Israel breaks ceasefire with airstrikes

Gaza airstrike: इजराइल ने युद्धविराम तोड़ गाजा पर किया हवाई हमला, 200 से अधिक लोगों की हुई मौत 

आखिरकार दो महीने तक इजरायल और हमास के बीच चला युद्धविराम टूट ही गया। दरअसल, मंगलवार की सुबह अचानक इजरायल ने गाजा पट्टी पर हमला  (Gaza airstrike) कर दिया। स्थानीय समय के मुताबिक सुबह 2 बजे एयर स्ट्राइक शुरू हुई। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इस हमले में तकरीबन 200 से ज्यादा लोग मारे गए हैं। लगातार मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है। इस तरह इजरायल ने हमला करके सीजफायर तोड़ दिया है। बता दें कि पिछले सप्ताह ट्रंप प्रशासन ने युद्धविराम को बढ़ाने की कोशिश की और दोनों पक्षों के सामने एक प्रस्ताव रखा था। कतर की राजधानी दोहा में हुई यह बातचीत बेनतीजा साबित हुई थी। इस पर अधिक जानकारी देते हुए वाइट हाउस ने कहा कि “हमास ने उसके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।” वैसे यह हमला अचानक से नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल ने पहले ही ट्रंप प्रशासन को इस हमले की जानकारी दे दी थी। टाइम्स ऑफ इजरायल की रिपोर्ट के मुताबिक वाइट हाउस की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के प्रवक्ता ब्रायन ह्यूजेस ने कहा  कि “हमास युद्धविराम बढ़ाने के लिए बंधकों को रिहा कर सकता था, लेकिन उसने इससे इनकार कर दिया और युद्ध का विकल्प चुना।” ऐसे में बड़ा सवाल यह कि यह सीजफायर टूटा क्यों? आईडीएफ के हमला करने के बाद इजरायल के रक्षा मंत्री बयान जारी कर कहा कि “आज रात हम गाजा की लड़ाई में वापस आ गए हैं।” हमास की ओर से बंधकों को रिहा करने से मना करने और आईडीएफ सैनिकों को नुकसान पहुंचाने की धमकियों के मद्देनजर यह हमला किया गया है। गौर करने वाली बात यह कि इजरायल ने गाजा पर ऐसे समय में हमला किया है जब अमेरिका यमन के हूतियों पर बम बरसा रहा है।  हमास द्वारा हमारे बंधकों को रिहा करने से बार-बार इनकार करने के बाद हुआ हमला  इस हमले पर प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि “उन्होंने युद्ध विराम को बढ़ाने के लिए चल रही बातचीत में प्रगति की कमी के कारण हमलों (Gaza airstrike) का आदेश दिया। यह तुरंत स्पष्ट नहीं था कि क्या यह ऑपरेशन एक बार की दबाव रणनीति थी या 17 महीने पुराना युद्ध फिर से शुरू किया जा रहा है।” नेतन्याहू के कार्यालय ने कहा कि “यह हमास द्वारा हमारे बंधकों को रिहा करने से बार-बार इनकार करने और अमेरिकी राष्ट्रपति के दूत स्टीव विटकॉफ और मध्यस्थों से प्राप्त सभी प्रस्तावों को अस्वीकार करने के बाद हुआ है।” तो वहीं हमास के एक अधिकारी ताहिर नुनू ने इजरायली हमलों की आलोचना करते हुए कहा कि “अंतर्राष्ट्रीय समुदाय एक नैतिक परीक्षण का सामना कर रहा है, या तो वह कब्जे वाली सेना द्वारा किए गए अपराधों की वापसी की अनुमति देता है या फिर वह गाजा में निर्दोष लोगों के खिलाफ आक्रामकता और युद्ध को समाप्त करने की प्रतिबद्धता को लागू करता है।” इसे भी पढ़ें:- पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर इजराइली हवाई हमलों में (Gaza airstrike) मरने वालों की संख्या 200 के आस-पास बताई जा रही है जानकारी के लिए बता दें कि इजराइल ने सोमवार को गाजा पट्टी, दक्षिणी लेबनान और दक्षिणी सीरिया में हवाई हमले किए, जिसमें कई लोग मारे गए। इजराइली हवाई हमलों में (Gaza airstrike) मरने वालों की संख्या 200 के आस-पास बताई जा रही है। इजराइली सेना ने कहा कि “वह हमलों की साजिश रच रहे आतंकवादियों को निशाना बना रही थी।” उसने आगे कहा कि “वह दक्षिणी सीरिया में सैन्य कमांड सेंटर और उन जगहों को निशाना बना रही थी, जहां असद की सेना के हथियार और वाहन थे। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक इजरायल एक बार फिर जमीनी आक्रमण की योजना बना रहा है. गाजा में यह इजरायली सैनिकों की वापसी का संकेत है। बता दें कि इजरायल और हमास का युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को तब शुरू हुआ जब हमास ने इजरायल पर हमला कर दिया था। तब से लेकर अब तक युद्ध में 48,000 फिलिस्तीनियों के मारे जाने की रिपोर्ट्स आई थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news Gaza airstrike #IsraelGazaWar #GazaAirstrike #MiddleEastConflict #IsraelAttack #GazaUnderAttack #WarCrimes #BreakingNews #PalestineCrisis #CeasefireBroken #HumanRights

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Crew-9

नासा की ‘Crew-9’ मिशन: पृथ्वी पर सुरक्षित लौटेंगे सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर

