Spain Pakistani arrests

Pakistani arrests in Spain: स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार

स्पेन के बार्सिलोना में एक संगठन के खिलाफ एक बड़ा ऑपरेशन किया गया। खबर के मुताबिक कैटेलोनिया पुलिस, स्पेनिश राष्ट्रीय पुलिस और इतालवी पुलिस के संयुक्त अभियान में बार्सिलोना में 10 और इतालवी शहर पियासेंज़ा में एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया। इन पर अपने विरोधियों की हत्या और सिर कलम करने के लिए उकसाने का आरोप है। जानकारी के मुताबिक जांच में पता चला कि संदिग्ध किसी ऐसे संगठित आपराधिक संगठन से जुड़े थे, जो मैसेजिंग ग्रुप के जरिए हिंसक आदेश जारी करते थे। दरअसल, बार्सिलोना में बीती रात कई मस्जिदों पर आतंकवाद रोधी दस्ते ने ताबड़तोड़ छापेमारी की। पुलिस को शक था कि इन मस्जिदों से आतंकी गतिवधियां संचालित की जा रही हैं। मजे की बात यह कि इस छापेमारी के एक दिन पहले बार्सिलोना में ही 10 पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को आतंकवाद के आरोप में गिरफ्तार किया था। फिर क्या था इस गिरफ्तारी के बाद सुरक्षाबलों ने कई मस्जिदों में अचानक छापेमारी की।  यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था (Pakistani arrests in Spain) इस छापेमारी पर स्पेनिश पुलिस बलों द्वारा जारी किये गए बयान के मुताबिक, यह ऑपरेशन 3 मार्च की रात को किया गया था और जांच के बाद 2022 में 5 और 2023 में 14 लोगों की गिरफ्तारी हुई। इस बीच सोमवार को सैंट एड्रिया डे बेजोस, मोंटकाडा आई रेसच, सांता कोलोमा डे ग्रामेनेट और सबडेल में 10  (Pakistani arrests in Spain) गिरफ्तारियां हुईं। जांच में पता चला कि संगठन एक चरमपंथी समूह से जुड़ा हुआ था। पुलिस के अनुसार, यह समूह बड़ा ही संगठित और गुप्त था। ये मैसेजिंग ऐप के माध्यम से विरोधियों के खिलाफ हिंसक संदेश फैलाने का काम करता था। इस दौरान कुछ व्यक्तियों ने यूरोप में विशिष्ट लोगों को संभावित लक्ष्य के रूप में पहचान करनी शुरू कर दी थी। ध्यान देने वाली बात यह कि इस संगठन के पोस्ट में उन व्यक्तियों की भी प्रशंसा की गई थी, जिन्होंने ईशनिंदा के आरोप में यूरोप और पाकिस्तान में हमले किए थे। समूह का उद्देश्य न सिर्फ चरमपंथी विचारों का प्रचार करना था बल्कि संभावित लक्ष्यों की पहचान करना भी था ताकि भविष्य में सटीक कार्रवाई की जा सके। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष किया गया पेश  खैर, यह भी पता चला है कि गिरफ्तार महिलाओं में से एक के नेतृत्व वाले मैसेजिंग समूह में सिर्फ महिलाएं ही शामिल थीं। जांच अधिकारियों ने पुष्टि की है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का संबंध आतंकवादी संगठन से है। जिसे अपने आर्थिक समर्थन के लिए अपने सदस्यों से ही दान मिला करता था। जानकारी के लिए बता दें कि 6 मार्च को, दस के दस गिरफ्तार पाकिस्तानियों (Pakistani arrests in Spain) को केंद्रीय जांच न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। उन पर आतंकवाद की सहायता, उसे बढ़ावा देने, आर्थिक मदद करने और भर्ती करने के साथ-साथ संभावित लक्ष्यों की पहचान करने हेतु प्रारंभिक कदम उठाने का आरोप लगाया गया है। इस मामले की सुनवाई उपर्युक्त अदालत के न्यायाधीश की देखरेख में हो रही है। खबर के मुताबिक न्यायाधीश ने स्पेन के राष्ट्रीय न्यायालय के लोक अभियोजक कार्यालय के सहयोग से चार लोगों को हिरासत में लेने का आदेश दिया है। Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistani arrests in Spain #SpainTerrorAction #PakistanArrests #TerrorismCrackdown #SpainPolice #GlobalSecurity #BreakingNews #TerrorSuspects #InternationalCrime #LawEnforcement #SecurityAlert

आगे और पढ़ें
EconomicPartnership

Mark Carney होंगे कनाडा के नये प्रधानमंत्री, क्या सुधरेंगे भारत से संबंध?

