मेरा मानना है कि कोई भी बिल या तो बड़ा हो सकता है या फिर सुंदर, लेकिन दोनों नहीं हो सकता। कुछ चीजें हैं जिनसे मैं संतुष्ट नहीं हूं, मगर कई चीजों से मैं काफी उत्साहित हूं।” इस दौरान मस्क ने यह भी बताया कि “इस फैसले में कुछ बदलाव होने की संभावना बनी हुई है, जैसा कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कहा है।” Latest News in Hindi Today Hindi news  Elon Musk Breaks Ties with Trump Govt #ElonMusk #Trump #Politics #BreakingNews #MuskVsTrump #USPolitics

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Interpol Begins Silver Notice

Interpol Begins Silver Notice: रेड कॉर्नर नोटिस के बाद इंटरपोल ने शुरू की सिल्‍वर नोटिस, इन लोगों पर कसी जाएगी नकेल

जैसा कि आप सभी जानते हैं कि दुनिया भर के देश रेड कॉर्नर नोटिस के जरिए फरार अपराधियों को पकड़ने की कोशिश करते हैं। इनमें भारत भी शामिल है। यह चलन आज से नहीं बल्कि दशकों से चला आ रहा (Interpol Begins Silver Notice) है। अब इंटरपोल ने सिल्वर नोटिस (Silver Notice) नाम से एक नई सुविधा शुरू की है। फिलहाल यह सुविधा एक पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू की गई है। इसमें कुल 51 देशों की भागीदारी है। यह पायलट प्रोग्राम नवंबर 2025 तक चलेगा। जानकारी के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के तहत प्रत्येक देश 9 सिल्वर नोटिस जारी कर सकता है। इसके तहत दुनिया भर के देशों को अपराधियों की संपत्तियों से जुड़ी जानकारी आपस में साझा करने में मदद मिलेगी। इस नोटिस के जरिए सदस्य देश किसी भी व्यक्ति की अवैध कमाई से जुड़ी संपत्तियों मसलन, गाड़ियां, बैंक खाते, मकान और व्यापार आदि की जानकारी मांग सकते हैं। इससे धोखाधड़ी, भ्रष्टाचार, नशा तस्करी और अन्य गंभीर अपराधों में जुटाई गई संपत्ति को ट्रैक और जब्त करने की प्रक्रिया बेहद आसान होगी। सीबीआई ने पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ किया है (Interpol Begins Silver Notice) जारी   इंटरपोल की इस सुविधा के तहत सीबीआई ने 23 मई 2025 को पहला सिल्वर नोटिस शुभम शोकीन के खिलाफ जारी (Interpol Begins Silver Notice) किया है। बता दें कि शुभम शोकीन नई दिल्ली स्थित एक विदेशी दूतावास में वीजा और स्थानीय कानून अधिकारी के रूप में काम किया करते थे। उन्होंने सितंबर 2019 से मई 2022 के दौरान अन्य आरोपियों के साथ मिलकर वीजा में धोखाधड़ी की। इसके तहत उन्होंने प्रत्येक वीजा आवेदक से तकरीबन 15 लाख से 45 लाख रुपये तक की अवैध रिश्वत लेकर शेंगेन वीजा जारी किए। खबर के मुताबिक इस अपराध से प्राप्त पैसों से उन्होंने दुबई, यूएई में 77.60 लाख दिरहम ( तकरीबन 15.73 करोड़) खर्च कर छह अचल संपत्तियां खरीदीं। हालांकि, सीबीआई ने पहले उनके ठिकानों का पता लगाने हेतु उनके खिलाफ ब्लू नोटिस भी जारी किया था।  अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ (Interpol Begins Silver Notice) जारी किया गया है दूसरा सिल्वर नोटिस  शुभम शोकीन के खिलाफ पहला तो 26 मई 2025 को सीबीआई ने ईडी के अनुरोध पर अमित मदनलाल लखनपाल के खिलाफ दूसरा सिल्वर नोटिस (Interpol Begins Silver Notice) जारी किया। लखनपाल ने मनी ट्रेड कॉइन नामक एक डिजिटल/क्रिप्टो-करेंसी बनाई, जो कि भारत में मान्यता प्राप्त नहीं है। उन्होंने निवेशकों को लुभाकर 113.10 करोड़ रुपये एकत्र किए। कमाल की बात यह कि बिना सरकारी या भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के उन्होंने निवेशकों को वादा किया गया रिटर्न नहीं लौटाया और धन का गबन कर लिया। लखनपाल ने खुद को वित्त मंत्रालय का अधिकृत प्रतिनिधि बताकर लोगों को धोखा दिया। उनके खिलाफ पहले रेड नोटिस भी जारी किया जा चुका है।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तानी मुहाजिरों की आखिरी उम्मीद PM मोदी, पाक नेता ने सेना से बचाने की लगाई गुहार सिल्‍वर कॉर्नर नोटिस (Silver Notice) के तहत देश भ्रष्टाचार और तस्करी जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी कर सकते हैं साझा  भारत ने प्रवर्तन निदेशालय, सीबीआई और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की जांच से संबंधित कई मामलों में सिल्वर नोटिस (Silver Notice) हेतु अनुरोध प्रस्तुत किए (Interpol Begins Silver Notice) हैं। गौरतलब हो कि सिल्वर नोटिस इन व्यक्तियों की वैश्विक संपत्तियों की पहचान और निगरानी में मदद करेगा। इसकी मदद से अपराध से अर्जित संपत्तियों की जब्ती और वसूली करने में सहायता मिलेगी। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि यह भारत के लिए अंतरराष्ट्रीय अपराध से निपटने में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। बता दें कि सिल्‍वर कॉर्नर नोटिस के तहत देश भ्रष्टाचार, नशीली दवाओं की तस्करी, धोखाधड़ी, पर्यावरणीय अपराधों जैसे गंभीर अपराधों से जुड़ी संपत्तियों की जानकारी साझा कर सकते हैं।    Latest News in Hindi Today Hindi news  Interpol Begins Silver Notice #Interpol #SilverNotice #RedCornerNotice #MostWanted #InterpolAlert #GlobalCrackdown #InterpolSearch #InterpolUpdates

