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वृंदावन से कैंची धाम तक… आखिर क्यों उमड़ रही है श्रद्धालुओं की भारी भीड़?

नई दिल्ली: गांधी जयंती के लंबे वीकेंड के दौरान उत्तर भारत के कई धार्मिक स्थलों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर से लेकर उत्तराखंड के कैंची धाम तक लंबी कतारें, ट्रैफिक जाम और भीड़ प्रबंधन की चुनौती सामने आई। कैंची धाम में भीड़ के पीछे लंबे वीकेंड के साथ हालिया फिल्म ‘Hanuman Ansh’ के बाद नीम करोली बाबा में बढ़ी दिलचस्पी को भी एक कारण माना जा रहा है। लंबे वीकेंड ने बढ़ाई धार्मिक यात्रा 2 अक्टूबर की छुट्टी और उसके बाद वीकेंड के कारण बड़ी संख्या में लोग दिल्ली-NCR और आसपास के क्षेत्रों से धार्मिक और पहाड़ी स्थलों की ओर निकले। इससे वृंदावन, हरिद्वार, ऋषिकेश, नैनीताल और कैंची धाम समेत कई जगहों पर सामान्य से कहीं ज्यादा भीड़ दर्ज की गई। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के बाहर भारी भीड़ वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में तीन दिन की छुट्टियों के चलते श्रद्धालुओं की संख्या अचानक बढ़ गई। मंदिर के आसपास की सड़कों पर ट्रैफिक जाम और दर्शन के लिए लंबी कतारें देखने को मिलीं। स्थानीय प्रशासन को वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने और भीड़ प्रबंधन के लिए अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ी। कैंची धाम में भीड़ ने तोड़े रिकॉर्ड उत्तराखंड के नैनीताल जिले स्थित कैंची धाम में भी पिछले कुछ दिनों में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी है। 3 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट में सुबह से ही मंदिर गेट से हाईवे तक भारी भीड़ दर्ज की गई और हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचे। मंदिर प्रबंधन और सुरक्षाकर्मियों को भीड़ नियंत्रित करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। ‘Hanuman Ansh’ के बाद बढ़ी Neem Karoli Baba में दिलचस्पी कैंची धाम की मौजूदा भीड़ को हालिया फिल्म ‘Hanuman Ansh’ की लोकप्रियता से भी जोड़ा जा रहा है। फिल्म में नीम करोली बाबा से जुड़े आध्यात्मिक संदर्भों के बाद सोशल मीडिया और इंटरनेट पर कैंची धाम को लेकर रुचि बढ़ी। वायरल वीडियो और ट्रैवल पोस्ट ने भी बड़ी संख्या में लोगों का ध्यान इस स्थान की ओर खींचा। फिल्म के निर्देशक ने भी की अपील ‘Hanuman Ansh’ के निर्देशक डॉ. विशाल चतुर्वेदी ने श्रद्धालुओं से कैंची धाम जाने से पहले वहां की स्थिति जांचने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भीड़ इतनी अधिक है कि महिलाओं और बच्चों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने श्रद्धालुओं को जरूरत पड़ने पर अन्य धार्मिक स्थलों पर जाने का विकल्प भी सुझाया। घंटों तक जाम में फंसे वाहन कैंची धाम और आसपास के मार्गों पर भारी ट्रैफिक के कारण सामान्य यात्रा समय कई गुना बढ़ गया। कुछ रिपोर्टों में तीन घंटे की यात्रा को पूरा करने में करीब 11 घंटे तक लगने की बात सामने आई है। स्थानीय लोगों, पर्यटकों और आवश्यक सेवाओं के वाहनों को भी इससे परेशानी हुई। सोशल मीडिया भी बना crowd multiplier धार्मिक स्थलों की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल होने के कारण भी pilgrimage tourism में अचानक वृद्धि देखने को मिल रही है। कैंची धाम जैसे स्थान पहले से लोकप्रिय थे, लेकिन फिल्मों, reels और celebrity references के कारण नई पीढ़ी के यात्रियों में भी इन जगहों को लेकर रुचि बढ़ी है। आस्था के साथ travel trend भी बड़ी वजह विशेषज्ञ धार्मिक यात्रा के इस पैटर्न को केवल आस्था तक सीमित नहीं देखते। Long weekend, आसान road connectivity, social media exposure और spiritual tourism का trend—इन सभी कारणों ने मिलकर एक साथ बड़ी संख्या में लोगों को इन स्थलों तक पहुंचाया है। प्रशासन के सामने crowd management की चुनौती अचानक बढ़ी भीड़ के कारण प्रशासन के सामने parking, traffic diversion, medical emergency और सुरक्षित दर्शन व्यवस्था जैसी चुनौतियां बढ़ गई हैं। उत्तराखंड के कई पहाड़ी routes पर अतिरिक्त पुलिस बल और traffic restrictions लगाए गए ताकि जाम और दुर्घटनाओं का खतरा कम किया जा सके। यात्रा से पहले स्थिति जांचने की सलाह मौजूदा भीड़ को देखते हुए यात्रियों को धार्मिक स्थलों की ओर निकलने से पहले स्थानीय traffic updates, parking arrangements और crowd situation जांचने की सलाह दी जा रही है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और स्वास्थ्य संबंधी समस्या वाले लोगों को अत्यधिक भीड़ वाले दिनों में अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत है। source – India Today / Dainik Jagran / NDTV / The Economic Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल के कासरगोड में borewell rig घर पर पलटा, दो प्रवासी मजदूरों की मौत; परिवार बाल-बाल बचा

