Things to keep in mind while choosing a school for your child

बच्चे के भविष्य की नींव रखें मजबूत: उनके लिए सही स्कूल चुनते हुए इन 5 बातों का रखें ध्यान

अपने बच्चे की हर पहली खास चीज माता-पिता के लिए महत्वपूर्ण होती है जैसे उनका पहला दांत निकलना, पहली बार चलना या उनका पहली बार स्कूल (School) जाना। बच्चों का पहला स्कूल चुनना बहुत ही जरूरी निर्णय है। क्योंकि, यह वही जगह है जहां से बच्चे का शैक्षिक और व्यक्तिगत विकास होता है। इस निर्णय से बच्चे का भविष्य प्रभावित होता है। सिर्फ स्कूल (School) की बिल्डिंग को देखकर आप स्कूल के अच्छे या बुरे होने का अंदाजा नहीं लगा सकते हैं। बल्कि, इसके लिए कई अन्य चीजों का भी ध्यान रखना आवश्यक है। आइए जानिए अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)?  अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child)? अगर आपका बच्चा स्कूल (School) जाने लायक हो गया है, तो आप अभी से तैयार हो जाएं और अपने एरिया के स्कूल के बारे में जानकारी लेना शुरू कर दें और बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) चुनते हुए कुछ खास बातों का ध्यान रखें।  सही लोकेशन अगर आप अपने बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) ढूंढ रहे हैं, तो सबसे जरूरी है स्कूल की सही लोकेशन। ध्यान रहे स्कूल अपने घर से अधिक दूर न हो। क्योंकि, आपका बच्चा स्कूल (School) के लिए अधिक सफर नहीं कर पायेगा और उसका अधिकतर समय स्कूल आने-जानें में निकल जाएगा। इससे वो बहुत जल्दी थक भी जाएगा। इसलिए, अपने बच्चे के लिए स्कूल चुनते हुए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए (Things to keep in mind while choosing a school for your child) में यह बहुत जरूरी है कि यह स्कूल घर के आसपास ही हो। शिक्षक विशेषज्ञता बच्चे के लिए सही स्कूल (Right school for child) को चुनते हुए यह भी ध्यान रखना चाहिए कि टीचर पूरी तरह से अपने कार्य में निपुण हों। क्योंकि शिक्षक बच्चे के ऐकडेमिक के साथ-साथ सोशल व इमोशनल डेवलपमेंट में भी मदद करते हैं। एक अच्छा टीचर वो है, जो बच्चों को सही और मजेदार तरीके से पढ़िए। इसलिए, ध्यान रखें कि टीचर एकेडेमिक रूप से योग्य हो और बच्चों के साथ भी उनका व्यवहार अच्छा हो। इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा ध्यान रहे कि आपके बच्चे के स्कूल (School) में वेंटिलेशन और लाइट पर्याप्त हो। इसके साथ ही वहां अच्छी कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, आधुनिक प्रयोगशालाएं, खेल का मैदान आदि हों। इससे बच्चे को हर गतिविधि में भाग लेने की प्रेरणा मिलेगी। यही नहीं बच्चों की सुरक्षा का भी इसमें सही इंतजाम होना चाहिए जैसे सीसीटीवी (CCTV) सर्विलांस, सुरक्षा गार्ड, आग बुझाने के उपकरण आदि। एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज  बच्चों के पूरे विकास के लिए एक्स्ट्रा-करीकुलर एक्टिविटीज बहुत जरूरी हैं। म्यूजिक, डांस, प्ले, गेम्स आदि एक्टिविटीज बच्चों की इंटेलिजेंस और क्रिएटिविटी को बढ़ावा देती हैं। इसलिए ऐसे स्कूल (School) को चुनना चाहिए जिनमें इन एक्टिविटीज को बढ़ावा दिया जाता है और बच्चों को इनके लिए प्रेरित किया जाता है।  इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक करिकुलम और एकेडेमिक्स  स्कूल (School) के करिकुलम और एकेडेमिक्स और एजुकेशनल लेवल आदि पर भी ध्यान दें। इससे बच्चों को सही ज्ञान और स्किल्स मिलते हैं। बच्चों को पढ़ने के तरीके अच्छे होना बहुत जरूरी है। स्कूल की एजुकेशनल रेपुटेशन भी महत्वपूर्ण है, जो बच्चों के भविष्य के अवसरों को निर्धारित करती है। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Things to keep in mind while choosing a school for your child #Thingstokeepinmindwhilechoosingaschoolforyourchild #school #rightschoolforchild #rightschool