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India Slams Pakistan on Terrorism at UN

UN में भारत ने आतंकवाद पर पाकिस्तान को जमकर धोया… सिंधु जल संधि पर भी कर दी बोलती बंद

संयुक्त राष्ट्र (UN) में चल रही अरिया फॉर्मूला बैठक में भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए (India Slams Pakistan on Terrorism at UN) उसके दोहरे चरित्र और सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) के उल्लंघन की तीखी आलोचना की। भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने कहा कि पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह न सिर्फ संधि का उल्लंघन कर रहा है, बल्कि भारत पर लगातार आतंकवादी हमले करवा कर हजारों निर्दोष नागरिकों की जान भी ले चुका है। जिसकी वजह से सिंधु जल संधि  (Indus Water Treaty) को स्थगित कर दिया गया है।  पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान के साथ 1960 में सिंधु जल संधि (Indus Water Treaty) को शांति और सद्भाव के आधार पर किया था। यह संधि उस समय भी लागू रही जब दोनों देशों के बीच तीन युद्ध हुए। भारत ने हर परिस्थिति में इस समझौते का सम्मान किया, लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इस संधि को ठेस पहुंचाई। उन्होंने कहा, “अब तक 20,000 से अधिक भारतीय नागरिक आतंकवाद की वजह से मारे जा चुके हैं। हाल ही में पहलगाम में हुआ आतंकी हमला भी इसी श्रृंखला का हिस्सा है।” भारत के इस तीखे और तथ्यपूर्ण भाषण के बाद पाकिस्तान की स्थिति संयुक्त राष्ट्र में असहज हो गई। उसकी पहले से ही कमजोर पड़ चुकी अंतरराष्ट्रीय साख को और धक्का लगा।  तथ्यों के साथ पाकिस्तान की बोलती कर दी बंद संयुक्त राष्ट्र सभा को संबोधित करते हुए पार्वथानेनी हरीश (Parvathaneni Harish) ने यह भी याद दिलाया कि 2012 में जम्मू-कश्मीर में तुलबुल नेविगेशन प्रोजेक्ट पर आतंकियों ने हमला किया था। यह हमला न सिर्फ एक निर्माण परियोजना पर था, बल्कि यह पाकिस्तान की उस मंशा को भी जाहिर करता है कि, यह देश भारत के जल संसाधनों को नुकसान पहुंचाना और आम नागरिकों के जीवन को खतरे में डालना चाहता है। सिंधु जल संधि के अंतर्गत भारत को अपनी परियोजनाओं में आवश्यक तकनीकी सुधार और बदलाव करने का पूरा अधिकार है, ताकि संचालन सुरक्षित और प्रभावी हो सके। लेकिन पाकिस्तान ने बार-बार इन कार्यों में बाधा डाली।  इसे भी पढ़ें:- सेना से जारी तकरार के चलते मोहम्मद यूनुस दे सकते हैं इस्तीफा? आतंक और संधि अब एक साथ नहीं चल सकते भारतीय प्रतिनिधि ने सभा को यह भी बताया कि भारत ने पिछले दो वर्षों में कई बार संधि में संशोधन पर चर्चा करने के लिए पाकिस्तान को आमंत्रित किया, लेकिन पाकिस्तान का रवैया हर बार टकरावपूर्ण रहा। ऐसे में भारत के पास सीमित विकल्प ही बचे थे। यही वजह है कि भारत ने अब यह निर्णय लिया है कि जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को रोकने के लिए ठोस कदम नहीं उठाता, तब तक सिंधु जल संधि को स्थगित रखा जाएगा। अब आतंक और संधि एक साथ नहीं चल सकते। भारत ने हमेशा संयम और उदारता का प्रदर्शन किया है, लेकिन अब वह अपनी सुरक्षा, संप्रभुता और नागरिकों की जान को खतरे में नहीं डाल सकता। भारत के इस ठोस रुख ने यह स्पष्ट कर दिया है कि अब समय आ गया है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी पाकिस्तान की आतंकवाद-समर्थक नीतियों पर गंभीरता से विचार करे। Latest News in Hindi Today Hindi news India Slams Pakistan on Terrorism at UN IndiaVsPakistan #UNSpeech #TerrorismDebate #IndiaStandsStrong #SindhuWaterTreaty #PakExposed #ModiAtUN #IndiaUNResponse #DiplomaticStrike #GlobalTerrorTalk

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Mohammad Yunus May Resign

Mohammad Yunus May Resign: सेना से जारी तकरार के चलते मोहम्मद यूनुस दे सकते हैं इस्तीफा?