नासा ने 18 मार्च को एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक मिशन की घोषणा की जिसके तहत अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स (Sunita Williams) और बुच विलमोर (Butch Wilmore) को फ्लोरिडा तट के पास समुद्र में उतारा जाएगा। यह मिशन Crew-9 का हिस्सा है, जो नासा द्वारा संचालित है और जिसमें स्पेसएक्स का ‘क्रू ड्रैगन’ यान इस्तेमाल हो रहा है। इस महत्वपूर्ण मिशन के बारे में नासा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी दी और दर्शकों को यह अद्वितीय अवसर दिया कि वे लाइव प्रसारण के माध्यम से अंतरिक्ष से धरती पर लौटने की प्रक्रिया को देख सकें। .@NASA will provide live coverage of Crew-9’s return to Earth from the @Space_Station, beginning with @SpaceX Dragon hatch closure preparations at 10:45pm ET Monday, March 17. Splashdown is slated for approximately 5:57pm Tuesday, March 18: https://t.co/yABLg20tKX pic.twitter.com/alujSplsHm — NASA Commercial Crew (@Commercial_Crew) March 16, 2025 नासा द्वारा जारी बयान और लाइव प्रसारण नासा ने अपनी पोस्ट में बताया कि वह Crew-9 मिशन के अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटने का सीधा प्रसारण करेगा। यह प्रसारण सोमवार, 17 मार्च की रात 10:45 बजे से शुरू होगा। इस लाइव कवरेज में ‘स्पेसएक्स ड्रैगन’ कैप्सूल के हैच (दरवाजा) बंद करने की तैयारियों को दिखाया जाएगा। यह लाइव प्रसारण उन लोगों के लिए बेहद रोमांचक होगा जो अंतरिक्ष विज्ञान और अंतरिक्ष यात्रियों की गतिविधियों में रुचि रखते हैं। स्प्लैशडाउन (समुद्र में उतरने) का समय मंगलवार, 18 मार्च को शाम 5:57 बजे तय किया गया है, जो इस मिशन का सबसे महत्वपूर्ण चरण है। मिशन का उद्देश्य और महत्व इस मिशन का उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करना है। दोनों पिछले 9 महीनों से अंतरिक्ष में फंसे हुए थे। दरअसल, इनका मिशन पहले 10 दिन का था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण उनकी वापसी में देरी हो गई। बोइंग स्टारलाइनर कैप्सूल (Boeing Starliner Capsule) में प्रोपल्शन सिस्टम से जुड़ी एक समस्या उत्पन्न हो गई थी, जिसके कारण वे वापस लौटने में सक्षम नहीं हो पाए थे। इस कारण नासा और स्पेसएक्स ने मिलकर इन दोनों को सुरक्षित तरीके से पृथ्वी पर लाने के लिए ‘क्रू ड्रैगन’ का इस्तेमाल किया। स्पेसएक्स का क्रू ड्रैगन यान और नासा का सहयोग स्पेसएक्स, एलन मस्क की निजी कंपनी है, जो अंतरिक्ष में यात्रा की नई दिशा दिखा रही है। उनका क्रू ड्रैगन यान अंतरिक्ष में मानव मिशनों के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण बन चुका है। इस यान के जरिए नासा ने अपनी अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित तरीके से अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से वापस लाने का काम किया है। इस बार स्पेसएक्स के ‘क्रू ड्रैगन’ में नासा के अंतरिक्ष यात्री नीक हेग और रूस के कॉस्मोनॉट अलेक्जेंडर गोर्बुनोव भी शामिल होंगे, जो इस मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों की सहायता करेंगे। क्यों महत्वपूर्ण है यह मिशन? यह मिशन सिर्फ इसलिए महत्वपूर्ण नहीं है कि यह अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करेगा, बल्कि यह भी दिखाता है कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निजी कंपनियों की भूमिका अंतरिक्ष यात्रा में कितनी अहम हो गई है। नासा और स्पेसएक्स के बीच साझेदारी अंतरिक्ष यात्रा की नई दिशा को इंगीत करती है, जहां निजी कंपनियां भी सरकारी मिशनों के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: दो फोन, एक कनेक्शन: मिवी सुपरपॉड्स कॉन्सर्टो टीडब्ल्यूएस हुआ लॉन्च इस मिशन के दौरान, नासा और स्पेसएक्स ने तकनीकी दृष्टिकोण से कई चुनौतीपूर्ण स्थितियों का सामना किया, लेकिन उन्होंने मिलकर इन चुनौतियों को पार किया। यह मिशन न केवल अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, बल्कि यह मानवता के लिए भी एक प्रेरणा है कि हम किसी भी संकट के बावजूद, मिलकर समस्याओं का समाधान निकाल सकते हैं। नासा का ‘Crew-9’ मिशन, जिसमें सुनीता विलियम्स और बुच विलमोर की वापसी शामिल है, अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने जा रहा है। यह मिशन केवल एक तकनीकी सफलता नहीं है, बल्कि यह अंतरराष्ट्रीय सहयोग, निजी क्षेत्र की भागीदारी और मानव साहस का प्रतीक भी है। हम उम्मीद करते हैं कि इस मिशन के सफल समापन के बाद, अंतरिक्ष यात्रा में और भी प्रगति हो और अंतरिक्ष में मानवता का कदम और भी मजबूत हो। Latest News in Hindi Today Hindi news Sunita Williams #Crew9 #NASA #ButchWilmore #SunitaWilliams #ISS #NASAsCrew9mission

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Pakistan Army resignations

Pakistan Army resignations: बलूचिस्तान लिब्रेशन आर्मी के हमलों से पाक आर्मी में दहशत का माहौल, 2500 सैनिकों ने दिया इस्तीफा

खुद को ऐटमी पावर बताने वाले पड़ोसी मुल्क पाकिस्‍तान में ट्रेन हाइजैक की घटना के बाद से लगातार हालात बिगड़ते जा रहे हैं। विद्रोही संगठन बलूचिस्‍तान लिब्रेशन आर्मी (बीएलए) आए दिन पाकिस्‍तान आर्मी के काफिले पर हमले कर रही है। एक तरफ बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी के हमले तेज होते जा रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के जवान बड़ी संख्या में सेना छोड़कर भाग रहे हैं। दरअसल, पाकिस्‍तान आर्मी के जवानों में इस वक्‍त दहशत का माहौल है। दहशत के इस माहौल में पाक आर्मी को एकजुट रख पाना पाक आर्मी के प्रमुख आसिफ मुनीर के लिए मुश्किल लगने लगा है। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट की माने तो पिछले कुछ दिनों में पाकिस्‍तान की सेना पर हुए हमलों के बाद तकरीबन 2,500 जवानों ने सेना की नौकरी से इस्तीफा (Pakistan Army resignations) दे दिया है। बता दें कि सेना के भीतर बढ़ती असुरक्षा और लगातार होती सैनिकों की मौत के चलते पाकिस्तानी सेना के जवान घबराए हुए हैं। वो इस कदर डरे हुए हैं कि पाकिस्तान में अपनी जान जोखिम में डालने के बजाय सऊदी कतर, कुवैत, अरब और यूएई जैसे देशों में काम करने का विकल्प तलाश रहे हैं। उनके इस कदम के पीछे की बड़ी वजह यह कि पाक सैनिक लगातार जारी हिंसा और असुरक्षा का सामना ही नहीं करना चाहते। कहने की जरूरत नहीं कि बलूचिस्तान में बढ़ता विद्रोह यह दर्शाता है कि इलाके की स्थिरता चरमरा चुकी है।  सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को नहीं किया है स्वीकार  हाल की घटनाओं जैसे कि बलूचिस्तान में ट्रेन हाइजैक और नोशकी में सैन्य काफिले पर हमला ने हर किसी की चिंता को इस कदर बढ़ा दिया है कि वो विदेश में वैकल्पिक रोजगार की तलाश करने पर मजबूर हैं। हालांकि न तो पाकिस्तानी मीडिया और न ही सेना ने आधिकारिक तौर पर इस्तीफों (Pakistan Army resignations) को स्वीकार किया है। बता दें कि कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान नेशनल पार्टी के सांसद फुलैन बलोच ने यह दावा किया था कि बीएलए ने इतनी तदाद में आत्मघाती हमलावरों की भर्ती कर ली है कि उसने फिलहाल के लिए अस्थायी रूप से इन भर्तियों को दिया दी है। इन दिनों  बलूचिस्तान ने पाकिस्तान की चिंता बढ़ा दी है। 11 मार्च के बाद से कई पाक सैनिकों को मौत के घाट उतारा गया है। बलूच विद्रोही पाकिस्तानी सेना के खिलाफ लगातार हमले कर रहे हैं। इसे भी पढ़ें:- योगी सरकार के आठ साल में सुधरी यूपी की कानून व्यवस्था, 222 अपराधी ढेर, 130 आतंकी गिरफ्तार इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का है संकेत  ऐसे में जाफर एक्सप्रेस ट्रेन पर सहसी हमले को अंजाम देकर बीएलए ने हाल के समय में अपनी गतिविधियों को तेज कर दिया है। विद्रोहियों ने रेलवे ट्रैक पर विस्फोटक लगाए, ट्रेन पर हमला किया और लगभग 450 यात्रियों को बंधक बना लिया था। काबुल फ्रंटलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक सेना देश में जारी हिंसा और असुरक्षा के बीच लड़ाई को जारी रखना नहीं चाहती है। इतनी बड़ी तादाद में सेना छोड़ने (Pakistan Army resignations) का मामला किसी बड़े संकट का संकेत है। क्योंकि यह स्थिति न सिर्फ सुरक्षा के मुद्दे से नहीं, बल्कि देश के आंतरिक हालातों का परिणाम भी हो सकती है। अगर हालात इसी तरह बिगड़ते गए तो पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसका असर देखने को मिल सकता है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Army resignations #PakistanArmy #BalochistanLiberationArmy #BLAAttacks #PakistanCrisis #MilitaryResignations #BalochistanConflict #PakArmyRetreat #BLAInsurgency #PakistanUnrest #BalochRebellion