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Yoga for High BP

High Blood Pressure के लिए यह 4 योगासन, ब्लड सर्कुलेशन और हार्ट हेल्थ को बनाएंगे दुरुस्त

हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) यानी हायपरटेंशन (Hypertension) वो समस्या है, जिसमें रोगी का ब्लड प्रेशर सामान्य से अधिक होता है। अगर इसे सही समय पर कंट्रोल न किया जाए, तो यह गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है जैसे हार्ट अटैक या स्ट्रोक आदि। हाई ब्लड प्रेशर  (High blood pressure) को कंट्रोल करने के लिए हेल्दी लाइफस्टाइल का पालन करना बहुत आवश्यक है। नियमित रूप से योगा करना न केवल हमारे बॉडी बल्कि माइंड हेल्थ के लिए भी फायदेमंद पाया गया है। ऐसा भी पाया गया है कि योगा करने से ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है। आइए हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) के बारे में। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana For High Blood Pressure) आर्ट ऑफ लिविंग के अनुसार हायपरटेंशन (Hypertension) को बेहद खतरनाक माना जाता है क्योंकि अधिकतर रोगियों में इसका कोई लक्षण नजर नहीं आता। इसके निदान के लिए नियमित चेकअप बहुत जरूरी है। हाई ब्लड प्रेशर के लिए योगासन (Yogasana for high blood pressure) इस प्रकार हैं:  उत्कटासन (Utkatasana) उत्कटासन में करने वाले की पोजीशन चेयर जैसी लगती है, इसलिए इसे चेयर पोज भी कहा जाता है। इस आसन को करने से कई मसल ग्रुप्स की एक्सरसाइज होती है और हाइपरटेंशन को मैनेज करने में मदद मिलती है। इस करने से ब्लड फ्लो बढ़ता है, जिससे ब्लड प्रेशर को रेगुलर रहने में मदद मिलती है। यही नहीं, इससे हार्ट रेट बढ़ता है और स्ट्रेस भी कम होता है। यानी, उत्कटासन को करने से हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) को कंट्रोल करने में आसानी होती है। भद्रासन (Bhadrasana) भद्रासन यानी बटरफ्लाई पोज करने से हाई ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है क्योंकि इसे करने से स्ट्रेस कम होता है और शांत रहने में आसानी होती है। स्ट्रेस को हाई ब्लड प्रेशर (High blood pressure) के रिस्क फैक्टर्स में से एक माना जाता है। भद्रासन करना भी बेहद सरल है। इसके लिए आपको इस तरह से योगा मैट पर बैठना है कि आपके पैरों के तलवे साथ जुड़े हों। अब अपने पैरों को हाथों को पकड़ें और अपने घुटनों को ऊपर-नीचे करें। भद्रासन को करते हुए अपनी पीठ सीधी होनी चाहिए। ताड़ासन (Tadasana) हाइपरटेंशन का कारण कई चीजें हैं जैसे खराब लाइफस्टाइल, जेनेटिक्स और अंडरलायिंग हेल्थ कंडीशंस आदि। ताड़ासन यानी माउंटेन पोज एक आसान योगासन (Yogasana) है, जो हायपरटेंशन (Hypertension) को कम करने में मदद करता है। हालांकि यह आसन सीधे तौर पर ब्लड प्रेशर को कम नहीं करता है लेकिन ताड़ासन करने से स्ट्रेस कम होती है, शांति मिलती है और संपूर्ण कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है जिससे ब्लड प्रेशर को मैनेज करने में मदद मिलती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक त्रिकोणासन (Trikonasana) त्रिकोणासन यानी ट्राइएंगल पोज करने से ब्लड सर्कुलेशन सुधरती है, स्ट्रेस कम होती है और रिलेक्स रहने में मदद मिलती है। यानी, हायपरटेंशन (Hypertension) की समस्या से राहत मिल सकती है। लेकिन, इस बात का ध्यान रखें कि इस आसन को सही से करना बेहद जरूरी है। अगर आपको हाई ब्लड प्रेशर है,(High blood pressure) तो इस योगासन (Yogasana) को शुरू करने से पहले हेल्थ एक्सपर्ट और योग इंस्ट्रक्टर से बात करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi  #highbloodpressure #yogasanaforhighbloodpressure #yogaasana, #hypertension #Trikonasana #Tadasana #Bhadrasana #Utkatasana