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में स्थति डाँवाडोल बन गई है। वैसे तो बांग्लादेश में लंबे समय से राजनीतिक उथल-पुथल मची हुई है। शेख हसीना सरकार के तख्तापलट के बाद से अब तक बांग्लादेश स्थिर नहीं हो पाया है। खैर, वर्तमान में बांग्लादेश की कमान अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के हाथों में हैं इसके बावजूद स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। इस बीच खबर है कि मुहम्मद यूनुस जल्द अपने पद से जल्द ही इस्तीफा दे (Mohammad Yunus May Resign) सकते हैं। बीबीसी बांग्ला की रिपोर्ट की माने तो, बांग्लादेश में मुहम्मद यूनुस को काम करना लगातार मुश्किल होता चला जा रहा है। जानकारी के मुताबिक राजनीतिक दलों में आपसी सहमत न बन पाने के कारण मतभेद बढ़ता जा रहा है। बढ़ते मतभेद और राजनीतिक गतिरोध के चलते खबर है कि मुहम्मद यूनुस इस्तीफा देने का मन बना रहे हैं। हालाँकि हाल के दिनों में मुहम्मद यूनुस और बांग्लादेश की सेना के प्रमुख के बीच भी तकरार की खबरें आईं थीं।  अगर युनुस अपना काम नहीं कर सकते तो उनके रहने का कोई मतलब (Mohammad Yunus May Resign) नहीं दरअसल, बांग्लादेश की नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता निद इस्लाम ने खुलासा करते हुए कहा कि “मुहम्मद यूनुस इस्तीफा देने का (Mohammad Yunus May Resign) सोच रहे हैं।” जानकारी के मुताबिक निद इस्लाम ने मुहम्मद यूनुस से मुलाकात करने के बाद कहा कि “हम उनके इस्तीफे के बारे में सुन रहे हैं। इसलिए मैं इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए उनसे मिलने गया था। उन्होंने मुझे बताया कि वह इस बारे में सोच रहे हैं। उन्हें लगता है कि मौजूदा स्थिति ऐसी है कि वह काम करना जारी नहीं रख सकते।” इसपर अधिक बोलते हुए इस्लाम ने कहा कि “उन्होंने युनुस से कहा कि उन्हें उम्मीद है कि राजनीतिक दल एकजुट होकर सहयोग करेंगे और मुझे उम्मीद है कि सभी उनके साथ सहयोग करेंगे।” हालांकि, एनसीपी नेता ने कहा कि “अगर युनुस अपना काम नहीं कर सकते तो उनके रहने का कोई मतलब नहीं।” कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि मोहम्मद युनुस ने पद से इस्तीफा देने की धमकी दी। ऐसे में खबर भी है कि युनुस अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं, क्योंकि राजनीतिक दल एक आम सहमति पर नहीं पहुंच पा रहे हैं। इस वजह से युनुस को काम करने में दिक्कत हो रही है। माइंड गेम खेलने लगे (Mohammad Yunus May Resign) हैं मोहम्मद यूनुस  दरअसल, यूनुस सरकार एक नहीं, कई मोर्चों पर तमाम तरह की चुनौतियों का सामना कर रही है। सबसे बड़ा संकट सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान के साथ लगातार बढ़ता तनाव है। कहने की जरूरत नहीं, सेना और यूनुस के बीच मतभेद जग जाहिर है। तनाव बढ़ने की वजह लोग जल्द से जल्द चुनाव कराने की मांग बताई जा रही है। यही नहीं, बांग्लादेशी सेना मोहम्मद यूनुस की कार्यशैली और उनकी चीन और पाकिस्तान समर्थक नीतियों से असंतुष्ट है। ऐसे में मोहम्मद यूनुस खुद की कुर्सी जाती देख इमोशनल ब्लैकमेल करने लगे हैं। करीबियों का कहना है कि यूनुस बांग्लादेश में अपना एकछत्र राज चाहते हैं। वो किसी की नहीं सुनते। ऐसे में जब उनसे सही से सरकार चलाने और चुनाव कराने के लिए कहा गया तो वह माइंड गेम खेलने लगे (Mohammad Yunus May Resign) हैं।  इसे भी पढ़ें:- अमृतसर में जहरीली शराब ने ली 14 लोगों की जान, मचा हड़कंप, प्रशासन पर उठे सवाल आखिर क्यों  मोहम्मद यूनुस इस्तीफा देने की सोच (Mohammad Yunus May Resign) रहे ऐसे में बड़ा और महत्वपूर्ण सवाल यह कि मोहम्मद यूनुस आखिर इस्तीफा क्यों देने की सोच (Mohammad Yunus May Resign) रहे? क्या वो सेना से डरे हुए हैं या फिर उन्हें लग रहा है कि बांग्लादेश हाथ से निकलने वाला है। जानकारी के मुताबिक बांग्लादेश के आर्मी चीफ जनरल वाकर-उज-जमान यूनुस को सुनाते हुए कहा है कि देश का भविष्य कोई गैर निर्वाचित सरकार तय नहीं करेगी। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि देश में जल्द से जल्द चुनाव होने चाहिए। भविष्य एक निर्वाचित सरकार तय करे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उन्होंने चुनाव के लिए दिसंबर 2025 की डेडलाइन दी है। कहने की जरूरत नहीं कि आर्मी चीफ के इस अल्टीमेटम के बाद यूनुस की कुर्सी डगमगा गई है। उन्हें अब लग रहा है कि उनकी कुर्सी जाने ही वाली है। सो, इसलिए वह खुद इस्तीफा देकर एक अलग खेल खेलना चाहते हैं। यूनुस के इस्तीफा देने के पीछे एक वजह यह भी हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news  Mohammad Yunus May Resign #MohammadYunus #Resignation #MaldivesPolitics #MilitaryTension #BreakingNews

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