ट्रूडो ने जनवरी में ही पार्टी को देश के नया प्रधानमंत्री चुनने को कह दिया था। हालांकि अब जाकर कनाडा के नए प्रधानमंत्री के नाम पर मुहर लगी है। मार्क कार्नी, जी हाँ मार्क कार्नी (Mark Carney) कनाडा के अगले प्रधानमंत्री होंगे। कनाडा के पीएम की रेस में उनका नाम सबसे आगे चल रहा था। वर्तमान पीएम जस्टिन ट्रूडो के उत्तराधिकारी के रूप में मार्क कार्नी के नाम ठप्पा लगा दिया है। रविवार को सत्तारूढ़ लिबरल पार्टी ने उन्हें अपना नेता चुना। दरअसल, ट्रूडो के खिलाफ अपने ही नेताओं ने मोर्चा खोल लिया था, जिसके बाद ट्रूडो ने इस्तीफे का ऐलान किया था। खैर, नाम के ऐलान के कार्नी जस्टिन ट्रूडो की जगह लेंगे। वैसे तो मार्क कार्नी कनाडा की राजनीति से दूर रहे हैं, लेकिन इस बीच इस बीच उन्हें मौके कई बार मिले। साल 2012 में ही उन्हें तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने वित्त मंत्री बनने का मौका दिया था, लेकिन उनके प्रस्ताव को उन्होंने नकार दिया था। बता दें कि कार्नी एक प्रसिद्ध अर्थशास्त्री हैं औऱ वह दुनिया के दो बड़े देशों में गवर्नर रह चुके हैं। मार्क कार्नी (Mark Carney) को राजनीति का कोई अनुभव नहीं है बात करें मार्क कार्नी की तो वे (Mark Carney) 59 वर्ष के हैं। 16 मार्च, 1965 को नॉर्थवेस्ट टेरिटरीज़ के फ़ोर्ट स्मिथ में जन्मे कार्नी का पालन-पोषण एडमॉन्टन, अल्बर्टा में हुआ था। मार्क कार्नी एक प्रसिद्ध कनाडाई आर्थिक विशेषज्ञ हैं। कार्नी को केंद्रीय बैंकिंग और वैश्विक वित्तीय स्थिरता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान देने के लिए जाना जाता है। उन्होंने साल 2008 से साल 2013 तक बैंक ऑफ कनाडा और 2013 से 2020 तक बैंक ऑफ इंग्लैंड का संचालन भी किया है। यही नहीं कार्नी गोल्डमैन सैक्स के पूर्व कार्यकारी भी रहे हैं। साल 2003 में बैंक ऑफ कनाडा के डिप्टी गवर्नर नियुक्त होने से पहले उन्होंने न्यूयॉर्क, लंदन, टोक्यो और टोरंटो में 13 साल तक काम किया। उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं है।उन्हें विशेष रूप से आर्थिक संकट के दौरान स्थिरता बनाए रखने, केंद्रीय बैंकों की भूमिका को पुनः परिभाषित करने में माहरत हासिल है। रही बात उनकी शिक्षा की तो साल 1988 में हार्वर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में स्नातक की डिग्री और ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर और डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त की। इसे भी पढ़ें:- भारत ने चैंपियंस ट्रॉफी 2025 पर जमाया कब्जा, न्यूजीलैंड को हराकर रचा इतिहास मार्क कार्नी (Mark Carney) रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है  ऐसे में बड़ा सवाल यह कि भारत के प्रति मार्क कार्नी (Mark Carney) का क्या रुख होगा। क्योंकि जस्टिन ट्रूडो ने अपने कार्यकाल के दौरान भारत के साथ संबंधों को बदतर करने में कोई कोर असर नहीं छोड़ी थी। हालांकि मार्क कार्नी रिश्ते बेहतर होने की उम्मीद है। दरअसल,कार्नी ही वह शख्स हैं, जिन्होंने हाल ही में कहा था कि “भारत के साथ रिश्ते फिर से मजबूत करने चाहिए।” यहां जानकारों की माने तो मार्क कार्नी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पसंद नहीं करते। वो बात और है कि उन्होंने कभी खुल कर मुख़ालफ़त नहीं की। कनाडा पर ट्रंप की बदनीयत के बाद कार्नी के सामने न सिर्फ इकोनॉमी को मजबूत करने बल्कि देश के लोगों का भरोसा जीतने की भी चुनौती होगी। इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि कनाडा इस समय कई संकटों से घिरा है। जिसमें अमेरिका की ओर से टैरिफ वॉर सबसे ऊपर है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mark Carney #MarkCarney #CanadaPM #CanadaIndiaRelations #JustinTrudeau #Diplomacy #GlobalPolitics

आगे और पढ़ें
China population crisis

Population crisis China: चीन की सरकार का तुगलकी फरमान, 9 महीने में बच्चा पैदा करो वरना नौकरी से हाथ धो बैठो

बढ़ती आबादी किसी भी देश के लिए चिंता का सबब होती है। भारत में यह एक सबसे बड़ी समस्या है। लेकिन कुछ देश ऐसे भी हैं जो घटती आबादी से परेशान हैं। उन्हीं देशों में एक देश है चीन। चंद वर्षों पहले चीन बढ़ती आबादी से परेशान था। कारण यही जो उसने अपने देश में सिंगल चाइल्ड पॉलिसी को बढ़ावा दिया था। कुछ साल पहले तक दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश रहा चीन अब घटती आबादी से (Population crisis China) परेशान है। मौजूदा दौर में भारत दुनिया में सबसे अधिक आबादी वाला देश है। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि बीते तीन-चार दशकों में चीन ने बेहिसाब आर्थिक प्रगति की है। यह तो ठीक लेकिन इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता कि इस प्रगति का बुरा असर वहां के युवाओं पर पड़ा है। युवा करियर और पैसों  के चक्कर में इस कदर पागल हो चुके हैं कि शादी और परिवार में कोई दिलचस्पी नहीं गई है। आपको जानकार हैरानी होगी कि इस समस्या का शिकार सिर्फ चीन ही नहीं बल्कि  हाल चीन के पड़ोसी मुल्क जापान और दक्षिण कोरिया भी हैं। दक्षिण कोरिया में आलम यह कि दक्षिण कोरिया में फर्टिलिटी रेट दुनिया में सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है।  युवा अपनी निजी आजादी का हवाला देकर पैदा नहीं (Population crisis China) करना चाहता बच्चा  चीन की आर्थिक प्रगति के साथ से वहां लिविंग स्टाइल और कॉस्ट में भी काफी बढ़ोतरी हुई है। युवाओं के एक वर्ग मानना है कि कॉस्ट बढ़ने की वजह से वह बच्चे पैदा नहीं करना चाहते हैं। इसके अलावा एक वर्ग अपनी निजी आजादी का हवाला देकर बच्चा पैदा नहीं (Population crisis China) करना चाहता। अधिकतर युवा लिव इन में रहना चाहते हैं। वह शादी से कतराने लगे हैं। बता दें कि बीते साल चीन में 61 लाख शादियां हुई जो 2023 की तुलना में 20 फीसदी कम है। यह आंकड़ा 1986 के बाद से सबसे कम है। ध्यान देने वाली बात यह कि पिछले तीन वर्षों से लगातार चीन की आबादी गिर रही है। चीन की सरकार इस चलन को रोकना चाहती है। इसलिए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी महिलाओं के पास जा रहे हैं और उन्हें उनके प्रेग्नेंट होने की सलाह दे रहे हैं। जनसंख्या बढ़ाने के लिए ऐसे प्रचार किए जा रहे हैं कि प्रेग्नेंसी से महिलाएं और ज्यादा खूबसूरत होती हैं। इसके अलावा चीन की सरकार कम उमर में शादी की भी अनुमति देने की सोच रही है। वर्तमान में चीन में शादी के लिए लड़कों की कम से कम उम्र 22 साल और लड़कियों की न्यूनतम उम्र 21 साल है। सरकार लड़का-लड़की की उम्र 18 साल करने के पर भी विचार कर रही है।  इसे भी पढ़ें:-  कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल अगले नौ महीने के दौरान बच्चे पैदा करें वरना नौकरी से (Population crisis China) दिया जाएगा निकाल  खैर, इस बीच घटती फर्टिलिटी रेट से चीन की सरकार बेहद चिंतित है। अगर यही हाल रहा तो आगामी वर्षों में चीन में कामकाजी लोगों की भारी कमी हो जाएगी। इसे देखते हुए वहां की सरकार ने अपनी जनसंख्या नीति में बदलाव किया है। चीन की सरकार ने एक बच्चे की नीति को खत्म कर दिया है। पहले चीन में एक दंपत्ति एक बच्चा का नियम था। अब चीन की कंपनी शंगडोंग शंटियन केमिकल ग्रुप ने अपने कर्मचारियों से कहा है कि “वह अगले नौ महीने के दौरान बच्चे पैदा करें वरना उनको नौकरी से (Population crisis China) निकाल दिया जाएगा। इसने एक आंतरिक आदेश में कहा है कि “हमारे कर्मचारी मेहनती और भरोसेमंद हैं। वे देश की बेहतरी के लिए बच्चा पैदा करना चाहते हैं। इसके साथ ही कंपनी ने कहा कि कर्मचारी 30 सितंबर तक वे फैमिली प्लानिंग कर लें वरना नौकरी से हाथ धोना पड़ सकता है। बता दें कि शंगडोंग शंटियन चीन के इकलौती कंपनी नहीं है जिसने इस तरह का आदेश दिया है। कुछ सप्ताह पहले एक लोकप्रिय सुपर मार्केट चेन ने भी कुछ इसी तरह का आदेश दिया था। उसने अपने आदेश में कहा था कि “युवा जोड़े शादी-सगाई में गिफ्ट की डिमांड न करें।” हालांकि इन कंपनियों के आदेशों की खूब आलोचना भी हुई थी। Latest News in Hindi Today Hindi news Population crisis China #ChinaPopulationCrisis #ChinaBirthPolicy #JobThreatChina #PopulationDecline #ChinaGovtRules #OneChildPolicy #ChinaDemographics #BirthRateCrisis #ChineseEconomy #StrictGovtPolicy

