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गुजरात में BJP विधायक का बंगला धुलने पहुंची फायर ब्रिगेड, वीडियो वायरल होने के बाद मचा विवाद

दाहोद: गुजरात के दाहोद जिले में BJP विधायक और पूर्व मंत्री बचुभाई खाबड़ के निजी निवास पर नगरपालिका की fire brigade पहुंचने और घर की बाहरी दीवारें धुलने का वीडियो वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। Devgadh Baria Municipality के अधिकारियों का कहना है कि fire tender को emergency समझकर भेजा गया था, लेकिन मौके पर पहुंचने के बाद कर्मचारियों से घर साफ करने को कहा गया। जानकारी मिलते ही काम रुकवा दिया गया और वाहन भेजने के लिए ₹2,700 शुल्क वसूला गया। दाहोद के Pipero गांव का मामला घटना दाहोद जिले के Dhanpur taluka के Pipero गांव की है। यहीं BJP विधायक Bachubhai Khabad का निवास है। नगरपालिका की fire brigade करीब 24 किलोमीटर की दूरी तय कर उनके घर पहुंची थी। Emergency समझकर भेजी गई थी गाड़ी Devgadh Baria नगरपालिका अध्यक्ष Dharmesh Kalal के अनुसार उन्हें विधायक की ओर से fire engine भेजने के लिए फोन आया था। उन्होंने बताया कि किसी emergency की आशंका के चलते तत्काल fire department को वाहन भेजने का निर्देश दिया गया। मौके पर पहुंचते ही घर धोने को कहा Fire Officer Mayur Singh Chauhan के अनुसार जब fire brigade staff विधायक के घर पहुंचा तो वहां मौजूद लोगों ने उनसे bungalow की सफाई करने को कहा। कर्मचारियों को सबसे पहले घर के सामने के हिस्से पर पानी डालने के निर्देश दिए गए। कुछ सेकंड बाद रुकवाया गया काम Fire brigade कर्मचारियों ने अपने senior officer को इसकी जानकारी दी। इसके बाद cleaning operation को तुरंत रुकवा दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक वीडियो में जो washing दिखाई दे रही है, वह बहुत कम समय तक चली। ₹2,700 का शुल्क वसूला नगरपालिका ने fire tender भेजने और इस्तेमाल से जुड़े खर्च के तौर पर ₹2,700 वसूले। कुछ reports में payment विधायक के परिवार की ओर से किए जाने की बात कही गई है। Viral video के बाद बढ़ा विवाद घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद सवाल उठने लगे कि emergency services के लिए इस्तेमाल होने वाले fire tender को private property की सफाई के लिए क्यों भेजा गया। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू कर दी। कांग्रेस ने उठाए VIP culture पर सवाल Congress नेताओं ने घटना को सरकारी संसाधनों के कथित दुरुपयोग का मामला बताया। विपक्ष ने सवाल किया कि जिस क्षेत्र में पानी की कमी की शिकायतें हैं, वहां emergency fire vehicle को निजी घर तक भेजना कितना उचित है। क्षेत्र में पानी की कमी का भी मुद्दा स्थानीय विपक्षी नेताओं ने दावा किया कि Devgadh Baria के कई residents को नियमित पानी की आपूर्ति नहीं मिल रही। इसी वजह से fire tender और पानी के कथित निजी इस्तेमाल को लेकर मामला और संवेदनशील हो गया। विधायक की भूमिका की होगी जांच नगरपालिका officials का कहना है कि यह भी जांच की जाएगी कि fire engine किस आधार पर बुलाया गया और क्या अधिकारियों को वास्तविक उद्देश्य की जानकारी दी गई थी। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि विधायक ने खुद घर धुलवाने का निर्देश दिया था या यह उनके घर पर मौजूद अन्य लोगों की ओर से कहा गया। Hoax call की आशंका Fire department के अधिकारियों ने इस घटना को संभावित “hoax call” के तौर पर भी जांचने की बात कही है। अगर emergency service को गलत जानकारी देकर बुलाए जाने की पुष्टि होती है तो आगे प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है। विधायक उस समय घर पर नहीं थे कुछ reports के मुताबिक घटना के समय Bachubhai Khabad घर पर मौजूद नहीं थे और इलाज के बाद recovery कर रहे थे। इसलिए पूरे मामले में उनकी प्रत्यक्ष भूमिका और निर्देशों को लेकर जांच महत्वपूर्ण होगी। सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल पर बहस इस घटना ने emergency services के इस्तेमाल और political VIP culture को लेकर नई बहस छेड़ दी है। Fire brigade जैसी essential service को private work में लगाए जाने के आरोप ने प्रशासनिक accountability पर भी सवाल खड़े किए हैं। source – The Indian Express / NDTV / Hindustan Times / The Times of India / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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महिला पत्रकार के आरोपों के बीच ACP विवेक भगत का प्रमोशन विवादों में, Additional DCP का charge रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर प्रदर्शन की कवरेज के दौरान एक महिला पत्रकार द्वारा कथित यौन उत्पीड़न का आरोप लगाए जाने के बीच Delhi Police के ACP विवेक भगत को Additional DCP का current duty charge दिए जाने पर विवाद खड़ा हो गया। आलोचना के बाद भगत ने खुद जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद दिल्ली सरकार ने उनके संबंध में 5 अक्टूबर का आदेश modify करने का फैसला किया। 