कासरगोड: केरल के कासरगोड जिले के वेस्ट एलेरी स्थित वरक्कड़ इलाके में शनिवार तड़के एक borewell drilling rig से लैस वाहन अनियंत्रित होकर एक घर पर पलट गया, जिससे दो प्रवासी मजदूरों की मौत हो गई। हादसे में घर का एक हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन अंदर मौजूद परिवार के सदस्य सुरक्षित बच गए। तड़के करीब 1 से 2 बजे हुआ हादसा पुलिस और स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार हादसा 3 अक्टूबर की तड़के हुआ। वाहन एक खड़ी ढलान से नीचे उतर रहा था, तभी चालक ने कथित तौर पर नियंत्रण खो दिया और rig-mounted truck सड़क से हटकर नीचे बने घर पर जा गिरा। दो प्रवासी मजदूरों की मौत मृतकों की पहचान देवेंद्र, निवासी मध्य प्रदेश, और मनासर, निवासी छत्तीसगढ़, के रूप में हुई है। दोनों borewell वाहन के साथ काम कर रहे थे। हादसे के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। घर में मौजूद परिवार सुरक्षित बचा जिस घर पर वाहन पलटा, उसमें एक परिवार रह रहा था। तेज टक्कर से मकान का एक कमरा और छत का हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया, लेकिन अंदर मौजूद लोगों को चोट नहीं आई। स्थानीय लोगों ने इसे बड़ी दुर्घटना के बीच राहत की बात बताया। बिजली का खंभा भी हुआ क्षतिग्रस्त हादसे के दौरान वाहन ने एक बिजली के खंभे को भी टक्कर मारी। इससे इलाके में कुछ समय के लिए बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई। rig और वाहन भी टक्कर में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। खड़ी ढलान और मोड़ पर उठे सवाल स्थानीय निवासियों का कहना है कि दुर्घटनास्थल के पास सड़क काफी खड़ी और संकरी है। कुछ लोगों ने सड़क के पास लगे transformer और मोड़ की बनावट को भी सुरक्षा के लिहाज से समस्या बताया है। स्थानीय लोगों का दावा है कि वे इस इलाके में road widening और transformer shifting की मांग पहले भी उठा चुके हैं। driver inattention की भी जांच एक स्थानीय अधिकारी ने शुरुआती तौर पर driver inattention को संभावित कारण बताया है। हालांकि पुलिस अभी यह जांच कर रही है कि दुर्घटना वाहन की तकनीकी खराबी, सड़क की स्थिति, चालक की गलती या किसी अन्य वजह से हुई। अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस ने मामला दर्ज किया घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और rescue personnel मौके पर पहुंचे। वाहन को हटाने और क्षेत्र को सुरक्षित करने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शव पोस्टमार्टम के लिए भेजे गए दोनों मृत मजदूरों के शवों को आगे की कानूनी प्रक्रिया और पोस्टमार्टम के लिए Kanhangad District Hospital भेजा गया। वाहन मालिक को भी घटना की सूचना दे दी गई है। स्थानीय लोगों ने infrastructure सुधार की मांग की हादसे के बाद क्षेत्र में सड़क सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों ने सड़क चौड़ी करने, transformer को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने और steep stretch पर अतिरिक्त सुरक्षा उपाय करने की मांग की है ताकि भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। source – PTI / The Indian Express / Onmanorama / The New Indian Express / Deccan Chronicle जय राष्ट्र न्यूज़

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गुजरात UCC को राष्ट्रपति की मंजूरी, शादी-तलाक से लेकर उत्तराधिकार और live-in तक एक समान कानूनी ढांचा

अहमदाबाद: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने Gujarat Uniform Civil Code (UCC) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही गुजरात में शादी, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और live-in relationships जैसे निजी नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचे का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि कानून तुरंत लागू नहीं होगा; इसके लिए राज्य सरकार को अलग से commencement notification जारी करनी होगी। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद अंतिम विधायी बाधा पार गुजरात विधानसभा ने UCC Bill को मार्च 2026 में पारित किया था। राष्ट्रपति की मंजूरी 17 सितंबर को मिली और कानून को 1 अक्टूबर की extraordinary gazette में प्रकाशित किया गया। अब राज्य सरकार इसके लागू होने की तारीख तय करेगी। शादी और तलाक के लिए common framework नए कानून के तहत marriage और divorce से जुड़े मामलों के लिए समान statutory rules लागू किए जाएंगे। कानून में विवाह पंजीकरण को महत्वपूर्ण बनाया गया है और पुरुषों के लिए न्यूनतम विवाह आयु 21 वर्ष तथा महिलाओं के लिए 18 वर्ष तय रखी गई है। धार्मिक विवाह परंपराएं जारी रह सकती हैं, लेकिन विवाह को कानूनी नियमों का पालन करना होगा। एक से ज्यादा शादी पर रोक नए framework के तहत किसी व्यक्ति को पहली शादी कायम रहते दूसरी शादी करने की अनुमति नहीं होगी। Marriage registration के जरिए marital status का आधिकारिक record तैयार किया जाएगा, जिसका इस्तेमाल maintenance, inheritance और अन्य वैवाहिक विवादों में किया जा सकेगा। Live-in relationship का registration जरूरी गुजरात UCC में live-in relationships के लिए भी formal legal mechanism बनाया गया है। ऐसे रिश्ते में रहने वाले couples को designated Registrar के सामने joint statement जमा करना होगा। Relationship खत्म होने पर भी तय प्रक्रिया के तहत इसकी जानकारी देनी होगी। Live-in से जन्मे बच्चों को कानूनी अधिकार कानून में live-in relationship से जन्मे बच्चों को भी कानूनी पहचान और अधिकार दिए गए हैं। इन बच्चों को inheritance और family rights के मामलों में समान कानूनी दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। बेटा-बेटी को समान inheritance rights उत्तराधिकार के मामले में भी बड़ा बदलाव किया गया है। अगर किसी व्यक्ति की बिना वसीयत मृत्यु होती है, तो spouse, children और parents को तय हिस्से के अनुसार संपत्ति में अधिकार मिलेगा। बेटा और बेटी दोनों को समान inheritance rights दिए गए हैं। Adoption और family rights भी दायरे में कानून marriage और divorce तक सीमित नहीं है। Adoption, succession, family rights और inheritance जैसे नागरिक मामलों को भी common statutory framework में शामिल किया गया है। धार्मिक रीति-रिवाज जारी रहेंगे UCC लागू होने के बाद Nikah, Saptapadi, Anand Karaj और अन्य customary marriage ceremonies पर रोक नहीं होगी। हालांकि इन धार्मिक या पारंपरिक विवाहों को statutory requirements और registration rules का पालन करना होगा। Scheduled Tribes को मिली छूट गुजरात UCC सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू नहीं होगा। Scheduled Tribes और संविधान के Part XXI के तहत संरक्षित customary rights वाले समूहों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है। राज्य से बाहर रहने वाले गुजरातियों पर भी लागू हो सकता है कानून कानून का दायरा गुजरात की सीमा तक ही सीमित नहीं रहेगा। Eligibility rules के तहत गुजरात के कुछ residents जो राज्य से बाहर रहते हैं, वे भी इसके प्रावधानों के दायरे में आ सकते हैं। अब implementation notification का इंतजार राष्ट्रपति की मंजूरी और gazette publication के बाद UCC अब enacted law बन चुका है। लेकिन practical implementation की तारीख, detailed rules और registration procedures राज्य सरकार की अगली notification से स्पष्ट होंगे। source – The Indian Express / The New Indian Express / Gujarat Government Gazette जय राष्ट्र न्यूज़