आगे और पढ़ें
Elon Musk Clashes with Minister

Elon Musk Clashes with Minister: कैबिनेट मीटिंग में ही भिड़े एलन मस्क और विदेश मंत्री, डोनाल्ड ट्रंप को देना पड़ा दखल

अमेरिकी राष्ट्रपति का पदभार संभालने के बाद डोनाल्ड ट्रंप की सरकार में कई कड़े फैसले लिए जा रहे हैं। हालांकि उनके फैसलों का अमेरिका में जमकर विरोध भी हो रहा है। ट्रंप प्रशासन का एक ऐसा ही फैसला है सरकारी स्टाफ में कटौती का। उनके इस फैसले की आलोचना न सिर्फ अमेरिकी राजकर्मियों के संगठन बल्कि अन्य लोग भी कर चुके हैं। इस बीच उनके अपने इस फैसले के कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मौजूदगी में विदेश मंत्री मार्को रुबियो और सरकारी दक्षता विभाग के प्रमुख एलन मस्क के बीच नोकझोंक होने की खबर सामने आई है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार को ट्रंप की मौजूदगी में कैबिनेट बैठक के दौरान दोनों के बीच झड़प (Elon Musk Clashes with Minister) हुई। खैर, बाद में ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है। मजे की बात यह कि एक तरफ जहां ट्रंप ने मस्क और रुबियो के बीच झड़प की बातों का खंडन किया है तो वहीं दूसरी ओर न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एलन मस्क के बीच स्टाफ कटौती के मुद्दे पर बहस हुई थी। गौर करने वाली बात यह कि रॉयटर्स ने भी इस बहस को रिपोर्ट किया है। रॉयटर्स की रिपोर्ट की माने तो यह ड्रामा उस बैठक में हुआ, जिसमें ट्रंप ने अपने कैबिनेट प्रमुखों से कहा कि “उनकी एजेंसियों में स्टाफिंग और नीति पर अंतिम फैसला मस्क का नहीं, बल्कि उनका है।” ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का करना पड़ा है सामना  प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह बैठक एजेंसी प्रमुखों से लेकर चीफ ऑफ स्टाफ, सूजी विल्स सहित व्हाइट हाउस के शीर्ष अधिकारियों तक मस्क ऑपरेशन के कठोर-बलपूर्ण दृष्टिकोण के बारे में की गई शिकायतों के बाद बुलाई गई थी। स्टाफ कटौती के इस फैसले के खिलाफ ट्रंप प्रशासन को अपने ही मतदाताओं के गुस्से (Elon Musk Clashes with Minister) का सामना करना पड़ा है। हालांकि शुक्रवार को ओवल ऑफिस में पत्रकारों से रूबरू होते हुए ट्रंप से जब टाइम्स की रिपोर्ट के बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बात से इनकार करते हुए कहा कि कोई टकराव नहीं। मैं वहां स्वयं मौजूद था।” उन्होंने आगे कहा कि “एलन मस्क मार्को रुबियो के साथ बहुत अच्छे से पेश आते हैं और वे दोनों शानदार काम कर रहे हैं।” इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत बढ़ती बहस (Elon Musk Clashes with Minister) को देखते हुए राष्ट्रपति ट्रंप को स्वयं करना पड़ा हस्तक्षेप   बैठक के दौरान मजे लेते हुए मस्क ने कहा कि “आपने किसी को भी नहीं निकाला है। आपका विदेश विभाग अभी भी फूला हुआ है।” मस्क के तीखे सवाल को सुनते ही रुबियो भड़क उठे। उन्होंने जवाब दिया कि मस्क को 1,500 विदेश विभाग के अधिकारियों की याद दिला दी जिन्होंने बायआउट किया था। मगर  मस्क प्रभावित नहीं हुए। खैर, रुबियो ने व्यंग्यात्मक रूप से पूछा कि “क्या मस्क चाहते हैं कि वे उन सभी लोगों को फिर से काम पर रखें ताकि वे उन्हें फिर से नौकरी से निकालने का दिखावा कर सकें?” इस बीच दोनों के बीच जैसे ही बहस (Elon Musk Clashes with Minister) बढ़ी वैसे ही राष्ट्रपति ट्रंप, जो पहले हाथ पर हाथ धरे देख रहे थे, आखिरकार उन्हें स्वयं हस्तक्षेप करना पड़ा। ट्रंप ने कहा कि “कैबिनेट सचिव कार्यभार संभालेंगे, जबकि मस्क की टीम केवल सलाह देगी।” बेशक यह ट्रंप का पहला महत्वपूर्ण संकेत था कि मस्क के प्रभाव पर सीमाएं लगाने के लिए तैयार थे। कहने की जरूरत नहीं, इसे देखकर यह कहा जा सकता है कि ट्रंप की सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। हैरत की बात यह कि एक तरफ पूरी दुनिया को ट्रंप अपनी ताकत दिखाने में लगे हुए हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके मंत्री ही आपस लड़ रहे हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk Clashes with Minister #ElonMusk #DonaldTrump #USPolitics #ForeignAffairs #TechVsPolitics #CabinetClash #MuskVsMinister #TrumpMediation #BreakingNews #PoliticalDrama

