US Reciprocal Tariffs May Cost India ₹26,000 Crore

US reciprocal tax impact on India: अमेरिका के रेसिप्रोकल टैक्स के चलते भारत को हो सकता है 26000 करोड़ का नुकसान

जब से डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं तब से दुनिया भर को उन्होंने अपने फैसलों से चौंका दिया है। कनाडा, चीन और भारत समेत सभी देशों को टेरिफ का टेरर दिखा रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप आज यानी, 2 अप्रैल से रेसिप्रोकल टैक्स लगाने जा रहे हैं। इस टैक्स का खामियाजा सभी को भुगतना पड़ सकता है। भारत भी इससे अछूता नहीं है। जानकारी के मुताबिक रेसिप्रोकल टैक्स से भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर बड़ा असर (US reciprocal tax impact on India) पड़ सकता है। केयरएज रेटिंग्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका के नए टैरिफ के चलते उत्तर अमेरिकी देश को होने वाले निर्यात पर भारत को तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (26000 करोड़ रुपये से ज्यादा) का नुकसान हो सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1 अप्रैल को केयरएज रेटिंग्स की निदेशक स्मिता राजपुरकर ने मुंबई में रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि “हालांकि इसका प्रत्यक्ष प्रभाव भारत के सकल घरेलू उत्पाद के 0.1 प्रतिशत (3.1 बिलियन डॉलर) पर सीमित है, लेकिन फिर भी इस जोखिमों को लेकर चिंता बनी हुई हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर ये क्या है रेसिप्रोकल टैक्स? तो आपको बता दें कि रेसिप्रोकल का शाब्दिक अर्थ है आप जैसा करोगे, वैसा ही हम करेंगे।   सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं बता दें कि ट्रंप ने पहले ही कई टैरिफ उपायों की घोषणा कर दी है, जिसमें चीन से आयातित सभी वस्तुओं पर 20 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ तो मैक्सिको और कनाडा से आयातित वस्तुओं पर 25 प्रतिशत टैरिफ शामिल है, जबकि कनाडाई तेल पर 10 प्रतिशत की कम दर लागू होगी। दरअसल, प्रेसिडेंट ट्रंप का मानना है कि चीन, भारत, कनाडा और मैक्सिको, अमेरिका पर अधिक टैक्स लगाते हैं। कारण यही जो अब हम भी उन पर अधिक टैरिफ लगाएंगे। बता दें कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हर देश एक-दूसरे से पेट्रोल-डीजल, गैस समेत अन्य वस्तुओं का आयात-निर्यात करते हैं। इस दौरान सभी देश टैरिफ (US reciprocal tax impact on India) के रूप में एक तरह से बॉर्डर शुल्क लगाते हैं।  इसे भी पढ़ें:– भारत के लिए सिरदर्द बनते जा रहे हैं करोड़ों अवैध बांग्लादेशी मुसलमान, इस तरह करते हैं घुसपैठ भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है (US reciprocal tax impact on India) बात करें भारत रेसिप्रोकल टैक्स से होने वाले नुकसान की तो भारतीय निर्यात पर 8 प्रतिशत डिफरेंशियल टैरिफ और डॉलर के मुकाबले रुपये में 4 प्रतिशत एक्सचेंज रेट डेप्रिशिएशन के अनुमान के परिणामस्वरूप, करेंसी में उतार-चढ़ाव को एडजस्ट करते हुए, 4 बिलियन डॉलर का शुद्ध निर्यात प्रभाव देखने को मिलेगा। इस तरह सभी निर्यात श्रेणी में एक समान अतिरिक्त टैरिफ को ध्यान में रखते हुए तक़रीबन 3.1 बिलियन डॉलर (US reciprocal tax impact on India) होने का अनुमान है। अमेरिकी टैरिफ से भारत के ऑटो और फार्मा जैसे सेक्टर सबसे अधिक प्रभावित होंगे। इसके अलावा सेक्टर स्पेसिफिक टैरिफ भी लागू किए गए हैं, जैसे सभी स्टील और एल्युमीनियम आयातों पर 25 प्रतिशत टैरिफ और ऑटोमोबाइल व कुछ ऑटोमोबाइल पार्ट्स पर 25 प्रतिशत टैरिफ, साथ ही सेमीकंडक्टर और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य उद्योग भी रडार पर हैं। ऐसा नहीं कि भारत सरकार हाथ पर हाथ धरे बैठी है। भारत सरकार जवाबी कदमों पर विचार कर रही है। गौरतलब हो कि अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। पिछले साल भारत ने वहां 78 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जो कुल निर्यात व्यापार का 18 प्रतिशत है।   Latest News in Hindi Today Hindi news US reciprocal tax impact on India #USReciprocalTariffs #IndiaExportLoss #TradeDeficit #ReciprocalTaxImpact #IndiaUSTradeRelations #ExportSectorsAffected #JewelryExports

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DonaldTrump2028

Trump presidential plans: क्या तीसरी बार भी अमेरिका के राष्ट्रपति बनना चाहते हैं डोनाल्ड ट्रंप?

