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सोलापुर में जिला परिषद स्कूल का स्लैब गिरा, 13 छात्र और 2 शिक्षक घायल

सोलापुर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के अक्कलकोट तालुका के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब अचानक गिर गया। हादसे में 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और घायल बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया। अचानक गिरा स्लैब, बच्चों में मची अफरा-तफरी जानकारी के अनुसार, हादसा 10 अगस्त 2026 को दोपहर के समय हुआ। स्कूल के पोर्च की छत की एक परत अचानक नीचे गिर गई और मलबा छात्रों के ऊपर जा गिरा। मलबा गिरते ही स्कूल में चीख-पुकार मच गई। मौजूद शिक्षकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत बच्चों को मलबे से बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया। 13 छात्र घायल, 2 शिक्षकों के घायल होने की भी खबर हादसे में कुल 13 छात्रों के घायल होने की पुष्टि कई रिपोर्टों में हुई है। वहीं, कुछ रिपोर्टों और वीडियो रिपोर्ट में 2 शिक्षकों के भी घायल होने की जानकारी दी गई है। घायल छात्रों को प्राथमिक उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक किसी भी बच्चे को गंभीर चोट नहीं आई और उपचार के बाद घायल छात्रों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई गई है। करीब 25 साल पुरानी है स्कूल की इमारत बताया जा रहा है कि यह स्कूल भवन करीब 25 साल पुराना है। यह सोलापुर जिला परिषद द्वारा संचालित कन्नड़ माध्यम का स्कूल है, जिसमें पहली से सातवीं कक्षा तक पढ़ाई होती है। स्कूल में करीब 250 छात्र पढ़ते हैं। ऐसे में स्कूल भवन के एक हिस्से का अचानक गिरना सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर संभाला मोर्चा घटना की जानकारी मिलते ही एंबुलेंस के साथ जिला परिषद के अधिकारी मौके पर पहुंचे। घायल बच्चों को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई। प्रशासन की ओर से स्कूल भवन की स्थिति का जायजा लेने की प्रक्रिया भी शुरू की गई है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि स्लैब गिरने की वास्तविक वजह क्या थी। जर्जर स्कूल भवन को लेकर उठे सवाल हादसे के बाद स्थानीय स्तर पर स्कूल की पुरानी इमारत को लेकर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने पुरानी इमारत को गिराकर नई स्कूल बिल्डिंग बनाने की मांग उठाई है। सवाल यह भी है कि यदि भवन पहले से कमजोर था तो वहां बच्चों की कक्षाएं क्यों संचालित की जा रही थीं। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों के पुराने सरकारी स्कूल भवनों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी ध्यान खींचा है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता स्कूल में बड़ी संख्या में बच्चे पढ़ते हैं। ऐसे में भवन के किसी हिस्से का गिरना गंभीर सुरक्षा चिंता का विषय है। अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता अब यह है कि स्कूल की इमारत की पूरी तरह जांच कराई जाए और जब तक भवन सुरक्षित घोषित न हो, तब तक बच्चों की सुरक्षा के लिए वैकल्पिक व्यवस्था की जाए। प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती हादसे के बाद प्रशासन के सामने स्कूल भवन की संरचनात्मक सुरक्षा की जांच और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने की चुनौती है। यदि भवन के अन्य हिस्से भी कमजोर पाए जाते हैं, तो उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण की जरूरत पड़ सकती है। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पुराने स्कूल भवनों का नियमित निरीक्षण भी जरूरी माना जा रहा है। निष्कर्ष सोलापुर के बबलाद गांव में जिला परिषद स्कूल के पोर्च का स्लैब गिरने से 13 छात्र घायल हो गए। कुछ रिपोर्टों में 2 शिक्षकों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। राहत की बात यह है कि किसी गंभीर जनहानि की सूचना नहीं है और घायल छात्रों की स्थिति स्थिर बताई गई है। लेकिन इस हादसे ने करीब 25 साल पुराने स्कूल भवन की सुरक्षा और सरकारी स्कूलों में बच्चों के लिए उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब प्रशासन की जांच और स्कूल भवन की आगे की कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी। Source: ABP News / TV9 Bharatvarsh / स्थानीय प्रशासन से संबंधित रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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दिल्ली–पुणे SpiceJet फ्लाइट में AC फेल, बढ़ती गर्मी से यात्रियों का हंगामा; उड़ान से पहले विमान लौटाया गया