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जम्मू-कश्मीर | बडगाम में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच मुठभेड़, शीर्ष लश्कर कमांडर हाशिम मूसा मारा गया

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले में सुरक्षाबलों के साथ मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर मोहम्मद आसिफ उर्फ हाशिम मूसा मारा गया। भारतीय सेना के अनुसार यह ऑपरेशन खांसाहिब-यूसमर्ग क्षेत्र में चलाया गया और बाद में उसका शव हथियारों व अन्य सैन्य सामग्री के साथ बरामद किया गया। सुरक्षा एजेंसियां उसे जम्मू-कश्मीर में कई बड़े आतंकी हमलों से जोड़ती रही हैं। खांसाहिब-यूसमर्ग इलाके में हुआ एनकाउंटर सेना के मुताबिक खुफिया सूचना मिलने के बाद बडगाम के ऊंचाई वाले इलाके में संयुक्त अभियान शुरू किया गया। संदिग्ध गतिविधि दिखने पर सुरक्षाबलों ने आतंकियों को चुनौती दी, जिसके बाद गोलीबारी शुरू हो गई। जवाबी कार्रवाई में हाशिम मूसा मारा गया। सुबह तलाशी में मिला शव मुठभेड़ के बाद सुबह Palmaidan क्षेत्र में तलाशी अभियान चलाया गया। सेना की 15 Corps ने बताया कि इसी दौरान हाशिम मूसा का शव बरामद हुआ। मौके से “war-like stores” यानी हथियार और सैन्य सामग्री भी मिली। कौन था हाशिम मूसा? हाशिम मूसा का असली नाम मोहम्मद आसिफ बताया गया है। वह Asif Fauji नाम से भी जाना जाता था। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक वह पाकिस्तान आधारित लश्कर-ए-तैयबा का वरिष्ठ कमांडर था और 2022 के बाद जम्मू-कश्मीर में सक्रिय रहा। कई हमलों से जुड़ा था नाम अधिकारियों ने हाशिम मूसा के समूह को Halan, Dehra Ki Gali, Kandi, Shiv Khori, Gagangir, Bootapathri और Baisaran समेत कई हमलों से जोड़ा है। इन घटनाओं में सुरक्षाकर्मियों और नागरिकों की मौत हुई थी। ये संबंध सुरक्षा एजेंसियों के आरोपों और जांच पर आधारित हैं। पहलगाम हमले की जांच में भी आया था नाम सुरक्षा एजेंसियों ने मूसा को 2025 के पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े नेटवर्क से भी जोड़ा था। वह सुलेमान शाह का करीबी सहयोगी बताया गया, जिसे एजेंसियां पहलगाम हमले की साजिश से जोड़ती रही हैं। चार सदस्यीय LeT समूह का आखिरी सदस्य था भारतीय सेना के मुताबिक हाशिम मूसा उस चार सदस्यीय लश्कर समूह का अंतिम सक्रिय सदस्य था, जो 2022 से जम्मू-कश्मीर में काम कर रहा था। समूह के अन्य तीन सदस्य अलग-अलग अभियानों में पहले ही मारे जा चुके थे। सेना ने कहा कि मूसा की मौत के साथ पूरा समूह निष्क्रिय हो गया है। महीनों से चल रही थी तलाश रिपोर्टों के अनुसार सुरक्षा एजेंसियां मई 2026 से मूसा को ट्रैक कर रही थीं। तकनीकी और मानवीय खुफिया जानकारी के आधार पर चलाए गए इस लंबे अभियान को कुछ रिपोर्टों में Operation Sheruwali कहा गया है। पूर्व पाकिस्तानी SSG कमांडो होने का दावा कुछ सुरक्षा अधिकारियों ने दावा किया कि मूसा पाकिस्तान सेना की Special Services Group यानी SSG में रह चुका था। यह दावा भारतीय सुरक्षा अधिकारियों और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है और इसकी स्वतंत्र सार्वजनिक पुष्टि सीमित है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी सफलता सुरक्षा बलों ने हाशिम मूसा के मारे जाने को लश्कर नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई बताया है। इसके बाद भी आसपास के जंगलों और संवेदनशील इलाकों में तलाशी तथा निगरानी जारी रखी गई ताकि किसी अन्य आतंकी की मौजूदगी की संभावना को खारिज किया जा सके। जम्मू-कश्मीर में आतंक विरोधी अभियान जारी बडगाम मुठभेड़ के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि आतंकवादी नेटवर्क और उनके सहयोगियों के खिलाफ intelligence-based operations जारी रहेंगे। हाशिम मूसा के खिलाफ लगाए गए अलग-अलग मामलों और हमलों से जुड़े आरोप सुरक्षा एजेंसियों के दावों पर आधारित हैं, जबकि अंतिम कानूनी निष्कर्ष संबंधित जांच और न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेंगे। source – Indian Army / The Indian Express / Hindustan Times / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार | बाढ़ पीड़ितों का फूटा गुस्सा, बीजेपी सांसद संजय जायसवाल की गाड़ी पर फेंका गोबर और मिट्टी!