अमेरिका में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल 4 साल का होता है और कोई भी शख्स दो बार से अधिक इस पद पर नहीं रह (Trump presidential plans) सकता। दरअसल, फ्रैंकलिन डी. रूजवेल्ट लगातार चार बार अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए थे। इसके बाद साल 1951 में अमेरिकी संविधान में 22वां संशोधन किया गया। उस संसोधन के मुताबिक कोई भी व्यक्ति राष्ट्रपति के पद पर दो बार से अधिक नहीं चुना जाएगा। इस संशोधन के साथ अमेरिका में अधिकतम 2 बार ही राष्ट्रपति बनने की सीमा लगा दी गई। इस संविधान संशोधन के बाद अब तक चुने गए सभी राष्ट्रपति इस सीमा का पालन करते आए हैं। लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने तीसरी बार भी राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। बता दें की डोनाल्ड ट्रंप साल 2017 से लेकर 2021 तक अमेरिका के राष्ट्रपति थे। इसके बाद साल 2021 में वो जो बाइडेन को हाथों चुनाव हार गए थे।  अमेरिका का पुतिन बनने को सोच (Trump presidential plans) रहे हैं- डोनाल्ड ट्रंप इसके बाद साल 2025 में एक फिर से वो चुनाव में लड़े और इस बार उनका मुकाबला जिसमें उनका मुकाबला कमला हैरिस से हुआ। बड़ी बात यह की इस चुनाव को वे भारी अंतर से जीत गए। अब उनका यह कार्यकाल साल 2029 में खत्म होगा। गौर करने वाली बात यह कि तब तक वे 82 वर्ष के हो चुके होंगे। इसके बावजूद ट्रंप को उम्मीद है कि उनकी लोकप्रियता की वजह से अमेरिकी जनता उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए सहमत हो जाएगी। इस तरह वो अमेरिका का पुतिन बनने को सोच (Trump presidential plans) रहे हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या वे भी संवैधानिक सीमा को हटाकर तीसरी बार राष्ट्रपति चुनाव लड़ने जा रहे हैं? दरअसल, रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संविधान में संशोधन कर चुनाव लड़ने की सीमा हटा चुके हैं। हालांकि इस बारे पहले से अटकलें लगाईं जा रही थी लेकिन रविवार को  ट्रंप ने खुद ही इस बारे में स्पष्ट कर दिया। उन्होंने खुलकर कहा कि “वे तीसरी बार भी राष्ट्रपति के रूप में देश की सेवा करना चाहते हैं।”  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही देखिए मुझे काम करना (Trump presidential plans) पसंद है- डोनाल्ड ट्रंप एनबीसी न्यूज को टेलीफोनिक इंटरव्यू में जब ट्रंप से पूछा गया कि “क्या वह उस समय देश की सबसे कठिन नौकरी में सेवाएं देना जारी रखना चाहेंगे? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि “देखिए मुझे काम करना (Trump presidential plans) पसंद है।” इस दौरान उन्होंने दावा किया कि “अमेरिका की जनता उनकी लोकप्रियता के कारण उन्हें तीसरा कार्यकाल देने के लिए तैयार हो जाएगी। ट्रंप यही नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि “मैं मजाक नहीं कर रहा हूं। ऐसे तरीके हैं जिनसे आप ऐसा कर सकते हैं। हालांकि इसके बारे में विचार करना अभी काफी जल्दबाजी होगी।” विदेश नीति मामलों के विशेषज्ञों की माने तो ट्रंप के इरादों से स्पष्ट है कि साल 2029 में अपना दूसरा कार्यकाल खत्म होने के बाद भी वे तीसरी बार चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। इसके लिए वे शायद दो से अधिक बार देश का नेतृत्व करने पर लगी रोक संबंधी संवैधानिक बाधा को पार करने की योजना पर विचार कर रहे हैं। तो वहीं ट्रम्प की टिप्पणियों की तीखी आलोचना भी की जा रही है। प्रतिनिधि डैनियल गोल्डमैन ने इसे सरकार को संभालने और हमारे लोकतंत्र को खत्म करने के उनके स्पष्ट प्रयास में वृद्धि करार दिया है।उन्होंने कहा कि “अगर कांग्रेस के रिपब्लिकन संविधान में विश्वास करते हैं, तो वे तीसरे कार्यकाल के लिए ट्रम्प की महत्वाकांक्षाओं का विरोध करेंगे।” Latest News in Hindi Today Hindi news Trump presidential plans #TrumpThirdTerm #DonaldTrump2028 #Trump2028Campaign #USPresidentialElections #Trump2028Run #TrumpForPresident #Trump2028Bid #Trump2028

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Elon Musk's xAI Acquires X in $33 Billio

Elon Musk sells X: एलन मस्क ने इस शख्स को दो लाख 82 हजार करोड़ रुपए में बेचा  X

टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क अपने हैरतअंगेज निर्णयों के लिए जाने जाते हैं। ऐसा इसलिए कि उन्होंने अपना सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स नीलाम कर दिया है। पहले तो साल 2022 में उन्होंने ट्विटर को 44 बिलियन डॉलर में खरीदा था और फिर नाम बदलकर X किया। न सिर्फ नाम में बदलाव किया बल्कि उन्होंने अभद्र भाषा और यूजर वेरिफिकेशन और गलत सूचना पर पॉलिसी में बदलाव किया था। यही नहीं मस्‍क ने मैनेजमेंट संभालते ही कई बदलाव किए और लोगों से ब्‍लू टिक के लिए फीस वसूली जाने लगी। इस बीच मजे की बात यह कि अब उन्होंने X को ही बेच दिया (Elon Musk sells X)। वो भी 33 बिलियन डॉलर (28,23,43,71,00,00 रुपए) में। ऐसे में आप सोच रहे होंगे कि आखिर वो कौन रईस है जिसने एलन को इतनी बड़ी रकम दी। आखिर कौन है वो शख्स और क्या करती है उसकी कंपनी, जिसने X ख़रीदा। आइये जानते हैं कौन वो खरीदार जिसने इतनी बड़ी डील की।   एलन मस्‍क की ही दूसरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI ने खरीदा है (Elon Musk sells X) बता दें कि वो रईसजादा कोई और नहीं बल्कि अमेरिकी उद्योगपति एलन मस्क स्वयं ही हैं। उन्होंने किसी और को नहीं बल्कि अपनी ही कंपनी (Elon Musk sells X) को बेचा है। बता दें कि xAI यूएस आधारित अमेरिकी पब्लिक-बेनेफिट कॉरपोरेशन है जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में काम करती है। बड़ी बात यह कि इस कंपनी को खुद एलन मस्क ने ही साल 2023 में शुरू किया था। इस कंपनी का हेडक्वार्टर कैलिफोर्निया के सैन फ्रांसिस्को में स्थित है। कुल मिलाकर बड़ी बात यह कि एक्‍स को किसी और ने ही नहीं बल्कि एलन मस्‍क की ही दूसरी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस कंपनी xAI ने खरीदा है। यह डील 33 अरब डॉलर में हुई है। भारतीय करेंसी में यह राशि दो लाख 82 हजार करोड़ में बिकी।  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही हमारा लक्ष्य सच्चाई की खोज करना और ज्ञान को बढ़ाना है (Elon Musk sells X)  जानकारी के मुताबिक दुनिया के सबसे धनी व्यक्ति एलन मस्क ने हाल ही में X पर एक पोस्ट शेयर किया है। शेयर किये पोस्ट में उन्होंने बताया कि X और xAI का भविष्य आपस में जुड़ा हुआ है। आज हम मॉडल, डिस्ट्रीब्यूशन, कंप्यूट, जेटा और टैलेंट को एक साथ लाने की दिशा में कदम उठा (Elon Musk sells X) रहे हैं। इस डील को लेकर एलन मस्क का कहना है कि “X की विशाल पहुंच और xAI की एडवांस एआई क्षमता, दोनों ही एक साथ मिलकर आपार संभावनाओं के दरवाजों को खोलेंगे। अपनी बात को रखते हुए एलन मस्क ने कहा कि “हमारा लक्ष्य सच्चाई की खोज करना और ज्ञान को बढ़ाना है। इसी के साथ हम अरबों लोगों को ज्यादा उपयोगी और बेहतर एक्सपीरियंस देने का काम करेंगे।” बता दें कि एलन मस्क ने हाल ही में माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X को अपनी ही कंपनी xAI को बेच दिया है। ये डील 33 बिलियन डॉलर (लगभग 28,23,43,71,00,00 रुपए) में हुई है। ध्यान देने वाली बात यह कि इस सौदे की घोषणा के बाद X और xAI के प्रवक्ताओं ने तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की। सौदे के कई पहलू अभी अस्पष्ट हैं, जैसे कि निवेशकों को मुआवजा कैसे मिलेगा, X के नेतृत्व का नई कंपनी में एकीकरण कैसे होगा, या नियामक जांच की संभावना क्या है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Elon Musk sells X #ElonMusk #xAI #XCorp #TechNews #AIIntegration #SocialMedia #BusinessAcquisition #Innovation #ArtificialIntelligence #TechUpdate