नई दिल्ली: दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet की फ्लाइट में बुधवार को उड़ान भरने से पहले यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। विमान के केबिन में एयर कंडीशनिंग और वेंटिलेशन की समस्या के कारण तापमान बढ़ गया। कई यात्रियों ने घुटन और सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की, जिसके बाद विमान में हंगामा शुरू हो गया। विमान के अंदर बढ़ने लगा तापमान रिपोर्टों के मुताबिक, यात्रियों के विमान में सवार होने के बाद केबिन का तापमान लगातार बढ़ता गया। गर्मी और उमस के कारण कई यात्री पसीने से परेशान हो गए। विमान में बच्चे और बुजुर्ग यात्री भी मौजूद थे। कुछ यात्रियों ने सांस लेने में तकलीफ होने की शिकायत की। एक यात्री ने स्थिति की तुलना बेहद गर्म और दमघोंटू माहौल से की। यात्रियों ने किया हंगामा हालात बिगड़ने के बाद यात्रियों ने विमान में विरोध शुरू कर दिया। यात्रियों का कहना था कि जब केबिन में गर्मी और घुटन बढ़ रही थी, तब उड़ान भरना सुरक्षित नहीं होगा। कई यात्रियों ने विमान के दरवाजे खोलने और उन्हें बाहर निकालने की मांग की। स्थिति को देखते हुए विमान को वापस बे पर लाया गया और यात्रियों को विमान से उतारा गया। 100 से ज्यादा यात्रियों ने उड़ान से इनकार किया Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक, 100 से अधिक यात्रियों ने असहज परिस्थितियों में यात्रा जारी रखने से इनकार कर दिया। इसके बाद विमान को वापस बे पर लाना पड़ा। रिपोर्ट में इस समस्या की वजह विमान के एयर-कंडीशनिंग सिस्टम में खराबी बताई गई है। सांस लेने में भी हुई परेशानी यात्रियों के अनुसार, विमान के अंदर पर्याप्त वेंटिलेशन नहीं था। गर्मी बढ़ने के साथ कुछ यात्रियों को सांस लेने में कठिनाई महसूस हुई। एक यात्री के हवाले से रिपोर्ट में कहा गया कि AC नहीं चल रहा था और वेंटिलेशन भी नहीं था, जिसके कारण यात्रियों को काफी परेशानी हुई। बड़ा हादसा टला? घटना के बाद सोशल मीडिया पर यात्रियों के वीडियो और तस्वीरें भी सामने आईं, जिनमें विमान के अंदर यात्रियों को परेशान देखा जा सकता है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों में किसी गंभीर चोट या मौत की पुष्टि नहीं हुई है। विमान को उड़ान से पहले वापस बे पर लाए जाने के बाद यात्रियों को बाहर निकाला गया। SpiceJet की उड़ानों पर फिर उठे सवाल यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब एयरलाइन संचालन, उड़ानों में देरी और यात्रियों की सुविधाओं को लेकर SpiceJet पर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। दिल्ली–पुणे रूट पर SpiceJet की उड़ानें संचालित होती हैं और कंपनी के शेड्यूल में SG 939 और SG 105 जैसी उड़ानें दर्ज हैं। ताजा घटना के बाद यात्रियों की सुरक्षा और विमान के तकनीकी रखरखाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। यात्रियों की सुरक्षा सबसे अहम विमान के टेक-ऑफ से पहले केबिन में तापमान और वेंटिलेशन की समस्या सामने आने के बाद उड़ान रोकना यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासकर गर्म मौसम में विमान के अंदर एयर कंडीशनिंग और उचित वेंटिलेशन यात्रियों के आराम के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए भी जरूरी है। निष्कर्ष दिल्ली से पुणे जा रही SpiceJet फ्लाइट में AC और वेंटिलेशन की समस्या के कारण केबिन का तापमान बढ़ गया, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी हुई। बच्चों और बुजुर्गों समेत कई यात्रियों ने सांस लेने में दिक्कत की शिकायत की और विरोध किया। स्थिति को देखते हुए विमान को उड़ान से पहले वापस बे पर लाया गया और यात्रियों को उतारा गया। 100 से ज्यादा यात्रियों के उड़ान जारी रखने से इनकार करने की रिपोर्ट सामने आई है। Source: NDTV / NDTV Profit / Times of India / अन्य रिपोर्ट्स जय राष्ट्र न्यूज़

