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बिहार | समस्तीपुर में दिखा हैरान करने वाला नजारा, आसमान में उठा जल बवंडर!

समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले में बारिश और तेज हवाओं के बीच प्रकृति का एक दुर्लभ नजारा देखने को मिला। मोहिउद्दीननगर प्रखंड में पानी की सतह से आसमान की ओर उठता घूमता हुआ जल स्तंभ दिखाई दिया। मौसम विभाग ने इस घटना की पुष्टि Waterspout यानी जल बवंडर के रूप में की है। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 26 सितंबर को दिखा दुर्लभ नजारा यह घटना 26 सितंबर 2026 को मोहिउद्दीननगर इलाके में हुई। आसमान में घने बादलों और तेज हवा के बीच अचानक पानी के ऊपर घूमता हुआ लंबा स्तंभ बन गया। दूर से देखने पर इसकी आकृति किसी विशाल कीप या हाथी की सूंड जैसी दिखाई दे रही थी। मौसम विभाग ने की पुष्टि मौसम विभाग के पटना केंद्र ने 27 सितंबर को घटना का वीडियो साझा करते हुए बताया कि समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर प्रखंड में Waterspout देखा गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर चल रहे वीडियो को लेकर स्थिति स्पष्ट हुई कि यह कोई रहस्यमयी घटना नहीं, बल्कि एक प्राकृतिक मौसमी प्रक्रिया थी। पानी से आसमान तक दिखाई दिया घूमता स्तंभ वायरल वीडियो में जल सतह के ऊपर एक संकरा घूमता हुआ स्तंभ दिखाई देता है, जिसका ऊपरी हिस्सा बादलों से जुड़ा नजर आता है। तेज हवा और नमी के कारण यह संरचना काफी दूर से भी साफ दिखाई दे रही थी। स्थानीय लोगों ने इसे मोबाइल फोन में रिकॉर्ड किया। तेज हवा में उड़ीं टीन की चादरें जल बवंडर के दौरान इलाके में हवा की रफ्तार भी काफी तेज थी। वीडियो में आसपास के कुछ घरों की टीन और एस्बेस्टस की चादरें तेज हवा में उड़ती दिखाई दीं। हालांकि घटना में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना सामने नहीं आई है। क्या होता है Waterspout? Waterspout पानी की सतह के ऊपर बनने वाला तेजी से घूमती हवा का स्तंभ होता है। यह आमतौर पर समुद्र, बड़ी झीलों या नदियों जैसे जल क्षेत्रों के ऊपर बन सकता है। इसका एक सिरा पानी के पास और दूसरा बादलों की ओर दिखाई देता है। क्या पानी सच में आसमान में खिंचता है? देखने पर ऐसा लगता है कि जल बवंडर नीचे का पानी खींचकर सीधे आसमान तक पहुंचा रहा है, लेकिन इसकी दिखाई देने वाली संरचना का बड़ा हिस्सा वातावरण में मौजूद नमी और संघनित जल बूंदों से बनता है। घूमती हुई हवा के कारण पानी की फुहार और बूंदें भी ऊपर उठ सकती हैं, जिससे यह दृश्य और ज्यादा प्रभावशाली दिखाई देता है। दो तरह के हो सकते हैं Waterspout Waterspout को सामान्य तौर पर दो प्रमुख प्रकारों में बांटा जाता है। एक Fair Weather Waterspout होता है, जो अपेक्षाकृत शांत मौसमी परिस्थितियों में बन सकता है और आमतौर पर कम शक्तिशाली होता है। दूसरा Tornadic Waterspout है, जो गंभीर तूफानी परिस्थितियों से जुड़ा हो सकता है और ज्यादा नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखता है। बिहार में बारिश के बीच सामने आई घटना घटना के समय बिहार के कई हिस्सों में लगातार बारिश और तेज हवाओं का दौर चल रहा था। समस्तीपुर समेत कई जिलों में बारिश के कारण जलभराव और नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी भी दर्ज की गई। इसी मौसमी स्थिति के बीच मोहिउद्दीननगर में जल बवंडर का यह दुर्लभ दृश्य देखने को मिला। वीडियो सोशल मीडिया पर हुआ वायरल स्थानीय लोगों द्वारा रिकॉर्ड किया गया वीडियो कुछ ही समय में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। कई लोग इसे ‘पानी का टॉरनेडो’ और ‘आसमान तक पहुंचता पानी’ बता रहे थे। मौसम विभाग की पुष्टि के बाद साफ हुआ कि यह Waterspout था। ऐसी घटना दिखे तो बनाए रखें दूरी Waterspout कमजोर होने पर भी उसके आसपास तेज हवा और उड़ती हुई वस्तुओं से खतरा पैदा हो सकता है। ऐसी स्थिति में लोगों को वीडियो बनाने के लिए करीब जाने के बजाय सुरक्षित दूरी बनाए रखने और स्थानीय मौसम चेतावनियों का पालन करने की सलाह दी जाती है। source – IMD Patna / Amar Ujala / Hindustan / Aaj Tak Hindustan Live जय राष्ट्र न्यूज़