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MyanmarEarthquake

Myanmar earthquake: म्यांमार में आये भीषण भूकंप से मची तबाही, 700 से अधिक लोगों की हुई मौत, हजारों घायल

शुक्रवार को म्यांमार में अचानक भूकंप (Myanmar earthquake) के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र म्यांमार के दूसरे सबसे बड़े शहर मांडले के पास था। भूकंप की तीव्रता 7.7 थी। इसी के बाद करीब 11 मिनट बाद 6.4 तीव्रता का जोरदार झटका आया। भूकंप के झटके इतने तीव्र थे कि इससे कई इमारतें ढह गईं। अचानक आये इस भूकंप से लोग दहशत में आ गए। चारों तरफ अफरा-तरफ का माहौल मच गया। तबाही का मंजर ऐसा कि इस भूकंप में तकरीबन 700 से अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है। मौतों का अकड़ा बढ़ने के आसार हैं। हजारों लोगों के घायल होने की बात कही जा रही है। फ़िलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी चल ही रहा है, इसी के चलते बचाव कार्य जारी रहने के चलते मरने वालों की संख्या बढ़ने की आशंका है। यही नहीं, म्यांमार में आए भूकंप के झटके पड़ोसी देश थाईलैंड तक में महसूस किए गए। पड़ोसी देश थाईलैंड के बैंकॉक में एक निर्माणाधीन ऊंची इमारत ढह गई, जिसमें कम से कम 10 लोगों की मौत हो गई। बता दें कि म्यांमार में सबसे ज्यादा नुकसान 15 लाख की आबादी वाले मांडले शहर में हुआ। यहां पर बचाव कार्य जारी है। बता दें कि मुख्य भूकंप के बाद शुक्रवार को स्थानीय समयानुसार रात 11:56 बजे म्यांमार में 4.2 तीव्रता का झटका आया। इस झटके के बीच नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी ने पुष्टि की कि यह झटका 10 किमी की गहराई पर आया। जिससे आगे के झटकों की संभावना बढ़ गई है।   इस मुश्किल घड़ी में भारत ने म्यांमार की तरफ बढ़ाया मदद का हाथ (Myanmar earthquake) म्यांमार में आये भीषण भूकंप (Myanmar earthquake) के बाद राहत अभियान शुरू किया जा चुका है। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने घोषणा की कि “संयुक्त राष्ट्र जरूरतमंद लोगों की सहायता के लिए दक्षिण पूर्व एशिया में जुट रहा है, राहत के लिए 5 मिलियन डॉलर आवंटित किए गए हैं।” तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि “उन्होंने म्यांमार में अधिकारियों से बात की है और पुष्टि की है कि उनका प्रशासन देश को सहायता देगा।” म्यांमार की सरकार ने सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में बल्ड के जरूरत की बात कही है। इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी म्यांमार की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया है। कहा जा रहा है कि भारत म्यांमार को स्लीपिंग बैग, खाना, टेंट, स्वच्छता किट और आवश्यक दवाओं सहित 15 टन से अधिक राहत सामग्री भेजेगा। जानकारी के मुताबिक सहायता वायु सेना स्टेशन हिंडन से भारतीय वायु सेना के सी-130जे विमान के जरिए यह मदद देश तक पहुंचाई जाएगी।  इसे भी पढ़ें:- म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही थाईलैंड में बैंकॉक के चाटुचक बाजार के पास एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत (Myanmar earthquake) ढह गई प्राप्त जानकारी के अनुसार, म्यांमार के सैन्य जुंटा नेता जनरल जुंटा प्रमुख मिन आंग ह्लाइंग ने एक वीडियो स्पीच में कहा कि “मैंने राहत प्रयासों के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन का अनुरोध किया है। उन्होंने अधिक मौतों और हताहतों की चेतावनी दी है। इस दौरान उन्होंने सभी देशों से मदद और दान देने की गुजारिश की है। जबकि मेजर जनरल जॉ मिन तुन ने बताया कि “नेपीडॉ, मांडले और सागांग शहर में अस्पताल घायलों से भरे हुए हैं।” यही नहीं, थाईलैंड में, बैंकॉक के चाटुचक बाजार के पास एक निर्माणाधीन 33 मंजिला इमारत (Myanmar earthquake) ढह गई। इमारत के ढहने के बाद बचावकर्मी मलबे की ओर दौड़े और घायल लोगों को फौरन अस्पताल ले जाया गया। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वे का अनुमान है कि मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Myanmar earthquake #MyanmarEarthquake #EarthquakeNews #MyanmarDisaster #SeismicActivity #EarthquakeAlert #BreakingNews #EarthquakeDeathToll #MyanmarRescue #TsunamiAlert #NaturalDisaster

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Myanmar Thailand Earthquake

Myanmar Thailand Earthquake: म्यामार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके, गगनचुंबी इमारतें हुईं धराशाही