बेतिया: बिहार के पश्चिम चंपारण में बाढ़ से परेशान लोगों का गुस्सा उस समय फूट पड़ा जब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे। बथना स्थित राहत शिविर में ग्रामीणों ने राहत व्यवस्था को लेकर नारेबाजी की। मुख्यमंत्री के जाने के बाद बीजेपी सांसद संजय जायसवाल की गाड़ी को भीड़ ने घेर लिया और कथित तौर पर उस पर गोबर और मिट्टी फेंकी। बथना राहत शिविर में हुआ हंगामा घटना पश्चिम चंपारण के बैरिया प्रखंड स्थित बथना राहत शिविर की है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने और राहत कार्यों की समीक्षा के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान कई ग्रामीणों ने स्थानीय जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी। राहत व्यवस्था से नाराज थे बाढ़ पीड़ित स्थानीय लोगों ने राहत और बचाव व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। ग्रामीणों का आरोप था कि बाढ़ के कारण घर और रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित होने के बावजूद उन्हें पर्याप्त और समय पर मदद नहीं मिल रही है। प्रशासन का कहना है कि प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य लगातार जारी हैं। CM सम्राट चौधरी के सामने हुई नारेबाजी राहत शिविर में मुख्यमंत्री की मौजूदगी के दौरान भी कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन किया। स्थिति तनावपूर्ण होने पर सुरक्षाकर्मियों ने मुख्यमंत्री के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी और इसके बाद वह इलाके से रवाना हो गए। सांसद संजय जायसवाल को भीड़ ने घेरा मुख्यमंत्री के जाने के बाद BJP सांसद संजय जायसवाल और स्थानीय विधायक को कुछ समय तक स्कूल परिसर में ही रुकना पड़ा। सुरक्षा बलों ने बाद में सांसद को उनकी गाड़ी तक पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन बाहर मौजूद भीड़ ने वाहन को घेर लिया। गाड़ी पर फेंका गया गोबर और मिट्टी रिपोर्टों के अनुसार आक्रोशित ग्रामीणों ने सांसद की गाड़ी पर कथित तौर पर गोबर और मिट्टी फेंकी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने वाहन पर हाथ भी मारे। इसके बाद पुलिस ने सुरक्षा घेरा बनाकर सांसद को इलाके से बाहर निकाला। पुलिस और सुरक्षा बलों को करनी पड़ी मशक्कत भीड़ बढ़ने के कारण मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों को सांसद को सुरक्षित निकालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में भीड़ और सुरक्षा बलों के बीच अफरा-तफरी की स्थिति दिखाई देने का दावा किया गया है। घटना की विस्तृत परिस्थितियों और जिम्मेदारी को लेकर स्थानीय प्रशासन की जांच महत्वपूर्ण होगी। गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से बिगड़े हालात पश्चिम चंपारण के कई इलाकों में गंडक नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। निचले क्षेत्रों में पानी भरने और तटबंधों पर दबाव बढ़ने से लोगों की परेशानी बढ़ी है। आसपास के कई जिलों में भी बाढ़ और तटबंध टूटने की घटनाएं सामने आई हैं। प्रशासन ने राहत कार्य जारी रहने का किया दावा अधिकारियों के अनुसार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। NDRF और SDRF की टीमों को अलर्ट पर रखा गया है और प्रभावित लोगों तक भोजन, नाव तथा अन्य जरूरी सुविधाएं पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। घटना के बाद सियासी माहौल भी गरमाया सांसद की गाड़ी पर गोबर फेंकने और मुख्यमंत्री के सामने विरोध की घटना ने बिहार में बाढ़ राहत व्यवस्था को लेकर राजनीतिक बहस तेज कर दी है। हालांकि घटना के पीछे राजनीतिक संगठन की भूमिका या पूर्व नियोजित विरोध का कोई स्पष्ट प्रमाण अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। उपलब्ध रिपोर्टों में इसे मुख्य रूप से स्थानीय बाढ़ पीड़ितों के आक्रोश के रूप में बताया गया है। source – Navbharat Times / Prabhat Khabar / ABP News / Media Darshan जय राष्ट्र न्यूज़

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बिहार के स्कूल में दर्दनाक हादसा: सीढ़ी गिरने से 9 साल की छात्रा की मौत, 3 बच्चे घायल