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Benefits of Vrikshasana

Vrikshasana: तनाव से रहना चाहते हैं दूर तो कर सकते हैं वृक्षासन

टेँशन यानी तनाव ऐसी समस्या है, जो आजकल सामान्य होती जा रही है खासतौर पर युवाओं में। भविष्य में तनाव बड़ी परेशानी का कारण बन सकता है और इससे रोजाना का जीवन भी प्रभावित होता है। योगा को तनाव से छुटकारा पाने का बेहतरीन तरीका माना जाता है। हालांकि, माइंड ही नहीं बल्कि बॉडी के लिए भी योगा को कई तरह से फायदेमंद माना गया है। ऐसे कई योगासन (Yogasana) हैं, जिनका अभ्यास करना सम्पूर्ण स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है। इन्हीं में से एक है वृक्षासन (Vrikshasana)। वृक्षासन (Vrikshasana) का दूसरा नाम ट्री पोज भी है। आइए जानें कि वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं? इसके साथ ही इसे करने के तरीके के बारे में भी जानें। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) आर्ट ऑफ लिविंग (Art of living) के अनुसार वृक्षासन (Vrikshasana) एक संस्कृत शब्द है जिसमें वृक्ष का अर्थ है पेड़ और आसन का अर्थ है पोजीशन यानी इस योगासन (Yogasana) में करने वाले की पोजीशन वृक्ष की तरह लगती है। इसके फायदे इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: World Environment Day 2025: प्रकृति से जुड़ने के लिए प्लास्टिक की जगह रिसाइकिल प्रोडक्ट का करें इस्तेमाल वृक्षासन (Vrikshasana) कैसे करें? इस योगासन (Yogasana)  को करना बेहद आसान है। वृक्षासन के फायदे (Benefits of Vrikshasana) क्या हैं, यह आप जान ही गए होंगे। इस आसन को इस तरह से किया जा सकता है: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Vrikshasana  #BenefitsofVrikshasana #Vrikshasana #Yogasana #Asanas #TreePose

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Tear Test Kit

Tear Test Kit से डिटेक्ट किए जा सकते हैं कई गंभीर बीमारी, जानिए क्या कहती है नई स्टडी?

आंसू (Tears) यानी टीयर्स हमारी फीलिंग्स को व्यक्त करने का बेहतरीन तरीका है। हर परिस्थिति में यह आंखों से खुद ही बाहर आ जाते हैं। कई बार बिना किसी कारण भी हमारी आंखों में आंसू आ जाते हैं। हमारे टीयर्स का स्ट्रक्चर स्लाइवा के जैसा ही होता है और यह पानी से बने होते हैं। हालांकि इनमें नमक, फैटी ऑयल्स और कई विभिन्न प्रोटीन्स होते हैं। इनमें सोडियम, क्लोराइड. बाइकार्बोनेट, पोटैशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट भी होते हैं। यही नहीं , इनमें कम मात्रा में मैग्नीशियम और कैल्शियम भी पाएं जाते हैं। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आंसू (Tears) केवल हमारे इमोशंस ही नहीं बल्कि कई बीमारियों को भी डिटेक्ट कर सकते हैं? आइए जानें आंसू (और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases) का पता लगाने वाली टियर टेस्ट किट (Tear test kit) के बारे में। आंसू और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार हमारे आंसू आंखों को प्रोटेक्ट करने, इर्रिटेन्ट को साफ करने, भावनाओं को शांत करने का काम करते हैं। लेकिन, हाल ही में हुई एक स्टडी के अनुसार आंसू (Tears) केवल हमारे इमोशंस को ही नहीं दर्शाते बल्कि इससे बीमारियों का पता भी चल सकता है। यानी, आंसू और बीमारियों के बीच कनेक्शन (Connection between tears and diseases) है। इसके लिए टियर टेस्ट किट (Tear test kit) को डेवलप किया जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि टियर टेस्ट किट (Tear test kit) से निम्नलिखित बीमारियों का पता चल सकता है: इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इस टियर टेस्ट किट में टेस्ट के लिए आंसू (Tears) को इकठ्ठा करने के लिए एक छोटे स्टाइलर पेपर का इस्तेमाल किया जाता है। इसका परिणाम लगभग 90 मिनटों में आ जाएगा। ऐसी उम्मीद है कि यह टियर टेस्ट किट (Tear test kit) 2026 तक इस्तेमाल के लिए बाजार में उपलब्ध होगी। यह रोगों को पहचाने का सस्ता तरीका कई लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित होगा। यही नहीं, इससे स्वास्थ्य सुधार में भी मदद मिलेगी। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Tear Test Kit #connectionbetweentearsanddiseases #testkit #tears #dryeyes