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Venezuela gang members

Venezuela gang members: अवैध प्रवासियों पर सख्त ट्रंप प्रशासन, वेनेजुएला के गिरोह के 200 से अधिक सदस्यों को भेजा अल-सल्वाडोर,

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध प्रवासियों पर जरा भी नरमी बरतने के मूड में नहीं हैं। राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से ही वो अमेरिका में रह रहे अवैध प्रवासियों को खदेड़ने में लगे हुए हैं। सख्त रुख जारी है। इसी कड़ी में वेनेजुएला के एक गिरोह (Venezuela gang members) के तकरीबन 200 से अधिक कथित लोगों को ट्रंप प्रशासन ने निर्वासित कर अल साल्वाडोर भेज दिया है। जहां उन्हें उच्च सुरक्षा वाली जेल में ले जाया गया है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति ने खुद इस बात की जानकारी दी है। दरअसल, यह ट्रैन डे अरागुआ गिरोह है, जिसका ट्रंप ने शनिवार को जारी की गई अपनी असामान्य घोषणा में जिक्र किया था। हालांकि, अदालत ने अपने फैसले में इनका निर्वासन रोकने का आदेश सुनाया था, लेकिन इससे पहले ही विमान इन्हें लेकर उड़ गया। बता दें कि यूएस डिस्ट्रिक्ट जज जेम्स ई. बोसबर्ग ने शनिवार को निर्वासन को अस्थायी रूप से रोकने का आदेश जारी किया। लेकिन वकीलों ने उन्हें बताया कि पहले से ही दो विमान अप्रवासियों के साथ हवा में हैं- एक अल साल्वाडोर जा रहा है, दूसरा होंडुरास जा रहा है।”  वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य को (Venezuela gang members) भेजा गया अल साल्वाडोर गौर करने वाली बात यह कि बोसबर्ग ने मौखिक रूप से विमानों को वापस करने का आदेश दिया, लेकिन जाहिर तौर पर उन्हें वापस नहीं किया गया और उन्होंने अपने लिखित आदेश में निर्देश शामिल नहीं किया। इस बीच ट्रंप प्रशासन पर अदालती आदेश का उल्लंघन करने का भी आरोप लगा। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने एक बयान में इस बारे में अटकलों का जवाब देते हुए कहा कि “क्या प्रशासन अदालती आदेशों का उल्लंघन कर रहा है? कैरोलिन ने कहा कि “प्रशासन ने अदालती आदेश का पालन करने से इनकार नहीं किया। इस आदेश का कोई वैधानिक आधार नहीं था। इन्हें अमेरिकी क्षेत्र से पहले ही हटा दिए जाने के बाद आदेश जारी किया गया था।” इस संबंध में जानकारी देते हुए अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि “वेनेजुएला के आपराधिक संगठन, ट्रेन डी अरागुआ के पहले बैच के 238 सदस्य (Venezuela gang members) अल साल्वाडोर आ गए हैं। इन सभी को एक साल के समय के लिए आतंकवाद कारावास केंद्र, सीईसीओटी में ट्रांसफर कर दिया गया है।” नायब बुकेले ने इसपर आगे कहा कि “अमेरिका इसके लिए काफी कम पैसे का भुगतान करेगा, लेकिन हमारे लिए यह काफी ज्यादा है।” उन्होंने आगे बताया कि “सरकार जीरो आइडलनेस कार्यक्रम चला रही है। इसके तहत 40,000 से अधिक कैदियों की मदद से देश की जेलों को आत्मनिर्भर बनाया जा रहा है। अमेरिका से भेजे गए कैदियों को भी इनके साथ ही प्रोडक्शन में लगाया जाएगा।” यही नहीं, अमेरिका ने अल साल्वाडोर द्वारा वांछित एमएस-13 के 23 सदस्यों को भी भेजा है। बता दें कि इसमें दो सरगना शामिल हैं जो कि आपराधिक संगठन के हाई लेवल का सदस्य है। अल सल्वाडोर के राष्ट्रपति नायब बुकेले ने कहा कि इसकी मदद से खुफिया जानकारी जुटाने में मदद मिलेगी।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को (Venezuela gang members) किया गया निर्वासित  बता दें कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा 1798 के एलियन एनिमीज एक्ट की घोषणा के बाद अप्रवासियों को निर्वासित (Venezuela gang members) किया गया था। इसका उपयोग अमेरिकी इतिहास में सिर्फ तीन ही बार किया गया है। पहला साल 1812 के युद्ध दूसरा, प्रथम और तीसरा द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान। दरअसल, इस कानून के तहत राष्ट्रपति को सिर्फ यह घोषणा करनी पड़ती है कि संयुक्त राज्य अमेरिका युद्ध में है। फिर क्या यह घोषणा करते ही उसे विदेशियों को हिरासत में लेने या हटाने के लिए असाधारण शक्तियां मिलती हैं। जिन्हें आव्रजन या आपराधिक कानूनों के तहत सुरक्षा प्राप्त होती। ध्यान देने वाली बात यह कि आखिरी बार इसका इस्तेमाल द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जापानी-अमेरिकी नागरिकों की हिरासत को सही ठहराने के लिए किया गया था। खैर, चाहे कुछ भी हो, अमेरिका में अवैध प्रवासियों को बाहर निकालने का काम बड़े स्तर पर जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने लगातार इस मुद्दे को लेकर अपना रुख स्पष्ट कर रखा है कि वह सभी अवैध प्रवासियों को अमेरिका से बाहर निकालकर ही दम लेंगे। बेशक ट्रंप के इस कदम चर्चा की पूरी दुनिया में हो रही है। Latest News in Hindi Today Hindi news Venezuela gang members #TrumpImmigrationPolicy #VenezuelaGangs #IllegalMigration #USBorderSecurity #ElSalvadorDeportation #MigrantCrisis #USImmigration #CrimeControl #BidenVsTrump #GangDeportation

