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कर्नाटक में दशहरा जुलूस के दौरान बेकाबू हुआ हाथी, सड़कों पर मची अफरा-तफरी; जंबू सवारी बीच में रोकी गई

शिवमोग्गा, 23 अक्टूबर 2026: कर्नाटक के शिवमोग्गा में दशहरा जुलूस के दौरान सोमन्ना नाम का हाथी अचानक बेकाबू होकर दौड़ पड़ा, जिससे सड़क पर अफरा-तफरी मच गई। हाथी की पीठ पर देवी चामुंडेश्वरी की प्रतिमा के साथ करीब 650 किलो का चांदी का हौदा रखा था, जो भागते समय नीचे गिर गया। राहत की बात यह रही कि किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। भीड़ और तेज आवाज से घबराया हाथी रिपोर्ट्स के मुताबिक 35 वर्षीय सोमन्ना को भारी भीड़ और तेज आवाजों से घबराहट हुई, जिसके बाद उसने नियंत्रण खो दिया और पीछे की ओर दौड़ने लगा। लोगों को सुरक्षित जगह की ओर भागना पड़ा और पुलिस को crowd control में काफी मशक्कत करनी पड़ी। Silver howdah गिरकर क्षतिग्रस्त हाथी के अचानक भागने से उसकी पीठ पर रखा ceremonial silver howdah नीचे गिर गया और क्षतिग्रस्त हो गया। इस दौरान एक car और कुछ two-wheelers को भी नुकसान पहुंचा। करीब 30 मिनट बाद काबू Forest और veterinary officials ने sedative देकर Somanna को शांत किया। करीब 30 मिनट बाद उसे Kote Seetharamanjaneya Temple के पास काबू में कर सुरक्षित रूप से बांधा गया। पहली बार Somanna को मिली थी बड़ी जिम्मेदारी Somanna को regular lead elephant Sagar की leg injury के बाद last-minute replacement के तौर पर शामिल किया गया था। यह पहली बार था जब वह procession में goddess Chamundeshwari की idol वाला howdah लेकर चल रहा था। छह सोने की चूड़ियां भी गायब घटना के बाद देवी की प्रतिमा को पहनाई गई 8 gold bangles में से 6 गायब पाई गईं। Police ने कहा है कि इस मामले की भी जांच की जाएगी। अगले साल training होगी अनिवार्य Karnataka minister Ramalinga Reddy ने निर्देश दिया है कि अगले साल से Dasara procession में शामिल elephants को कम से कम 20 दिन से एक महीने तक training दी जाए। जय राष्ट्र न्यूज़

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मणिपुर में तीन नागरिकों की हत्या के विरोध में Meira Paibi की मशाल रैली, न्याय और सुरक्षा की मांग

इंफाल, 23 अक्टूबर 2026: मणिपुर में Sunulok Hill/Khongbal area में तीन Meitei civilians की हत्या के विरोध में Meira Paibi कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने इंफाल में बड़ी मशाल रैली निकाली। प्रदर्शनकारियों ने हत्याओं की निंदा करते हुए पीड़ित परिवारों को न्याय, नागरिकों की सुरक्षा और सरकार से जवाबदेही की मांग की। कहां निकाली गई मशाल रैली? रैली Keikon village से शुरू होकर Luwangsangbam Sports Complex की ओर NH-2 पर आगे बढ़ी। बड़ी संख्या में महिलाओं और स्थानीय लोगों ने मशालें लेकर मार्च किया और हालिया हिंसा के खिलाफ नारे लगाए। किस घटना के खिलाफ प्रदर्शन? 19 अक्टूबर को Imphal East और Kangpokpi border area के पास Sunulok/Uyok Ching क्षेत्र में तीन civilians की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और तीन अन्य घायल हुए थे। पुलिस और स्थानीय reports में हमलावरों को armed militants/miscreants बताया गया है; हमले की जिम्मेदारी और पूरी परिस्थितियों की जांच जारी है। Meira Paibi ने क्या मांग की? Meira Paibi groups ने कहा कि civilians की सुरक्षा सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। Protesters ने Chief Minister Yumnam Khemchand Singh से जवाबदेही की मांग की और कुछ प्रदर्शनकारियों ने उनके इस्तीफे की भी मांग की। 48 घंटे का shutdown भी रहा तीन हत्याओं के बाद Imphal Valley में 48-hour shutdown बुलाया गया था। इस दौरान markets और shops बड़े पैमाने पर बंद रहे और कई मुख्य सड़कों पर traffic प्रभावित हुआ। अलग-अलग civil society organisations और Meira Paibi groups ने shutdown का समर्थन किया। CM ने security review किया घटना के बाद मुख्यमंत्री ने घायलों से मुलाकात की और senior police, Army तथा paramilitary officials के साथ security meeting की। उन्होंने vulnerable areas में security मजबूत करने के निर्देश दिए और घायलों के medical expenses सरकार द्वारा उठाने की बात कही। मणिपुर में फिर बढ़ी चिंता यह घटना राज्य में ethnic violence के दोबारा बढ़ने की आशंका को गहरा करती है। Meira Paibi की मशाल रैली इसी चिंता और civilian safety को लेकर बढ़ते public anger का संकेत है। जय राष्ट्र न्यूज़