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Superfoods for women

Superfoods For Women: हेल्दी, फिट और यंग रहने के लिए इन चीजों को करें अपने आहार में शामिल

यह तो हम सभी जानते हैं कि लम्बी और खुशहाल जीवन जीने के लिए जरूरी है हेल्दी रहना। हेल्दी रहने के लिए कोई खास मेहनत करने की आवश्यकता होती। सिर्फ अपनी जीवनशैली में हेल्दी बदलाव करना स्वस्थ रहने में मदद कर सकता है। इनमे सबसे जरूरी है सही डाइट। हेल्दी डाइट लेना हर किसी के लिए जरूरी है चाहे वो पुरुष हो या महिला। कुछ खास फूड महिलाओं को प्रभावित करने वाली समस्याओं से बचाने में सहायता करते हैं। यह सुपर फूड न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होते हैं जो शरीर की सुरक्षा के साथ ही उस सही से कार्य करने में मदद करते हैं। आइए जानें महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) के बारे में और करें इन्हें अपने आहार में शामिल। महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women): जानें कौन सी हैं यह चीजें? एक्सपर्ट्स की मानें तो हर दिन अलग-अलग पौष्टिक तत्वों का सेवन करना अच्छी सेहत को सपोर्ट करता है। महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) इस प्रकार हैं: बेरीज (Berries)बेरीज जैसे ब्लूबेरी, स्ट्रॉबेरी महिलाओं के लिए सुपरफूड (Superfood) है क्योंकि इसमें बहुत से पावरफूल ओक्सिडेंट्स होते हैं जैसे विटामिन सी आदि। इनमें एंटी-कैंसर गुण भी होते हैं जिससे महिलाओं में कैंसर (Cancer) का जोखिम कम हो सकता है। यह बेरीज स्किन को यंग रखने में मदद करती हैं। इसके साथ ही इनसे यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शंस से बचाव में भी मदद मिलती है। अखरोट (Walnut)महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) में अखरोट (Walnut) एक ऐसा मेवा है जिसमें सबसे अधिक पौष्टिक तत्व होते हैं। इससे महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल लेवल कम करने और स्लीप क्वालिटी बढ़ाने में मदद मिलती है। इसके साथ ही कैंसर जैसी भयानक बीमारियों को बचाने में भी अखरोट (Walnut) को फायदेमंद माना गया है। बीन्स (Beans)बीन्स और फलियां कैल्शियम और प्रोटीन (Protein) से भरपूर होती हैं जैसे राजमा। यह दोनों मिनरल्स महिलाओं की सामान्य हेल्थ के लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। यही नहीं, इनमें रेसिस्टेंट स्टार्च होते हैं जो ब्लड शुगर रेगुलेशन और फैट बर्निंग में भी मदद कर सकते हैं। डार्क चॉकलेट (Dark chocolate)महिलाओं के लिए सुपरफूड्स (Superfoods for women) में डार्क चॉकलेट (Dark chocolate) भी शामिल है। इस सुपरफूड (Superfood) में पालीफेनोल्स होते हैं, जो टीऑक्सीडेंट है। यह न्यूरोलॉजिकल सिस्टम में ब्लड फ्लो को बढ़ाकर याददाश्त को सुधारने में मदद करते हैं। यही नहीं, डार्क चॉकलेट (Dark chocolate) से हार्ट डिजीज और कैंसर का जोखिम भी कम होता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक क्विनोआ (Quinoa)अगर बात की जाए सुपरफूड्स की तो, क्विनोआ (Quinoa) भी एक बेहतरीन आहार हैं जिसके कई हेल्थ बेनिफिट्स हैं। यह ग्लूटेनफ्री होता है। इसके साथ ही यह न्यूट्रिएंट्स से भरपूर होता है जैसे विटामिन बी, इ, कैल्शियम, मैग्नीशियम, पोटैशियम और फॉस्फोरस आदि। क्विनोआ (Quinoa) में फाइबर भी होता है जिससे वजन कम होने और पेट संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिलती है। बालों और स्किन के लिए यह सुपरफूड (Superfood) बेहतरीन है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Superfoods for women Superfoodsforwomen #superfoods #quinoa #walnuts #darkchocolate

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Acquired Immunity

क्या है एक्वायर्ड इम्युनिटी? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण COVID 19 खतरा होता है कम?