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“शिक्षा शेरनी का दूध है, लेकिन आरक्षण कुतिया का वो दूध है…” — आचार्य सूर्य सागर जी

आचार्य सूर्य सागर जी का एक कथित बयान सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसमें उन्होंने शिक्षा और आरक्षण की तुलना करते हुए बेहद आपत्तिजनक और विवादित भाषा का इस्तेमाल किया है। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे आरक्षण व्यवस्था पर टिप्पणी बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने इस तरह की भाषा और तुलना पर आपत्ति जताई है। नोट: यह कथन आचार्य सूर्य सागर जी के नाम से सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रहा है। इसके मूल वीडियो और संदर्भ की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है। #AcharyaSuryaSagar#Reservation#Education#SocialJustice#ControversialStatement BreakingNews JayRashtraNews

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“राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते!”—साक्षी महाराज का विवादित बयान, सियासत गरमाई

उन्नाव: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को लेकर विवादित बयान दिया है। हाल ही में मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने राहुल गांधी की प्रधानमंत्री बनने की संभावना पर सवाल उठाते हुए कहा कि “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राहुल गांधी के PM बनने पर साक्षी महाराज का बड़ा दावा साक्षी महाराज ने राहुल गांधी के राजनीतिक भविष्य पर टिप्पणी करते हुए कहा कि राहुल गांधी एक बड़े राजनीतिक परिवार से आते हैं और उन्हें बचपन से ही प्रधानमंत्री बनने की बात बताई जाती रही है। उन्होंने दावा किया कि राहुल गांधी को सत्ता की विरासत मिलने की उम्मीद रही है, लेकिन वह किसी भी जन्म में देश के प्रधानमंत्री नहीं बन सकते। यह बयान अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत पर निशाना बीजेपी सांसद ने राहुल गांधी के परिवार और उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी ऐसे परिवार में पैदा हुए हैं जहां राजनीति और सत्ता लंबे समय से मौजूद रही है। साक्षी महाराज का यह हमला ऐसे समय आया है जब संसद में सरकार और विपक्ष के बीच कई मुद्दों को लेकर लगातार टकराव चल रहा है। जंतर-मंतर छात्र आंदोलन पर भी बोले साक्षी महाराज साक्षी महाराज ने सिर्फ राहुल गांधी पर ही हमला नहीं किया, बल्कि जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर भी विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलन में कुछ ऐसे तत्व शामिल थे जिनकी भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने आंदोलन में कथित विदेशी हाथ और फंडिंग की जांच की मांग भी उठाई। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। पुलिस कार्रवाई और आंदोलन को लेकर भी बयान छात्र आंदोलन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवालों पर साक्षी महाराज ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई का बचाव करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों पर भी पथराव और हमले हुए थे। उन्होंने आंदोलन में शामिल लोगों की भूमिका को लेकर जांच की जरूरत बताई और कहा कि पूरे मामले की सच्चाई सामने आनी चाहिए। सोनम वांगचुक के बयान का भी किया जिक्र साक्षी महाराज ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के एक कथित बयान का उल्लेख करते हुए दावा किया कि आंदोलन में बड़ी संख्या में ऐसे लोग शामिल थे जो वास्तविक छात्र नहीं थे। हालांकि, इस संबंध में भी साक्षी महाराज द्वारा किए गए दावों को स्वतंत्र रूप से सत्यापित किए बिना तथ्य के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। बयान के बाद सोशल मीडिया पर चर्चा साक्षी महाराज का राहुल गांधी को लेकर दिया गया बयान सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा में आया। उनके बयान के वीडियो और छोटे क्लिप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए जा रहे हैं। समर्थक इसे राहुल गांधी पर राजनीतिक तंज बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे व्यक्तिगत और गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी बता रहे हैं। संसद में पहले से जारी है राजनीतिक टकराव राहुल गांधी और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक टकराव लगातार चर्चा में रहता है। संसद में छात्र प्रदर्शन, परीक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने हैं। ऐसे माहौल में साक्षी महाराज की यह टिप्पणी राजनीतिक बयानबाजी को और तेज करने वाली मानी जा रही है। निष्कर्ष बीजेपी सांसद साक्षी महाराज के “राहुल गांधी किसी भी जन्म में प्रधानमंत्री नहीं बन सकते” वाले बयान ने राजनीतिक बहस को गर्म कर दिया है। उन्होंने राहुल गांधी की राजनीतिक विरासत और प्रधानमंत्री बनने की संभावनाओं पर तीखा हमला किया है। साथ ही उन्होंने जंतर-मंतर छात्र आंदोलन में कथित विदेशी फंडिंग और अन्य लोगों की भूमिका की जांच की मांग भी की। हालांकि, विदेशी फंडिंग और आंदोलन में बाहरी तत्वों से जुड़े उनके दावों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। Source: Navbharat Times / Khabargaon / Latest Political Reports जय राष्ट्र न्यूज़