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उज्जैन में प्रशासन से सहमति के बाद मस्जिद का हिस्सा हटाने की कार्रवाई, भारी सुरक्षा के बीच काम जारी

उज्जैन: मध्य प्रदेश के उज्जैन में सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रही शाही मस्जिद के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई प्रशासन और मस्जिद कमेटी के बीच बनी सहमति के बाद आगे बढ़ रही है। तय व्यवस्था के अनुसार मस्जिद कमेटी से जुड़े लोग स्वयं प्रभावित हिस्से को हटा रहे हैं। इससे पहले कार्रवाई के दौरान विरोध, पथराव और पुलिस के साथ झड़प के कारण इलाके में तनाव पैदा हो गया था। करीब तीन फीट हिस्सा हटाने पर बनी सहमति मस्जिद पक्ष और प्रशासन के बीच हुई बातचीत के बाद करीब तीन फीट हिस्से को हटाने पर सहमति बनी। इससे पहले प्रशासन की ओर से लगभग 9.5 फीट हिस्से की जरूरत बताई गई थी। बातचीत के बाद हटाए जाने वाले हिस्से को सीमित करने की व्यवस्था सामने आई। मस्जिद कमेटी खुद करा रही कार्रवाई उज्जैन प्रशासन के मुताबिक सड़क चौड़ीकरण की जद में आने वाले हिस्से को मस्जिद कमेटी स्वयं हटा रही है। मौके पर scaffolding लगाई गई है और निर्माण के प्रभावित हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से हटाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि पूरी मस्जिद को नहीं हटाया जा रहा, बल्कि केवल सड़क के निर्धारित alignment में आने वाला हिस्सा प्रभावित है। मीनार को परिसर में ही किया जाएगा Shift सहमति के तहत प्रभावित मीनार के हिस्से को पूरी तरह समाप्त करने के बजाय मस्जिद परिसर के भीतर दूसरी जगह स्थानांतरित करने की व्यवस्था भी तय की गई है। इसके अलावा प्रभावित दुकानों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था, अतिरिक्त Floor Area Ratio और नियमों के अनुसार मुआवजे जैसे मुद्दों पर भी प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया है। High Court में भी पहुंचा था मामला मस्जिद के हिस्से को हटाने का मामला मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच तक पहुंचा था। पहले एकल पीठ ने सड़क चौड़ीकरण के खिलाफ दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था। इसके बाद मस्जिद पक्ष की ओर से अपील दाखिल की गई। दोनों पक्षों के बीच व्यवस्था बनने के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने अपीलों का निपटारा कर दिया। अदालत ने नगर निगम की ओर से दिए गए आश्वासनों और संबंधित शर्तों का पालन करने को कहा। सिंहस्थ 2028 के लिए चौड़ी हो रही सड़क उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 900 मीटर सड़क को चौड़ा करने का काम चल रहा है। सड़क को लगभग 15 मीटर चौड़ा किया जाना है ताकि सिंहस्थ 2028 के दौरान बड़ी संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही बेहतर तरीके से हो सके। सिर्फ मस्जिद नहीं, कई दूसरे ढांचे भी प्रभावित सड़क चौड़ीकरण परियोजना के दायरे में केवल शाही मस्जिद नहीं है। इस परियोजना से कुल 272 के आसपास संरचनाएं प्रभावित होने की बात सामने आई है। इनमें कई धार्मिक स्थल भी शामिल हैं। प्रशासन के अनुसार 80 से अधिक धार्मिक स्थलों के प्रभावित हिस्सों को हटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है और इनमें अधिकांश मंदिर हैं। कार्रवाई के दौरान हुआ था पथराव 28 सितंबर की सुबह मस्जिद के प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू होने के दौरान कुछ लोगों की भीड़ जमा हो गई थी। पुलिस के मुताबिक भीड़ में शामिल कुछ लोगों ने बैरिकेडिंग की ओर बढ़ने की कोशिश की और बाद में पुलिस पर पथराव किया। हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल और हल्का बल प्रयोग किया। शहर काजी ने की शांति की अपील घटना के बाद शहर काजी ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और मौके पर अनावश्यक रूप से जमा नहीं होने की अपील की। उन्होंने कहा कि मस्जिद से जुड़े मामले में बातचीत के जरिए सहमति बन चुकी है और लोगों को शांति बनाए रखनी चाहिए। ढाई हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी तैनात तनाव को देखते हुए उज्जैन के संवेदनशील इलाकों में पुलिस और Rapid Action Force की भारी तैनाती की गई। करीब 2,500 पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को अलग-अलग क्षेत्रों में लगाया गया। पुलिस ने flag march भी किया और CCTV तथा drone footage के जरिए पथराव में शामिल लोगों की पहचान शुरू की। पथराव मामले में पुलिस की कार्रवाई पुलिस ने पथराव और उपद्रव से जुड़े मामलों में कई लोगों को हिरासत में लिया और गिरफ्तारियां भी की हैं। सोशल मीडिया पर कथित तौर पर भड़काऊ सामग्री फैलाने वालों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि उपलब्ध वीडियो और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अब इलाके में स्थिति शांत झड़प के अगले दिन शाही मस्जिद और आसपास के क्षेत्र में स्थिति सामान्य होती दिखाई दी। प्रशासन के मुताबिक मस्जिद कमेटी के सदस्य सहमति के अनुसार प्रभावित हिस्से को हटा रहे हैं और काम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बरकरार रखी गई है। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से किसी भी अफवाह पर विश्वास न करने और सड़क चौड़ीकरण से जुड़े काम में शांति बनाए रखने की अपील की है। source – PTI / The Indian Express / The New Indian Express / Aaj Tak / Madhya Pradesh High Court The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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शिमला के रोहड़ू में भारी लैंडस्लाइड, सड़क पर गिरा मलबा; जांगलिख गांव का संपर्क कटा