पिछले कुछ दिनों से भारत में कोरोना यानी कोविड-19 (covid-19) के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है। अब तक इसके लगभग 3400 मामले सामने आ चुके हैं। हालांकि, यह एक चिंता का विषय है लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक लोगों को इसको लेकर अधिक परेशान होने की जरूरत नहीं है। लोगों को सावधानियां बरतने की सलाह अवश्य दी जा रही है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक भारत के लोगों को कोविड-19  (covid-19) से डरने की जरूरत नहीं है और इसका कारण है एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) यानी विकसित इम्युनिटी। आइए जानें कि क्यों लोगों को एक्वायर्ड इम्युनिटी के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? यह भी जानें कि एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) किसे कहा जाता है और इम्युनिटी (Immunity) को कैसे बढ़ाएं? क्या एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के कारण कोरोना से डरने की जरूरत नहीं है? एक्सपर्ट्स के मुताबिक अभी परेशानी का कारण हैं कोविड-19 (covid-19)  के ओमिक्रॉन स्ट्रेन के सबवेरिएंट्स, जिनमें अभी भी परिवर्तन हो सकते हैं। पहले हुए वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज की वजह से लोगों में इम्युनिटी (Immunity) में वृद्धि हुई है। इसके कारण इसके लक्षण हल्के हो सकते हैं जैसे खांसी, बॉडी पेन, सिरदर्द आदि। लेकिन,कोरोना में अभी भी सावधानियां बरतना जरूरी है, जैसे जब सर्दी, जुकाम या बुखार हो, तो मास्क पहनें। उन लोगों को अधिक सावधानियां बरतने की जरूरत है, जिन्हें डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर आदि समस्याएं हैं। इसके साथ ही बुजुर्गों को भी सावधान रहने की आवश्यकता है। अब जानते हैं एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के बारे में।  एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) क्या है? एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) इम्यून सिस्टम की पिछले इंफेक्शन (Infection) और वैक्सीनेशन के माध्यम से रोगाणुओं को पहचानने और रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी है। इस प्रकार की इम्युनिटी (Immunity) बी और टी लिम्फोसाइट्स द्वारा संचालित की जाती है, जो इम्यून सिस्टम का हिस्सा हैं। इन सेल्स में पुराने इंफेक्शंस को याद रखने और प्रभावी ढंग से रिस्पॉन्ड करने की एबिलिटी होती है। यह इम्युनिटी जन्मजात इम्युनिटी से पूरी तरह से विपरीत है, क्योंकि जन्मजात इम्युनिटी खास रोगाणुओं से नहीं लड़ पाती है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक इम्युनिटी को कैसे बढ़ाया जा सकता है? हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार एक्वायर्ड इम्युनिटी (Acquired Immunity) के साथ ही इम्युनिटी (Immunity) को बढ़ाने के तरीकों के बारे में जानकारी होना भी आवश्यक है। जरूरी वेक्सीनेशन्स को लेना इम्यून सिस्टम को मजबूत करने का सबसे बेहतरीन तरीका है। उम्र, काम, जगह के अनुसार सही वैक्सीन्स लगवाएं। अधिकतर वयस्कों को निम्नलिखित समस्याओं के लिए वैक्सीनेशन का इस्तेमाल करना चाहिए: इसके लिए आप अपने डॉक्टर की सलाह ले सकते हैं। इसके साथ ही बैक्टीरिया के कारण होने वाली समस्याओं में एंटीबायोटिक्स लेने से भी इम्युनिटी (Immunity) बढ़ती है। यदि डॉक्टर आपको वायरल इंफेक्शन (Viral Infection) से लड़ने के लिए एंटीबायोटिक्स लेने की सलाह देते हैं, तो यह भी महत्वपूर्ण है कि आपको एंटीबायोटिक्स का पूरा कोर्स करना चाहिए। इसके साथ ही बैक्टीरियल इंफेक्शन की स्थिति में भी डॉक्टर के बताएं अनुसार इसका पूरा कोर्स करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Acquired Immunity #AcquiredImmunity #Immunity #Immunesystem #corona #covid-19

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Bubble tea benefits

Boba Tea: क्या है बोबा चाय? क्या सेहत के लिए फायदेमंद है ये चाय?