म्यांमार-थाईलैंड में भूकंप के तेज झटके (Myanmar Thailand Earthquake) आए हैं। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 7.7 बताई जा रही है। भूकंप के तेज झटके की वजह से बैंकॉक और म्यांमार के शहरों में बड़ी-बड़ी गगनचुंबी इमारतें ताश के पत्तों की बिखर गई। रिपोर्ट के मुताबिक जो बिल्डिंग निर्माणाधीन थी, वो भूकंप के तीव्र झटके को सह नहीं पाई। भूकंप के बाद बैंकॉक में तकरीबन 43 लोग लापता हो गए हैं। भूकंप के बाद हुई तबाही का यह आलम यह कि वहां इमरजेंसी लगा दी है। भू-वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप का एपिसेंटर म्यांमार के साउदर्न कोस्ट के सागाइंग के पास था। भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण और जर्मनी के जेएफझेड भूविज्ञान केंद्र ने कहा कि “भूकंप 10 किलोमीटर (6.2 मील) की गहराई पर था। इसी वजह से भूकंप का तेज झटका महसूस किया गया है।”  भूकंप से भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।  भूकंप का केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास था (Myanmar Thailand Earthquake)  मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक भूकंप का केंद्र बर्मा के मांडले शहर के पास (Myanmar Thailand Earthquake) था। भूकंप की तीव्रता का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि इरावजी नदी पर बना एक विशाल पुल ढह गया है। इसके आलावा  म्यांमार की राजधानी नेपिडो में सड़कों पर दरार आ गई है। जबकि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भूंकप के झटकों के बाद गिरती इमारतों से लोग दूर भागते नजर आए। सरकार ने आपात बैठक कर रही है। म्यांमार में खतरनाक भूकंप के झटके महसूस हुए। लोगों में भूकंप के बाद दशहत महसूस की गई। भूकंप के झटके काफी तेज थे। झटकों से लोग दहशत में आ गए और अपने घरों-दफ्तरों से बाहर निकल आए। ये झटके इतने जबरदस्त थे कि थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी इन्हें महसूस किया गया।  View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jai.rashtranews) भूकंप के बाद मोदी की प्रतिक्रिया दोनों देशों की हर संभव मदद करने के लिए भारत तैयार है (Myanmar Thailand Earthquake)  दोनों देशों में आए भीषण भूकंप पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि “म्यांमार और थाईलैंड में आए भूकंप के तेज झटकों से वह चिंतित हैं। वह लोगों की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करते हैं।” पीएम ने कहा कि “दोनों देशों की हर संभव मदद करने के लिए भारत तैयार है।” जानकारी के मुताबिक पीएम मोदी ने भारत में संबंधित अधिकारियों को तैयार रहने के लिए कहा है। साथ ही उन्होंने विदेश मंत्रालय को म्यांमार और थाईलैंड (Myanmar Thailand Earthquake) की सरकारों के साथ संपर्क में रहने के लिए कहा है।” खैर, म्यांमार में आये भूकंप का असर कोलकाता और आसपास के इलाकों में भी देखा गया। इन इलाकों में हल्के झटके महसूस किए। मणिपुर में, भूकंप के झटकों के कारण इंफाल के थंगल बाजार में लोगों में दहशत फैल गई। गौर करने वाली बात यह कि यहां कई पुरानी बहुमंजिला इमारतें हैं। इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन क्यों आते हैं भूकंप और कैसे नापी जाती है तीव्रता? (Myanmar Thailand Earthquake)  जानकारी के लिए बता दे कि धरती के भीतर सात टेक्टोनिक प्लेट्स हैं। ये प्लेट्स निरंतर घूमती रहती हैं। ये प्लेटें जब आपस में टकराती हैं, इनमे रगड़ होती है या फिर एक दूसरे के ऊपर चढ़ती हैं या उनसे दूर जाती हैं, तब जमीन में कंपन होती है। आसान भाषा में इसे ही भूकंप कहते हैं। भूकंप को नापने के लिए रिक्टर पैमाने का इस्तेमाल करते हैं। जिसे रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल कहते हैं। रिक्टर मैग्नीट्यूड स्केल 1 से 9 के बीच होती है। 1 यानी नॉर्मल तीव्रता और 9 यानी सबसे भयावह। अगर रिक्टर पैमाने पर तीव्रता 7 दिखती है तो उसके आसपास के 40 किलोमीटर के दायरे में तेज झटका होता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Myanmar Thailand Earthquake #MyanmarThailandEarthquake #EarthquakeAlert #ThailandQuake #MyanmarQuake #SeismicActivity #EarthquakeNews #DisasterUpdate #Tremors #BuildingCollapse #NaturalDisaster

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Militants Execute Bus Passengers in Balochistan, Pakistan​

Balochistan bus attack: खूनी हमलों से दहला बलूचिस्तान, यात्रियों को बसों से उतारकर गोलियों से भूना