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Rajasthan पंचायत चुनाव: पहले चरण में 16 जिला परिषदों और 104 पंचायत समितियों के लिए मतदान जारी

जयपुर, 22 अक्टूबर 2026: राजस्थान में Panchayati Raj Elections के पहले चरण की voting आज सुबह 7 बजे से शुरू हो गई है। इस phase में 16 Zila Parishads और 104 Panchayat Samitis के लिए मतदान हो रहा है। कुल 85.07 लाख से ज्यादा voters अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर सकते हैं। 6,926 उम्मीदवार मैदान में पहले चरण में कुल 6,926 candidates चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें 5,233 उम्मीदवार Panchayat Samiti seats के लिए और 1,693 उम्मीदवार Zila Parishad membership के लिए मैदान में हैं। लगभग 9,886 polling booths बनाए गए State Election Commission ने इस phase के लिए 9,886 polling booths बनाए हैं। Voting शाम 6 बजे तक चलेगी। हर polling station पर दो EVMs रखी गई हैं—एक Panchayat Samiti और दूसरी Zila Parishad election के लिए। 85 लाख से ज्यादा voters पहले चरण में 85,07,306 voters eligible हैं। इनमें करीब 43.86 लाख पुरुष और 41.20 लाख महिला मतदाता शामिल हैं। BJP-Congress के बीच मुख्य मुकाबला राज्य में मुख्य मुकाबला BJP और Congress के बीच माना जा रहा है। Tribal areas में Bharat Adivasi Party (BAP) भी प्रभावशाली है, जबकि RLP और independent candidates कई constituencies में चुनाव लड़ रहे हैं। चार चरणों में हो रहे Panchayat elections Rajasthan State Election Commission ने Panchayat elections को चार phases में कराने का कार्यक्रम घोषित किया है। पूरे चुनाव में 41 Zila Parishads, 457 Panchayat Samitis और 14,403 Gram Panchayats शामिल हैं। Counting कब होगी? Panchayat Samiti और Zila Parishad member elections के सभी phases की counting 20 नवंबर 2026 को सुबह 8 बजे से होगी। पहले phase के बाद 23 अक्टूबर को Panch और Sarpanch nominations तथा 24 अक्टूबर को उनके लिए voting होगी। Source – Times of India, Rajasthan Panchayat Election schedule जय राष्ट्र न्यूज़

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Punjab में Amit Shah ने जलाया ‘Chitta Ravan’, ड्रग्स के मुद्दे पर AAP सरकार पर साधा निशाना