इनदिनों एक नया पेय पदार्थ तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, जिसका नाम बोबा टी (Boba Tea) यानी बोबा चाय है। इसे बबल टी (Bubble Tea) के नाम से भी जाना जाता है। बोबा टी का चलन ताइवान से शुरू हुआ और अब यह एशिया, अमेरिका, यूरोप और भारत जैसे देशों में भी काफी प्रसिद्ध हो चुका है। आज हम रिसर्च के अनुसार बोबा टी (Boba Tea) क्या है, इसके फायदे (Boba Tea Benefits) क्या हैं और इसके संभावित दुष्प्रभाव क्या हो सकते हैं यह समझने कोशिश करेंगे। बोबा टी क्या है? बोबा टी एक ठंडा, मीठा पेय है जिसे चाय, दूध, शक्कर और टैपिओका पर्ल्स (Boba pearls) से बनाया जाता है। टैपिओका पर्ल्स काले रंग की छोटी-छोटी गोलियां होती हैं जो टैपिओका स्टार्च से बनता है। इस पेय पदार्थ चाय की तरह होता है लेकिन इसमें चबाने के लिए टैपिओका पर्ल्स मिलता है। बोबा टी या बबल टी अलग-अलग तरह के होते हैं। जैसे:  बोबा टी के फायदे (Benefits of Boba Tea) क्या हैं?  अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई फायदे हैं जैसे: 1. एनर्जी बूस्टर बोबा टी में चाय और शक्कर की मौजूदगी से शरीर को त्वरित ऊर्जा मिलती है। इसमें मौजूद कैफीन मानसिक सतर्कता को भी बढ़ाने में सहायक माना गया है। 2. सकारात्मक मूड में मददगार NCBI के रिसर्च के अनुसार चाय में मौजूद एल-थेनाइन (L-theanine) और कैफीन होने की वजह से मूड अच्छा रहता है और तनाव कम हो सकता है।  3. एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर यदि बोबा टी को ग्रीन टी (Green Tea) या ब्लैक टी (Black Tea) के साथ बनाया जाए, तो उसमें मौजूद कैटेचिन (catechins) और पॉलीफेनॉल्स शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जो उम्र बढ़ने और कई बीमारियों से जुड़े होते हैं। 4. व्यक्तिगत पसंद के अनुसार अनुकूलन यह पेय कई प्रकार के स्वादों, मिल्क ऑप्शन जैसे सोया, बादाम, ओट्स और स्वीटनर के ऑप्शन के साथ मिलाकर तैयार किया जा सकता है। बोबा टी के संभावित साइडइफेक्ट्स अलग-अलग रिसर्च के अनुसार बोबा टी के कई साइडइफेक्ट्स हो सकते हैं। जैसे: 1. शक्कर की ज्यादा मात्रा बोबा टी में प्रयुक्त फ्लेवर सिरप और टैपिओका पर्ल्स में काफी मात्रा में शक्कर होती है। Harvard T.H. Chan School of Public Health के अनुसार अत्यधिक चीनी का सेवन मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज़ और हृदय रोगों का कारण बन सकता है। 2. फाइबर की कमी टैपिओका पर्ल्स में फाइबर नहीं होता और यह मुख्यतः स्टार्च से बना होता है। इसके अत्यधिक सेवन से पेट में भारीपन या कब्ज की समस्या हो सकती है। 3. कैलोरीज का उच्च स्तर एक सामान्य बोबा टी कप में लगभग 300-500 कैलोरी हो सकती हैं। यह किसी एक समय के भोजन के बराबर हो सकता है। वजन नियंत्रित करने वालों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है। इसे भी पढ़ें: सत्तू शरबत: शरीर को मजबूत और स्वस्थ बनाने में फायदेमंद है यह देसी टॉनिक 4. कैफीन की मात्रा यदि कोई व्यक्ति कैफीन के प्रति संवेदनशील है, तो बोबा टी में मौजूद चाय कैफीन के कारण अनिद्रा, घबराहट या हृदय गति में तेजी जैसे लक्षण उत्पन्न कर सकती है। बोबा टी (Boba Tea) एक आधुनिक पेय पदार्थ है जो स्वाद और अनुभव दोनों के स्तर पर लोगों को आकर्षित करता है। यदि इसे संयम में और स्वस्थ विकल्पों (कम चीनी, लो-फैट दूध) के साथ लिया जाए तो यह सुरक्षित और आनंददायक हो सकता है। लेकिन इसका अत्यधिक सेवन न केवल वजन बढ़ा (Weight Gain) सकता है, बल्कि दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं भी उत्पन्न कर सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह है कि बोबा टी को कभी-कभी एक ट्रीट के रूप में लें, न कि नियमित पेय के रूप में।  नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Boba Tea #BobaTea #BubbleTea #HealthyDrinks #TapiocaPearls #MilkTea #TeaLovers #NutritionFacts #IsBobaHealthy

