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गाजियाबाद में चलती Mahindra XUV300 में लगी भीषण आग, बड़ा हादसा टला; सभी सवार सुरक्षित

गाजियाबाद, 18 अक्टूबर 2026: दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर इंदिरापुरम के पास गौर बिज पार्क के सामने एक चलती Mahindra XUV300 में अचानक भीषण आग लग गई। घटना रात करीब 8:30 बजे की बताई जा रही है। राहत की बात यह रही कि कार में सवार सभी लोग समय रहते बाहर निकल गए। घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। देखते ही देखते आग की लपटों में घिरी कार प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, कार से अचानक धुआं उठने लगा, जिसके बाद आग तेजी से फैल गई। कुछ ही मिनटों में पूरा वाहन आग की लपटों से घिर गया। इस घटना के कारण एक्सप्रेसवे पर कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। समय रहते बाहर निकले कार सवार कार में मौजूद लोगों ने स्थिति को भांपते हुए समय रहते वाहन से बाहर निकलकर अपनी जान बचाई। उनकी तत्परता के कारण एक बड़ा हादसा टल गया। घटना में किसी के घायल होने की खबर सामने नहीं आई है। दमकल की टीम ने आग पर पाया काबू घटना की सूचना मिलने के बाद वैशाली फायर स्टेशन से दमकल की टीम मौके पर पहुंची और आग बुझाने का अभियान शुरू किया। हालांकि, आग पर काबू पाए जाने तक कार काफी हद तक जल चुकी थी। आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं कार में आग लगने की सटीक वजह फिलहाल स्पष्ट नहीं हो पाई है। तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट जैसी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है, लेकिन आग लगने के वास्तविक कारण की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। दिल्ली–मेरठ एक्सप्रेसवे पर यातायात प्रभावित घटना के दौरान मेरठ की ओर जाने वाली लेन पर कुछ समय के लिए यातायात की रफ्तार धीमी हो गई। दमकल विभाग की कार्रवाई के बाद स्थिति सामान्य कराई गई। स्रोत: Amar Ujala, IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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नवरात्रि के बीच मां भगवती मंदिर में भीषण आग, ऐतिहासिक मंदिर का मुख्य हिस्सा जलकर खाक

बागेश्वर, 17 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के बदियाकोट स्थित प्राचीन आदि बद्री मां नंदा भगवती मंदिर में नवरात्रि के दौरान भीषण आग लग गई। आग की चपेट में आने से मंदिर के मुख्य ढांचे, पूजा मंडप और पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों के अनुसार, यह मंदिर सदियों से क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। लकड़ी का मुख्य ढांचा बुरी तरह क्षतिग्रस्त मंदिर का बड़ा हिस्सा लकड़ी से बना था और उस पर पारंपरिक शैली की बारीक नक्काशी की गई थी। आग तेजी से फैलने के कारण मंदिर के मुख्य ढांचे, मूर्ति स्थल और पूजा मंडप को भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय लोगों ने दावा किया कि आग की भीषण गर्मी से मंदिर की घंटियां तक पिघल गईं। इस घटना से मंदिर की पारंपरिक वास्तुकला और ऐतिहासिक विरासत को बड़ा नुकसान हुआ है। आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं मंदिर में आग लगने के सटीक कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है। नवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दीपक जलाए जाने के कारण उससे आग लगने की आशंका जताई जा रही है। वहीं, मंदिर में बिजली का कनेक्शन होने के चलते शॉर्ट सर्किट की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। आग लगने के वास्तविक कारणों का पता जांच पूरी होने के बाद ही चल सकेगा। दुर्गम इलाके ने बढ़ाई राहत कार्यों में मुश्किल बदियाकोट हिमालयी क्षेत्र में स्थित एक दुर्गम इलाका है। यहां तक दमकल वाहनों की तत्काल पहुंच आसान नहीं होने के कारण आग बुझाने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। स्थानीय लोगों ने आग पर काबू पाने के प्रयास किए, लेकिन आग की तीव्रता के कारण मंदिर को बड़े पैमाने पर नुकसान हुआ। दानपुर क्षेत्र का प्रमुख आस्था केंद्र आदि बद्री मां नंदा भगवती मंदिर को दानपुर क्षेत्र की 14 पट्टियों का साझा शक्तिपीठ माना जाता है। मंदिर से जुड़ी स्थानीय धार्मिक परंपराएं और हर आठ वर्ष में आयोजित होने वाली ‘आठ्यौं जात’ भी क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ऐसे में मंदिर को हुआ नुकसान केवल धार्मिक स्थल तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे स्थानीय समुदाय की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी बड़ी क्षति माना जा रहा है। नुकसान का आकलन जारी मंदिर समिति ने पुलिस को शिकायत दी है। प्रशासन आग लगने के कारणों की जांच करने के साथ मंदिर को हुए नुकसान का आकलन कर रहा है। यह मंदिर उत्तराखंड सरकार के ‘मानसखंड मंदिर माला मिशन’ का भी हिस्सा है। मंदिर के विकास के लिए करीब 1.1 करोड़ रुपये स्वीकृत किए जाने की जानकारी सामने आई है। फिलहाल, जांच और नुकसान के आकलन के बाद ही मंदिर की स्थिति तथा आगे की बहाली से जुड़ी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। स्रोत – दैनिक जागरण, टाइम्स ऑफ इंडिया, दैनिक ट्रिब्यून जय राष्ट्र न्यूज़