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Pakistan Army lies

BLA Claim: सभी आतंकी मारे गए, BLA का दावा 150 लोग अभी भी कब्जे में, क्या झूठ बोल रही है पाकिस्तानी सेना?

मंगलवार को पाकिस्तान के बलूचिस्तान में हुई ट्रेन हाईजैक की घटना को लेकर सस्पेंस है कि बढ़ता ही जा रहा है। बीतते समय के साथ-साथ स्थिति अधिक पेचीदा होती जा रही है। सस्पेंस इसलिए भी क्योंकि बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) (BLA Claim) और पाकिस्तानी सेना के दावों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है। दरअसल, एक तरफ पाकिस्तानी सेना का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है और सुरक्षाबलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया गया है। न सिर्फ आतंकियों को मार गिराया बल्कि सभी बंधकों को सुरक्षित छुड़ा लिया गया है। तो वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तानी सेना के उलट बीएलए का दावा है कि “इस हमले में 100 से अधिक पाकिस्तानी सैनिक मारे गए हैं और अभी भी उनके कब्जे में अब भी 150 से अभी अधिक बंधक मौजूद हैं।” ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या पाकिस्तान की सेना झूठ बोल रही है? क्या पाकिस्तानी सेना अपनी अवाम को बरगलाने के लिए अपनी शेखी बघार रही है? और यदि मान भी ले कि पाकिस्तान का ये दावा सही है, तो फिर इस हकीकत को वो साबित क्यों नहीं कर पा रहा है। ट्रेन कब्जे में हैं तो फिर उसके वीडियो कहां हैं। और बड़ी बात यह कि मारे गए बलूच लड़ाकों के शव कहां हैं? बता दें कि 11 मार्च को दोपहर 1 बजे, आतंकियों ने बलूचिस्तान के बोलन जिले के दादर इलाके में जाफर एक्सप्रेस की पटरी को विस्फोट से उड़ा दिया और ट्रेन में सवार यात्रियों को बंधक बना लिया था। जानकारी के मुताबिक ट्रेन में कुल 440 यात्री मौजूद थे। डीजी आईएसपीआर के मुताबिक, सुरक्षाबलों के ऑपरेशन शुरू करने से पहले ही आतंकियों ने 21 निर्दोष यात्रियों की निर्ममता से हत्या कर दी थी।  अब तक 100 पाकिस्तानी कर्मचारियों को मार गिराया है (BLA Claim) डीजी आईएसपीआर की माने तो, सुरक्षा बलों ने पूरी सावधानी और पेशेवर रणनीति के साथ ऑपरेशन को अंजाम दिया। सुरक्षाबलों ने 33 आतंकवादियों को ढेर कर दिया और सभी यात्रियों को सुरक्षित बचा लिया। इस पूरी कार्रवाई के दौरान किसी भी यात्री को कोई नुकसान नहीं हुआ। डीजी आईएसपीआर के मुताबिक इस भयावह और कायराना हमले में शामिल सभी आतंकवादियों को मौके पर ही मार गिराया गया। तो वहीं, बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने एक बयान में कहा कि “उन्होंने सिर्फ सेना और आईएसआई के अधिकारियों को बंधक बनाया है। जबकि बाकी लोगों को रिहा कर दिया गया है। बता दें कि 12 मार्च को बीएलए ने दावा (BLA Claim) किया था कि “उन्होंने अब तक 100 पाकिस्तानी कर्मचारियों को मार गिराया है। उनके अनुसार, बुधवार को महज एक घंटे के भीतर 50 बंधकों को मौत के घाट उतारा दिया था। इसके अलावा, उन्होंने यह भी बताया कि “11 मार्च की रात पाकिस्तान के ड्रोन हमले के जवाब में 10 बंधकों को मार दिया गया था।”  बीएलए का दावा (BLA Claim) है कि उनके कब्जे में अब भी 150 बंधक मौजूद हैं हालांकि बीएलए का दावा (BLA Claim) है कि उनके कब्जे में अब भी 150 बंधक मौजूद हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक आतंकियों ने बंधकों को 3-4 समूहों में विभाजित कर उनके पास आत्मघाती हमलावरों को तैनात कर दिया था। ये सभी आतंकी अफगानिस्तान में अपने हैंडलर्स से लगातार संपर्क में थे और निर्देश प्राप्त कर रहे थे। इस पूरे मामले पर पाकिस्तान के मंत्री अताउल्लाह तरार ने कहा है कि “सेना और एयरफोर्स ने ऑपरेशन पूरा कर लिया है। सुसाइड बॉम्बर्स को मार गिराया गया है।” पाक सेना के दावे के मुताबिक, हाइजैक के दौरान 21 यात्री और 4 सैनिक मारे गए हैं। बीएलए के सभी 33 लड़ाकों को मार गिराया गया है।”  तो वहीं, एक चश्मदीद ने 70-80 शव देखने का दावा किया है। बलोच लिबरेशन आर्मी के मुताबिक, ट्रेन में कुल 426 यात्री थे। जिसमें पाकिस्तान के 214 सैनिक थे। ट्रेन में मौजूद 212 नागरिकों को छोड़ दिया गया था। 60 सैनिक मारे जा चुके हैं। इसके अलावा पाकिस्तान आर्मी के हमले में बलूच आर्मी के 3 कमांडर भी मारे गए हैं।  इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक मांगे नहीं मानी गई तो सभी 150 बंधक सैनिकों को मार देंगे (BLA Claim)  इस बीच बलूच आर्मी की डेडलाइन आज दोपहर 1 बजे खत्म हो रही। दरअसल, उसने बलूच कैदियों को नहीं छोड़ने पर ट्रेन में मौजूद सभी बंधकों को मारने की धमकी दी है। बीएलए ने (BLA Claim) अपने 48 घंटे के अल्टीमेटम में कहा कि “अगर उनकी मांगे नहीं मानी गई तो सभी 150 बंधक सैनिकों को मार देंगे।” बता दें कि बीएलए ने पाकिस्तान की जेलों में बंद 241 बलोचों की रिहाई की मांग की है। खैर, अपने अल्टीमेटम पर बोलते हुए बीएलए ने कहा है कि “पाकिस्तान को अपने सैनिकों की फिक्र नहीं है। पाक की तरफ से बातचीत की कोई कोशिश नहीं हुई है। हम जो कहते हैं वो करने का माद्दा रखते हैं। डेडलाइन खत्म होने के हर घंटे में हम 5 बंधक मारेंगे। एक बार हमने फैसला कर लिया तो वो नहीं बदलेगा। पाकिस्तान के पास भूल सुधारने का आखिरी मौका है। वो प्रोपेगेंडा और फेक नैरेटिव चलाना बंद करे।” बलूचों का दावा है कि उसने आम रेल पैंसेजर्स को बगैर नुकसान पहुंचाए रिहा किया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news BLA Claim #BLAClaim #PakistanArmy #BalochistanAttack #TerroristAttack #PakistanCrisis #BLAHostage #PakistanNews #MilitaryConflict #BalochistanCrisis #PakFakeClaims