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Monsoon and Respiratory Infections

मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन में क्या है कनेक्शन? जानिए इसके कारणों और बचाव के तरीके

भयंकर गर्मी के मौसम के बाद मानसून (Monsoon) का आना राहत पहुंचाता है। लेकिन, मानसून (Monsoon) में कई हेल्थ प्रॉब्लम्स का रिस्क बढ़ जाता है। इस दौरान बढ़ती ह्यूमिडिटी, तापमान और नमी वाले वातावरण में वायरस व बैक्टीरिया के बढ़ने के कारण कई समस्याएं हो सकती हैं। इन्हीं में से एक है रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections)। अगर बात की जाए रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) की, तो इसे रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इंफेक्शन भी कहा जाता है। यह वो समस्या है जिससे रेस्पिरेटरी सिस्टम प्रभावित होता है। इस सिस्टम में नाक, गला, एयरवेज और फेफड़े आदि शामिल हैं। इस समस्या के कारण इम्यूनिटी कमजोर होती है जिससे सर्दी-जुकाम, खांसी और अन्य समस्याओं का जोखिम बढ़ता है। जानिए मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections) के बारे में विस्तार से।  मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): क्या हैं मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन के कारण? नॉर्थवेस्टर्न मेडिसिन (Northwestern Medicine) के अनुसार रेस्पिरेटरी इंफेक्शन किसी को भी हो सकता है लेकिन स्मोकर्स, छोटे बच्चों, बुजुर्गों, रेस्पिरेटरी डिजीज से पीड़ित और कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में इसकी संभावना अधिक रहती है। मानसून (Monsoon) में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Respiratory Infections) के कारण इस प्रकार हैं:  इसे भी पढ़ें: COVID-19 और Dengue हैं दो अलग-अलग बीमारियां, इनके बीच के अंतर को समझें और रहें सुरक्षित मानसून और रेस्पिरेटरी इंफेक्शन (Monsoon and Respiratory Infections): कैसे बचें इस समस्या से? मानसून में रेस्पिरेटरी इंफेक्शन से बचाव के लिए कुछ चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए, जैसे: नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi Monsoon and Respiratory Infections #MonsoonandRespiratoryInfections #Monsoon #RespiratoryInfections #infection

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COVID-19 and dengue

COVID-19 और Dengue हैं दो अलग-अलग बीमारियां, इनके बीच के अंतर को समझें और रहें सुरक्षित