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इंदौर जल त्रासदी के बाद सवालों में रहे Rohit Sisodia बने Raisen Collector, नियुक्ति पर सियासी विवाद तेज

भोपाल, 16 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश सरकार ने 2017 बैच के IAS अधिकारी Rohit Sisodia को रायसेन का कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त किया है। उनकी नियुक्ति को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है, क्योंकि इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से जुड़ी त्रासदी की न्यायिक जांच के दौरान उनके खिलाफ प्रशासनिक चूक को लेकर गंभीर टिप्पणियां सामने आने की खबरें थीं। रायसेन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी उन्हें कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। क्यों उठ रहे हैं नियुक्ति पर सवाल? रिपोर्टों के मुताबिक, इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी की त्रासदी में 36 लोगों की मौत हुई थी। इस मामले में प्रशासनिक व्यवस्था और जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठे थे। Rohit Sisodia के खिलाफ भी कार्रवाई किए जाने और उन्हें निलंबित किए जाने की खबरें सामने आई थीं। अब कुछ ही महीनों बाद उन्हें रायसेन जिले की जिम्मेदारी सौंपे जाने पर विपक्ष ने सवाल उठाए हैं। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि जांच में सामने आए निष्कर्षों और जवाबदेही से जुड़े सवालों के बीच उनकी नई नियुक्ति का आधार क्या है। Congress ने सरकार को घेरा मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Jitu Patwari और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कांग्रेस ने सवाल उठाया है कि न्यायिक जांच की रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई हुई और प्रशासनिक चूक को लेकर सवालों के घेरे में आए अधिकारी को जिला कलेक्टर नियुक्त करने का आधार क्या है। पार्टी ने इस फैसले को त्रासदी से प्रभावित परिवारों के प्रति अन्याय बताते हुए सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए हैं। सरकार के IAS Reshuffle का हिस्सा है नियुक्ति Rohit Sisodia की नई पोस्टिंग मध्य प्रदेश में हुए व्यापक IAS फेरबदल का हिस्सा है। इस प्रशासनिक बदलाव के दौरान कई वरिष्ठ अधिकारियों के विभागों, अतिरिक्त प्रभार और जिला स्तर की जिम्मेदारियों में परिवर्तन किया गया। हालांकि, उनकी नियुक्ति को लेकर उठे सवालों के कारण यह फैसला राजनीतिक चर्चा के केंद्र में आ गया है। Official Website पर Collector के रूप में दर्ज नाम रायसेन जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के ‘Who’s Who’ सेक्शन में Rohit Sisodia को Collector & DM के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। इससे उनकी नई पोस्टिंग की पुष्टि होती है। हालांकि, नियुक्ति की आधिकारिक पुष्टि और इंदौर त्रासदी से संबंधित जांच में उठाए गए सवाल अलग-अलग विषय हैं, जिन पर संबंधित दस्तावेजों और सरकार के रुख के आधार पर विचार किया जाना जरूरी है। विवाद के बीच जांच की कार्रवाई पर नजर Rohit Sisodia की नियुक्ति के बाद अब ध्यान इस बात पर है कि इंदौर जल त्रासदी की जांच में सामने आए निष्कर्षों और सिफारिशों पर आगे क्या कार्रवाई होती है। साथ ही, राज्य सरकार प्रशासनिक जवाबदेही और नई नियुक्ति को लेकर विपक्ष के सवालों का क्या जवाब देती है, इस पर भी नजर बनी हुई है। स्रोत: Raisen District Administration, Indian Masterminds, IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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Karnataka में दर्दनाक सड़क हादसा: Mysuru के पास Kerala जा रही bus की lorry से टक्कर, 4 की मौत; 14 घायल