लुधियाना, 21 अक्टूबर 2026: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने विजयादशमी के अवसर पर पंजाब के लुधियाना स्थित ऐतिहासिक दरेसी ग्राउंड (Daresi Ground) में प्रतीकात्मक ‘चिट्टा रावण’ का दहन किया। इस पुतले के जरिए पंजाब में नशे की समस्या के खिलाफ संदेश दिया गया। कार्यक्रम के दौरान शाह ने मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार पर नशे के नेटवर्क और नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए। क्या है ‘Chitta Ravan’? पंजाब में हेरोइन और उससे जुड़े नशीले पदार्थों के लिए आम बोलचाल में ‘चिट्टा’ शब्द का इस्तेमाल किया जाता है। नशे की समस्या को रावण के प्रतीक से जोड़ते हुए भाजपा ने ‘चिट्टा रावण’ का पुतला तैयार किया। विजयादशमी पर इसका दहन नशे के खिलाफ लड़ाई का प्रतीक बना। भाजपा ने इस आयोजन के माध्यम से पंजाब में ड्रग्स की समस्या को प्रमुखता से उठाया। Amit Shah ने AAP सरकार पर लगाए आरोप अमित शाह ने पंजाब में नशीले पदार्थों के नेटवर्क और नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि नशे से प्रभावित परिवारों और इसके खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों से मुलाकात के बाद उन्हें स्थिति की गंभीरता का अहसास हुआ। हालांकि, ये आरोप राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा हैं। राज्य में नशे की समस्या और उससे निपटने के लिए सरकारों की भूमिका को लेकर भाजपा और AAP के बीच मतभेद रहे हैं। Parvinder Singh Jhota हत्याकांड की जांच CBI को शाह के पंजाब दौरे से पहले मुख्यमंत्री भगवंत मान (Bhagwant Mann) ने नशे के खिलाफ सक्रिय रहे कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा (Parvinder Singh Jhota) की हत्या की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की घोषणा की थी। अमित शाह ने इस फैसले का स्वागत किया और दो अन्य नशे से जुड़े मौत के मामलों की जांच भी CBI से कराने की मांग उठाई। इस मामले ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। तीन पीड़ित परिवारों से मिले गृह मंत्री अपने दौरे के दौरान अमित शाह ने तीन परिवारों से मुलाकात की। इनमें मानसा में परविंदर सिंह झोटा का परिवार, संगरूर के तूर बंजारा गांव में गुलजार सिंह का परिवार और गुरदासपुर में बिक्रमजीत सिंह के परिजन शामिल थे। इन मुलाकातों के दौरान उन्होंने परिवारों की चिंताएं सुनीं और मामलों की निष्पक्ष तथा विस्तृत जांच की जरूरत पर जोर दिया। Ravneet Bittu के लिए पुरानी मुहिम की याद ‘चिट्टा रावण’ का दहन भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू (Ravneet Singh Bittu) के लिए भी पुराने राजनीतिक अभियान की याद लेकर आया। वर्ष 2016 में वह इसी तरह के अभियान से जुड़े थे, जब पंजाब में तत्कालीन शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन सरकार को निशाना बनाया गया था। अब भाजपा में रहते हुए इसी प्रतीक का इस्तेमाल आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ किया गया। इससे पंजाब में नशे का मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। AAP ने केंद्र पर उठाए सवाल नशे के मुद्दे पर पंजाब की AAP सरकार भी केंद्र सरकार पर पलटवार करती रही है। राज्य सरकार ने सीमा और बंदरगाहों के रास्ते नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने में केंद्र की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। इस तरह पंजाब में नशे की समस्या को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं। दोनों पक्षों के बीच यह मुद्दा कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी अहम हिस्सा बना हुआ है। Source: The Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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दशहरे पर कानपुर के रावण मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़, साल में सिर्फ एक दिन होते हैं दशानन के दर्शन