खगड़िया: बिहार के खगड़िया जिले में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय की सीढ़ी अचानक गिरने से 9 साल की छात्रा रितिका कुमारी की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य बच्चे घायल हो गए। हादसा मानसी थाना क्षेत्र के अमनी गांव स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुआ। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की मदद से बच्चों को मलबे से बाहर निकाला गया। अमनी गांव के सरकारी स्कूल में हुआ हादसा हादसा बुधवार सुबह अमनी गांव के पासवान टोला स्थित सरकारी प्राथमिक विद्यालय में हुआ। स्कूल की सीढ़ी अचानक भरभराकर गिर गई और उसके नीचे कई बच्चे दब गए। आसपास मौजूद लोगों और स्कूल स्टाफ ने तुरंत राहत कार्य शुरू किया। 9 साल की रितिका कुमारी की मौत मृत छात्रा की पहचान 9 वर्षीय रितिका कुमारी के रूप में हुई है। रितिका पहली कक्षा की छात्रा थी। उसे मलबे से बाहर निकाला गया, लेकिन उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। तीन बच्चे घायल, अस्पताल में भर्ती हादसे में तीन अन्य बच्चे घायल हुए हैं। घायल बच्चों को इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां उनका उपचार किया जा रहा है। कुछ स्थानीय रिपोर्टों में हल्की चोट वाले बच्चों की संख्या अधिक बताई गई है, इसलिए प्रशासनिक जांच के बाद ही अंतिम संख्या स्पष्ट होगी। स्कूल की जर्जर हालत पर उठे सवाल घटना के बाद स्कूल भवन की हालत को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि सीढ़ी में पहले से दरारें थीं और भवन की मरम्मत लंबे समय से नहीं हुई थी। कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि स्कूल प्रबंधन ने पहले ही जर्जर स्थिति की जानकारी संबंधित अधिकारियों को दी थी। प्रधानाध्यापक की पहले की शिकायत भी चर्चा में एक रिपोर्ट के अनुसार स्कूल के प्रधानाध्यापक ने जर्जर सीढ़ी और भवन की स्थिति को लेकर पहले ही संबंधित BRC को जानकारी दी थी। हादसे के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर शिकायत पहले की गई थी तो समय रहते मरम्मत क्यों नहीं हुई। इस पहलू की भी जांच की जा रही है। DM ने 24 घंटे में जांच रिपोर्ट मांगी खगड़िया के जिलाधिकारी ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को मामले की जांच कर 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने घायल बच्चों के इलाज और मृत छात्रा के परिवार को सहायता देने की बात कही है। SDM ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा सदर SDM धनंजय कुमार समेत प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। अधिकारियों ने स्कूल भवन की सुरक्षा, सीढ़ी गिरने के कारण और मरम्मत में संभावित लापरवाही की जांच की बात कही है। सरकारी स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इस हादसे के बाद सरकारी स्कूलों की पुरानी और जर्जर इमारतों की सुरक्षा पर फिर सवाल उठे हैं। स्कूलों में नियमित structural audit, समय पर मरम्मत और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मानकों के पालन की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है। जांच के बाद तय होगी जिम्मेदारी फिलहाल प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। जांच रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट होगा कि सीढ़ी गिरने का मुख्य कारण क्या था और क्या रखरखाव या प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई थी। source – PTI / India Today / Aaj Tak / NDTV / Dainik Jagran जय राष्ट्र न्यूज़

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केरल में कांग्रेस-BJP टकराव तेज, पार्टी कार्यालयों और नेताओं पर हमले के आरोप; तिरुवनंतपुरम में बढ़ा तनाव

तिरुवनंतपुरम: केरल में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक तनाव बढ़ गया है। तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस के जिला कार्यालय पर पथराव और एक अन्य पार्टी कार्यालय में आग लगाने की घटना सामने आई, जबकि BJP ने आरोप लगाया कि उसके प्रदेश नेताओं और कार्यकर्ताओं पर कांग्रेस समर्थकों ने हमला किया। पुलिस ने अलग-अलग घटनाओं की जांच शुरू कर दी है और राजधानी के संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई है। कांग्रेस के DCC कार्यालय पर पथराव तिरुवनंतपुरम स्थित District Congress Committee यानी DCC कार्यालय पर तड़के कथित तौर पर पत्थर फेंके गए। हमले में कार्यालय की खिड़कियों के शीशे टूट गए। पुलिस CCTV फुटेज की जांच कर हमलावरों की पहचान करने की कोशिश कर रही है। कांग्रेस ने BJP कार्यकर्ताओं पर लगाया आरोप कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पार्टी कार्यालयों पर हुए हमलों के पीछे BJP से जुड़े कार्यकर्ता थे। हालांकि पुलिस जांच पूरी होने से पहले हमलावरों की पहचान को अंतिम रूप से स्थापित नहीं किया गया है। कांग्रेस ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अनावूर कांग्रेस कार्यालय में आग लगाने का मामला अनावूर स्थित कांग्रेस मंडलम समिति कार्यालय में आग लगाने की भी घटना सामने आई। इस मामले में पुलिस ने एक BJP कार्यकर्ता को गिरफ्तार किया है। रिपोर्टों के अनुसार कार्यालय परिसर में लगे पोस्टरों और अन्य सामग्री को नुकसान पहुंचा। BJP ने कांग्रेस पर लगाए जवाबी आरोप दूसरी ओर BJP ने आरोप लगाया कि उसके तिरुवनंतपुरम दक्षिण जिला अध्यक्ष मूकम्पलमूडु बीजू पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हमला किया। BJP प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने घटना की निंदा करते हुए पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। यह BJP का आरोप है और मामले की पुलिस जांच जारी है। BJP नेता की गाड़ी पर भी हमले का आरोप BJP ने यह भी आरोप लगाया कि पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य पी के कृष्णदास की गाड़ी को नेय्याट्टिनकारा इलाके में नुकसान पहुंचाया गया। पार्टी का दावा है कि घटना में कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल थे। इसके बाद BJP ने राज्यव्यापी विरोध कार्यक्रम की घोषणा की। अमित शाह के खिलाफ प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद राजनीतिक तनाव की शुरुआत केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ काले झंडे दिखाने से जुड़े विरोध प्रदर्शनों के बाद तेज हुई। इसके बाद BJP और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच कई स्थानों पर झड़प और विरोध प्रदर्शन की घटनाएं सामने आईं। दोनों दल एक-दूसरे पर राजनीतिक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने हिंसा की निंदा की केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने राजनीतिक कार्यालयों पर हमलों की निंदा करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाओं का राज्य की लोकतांत्रिक राजनीतिक संस्कृति में स्थान नहीं होना चाहिए। उन्होंने DCC कार्यालय का दौरा कर नुकसान का जायजा भी लिया। गृह मंत्री ने दिया कार्रवाई का भरोसा राज्य के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने भी कांग्रेस कार्यालय पर हुए हमले की निंदा की। उन्होंने कहा कि पुलिस CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच कर रही है और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। Youth Congress और SFI के बीच भी झड़प इसी राजनीतिक तनाव के बीच तिरुवनंतपुरम में Youth Congress और SFI कार्यकर्ताओं के बीच भी हिंसक झड़प हुई। दोनों पक्षों की ओर से पत्थर और अन्य वस्तुएं फेंके जाने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। एक SFI कार्यकर्ता और एक पुलिसकर्मी के घायल होने की सूचना दी गई। पुलिस ने बढ़ाई सुरक्षा लगातार राजनीतिक घटनाओं को देखते हुए तिरुवनंतपुरम के University College, पार्टी कार्यालयों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अलग-अलग हमलों और झड़पों की जांच कर रही है। फिलहाल दोनों राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए कई आरोप जांच के अधीन हैं। source – PTI / The Times of India / The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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मस्तीपुर, बिहार | बाढ़ के बीच खुले में लगाए गए अस्थायी शौचालय, निजता पर उठे सवाल