Mysuru, 16 अक्टूबर 2026: Karnataka में Mysuru के पास एक गंभीर सड़क हादसे में Kerala जा रही private bus की lorry से टक्कर हो गई। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई, जबकि 14 लोग घायल बताए जा रहे हैं। हादसा कैसे हुआ? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक bus Kerala की ओर जा रही थी, तभी Mysuru के पास highway पर उसकी एक lorry से जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर इतनी तेज थी कि bus का आगे का हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया Accident के बाद स्थानीय police और emergency teams मौके पर पहुंचीं। घायल यात्रियों को नजदीकी hospitals में भर्ती कराया गया, जहां कुछ की हालत गंभीर बताई जा रही है। चार लोगों की मौके पर या इलाज के दौरान मौत Reports के मुताबिक दुर्घटना में चार लोगों की जान चली गई। मृतकों की पहचान और उनके परिवारों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है। Police ने शुरू की जांच Karnataka Police ने मामला दर्ज कर accident के कारणों की जांच शुरू कर दी है। यह देखा जा रहा है कि हादसा overspeeding, driver error, visibility issue या किसी अन्य वजह से हुआ। Kerala-bound passengers थे bus में Bus में बड़ी संख्या में Kerala जाने वाले passengers सवार थे। हादसे के बाद कई यात्रियों को alternative transport की व्यवस्था से आगे भेजा गया। source – The Indian Express, Karnataka Police जय राष्ट्र न्यूज़

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मध्य प्रदेश में आदिवासी छात्रों से कथित अभद्रता का वीडियो वायरल, पुलिस इंस्पेक्टर सस्पेंड; CM मोहन यादव ने दिए जांच के आदेश

भोपाल, 15 अक्टूबर 2026: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आदिवासी छात्रों के साथ कथित अभद्रता का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग ने कार्रवाई की है। मामले में मिसरोद थाना प्रभारी इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रदर्शन के दौरान हुआ विवाद यह घटना 13 अक्टूबर को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर आदिवासी छात्रों और युवाओं के प्रदर्शन के दौरान हुई। प्रदर्शनकारी गोंडवाना गणतंत्र पार्टी की छात्र इकाई से जुड़े थे और अपनी विभिन्न मांगों को लेकर विरोध जता रहे थे। पुलिस के मुताबिक, कुछ प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पार कर मुख्यमंत्री आवास की ओर बढ़ने की कोशिश की, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लिया गया। ‘जय जोहार’ के नारों के बीच कथित अभद्र टिप्पणी रिपोर्ट्स के अनुसार, हिरासत में लिए गए छात्र पुलिस वाहन में ‘जय जोहार’ के नारे लगा रहे थे। इसी दौरान वायरल वीडियो में इंस्पेक्टर रतन सिंह परिहार कथित तौर पर आपत्तिजनक और अभद्र टिप्पणियां करते दिखाई दे रहे हैं। आदिवासी संगठनों ने इन कथित टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि इससे समुदाय की गरिमा और पहचान का अपमान हुआ है। हालांकि, घटना से जुड़े सभी पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। पुलिस इंस्पेक्टर निलंबित भोपाल पुलिस के डीसीपी जोन-2 ने 14 अक्टूबर को इंस्पेक्टर के निलंबन का आदेश जारी किया। आदेश के अनुसार, वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा व्यवहार प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों से अपेक्षित आचरण के अनुरूप नहीं है और इससे विभाग की छवि प्रभावित हो सकती है। CM मोहन यादव ने दिए जांच के निर्देश मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मामले की विस्तृत जांच कराने के निर्देश दिए हैं। वहीं, राज्य मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल ने कहा कि जांच के दौरान यदि अन्य पुलिसकर्मी भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। आदिवासी संगठनों ने FIR की मांग की कांग्रेस नेताओं और आदिवासी संगठनों ने इंस्पेक्टर के निलंबन को पर्याप्त नहीं बताते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। जय आदिवासी युवा शक्ति (JAYS) से जुड़े नेताओं ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी SC/ST Act के तहत भी कार्रवाई की मांग उठाई है। फिलहाल, मामले की विस्तृत जांच जारी है। जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। Source – The Indian Express, Times of India, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तराखंड में गुटखा और तंबाकू-निकोटीन वाले पान मसाला पर एक साल का प्रतिबंध, निर्माण से बिक्री तक रोक