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AirtelSpaceXPartnership

Airtel SpaceX partnership: जिओ के सुस्त इंटरनेट से मिलेगी मुक्ति, अब ग्राहकों को मिलेगा सुपर-फास्ट इंटरनेट

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की भारत में एंट्री होने तो जा रही है। भारत में इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने और ग्राहकों को सुपर-फास्ट इंटरनेट देने के लिए भारती एयरटेल और एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स (Airtel SpaceX partnership) ने हाथ मिलाया है। इस डील के तहत स्टारलिंक सैटेलाइट इंटरनेट को भारत में लॉन्च किया जाएगा। दरअसल, एयरटेल ने मंगलवार को एक रेगुलेटरी फाइलिंग में इस एग्रीमेंट की जानकारी दी। यह तो ठीक, लेकिन यह डील अभी भारत सरकार की मंजूरी का इंतजार कर रही है। गौर करने वाली बात यह कि यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क की हालिया मुलाकात के कुछ हफ्ते बाद ही आया है। बता दें कि मोदी ने अपनी अमेरिका यात्रा के दौरान मस्क से मुलाकात की थी, जिसमें इनोवेशन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, स्पेस एक्सप्लोरेशन और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर सहयोग बढ़ाने की बात हुई थी। मुख्य बात यह कि एलन मस्क लंबे समय से स्टारलिंक को भारत में लाना चाहते थे, लेकिन रेगुलेटरी चुनौतियों और रिलायंस जिओ जैसे घरेलू टेलीकॉम दिग्गजों के विरोध के चलते मामला अटका हुआ था। यही नहीं, नवंबर 2022 में भारतीय टेलीकॉम मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा था कि “स्टारलिंक ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं किया है, जिससे उसका सैटेलाइट कम्युनिकेशन लाइसेंस रुका हुआ है।” कहने की जरूरत नहीं, भारत एक बड़ा बाजार है, जहां 1.4 अरब लोगों में से तकरीबन 40 फीसदी लोगों के पास अभी भी इंटरनेट नहीं है।  सस्ता और भरोसेमंद इंटरनेट मिल सके इसलिए स्टारलिंक एयरटेल के उत्पादों (Airtel SpaceX partnership) को बनाएगा बेहतर  एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक के साथ हुए समझौते पर (Airtel SpaceX partnership) एयरटेल के वाइस चेयरमैन गोपाल विट्टल का कहना है कि “भारत में स्पेसएक्स के साथ काम करना एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह अगली पीढ़ी की उपग्रह कनेक्टिविटी के लिए कंपनी की प्रतिबद्धता को दिखाता है।” यह साझेदारी हमें भारत के सबसे दूरस्थ इलाकों में भी हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड पहुंचाने की क्षमता देगी। प्रत्येक भारतीय को सस्ता और भरोसेमंद इंटरनेट मिल सके इसलिए स्टारलिंक एयरटेल के उत्पादों को और बेहतर बनाएगा। तो वहीं इस डील पर स्पेसएक्स की प्रेसिडेंट ग्विन शॉटवेल ने कहा कि “हम एयरटेल के साथ काम करके भारत के लोगों के लिए स्टारलिंक के ट्रांसफॉर्मेटिव प्रभाव को लेकर उत्साहित हैं। एयरटेल की टीम ने भारत के टेलीकॉम क्षेत्र में अहम भूमिका निभाई है, इसलिए उनके साथ काम करना हमारे लिए सही कदम है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक स्पेसएक्स को इंडियन अथॉरिटी से लाइसेंस मिलना है (Airtel SpaceX partnership) बाकी  भले ही एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की भारत में एंट्री होने तो जा रही है लेकिन अभी तक स्पेसएक्स को इंडियन अथॉरिटी से लाइसेंस मिलना बाकी है। ऐसे में सवाल ये है कि स्टारलिंक (Airtel SpaceX partnership) अगर भारत में दस्तक देती है तो इससे क्या फायदा होगा? इस डील का बड़ा फायदा यह कि भारत में स्टारलिंक एयरटेल के जरिए अपने इक्विपमेंट्स बेच सकेग। इस पार्टनरशिप से दोनों ही कंपनियों को फायदा होगा। इससे एयरटेल स्टारलिंक का इंफ्रास्ट्रक्चर का इस्तेमाल कर सकेगा, तो वहीं मस्क की कंपनी के लिए भारत में अपना विस्तार करना आसान हो जाएगा। दोनों कंपनियां ग्रामीण स्कूलों, हेल्थकेयर सेंटर्स और दूरदराज के इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने के लिए मिलकर काम करेंगी। और तो और इससे एयरटेल के मौजूदा इंफ्रास्ट्रक्चर का फायदा स्टारलिंक को भी मिलेगा। इससे भारत में न सिर्फ इंटरनेट कनेक्टिविटी बेहतर होगी बल्कि रूरल और रिमोट एरिया में हाई स्पीड ब्रॉडबैंड सेवा मिल सकेगी। यही नहीं भारत में किफायती दरों पर हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड एक्सेस मिल सकेगा। इसके अलावा दूरदराज के जिन इलाकों में कनेक्टिविटी नहीं है, वहां भी आसानी से इंटरनेट पहुंच पाएगा। बड़ी बात यह कि आम लोगों को सबसे कम कीमत वाली सैटेलाइट इंटररनेट सर्विस मिल सकेगी Latest News in Hindi Today Hindi news #AirtelSpaceXPartnership #StarlinkIndiaLaunch #HighSpeedInternetIndia #SatelliteInternet #DigitalIndia #ElonMusk #BhartiAirtel #SpaceX #InternetRevolution #JioCompetitor