आगे और पढ़ें

Trump limits Musk’s authority: एलन मस्क पर सख़्त हुए ट्रंप, कहा- आपको सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई हक नहीं

जब से डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रपति पद की शपथ ली है तब से ट्रंप और एलन मस्क दोनों ताबड़तोड़ एक के बाद एक चौंकाने वाले निर्णय ले रहे हैं। चाहे वो कनाडा और मैक्सिको समेत अन्य देशों पर टैरिफ लगाना हो या फिर अपने ही देश के सरकारी कर्मचारियों की छटनी करनी हो। बेख़ौफ़ होकर निर्णय ले रहे थे। लेकिन इस बीच स्थिति बदलते देर नहीं लगी। इस दरम्यान अनावश्यक हुई सरकारी कर्मचारियों की छंटनी के बाद बगावती सुर बुलंद होने लगे और असंतोष की भावना पनपने लगी। बगावती सुर बुलंद होता देख ट्रंप ने कहा कि “टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक (Trump limits Musk’s authority) सीमित हैं। और वे कर्मियों या नीतियों पर स्वतंत्र रूप से फैसले नहीं ले सकते।” बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी कैबिनेट को स्पष्ट किया कि “बिलियनेयर सलाहकार एलन मस्क को संघीय विभागों के अध्यक्ष की तरह अधिकार नहीं दिए गए हैं। और न ही उन्हें सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई अधिकार है। एक रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि टेस्ला के प्रमुख एलन मस्क केवल विभागों को सलाह देने तक सीमित हैं।”   इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक एलन मस्क ने स्वीकार किया कि “पिछले सप्ताह ट्रंप की पहली कैबिनेट बैठक में इबोला रोकथाम के लिए फंडिंग को गलती से रद्द करना एक बड़ी चूक (Trump limits Musk’s authority) थी।” दरअसल, एलन मस्क और उनकी डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी (डीओजेई) फेडरल कर्मचारियों की छंटनी सहित खर्चों में कटौती के उपायों पर काम कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि मस्क के पास स्वयं सरकारी कर्मचारियों को निकालने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है। डिपार्टमेंट ऑफ गवर्नमेंट एफिशियेंसी की पहल के चलते भारी संख्या में छंटनी और इस्तीफे हुए हैं। इस बीच जानकारी के लिए बता दें कि 20,000 से ज्यादा कर्मचारियों को नौकरी से निकाल दिया गया है। और तकरीबन 75,000 कर्मचारियों ने स्वेच्छा से इस्तीफा देने के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है। इन छंटनियों का सबसे अधिक असर उन कर्मचारियों पर पड़ा है, जो प्रोबेशन की अवधि में थे। इसके पीछे की बड़ी वजह यह कि उनके पास नागरिक सेवा से जुड़े संरक्षण के अधिकार सीमित होते हैं। इस कारण उन्हें हटाना बेहद आसान होता है। इसे भी पढ़ें:-  नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इन नौकरियों में कटौती का प्रभाव कई एजेंसियों पर पड़ा है। जिनमें आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस), ऊर्जा विभाग, दिग्गज मामलों का विभाग (डिपार्टमेंट ऑफ़ वेटरन्स अफेयर्स) और अन्य शामिल हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक राष्ट्रपति के नए निर्देश एलन मस्क के अधिकारों को सीमित (Trump limits Musk’s authority) करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। ट्रंप के आदेश के अनुसार डीओजेई और उसकी टीम सलाहकार की भूमिका में रहेंगे। लेकिन अंतिम फैसले लेने का अधिकार कैबिनेट सचिवों के पास ही होगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Trump limits Musk’s authority #TrumpVsMusk #ElonMusk #DonaldTrump #SpaceX #USPolitics #TechRegulation #MuskVsGovernment #TrumpNews #Tesla #XCorp

आगे और पढ़ें
Trump softens stance

Trump softens stance: नरम पड़े डोनाल्ड ट्रंप, 45 दिन बाद मैक्सिको-कनाडा को दी राहत