कानपुर, 21 अक्टूबर 2026: देशभर में जहां विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया जाता है, वहीं उत्तर प्रदेश के कानपुर में एक अनोखी परंपरा देखने को मिलती है। यहां शिवाला क्षेत्र स्थित कैलाश मंदिर परिसर का करीब 200 साल पुराना रावण मंदिर साल में केवल एक बार, विजयादशमी के दिन श्रद्धालुओं के लिए खोला जाता है। इस दिन बड़ी संख्या में लोग रावण के दर्शन करने और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। साल में सिर्फ एक दिन खुलते हैं मंदिर के कपाट कानपुर के इस अनोखे मंदिर के कपाट विजयादशमी की सुबह खोले जाते हैं और श्रद्धालु शाम तक दर्शन कर सकते हैं। इसके बाद मंदिर को फिर अगले वर्ष दशहरे तक बंद कर दिया जाता है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है। दशहरे के दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी रहती है और लोग विशेष पूजा में शामिल होकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं। पीले फूल और तेल का दीपक चढ़ाते हैं श्रद्धालु मंदिर में पूजा के दौरान श्रद्धालु रावण को पीले फूल, कड़वे तेल का दीपक, जनेऊ और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करते हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, रावण की पूजा करने से विद्या, बुद्धि और बल की प्राप्ति होती है। दर्शन के दौरान श्रद्धालु धार्मिक जयकारे लगाते हैं और पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा करते हैं। रावण को क्यों माना जाता है पूजनीय? रामायण में रावण को भगवान राम का प्रतिद्वंद्वी और लंका का राजा बताया गया है। हालांकि, धार्मिक और स्थानीय परंपराओं में उन्हें एक महान विद्वान, प्रकांड पंडित और भगवान शिव का अनन्य भक्त भी माना जाता है। कानपुर के इस मंदिर में विजयादशमी पर रावण की पूजा किए जाने के पीछे उनकी विद्वता और शिवभक्ति से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं को प्रमुख कारण माना जाता है। करीब 200 साल पुरानी है मंदिर की परंपरा अमर उजाला की रिपोर्ट के मुताबिक, कैलाश मंदिर परिसर में स्थित रावण मंदिर की परंपरा लगभग दो शताब्दियों पुरानी मानी जाती है। स्थानीय पुजारी और सेवादार मंदिर की देखरेख करते हैं। साल में केवल एक दिन खुलने की वजह से यह मंदिर विजयादशमी के अवसर पर कानपुर की धार्मिक पहचान का एक खास हिस्सा बन जाता है। रावण दहन से अलग है कानपुर की परंपरा दशहरा देश के अधिकांश हिस्सों में रावण दहन के साथ मनाया जाता है। यह परंपरा बुराई पर अच्छाई की जीत और भगवान राम की विजय का प्रतीक मानी जाती है। इसके विपरीत, भारत के कुछ क्षेत्रों में रावण को उनकी विद्वता, शिवभक्ति या स्थानीय धार्मिक मान्यताओं के कारण सम्मान दिया जाता है। कानपुर का यह मंदिर ऐसी ही विशिष्ट परंपरा का उदाहरण है, जहां विजयादशमी के दिन रावण के दर्शन और पूजा के लिए श्रद्धालु जुटते हैं। कानपुर का रावण मंदिर इस बात को दर्शाता है कि भारत में धार्मिक परंपराएं और लोकमान्यताएं अलग-अलग क्षेत्रों में विविध रूपों में प्रचलित हैं। Source: Amar Ujala, Hindustan Times, The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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विजयादशमी पर राजा भैया ने किया शस्त्र पूजन, बेंती कोठी में 500 से अधिक हथियारों की पूजा

प्रतापगढ़, 21 अक्टूबर 2026: उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के कुंडा स्थित बेंती कोठी में विजयादशमी के अवसर पर विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने पारंपरिक शस्त्र पूजन किया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समर्थक अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ पहुंचे। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार पूजा-अर्चना की गई। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, समारोह में 500 से अधिक हथियारों का पूजन किया गया। कार्यक्रम में राजा भैया के परिवार के सदस्यों, राजनीतिक सहयोगियों और समर्थकों की मौजूदगी रही। केसरिया पगड़ी पहनकर पूजा में शामिल हुए राजा भैया शस्त्र पूजन के दौरान राजा भैया केसरिया पगड़ी पहने नजर आए। वैदिक विधि-विधान के साथ आयोजित समारोह में पारंपरिक और आधुनिक हथियारों की पूजा की गई। बेंती कोठी में विजयादशमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने के कारण परिसर में खासा उत्साह देखने को मिला। हथियारों के लाइसेंस के सत्यापन की भी खबर अमृत विचार की रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यक्रम में लाए गए हथियारों और उनके लाइसेंस का सत्यापन भी किया गया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए दस्तावेजों की जांच किए जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सत्यापन की पूरी प्रक्रिया और उससे संबंधित आधिकारिक विवरण स्वतंत्र रूप से स्पष्ट नहीं हैं। 500 से अधिक हथियारों की पूजा NDTV और नवभारत टाइम्स समेत कई मीडिया रिपोर्ट्स में समारोह के दौरान 500 से अधिक हथियारों के पूजन का उल्लेख किया गया है। इसी आंकड़े को कार्यक्रम की प्रमुख विशेषताओं में गिना जा रहा है। विजयादशमी पर शस्त्र पूजन की परंपरा को शक्ति, साहस और रक्षा के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। इस अवसर पर कई स्थानों पर पारंपरिक रीति से हथियारों की पूजा की जाती है। बेंती कोठी के प्रवेश द्वार पर स्थापित हुई गणेश प्रतिमा समारोह के दौरान बेंती कोठी के प्रवेश द्वार पर राजस्थान के किशनगढ़ से लाई गई संगमरमर की गणेश प्रतिमा भी स्थापित की गई। इस अवसर पर परिवार के सदस्यों, राजनीतिक सहयोगियों और समर्थकों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। वर्षों से निभा रहे हैं शस्त्र पूजन की परंपरा राजा भैया बेंती कोठी में विजयादशमी के अवसर पर शस्त्र पूजन करते रहे हैं। यह आयोजन उनके यहां निभाई जाने वाली पारंपरिक धार्मिक गतिविधियों का हिस्सा माना जाता है। विजयादशमी के दिन शस्त्र पूजन की परंपरा देश के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित है। इसे बुराई पर अच्छाई की जीत और शक्ति के सदुपयोग के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। Source: NDTV, नवभारत टाइम्स, India TV, अमृत विचार जय राष्ट्र न्यूज़