12 DANIPS अधिकारियों के साथ मिला था नया charge दिल्ली सरकार के Home Department ने 5 अक्टूबर को 12 Selection Grade DANIPS अधिकारियों को Additional DCP पद का current duty charge देने का आदेश जारी किया था। इस सूची में Connaught Place के ACP Vivek Bhagat का नाम भी शामिल था। Regular promotion नहीं था यह आदेश दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि यह regular promotion नहीं बल्कि temporary current duty charge था। इस arrangement से कोई अतिरिक्त financial benefit नहीं मिलता और ऐसे अधिकारी regular Additional DCP की सभी statutory powers का इस्तेमाल भी नहीं कर सकते। महिला पत्रकार की शिकायत के बाद विवाद यह आदेश ऐसे समय आया जब 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए प्रदर्शन की coverage कर रही महिला पत्रकार ने Vivek Bhagat पर कथित sexual harassment और inappropriate touching का आरोप लगाया था। ये आरोप अभी जांच के स्तर पर हैं और किसी अदालत ने इन्हें साबित नहीं किया है। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं है। तीन महिला पत्रकारों ने Delhi Police personnel के खिलाफ harassment और manhandling से जुड़ी शिकायतें दी हैं। इन complaints को Crime Branch को आगे की जांच के लिए भेजा गया है। Promotion order पर उठे सवाल Bhagat का नाम Additional DCP charge वाली सूची में सामने आते ही social media, journalists और activists ने सवाल उठाए। आलोचकों ने पूछा कि गंभीर आरोपों और ongoing inquiry के बीच उन्हें higher responsibility कैसे दी जा सकती है। सरकार ने दिया clarification Delhi Government ने कहा कि Additional DCP charge देने की administrative process 25 अगस्त 2026 को शुरू हो गई थी। यह तारीख 3 अक्टूबर की कथित घटना से काफी पहले की है। इसलिए सरकार का कहना है कि इस charge का महिला पत्रकार की complaint से कोई संबंध नहीं था। Vivek Bhagat ने खुद लिखा पत्र विवाद बढ़ने के बाद Vivek Bhagat ने Delhi Police Commissioner को पत्र लिखकर request की कि जब तक महिला पत्रकारों की शिकायत की पूरी जांच नहीं हो जाती, तब तक उन्हें Additional DCP का current duty charge न दिया जाए। सरकार के अनुसार यह अनुरोध उन्होंने “अपने स्वयं के निर्णय” से किया। सरकार ने रोका Additional DCP charge इसके बाद Delhi Government ने 5 अक्टूबर के आदेश को Vivek Bhagat के संबंध में modify करने की घोषणा की। अब Additional DCP का current duty charge बाकी 11 अधिकारियों के लिए लागू रहेगा, जबकि Bhagat का assignment inquiry पूरी होने तक रोक दिया गया है। Crime Branch कर रही है जांच तीन महिला पत्रकारों की complaints को Crime Branch को transfer किया गया है। जांच के दौरान CCTV footage, mobile videos, witnesses और मौके पर मौजूद police personnel की भूमिका की पड़ताल की जा सकती है। FIR को लेकर भी उठ रहे सवाल महिला पत्रकार और उनका समर्थन कर रहे groups FIR दर्ज किए जाने की मांग करते रहे हैं। मामले में पुलिस की ओर से complaint को Crime Branch inquiry में भेजा गया है और आगे की कानूनी कार्रवाई जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी। आरोप अभी साबित नहीं यह स्पष्ट करना जरूरी है कि Vivek Bhagat के खिलाफ आरोप अभी जांच के अधीन हैं। जब तक जांच या न्यायिक प्रक्रिया में आरोप स्थापित नहीं हो जाते, उन्हें दोषी नहीं माना जा सकता। Promotion controversy ने बढ़ाई जवाबदेही की बहस पूरे घटनाक्रम ने police accountability और sensitive complaints के दौरान administrative promotions या additional responsibilities को लेकर बहस तेज कर दी है। सरकार द्वारा charge रोकने के बाद अब निगाह Crime Branch की जांच और उसके निष्कर्षों पर रहेगी। source – ThePrint / Hindustan Times / The New Indian Express / The Times of India / Delhi Government जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकारों के गंभीर आरोप, मामला Crime Branch को सौंपा गया

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन की कवरेज के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के गंभीर आरोप लगाए हैं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को विस्तृत जांच के लिए Crime Branch को भेज दिया है। 6 अक्टूबर तक मामले में FIR दर्ज नहीं होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। 3 अक्टूबर के प्रदर्शन से जुड़ा मामला यह मामला 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के पास हुए उस प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और voter-list revision से जुड़े मुद्दों को लेकर विरोध किया जा रहा था। पुलिस का कहना है कि इलाके में BNSS की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे और प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के दौरान विवाद हुआ। तीन महिला पत्रकारों ने लगाए आरोप प्रदर्शन की रिपोर्टिंग कर रहीं तीन महिला पत्रकारों ने दावा किया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित तौर पर अनुचित शारीरिक व्यवहार और यौन उत्पीड़न हुआ। ये आरोप अभी जांच के अधीन हैं और किसी अधिकारी की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं हुई है। ACP विवेक भगत का नाम आया सामने एक महिला पत्रकार की शिकायत में Connaught Place के ACP विवेक भगत का नाम सामने आया। पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान उनके साथ कथित रूप से अनुचित व्यवहार किया गया। ACP या अन्य अधिकारियों के खिलाफ लगे आरोपों की जांच Crime Branch कर रही है। Crime Branch को ट्रांसफर हुई शिकायत Delhi Police ने कहा कि तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें Crime Branch को भेज दी गई हैं। जांच टीम CCTV footage, mobile videos, eyewitness statements और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों की भूमिका की पड़ताल कर रही है। मेडिकल जांच भी कराई गई रिपोर्टों के मुताबिक शिकायत करने वाली महिला पत्रकारों का medical examination भी कराया गया। इसके साथ ही पुलिस ने घटनास्थल के CCTV और सार्वजनिक रूप से उपलब्ध video footage की जांच शुरू की है। 6 अक्टूबर तक FIR दर्ज नहीं मामले में एक बड़ा सवाल यह है कि शिकायत के कई दिन बाद तक FIR दर्ज नहीं हुई थी। महिला पत्रकार और समर्थक लगातार FIR दर्ज करने तथा संबंधित अधिकारियों के खिलाफ निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। आरोपी ACP का promotion बना विवाद मामला तब और चर्चा में आया जब ACP विवेक भगत को routine order में Additional DCP का current charge दिया गया। इसके बाद आलोचना तेज हुई। बाद में दिल्ली सरकार ने बताया कि विवेक भगत ने जांच पूरी होने तक नया charge न लेने का अनुरोध किया, जिसके बाद आदेश को modify करने की प्रक्रिया शुरू की गई। Delhi Police ने कुछ आरोपों को किया खारिज दिल्ली पुलिस ने सोशल मीडिया पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ physical assault से जुड़े कुछ दावों को “baseless and misleading” बताया है। पुलिस का कहना है कि महिला प्रदर्शनकारियों को female personnel द्वारा कानून के मुताबिक संभाला गया। हालांकि महिला पत्रकारों की sexual harassment complaints की अलग से Crime Branch जांच जारी है। पत्रकारों और संगठनों ने उठाए सवाल मामले को लेकर पत्रकार संगठनों, छात्र समूहों और राजनीतिक नेताओं ने पारदर्शी जांच की मांग की है। उनका कहना है कि protest coverage के दौरान journalists की सुरक्षा और पुलिस accountability सुनिश्चित की जानी चाहिए। जांच के बाद ही तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल सभी आरोप शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच, CCTV footage, medical evidence और प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR या आगे की कानूनी कार्रवाई बनती है या नहीं। source – The Indian Express / Hindustan Times / Delhi Police जय राष्ट्र न्यूज़

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फिरोजाबाद में टायर फैक्ट्री में भीषण आग, आसमान में छाया काला धुआं; मौके पर पहुंचीं दमकल की कई गाड़ियां

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले के शिकोहाबाद स्थित नौशहरा क्षेत्र में एक टायर फैक्ट्री में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग इतनी तेज थी कि फैक्ट्री से ऊंची लपटें उठने लगीं और आसपास के इलाके में काले धुएं का बड़ा गुबार दिखाई दिया। सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाने का अभियान शुरू किया। उरमुरा किरार स्थित फैक्ट्री में लगी आग यह घटना शिकोहाबाद के नौशहरा क्षेत्र के उरमुरा किरार स्थित SMVD टायर फैक्ट्री में हुई। रविवार दोपहर अचानक फैक्ट्री से धुआं और आग की लपटें निकलती दिखाई दीं, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों ने प्रशासन को सूचना दी। दोपहर करीब ढाई बजे की घटना प्रारंभिक रिपोर्टों के मुताबिक आग रविवार दोपहर करीब 2:30 बजे लगी। कुछ ही समय में आग ने फैक्ट्री के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और मौके से घना काला धुआं उठने लगा। कई दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं आग की गंभीरता को देखते हुए दमकल की कई गाड़ियों को मौके पर भेजा गया। Firefighters ने अलग-अलग दिशाओं से पानी की बौछार कर आग को फैलने से रोकने और लपटों पर काबू पाने की कोशिश की। टायर और रबर के कारण तेजी से फैली आग टायर और rubber-based material अत्यधिक ज्वलनशील होते हैं। ऐसे में फैक्ट्री के भीतर मौजूद material के कारण आग तेजी से फैलने की आशंका बनी रही और firefighting operation को चुनौतीपूर्ण माना गया। आसमान में छाया काला धुआं आग लगने के बाद फैक्ट्री के ऊपर काले धुएं का विशाल गुबार दिखाई दिया। दूर से भी धुआं नजर आने के कारण स्थानीय लोगों में चिंता फैल गई और घटनास्थल के आसपास लोगों की भीड़ जमा होने लगी। SDM और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। रिपोर्टों के मुताबिक SDM राजेश शुक्ला, CO जयविंद गुप्ता और स्थानीय पुलिस अधिकारी firefighting operation के दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे। आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं फैक्ट्री में आग किस वजह से लगी, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। अग्निशमन