इस साल 20 जनवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति पद का पदभार संभालने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप बड़े एक्शन में दिख रहे थे। बता दें कि बीते 45 दिनों में ऐसा कोई दिन नहीं रहा, जब ट्रंप और उनके प्रशासन के लोगों ने टैरिफ शब्द का नाम न लिया हो। इसके चलते उन्होंने टैरिफ वार की धमकी अपने पड़ोसी मुल्कों कनाडा और मैक्सिको भी दी। लेकिन अब धीरे-धीरे उनके तेवर नरम (Trump softens stance) पड़ते जा रहे हैं। गुरुवार को उन्होंने पहले मैक्सिको और फिर कनाडा को टैरिफ से छूट देने की घोषणा कर दी। दरअसल, अमेरिका और कनाडा के बीच चल रहे टैरिफ वार के दौरान, कनाडा ने अमेरिका द्वारा दी गई छूट के बावजूद अपने जवाबी टैरिफ को हटाने से इंकार कर दिया है। गुरुवार को कनाडा के एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा से आयातित वस्तुओं पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल दिया है, लेकिन इसके बावजूद कनाडा द्वारा अमेरिका पर लगाए गए जवाबी टैरिफ अभी भी प्रभावी रहेंगे। इस दौरान कनाडा ने आरोप लगाया कि “राष्ट्रपति ट्रंप ने टैरिफ पहले लागू करके और फिर उन्हें हटाकर सोची समझी रणनीति के तहत अनिश्चितता और अव्यवस्था पैदा की। उनकी अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कनाडा और मैक्सिको से आयातित उत्पादों पर 25 प्रतिशत टैरिफ को महीने भर के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था।  दरअसल, ट्रंप ने कनाडा और मैक्सिको से आयातित अधिकांश उत्पादों पर लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को एक महीने के लिए टाल (Trump softens stance) दिया था। हालांकि, कनाडा के एक अधिकारी ने यह स्पष्ट किया कि अमेरिका के खिलाफ लगाए गए उनके जवाबी टैरिफ अब भी लागू रहेंगे। ये टैरिफ लगभग $30 बिलियन (यूएस$21 बिलियन) मूल्य के हैं और इनमें अमेरिकी संतरे का रस, मूंगफली का मक्खन, कॉफी, जूते, सौंदर्य प्रसाधन, मोटरसाइकिल और कुछ प्रकार के कागज उत्पाद शामिल हैं। बता दें कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आदेशों पर हस्ताक्षर करने से पहले घोषणा की कि “अधिकांश टैरिफ 2 अप्रैल से प्रभावी होंगे। फिलहाल कुछ अस्थायी और छोटे टैरिफ लागू हैं।” हालांकि इस बीच ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि “वह ऑटोमोबाइल पर 25 प्रतिशत टैरिफ में छूट को एक और महीने तक बढ़ाने पर विचार नहीं कर रहे हैं।” ट्रंप के आदेशों के अनुसार, 2020 में हुए (यूएसएमसीए) व्यापार समझौते के तहत मेक्सिको से होने वाले आयात को एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से मुक्त रखा जाएगा। जानकारी के मुताबिक कनाडा से ऑटो से संबंधित आयात, जो व्यापार समझौते के नियमों का पालन करते हैं। उन्हें एक महीने के लिए 25 प्रतिशत टैरिफ से छूट मिलेगी। तो वहीं कनाडा से अमेरिकी किसानों द्वारा आयात किए जाने वाले पोटाश पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया जाएगा। बता दें कि यह वही दर है जिस पर ट्रंप कनाडाई ऊर्जा उत्पादों पर शुल्क लगाना चाहते हैं। इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं व्हाइट हाउस के अधिकारी के मुताबिक, कनाडा से लगभग 62 प्रतिशत आयातों पर अब भी नए टैरिफ (Trump softens stance) लागू हो सकते हैं। इसके पीछे की वजह यह कि  वे यूएसएमसीए समझौते के मानकों के अनुरूप नहीं हैं। इसी तरह, मेक्सिको से आयात होने वाले ऐसे उत्पादों पर भी कर लगाया जाएगा जो यूएसएमसीए के अनुरूप नहीं हैं, जैसा कि ट्रंप के आदेशों में कहा गया है। बता दें कि मंगलवार को ट्रंप ने अमेरिका के तीन प्रमुख व्यापारिक साझेदारों, क्रमश: कनाडा, मेक्सिको और चीन पर टैरिफ लगाकर एक नया व्यापारिक संघर्ष शुरू किया, जिसके जवाब में इन देशों ने भी प्रतिक्रिया दी। फिर क्या था इसके बाद इससे वित्तीय बाजारों में उथल-पुथल मच गई। खैर, इस बीच कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने गुरुवार को कहा कि “राष्ट्रपति द्वारा टैरिफ लागू करने और फिर उन्हें हटाने से हमारी अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है, जिससे अनिश्चितता और अराजकता बढ़ रही है।” इस दौरान उन्होंने जोर देते हुए कहा कि “कनाडा इस स्थिति से नाखुश है और यह सुनिश्चित करेगा कि अमेरिकी जनता को इसका एहसास हो।” हालाँकि इस बीच ट्रूडो ने यह भी उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में कनाडा और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध जारी रहेगा।” खैर, इसका असर यह कि गुरुवार को न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में बाजार गिरावट के साथ खुले। अमेरिकी निवेशक ट्रंप की टैरिफ पॉलिसी से घबराए हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump softens stance #DonaldTrump #TrumpNews #USPolitics #MexicoCanada #TradeRelations #TrumpUpdates #GlobalTrade #USA #PolicyChange #BreakingNews

आगे और पढ़ें
Drone Attack Odessa

Drone Attack Odessa: यूक्रेन के ओडेसा पर रूसी ड्रोन और मिसाइलों ने मचाया तांडव, कम पड़े फायर फाइटर्स