शिमला: हिमाचल प्रदेश के शिमला जिले के रोहड़ू उपमंडल में भारी बारिश के बाद बड़ा भूस्खलन हुआ है। जांगलिख क्षेत्र में पहाड़ी का करीब 100 मीटर हिस्सा पेड़ों समेत खिसककर सड़क पर आ गया, जिससे टांगणू-जांगलिख संपर्क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया। भारी मलबे के कारण जांगलिख गांव का सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। राहत की बात यह है कि घटना में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। जांगलिख पुल के पास दरका पहाड़ यह भूस्खलन 28 सितंबर को जांगलिख क्षेत्र के पास हुआ। लगातार बारिश के बीच अचानक पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर नीचे आ गया। मलबे के साथ कई बड़े पेड़ भी जड़ों समेत सड़क पर गिर गए, जिससे वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रुक गई। करीब 100 मीटर हिस्सा आया नीचे प्रशासनिक जानकारी के अनुसार पहाड़ी का करीब 100 मीटर लंबा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में आया। मलबे की मात्रा इतनी अधिक थी कि तत्काल सड़क खोलना संभव नहीं हो सका। लगातार पत्थर और मिट्टी गिरने के कारण मशीनरी लगाने में भी परेशानी हुई। करीब 800 लोगों का संपर्क प्रभावित सड़क बंद होने से जांगलिख क्षेत्र में रहने वाले करीब 800 लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। ग्रामीणों के लिए यह मार्ग आसपास के क्षेत्रों तक पहुंचने का प्रमुख रास्ता है। सड़क बंद होने के कारण स्थानीय लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। सुंदरू खड्ड का बहाव भी हुआ बाधित भूस्खलन का मलबा सड़क के साथ-साथ पास बहने वाली सुंदरू खड्ड में भी जा गिरा। इससे कुछ समय के लिए पानी का प्राकृतिक बहाव बाधित हो गया। मलबे के पीछे पानी जमा होने की आशंका के चलते प्रशासन ने स्थिति पर लगातार नजर रखी। फिलहाल बड़े खतरे की सूचना नहीं प्रशासन के अनुसार खड्ड के बहाव में आई रुकावट के बावजूद तत्काल किसी बड़े खतरे की सूचना नहीं मिली। हालांकि पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने और पानी जमा होने की संभावना को देखते हुए आसपास के लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। SDM ने मौके पर पहुंचकर लिया जायजा रोहड़ू के SDM धर्मेश रामोत्रा समेत प्रशासनिक अधिकारियों की टीम ने प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सड़क, खड्ड और पहाड़ी की स्थिति का आकलन किया तथा मार्ग को जल्द बहाल करने के लिए संबंधित विभागों को निर्देश दिए। बारिश के कारण Restoration Work में परेशानी घटना के बाद सड़क से मलबा हटाने की तैयारी शुरू की गई, लेकिन लगातार मलबा गिरने के कारण शुरुआत में भारी मशीनरी इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना गया। स्थिति स्थिर होने के बाद सड़क बहाल करने का काम शुरू करने की योजना बनाई गई ताकि जांगलिख का संपर्क जल्द दोबारा स्थापित किया जा सके। हिमाचल में कई सड़कें प्रभावित हाल की बारिश और भूस्खलन के कारण हिमाचल प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दर्जनों सड़कें प्रभावित हुई हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान पत्थर गिरने और landslide का खतरा बढ़ने के कारण प्रशासन ने लोगों को संवेदनशील इलाकों और नदी-नालों के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। घटना का वीडियो भी आया सामने जांगलिख के पास हुए इस बड़े भूस्खलन का वीडियो सोशल मीडिया पर भी सामने आया है। वीडियो में पहाड़ी का बड़ा हिस्सा नीचे खिसकता और सड़क पर भारी मात्रा में मिट्टी, पत्थर तथा पेड़ गिरते दिखाई दे रहे हैं। प्रशासन ने लोगों से ऐसे संवेदनशील क्षेत्रों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की अपील की है। source – The Tribune / The New Indian Express / Amar Ujala / Dainik Jagran The Tribune जय राष्ट्र न्यूज़

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उत्तर प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ से 81 लोगों की मौत, 2,200 से ज्यादा घर क्षतिग्रस्त