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Ukraine 30-day ceasefire

Ukraine 30-day ceasefire: 30 दिन के युद्ध विराम के लिए यूक्रेन हुआ राजी, डोनाल्ड ट्रंप ने किया रूस जाने का ऐलान

बीते तीन वर्षों से जारी भीषड़ युद्ध के बाद यूक्रेन गोलीबारी बंद (Ukraine 30-day ceasefire) करने और रूस के साथ बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। दरअसल, सऊदी अरब के जेद्दा में वार्ता के दौरान अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज ने कहा कि “यूक्रेनी प्रतिनिधिमंडल ने आज एक बात बहुत स्पष्ट कर दी है कि वे शांति के लिए राष्ट्रपति ट्रम्प के दृष्टिकोण को साझा करते हैं।” इस दौरान वाल्ट्ज ने कहा कि “वार्ताकारों ने इस बात पर ठोस विवरण प्राप्त किया कि यह युद्ध कैसे स्थायी रूप से समाप्त होने जा रहा है, जिसमें दीर्घकालिक सुरक्षा गारंटी भी शामिल है।” गौर करने वाली बात यह कि घोषणाएं ऐसे समय पर आई हैं जब यूक्रेन और अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारियों ने सऊदी अरब में मास्को के कीव के खिलाफ तीन साल के युद्ध को समाप्त करने पर केंद्रित वार्ता शुरू की। रूस द्वारा 300 से अधिक यूक्रेनी ड्रोन को मार गिराए जाने के कुछ ही घंटों बाद चर्चा शुरू हुई। बता दें कि क्रेमलिन द्वारा अपने पड़ोसी पर पूर्ण पैमाने पर आक्रमण का आदेश दिए जाने के बाद से यह यूक्रेन का सबसे बड़ा हमला था।  यूक्रेन ने की 30 दिन के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) के ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा  बता दें कि सऊदी अरब के जेद्दा में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सीनेटर मार्को रुबियो और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइकल वाल्ट्ज ने किया। उन्होंने यूक्रेन से आए प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की, जिसका नेतृत्व राष्ट्रपति के चीफ ऑफ स्टाफ एंड्री यरमक, विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा और रक्षा मंत्री रुस्तम उमारोव कर रहे थे। इस बैठक के दौरान, यूक्रेन ने 30 दिन के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) के ट्रंप प्रशासन के प्रस्ताव को समर्थन देने की घोषणा की। अहम बात यह कि यह निर्णय व्हाइट हाउस में अमेरिकी और यूक्रेनी राष्ट्रपतियों के बीच हुए सार्वजनिक मतभेद के बाद आया है। गौर करने वाली बात यह कि सप्ताह भर पहले ट्रंप प्रशासन ने यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर ज़ेलेंस्की को रूसी सेना के साथ युद्ध को समाप्त करने के लिए वार्ता में शामिल होने के लिए दबाव डालने के लिए ये उपाय लागू किए थे। अब उसे इसमें सफलता मिलती दिख रही है। जेलेंस्की की ओर से युद्ध विराम पर सहमत होने की बात कहे जाने के बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि “अमेरिका क्रेमलिन के समक्ष युद्ध विराम प्रस्ताव प्रस्तुत करेगा।” इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि “अब हम रूस को बताएंगे कि यूक्रेन 30 दिन के युद्ध विराम पर सहमत हो गया है। अब यह रूस पर निर्भर करेगा कि वे हाँ कहें या न, यदि वे दुर्भाग्य से नहीं कहते हैं, तो हमें पता चल जाएगा कि यहाँ शांति के लिए क्या बाधा है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक यूक्रेन तैयार, अब रूस को भी इसके लिए राजी करने की कोशिश की जाएगी-डोनाल्ड ट्रंप  खैर इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि “हाल ही में युद्धविराम पर सहमति बनी है और अब रूस से बातचीत करनी होगी। यूक्रेन ने रूस के साथ 30 दिनों के युद्ध विराम (Ukraine 30-day ceasefire) पर सहमति व्यक्त की है।” ट्रंप ने एक वीडियो संदेश में कहा कि “यूक्रेन युद्ध विराम के लिए तैयार हो गया है और अब रूस को भी इसके लिए राजी करने की कोशिश की जाएगी।”  इस दौरान ट्रंप ने कहा कि “हम अब रूस जाने की योजना बना रहे हैं और उम्मीद करते हैं कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस पर सहमति जताएंगे। शहरों में हिंसा जारी है, धमाके हो रहे हैं, और निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। हमारी प्राथमिकता इस युद्ध को समाप्त करना है। यह एक पूर्ण युद्ध विराम का आह्वान है, और हमें आशा है कि रूस भी इसे स्वीकार करेगा। यदि हम रूस को इसके लिए राजी कर सके, तो यह एक बड़ी सफलता होगी।” हालांकि ट्रंप ने उम्मीद जरूर जताई कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी इस फैसले को स्वीकार करेंगे। इस बीच महत्वपूर्ण बात यह कि यूक्रेन की ओर से 30 दिन के लिए युद्ध विराम पर सहमत होने के बाद अमेरिका ने सैन्य सहायता और खुफिया जानकारी साझा करना फिर से शुरू कर दिया है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Ukraine 30-day ceasefire #UkraineCeasefire #30DayTruce #USUkrainePeace #TrumpRussiaVisit #ZelenskyPeaceEfforts #PutinCeasefireResponse #RussiaUkraineConflict #MiddleEastPeaceTalks #GlobalDiplomacy #CeasefireNegotiations

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Pakistan Train Hijack

Pakistan Train Hijack: बलोच हाईजैकर के सामने पस्त हुई पाकिस्तानी सेना, रात भर चला ऑपरशन, अभी भी कई बंधक गिरफ्त में