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) द्वारा सैन्य समर्थन रोकने के बाद से यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की कमजोर दिख रहे हैं। जेलेंस्की की इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन पर हमला बोल दिया है। बता दें कि यूक्रेन के ओडेसा पर रूसी ड्रोन और मिसाइलों के हमलों (Drone Attack Odessa) का कहर जारी है। बता दें कि पुतिन की नजर यूक्रेन की रणनीतिक पोर्ट सिटी ओडेसा पर है। योजनाबद्ध तरीके से ओडेसा पर पिछले 48 घंटों से रूसी सेना लगातार हमले कर रही है। रूसी ड्रोन और मिसाइलों की बौछार जारी।   रिपोर्ट्स के मुताबिक रुसी सेना अब तक 150 से अधिक ड्रोन हमले कर चुकी है। इन हमलों का मुख्य निशाना हथियारों के गोदाम और फैक्ट्रियों के साथ-साथ रिहायशी इमारतें हैं। अब तक 7 इमारतें और 2 स्कूल पूरी तरह नष्ट हो चुके हैं। इसके अलावा 3 हथियार डिपो और एक फैक्ट्री को भी तबाह कर दिया गया है। रूसी मिसाइलें इस कदर कहर बरपा रही हैं कि पूरे शहर में धमाकों की आवाज गूंज रही है। हमले की वजह से दक्षिणी यूक्रेन का ओडेसा शहर इस समय विनाशकारी हालात का सामना कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इन हमलों में अब तक कई इमारतें मलबे में तब्दील हो चुकी हैं।  रूसी ड्रोन हमलों ने मचाई भीषण तबाही (Drone Attack Odessa)  बता दें कि ओडेसा के कई इलाकों में रूसी ड्रोन हमलों ने इस कदर भीषण तबाही मचाई  (Drone Attack Odessa) है कि कई रिहायशी इमारतें आग की लपटों में चुकी हैं। इस मिसाइलों के कहर का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि हमले के बाद लगी आग की लपटों पर काबू पाने के लिए फायर फाइटर्स की संख्या कम पड़ रही है। प्राप्त जानकारी के मुताबिक दिन-रात फायर ब्रिगेड की गाड़ियां और जवान आग बुझाने में जुटे हुए हैं। इसके आलावा ओडेसा के पावर प्लांट और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर भी रूस के ताबड़तोड़ हमले जारी हैं। इन हमलों का असर यह कि शहर के बड़े हिस्से की बिजली आपूर्ति ठप हो गई है और कई क्षेत्रों में ब्लैकआउट की स्थिति बन गई है। रूस ने अब तक लगभग 6 बिजली संयंत्रों को तबाह कर दिया है। इस वजह से तकरीबन 7000 घरों में बत्ती गुल हो गई है। रूसी हमलों की वजह से यूक्रेनी नागरिकों को अँधेरे में रहना पड़ रहा है।  इसे भी पढ़ें:-भारत समेत इन देशों के खिलाफ डोनाल्ड ट्रंप का सख्ती की घोषणा,  2 अप्रैल से होगा एक्शन रूस की टेढ़ी नजर है ओडेसा  (Drone Attack Odessa) पर  कहने की जरूरत नहीं कि पुतिन किसी भी हाल में इस शहर पर कब्जा करना चाहते हैं। कब्जा इसलिए कि ओडेसा पर नियंत्रण मिलते ही रूस दक्षिणी यूरोप के नजदीक पहुंच जाएगा। कहा तो यह भी जा रहा है कि इसके बाद पुतिन अपने यूरोप प्लान को सक्रिय कर सकते हैं। यूक्रेन के लुहांस्क से लेकर मेलितोपोल तक के क्षेत्र पर रूस पहले से ही कब्ज कर रखा है। और अब रूस की टेढ़ी नजर ओडेसा  (Drone Attack Odessa) पर है। गौर करने वाली बात यह कि ओडेसा, यूक्रेन का एकमात्र बंदरगाह शहर है जो कि काला सागर से जुड़ा है। अगर रूस इस पर कब्जा कर लेता है, तो यूक्रेन पूरी तरह से समुद्री मार्ग से कट जाएगा। दरअसल, ओडेसा को दक्षिणी यूरोप का प्रवेश द्वार माना जाता है। इसका एक हिस्सा मोलदोवा से सटा हुआ है और दूसरा हिस्सा ट्रांसनिस्ट्रिया से लगा हुआ है। महत्वपूर्ण बात यह कि यहाँ रूस समर्थकों की सरकार है। ऐसे में मोलदोवा रूसी सेना से दोनों ओर से घिर सकता है। ऐसी स्थिति में, पुतिन को इन दोनों यूरोपीय देशों पर दबाव बनाने और आक्रमण करने का मौका मिल जाएगा और फिर सीमाओं के रास्ते रूसी सेना का इन देशों में प्रवेश करना काफी आसान हो सकता है। यही नहीं, लुहांस्क से लेकर ओडेसा तक रूस का एक सुसंगठित क्षेत्र बन जाएगा। जो कि आगे चलकर एक तरह से बफर जोन की तरह काम करेगा। ओडेसा पर कब्जा करते ही पुतिन की यूरोप संबंधी योजनाएं सक्रिय हो जाएंगी। कहने की जरूरत नहीं, अमेरिकी सैन्य समर्थन कम होने के बाद से यूक्रेन में हालात बेहद गंभीर और नाजुक बने हुए हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Drone Attack Odessa Donald Trump #RussiaUkraineWar #OdessaAttack #MissileStrike #UkraineUnderAttack #DroneStrike #UkraineNews #OdessaCrisis

आगे और पढ़ें
Bangladesh's interim leader

Muhammad Yunus statement on India: नरम पड़े मोहम्मद यूनुस के तेवर, भारत को लेकर अचानक दिया बयान, कही यह बड़ी बात

बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस (Muhammad Yunus) के सुर (Muhammad Yunus statement on India) भारत को लेकर बदलते जा रहे हैं। यूनुस भारत के खिलाफ लगातार हमलावर रहे हैं, लेकिन भारत का शिकंजा कसने पर अब उनके बोल बदल गए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक यूनुस ने एक इंटरव्यू में कहा कि “बांग्लादेश के पास भारत से अच्छे संबंध रखने के अलावा कोई और अन्य विकल्प नहीं है। ऐसा इसलिए, क्योंकि दोनों देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं।” हालांकि इस बीच उन्होंने यह भी कहा कि “कुछ दुष्प्रचार ने दोनों देशों के बीच कुछ संघर्ष को जरूर पैदा कर दिया है।” बता दें कि बीबीसी बांग्ला को दिए एक इंटरव्यू में मोहम्मद यूनुस ने उन दुष्प्रचार के स्रोतों का नाम नहीं लिया। अपनी बात रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि “बांग्लादेश भारत के साथ अपने संबंध में सुधार करने हेतु गलतफहमी को दूर करने की कोशिश कर रहा है। दरअसल, यूनुस का यह बयान 3-4 अप्रैल को थाईलैंड में बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के आयोजन के एक महीने पहले आया है। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के बीच एक द्विपक्षीय बैठक आयोजित हो सकती है।  मोहम्मद यूनुस ने बताया भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को बहुत अच्छा (Muhammad Yunus statement on India)  इंटरव्यू के दौरान गौर करने वाली अहम बात यह कि मोहम्मद यूनुस ने भारत-बांग्लादेश के रिश्तों को बहुत अच्छा (Muhammad Yunus statement on India) बताया। उन्होंने कहा कि “दोनों देशों के रिश्तों में कोई कड़वाहट नहीं आई है। हमारे संबंध हमेशा अच्छे रहेंगे। वे अभी भी अच्छे हैं और भविष्य में भी अच्छे ही रहेंगे। इस बीच उन्होंने जोर देते हुए कहा कि बांग्लादेश और भारत के बीच अच्छे संबंध रखने के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।” अपनी बात रखते हुए उन्होंने आगे कहा कि “हमारे संबंध बहुत करीबी हैं। हम एक-दूसरे पर बहुत निर्भर हैं। दोनों देश ऐतिहासिक, राजनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण से इतने करीब हैं कि हम कभी अलग-थलग नहीं रह सकते।” इस बीच मोहम्मद यूनुस ने यह भी कहा कि हालांकि, दोनों देशों के बीच कुछ संघर्ष हुए हैं, जो काफी हद तक दुष्प्रचार के कारण हुए हैं। अब दूसरे लोग यह तय करें कि दुष्प्रचार करने वाले कौन हैं। लेकिन इस दुष्प्रचार के नतीजा यह हुआ है कि दोनों देशों के बीच गलतफहमी पैदा हो गई। हम उन सभी गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।  इसे भी पढ़ें :– अमेरिका ने यूक्रेन को दिया बड़ा झटका, सैन्य सहायता पर लगाई गई रोक जब से भारत सरकार ने शिकंजा कसना शुरू किया है तब से सुर बदले-बदले (Muhammad Yunus statement on India) से नजर आ रहे हैं दरअसल, पिछले साल बांग्लादेश में हुए आरक्षण विरोधी उग्र छात्र आंदोलन के चलते बांग्लादेश की तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। उसके बाद से मोहम्मद यूनुस की अगुवाई में अंतरिम सरकार का गठन होता है। इसके बाद से मुट्ठीभर कट्टरपंथियों द्वारा बांग्लादेश में रह रहे अल्संख्यक के न सिर्फ घरों को बल्कि मंदिरों को जानबूझकर निशाना बनाया जाने लगा। इस बीच आगजनी और लूटमार की कई घटनाएं आये दिन घट रही हैं लेकिन मोहम्मद यूनुस की सरकार है कान में तेल डाले बैठी है। इस बीच जब से भारत सरकार ने शिकंजा कसना शुरू किया है तब से मोहम्मद यूनुस के सुर बदले-बदले (Muhammad Yunus statement on India) से नजर आ रहे हैं। यह कह लें कि भारत को लेकर उनकी अकड़ ढीली होती देखी है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Muhammad Yunus statement on India #MuhammadYunus #BangladeshIndiaRelations #FairDiplomacy#NobelLaureate #SheikhHasina #SouthAsiaPolitics #YunusStatement #BangladeshInterimGovt #EquitableRelations #IndiaBangladesh