विभाग और पुलिस घटना के कारणों की जांच कर रहे हैं। जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आग किसी technical fault, short circuit या किसी अन्य वजह से लगी। नुकसान का आकलन जारी फैक्ट्री में कितना आर्थिक नुकसान हुआ है, इसका भी अभी पूरा आकलन सामने नहीं आया है। आग बुझने और परिसर सुरक्षित होने के बाद प्रशासन और फैक्ट्री प्रबंधन नुकसान का विस्तृत assessment कर सकते हैं। किसी हताहत की तत्काल पुष्टि नहीं प्रारंभिक रिपोर्टों में किसी मौत या गंभीर हताहत की पुष्टि नहीं की गई थी। प्रशासन ने घटनास्थल को सुरक्षित रखते हुए firefighting और जांच की कार्रवाई जारी रखी। घटना की जांच करेगा अग्निशमन विभाग आग पूरी तरह नियंत्रित होने के बाद Fire Department घटनास्थल की जांच कर सकता है। इसमें fire-safety arrangements, electrical systems और फैक्ट्री में रखे ज्वलनशील material की स्थिति की भी पड़ताल की जा सकती है। source – Amar Ujala / The Times of India / Hindustan Times / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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मोहन भागवत बोले—भारत में धर्म और राष्ट्र अलग नहीं, धर्म के संकट का असर राष्ट्र पर भी पड़ेगा

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारत में धर्म और राष्ट्र को अलग-अलग नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि दोनों एक-दूसरे पर निर्भर हैं और अगर धर्म संकट में आता है तो उसका असर राष्ट्र पर भी पड़ता है। भागवत मुंबई के बोरीवली में आयोजित All India Vihar Seva Group के 14वें सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। ‘राष्ट्र और धर्म एक-दूसरे पर निर्भर’ मोहन भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत में राष्ट्र और धर्म अलग नहीं हैं। उनके मुताबिक राष्ट्र का उद्देश्य धर्म है और धर्म राष्ट्र को बनाए रखने में मदद करता है। उन्होंने दोनों को एक-दूसरे के अस्तित्व से जुड़ा बताया। धर्म कमजोर हुआ तो राष्ट्र पर भी असर भागवत ने कहा कि अगर धर्म पर संकट आता है तो देश भी उससे अछूता नहीं रह सकता। उन्होंने तर्क दिया कि राष्ट्र और धर्म की मजबूती एक-दूसरे से जुड़ी हुई है और दोनों का संरक्षण जरूरी है। मुंबई के बोरीवली में दिया बयान RSS प्रमुख यह संबोधन मुंबई के बोरीवली में आयोजित All India Vihar Seva Group के 14वें सम्मेलन में दे रहे थे। इस दौरान उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा, अध्यात्म, समाज और वैश्विक चुनौतियों पर भी अपने विचार रखे। दुनिया की चुनौतियों का किया जिक्र भागवत ने कहा कि आज दुनिया कई तरह के विरोधाभासों और चुनौतियों का सामना कर रही है। उन्होंने विकास बनाम पर्यावरण संरक्षण, व्यक्तिगत स्वतंत्रता बनाम पारिवारिक जीवन और धार्मिक आस्था बनाम संघर्ष जैसे मुद्दों का जिक्र किया। भारत की ज्ञान परंपरा को बताया महत्वपूर्ण RSS प्रमुख ने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा इन वैश्विक समस्याओं को देखने का एक अलग दृष्टिकोण देती है। उन्होंने वेद, उपनिषद, रामायण, महाभारत, गीता, जैन आगम, त्रिपिटक और गुरु ग्रंथ साहिब जैसी परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका मूल उद्देश्य मानव कल्याण है। ‘सभी का मंगल’ भारतीय दृष्टि भागवत ने कहा कि भारतीय सोच केवल बहुसंख्यकों के कल्याण तक सीमित नहीं है। उनके अनुसार भारतीय परंपरा ‘सभी के मंगल’ की बात करती है और किसी वर्ग के हित के लिए दूसरे वर्ग का नुकसान स्वीकार नहीं करती। बिना विजय या धर्मांतरण ज्ञान फैलाने की बात उन्होंने कहा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से अपने ज्ञान और दर्शन को दुनिया में फैलाने के लिए सैन्य विजय या जबरन धर्मांतरण का रास्ता नहीं अपनाया। भागवत ने इसे भारत की ज्ञान परंपरा की विशेषता बताया। संत परंपरा और सेवा पर जोर अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने संत परंपरा और समाज सेवा की भूमिका का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। बयान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी मोहन भागवत के धर्म और राष्ट्र को लेकर दिए बयान के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। TMC सांसद सौगत रॉय ने उनके बयान से असहमति जताते हुए कहा कि धर्म को संकट नहीं है और RSS जैसे संगठनों पर सवाल उठाए। इससे बयान राजनीतिक बहस का भी हिस्सा बन गया। RSS के वैचारिक दृष्टिकोण की फिर चर्चा भागवत का यह बयान RSS के राष्ट्र, संस्कृति और धर्म को लेकर लंबे समय से सामने आते रहे वैचारिक दृष्टिकोण के अनुरूप माना जा रहा है। हालांकि ‘धर्म’ शब्द की उनकी व्याख्या धार्मिक पहचान से व्यापक सामाजिक और नैतिक व्यवस्था के रूप में पेश की गई। source – The Indian Express / PTI / Loksatta / ThePrint जय राष्ट्र न्यूज़

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महात्मा गांधी की तस्वीर वाले ₹500 नोट पर reel बनाने के मामले में Surat की influencer Simran Patel गिरफ्तार