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गुजरात में अनोखा गरबा! 15 हजार से ज्यादा महिलाओं ने पहने करीब 900 किलो सोने के गहने

राजकोट, 20 अक्टूबर 2026: गुजरात के राजकोट में आयोजित अहीर गरबा महोत्सव ने नवरात्रि के दौरान खूब सुर्खियां बटोरीं। आयोजकों के मुताबिक, अहीर समुदाय की 15 हजार से अधिक महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा में रास-गरबा किया। इस दौरान महिलाओं द्वारा पहने गए सोने के आभूषणों का कुल वजन करीब 900 किलोग्राम बताया गया, जिनकी अनुमानित कीमत 1,300 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है। राजकोट में हुआ भव्य आयोजन यह कार्यक्रम राजकोट के न्यू रिंग रोड इलाके में अहीर सेना की ओर से आयोजित नौ दिवसीय अहीर गरबा महोत्सव का हिस्सा था। नवरात्रि के सातवें दिन बड़ी संख्या में महिलाओं ने पारंपरिक रास में हिस्सा लिया। आयोजन में अहीर समुदाय की सांस्कृतिक परंपराओं और धार्मिक आस्था की झलक देखने को मिली। 900 किलो सोने के आभूषण बने आकर्षण आयोजकों के अनुसार, महिलाओं ने हार, कंगन और अन्य पारंपरिक सोने के आभूषण पहने थे। इन सभी गहनों का संयुक्त वजन लगभग 900 किलोग्राम बताया गया है। इनकी अनुमानित कीमत 1,300 करोड़ रुपये से अधिक होने का दावा किया गया। हालांकि, वजन और कीमत से जुड़े ये आंकड़े आयोजकों के दावों पर आधारित हैं। इनके स्वतंत्र ऑडिट या आधिकारिक सत्यापन की जानकारी सामने नहीं आई है। भगवान द्वारकाधीश की महाआरती भी हुई महोत्सव का एक प्रमुख आकर्षण भगवान श्री द्वारकाधीश की महाआरती रही। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य केवल रास-गरबा आयोजित करना नहीं, बल्कि अहीर समुदाय की सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक रीति-रिवाजों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है। सोशल मीडिया पर छाए वीडियो और तस्वीरें बड़ी संख्या में महिलाओं के पारंपरिक परिधानों और सोने के आभूषणों के साथ गरबा करने के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने। आयोजन की भव्यता और महिलाओं की सामूहिक भागीदारी ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। संस्कृति, आस्था और सामूहिक एकजुटता का प्रदर्शन अहीर समुदाय में पारंपरिक आभूषणों और रास-गरबा की विशेष सांस्कृतिक पहचान रही है। राजकोट में आयोजित यह महोत्सव समुदाय की परंपराओं, धार्मिक आस्था और सामूहिक एकजुटता को प्रदर्शित करने वाला आयोजन रहा। स्रोत: आज तक, लोकतेज और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तराखंड: शीतकाल के लिए बंद हुए भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट, अब 6 महीने गोपेश्वर में होंगे दर्शन