आगे और पढ़ें
USUkraineRelations

Trump suspends Ukraine aid: अमेरिका ने यूक्रेन को दिया बड़ा झटका, सैन्य सहायता पर लगाई गई रोक

पिछले 3 वर्षों से भी अधिक समय से रूस और यूक्रेन के बीच खूनी जंग जारी है। अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप हर हाल में जल्द से जल्द जंग को रुकवाना चाहते हैं। यही नहीं, वो इस हेतु हर संभव प्रयास भी कर रहे हैं। इसी सिलसिले में हाल ही में डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बैठक भी हुई थी। उम्मीद थी कि इस बैठक में कोई न कोई हल निकाल लिया जायेगा। हल तो निकलना दूर की बात दोनों में आपस में ही तू-तू, मैं-मैं हो गई। हैरत यह कि इस बैठक में राष्ट्रपति अमेरिकी डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वांस और वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच बुरी तरह से बहस हो गई थी। हालांकि विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक अमेरिकी चैनल को दिए एकसाक्षात्कार में ट्रंप के साथ अभद्र व्यवहार करने के लिए ज़ेलेंस्की से माफ़ी मांगने को कहा था। लेकिन उन्होंने से साफ इंकार कर दिया था। कहने की जरूरत नहीं, इस बहस के बाद डोनाल्ड ट्रंप बुरी तरह झल्लाए हुए हैं। अपनी इसी झल्लाहट के ही चलते यूक्रेन को सबक सिखाने के लिए उन्होंने यूक्रेन को बड़ा झटका दिया है। जानकारी के मुताबिक, अमेरिका ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता पर रोक (Trump suspends Ukraine aid) लगा दी है। दरअसल, एपी द्वारा प्राप्त जानकारी के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की पर रूस के साथ शांति वार्ता में शामिल होने के लिए दबाव बनाने के उद्देश्य से ओवल ऑफ़िस की एक बुरी बैठक के बाद यूक्रेन को अमेरिकी सहायता पर रोक लगाने का निर्देश दिया है।” ज़ेलेंस्की के साथ हुई बहस के बाद अमेरिकी ने यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने (Trump suspends Ukraine aid) का दिया आदेश  अमेरिकी और यूक्रेन के तनाव के बीच सोमवार को व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने सीएनएन को बताया कि” राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को ओवल ऑफिस में यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की के साथ हुई बहस के बाद यूक्रेन को दी जाने वाली सैन्य सहायता रोकने का आदेश दिया है। व्हाइट हाउस के अधिकारी ने कहा कि “राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनका ध्यान शांति पर है। अपने भागीदारों से भी उस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध होने की आवश्यकता है। हम यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी सहायता रोक (Trump suspends Ukraine aid) रहे हैं। और इसकी समीक्षा कर रहे हैं कि यह पीस डील में मदद करेगा।” एक अन्य अधिकारी ने बताया कि “यह रोक उन सभी सैन्य उपकरणों पर लागू होगी जो अभी यूक्रेन को दिए नहीं गए हैं। जो हथियार यूक्रेन को अमेरिका की ओर से पहले मिल चुके हैं, अभी भी वह उनका इस्तेमाल कर सकता है।”  इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल यूक्रेन की सैन्य मदद रोकना (Trump suspends Ukraine aid) ट्रंप की यूक्रेन पर दबाव बनाने की रणनीति का है हिस्सा  बता दें कि ब्लूमबर्ग न्यूज और फॉक्स न्यूज ने सोमवार को ट्रंप प्रशासन के अधिकारियों के हवाले से बताया कि ट्रंप तब तक सभी सहायता रोक देंगे जब तक कि कीव शांति के लिए बात करने के लिए प्रतिबद्धता न दिखाए। ट्रंप ने ये आदेश अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में ज़ेलेंस्की पर आरोप लगाने के कुछ घंटों बाद दिया है। ट्रंप ने आरोप लगाया था कि जेलेंस्की “जब तक अमेरिका का समर्थन उनके साथ है, वो शांति नहीं चाहते हैं।” सीएनएन के मुताबिक यूक्रेन की सैन्य मदद रोकना (Trump suspends Ukraine aid) ट्रंप की यूक्रेन पर दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। ट्रंप को लगता है कि सहायता रोकने के बाद जेलेंस्की फिर समझौता करने के लिए तैयार होंगे। एक तरफ अमेरिकी राष्ट्रपति ने यूक्रेन को दी जाने वाली मदद पर रोक लगा दी है तो वहीं दूसरी तरफ इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के वाशिंगटन दौरे के बाद अमेरिका ने इजराइल को दी जाने वाली मदद बढ़ा दी है। यही नहीं, बाइडेन प्रशासन में हथियारों की सप्लाई पर लगाए आर्जी प्रतिबंध को भी हटा दिया है। अमेरिका की इस पहल से गदगद नेतन्याहू ने ट्रंप का धन्यवाद किया है और अमेरिका को अपने सच्चा साथी बताया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Trump suspends Ukraine aid #TrumpUkraineAidPause #USMilitaryAidSuspension #ZelenskyPeaceTalks #USUkraineRelations #TrumpForeignPolicy #UkraineRussiaConflict #MilitaryAidReview#PeaceNegotiations #USForeignAssistance #GeopoliticalTensions