सूरत: गुजरात के सूरत में सोशल मीडिया influencer Simran Patel को महात्मा गांधी की तस्वीर वाले ₹500 के नोट के साथ कथित रूप से आपत्तिजनक reel बनाने और पोस्ट करने के मामले में गिरफ्तार किया गया है। Surat Cyber Crime Branch ने कार्रवाई एक सामाजिक कार्यकर्ता की शिकायत के बाद की। पुलिस के अनुसार Simran Patel के Instagram पर करीब 10 लाख followers हैं और विवादित reel 1 अक्टूबर को, गांधी जयंती से एक दिन पहले पोस्ट की गई थी। 47 वर्षीय content creator हैं Simran Patel पुलिस के अनुसार गिरफ्तार महिला की पहचान 47 वर्षीय Simran Patel के रूप में हुई है। वह सूरत के Adajan इलाके की रहने वाली हैं और सोशल मीडिया पर लंबे समय से short videos और reels बनाती रही हैं। ₹500 के नोट के साथ बनाई थी reel पुलिस का आरोप है कि reel में ₹500 के नोट पर मौजूद महात्मा गांधी की तस्वीर को ऐसे तरीके से दिखाया गया, जिसे आपत्तिजनक और अशोभनीय माना गया। वीडियो में कथित तौर पर अनुचित gestures और visuals शामिल थे। आरोपों की अंतिम कानूनी स्थिति अदालत में तय होगी। गांधी जयंती से एक दिन पहले किया पोस्ट Surat Police के अनुसार reel को 1 अक्टूबर को दोपहर से शाम के बीच सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया था। इसके अगले दिन 2 अक्टूबर को गांधी जयंती थी, इसलिए वीडियो वायरल होने के बाद मामला और ज्यादा चर्चा में आया। सामाजिक कार्यकर्ता ने की शिकायत रिपोर्टों के मुताबिक सामाजिक कार्यकर्ता Dharmesh Gami ने Surat Crime Branch में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया कि reel ने महात्मा गांधी की छवि को अपमानजनक तरीके से प्रस्तुत किया और लोगों की भावनाएं आहत कीं। IT Act की धारा 67 के तहत केस पुलिस ने Simran Patel के खिलाफ Information Technology Act की Section 67 के तहत मामला दर्ज किया है। यह धारा electronic form में obscene material के publication या transmission से संबंधित है। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने जारी किया वीडियो Surat Police ने गिरफ्तारी की जानकारी अपने आधिकारिक social media account पर भी साझा की। पुलिस द्वारा जारी वीडियो में पहले विवादित reel का हिस्सा और बाद में Simran Patel को हिरासत में दिखाया गया। पुलिस ने उनके apology video का भी उल्लेख किया। Simran Patel ने मांगी माफी पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार Simran Patel ने बाद में अपने वीडियो को लेकर माफी मांगी। रिपोर्टों में यह भी कहा गया कि विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने reel को delete कर दिया था। Social media creators को पुलिस की चेतावनी इस कार्रवाई के बाद Surat Police ने social media users और content creators से आपत्तिजनक सामग्री पोस्ट करने से बचने की अपील की। पुलिस ने कहा कि ऐसा content जो सामाजिक तनाव या विवाद पैदा कर सकता है, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है। मामला अब कानूनी प्रक्रिया में Simran Patel की गिरफ्तारी के बाद मामला जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन है। फिलहाल उनके खिलाफ लगाए गए आरोप पुलिस के दावों पर आधारित हैं और अंतिम जिम्मेदारी अदालत तय करेगी। source – India Today / NDTV / The Times of India / ABP Live / Surat Police जय राष्ट्र न्यूज़

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जंतर-मंतर विवाद के बाद महिला पत्रकार समेत 17 लोग हिरासत में, पत्रकारों की शिकायत Crime Branch को ट्रांसफर

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर हालिया प्रदर्शन की कवरेज के दौरान महिला पत्रकारों द्वारा पुलिस अधिकारियों पर लगाए गए कथित दुर्व्यवहार और यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विवाद बढ़ गया है। 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर कार्रवाई की मांग करने पहुंचे लोगों में से 17 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया, जिनमें एक महिला पत्रकार भी शामिल थीं। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को जांच के लिए Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। Parliament Street Police Station के बाहर जुटे प्रदर्शनकारी प्रदर्शनकारी महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाने के बाहर पहुंचे थे। मौके पर पुलिस ने बैरिकेडिंग की और भीड़ को आगे बढ़ने से रोका। इसके बाद कई लोगों को हिरासत में लिया गया। 17 लोगों को हिरासत में लिया गया रिपोर्टों के अनुसार कुल 17 लोगों को हिरासत में लिया गया। इनमें एक महिला पत्रकार और प्रदर्शन से जुड़े अन्य लोग शामिल थे। पुलिस ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। महिला पत्रकारों ने लगाए गंभीर आरोप मामला जंतर-मंतर पर CEC ज्ञानेश कुमार और SIR के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज से जुड़ा है। तीन महिला पत्रकारों ने आरोप लगाया कि पुलिस कार्रवाई के दौरान उनके साथ कथित यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार हुआ। ये आरोप फिलहाल शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। शिकायत Crime Branch को सौंपी गई दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि इससे जांच अधिक