एक बार फिर से कोरोना की दस्तक ने सबको चिंता में ड़ाल दिया है। अब तक देश में इसके एक हजार से भी अधिक मामले सामने आ चुके हैं। इस महामारी ने बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित किया है। ऐसे ही मच्छरों के कारण होने वाले रोग डेंगू (Dengue) के भी हर साल कई केस आते हैं। ये दोनों ऐसे इंफेक्शंस हैं, जो वायरस के कारण होते हैं। इन दोनों स्थितियों में रोगी बुखार और शरीर में दर्द जैसे लक्षणों का अनुभव करता है। यही कारण है कि कई बार इन दोनों के बीच कई बार अंतर समझने में समस्या हो सकती है। लेकिन, कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) समझना बहुत जरूरी है, ताकि सही समस्या का निदान हो सके और सही उपचार संभव हो। आइए जानें कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) के बारे में। कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue): क्या हैं दोनों के लक्षण?  सीडीसी (CDC) के अनुसार डेंगू (Dengue) को एक व्यक्ति से दूसरे तक फैलाने का काम करता है संक्रमित मछर। यह मछर कभी दिन या रात को कभी भी काट सकता है। ऐसे में इससे बचना इस रोग से बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है मच्छरों से बचाव। कोविड-19 (COVID-19) और डेंगू (Dengue) की कॉम्प्लीकेशन्स से बचाव के लिए जरूरी है कोविड-19 और डेंगू के बीच में अंतर (Difference between COVID-19 and dengue) को जानना। इसके लिए सबसे पहले इनके लक्षणों के बीच के अंतर को जान लेते हैं। कोविड-19 के लक्षण कोविड-19 (COVID-19) के लक्षण माइल्ड से लेकर सीरियस तक हो सकते हैं। इसके कुछ लक्षण इस प्रकार हैं:  कुछ रोगियों में ऊपर दिए गए लक्षणों के अलावा अन्य लक्षण भी नजर आ सकते हैं। लेकिन, इसके गंभीर लक्षण नजर आने पर तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है, जो इस प्रकार हैं: डेंगू के लक्षण डेंगू (Dengue) के सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:  अगर डेंगू (Dengue) के निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव किया जाता है, तो तुरंत मेडिकल हेल्प लेना जरूरी है: इसे भी पढ़ें: JN.1 variant of interest: WHO ने क्यों कहा JN.1 को वेरिएंट ऑफ इंट्रेस्ट? जानिए कोरोना वायरस JN.1 वेरिएंट के लक्षण और बचाव क्या हैं इनके बीच में अन्य अंतर? नोट:– यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi COVID 19 and Dengue #DifferencebetweenCOVID19anddengue  #COVID-19  #dengue #COVID19anddengue

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Homemade Healthy Ice cream

Homemade Healthy Ice cream: न्यूट्रिशन से भरपूर आइसक्रीम बनाने का यह है आसान तरीका

समर सीजन आते ही जहां एक ओर गर्मी से हालत खराब होती है, वहीं दूसरी ओर गर्मी से बचने के लिए कई टेस्टी तरीके भी अपनाए जाते हैं। आइसक्रीम (Ice cream) एक ऐसी चीज है, जो बच्चों को तो पसंद आती ही हैं, लेकिन बड़े लोग भी इसे बड़े चाव से खाते हैं। गर्मी में आइसक्रीम खाने का मजा ही अलग है। क्या आप जानते हैं कि बाजार में मिलने वाली अधिकतर आइसक्रीम्स, आइसक्रीम (Ice cream) नहीं बल्कि फ्रोजन डेजर्ट होता है? इसमें प्रिजर्वेटिव्स ओर चीनी भरपूर मात्रा में होते हैं। संक्षेप में कहा जाए तो इन्हें खाना हमारी हेल्थ (Health) के लिए नुकसानदायक हो सकता है। लेकिन, आप घर पर भी आसानी से हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream) बना सकते हैं। आइए जानें होममेड हेल्दी आइसक्रीम (Homemade healthy ice cream) के बारे में।  हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream): इस तरह से बनाएं इन गर्मियों में अगर आपको लगता है कि होममेड आइसक्रीम (Ice cream) हेल्दी नहीं होगी या इनसे आपको बाजार वाला स्वाद नहीं मिलेगा तो आप बिलकुल गलत हैं। आप बिना चीनी और हानिकारक पदार्थों के भी आसानी से आइसक्रीम बना सकते हैं। इस तरह से बना सकते हैं आप होममेड हेल्दी आइसक्रीम (Homemade healthy ice cream)।  सामग्री विधि:  इसे भी पढ़ें: गर्मी के मौसम में अपना रखें खास ख्याल और बरते यह 6 सावधानियां आप इसे तरह से स्ट्राबेरी, मेंगो, कीवी आदि की हेल्दी आइसक्रीम (Healthy ice cream) बना सकते हैं। इनमें बस आप ड्राई चॉकलेट की जगह फ्रेश फलों का इस्तेमाल करें। यह आइसक्रीम (Ice cream) न केवल हेल्दी है बल्कि टेस्ट में भी बेहतरीन होगी। आपके बच्चों को यह अवश्य पसंद आएगी। अगर आप इस आइसक्रीम को और हेल्दी बनाना चाहते हैं तो इसमें सामान्य दूध की जगह कोकोनट मिल्क का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। यह शुगर फ्री आइसक्रीम (Ice cream) डायबिटीज के रोगियों के सेवन के लिए भी अच्छी है। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए कृपया गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi Healthy ice cream #Homemadehealthyicecream #healthyicecream #icecream #Homemadeicecream

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