कहने के लिए तो बलूचिस्तान पाकिस्तान का सबसे बड़ा प्रांत है, लेकिन बड़ा होने के साथ ही यह सबसे अस्थिर प्रांत भी है। अस्थिरता के आलम का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में यहां हिंसा की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। हाल ही में बस से उतारकर पंजाबियों को निशाना बनाया गया। हमलावरों ने बस से यात्रियों को उतारकर विशेष रूप से पंजाबी समुदाय के लोगों को निशाना बनाया है। बता दें कि बलूचिस्तान में संदिग्ध विद्रोहियों द्वारा किए गए दो अलग-अलग हमलों में आठ लोगों की मौत हो गई और 17 लोग घायल (Balochistan bus attack) हो गए, जबकि तीन लोगों को अगवा कर लिया गया। बुधवार को बस यात्रियों पर हमला ऐसे समय में हुआ जब प्रांत में पहले से ही माहौल तनावपूर्ण था। बता दें कि मार्च महीने की शुरुआत में, अलगाववादी संगठन बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) के विद्रोहियों ने जाफर एक्सप्रेस का अपहरण कर लिया था। जिसमें कुल 440 यात्री सवार थे।  इस घटना में 18 सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 26 बंधकों की जान चली गई थी। जानकारी के मुताबिक गुरुवार को क्वेटा के बारेच मार्केट क्षेत्र में एक पुलिस वाहन के पास बम विस्फोट हुआ, जिसमें दो लोगों की जान चली गई और 17 घायल हो गए।  कलमत क्षेत्र के पास एक यात्री बस को रोक लिया और गोलीबारी (Balochistan bus attack) कर दी इस पूरे मामले पर बलूचिस्तान सरकार के प्रवक्ता शाहिद रिंद के मुताबिक “विस्फोटक सामग्री एक मोटरसाइकिल में छिपाई गई थी, जो पुलिस वाहन के पास धमाके से फट गई।” खैर, इस बीच घायलों को सिविल अस्पताल ले जाया गया, जहां चार की हालत गंभीर बताई जा रही है। इससे पहले, बुधवार रात ग्वादर जिले में उग्रवादियों ने एक यात्री बस को रोका और पंजाब प्रांत के छह यात्रियों को नीचे उतारकर गोली मार दी। साथ ही, तीन अन्य यात्रियों को अपहरण कर अपने साथ ले गए। इसके अलावा वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) हफीज बलूच ने बताया कि “यह हमला ग्वादर जिले में बुधवार देर रात हुआ, जब कुछ हथियारबंद हमलावरों ने ओरमारा राजमार्ग पर कलमत क्षेत्र के पास एक यात्री बस को रोक लिया और गोलीबारी (Balochistan bus attack) कर दी। इस हमले में पांच यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य यात्री ने गुरुवार को अस्पताल में दम तोड़ दिया।” पुलिस अधीक्षक ने आगे बताया कि “हमलावरों ने यात्रियों के पहचान-पत्र जांचने के बाद छह लोगों की हत्या कर दी और तीन अन्य को अपने साथ ले गए। सभी पीड़ित पंजाब प्रांत के रहने वाले थे। हलाँकि अब तक किसी भी संगठन ने इस हमले की जिम्मेदारी नहीं ली है। बता दें कि उग्रवादियों ने ग्वादर बंदरगाह से खाद ले जा रहे तीन ट्रकों को भी सड़क पर बाधा डालकर रोक लिया और फिर उनमें आग लगा दी।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यात्री बस पर हुए हमले (Balochistan bus attack) की निंदा  प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने यात्री बस पर हुए हमले (Balochistan bus attack) की निंदा की। न सिर्फ निंदा की बलि संबंधित अधिकारियों को जांच करने और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का आदेश भी दिया। यही नहीं, राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने कहा कि “आतंकवादी देश की प्रगति और बलूचिस्तान की खुशहाली के विरोधी हैं, क्योंकि वे वहां विकास होता नहीं देख सकते।” इसके अलावा बलूचिस्तान के मुख्यमंत्री सरफराज बुगती ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि “निर्दोष यात्रियों को बस से उतारकर पहचान के आधार पर उनकी हत्या करना एक अमानवीय और कायरतापूर्ण कृत्य है।” इसके अलावा प्रांत के नसीराबाद संभाग के सोहबत क्षेत्र में एक और घटना घटी, जहां हथियारबंद हमलावरों ने एक घर पर हमला कर दिया। इस हमले में एक महिला और तीन बच्चों समेत एक ही परिवार के सात सदस्यों की बेरहमी से हत्या कर दी गई। पुलिस के अनुसार, यह अपराध दो समूहों के बीच चल रहे भूमि विवाद को लेकर हुआ। पुलिस इसे आपसी रंजिश से जुड़ा मामला बता रही है।  Latest News in Hindi Today Hindi news Balochistan bus attack #BalochistanAttack #BusAttack #PakistanViolence #TerrorismInPakistan #BalochistanUnrest #PassengerSafety #SectarianViolence #HumanRights #SecurityConcerns #PeaceInBalochistan

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Mamata Banerjee's Oxford Union Speech Controversy

Mamata Banerjee Oxford Speech: ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में ममता बनर्जी के भाषण के दौरान हुआ जमकर हंगामा, बोलो दीदी को कोई फर्क नहीं पड़ता 