स्वतंत्र तरीके से की जा सकेगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा होगी। पत्रकार रोजी का मामला भी चर्चा में इस पूरे विवाद में स्वतंत्र पत्रकार रोजी का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर कथित अनुचित स्पर्श और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया था तथा on-camera apology और कानूनी कार्रवाई की मांग की थी। आरोपों की पुष्टि अभी जांच में होनी बाकी है। Press Club में भी उठा मामला महिला पत्रकारों के आरोपों के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र मीडिया समूहों ने भी प्रतिक्रिया दी। Press Club of India में भी इस मामले को लेकर चर्चा और कार्रवाई की मांग सामने आई। पत्रकारों ने कहा कि protest coverage के दौरान media professionals की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। दिल्ली पुलिस ने कहा- जांच जारी दिल्ली पुलिस ने कहा है कि शिकायतों की जांच Crime Branch करेगी और उपलब्ध material के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस ने यह भी साफ किया कि केवल आरोप लगाए जाने से किसी अधिकारी की जिम्मेदारी तय नहीं हो जाती; जांच के बाद ही निष्कर्ष निकलेगा। Jantar Mantar Protest से जुड़ा बड़ा विवाद यह विवाद उस व्यापक राजनीतिक और छात्र आंदोलन से जुड़ा है जिसमें SIR और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ प्रदर्शन हो रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में जंतर-मंतर और आसपास कई लोगों को हिरासत में लिया गया है, जिससे पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ा है। महिला पत्रकारों की सुरक्षा पर सवाल इस घटना ने protest coverage के दौरान महिला पत्रकारों की सुरक्षा और पुलिस व्यवहार पर भी सवाल खड़े किए हैं। मीडिया संगठनों ने मांग की है कि ऐसे मामलों में शिकायतों की पारदर्शी और समयबद्ध जांच की जाए। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल मामला Crime Branch के पास है और जांच जारी है। महिला पत्रकारों के आरोपों, पुलिस अधिकारियों के पक्ष और उपलब्ध वीडियो तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा के बाद ही यह तय होगा कि किसी तरह की कानूनी या विभागीय कार्रवाई बनती है या नहीं। Source – The Indian Express / Delhi Police / PTI / Press Club of India जय राष्ट्र न्यूज़

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पत्रकार रोजी के साथ कथित दुर्व्यवहार का आरोप, जवाब मांगने पहुंचे प्रदर्शनकारियों को थाने के बाहर रोका गया

नई दिल्ली: जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ चल रहे प्रदर्शन की कवरेज के दौरान स्वतंत्र पत्रकार रोजी ने दिल्ली पुलिस के एक ACP पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। मामले में FIR और कार्रवाई की मांग को लेकर Parliament Street Police Station पहुंचे प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने थाने के बाहर ही रोक दिया और कई लोगों को हिरासत में लिया। दिल्ली पुलिस ने महिला पत्रकारों की शिकायत को Crime Branch को जांच के लिए भेज दिया है। जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान का है मामला घटना 3 अक्टूबर को उस समय की बताई जा रही है जब जंतर-मंतर के आसपास CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा था। रोजी वहां प्रदर्शन की कवरेज कर रही थीं और AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा की हिरासत को रिकॉर्ड कर रही थीं। इसी दौरान उन्होंने एक पुलिस अधिकारी पर उनके साथ कथित तौर पर आपत्तिजनक व्यवहार करने का आरोप लगाया। ACP विवेक भगत पर लगाया आरोप रोजी ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत ने उन्हें कथित तौर पर अनुचित तरीके से छुआ और पीछे की ओर धक्का दिया। उन्होंने कहा कि वह महिला प्रदर्शनकारियों को पुरुष पुलिसकर्मियों द्वारा हिरासत में लिए जाने पर सवाल उठा रही थीं। ये आरोप पत्रकार की शिकायत पर आधारित हैं और अभी जांच के अधीन हैं। तीन महिला पत्रकारों ने दी शिकायत मामला केवल रोजी तक सीमित नहीं रहा। दिल्ली पुलिस के मुताबिक 3 अक्टूबर की law-and-order situation के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिस अधिकारियों के खिलाफ sexual harassment के आरोप लगाए और लिखित शिकायतें दीं। Crime Branch को सौंपी गई जांच दिल्ली पुलिस ने शिकायतों को New Delhi District से Crime Branch को ट्रांसफर कर दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और उपलब्ध वीडियो, बयान तथा अन्य साक्ष्यों की समीक्षा की जाएगी। FIR की मांग को लेकर थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी रोजी और अन्य महिला पत्रकारों की शिकायत पर FIR दर्ज करने की मांग को लेकर पत्रकार, छात्र कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग Parliament Street Police Station के बाहर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई और शिकायत की औपचारिक FIR दर्ज करने की मांग की। पुलिस ने थाने के बाहर रोका सोमवार, 5 अक्टूबर को Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन कर रहे