चमोली, 20 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के पंचकेदारों में शामिल चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट शीतकाल के लिए विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ बंद कर दिए गए हैं। अब अगले करीब छह महीने तक श्रद्धालु भगवान रुद्रनाथ के दर्शन गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में कर सकेंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली शीतकालीन गद्दीस्थल पहुंच गई है। 17 अक्टूबर को बंद हुए मंदिर के कपाट रुद्रनाथ धाम के कपाट 17 अक्टूबर की शाम विशेष पूजा-अर्चना, अभिषेक, श्रृंगार और रुद्री पाठ के बाद बंद किए गए। धार्मिक परंपराओं के अनुसार, शीतकाल शुरू होने से पहले मंदिर में विशेष अनुष्ठान किए गए और भगवान को विधिवत विदाई दी गई। 19 अक्टूबर को गोपेश्वर पहुंची उत्सव डोली कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली ने शीतकालीन प्रवास के लिए यात्रा शुरू की। इस दौरान डोली देवलधार स्थित ज्वाला मंदिर में रुकी। इसके बाद 19 अक्टूबर को वह गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर पहुंची, जहां विशेष पूजा-अर्चना के बाद भगवान रुद्रनाथ को उनके शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान किया गया। अब छह महीने गोपीनाथ मंदिर में होंगे दर्शन शीतकाल के दौरान रुद्रनाथ धाम के ऊंचाई वाले क्षेत्र में भारी बर्फबारी और प्रतिकूल मौसम के कारण मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। इस अवधि में श्रद्धालु गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में भगवान रुद्रनाथ के दर्शन और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। यह व्यवस्था अगले यात्रा सीजन तक जारी रहेगी। रुद्रनाथ धाम क्यों है खास? रुद्रनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 11,800 फीट की ऊंचाई पर स्थित है। पंचकेदारों में शामिल इस मंदिर में भगवान शिव के मुख स्वरूप की पूजा की जाती है। यहां पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को कठिन पहाड़ी रास्तों पर लंबी पैदल यात्रा करनी पड़ती है। इसी वजह से रुद्रनाथ यात्रा को पंचकेदारों के प्रमुख और चुनौतीपूर्ण धार्मिक पड़ावों में गिना जाता है। शीतकाल में गोपेश्वर में होगी पूजा-अर्चना धार्मिक परंपरा के अनुसार, अगले लगभग छह महीने भगवान रुद्रनाथ की नियमित पूजा-अर्चना गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर में होगी। अगले यात्रा सीजन में मौसम और परंपराओं के अनुसार रुद्रनाथ मंदिर के कपाट दोबारा खोले जाएंगे। इससे श्रद्धालु शीतकाल के दौरान भी भगवान के दर्शन और पूजा कर सकेंगे। स्रोत: अमर उजाला, दैनिक जागरण और अन्य मीडिया रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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MP में अवैध रेत खनन पर NGT पैनल की गंभीर टिप्पणी, स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका

भोपाल, 19 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश में अवैध रेत खनन को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) से जुड़ी एक जांच समिति ने गंभीर सवाल उठाए हैं। पैनल ने संकेत दिया है कि लगातार कार्रवाई और निगरानी के दावों के बावजूद अवैध खनन जारी रहना स्थानीय अधिकारियों और सैंड माफिया के बीच संभावित गठजोड़ की आशंका पैदा करता है। स्पेशल टास्क फोर्स के बावजूद जारी है अवैध खनन रिपोर्ट के मुताबिक, अवैध रेत खनन पर रोक लगाने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया था। इसके बावजूद कई क्षेत्रों में कार्रवाई प्रभावी नहीं रही। पैनल ने सवाल उठाया कि लगातार शिकायतों और कार्रवाई के दावों के बावजूद अवैध खनन पर पूरी तरह रोक क्यों नहीं लग पा रही है। अधिकारियों की भूमिका की जांच की सिफारिश पैनल ने प्रवर्तन व्यवस्था में सामने आ रही कमियों की जांच करने और जहां कर्तव्य में लापरवाही साबित हो, वहां जिम्मेदारी तय करने की सिफारिश की है। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि अवैध खनन पर नियंत्रण में नाकामी प्रशासनिक कमजोरियों के कारण है या कहीं जानबूझकर संरक्षण दिए जाने की आशंका भी है। नियमित निगरानी समिति बनाने का सुझाव NGT पैनल ने अवैध खनन पर लगातार नजर रखने के लिए एक नियमित निगरानी समिति गठित करने की सलाह दी है। इसके साथ ही हर महीने कार्रवाई से जुड़ी रिपोर्ट तैयार करने की सिफारिश भी की गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही बढ़ाना और कार्रवाई की नियमित समीक्षा सुनिश्चित करना है। अधिकारियों से संभावित गठजोड़ अभी जांच का विषय पैनल की टिप्पणी में संभावित गठजोड़ और कार्रवाई में कमियों को लेकर सवाल उठाए गए हैं, लेकिन किसी विशिष्ट अधिकारी को दोषी घोषित नहीं किया गया है। अधिकारियों की मिलीभगत को स्थापित तथ्य तभी माना जा सकता है, जब आगे की जांच में इसके समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य सामने आएं। पर्यावरण पर भी पड़ सकता है गंभीर असर अवैध रेत खनन से नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र, भूजल पुनर्भरण और आसपास के प्राकृतिक वातावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में पैनल ने केवल छापेमारी और जब्ती तक सीमित रहने के बजाय निरंतर निगरानी, प्रभावी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करने पर जोर दिया है। Source: The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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ग्वालियर में भीषण सड़क हादसा: मौत का आंकड़ा बढ़कर 15, दर्जनों घायल; 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई

ग्वालियर, 19 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास हुए भीषण सड़क हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर 15 हो गई है। हादसे में कई अन्य लोग घायल हुए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा बढ़कर 15 हो गया। घायलों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग रिपोर्ट्स सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में 33, जबकि आकाशवाणी की रिपोर्ट में 42 लोगों के घायल होने की जानकारी दी गई है। कैसे हुआ हादसा? रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा रात करीब 1:30 बजे हुआ। धान से लदा एक ट्रक उस ढलान वाले रास्ते पर पहुंच गया, जहां भारी वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित थी। बताया जा रहा है कि ट्रक ने बैरिकेड्स तोड़ दिए और चालक वाहन पर नियंत्रण खो बैठा। इसके बाद ट्रक मंदिर की ओर जा रहे श्रद्धालुओं को कुचलते हुए बाहरी दीवार और गेट से जा टकराया। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। शुरुआती 13 मौतों से बढ़कर 15 हुआ आंकड़ा हादसे के तुरंत बाद सामने आई खबरों में 13 लोगों की मौत की जानकारी दी गई थी। बाद में अस्पतालों और प्रशासन से मिली अपडेट के आधार पर मृतकों की संख्या 15 बताई गई। हादसे की गंभीरता को देखते हुए राहत और बचाव कार्य किए गए। 33 या 42 घायल? रिपोर्ट्स में अलग-अलग आंकड़े हादसे में घायल लोगों की संख्या को लेकर भी अलग-अलग जानकारी सामने आई है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट में 33 घायलों का उल्लेख है, जबकि 19 अक्टूबर की आकाशवाणी न्यूज रिपोर्ट के अनुसार, 42 लोग घायल हुए हैं। घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है और कुछ की हालत गंभीर बताई गई है। 9 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई हादसे के बाद सुरक्षा व्यवस्था और प्रतिबंधित मार्ग पर भारी वाहन पहुंचने को लेकर सवाल उठे हैं। मध्य प्रदेश सरकार ने कार्रवाई करते हुए एक सीएसपी को पद से हटा दिया और आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया। इस तरह कुल नौ पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की गई है। मजिस्ट्रियल जांच के आदेश जिला प्रशासन ने हादसे की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। जांच रिपोर्ट सात दिनों के भीतर सौंपने को कहा गया है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि प्रतिबंधित मार्ग पर ट्रक कैसे पहुंचा, बैरिकेड्स के बावजूद उसे क्यों नहीं रोका जा सका और सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई। ट्रक चालक और मालिक हिरासत में मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ट्रक चालक और मालिक को हिरासत में लिया गया है। वाहन की तकनीकी जांच भी की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि ब्रेक में खराबी, ओवरलोडिंग या किसी अन्य तकनीकी समस्या की हादसे में कोई भूमिका थी या नहीं। इन पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। प्रधानमंत्री और राज्य सरकार ने मुआवजे की घोषणा की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हादसे में जान गंवाने वालों के परिजनों के लिए ₹2 लाख और घायलों के लिए ₹50,000 की सहायता की घोषणा की है। वहीं, मध्य प्रदेश सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹4 लाख, गंभीर रूप से घायल लोगों को ₹2 लाख और अन्य घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। Source – India Today, Akashvani News, The New Indian Express, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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