देहरादून, 14 अक्टूबर 2026: उत्तराखंड सरकार ने गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकोटीन युक्त अन्य खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर एक साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है। यह आदेश खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FDA) के आयुक्त विनय शंकर पांडेय ने जारी किया है। इसका उद्देश्य राज्य में ऐसे उत्पादों की उपलब्धता पर रोक लगाकर सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करना है। एक साल तक लागू रहेगा प्रतिबंध जारी आदेश के अनुसार, तंबाकू या निकोटीन को सामग्री के रूप में शामिल करने वाले खाद्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण और बिक्री पर रोक रहेगी। यह कार्रवाई खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 30(2)(a) के तहत की गई है। सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा पर जोर सरकार ने इस फैसले को सार्वजनिक स्वास्थ्य की सुरक्षा से जोड़ा है। खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत खाद्य उत्पादों में तंबाकू और निकोटीन के इस्तेमाल पर प्रतिबंध संबंधी प्रावधान पहले से मौजूद हैं। नए आदेश के जरिए राज्य में संबंधित उत्पादों पर लागू प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने का प्रयास किया जाएगा। प्रतिबंध लागू कराने के लिए अधिकारियों को निर्देश आदेश को वरिष्ठ स्वास्थ्य और प्रशासनिक अधिकारियों तक भेजा गया है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि राज्यभर में निर्माण इकाइयों, भंडारण केंद्रों, वितरकों और खुदरा दुकानों तक नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए। प्रतिबंध के उल्लंघन पर संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। 33 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में पहले भी ऐसे प्रतिबंध द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तराखंड से पहले 33 राज्य और केंद्रशासित प्रदेश गुटखा तथा तंबाकू या निकोटीन युक्त पान मसाला उत्पादों पर इसी तरह के प्रतिबंध लगा चुके हैं। यह फैसला देश में ऐसे उत्पादों की बिक्री और वितरण को नियंत्रित करने के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है। स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता गुटखा और तंबाकू युक्त उत्पादों का सेवन मुंह के कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों के जोखिम से जुड़ा है। इसी कारण खाद्य सुरक्षा नियमों और संबंधित प्रावधानों के तहत इन उत्पादों के निर्माण तथा बिक्री पर रोक लगाने के कदम उठाए जाते रहे हैं। उत्तराखंड में एक साल के इस प्रतिबंध के प्रभावी क्रियान्वयन की जिम्मेदारी संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों पर होगी। स्रोत: द इंडियन एक्सप्रेस, उत्तराखंड FDA जय राष्ट्र न्यूज़

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Arunachal Pradesh के 11,200-MW hydel project पर विरोध तेज, security बढ़ी; tribal groups ने livelihood और displacement पर उठाए सवाल