पाकिस्तान के क्वेटा से  पेशावर के लिए रवाना हुई जाफर एक्सप्रेस के बोलन पहुंचते ही बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के लड़ाकों ने ट्रेन पर हमला कर दिया। ट्रेन को हाईजैक (Pakistan Train Hijack) करने के लिए उन्होंने रेल्वे ट्रैक को ही उखाड़ दिया। रेलवे ट्रक उखाड़कर पहले ट्रेन को रोका और फिर इसके बाद उसे एक सुरंग में ले गए। जानकारी के मुताबिक ट्रेन में 450 से ज्यादा यात्री सवार थे। इसमें पाकिस्तान सेना के 140 जवानों को बंधक बना लिया गया। बता दें कि ट्रेन में पाकिस्तानी पुलिस, सेना, आतंकवाद निरोधक बल (एटीएफ) और इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (आईएसआई) के कर्मचारी सवार थे और ये सभी छुट्टी पर पंजाब जा रहे थे। बहुत मुमकिन है बलोच लड़ाकों ने इन्हें ही टारगेट बनाकर हमला किया था। बीएलए की फिदायीन यूनिट और मजीद ब्रिगेड ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया है। इस बीच अपने सैनिकों को बचाने के लिए पाकिस्तान ने एयर स्ट्राइक करने की तैयारी की लेकिन उनकी सारी तयारी धरी की धरी रह गई। जैसे ही बलोच आर्मी को एयर स्ट्राइक की जानकारी मिली उन्होंने सीधे धमकी दी कि यदि हवाई हमला हुआ तो सभी 140 सैनिकों को मार दिया जाएगा। गौर करने वाली बात यह कि ये हमला पाकिस्तान सेना पर बलोच अलगाववादियों द्वारा अबतक के सबसे बड़े हमलों में से एक माना जा रहा है। बलोच विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने पाकिस्तान के 30 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया है।  पाकिस्तानी सेना ने बड़ा एक्शन लेते हुए 104 बंधकों को (Pakistan Train Hijack) छुड़ाया  खैर, इस बीच पाकिस्तानी सेना ने भी बड़ा एक्शन लिया है और 104 बंधकों को (Pakistan Train Hijack) छुड़ा लिया है। फ़िलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। बीएलए और सेना के बीच गोलीबारी जारी है। इस दौरान हुई गोलीबारी में पाकिस्तान के कई सैनिक और बीएलए के लड़ाके मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुरक्षाबलों ने बीएलए की ओर से बंधक बनाए गए 104 लोगों को बचा लिया है। बचाए गए लोगों में 31 महिलाएं, 15 बच्चे और 58 पुरुष,शामिल हैं। साथ ही सुरक्षाकर्मी शेष यात्रियों को सुरक्षित बचाने के लिए लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे हुए हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक सेना की अब तक की कार्रवाई में बीएलए के कुल 23 लड़ाकों को मार गिराया गया है, जबकि कई अन्य घायल बताए जा रहे हैं। इस बीच सुरक्षा बलों की कार्रवाई के कारण आतंकवादी छोटे-छोटे समूहों में बंट गए हैं। घायल यात्रियों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दरम्यान बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद ने बताया कि “तकरीबन 400 यात्री अभी भी ट्रेन में ही हैं, जो सुरंग के अंदर है।” उन्होंने बताया कि “सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच मुठभेड़ जारी है। पेशावर जाने वाली यात्री ट्रेन पर भीषण गोलीबारी की खबरों के बीच बचाव दल को मौके पर भेजा गया है।” इसे भी पढ़ें:- पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक बैठक के कुछ दिनों बाद ही ट्रेन हाइजैक (Pakistan Train Hijack) के कारनामे को दिया गया अंजाम  बता दें कि बलोच लड़ाके अलग बलूचिस्तान देश की जंग बरसों से लड़ रहे हैं और इस हमले के लिए पहले से प्लानिंग की जा रही थी। अभी कुछ दिन पहले ही बलोच समूहों ने पाकिस्तान और चीन के खिलाफ एक नए हमले का ऐलान किया था। बलोच लड़ाकों ने हाल ही में सिंधी अलगाववादी समूहों के साथ युद्धाभ्यास खत्म किया है। कहने की जरूरत नहीं, अब पाकिस्तान सेना के खिलाफ विद्रोही संगठन एकजुट हो रहे हैं। सिंधी और बलोच संगठनों के एकसाथ आने से पाकिस्तान में सीपेक प्रोजेक्ट्स के लिए सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है। जानकारी के मुताबिक बीते महीने बीआरएस यानी बलोच राजी आजोई संगर की एक बैठक हुई थी।  इस बैठक में बलोच लिबरेशन आर्मी, बलोच रिपब्लिकन गार्ड्स, बलूचिस्तान लिबरेशन फ्रंट, सिंधी लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन, सिंधु देश रिवोल्यूशनरी आर्मी के कमांडर शामिल हुए थे। इस बैठक में पाकिस्तान के खिलाफ बड़े ऑपरेशन का प्रस्ताव रखा गया था। कमाल की बात यह कि बैठक के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान में ट्रेन हाइजैक (Pakistan Train Hijack) के कारनामे को अंजाम दिया गया।  Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Train Hijack #PakistanTrainHijack #BalochMilitants #PakistanArmyFail #TrainHostageCrisis #BalochistanUnrest #PakCrisis #TerrorAttack #BalochRebels #PakistanNews #HijackRescue

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Pakistan Train Hijack-Baloch Liberation Army

पाकिस्तान में बलूच लिबरेशन आर्मी का हमला: जाफर एक्सप्रेस हाईजैक, 400 से ज्यादा यात्री बंधक

पाकिस्तान में एक बड़ी सुरक्षा चुनौती खड़ी हो गई है, जहां बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army) ने जाफर एक्सप्रेस को हाईजैक कर लिया है। इस ट्रेन में 500 से अधिक यात्री सवार थे, जिनमें से करीब 182 लोग अब भी BLA के कब्जे में हैं। इस घटना के बाद पूरे पाकिस्तान में दहशत का माहौल है। कैसे हुआ हमला? बलूच लिबरेशन आर्मी (Baloch Liberation Army) के प्रवक्ता जेयंद बलूच के अनुसार यह ऑपरेशन पहले से सुनियोजित था। BLA के लड़ाकों ने मश्कफ, धादर और बोलन इलाके में रेलवे ट्रैक को विस्फोट कर उड़ा दिया, जिससे ट्रेन को रोक दिया गया। इसके तुरंत बाद, BLA के सशस्त्र सदस्यों ने ट्रेन पर कब्जा कर यात्रियों को बंधक बना लिया। प्रवक्ता के मुताबिक इस अभियान को BLA की तीन प्रमुख इकाइयों – मजीद ब्रिगेड, एसटीओएस और फतेह स्क्वाड ने मिलकर अंजाम दिया है। बीएलए का दावा और चेतावनी BLA ने दावा किया है कि इस हमले में अब तक 20 पाकिस्तानी सैनिकों को मार दिया गया है। उनका कहना है कि उन्होंने केवल उन यात्रियों को बंधक बनाया है, जो पाकिस्तानी सेना, पुलिस, आईएसआई या एटीएफ के कर्मी थे और छुट्टी पर पंजाब लौट रहे थे। BLA के प्रवक्ता ने यह भी बताया कि महिलाओं, बच्चों और बलूच समुदाय के यात्रियों को सुरक्षित रिहा कर दिया गया है। शहबाज शरीफ सरकार को चेतावनी BLA ने पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि पाकिस्तानी सेना किसी भी तरह का आर्मी ऑपरेशन करती है, तो इसके परिणाम गंभीर होंगे। प्रवक्ता ने धमकी देते हुए कहा कि अगर पाक सेना ने उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की, तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा। BLA ने अपनी अंतिम चेतावनी में साफ कहा कि यदि पाकिस्तानी सेना के हवाई हमले तुरंत नहीं रोके गए, तो अगले एक घंटे के भीतर सभी बंधकों की हत्या कर दी जाएगी। BLA का कहना है कि इस खून-खराबे के लिए पूरी तरह से पाकिस्तानी सेना जिम्मेदार होगी। पाकिस्तानी सेना और पुलिस की चुप्पी इस बड़े आतंकी हमले के बाद अब तक पाकिस्तान की सेना या पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि पाकिस्तानी प्रशासन अभी भी स्थिति को संभालने में संघर्ष कर रहा है। BLA की बढ़ती गतिविधियां: एक गंभीर चिंता बलूच लिबरेशन आर्मी लंबे समय से पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी स्वतंत्रता के लिए संघर्ष कर रही है। यह संगठन पाकिस्तानी सेना और प्रशासन के खिलाफ कई हिंसक हमलों को अंजाम दे चुका है। BLA का आरोप है कि पाकिस्तानी सेना बलूच नागरिकों के साथ अन्याय कर रही है और उनके संसाधनों का शोषण कर रही है। BLA द्वारा इस तरह की हाईजैकिंग की घटना ने पाकिस्तान में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इसे भी पढ़ें:- स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार पाकिस्तान सरकार के सामने अब दो विकल्प हैं — इस पूरे घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी नजर बनाए हुए है। पाकिस्तान के लिए यह स्थिति बेहद संवेदनशील हो गई है क्योंकि एक गलत कदम से सैकड़ों बंधकों की जान खतरे में पड़ सकती है। BLA का यह हमला पाकिस्तान के लिए एक बड़ी चुनौती है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पाकिस्तानी प्रशासन इस संकट का समाधान कैसे निकालता है। क्या शहबाज शरीफ सरकार बातचीत का रास्ता अपनाएगी या फिर सैन्य कार्रवाई के जरिए इस संकट को सुलझाने का प्रयास करेगी? आने वाले कुछ घंटे इस पूरे घटनाक्रम के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Pakistan Train hijack #PakistanTrain #JaffarExpress #BalochLiberationArmy