मस्तीपुर, बिहार: बाढ़ से प्रभावित इलाकों में लोगों को राहत पहुंचाने के लिए अस्थायी व्यवस्थाएं की जा रही हैं, लेकिन मस्तीपुर से सामने आई खुले स्थान पर लगाए गए अस्थायी शौचालयों की तस्वीरों ने निजता और सम्मान से जुड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। बाढ़ जैसी आपदा के बीच शौचालय की व्यवस्था बेहद जरूरी है, लेकिन पर्याप्त पर्दा और सुरक्षित स्थान नहीं होने पर विशेष रूप से महिलाओं और किशोरियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। खुले स्थान पर शौचालय की व्यवस्था पर सवाल सामने आए दृश्यों में अस्थायी शौचालय खुले इलाके में स्थापित दिखाई देते हैं। ऐसे में इनके आसपास पर्याप्त घेराबंदी और गोपनीयता की व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। राहत शिविरों और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय उपलब्ध कराना जरूरी है, लेकिन केवल ढांचा खड़ा कर देना पर्याप्त नहीं माना जाता। लोगों की निजता, सुरक्षा और स्वच्छता भी राहत व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। महिलाओं के लिए सबसे बड़ी चुनौती निजता बाढ़ के दौरान घरों में पानी भरने के बाद बड़ी संख्या में परिवार सड़कों, तटबंधों या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर होते हैं। ऐसी परिस्थितियों में महिलाओं के लिए शौच, स्नान और कपड़े बदलने जैसी सामान्य जरूरतें भी बड़ी समस्या बन जाती हैं। बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों पर पहले की रिपोर्टों में भी महिलाओं ने सुरक्षित और निजी शौचालयों की कमी को गंभीर परेशानी बताया है। अस्थायी शौचालय के साथ पर्दे की व्यवस्था जरूरी आपदा प्रभावित क्षेत्रों में बनाए जाने वाले अस्थायी शौचालयों के आसपास उचित घेराबंदी, दरवाजे और पर्याप्त निजी स्थान की व्यवस्था महत्वपूर्ण होती है। महिलाओं और पुरुषों के लिए अलग-अलग सुविधाएं, पर्याप्त रोशनी और सुरक्षित रास्ता उपलब्ध होने से ऐसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल अधिक सुरक्षित तरीके से किया जा सकता है। बाढ़ में स्वच्छता भी बनती है बड़ी चुनौती बाढ़ का पानी उतरने या लंबे समय तक जमा रहने के दौरान साफ पानी और शौचालय जैसी सुविधाओं की कमी से स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं। गंदे पानी के संपर्क, खुले में शौच और अस्वच्छ वातावरण के कारण संक्रमण और जलजनित बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। इसलिए राहत कार्यों में भोजन और आश्रय के साथ स्वच्छता की सुविधाओं को भी प्राथमिकता देना जरूरी होता है। बिहार में पहले भी सामने आई है ऐसी समस्या बिहार के अलग-अलग बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में शौचालय की कमी पहले भी सामने आती रही है। सितंबर 2026 में पूर्णिया के कुछ प्रभावित क्षेत्रों में अस्थायी शौचालय बनाए गए थे, लेकिन स्थानीय स्तर पर उनकी संख्या जरूरत के मुकाबले कम होने की बात सामने आई थी। वहीं मुंगेर के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भी महिलाओं के लिए शौचालय और निजता की समस्या की रिपोर्ट सामने आई है। महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान से जुड़ा मुद्दा बाढ़ के दौरान स्वच्छता व्यवस्था केवल स्वास्थ्य का सवाल नहीं है। महिलाओं और किशोरियों के लिए यह सुरक्षा और सम्मान से भी सीधे जुड़ा हुआ मुद्दा है। अगर अस्थायी शौचालय ऐसी जगह लगाए जाते हैं जहां पर्याप्त पर्दा या सुरक्षा नहीं है, तो कई महिलाएं उनका इस्तेमाल करने से बच सकती हैं। इससे उन्हें रात होने का इंतजार करने या अन्य असुरक्षित विकल्प अपनाने की मजबूरी हो सकती है। राहत व्यवस्था में Privacy-Friendly Toilets की जरूरत आपदा प्रबंधन के दौरान ऐसे अस्थायी शौचालयों की जरूरत होती है जिन्हें सुरक्षित और निजी तरीके से इस्तेमाल किया जा सके। शौचालय के चारों ओर पूरी घेराबंदी, अंदर से बंद होने वाला दरवाजा, पर्याप्त रोशनी, महिलाओं के लिए अलग सुविधा और नजदीक सुरक्षित पानी की व्यवस्था राहत शिविरों में बुनियादी जरूरतों का हिस्सा होनी चाहिए। स्थानीय घटना की स्वतंत्र पुष्टि अभी सीमित मस्तीपुर से जुड़े इस विशेष मामले को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक स्रोतों में सीमित है। इसलिए तस्वीरों या वीडियो के आधार पर यह स्पष्ट नहीं कहा जा सकता कि ये शौचालय किस विभाग या एजेंसी द्वारा लगाए गए अथवा बाद में इनके आसपास अतिरिक्त पर्दे या अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं या नहीं। हालांकि बिहार में बाढ़ के दौरान स्वच्छता और महिलाओं की निजता की समस्या कई रिपोर्टों और अध्ययनों में पहले भी दर्ज की जा चुकी है। source – बिहार आपदा प्रबंधन विभाग / Hindustan / Dainik Jagran / Down To Earth / UNICEF जय राष्ट्र न्यूज़