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लंदन में ऑक्सफोर्ड (Mamata Banerjee Oxford Speech) यूनिवर्सिटी के केलॉग कॉलेज में भाषण दे रही थीं, तभी कुछ छात्रों ने उनका भाषण रोक दिया। दरअसल, छात्र राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा और आरजी कर कॉलेज के मुद्दे पर विरोध कर रहे थे। गौर करने वाली बात यह कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बहुत ही शालीनता से स्थिति को संभाला। उन्होंने विरोध करने वाले छात्रों को न सिर्फ जवाब दिया बल्कि अपनी बात भी रखी। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनकारियों से कहा कि “अपनी पार्टी से कहो कि वो हमारे राज्य यानी पश्चिम बंगाल में अपनी ताकत बढ़ाएं ताकि वो हमसे मुकाबला कर सकें।” अचानक हुए इस विरोध से वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। लेकिन, उन्होंने मुख्यमंत्री के जवाब की सराहना की। दर्शकों ने विरोध करने वाले छात्रों को हॉल से बाहर जाने के लिए कहा। इसके बाद ममता बनर्जी ने बिना किसी रुकावट के अपना भाषण पूरा किया। बता दें कि इस विरोध प्रदर्शन की जिम्मेदारी स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया- यूके ने ली है। संगठन ने फेसबुक पोस्ट में लिखा कि “हम पश्चिम बंगाल के छात्रों और श्रमिक वर्ग के समर्थन में ममता बनर्जी और टीएमसी के भ्रष्ट और अलोकतांत्रिक शासन के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं।” इसे राजनीति करने का मंच बनाने के बजाय, बंगाल जाओ (Mamata Banerjee Oxford Speech) प्राप्त जानकारी के मुताबिक जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल में उद्योगों के विकास पर बोल (Mamata Banerjee Oxford Speech) रही थीं, तो टाटा ग्रुप की टीसीएस कंपनी में निवेश की बात उठी। तभी उसी समय, कुछ लोग हाथों में पोस्टर लेकर खड़े हो गए। इन पोस्टरों में राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा और आरजी कर कॉलेज के मुद्दे लिखे हुए थे। इस बीच विरोध करने वाले लोग नारे भी लगा रहे थे, जिससे ममता बनर्जी के भाषण में बाधा आ रही थी। लेकिन मुख्यमंत्री बिल्कुल भी परेशान नहीं हुईं। उन्होंने शांत लेकिन दृढ़ आवाज में विरोध करने वालों को जवाब दिया। उन्होंने उनसे कहा कि आप मेरा स्वागत कर रहे हैं, धन्यवाद। मैं आपको मिठाई खिलाऊंगी। तभी मुख्यमंत्री ने एक प्रदर्शनकारी को भाई कहकर संबोधित करते हुए कहा कि “झूठ मत बोलो। मुझे तुम्हारे लिए सहानुभूति है। लेकिन इसे राजनीति करने का मंच बनाने के बजाय, बंगाल जाओ और अपनी पार्टी से कहो कि वो खुद को मजबूत करे ताकि वो हमसे मुकाबला कर सके।” उनका जवाब सुनकर दर्शक जोर-जोर से तालियां बजाने लग। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने अपनी आवाज उठाने की कोशिश की लेकिन मुख्यमंत्री ने उनसे कह कि “मेरा अपमान करके अपने संस्थान का अपमान मत करो। मैं यहां देश के प्रतिनिधि के तौर पर आई हूं। अपने देश का अपमान मत करो।” इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन यहां राजनीति मत करो, यह राजनीति करने का मंच नहीं है (Mamata Banerjee Oxford Speech) इस बीच जब प्रदर्शनकारियों ने आरजी कर कॉलेज में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया (Mamata Banerjee Oxford Speech) तो मुख्यमंत्री ने कहा कि “थोड़ा जोर से बोलिए, मुझे सुनाई नहीं दे रहा है। मैं आपकी हर बात सुनूंगी। क्या आपको पता है कि यह मामला अभी भी चल रहा है? इस मामले की जांच की जिम्मेदारी अब केंद्र सरकार के हाथों में है, यह मामला अब हमारे हाथ में नहीं है।” ममता बनर्जी ने आगे कहा कि “यहां राजनीति मत करो, यह राजनीति करने का मंच नहीं है। मेरे राज्य में जाओ और मेरे साथ राजनीति करो। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने जादवपुर विश्वविद्यालय की घटना का भी जिक्र किया।” अहम बात यह कि भारत की क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष सौरव गांगुली भी उस समय वहां मौजूद थे। बता दें कि ममता बनर्जी लंदन में कई उद्योग और व्यापार से जुड़ी बैठकों में शामिल हुईं। उनके दौरे का मुख्य आकर्षण केलॉग कॉलेज में उनका भाषण था। और कमाल की बात यह कि यहीं पर विरोध प्रदर्शन हुआ।  Latest News in Hindi Today Hindi news Mamata Banerjee Oxford Speech #MamataBanerjee #OxfordSpeech #SpeechControversy #PoliticalDebate #TMC #BJP #CPI(M) #FakeDegree #OxfordUnion #KelloggCollege

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Pakistan Army Revolt Crisis Against Aasim Munir Grows

Pakistan army revolt: अपने ही देश में पाकिस्तानी सेनाप्रमुख के खिलाफ बगावत के सुर, सकते में सैयद आसिम मुनीर

पाकिस्तानी सेना के प्रमुख जनरल सैयद आसिम मुनीर की मुश्किलें हैं कि कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। एक तरफ जहां बलोच लिब्रेशन आर्मी का लड़कों ने उनकी नाक में दम कर रखा है तो वहीं दूसरी तरफ जूनियर सैन्य अधिकारियों के बीच विरोध के स्वर (Pakistan army revolt) तेज हो गए हैं। दरअसल, पाकिस्तानी सेना में जनरल मुनीर के खिलाफ लगातार असंतोष बढ़ता जा रहा है। असंतोष बढ़ने की वजह से विद्रोह की स्थिति बनती नजर आ रही है। जूनियर सैन्य अधिकारियों के असंतोष का यह आलम है कि कुछ अधिकारियों ने जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग करते हुए एक पत्र लिखा है। जानकारी के मुताबिक लिखे पत्र उन्होंने सेना प्रमुख की नीतियों की आलोचना की है और नए नेतृत्व की आवश्यकता जताई है।  पाकिस्तानी सेना में (Pakistan army revolt) की स्थिति बन रही है बगावत  इसकी पुष्टि इमरान खान की पार्टी के एक नेता ने खुद ने की। प्राप्त जानकारी के मुताबिक इमरान खान की पार्टी के एक नेता ने दावा किया है कि “पाकिस्तानी सेना में बगावत (Pakistan army revolt) की स्थिति बन रही है। कई सैन्य अधिकारी जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं और वर्तमान हालात को 1971 जैसी स्थिति से जोड़ रहे हैं।” यही नहीं,  इसके अलावा देशभर में शहबाज शरीफ के खिलाफ भी प्रदर्शन हो रहे हैं। ऐसे में कहने की जरूरत नहीं कि यदि सेना में विद्रोह की ज्वाला भड़कती है तो यह पूरे पाकिस्तान में भारी उथल-पुथल मचा सकती है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में (Pakistan army revolt) पड़ने लगी है अलग-थलग दावा तो यहाँ तक किया जा रहा है कि “पाकिस्तानी सेना के जूनियर अधिकारियों ने सेना प्रमुख जनरल मुनीर के इस्तीफे की मांग की है। अफसरों ने तल्खी भरा खत लिखकर उन पर आरोप लगाया है। उनका आरोप है कि उन्होंने सेना का इस्तेमाल जबरन राजनीतिक प्रताड़ना और निजी दुश्मनी निकालने के साधन के रूप में किया है।” बता दें कि पत्र में मुनीर के नेतृत्व की आलोचना करते हुए कहा गया है कि “उन्होंने पाकिस्तान को संकट की गहराइयों में धकेल दिया है। उनके नेतृत्व की तुलना 1971 की स्थिति से की गई है, जब पाकिस्तान को करारी हार झेलनी पड़ी थी। और इसका परिणाम बांग्लादेश के गठन के रूप में झेलना पड़ा था। इस बीच गौर करने वाली बात यह कि पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में अलग-थलग (Pakistan army revolt) पड़ने लगी है।  اگر تو یہ کھلا خط اصلی ہے تو میلہ مویشیاں کا مہمان خصوصی اب ڈر اور خوف کے مارے مزید ظلم و بربریت کرے گا۔ بزدل انسان ہمیشہ ظالم ہوتا ہے اور جب اسے اپنی طاقت ختم ہوتی نظر آنے لگے تو وہ کچھ بھی داؤ پر لگانے کو تیار ہوتا ہے۔ تاریخ حافظ سید عاصم منیر شاہ کو دور حاضر کے یزید و فرعون کے… pic.twitter.com/vtYl8SYEvQ — Ali Malik (@AliHasnainMalik) March 18, 2025 बच्चें हमारी चौकियों पर पत्थर फेंकते हैं (Pakistan army revolt) खुफिया सूत्रों की माने तो इस बगावत की वजह से पाकिस्तानी सेना के अस्तित्व पर ही संकट के बदल मंडराने लगे हैं। बड़ी बात यह कि पत्र में चेतावनी दी गई है कि यदि मुनीर अपने पद से इस्तीफा नहीं देते, तो सेना स्वयं उनके खिलाफ बगावती कदम उठाएगी।बता दें कि एक पत्र में उल्लेख किया गया है कि “बच्चें हमारी चौकियों पर पत्थर फेंकते हैं, जिससे स्पष्ट होता है कि पाकिस्तानी सेना अपने ही देश में अलग-थलग पड़ गई है। खबर एक मुताबिक सेना के अधिकारियों ने आर्मी चीफ की तुलना एक क्रूर फासीवादी जानवर (Pakistan army revolt) से की है, जो अपने ही नागरिकों की कीमत पर लाभ उठा रहा है। Latest News in Hindi Today Hindi news  Pakistan army revolt #PakistanArmyRevolt #AasimMunirCrisis #PakistanPolitics #MilitaryMutiny #PakArmyProtest #PakistanUnrest #PoliticalCrisis #PakistanNews #ArmyRebellion #SyedAasimMunir