ईटानगर, 13 अक्टूबर 2026: Arunachal Pradesh की Siang Valley में प्रस्तावित 11,200-MW Siang Upper Multipurpose Project (SUMP) को लेकर विरोध तेज हो गया है। Pre-Feasibility Report के लिए survey और drilling activities शुरू कराने के उद्देश्य से इलाके में security deployment बढ़ाया गया है। वहीं indigenous Adi community और local groups का कहना है कि project से उनकी जमीन, आजीविका, संस्कृति और ancestral settlements पर गंभीर असर पड़ सकता है। Survey और drilling के लिए बढ़ाई गई security करीब एक महीने से Ugeng-Komkar और आसपास के क्षेत्रों में security personnel तैनात किए गए हैं, ताकि proposed project के लिए technical surveys और drilling पूरी की जा सके। Security presence और protesters के खिलाफ कार्रवाई को लेकर स्थानीय स्तर पर असंतोष बढ़ा है। Tribal groups को displacement का डर Siang Indigenous Farmers’ Forum समेत स्थानीय संगठनों का कहना है कि बड़े reservoir के कारण गांवों के डूबने, agricultural land के नुकसान और traditional livelihoods के प्रभावित होने का खतरा है। विभिन्न campaign groups का दावा है कि लगभग 27 गांव submergence के जोखिम में आ सकते हैं, हालांकि displacement का अंतिम आंकड़ा detailed assessment के बाद ही स्पष्ट होगा। Protesters और security forces के बीच हो चुकी हैं झड़पें सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में project के विरोध के दौरान कई जगह clashes सामने आए। Farmers’ group SIFF ने 4 अक्टूबर की झड़पों में प्रभावित परिवारों के 67 लोगों के घायल होने का दावा किया, जबकि police ने भी security personnel के घायल होने और arrests की जानकारी दी। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि पूरी तरह नहीं हुई है। सरकार ने project को China factor से जोड़ा State government का कहना है कि project का strategic महत्व भी है। China, Tibet में Yarlung Tsangpo पर करीब 60,000-MW Medog hydropower project विकसित कर रहा है। Arunachal सरकार SUMP को downstream water management और national security के लिहाज से अहम मान रही है। CM Pema Khandu बोले—अभी construction का फैसला नहीं Chief Minister Pema Khandu ने कहा है कि फिलहाल केवल feasibility study की जा रही है और dam बनाने का final decision नहीं हुआ है। उनका कहना है कि आगे बढ़ने से पहले environmental और social impact assessments, statutory clearances और local consultations जरूरी होंगे। स्थानीय समुदाय ने meaningful consultation की मांग की Adi community और protesting organisations की प्रमुख मांग है कि survey activities रोकी जाएं, security forces वापस ली जाएं और traditional village institutions के साथ व्यापक consultation किया जाए। उनके मुताबिक Siang River केवल livelihood का स्रोत नहीं बल्कि उनकी cultural और spiritual identity का भी अहम हिस्सा है। source – The Indian Express, Hindustan Times जय राष्ट्र न्यूज़

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सतना में BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन, राहुल गांधी का पुतला दहन; JNU मामले पर कांग्रेस से मांगा जवाब