लोगों को पुलिस ने आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया। मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात रहा। रोजी भी हिरासत में रिपोर्टों के अनुसार पत्रकार रोजी को भी FIR की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन करने के दौरान हिरासत में लिया गया। AISA अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी दावा किया कि रोजी समेत प्रदर्शन से जुड़े कई लोगों को Delhi Cantonment Police Station ले जाया गया। कैमरे पर माफी की मांग रोजी ने ACP विवेक भगत से on-camera apology और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनकी शिकायत को उसी तरह लिया जाना चाहिए जैसे किसी भी sexual harassment complaint को लिया जाता है। पत्रकार संगठनों में भी नाराजगी मामले के बाद पत्रकार संगठनों और स्वतंत्र पत्रकारों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। 5 अक्टूबर को Press Club of India में भी इस मामले को लेकर पत्रकारों के जुटने और न्याय की मांग उठाने की खबर सामने आई। पुलिस अधिकारी के खिलाफ आरोप अभी साबित नहीं रोजी और अन्य पत्रकारों द्वारा लगाए गए आरोप गंभीर हैं, लेकिन फिलहाल ये शिकायत और जांच के स्तर पर हैं। Crime Branch की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य हैं और किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई बनती है या नहीं। source – Delhi Police / The Indian Express / Times Now Navbharat / Daily Jagran / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र | IAS अधिकारी ने अपने जुड़वां बेटों का कराया सरकारी आंगनबाड़ी में दाखिला, सरकारी व्यवस्था पर जताया भरोसा

नंदुरबार: महाराष्ट्र के नंदुरबार की जिला कलेक्टर और IAS अधिकारी मिताली सेठी ने अपने तीन साल के जुड़वां बेटों का दाखिला एक सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र में कराया है। उनके इस फैसले ने लोगों का ध्यान खींचा है, क्योंकि आम तौर पर वरिष्ठ अधिकारी और आर्थिक रूप से सक्षम परिवार निजी pre-school को प्राथमिकता देते हैं। मिताली सेठी ने कहा कि उन्होंने यह फैसला किसी प्रतीकात्मक संदेश के लिए नहीं, बल्कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता की मेहनत और बच्चों की देखभाल के तरीके पर भरोसा करके लिया। नंदुरबार की जिला कलेक्टर हैं मिताली सेठी मिताली सेठी महाराष्ट्र कैडर की IAS अधिकारी हैं और वर्तमान में नंदुरबार जिले की कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। जब उनके जुड़वां बेटे तीन साल के हुए, तब उन्होंने उन्हें स्थानीय सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने का फैसला किया। निजी स्कूल के बजाय चुनी आंगनबाड़ी मिताली सेठी के परिवार में शुरुआत में इस फैसले को लेकर कुछ सवाल और आशंकाएं थीं। लेकिन जिला कलेक्टर के तौर पर अलग-अलग आंगनबाड़ी केंद्रों का निरीक्षण करते हुए उन्होंने वहां के कामकाज को करीब से देखा था। इसी अनुभव ने उन्हें अपने बच्चों के लिए भी सरकारी आंगनबाड़ी चुनने का भरोसा दिया। एक आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बदली सोच मिताली सेठी ने बताया कि एक समर्पित आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के काम ने उन पर खास प्रभाव डाला। बच्चों के साथ उसके व्यवहार, creative activities और सीखने के तरीके को देखकर उन्हें लगा कि यहां बच्चों के शुरुआती विकास के लिए अच्छा माहौल उपलब्ध है। ‘किसी को संदेश देने के लिए नहीं लिया फैसला’ IAS अधिकारी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य इस फैसले के जरिए कोई राजनीतिक या प्रशासनिक संदेश देना नहीं था। उन्होंने कहा कि यह एक व्यक्तिगत निर्णय था, जो उन्होंने उपलब्ध सुविधा और वहां काम करने वाली टीम पर भरोसा देखकर लिया। Early Childhood Education में आंगनबाड़ी की बड़ी भूमिका भारत में आंगनबाड़ी केंद्र केवल पोषण योजनाओं तक सीमित नहीं हैं। इन केंद्रों के जरिए बच्चों को pre-school education, nutrition, health monitoring और शुरुआती सामाजिक व cognitive development से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। सरकारी व्यवस्था पर भरोसे की बनी मिसाल एक वरिष्ठ IAS अधिकारी द्वारा अपने बच्चों को सरकारी आंगनबाड़ी में भेजने के फैसले ने सरकारी pre-school system की गुणवत्ता और उसकी संभावनाओं पर नई चर्चा शुरू कर दी है। यह मामला खास तौर पर इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि जिन सरकारी सुविधाओं की निगरानी अधिकारी खुद करते हैं, उनमें व्यक्तिगत स्तर पर भरोसा दिखाना अपेक्षाकृत कम देखने को मिलता है। महाराष्ट्र में आंगनबाड़ी सुधार पर भी जोर महाराष्ट्र में स्कूल और आंगनबाड़ी infrastructure सुधारने के लिए सरकार अलग-अलग models पर काम कर रही है। हाल ही में पुणे जिला परिषद के education और anganwadi infrastructure model को राज्य के दूसरे जिलों में भी लागू करने की मंजूरी दी गई है। सोशल मीडिया पर फैसले की चर्चा मिताली सेठी का फैसला सोशल मीडिया और public discourse में भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोग इसे सरकारी संस्थानों में