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उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाईकोर्ट से जमानत नहीं, 2020 दिल्ली दंगा साजिश मामले में याचिका खारिज

नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर 2026 को उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। दोनों 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े कथित बड़ी साजिश मामले में आरोपी हैं और उनके खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA समेत अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज है। अदालत ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले तय की गई शर्तों से बंधी है। दिल्ली हाईकोर्ट ने नहीं दी राहत जस्टिस प्रतिभा एम सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की पीठ ने दोनों की अपीलें खारिज करते हुए निचली अदालत के 4 जुलाई 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। उमर खालिद और शरजील इमाम ने ट्रायल कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का दिया हवाला हाईकोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी 2026 को जमानत से इनकार करते हुए दोनों को कुछ निर्धारित परिस्थितियों में दोबारा जमानत मांगने की स्वतंत्रता दी थी। इन परिस्थितियों में संरक्षित गवाहों की गवाही पूरी होना या सुप्रीम कोर्ट के आदेश से एक वर्ष का समय पूरा होना शामिल था, जो भी पहले हो। हाईकोर्ट ने कहा कि वह इन शर्तों में बदलाव नहीं कर सकता। ‘Judicial Discipline’ का किया उल्लेख अदालत ने अपने फैसले में कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश को देखते हुए हाईकोर्ट न्यायिक अनुशासन से बंधा हुआ है। पीठ ने माना कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा दी गई स्वतंत्रता स्पष्ट और शर्तों से जुड़ी हुई थी, इसलिए वर्तमान परिस्थितियों में हाईकोर्ट उन शर्तों को संशोधित नहीं कर सकता। सह-आरोपियों से समानता का दावा भी खारिज उमर खालिद और शरजील इमाम की ओर से सह-आरोपी तस्लीम अहमद और खालिद सैफी को मिली राहत के आधार पर समानता का दावा किया गया था। हालांकि हाईकोर्ट ने कहा कि दोनों सह-आरोपियों की कथित भूमिका उमर खालिद और शरजील इमाम की कथित भूमिका से अलग है, इसलिए केवल समान मामले में आरोपी होने के आधार पर जमानत का दावा नहीं किया जा सकता। जुलाई में ट्रायल कोर्ट ने भी खारिज की थी जमानत इससे पहले 4 जुलाई 2026 को कड़कड़डूमा कोर्ट ने भी दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं। ट्रायल कोर्ट ने उस समय सुप्रीम कोर्ट के जनवरी के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा था कि वह शीर्ष अदालत द्वारा तय शर्तों से अलग जाकर राहत नहीं दे सकता। लंबे समय से जेल में हैं दोनों आरोपी शरजील इमाम को जनवरी 2020 में गिरफ्तार किया गया था, जबकि उमर खालिद को सितंबर 2020 में गिरफ्तार किया गया। दोनों पर दिल्ली पुलिस ने फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़ी कथित बड़ी साजिश का हिस्सा होने का आरोप लगाया है। दोनों ने आरोपों का विरोध किया है और लंबे समय से चल रही हिरासत तथा मुकदमे में देरी को जमानत के आधार के रूप में अदालतों के सामने रखा है। दिल्ली दंगों में 53 लोगों की हुई थी मौत फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध और समर्थन प्रदर्शनों के बीच हिंसा भड़क गई थी। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने कथित बड़ी साजिश को लेकर अलग मामला दर्ज किया था, जिसमें कई लोगों को आरोपी बनाया गया। फिलहाल जेल में ही रहेंगे उमर खालिद और शरजील इमाम दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले के बाद दोनों को फिलहाल जमानत नहीं मिली है। अदालत का यह आदेश केवल जमानत के मुद्दे से संबंधित है। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल की प्रक्रिया और अदालत में पेश साक्ष्यों के आधार पर होगा। source – Delhi High Court / Hindustan Times / The Indian Express / NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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क्या बिहार में बाढ़ का स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा? हर साल तबाही के पीछे नेपाल की नदियां, गाद और अधूरी परियोजनियां