सतना: मध्य प्रदेश के सतना में 12 अक्टूबर की शाम भारतीय जनता पार्टी (BJP) महिला मोर्चा ने महिला सुरक्षा, सम्मान और न्याय के मुद्दे पर कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन किया। जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला दहन किया और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न मामले पर कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा। जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने प्रदर्शन BJP महिला मोर्चा का प्रदर्शन जयस्तंभ चौक स्थित जिला कांग्रेस कार्यालय के सामने आयोजित किया गया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए कांग्रेस पर महिला सुरक्षा के मुद्दे पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि कांग्रेस सार्वजनिक रूप से महिलाओं की सुरक्षा की बात करती है, लेकिन अपने नेताओं से जुड़े मामलों में उसे स्पष्ट रुख अपनाना चाहिए। राहुल गांधी का पुतला जलाकर जताया विरोध प्रदर्शन के दौरान BJP महिला मोर्चा की कार्यकर्ताओं ने राहुल गांधी का पुतला जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस कार्रवाई का वीडियो स्थानीय स्तर पर चर्चा में रहा और मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हुई। JNU के मामले को लेकर विरोध यह प्रदर्शन कांग्रेस सांसद और JNU के प्रोफेसर अंगोमचा बिमोल अकोइजाम से जुड़े कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर किया गया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, विश्वविद्यालय ने आंतरिक जांच के बाद 9 अक्टूबर को अकोइजाम की सेवाएं समाप्त करने का आदेश जारी किया था। हालांकि, अकोइजाम ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में आरोपों, जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई को अलग-अलग तथ्यों के रूप में देखना जरूरी है। 11 छात्राओं की शिकायतों का दावा BJP की ओर से दावा किया गया है कि कम से कम 11 छात्राओं ने अकोइजाम के खिलाफ शिकायतें की थीं। इसी मुद्दे को लेकर BJP महिला मोर्चा ने दिल्ली समेत देश के कई हिस्सों में प्रदर्शन किए और कांग्रेस नेतृत्व से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की। इन शिकायतों और आरोपों से संबंधित दावों को अंतिम रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सुष्मिता सिंह परिहार के नेतृत्व में प्रदर्शन सतना में हुए प्रदर्शन का नेतृत्व BJP महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष सुष्मिता सिंह परिहार ने किया। प्रदर्शन में पूर्व महापौर विमला पांडेय, ममता पांडेय, पूर्व विधायक ऊषा चौधरी और जिला BJP अध्यक्ष भगवती पांडेय सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए। कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगने की मांग प्रदर्शनकारी नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी से मामले पर स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। BJP महिला मोर्चा का आरोप है कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस प्रकरण पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं दी है। यह आरोप BJP नेताओं की राजनीतिक प्रतिक्रिया का हिस्सा है। कांग्रेस का आधिकारिक पक्ष इस रिपोर्ट में उपलब्ध जानकारी के आधार पर स्पष्ट नहीं है। कई राज्यों में हुए प्रदर्शन रिपोर्टों के मुताबिक, 12 और 13 अक्टूबर को दिल्ली, हिमाचल प्रदेश के मंडी, हमीरपुर, कुल्लू और नाहन तथा उत्तर प्रदेश के ललितपुर समेत कई स्थानों पर BJP महिला मोर्चा ने इसी मुद्दे पर प्रदर्शन किए। कुछ स्थानों पर राहुल गांधी और अकोइजाम के पुतले भी जलाए गए। दिल्ली में BJP महिला मोर्चा ने अपने विरोध अभियान को “नारी शक्ति हुंकार आंदोलन” नाम दिया। संगठन ने मामले में जवाबदेही तय करने और कांग्रेस नेतृत्व से अपना पक्ष स्पष्ट करने की मांग की। राजनीतिक विवाद ने पकड़ा जोर JNU से जुड़े इस मामले को लेकर BJP और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव बढ़ गया है। BJP इसे महिला सुरक्षा और राजनीतिक जवाबदेही से जोड़ रही है। वहीं, अकोइजाम आरोपों से इनकार कर चुके हैं। मामले में शिकायतों, आंतरिक जांच और विश्वविद्यालय की कार्रवाई से जुड़े तथ्यों को राजनीतिक आरोपों से अलग रखते हुए देखना महत्वपूर्ण है। Source: Indian News Trust / The Indian Express / India Today / Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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चंदौली में 200 साल पुराने काली मंदिर को तोड़ते समय हादसा, गुंबद गिरने से मजदूर की मौत