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US Military Attack Plan Leak: मैगजीन ने किया अमेरिकी सेना का पूरा का पूरा अटैक प्लान लीक, चैट के हर डिटले को छापा

किसी भी देश की सेना का प्लान बहुत ही सीक्रेट होता है। वह कब, किसपर और कहां अटैक करने जा रही है यह टॉप सीक्रेट होता है। ऐसे में यदि उसका सारा का सारा सीक्रेट यदि दुनिया के सामने लीक हो जाये तो? और तो और लीक करने वाला खुद ही राष्ट्रिय सुरक्षा सलाहकार हो तो? जाहिर सी बात है यह बड़ी ही चिंता की बात होगी। दरअसल, अमेरिकी सेना की रणनीति सरेआम दुनिया के सामने उजागर (US Military Attack Plan Leak) हो गई है। हैरत की बात लीक करने वाल कोई औरनहीं , बल्कि खुद अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार थे। जानकारी के मुताबिक उन्होंने अटालांटिक मैगजीन के चीफ एडिटर को ही उस मैसेज ग्रूप में जोड़ लिया था, जिसमें हमले को लेकर बातचीत हो रही थी। खैर, जबसे यह खबर आई है तब से हड़कंप मचा हुआ है। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, व्हाइट हाउस और कई शीर्ष अधिकारियों ने इस बात से इनकार करते हुए कहा है कि “15 मार्च को यमन में हूती उग्रवादियों पर हमले की योजना पर चर्चा करने वाले मैसेजिंग ग्रूप पर कोई क्लासिफाइड यानी सीक्रेट जानकारी शेयर नहीं की गई थी।” मजे की बात यह कि अटलांटिक मैगजीन ने स्क्रीनशॉट सहित पूरा का पूरा चैट ही शेयर कर दिया है। इस स्क्रीनशॉट में दिख रहा है कि अमेरिकी सेना की बमबारी शुरू होने से दो घंटे से अधिक समय पहले ही पत्रकार के पास हरेक जानकारी पहुंच चुकी थी।  उसे पहले ही पता था (US Military Attack Plan Leak) कि किस खास वक्त कहां से अमेरिका के लड़ाकू विमान भरने वाले हैं उड़ान  हालांकि अब मैगजीन ने जोर देकर कहा कि उसे पहले ही पता था (US Military Attack Plan Leak) कि किस खास वक्त कहां से अमेरिका के लड़ाकू विमान यमन के लिए उड़ान भर रहे थे। अगर मैगजीन की जगह किसी गलत हाथों में ये जानकारी चली जाती तो, यह अमेरिकी पायलटों और अन्य कर्मियों को और भी बड़े खतरे में डाल देती। जानकारी के मुताबिक अटलांटिक के एडिटर इन चीफ जेफरी गोल्डबर्ग को अनजाने में सिग्नल मैसेजिंग ऐप पर ग्रुप चैट में जोड़ लिया था। दरअसल, इस ग्रूप पर ही बमबारी की योजना पर चर्चा की जा रही थी। कथित तौर पर चैट में अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस, रक्षा सचिव हेगसेथ, केंद्रीय खुफिया एजेंसी यानी सीआईए के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार माइक वाल्ट्ज, विदेश मंत्री मार्को एंटोनियो रुबियो, नेशनल सिक्योरिटी डायरेक्टर तुलसी गबार्ड और अन्य शामिल थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक 26 जनवरी (बुधवार) को द अटलांटिक ने एक नई रिपोर्ट छापी। इसमें मैगजीन ने पूरी चैट के डिटेल शेयर करने के पीछे का अपना तर्क समझाते हुए मैगजीन ने कहा कि “रक्षा सचिव हेगसेथ ने दावा किया है कि ग्रूप में कोई भी युद्ध की योजना नहीं लिख रहा था। जबकि ट्रंप और अन्य ने कहा था कि “यह कोई क्लासीफाइड जानकारी नहीं थी।” बस इसी को गलत साबित करने के लिए मैगजीन ने पूरी चैट ही छाप दी है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन कई प्रशासन के अधिकारियों ने दावे कि हम चैट के कंटेंट के बारे में झूठ बोल रहे (US Military Attack Plan Leak) हैं मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैगजीन ने कहा कि “हेगसेथ, गब्बार्ड, रैटक्लिफ और ट्रंप के बयानों के साथ-साथ कई प्रशासन के अधिकारियों ने दावे कि हम चैट के कंटेंट के बारे में झूठ बोल रहे (US Military Attack Plan Leak) हैं। इसने हमें यह विश्वास दिलाया है कि लोगों को अपने निष्कर्षों तक पहुंचने के लिए पूरे टेक्स्ट को खुद देखना चाहिए। ट्रंप के सलाहकारों ने गैर-सुरक्षित संचार चैनलों में जिस तरह की जानकारी शामिल की है, उसका खुलासा करने में एक स्पष्ट सार्वजनिक रुचि है, खासकर क्योंकि वरिष्ठ प्रशासन के लोग शेयर किए गए मैसेज के महत्व को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।” इस पूरे मामले पर मैगजीन ने कहा कि “एक्सपर्ट्स ने उन्हें बार-बार बताया था कि ऐसी संवेदनशील चर्चाओं के लिए सिग्नल चैट का उपयोग करना “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है” और बताया कि गोल्डबर्ग को बमबारी शुरू होने से दो घंटे पहले हमलों की जानकारी मिली थी।” Latest News in Hindi Today Hindi news  #USMilitaryLeak #SignalAppBreach #NationalSecurity #YemenOperation #HouthiTarget #PentagonLeak #DefenseDepartment #MilitaryIntelligence #InformationSecurity #JournalistInclusion​