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UPI लेनदेन पर शुल्क लगेगा? संजय सिंह का मोदी सरकार पर हमला, बिल वापस लेने की मांग

नई दिल्ली: UPI भुगतान को लेकर संसद में राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रस्तावित व्यवस्था से UPI के जरिए होने वाले भुगतान पर कारोबारियों पर टैक्स का बोझ बढ़ सकता है, जिसका असर आगे चलकर आम लोगों पर पड़ सकता है। आम आदमी पार्टी ने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। संजय सिंह ने संसद में उठाया UPI का मुद्दा राज्यसभा में विधेयक पर चर्चा के दौरान संजय सिंह ने UPI लेनदेन से जुड़े प्रस्ताव पर सवाल उठाए। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि एक तरफ डिजिटल भुगतान को बढ़ावा दिया जा रहा है और दूसरी तरफ ऐसे प्रावधान लाए जा रहे हैं जिनसे छोटे व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है। संजय सिंह ने इस मुद्दे को आम आदमी और छोटे कारोबारियों से जोड़ते हुए सरकार से बिल वापस लेने की मांग की। “व्यापारियों से टैक्स लिया तो जनता पर पड़ेगा बोझ” AAP की ओर से जारी बयान के मुताबिक संजय सिंह का कहना है कि अगर UPI से होने वाले भुगतान पर कारोबारियों से अतिरिक्त शुल्क या टैक्स लिया जाता है, तो उसका बोझ अंततः ग्राहकों तक पहुंच सकता है। उनका तर्क है कि छोटे दुकानदार और कारोबारी अपनी अतिरिक्त लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं। ऐसे में डिजिटल भुगतान करने वाले ग्राहकों पर अप्रत्यक्ष रूप से असर पड़ने की आशंका जताई गई है। सरकार का जवाब—आम यूजर से UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा हालांकि इस मामले में सरकार की ओर से महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण भी सामने आया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में कहा कि आम UPI यूजर्स से किसी तरह का UPI चार्ज नहीं लिया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छोटे व्यापारियों पर MDR (Merchant Discount Rate) लगाने की बात नहीं है। संसद ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी भी दे दी है। तो क्या UPI से पैसे भेजने पर लगेगा चार्ज? इस विवाद में सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि आम लोगों के UPI भुगतान पर सीधे कोई नया शुल्क लगाए जाने की घोषणा नहीं हुई है। यानी अगर कोई व्यक्ति दुकान पर QR Code स्कैन करके ₹500 या ₹1,000 का भुगतान करता है, तो सरकार के मौजूदा स्पष्टीकरण के अनुसार ग्राहक से अलग से UPI चार्ज वसूलने की व्यवस्था नहीं है। संजय सिंह का विरोध मुख्य रूप से विधेयक में टैक्स से जुड़े प्रावधानों और उनके संभावित प्रभाव को लेकर है। छोटे कारोबारियों को लेकर AAP की चिंता AAP का कहना है कि छोटे व्यापारियों पर किसी भी अतिरिक्त लागत का प्रभाव व्यापक हो सकता है। पार्टी ने इसे छोटे कारोबारियों और आम जनता के हित से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी का दावा है कि डिजिटल इंडिया और कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के बाद UPI से जुड़े लेनदेन पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डालना विरोधाभासी होगा। मोदी सरकार पर संजय सिंह का राजनीतिक हमला