चंदौली: उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पंडित दीनदयाल उपाध्याय नगर में सड़क चौड़ीकरण परियोजना के तहत करीब 200 साल पुराने काली मंदिर को ध्वस्त करने के दौरान बड़ा हादसा हो गया। मंदिर का भारी गुंबद अचानक गिरने से मलबे में दबकर 45 वर्षीय मजदूर बलदेव यादव की मौत हो गई, जबकि एक अन्य व्यक्ति घायल हो गया। मंदिर को हटाने का काम लोक निर्माण विभाग (PWD) की परियोजना के तहत एक निजी ठेकेदार द्वारा कराया जा रहा था। सड़क चौड़ीकरण के लिए हटाया जा रहा था मंदिर यह मंदिर जीटी रोड के चौड़ीकरण परियोजना के निर्धारित मार्ग में आ रहा था। सड़क विस्तार का काम पिछले कई महीनों से चल रहा था। इसी परियोजना के तहत पुराने मंदिर को हटाने का निर्णय लिया गया था। अचानक गिरा मंदिर का गुंबद मंदिर के ध्वस्तीकरण के दौरान बुलडोजर की मदद से संरचना का एक हिस्सा तोड़ा जा रहा था। इसी बीच मंदिर का ऊपरी गुंबद अचानक नीचे गिर गया। इसकी चपेट में आने से दो लोग मलबे में दब गए। बलदेव यादव की मौत, एक अन्य व्यक्ति घायल हादसे में जान गंवाने वाले मजदूर की पहचान 45 वर्षीय बलदेव यादव के रूप में हुई। बताया गया कि वह ध्वस्तीकरण के दौरान गाइड रोप संभाल रहे थे। हादसे में गंभीर चोट लगने के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी मौत हो गई। वहीं, घटना में घायल हुए दूसरे व्यक्ति को भी बचाव दल ने मलबे से बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया। मंदिर को पहले ही किया गया था स्थानांतरित प्रशासन के अनुसार, पुराने मंदिर को हटाने से पहले पास में नया मंदिर बनाया गया था। पुरानी संरचना से मूर्तियों को नए मंदिर में स्थानांतरित करने के बाद प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। इसके बाद मंदिर समिति की सहमति से पुराने मंदिर को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी। प्रशासन और पुलिस को नहीं दी गई थी पूर्व सूचना जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार, मंदिर का ध्वस्तीकरण शुरू करने से पहले स्थानीय प्रशासन और पुलिस को इसकी पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। हादसे के बाद यह पहलू भी जांच के दायरे में आया। सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल घटना के बाद ध्वस्तीकरण स्थल पर सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठे। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 35 फीट ऊंचे मंदिर के आसपास लगभग 20 फीट तक ही बैरिकेडिंग की गई थी। मजदूरों के हेलमेट और सुरक्षा जैकेट जैसे जरूरी उपकरण नहीं पहनने की बात भी सामने आई। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया पर भी सवाल रिपोर्टों के अनुसार, मंदिर की संरचना को चरणबद्ध तरीके से तोड़ने की योजना थी। हालांकि, आरोप है कि ठेकेदार ने मशीनरी की मदद से संरचना को एक साथ गिराने की कोशिश की, जिससे हादसे का खतरा बढ़ गया। ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। DM ने PWD अधिकारियों को किया तलब हादसे के बाद चंदौली के जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों को तलब कर घटना की वजह और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया के बारे में जानकारी मांगी। घटना के तुरंत बाद ध्वस्तीकरण का काम भी रोक दिया गया। मृतक PWD का नियमित कर्मचारी नहीं था कुछ स्थानीय रिपोर्टों में बलदेव यादव को PWD कर्मचारी बताया गया, लेकिन विस्तृत रिपोर्टों के अनुसार वह विभाग के निजी ठेकेदार के साथ काम कर रहे मजदूर थे। इसलिए उन्हें PWD का नियमित कर्मचारी बताने के बजाय विभाग की परियोजना में कार्यरत मजदूर कहना अधिक सटीक है। सड़क परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा पर फिर सवाल इस हादसे ने सड़क चौड़ीकरण और ध्वस्तीकरण परियोजनाओं में मजदूरों की सुरक्षा, पर्याप्त बैरिकेडिंग और सुरक्षात्मक उपकरणों की उपलब्धता पर सवाल खड़े किए हैं। पुराने और ऊंचे भवनों या धार्मिक संरचनाओं को गिराते समय नियंत्रित ध्वस्तीकरण प्रक्रिया, प्रशिक्षित कर्मचारियों और उचित सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत एक बार फिर सामने आई है। स्रोत: The Indian Express / Dainik Jagran / Prabhat Khabar जय राष्ट्र न्यूज़