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लगातार कई दिनों तक हुई भारी बारिश और बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। शुरुआती आंकड़ों में मृतकों की संख्या 62 बताई गई थी, लेकिन ताज़ा सरकारी आंकड़ों के अनुसार 25 से 27 सितंबर के बीच बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 81 लोगों की मौत हुई है। इस दौरान 62 लोग घायल हुए और 2,254 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई जिलों में जलभराव, नदियों का बढ़ता जलस्तर और फसलों को नुकसान दर्ज किया गया है। तीन दिनों में 81 लोगों की मौत उत्तर प्रदेश में 25 और 26 सितंबर को बारिश से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत दर्ज की गई थी। 27 सितंबर को 25 और लोगों की मौत के बाद तीन दिनों का कुल आंकड़ा बढ़कर 81 हो गया। मौतों की वजहों में मकान गिरना, डूबना, बिजली गिरना और बारिश से जुड़ी अन्य दुर्घटनाएं शामिल हैं। 62 लोग घायल, 154 पशुओं की भी मौत भारी बारिश के कारण तीन दिनों में 62 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। बारिश और बाढ़ से पशुधन को भी नुकसान हुआ है। राज्य में इस अवधि के दौरान कम से कम 154 पशुओं की मौत दर्ज की गई। 2,254 मकान हुए क्षतिग्रस्त बारिश के कारण बड़ी संख्या में कच्चे और कमजोर मकानों को नुकसान पहुंचा है। 25 और 26 सितंबर को 1,021 मकानों के क्षतिग्रस्त होने की सूचना थी। 27 सितंबर को 1,233 और मकानों को नुकसान पहुंचा, जिसके बाद कुल संख्या 2,254 हो गई। Sitapur में सबसे ज्यादा मौतें 25 और 26 सितंबर के आंकड़ों में सीतापुर में सात लोगों की मौत दर्ज की गई। लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच लोगों की जान गई, जबकि अयोध्या और गोरखपुर में चार-चार मौतें दर्ज की गईं। 27 सितंबर को महाराजगंज में चार, जबकि बाराबंकी और हरदोई में तीन-तीन मौतों की सूचना मिली। सामान्य से कई गुना ज्यादा हुई बारिश 25 और 26 सितंबर के दौरान उत्तर प्रदेश में औसतन 66.5 MM बारिश दर्ज की गई, जबकि सामान्य बारिश करीब 7.6 MM होती है। इसका मतलब है कि प्रदेश में करीब 775% अधिक बारिश हुई। 27 सितंबर को भी राज्य में औसतन 45.1 MM बारिश रिकॉर्ड की गई, जो सामान्य 1.8 MM की तुलना में बेहद अधिक थी। 74 जिलों में सामान्य से ज्यादा बारिश भारी बारिश का असर लगभग पूरे उत्तर प्रदेश में देखने को मिला। राज्य के 75 में से 74 जिलों में Large Excess Rainfall दर्ज की गई। कई शहरों और ग्रामीण इलाकों में सड़कों, गलियों और घरों में पानी भर गया। लखनऊ में स्कूल बंद रखने पड़े राजधानी लखनऊ में रिकॉर्ड बारिश के कारण कई इलाकों में गंभीर जलभराव हुआ। स्थिति को देखते हुए स्कूलों को बंद रखने का फैसला किया गया और प्रशासन ने लोगों से जलभराव वाले क्षेत्रों तथा तेज बहाव वाले पानी से दूर रहने की अपील की। कई नदियों का जलस्तर बढ़ा लगातार बारिश के कारण घाघरा, राप्ती और अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ने से कई जिलों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए राहत और बचाव टीमें तैनात की गईं। फसलों को भी हुआ नुकसान भारी बारिश और जलभराव ने कृषि क्षेत्र को भी प्रभावित किया है। शुरुआती आकलन में कम से कम 87 हेक्टेयर कृषि भूमि पर फसल नुकसान की जानकारी सामने आई है। विस्तृत सर्वे के बाद वास्तविक नुकसान का आंकड़ा और बढ़ सकता है। राहत और बचाव अभियान जारी राज्य सरकार ने प्रभावित जिलों में प्रशासन को राहत और बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए हैं। जिला प्रशासन, पुलिस और आपदा प्रबंधन से जुड़ी टीमें जलभराव वाले इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और मकानों तथा फसलों के नुकसान का आकलन करने में जुटी हैं। बारिश से राहत मिलने की उम्मीद मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने के साथ उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भारी बारिश से राहत मिलने के संकेत हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश जारी रह सकती है। प्रशासन ने लोगों से मौसम संबंधी चेतावनियों पर नजर रखने और बाढ़ प्रभावित इलाकों में सावधानी बरतने को कहा है। source – Uttar Pradesh Relief Commissioner Office / Associated Press / The Indian Express / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली के मॉडल टाउन में हल्दीराम वाली इमारत में लगी भीषण आग, 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया

नई दिल्ली: उत्तर-पश्चिम दिल्ली के मॉडल टाउन इलाके में हल्दीराम आउटलेट वाली एक बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग के बाद इमारत और आसपास के परिसरों से करीब 30 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। आग बुझाने के लिए दिल्ली फायर सर्विस की 23 दमकल गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी के घायल होने या जान जाने की सूचना नहीं है। The New Indian Express दूसरी मंजिल पर लगी आग घटना 25 सितंबर 2026 की दोपहर की है। अधिकारियों के मुताबिक मॉडल टाउन की बहुमंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर आग लगी, जहां हल्दीराम का आउटलेट भी मौजूद है। कुछ ही देर में आग और धुएं ने बड़ा रूप ले लिया। इमारत से घना काला धुआं निकलता दिखाई दिया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। The Times of India दमकल की 23 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं दिल्ली फायर सर्विस को दोपहर में आग लगने की सूचना मिली। शुरुआत में चार दमकल गाड़ियों को भेजा गया था, लेकिन आग की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त गाड़ियां बुलाई गईं। बाद में कुल 23 दमकल वाहनों को आग बुझाने के अभियान में लगाया गया। करीब 4 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया, जिसके बाद कूलिंग ऑपरेशन शुरू किया गया। The Print Hindi पुलिस ने 30 लोगों को सुरक्षित निकाला आग की सूचना मिलने के बाद मॉडल टाउन थाने के हेड कॉन्स्टेबल पवन शुरुआती responders में शामिल रहे। इसके बाद SHO और अन्य पुलिसकर्मी भी घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस ने प्रभावित इमारत के साथ आसपास की इमारतों में मौजूद लोगों को भी बाहर निकालना शुरू किया। अधिकारियों के मुताबिक इस अभियान में करीब 30 लोगों को सुरक्षित निकाला गया। The New Indian Express कोई हताहत नहीं इतनी बड़ी आग के बावजूद घटना में किसी व्यक्ति की मौत या घायल होने की खबर नहीं है। पुलिस का कहना है कि समय रहते इमारत को खाली करा लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। आसपास की इमारतों से भी लोगों को एहतियात के तौर पर सुरक्षित स्थान पर भेजा गया था। The Print शॉर्ट सर्किट की आशंका पुलिस की शुरुआती जानकारी के मुताबिक आग लगने के पीछे शॉर्ट सर्किट की आशंका जताई गई है। हालांकि आग लगने का अंतिम कारण विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। दमकल विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही हैं। The New Indian Express VIDEO में दिखा काले धुएं का गुबार घटना के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आई हैं। इनमें इमारत से बड़ी मात्रा में काला धुआं निकलता दिखाई देता है, जबकि सड़क पर दमकल कर्मी आग बुझाने में जुटे नजर आते हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर आने के बाद घटना तेजी से चर्चा में आ गई। Times Now Hindi समय रहते रेस्क्यू से टला बड़ा हादसा मॉडल टाउन जैसे व्यस्त इलाके में स्थित बहुमंजिला इमारत में आग लगने से स्थिति गंभीर हो सकती थी। लेकिन पुलिस और फायर ब्रिगेड की त्वरित कार्रवाई के कारण अंदर मौजूद लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। फिलहाल आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया है और संबंधित एजेंसियां नुकसान तथा आग के वास्तविक कारण का आकलन कर रही हैं। source – PTI / The New Indian Express / ThePrint / Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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भारी बारिश के बाद सिक्किम में भूस्खलन; घरों को नुकसान, VIDEO सामने!