आगे और पढ़ें
US-Ukraine Tensions Rise

अमेरिका और यूक्रेन की रिश्तों में आ गई है दरार, क्या होगा इसका वैश्विक असर?

हाल ही में अमेरिका के व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की (Ukraine President Volodymyr Zelensky) और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) के बीच हुई तीखी बहस ने विश्व भर में राजनीति हलचल मचा दी है। रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच जेलेंस्की की आक्रामक रणनीति पर सवाल उठने लगे कि क्या इससे अमेरिकी मदद प्रभावित हो सकती है। हालांकि, अब ऐसा लग रहा है कि जेलेंस्की अपने रुख में नरमी लाने के संकेत दे रहे हैं। अमेरिका से जेलेंस्की की मांगें मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने अमेरिका से कुछ ठोस गारंटी की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर अमेरिका उनकी शर्तों को मान लेता है, तो वे राष्ट्रपति पद छोड़ने और मिनरल डील करने के लिए तैयार हैं। उनकी प्रमुख मांगों में यूक्रेन को नाटो की सदस्यता और सुरक्षा की गारंटी शामिल है। जेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि वह रूस के साथ किसी भी शांति समझौते के तहत अपनी जमीन छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं। ट्रंप से दोबारा मुलाकात को लेकर जेलेंस्की का रुख वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) ने संकेत दिए कि अगर अमेरिकी राष्ट्रपति उन्हें गंभीर चर्चा के लिए बुलाते हैं, तो वे फिर से बातचीत के लिए तैयार हैं। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार जेलेंस्की ने कहा कि वह वास्तविक समस्याओं का समाधान खोजने और निर्णायक निर्णय लेने के लिए हर तरह के संवाद के लिए तैयार हैं। व्हाइट हाउस (White House) में हुई थी बहस  पिछले शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में दोनों नेताओं के बीच बहस काफी बढ़ गई थी। ट्रंप ने आरोप लगाया कि जेलेंस्की शांति वार्ता में रुचि नहीं रखते और अगर कोई समझौता नहीं होता, तो अमेरिका इस युद्ध से खुद को अलग कर लेगा। जवाब में जेलेंस्की ने कहा कि यूक्रेन बिना सुरक्षा गारंटी के युद्धविराम को स्वीकार नहीं कर सकता। मिनरल डील और आपसी तनाव वोलोडिमिर जेलेंस्की (Volodymyr Zelensky) की अमेरिका यात्रा का एक मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच खनिज संपदा को लेकर समझौता करना था। हालांकि, वार्ता में तनाव इस कदर बढ़ गया कि रिश्तों में खटास आ गई और अंततः जेलेंस्की को व्हाइट हाउस (White House) छोड़ना पड़ा। बातचीत के दौरान, जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि युद्ध का अंत कूटनीति से संभव है, तो जेलेंस्की ने तुरंत जवाब दिया और पूछा कि वे किस प्रकार की कूटनीति की बात कर रहे हैं। ट्रंप का कड़ा रुख डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने जेलेंस्की को स्पष्ट शब्दों में कहा कि यूक्रेन गंभीर संकट में है और अकेले यह युद्ध नहीं जीत सकता। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने यूक्रेन को 350 अरब डॉलर की सहायता दी है, साथ ही सैन्य उपकरण भी प्रदान किए हैं। ट्रंप ने यह भी जोड़ा कि अगर अमेरिका की सैन्य सहायता न होती, तो यह युद्ध दो हफ्तों में खत्म हो सकता था। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने यह भी आरोप लगाया कि जेलेंस्की पुतिन से नफरत करते हैं, लेकिन इसके बावजूद किसी ठोस रणनीति के बिना डील की उम्मीद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि जेलेंस्की चाहते हैं कि अमेरिका सख्ती दिखाए, तो वे दुनिया में किसी भी व्यक्ति से ज्यादा सख्त हो सकते हैं, लेकिन इस तरह से कोई समझौता नहीं हो सकता। इसे भी पढ़ें :– भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बनी बात, साल के अंत तक होगा अमल वैश्विक असर इस बहस के बाद वैश्विक नेताओं की प्रतिक्रियाएँ सामने आईं। यूरोपीय देशों ने यूक्रेन के प्रति समर्थन जताया, जबकि कुछ अमेरिकी सांसदों ने डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) की नीतियों पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि अमेरिका और यूक्रेन (America and Ukraine) के रिश्तों में तनाव बढ़ सकता है, खासकर अगर यूक्रेन को अपेक्षित सहायता न मिले। व्हाइट हाउस में ट्रंप और जेलेंस्की के बीच हुई तीखी बहस ने दोनों देशों के संबंधों पर गहरा प्रभाव डाला है। जेलेंस्की अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं, जबकि ट्रंप अमेरिका की स्थिति स्पष्ट कर चुके हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि दोनों देश अपने संबंधों को किस दिशा में ले जाते हैं और रूस-यूक्रेन युद्ध का भविष्य क्या होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Ukraine President Volodymyr Zelensky #USUkraineRelations #GlobalTensions #UkraineCrisis #Geopolitics #RussiaUkraineWar #BidenZelensky #USForeignPolicy #NATO #WorldPolitics #DiplomaticCrisis

आगे और पढ़ें
Translate »