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ज्ञानपुर जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल, प्रसव पीड़ा में पहुंची महिला ने अस्पताल के बाहर दिया बच्चे को जन्म

भदोही: उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के ज्ञानपुर स्थित महाराजा चेत सिंह जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। 20 वर्षीय गर्भवती महिला को कथित तौर पर भर्ती न किए जाने के बाद उसने अस्पताल के बाहर सड़क किनारे बच्चे को जन्म दिया। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच कर कई डॉक्टरों और कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की। प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंची थी महिला रानी देवी नाम की 20 वर्षीय महिला को प्रसव पीड़ा होने पर एम्बुलेंस से ज्ञानपुर जिला अस्पताल लाया गया था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल पहुंचने के बावजूद उसे भर्ती नहीं किया गया और इलाज करने के बजाय दूसरे अस्पताल में रेफर कर दिया गया। अस्पताल के बाहर हुआ प्रसव अस्पताल से बाहर निकलने के बाद महिला की हालत बिगड़ गई। इसके बाद परिजनों ने चादर की आड़ बनाकर सड़क किनारे ही प्रसव कराया। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे। जाति के आधार पर भेदभाव का भी आरोप महिला के परिवार ने आरोप लगाया कि उसे मुशहर समुदाय से होने के कारण कथित तौर पर इलाज से वंचित किया गया। हालांकि, यह परिवार की ओर से लगाया गया आरोप है। मामले की जांच में चिकित्सकीय लापरवाही और प्रशासनिक खामियों के पहलुओं पर भी ध्यान दिया गया। Deputy CM ने लिया संज्ञान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने घटना का संज्ञान लिया। उन्होंने भदोही के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) को मामले की जांच के लिए समिति गठित करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। Emergency Medical Officer पर कार्रवाई जांच में Emergency Medical Officer डॉ. पंकज कुमार को महिला की जांच और शुरुआती उपचार में लापरवाही का दोषी पाया गया। इसके बाद उनकी सेवाएं समाप्त करने की प्रक्रिया शुरू की गई। Staff nurse भी कार्रवाई के दायरे में स्टाफ नर्स नीलम मौर्य पर भी मरीज की जांच और एम्बुलेंस की व्यवस्था करने में लापरवाही का आरोप लगा। जांच के बाद उनके खिलाफ निलंबन और स्थानांतरण से जुड़ी कार्रवाई की गई। Gynaecologist की सैलरी रोकी गई स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मुकेश प्रजापति का सितंबर महीने का वेतन अगले आदेश तक रोक दिया गया। एक अन्य डॉक्टर डॉ. नीलिमा धवन के खिलाफ भी विभागीय कार्रवाई की सिफारिश भेजी गई। CMS के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक (CMS) डॉ. ए.के. तिवारी के खिलाफ प्रशासनिक लापरवाही को लेकर विभागीय कार्रवाई की सिफारिश की गई। इससे मामला केवल व्यक्तिगत लापरवाही तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अस्पताल के प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए। DM ने अस्पताल का किया निरीक्षण घटना के बाद जिला प्रशासन ने अस्पताल की व्यवस्था को लेकर सख्ती दिखाई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि मरीजों के इलाज में किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, दूर-दराज से आने वाले मरीजों को समय पर उपचार और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया। स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल यह मामला सरकारी अस्पतालों में आपातकालीन मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, कर्मचारियों की जवाबदेही और मरीजों के साथ व्यवहार जैसे अहम मुद्दों को सामने लाता है। प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंची महिला को शुरुआती उपचार नहीं मिलने का आरोप जिला स्तर की स्वास्थ्य व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कार्रवाई के बाद भी निगरानी जरूरी स्वास्थ्य विभाग ने जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की है, लेकिन अब सबसे अहम सवाल यह है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पतालों में निगरानी, आपातकालीन चिकित्सा प्रोटोकॉल और कर्मचारियों की जवाबदेही कितनी मजबूत की जाती है। Source – The Times of India, TV9 Bharatvarsh, Hindustan, Asianet News जय राष्ट्र न्यूज़

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