गंगटोक: सिक्किम में लगातार भारी बारिश के बीच ग्यालशिंग जिले के रिंबी गांव में बड़ा भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी से भारी मात्रा में मिट्टी, चट्टानें और मलबा नीचे आने से 30 से ज्यादा मकान और सरकारी क्वार्टर प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में भेजा गया है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी जनहानि की सूचना नहीं है। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेजी से नीचे आता मलबा दिखाई दे रहा है। रिंबी गांव में रात को आया भारी मलबा भूस्खलन 24 सितंबर की देर रात पश्चिम सिक्किम के युकसोम-ताशीडिंग विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रिंबी गांव में हुआ। लगातार बारिश के बाद ऊपरी पहाड़ियों से मिट्टी, पत्थर और मलबा तेजी से नीचे की ओर आया और रिहायशी इलाके तक पहुंच गया। कई मकानों के हिस्से क्षतिग्रस्त हो गए, जबकि सरकारी आवासों को भी नुकसान पहुंचा है। दो मकान पूरी तरह बहने की सूचना स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक भूस्खलन से दो मकान पूरी तरह बह गए, जबकि कई अन्य घरों को गंभीर नुकसान पहुंचा है। 26 सितंबर तक सामने आई जानकारी के अनुसार रिंबी के करीब 32 परिवार अपने घर या रहने योग्य जमीन खो चुके हैं। प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों और सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया गया है। कुछ परिवार रिश्तेदारों के यहां भी रह रहे हैं। VIDEO में दिखा डरावना मंजर घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। इसमें पहाड़ी से भारी मात्रा में कीचड़, बड़े पत्थर और मलबा नीचे की ओर आते हुए दिखाई देता है। वीडियो सामने आने के बाद इलाके की स्थिति को लेकर चिंता बढ़ गई। लगातार बारिश की वजह से आसपास के दूसरे मकानों और सड़कों पर भी खतरा बना हुआ है। अगस्त से सक्रिय है भूस्खलन क्षेत्र रिंबी इलाके में यह समस्या अचानक शुरू नहीं हुई है। स्थानीय प्रशासन और सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक अगस्त से ही क्षेत्र में लगातार जमीन खिसकने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आ रही हैं। सितंबर के मध्य में भी प्रशासन ने प्रभावित और संवेदनशील इलाकों का निरीक्षण कर राहत शिविर बनाने तथा परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर भेजने की व्यवस्था की थी। 128 लोगों को पहले ही किया गया था सुरक्षित सितंबर में स्थिति बिगड़ने के बाद प्रशासन ने रिंबी क्षेत्र के कई प्रभावित घरों से लोगों को पहले ही निकालना शुरू कर दिया था। PTI की एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले चरण में करीब 28 मकानों से 128 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। लगातार बारिश के बाद अब प्रभावित घरों की संख्या और बढ़ गई है। मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने जताई चिंता सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने रिंबी की स्थिति को गंभीर बताया है। उन्होंने अधिकारियों को हाई अलर्ट पर रहने, लगातार स्थिति की निगरानी करने और प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने स्थानीय लोगों से भी मौसम और प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने की अपील की है। सड़क संपर्क पर भी पड़ा असर भूस्खलन के कारण स्थानीय सड़कों पर बड़ी मात्रा में मलबा जमा हो गया है, जिससे इलाके में आवाजाही प्रभावित हुई है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है और प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री तथा अस्थायी आवास की व्यवस्था की जा रही है। अधिकारियों ने लोगों को विशेष रूप से रात के समय अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी है। अब तक किसी मौत की सूचना नहीं इतने बड़े भूस्खलन के बावजूद अब तक किसी व्यक्ति की मौत की पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का मुख्य फोकस संवेदनशील इलाकों से लोगों को निकालने और नए भूस्खलन की स्थिति में नुकसान कम करने पर है। लगातार बारिश के कारण रिंबी और आसपास के क्षेत्रों में खतरा फिलहाल टला नहीं है। प्रशासन ने लोगों से सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय अधिकारियों से संपर्क करने को कहा है। source – Government of Sikkim / The Indian Express / Hindustan Times / PTI जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से अपील, बोलीं- सेहत के लिए हानिकारक चीजों का विज्ञापन न करें

नई दिल्ली: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने फिल्मी सितारों और लोकप्रिय कलाकारों से स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पदार्थों का विज्ञापन या endorsement न करने की अपील की है। गुजरात के एकता नगर में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि लोकप्रिय कलाकारों का बच्चों और युवाओं पर गहरा प्रभाव पड़ता है, इसलिए उन्हें अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए। राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में की अपील राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 22 सितंबर 2026 को गुजरात के एकता नगर, केवड़िया में 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्रदान किए। इसी समारोह में उन्होंने फिल्म जगत के कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी बात की। राष्ट्रपति ने कहा कि सफल फिल्म कलाकारों में देश के करोड़ों लोगों, खासकर युवाओं को प्रभावित करने की क्षमता होती है। ‘हानिकारक पदार्थों का endorsement न करें’ अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने लोकप्रिय फिल्मी कलाकारों से अपील की कि वे ऐसे पदार्थों का प्रचार न करें जो लोगों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकते हैं। उन्होंने कहा कि जब कोई सफल कलाकार अनुशासित जीवनशैली के फायदे बताता है तो बड़ी संख्या में बच्चे और युवा उससे प्रभावित होते हैं और उसका अनुसरण करते हैं। राष्ट्रपति ने अपने संदेश में कहा, “Star वही है जो रोशनी फैलाए, अंधेरा नहीं।” युवाओं पर सितारों के प्रभाव का किया जिक्र राष्ट्रपति ने विशेष रूप से बच्चों और युवाओं पर फिल्मी सितारों के प्रभाव की बात कही। उनका कहना था कि लोकप्रिय कलाकार केवल मनोरंजन जगत तक सीमित नहीं रहते, बल्कि उनकी जीवनशैली, पहनावा और उनके द्वारा प्रचारित उत्पाद भी लोगों के व्यवहार को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने कलाकारों से स्वस्थ जीवनशैली को प्रोत्साहित करने का आग्रह किया। सोशल मीडिया पर शुरू हुई बहस राष्ट्रपति की इस अपील के बाद सोशल मीडिया पर भी चर्चा शुरू हो गई। कुछ यूजर्स ने सेलिब्रिटीज द्वारा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक माने जाने वाले उत्पादों के विज्ञापनों पर सवाल उठाए, जबकि कुछ लोगों ने ऐसे उत्पादों की बिक्री और उनके नियमन पर बहस छेड़ दी। हालांकि राष्ट्रपति का मुख्य संदेश फिल्म कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी और युवाओं पर उनके प्रभाव को लेकर था। फिल्म इंडस्ट्री के छोटे कलाकारों की भी उठाई बात अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुर्मू ने फिल्म इंडस्ट्री के मजदूरों, छोटे कलाकारों, सहायकों और संघर्षरत लोगों के लिए सम्मान और सामाजिक सुरक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि creative economy में योगदान देने वाले पर्दे के पीछे के लोगों को भी सम्मान मिलना चाहिए और फिल्म उद्योग में संवेदनशील कार्य संस्कृति विकसित की जानी चाहिए। जूरी में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की बात राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों की regional juries में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने की बात भी कही। उनके मुताबिक किसी भी क्षेत्र में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होने से अधिक व्यापक मानवीय दृष्टि विकसित होती है। अनंत नाग को मिला दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में दिग्गज अभिनेता अनंत नाग को भारतीय सिनेमा में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए दादासाहेब फाल्के पुरस्कार 2024 से सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति ने उनके अभिनय को सहज, संयमित और प्रामाणिक बताते हुए उनकी सराहना की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की फिल्मी सितारों से की गई यह अपील अब celebrity endorsements और कलाकारों की सामाजिक जिम्मेदारी को लेकर नई चर्चा का विषय बन गई है। source – President of India / Press Information Bureau / India Today जय राष्ट्र न्यूज़