संजय सिंह ने इस मुद्दे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी राजनीतिक हमला बोला। AAP के मुताबिक उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का फायदा बड़े और विदेशी निवेशकों को मिल रहा है, जबकि छोटे कारोबारियों पर बोझ बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस प्रावधान को वापस लेने की मांग की है। Taxation Bill 2026 को संसद की मंजूरी इस पूरे विवाद के बीच Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 संसद से पारित हो चुका है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यसभा ने चर्चा के बाद Money Bill को लोकसभा को लौटाया और बाद में विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गई। वित्त मंत्री ने इस दौरान UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों को लेकर आश्वासन दिया कि उन पर सीधे UPI/MDR चार्ज नहीं लगाया जाएगा। UPI भुगतान करने वालों के लिए क्या बदलेगा? फिलहाल आम UPI यूजर्स के लिए सबसे अहम बात यह है कि UPI से पैसे भेजने या QR Code के जरिए भुगतान करने पर कोई नया सीधा शुल्क लागू होने की घोषणा नहीं की गई है। हालांकि टैक्स व्यवस्था में बदलाव और उसके कारोबारी प्रभाव को लेकर राजनीतिक बहस जारी है। इसलिए भविष्य में नियमों में कोई बदलाव होता है तो उसके आधिकारिक विवरण को देखना जरूरी होगा। निष्कर्ष UPI को लेकर संसद में जारी बहस के बीच संजय सिंह ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए Taxation Bill 2026 के प्रावधानों का विरोध किया है और इसे वापस लेने की मांग की है। AAP का दावा है कि व्यापारियों पर टैक्स या अतिरिक्त लागत बढ़ने से इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंच सकता है। वहीं, सरकार की ओर से वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि आम UPI यूजर्स और छोटे व्यापारियों से नया UPI/MDR चार्ज नहीं लिया जाएगा। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि UPI से भुगतान करने वाले आम लोगों पर नया शुल्क लगा दिया गया है। Source: Aam Aadmi Party / Indian Express / The Statesman / Live Hindustan जय राष्ट्र न्यूज़

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एथेनॉल विवाद पर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा का बयान—“शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?”

मध्य प्रदेश के रीवा से भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा अपने एक बयान को लेकर चर्चा में हैं। रीवा एयरपोर्ट पर एक कार्यक्रम के दौरान एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा—“आंदोलन हो रहा है एथेनॉल नहीं चलेगा, शुद्ध पेट्रोल चलेगा। शुद्ध पेट्रोल तुम्हारे बाप के घर से आएगा?” सांसद मिश्रा रीवा से भोपाल और कोलकाता के लिए शुरू हुई नई उड़ानों के उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने देश की आर्थिक स्थिति और एथेनॉल नीति पर भी अपनी बात रखी। #JanardanMishra#RewaNews#MadhyaPradesh#Ethanol#BJPNews BreakingNews JayRashtraNews

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असम में बाढ़ का कहर, मृतकों की संख्या 100 पहुंची; लाखों लोग प्रभावित, राहत-बचाव अभियान जारी