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Donald Trump’s Big Change in US Voting System Revealed

Donald Trump voting changes: अमेरिका में वोट देने के तरीके में यह बड़ा बदलाव करने जा रहे हैं डोनाल्ड ट्रंप  

अमेरिका के राष्ट्रपति पद की शपथ लेने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप एक के बाद एक चौंकाने वाले फैसले ले रहे हैं। इसी कड़ी में उन्होंने मंगलवार (25 मार्च) को अमेरिका में होने वाले चुनावों में व्यापक बदलाव की मांग वाले आदेश पर हस्ताक्षर किए। दरअसल, ट्रंप ने वहां के फेडरल चुनावों (केंद्रीय) में वोटिंग के रजिस्ट्रेशन के लिए नागरिकता का डॉक्यूमेंट प्रूव देना अनिवार्य (Donald Trump voting changes) कर दिया है। यानी जिस तरह भारत में हम मतदान के समय आधार कार्ड या वोटर कार्ड जैसे आधिकारिक आईडी प्रूव देते हैं। ठीक उसी तरह अब अमेरिकी नागरिकों को भी अपनी आईडी प्रूफ दिखाना होगा। आईडी प्रूफ दिखाने के बाद ही वो वोट डालने हेतु रजिस्टर कर सकेगा। इस बीच भारत और कुछ अन्य देशों का हवाला देते हुए इस आदेश में कहा गया है कि “अमेरिका, स्वशासन वाले अग्रणी देश होने के बावजूद, आधुनिक, विकसित और विकासशील देशों द्वारा उपाय में लाए जाने वाले बुनियादी और आवश्यक चुनाव सुरक्षा को लागू करने में विफल रहा है। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “उदाहरण के लिए, भारत और ब्राजील मतदाता पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ रहे हैं, जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए यह काफी हद तक स्व-सत्यापन पर ही निर्भर है।” अब अमेरिकी मतदाताओं को देना होगा नागरिकता का सबूत (Donald Trump voting changes) प्राप्त जानकारी के अनुसार, अब मतदाताओं को नागरिकता का सबूत डॉक्यूमेंट फॉर्म में देना होगा। जैसे अमेरिकी पासपोर्ट या जन्म प्रमाण पत्र। इस आदेश में यह भी कहा गया है कि “राज्यों को अपनी मतदाता सूची और मतदाता सूची के रखरखाव के रिकॉर्ड को समीक्षा के लिए होमलैंड सिक्योरिटी विभाग और सरकारी दक्षता विभाग (डीओजी) को सौंप देना चाहिए। इस बीच आदेश में चुनाव के दिन तक वोट डालने और उसे प्राप्त करने को आवश्यक बताया गया है। कहा गया है कि फेडरल फंडिंग उस समय सीमा के राज्य अनुपालन पर सशर्त होनी चाहिए। इसके अलावा आदेश में चुनाव सहायता आयोग को चुनावी अखंडता की रक्षा के उद्देश्य से वोटिंग सिस्टम के लिए अपने दिशानिर्देशों में संशोधन करने का निर्देश दिया गया। जानकारी के मुताबिक इसमें यह मार्गदर्शन शामिल होगा कि वोटिंग सिस्टम को उन मतपत्रों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए जो मतगणना प्रक्रिया में बारकोड या क्यूआर कोड का उपयोग करते हैं। इसके अलावा डोनाल्ड ट्रंप के आदेश में विदेशी नागरिकों को अमेरिकी चुनाव में योगदान देने या चंदा देने पर भी रोक लगा दी गई है।  इसे भी पढ़ें:-पाकिस्तान के अवैध कब्जे से आजादी क्यों चाहते हैं बलूच?, औरंगजेब से है खास कनेक्शन कई अमेरिकी चुनावों में मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान करने की है सुविधा (Donald Trump voting changes) बता दें कि आदेश में डेनमार्क और स्वीडन का उल्लेख करते हुए कहा कि ये देश व्यक्तिगत रूप से मतदान करने में असमर्थ लोगों के लिए मेल-इन वोटिंग को समझदारी से सीमित करते हैं और पोस्टमार्क की तारीख की परवाह किए बिना देर से आने वाले वोटों की गिनती नहीं करते हैं, लेकिन कई अमेरिकी चुनावों में अब मेल द्वारा बड़े पैमाने पर मतदान की सुविधा है (Donald Trump voting changes)। कई अधिकारी बिना पोस्टमार्क वाले या चुनाव की तारीख के बाद प्राप्त मतपत्रों को स्वीकार करते हैं। जनवरी में डेमोक्रेट उम्मीदवार कमला हैरिस को पटखनी देकर सत्ता में लौटे राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि “धोखाधड़ी, त्रुटियों या संदेह से मुक्त स्वतंत्र, निष्पक्ष और ईमानदार चुनाव हमारे संवैधानिक गणतंत्र को बनाए रखने के लिए मौलिक हैं।” इस बीच ट्रंप ने कहा कि “अमेरिकी नागरिकों का अपने वोटों को अवैध रूप से कमजोर किए बिना उचित ढंग से गिनती और सारणीबद्ध करने का अधिकार, चुनाव के असली विजेता का निर्धारण करने के लिए महत्वपूर्ण है।”  Latest News in Hindi Today Hindi news Donald Trump voting changes #DonaldTrump #USVoting #Election2024 #TrumpPolicies #VotingChanges #TrumpCampaign #USElections #BallotReform #TrumpNews #VotingRights

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