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चिराग पासवान की निजी पहचान को लेकर बयान से विवाद, जीतन राम मांझी ने की कार्रवाई की मांग

पटना: केंद्रीय मंत्री और लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के प्रमुख चिराग पासवान की निजी लैंगिक पहचान को लेकर डॉ. राजन सिंह के एक बयान से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। राजन सिंह ने चिराग पासवान की पहचान को लेकर एक अपुष्ट दावा किया, जिस पर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बिहार सरकार से कार्रवाई की मांग की है। हालांकि इस दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सामने नहीं आया है और चिराग पासवान की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार राज्य ट्रांसजेंडर कल्याण बोर्ड से जुड़े रहे डॉ. राजन सिंह का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया। इसमें उन्होंने चिराग पासवान की लैंगिक पहचान को लेकर दावा किया और कहा कि वह अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करते। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। किसी व्यक्ति की लैंगिक पहचान से जुड़ी जानकारी को केवल सोशल मीडिया टिप्पणियों या अटकलों के आधार पर तथ्य नहीं माना जा सकता। जीतन राम मांझी ने जताई नाराजगी केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के नेता जीतन राम मांझी ने राजन सिंह की टिप्पणी पर आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि किसी केंद्रीय मंत्री की निजी पहचान को लेकर इस तरह की टिप्पणी करना उचित नहीं है। मांझी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को टैग करते हुए राज्य सरकार से संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। राजन सिंह ने दी सफाई विवाद बढ़ने के बाद 23 सितंबर को राजन सिंह ने अपनी टिप्पणी पर सफाई दी। उन्होंने कहा कि ‘ट्रांसजेंडर’ कोई अपमानजनक शब्द नहीं, बल्कि एक सम्मानित पहचान है। राजन सिंह ने कहा कि उन्हें स्वयं अपनी ट्रांसजेंडर पहचान पर गर्व है और उनका उद्देश्य इस शब्द को अपमान के तौर पर इस्तेमाल करना नहीं था। उन्होंने चुनावी दस्तावेजों में उम्मीदवारों की लैंगिक पहचान को लेकर भी सवाल उठाए। चिराग पासवान की ओर से क्या आया जवाब? 21 सितंबर तक प्रकाशित प्रमुख रिपोर्ट्स में चिराग पासवान या उनकी पार्टी की ओर से राजन सिंह के इस दावे पर कोई औपचारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी। ऐसे में उनकी निजी पहचान को लेकर किया गया दावा अपुष्ट ही है और इसे प्रमाणित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता। निजी पहचान पर सियासी बयान से बढ़ी बहस पूरे विवाद ने राजनीतिक बयानबाजी के साथ-साथ किसी सार्वजनिक व्यक्ति की निजी पहचान को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों पर भी सवाल खड़े किए हैं। एक ओर जीतन राम मांझी ने टिप्पणी को आपत्तिजनक बताते हुए कार्रवाई की मांग की है, वहीं राजन सिंह का कहना है कि ट्रांसजेंडर पहचान को अपमान के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। फिलहाल विवाद का केंद्र चिराग पासवान की वास्तविक पहचान से अधिक एक अपुष्ट व्यक्तिगत दावे को सार्वजनिक और राजनीतिक बहस का हिस्सा बनाए जाने पर है। source – Amar Ujala / Live Hindustan / IANS जय राष्ट्र न्यूज़

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Kuno में बड़ी Cheetah Update; India में जन्मी मादा ने 4 Cubs को दिया जन्म, कुल Population 56 पहुंची