गुवाहाटी: असम में लगातार बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। राज्य के कई इलाकों में बाढ़ का पानी घरों, सड़कों और कृषि क्षेत्रों में फैल गया है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक बाढ़ से मृतकों की संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन की ओर से राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है। भारी बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है। कई प्रभावित इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। मृतकों की संख्या 100 पहुंची ताजा रिपोर्ट के अनुसार पिछले 24 घंटों में दो और मौतों के बाद असम में बाढ़ से जुड़ी मौतों की संख्या 100 तक पहुंच गई है। अलग-अलग जिलों में बाढ़ और उससे जुड़े हादसों के कारण जान-माल का नुकसान हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार सिवसागर और कछार सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल हैं। कछार में 22 मौतों की रिपोर्ट सामने आई है, जबकि सिवसागर में 49 मौतें दर्ज होने की जानकारी दी गई है। कई जिले बाढ़ की चपेट में बाढ़ का असर असम के कई जिलों में देखने को मिल रहा है। प्रभावित जिलों में गोलाघाट, सिवसागर, होजाई, दरांग, लखीमपुर, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग, चराईदेव, नगांव और बिस्वनाथ शामिल हैं। कई स्थानों पर सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है और निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य जनजीवन बाधित हुआ है। एक लाख से ज्यादा लोग प्रभावित बाढ़ के कारण राज्य में एक लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की रिपोर्ट है। कुछ रिपोर्टों में प्रभावित आबादी का आंकड़ा करीब 1.37 लाख बताया गया है। गोलाघाट को सबसे अधिक प्रभावित जिलों में बताया गया है, जहां बड़ी संख्या में लोग बाढ़ की चपेट में हैं। हालांकि व्यापक मानवीय प्रभाव इससे भी बड़ा बताया गया है। एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार इस बाढ़ संकट के दौरान 7 लाख से अधिक लोग विस्थापित या प्रभावित हुए हैं और बड़ी संख्या में लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। ब्रह्मपुत्र समेत कई नदियों का बढ़ा जलस्तर भारी मानसूनी बारिश के बीच ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर कई क्षेत्रों में खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बना हुआ है। नदियों के बढ़े जलस्तर के कारण निचले इलाकों में पानी फैलने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन लगातार जलस्तर और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी कर रहा है। राहत और बचाव अभियान जारी बाढ़ प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के लिए प्रशासन और बचाव एजेंसियों की टीमें काम कर रही हैं। प्रभावित लोगों को भोजन, पानी और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने के साथ-साथ चिकित्सा सहायता देने के प्रयास भी जारी हैं। कई लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। एपी की रिपोर्ट के अनुसार संकट के चरम पर करीब 3 लाख लोग सरकारी राहत शिविरों में पहुंचे थे, जबकि अब भी हजारों लोग राहत शिविरों और वितरण केंद्रों में रह रहे हैं। सड़कों और बुनियादी ढांचे को नुकसान बाढ़ का असर केवल लोगों के विस्थापन तक सीमित नहीं है। कई इलाकों में सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। कृषि भूमि में पानी भरने से किसानों को भी नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बाढ़ का पानी कम होने के बाद प्रभावित परिवारों के सामने घरों की सफाई, क्षतिग्रस्त संपत्ति की मरम्मत और रोजमर्रा की जिंदगी दोबारा शुरू करने की बड़ी चुनौती होगी। पशुधन और कृषि पर भी पड़ा असर असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में कृषि और पशुपालन की महत्वपूर्ण भूमिका है। बाढ़ के कारण खेतों में पानी भरने और पशुधन के नुकसान से ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें बढ़ी हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी कृषि क्षेत्र को हुए नुकसान का आकलन करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती रहेगा। पशुओं में बीमारी फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य और पशुपालन विभागों के लिए भी स्थिति पर नजर रखना जरूरी है। पानी घटने के बाद भी चुनौती खत्म नहीं कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का पानी धीरे-धीरे कम होने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन इससे संकट पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। पानी घटने के बाद प्रभावित इलाकों में कीचड़, दूषित पानी, क्षतिग्रस्त सड़कें और घरों की सफाई जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। इसके अलावा विस्थापित परिवारों को सुरक्षित तरीके से वापस बसाना भी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती होगी। मानसून ने बढ़ाई मुश्किल असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की समस्या सामने आती है, लेकिन इस बार भारी बारिश और नदियों के बढ़े जलस्तर ने कई इलाकों में स्थिति को गंभीर बना दिया है। विशेषज्ञों के मुताबिक दक्षिण एशिया में मानसून के पैटर्न में बढ़ती अनिश्चितता और अत्यधिक बारिश की घटनाएं बाढ़ के जोखिम को और बढ़ा सकती हैं। प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती अब प्रशासन का मुख्य फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना, राहत सामग्री पहुंचाना और बाढ़ का पानी कम होने के बाद पुनर्वास तथा नुकसान का आकलन करना है। जिन इलाकों में अभी भी पानी भरा हुआ है, वहां लोगों को बिना आवश्यक सुरक्षा के वापस घरों में नहीं लौटने की सलाह दी जा रही है। प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं और साफ पेयजल की उपलब्धता भी बेहद महत्वपूर्ण होगी। निष्कर्ष असम में बाढ़ की स्थिति अभी भी गंभीर बनी हुई है और मृतकों की संख्या 100 तक पहुंच गई है। कई जिलों में बाढ़ का पानी फैला हुआ है और बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। प्रशासन तथा बचाव एजेंसियां राहत और बचाव अभियान में जुटी हैं। हालांकि कुछ क्षेत्रों में पानी घटने के संकेत मिल रहे हैं, लेकिन प्रभावित परिवारों के लिए असली चुनौती अब शुरू होगी। घरों, सड़कों और कृषि भूमि को हुए नुकसान की भरपाई तथा विस्थापित लोगों का पुनर्वास आने वाले दिनों में सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में रहेगा। Source: Associated Press, Indian Express, NDTV, Business Standard जय राष्ट्र न्यूज़