विश्वास से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे इस बात की याद दिलाने वाला उदाहरण मान रहे हैं कि सरकारी व्यवस्थाओं की गुणवत्ता काफी हद तक स्थानीय implementation और कर्मचारियों की प्रतिबद्धता पर निर्भर करती है। आंगनबाड़ी व्यवस्था के लिए सकारात्मक संदेश इस फैसले से यह भी सामने आता है कि सही resources, trained staff और committed workers मिलने पर सरकारी आंगनबाड़ी केंद्र early childhood education का मजबूत विकल्प बन सकते हैं। मिताली सेठी ने अपने अनुभव के आधार पर यही भरोसा अपने बच्चों के लिए भी दिखाया है। source – The Times of India / Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल | मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ी 20 साल पुरानी जांच फिर चर्चा में, 2006 के मामले में Vigilance probe के आदेश

तिरुवनंतपुरम: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़ा करीब 20 साल पुराना मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। केरल सरकार ने 2006 के उस मामले में Vigilance and Anti-Corruption Bureau से जांच कराने का आदेश दिया है, जो उनके केरल के Public Works Department यानी PWD में सचिव रहते हुए सामने आया था। मामला एक मलेशियाई सिविल इंजीनियर की मौत और Kerala State Transport Project से जुड़े कथित भ्रष्टाचार आरोपों से संबंधित है। 2006 का है मामला यह मामला साल 2006 का है, जब ज्ञानेश कुमार केरल में PWD सचिव के पद पर कार्यरत थे। उस समय Kerala State Transport Project के तहत MC Road के upgradation का काम चल रहा था और एक Indo-Malaysian consortium PATI-BEL इस project से जुड़ा हुआ था। मलेशियाई इंजीनियर की मौत से जुड़ा केस मामला मलेशियाई civil engineer Lee See Been की मौत से भी जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार वह project के chief project manager थे और बाद में उनकी मौत suicide के रूप में दर्ज की गई। कथित suicide note में कुछ अधिकारियों और project से जुड़े विवादों का उल्लेख होने की बात सामने आई थी। कथित suicide note में ज्ञानेश कुमार का नाम मीडिया रिपोर्टों के अनुसार Lee See Been द्वारा छोड़े गए कथित suicide note में उस समय PWD Secretary रहे ज्ञानेश कुमार का नाम भी सामने आया था। हालांकि इन आरोपों की अंतिम कानूनी पुष्टि नहीं हुई है और नई जांच का उद्देश्य इन्हीं पुराने तथ्यों और पूर्व जांच की प्रक्रिया की समीक्षा करना है। केरल के गृह मंत्री ने दिए जांच के आदेश केरल के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने मामले में Vigilance जांच का आदेश दिया है। सरकार यह भी देखना चाहती है कि पिछली जांच निष्पक्ष तरीके से हुई थी या उस पर किसी तरह का बाहरी प्रभाव पड़ा था। ‘यह CEC पद के खिलाफ जांच नहीं’ केरल सरकार के एक मंत्री ने स्पष्ट किया कि जांच मौजूदा Chief Election Commissioner के संवैधानिक पद के खिलाफ नहीं बल्कि ज्ञानेश कुमार के पूर्व PWD Secretary के कार्यकाल से जुड़े आरोपों पर है। इसलिए जांच का दायरा 2006 के administrative decisions और संबंधित project तक सीमित बताया जा रहा है। पुराने भ्रष्टाचार आरोप भी जांच के दायरे में नई Vigilance inquiry में कथित भ्रष्टाचार और criminal misconduct से जुड़े आरोपों की भी जांच की जाएगी। जांच एजेंसी पुराने documents, project files, statements और पहले हुई जांच के records को दोबारा देख सकती है। उस समय क्या हुआ था? Kerala State Transport Project के तहत सड़क निर्माण और upgradation से जुड़े contractual और financial disputes सामने आए थे। इसी दौरान Lee See Been की मौत हुई और मामले ने राजनीतिक तथा प्रशासनिक विवाद का रूप ले लिया। बाद में जांच हुई, लेकिन अब राज्य सरकार ने लगभग दो दशक बाद इसे फिर से जांचने का फैसला किया है। SIR विवाद के बीच फिर चर्चा में मामला ज्ञानेश कुमार पहले से Special Intensive Revision यानी SIR और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर राजनीतिक विवाद के केंद्र में हैं। दिल्ली और मुंबई समेत कई शहरों में उनके इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन भी हुए हैं। इसी माहौल में केरल की पुरानी जांच दोबारा खुलने से मामला और अधिक राजनीतिक चर्चा में आ गया है। आरोप साबित होना अभी बाकी Vigilance inquiry शुरू होने का अर्थ यह नहीं है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आरोप सिद्ध हो गए हैं। जांच एजेंसी को अब उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर यह तय करना होगा कि मामले में किसी तरह की आपराधिक या प्रशासनिक जिम्मेदारी बनती है या नहीं। आगे क्या होगा? Vigilance and Anti-Corruption Bureau पुराने case records की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। अगर जांच में prima facie criminal misconduct या भ्रष्टाचार के प्रमाण सामने आते हैं, तो आगे कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है। source – The Indian Express / The Economic Times / Times of India / NDTV / ANI जय राष्ट्र न्यूज़

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