श्योपुर, 18 सितंबर 2026: Madhya Pradesh के Kuno National Park से Project Cheetah के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। India में जन्मी female cheetah KGP12 ने चार cubs को जन्म दिया है। KGP12 South Africa से लाई गई female cheetah Gamini की बेटी है। नए cubs के जन्म के साथ India में cheetahs की कुल संख्या बढ़कर 56 हो गई है। Project Cheetah के 4 साल पूरे होने के अगले दिन खुशखबरी Project Cheetah ने 17 सितंबर को India में अपने चार साल पूरे किए थे और इसके ठीक अगले दिन Kuno में चार नए cubs के जन्म की जानकारी सामने आई। Union Environment Minister Bhupender Yadav ने इसे Project Cheetah के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए Kuno और conservation team को बधाई दी। South African Cheetah Gamini की बेटी है KGP12 KGP12 का जन्म India में हुआ था और उसकी mother Gamini को South Africa से फरवरी 2023 में India लाया गया था। इस वजह से नए cubs को Project Cheetah के तहत India में आगे बढ़ रही नई generation का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी बार मां बनी KGP12 KGP12 इससे पहले April 2026 में भी चार cubs को जन्म दे चुकी थी। उस समय उसने Kuno के wild area में बच्चों को जन्म दिया था। हालांकि करीब एक महीने बाद उसके पहले litter के चारों cubs leopard attack में मारे गए थे। अब KGP12 ने secured enclosure में दूसरी बार चार cubs को जन्म दिया है। India में Cheetahs की संख्या 56 चार नए cubs के जन्म के बाद India की total cheetah population अब 56 हो गई है। इनमें: मौजूद हैं। कुल cheetahs में से 36 का जन्म India में हुआ है। Forest Team कर रही Cubs की Monitoring Kuno National Park के field staff नए cubs और उनकी mother की लगातार monitoring कर रहे हैं। Officials के मुताबिक mother और cubs को disturb न करने के लिए निगरानी दूरी से की जा रही है। इस birth को Project Cheetah के breeding programme और Indian conditions में cheetahs के adaptation के लिए positive development माना जा रहा है। 2022 में शुरू हुआ था Project Cheetah Project Cheetah की शुरुआत 17 September 2022 को Namibia से आठ cheetahs लाकर की गई थी। इसके बाद South Africa और Botswana से भी cheetahs India लाए गए। अब programme का focus imported animals के साथ-साथ India में जन्मी नई generations को sustainable population में बदलने पर है। source – Ministry of Environment / The Indian Express / The New Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Railway Minister Ashwini Vaishnaw आज Gujarat में 4 Gati Shakti Cargo Terminals करेंगे Dedicate; Passenger Projects भी Launch

अहमदाबाद, 15 सितंबर 2026: Railway Minister Ashwini Vaishnaw आज video conferencing के जरिए Gujarat में कई logistics और passenger amenity projects launch करेंगे। इनमें Bhimasar, Devaliya, Chandisar और Shivlakha के 4 Gati Shakti Cargo Terminals (GCTs) को राष्ट्र को समर्पित करना शामिल है। इसके साथ Mehsana के Linch में एक नए GCT की foundation stone भी रखी जाएगी। 4 Gati Shakti Cargo Terminals होंगे Dedicated आज जिन 4 GCTs को dedicate किया जाएगा, उनमें: शामिल हैं। इन terminals का उद्देश्य rail-based freight movement को तेज करना, cargo handling modernise करना और industries को बेहतर logistics options उपलब्ध कराना है। Linch में नए Cargo Terminal की Foundation Stone Vaishnaw Mehsana जिले के Linch में नए Gati Shakti Cargo Terminal की foundation stone भी रखेंगे। Railways का कहना है कि private-sector participation के साथ विकसित हो रहे ऐसे terminals से first-and-last-mile freight connectivity मजबूत होगी और road से rail की ओर cargo shift को बढ़ावा मिलेगा। Gopalpur Railway Station का होगा Inauguration Kutch जिले में Gopalpur railway station का भी आज उद्घाटन किया जाएगा। नई station facility से local commuters की rail connectivity बेहतर होगी। साथ ही Ahmedabad और Bhuj के बीच चलने वाली कुछ trains को Gandhidham में engine reversal की जरूरत कम होगी, जिससे operational time बचने की उम्मीद है। Bhuj-Shalimar Express को Anjar में Stoppage आज Bhuj-Shalimar Express के Anjar station stoppage की शुरुआत भी की जाएगी। Railways के मुताबिक इससे Anjar और आसपास के यात्रियों को major cities के लिए direct rail connectivity मिलेगी और उन्हें train पकड़ने के लिए दूसरे stations तक जाने की जरूरत कम होगी। Freight Capacity बढ़ाने पर Railways का Focus Indian Railways लगातार Gati Shakti Cargo Terminals का network बढ़ा रहा है। August 2026 में ही 5 नए GCT commission किए गए थे, जिसके बाद इनकी nationwide संख्या 149 तक पहुंच गई थी। Railways का कहना है कि इस model से industry और regional economic activity को बेहतर freight connectivity मिल रही है। Gujarat Logistics Network को मिलेगा Boost आज के projects से Kutch, Junagadh, Banaskantha और Mehsana जैसे industrial और commercial regions में freight movement बेहतर होने की उम्मीद है। Railways के मुताबिक इन initiatives से goods transportation, passenger connectivity और logistics infrastructure—तीनों को फायदा होगा। source – Ministry of Railways / PTI / ThePrint / Financial Express जय राष्ट्र न्यूज़

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