पटना: बिहार में बाढ़ दशकों से बड़ी चुनौती बनी हुई है। खासकर उत्तर बिहार में कोसी, गंडक, बागमती, कमला और महानंदा जैसी नदियां हर मानसून में लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित करती हैं। सरकारें तटबंध, बैराज, जल निकासी और बाढ़ नियंत्रण परियोजनियों पर काम करती रही हैं, लेकिन अब तक ऐसा कोई एक उपाय सामने नहीं आया है जिससे राज्य को बाढ़ से पूरी तरह मुक्त किया जा सके। नेपाल में भारी बारिश से बढ़ता है बिहार की नदियों का जलस्तर उत्तर बिहार की कई प्रमुख नदियों का ऊपरी जलग्रहण क्षेत्र नेपाल में स्थित है। वहां भारी बारिश होने पर इन नदियों में अचानक पानी बढ़ जाता है और इसका असर बिहार के मैदानी इलाकों तक पहुंचता है। केंद्रीय जल आयोग ने भी संसद में बताया है कि उत्तर बिहार में बाढ़ का एक प्रमुख कारण नेपाल में स्थित ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में भारी बारिश के बाद गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला, कोसी और महानंदा में बढ़ने वाला जलप्रवाह है। केवल तटबंध बनाना क्यों नहीं है पर्याप्त? बिहार में लंबे समय से बाढ़ नियंत्रण के लिए तटबंधों का इस्तेमाल किया जा रहा है। तटबंध कई क्षेत्रों को सामान्य बाढ़ से सुरक्षा देते हैं, लेकिन अत्यधिक जलप्रवाह, कटाव या संरचनात्मक नुकसान की स्थिति में समस्या गंभीर हो सकती है। इसके अलावा नदियों में लगातार गाद जमा होने से नदी तल ऊंचा होने और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने की चुनौती भी बनी रहती है। इसलिए विशेषज्ञ लंबे समय से केवल तटबंधों के बजाय नदी बेसिन, ड्रेनेज और जल प्रबंधन को एक साथ देखने की जरूरत बताते रहे हैं। नेपाल में बड़े बांधों की योजना लंबे समय से चर्चा में भारत और नेपाल के बीच सप्तकोसी बहुउद्देशीय परियोजना और सुनकोसी-कमला डायवर्जन जैसी परियोजनियों पर वर्षों से अध्ययन चल रहा है। सितंबर 2026 से पहले उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार इन परियोजनाओं से जुड़े टोपोग्राफिकल, हाइड्रोलॉजिकल, भूकंपीय और अन्य कई तकनीकी अध्ययन पूरे किए जा चुके हैं, लेकिन परियोजनियां अभी उस स्तर तक नहीं पहुंची हैं जहां उन्हें बिहार की बाढ़ समस्या का तत्काल समाधान माना जा सके। भारत-नेपाल समन्वय क्यों है जरूरी? बिहार की बाढ़ केवल राज्य की सीमा के भीतर पैदा होने वाली समस्या नहीं है। कई नदियों का प्रवाह नेपाल से आता है, इसलिए दीर्घकालिक समाधान के लिए दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन, बांध, बाढ़ पूर्वानुमान और नदी नियंत्रण पर सहयोग जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच बाढ़ पूर्वानुमान, कोसी-गंडक परियोजनियों और जल संसाधन प्रबंधन के लिए कई द्विपक्षीय समितियां मौजूद हैं। जुलाई 2026 में केंद्र सरकार ने संसद को बताया था कि इन व्यवस्थाओं के माध्यम से दोनों देशों के बीच नदी और बाढ़ प्रबंधन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की जाती है। 2025-26 में संयुक्त समिति की बैठक नहीं हुई हालांकि बाढ़ प्रबंधन में भारत-नेपाल सहयोग को महत्वपूर्ण माना जाता है, लेकिन सरकारी जानकारी के अनुसार वर्ष 2025-26 में संबंधित भारत-नेपाल संयुक्त समिति की कोई बैठक नहीं हुई। इसी जवाब में केंद्र सरकार ने यह भी कहा था कि स्थायी कोसी-गंडक बेसिन प्राधिकरण बनाने का कोई प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है। पिछले तीन वर्षों में बाढ़ प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्र कार्यक्रम के तहत बिहार को 206.77 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता जारी की गई। बैराज और नदी परियोजनियों पर भी चल रहा काम बिहार में बाढ़ नियंत्रण के लिए केवल तटबंध ही नहीं, बल्कि बैराज, नदी लिंक और सिंचाई परियोजनियों पर भी काम करने की योजना है। 2024 के केंद्रीय बजट में कोसी-मेची इंट्रा-स्टेट लिंक सहित कई सिंचाई और बाढ़ नियंत्रण योजनाओं के लिए वित्तीय सहायता की घोषणा की गई थी। इसके साथ कोसी से जुड़ी बाढ़ नियंत्रण और सिंचाई परियोजनियों के सर्वेक्षण और जांच का भी प्रस्ताव रखा गया था। क्या नदियों की सफाई और गाद हटाना समाधान है? नदियों में गाद जमा होना बिहार की बाढ़ समस्या का एक महत्वपूर्ण पहलू है, लेकिन केवल बड़े पैमाने पर ड्रेजिंग करना हर नदी के लिए स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। नदी की प्रकृति, पानी का प्रवाह, गाद की मात्रा, पर्यावरण और लागत का अध्ययन करने के बाद ही अलग-अलग क्षेत्रों के लिए उपयुक्त कदम तय करने पड़ते हैं। साथ ही गांवों के तालाब, प्राकृतिक जल निकासी मार्ग और जलभराव वाले क्षेत्रों को सुरक्षित रखना भी जरूरी माना जाता है। बाढ़ को पूरी तरह रोकना मुश्किल, नुकसान कम करना संभव विशेषज्ञ दृष्टिकोण से बिहार में बाढ़ को पूरी तरह समाप्त करना व्यावहारिक रूप से कठिन है क्योंकि यह राज्य प्राकृतिक रूप से गंगा और उसकी हिमालयी सहायक नदियों के विशाल मैदानी क्षेत्र में स्थित है। लेकिन बेहतर बांध और बैराज प्रबंधन, मजबूत तटबंध, ड्रेनेज सुधार, बाढ़ पूर्वानुमान, जलाशय प्रबंधन, गाद पर वैज्ञानिक अध्ययन और भारत-नेपाल सहयोग के जरिए नुकसान को काफी कम किया जा सकता है। स्थायी समाधान के लिए एकीकृत रणनीति की जरूरत बिहार की बाढ़ समस्या का समाधान किसी एक बांध, तटबंध या नदी की सफाई से संभव नहीं दिखता। इसके लिए पूरे नदी बेसिन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक रणनीति की जरूरत है। इस रणनीति में नेपाल के साथ जल प्रबंधन समझौते, आधुनिक बाढ़ पूर्वानुमान व्यवस्था, नदी और ड्रेनेज नेटवर्क का वैज्ञानिक प्रबंधन, संवेदनशील तटबंधों की निगरानी और बाढ़ प्रभावित आबादी के लिए बेहतर पुनर्वास व्यवस्था शामिल करनी होगी। इसलिए सवाल यह नहीं है कि बिहार में बाढ़ को हमेशा के लिए पूरी तरह खत्म किया जा सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हर साल होने वाली तबाही और जान-माल के नुकसान को कितना कम किया जा सकता है। source – केंद्रीय जल आयोग / जल शक्ति मंत्रालय / गृह मंत्रालय / भारत सरकार जय राष्ट्र न्यूज़

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