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Trump tariff claim

Tariff Dispute: भारत ने ट्रंप के टैरिफ वाले दावे से किया किनारा, कहा अभी कोई समझौता नहीं, बस बातचीत जारी

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अप्रैल से कनाडा, मैक्सिको और चीन समेत भारत पर टेरिफ लगाने की धमकी दी थी। यही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया था कि भारत टैरिफ कटौती पर सहमत (Tariff Dispute) हो गया है। जब कि भारत का कहना है कि “इस मुद्दे पर अमेरिका संग अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है।” हालाँकि दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। जानकारी के मुताबिक ट्रंप के दावे के दो दिन बाद भारत सरकार ने सोमवार को संसदीय पैनल को ये बात बताई। संसदीय पैनल के समक्ष अपनी बात रखते हुए सरकार ने कहा कि “व्यापार शुल्क को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ है। इस मुद्दे के हल के लिए सितंबर तक का समय मांगा गया है।” खैर, ऐसे में बड़ा सवाल यह कि ट्रंप आखिर करना क्या चाहते हैं? यह सवाल इसलिए भी क्योंकि ट्रंप ने दावा किया था कि “भारत टैरिफ कटौती पर राजी हो गया है।” तो वहीं इस मामले पर भारत का कहना है कि “अब तक ऐसा कोई समझौता हुआ ही नहीं।” जानकारी के मुताबिक वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने विदेश मामलों की संसदीय स्थायी समिति को बताया कि “भारत-अमेरिका के बीच टैरिफ को बहुत कम करने को लेकर अब तक कोई समझौता नहीं हुआ है। दोनों ही द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में काम कर रहे हैं। सिर्फ तत्काल टैरिफ के मुद्दे पर ही नहीं दीर्घकालिक व्यापार सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।” संसदीय समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर पूछे कई प्रश्न  जानकारी के मुताबिक समिति के कई सदस्यों ने बर्थवाल से अमेरिका-भारत व्यापार (Tariff Dispute) वार्ता पर कई प्रश्न पूछे। इस प्रश्न पर उन्होंने कहा कि “व्यापार वार्ता के दौरान भारत के हितों का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने समिति से कहा कि “भारत मुक्त व्यापार के पक्ष में है। और व्यापार का उदारीकरण चाहता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि “टैरिफ वॉर छिड़ने से अमेरिका समेत किसी को भी फायदा नहीं होगा, इससे मंदी के हालात पैदा हो सकते हैं।” खैर, इस दौरान कुछ संसद सदस्यों ने वाणिज्य सचिव से यह भी पूछा कि “भारत सीमा शुल्क पर अमेरिकी कदमों को लेकर मेक्सिको और कनाडा की तरह अपनी आवाज क्यों नहीं उठा रहा?” इस कड़वे सवाल पर बर्थवाल ने कहा कि “दोनों मामलों की तुलना नहीं की जा सकती, क्योंकि अमेरिका के उनके साथ सुरक्षा संबंधी चिंताएं और सीमा आव्रजन संबंधी मुद्दे हैं।” इस दौरान समिति से वाणिज्य सचिव ने कहा कि “भारत ऐसे उद्योगों की रक्षा करेगा जो उसकी घरेलू अर्थव्यवस्था के लिए अहम हैं। भारत द्विपक्षीय रूप से सीमा शुल्क कम कर सकता है लेकिन बहुपक्षीय रूप से ऐसा नहीं कर सकता। इसी वजह से द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर काम किया जा रहा है।” इसे भी पढ़ें:- स्पेन में आतंकवाद के खिलाफ बड़ा एक्शन, दस पाकिस्तानी भाईजान गिरफ्तार किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर नहीं करना चाहिए भरोसा (Tariff Dispute) गौर करने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि समिति के कई सदस्यों ने ट्रंप के उस दावे पर भी चिंता जाहिर की, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत टैरिफ घटाने को राजी (Tariff Dispute) हो गया है। बता दें कि कांग्रेस के दीपेंद्र हुड्डा, असदुद्दीन ओवैसी और टीएमसी की सागरिका घोष जैसे विपक्षी सांसदों ने इसे लेकर कई सवाल पूछे। जिस पर सुनील बर्थवाल ने कहा कि “किसी को भी ट्रंप के दावों और मीडिया रिपोर्टों पर भरोसा नहीं करना चाहिए, क्यों कि दोनों ही देशों के बीच समझौते पर बातचीत अभी भी जारी है। उन्होंने संसदीय समिति को बताया कि “भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार शुल्क के मोर्चे पर किसी भी तरह की प्रतिबद्धता नहीं जताई है।” Latest News in Hindi Today Hindi news Tariff Dispute #IndiaUSRelations #TariffDispute #TradeTalks #USIndiaTrade #TrumpIndia #EconomicPolicy #TariffWar #BilateralTrade #TradeNegotiations #GlobalEconomy

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