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राष्ट्रीय | रांची में छात्र आंदोलन के दौरान AISA अध्यक्ष नेहा बोरा पर फेंकी गई स्याही, आरोपी हिरासत में

झारखंड की राजधानी रांची में छात्र आंदोलन के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक व्यक्ति ने स्याही फेंक दी। यह घटना बिरसा चौक के पास उस समय हुई, जब AISA और AISF के नेतृत्व में छात्र भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। घटना के तुरंत बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में ले लिया। आरोपी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया कि उसने वैचारिक असहमति के कारण यह कदम उठाया। वहीं, नेहा बोरा ने कहा कि इस घटना से उनका मनोबल नहीं टूटेगा और वे छात्रों के अधिकारों के लिए अपना आंदोलन जारी रखेंगी। #NehaBora#AISA#Jharkhand#Ranchi#StudentProtest BreakingNews JaiRashtraNews

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राष्ट्रीय | चरखी दादरी में सिटी थाने के सामने ताबड़तोड़ फायरिंग; कई लोग घायल, इलाके में दहशत

हरियाणा के चरखी दादरी में दिनदहाड़े सिटी थाना परिसर के सामने अंधाधुंध फायरिंग की घटना से हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, स्कॉर्पियो सवार कुछ युवकों ने थाने के सामने ताबड़तोड़ गोलियां चलाईं, जिसमें कई लोगों के घायल होने की खबर है। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल बन गया। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी कर जांच शुरू कर दी। आरोपियों की तलाश के लिए आसपास के इलाकों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस घटना के बाद शहर की कानून-व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, फायरिंग के कारणों और घायलों की संख्या को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी आना अभी बाकी है। #CharkhiDadri#Haryana#Firing#Crime#Police BreakingNews JayRashtraNews

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राष्ट्रीय | गोरखपुर की व्यवस्थाओं पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उठाए सवाल; बोलीं—”यहां ऐसी कमियां रहेंगी तो क्या होगा?”

गोरखपुर विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में पहुंचीं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने शहर और प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर खुलकर सवाल उठाए। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, “जो हमारी कमियां हैं, वो तो मुझे बताना ही पड़ेगा। ये तो गोरखपुर है, जहां स्वयं हमारे मुख्यमंत्री विराजमान हैं, वहां ऐसी कमियां रहेंगी तो क्या होगा?” राज्यपाल ने अपने भाषण में बिजली, पानी, पंखों की व्यवस्था, साफ-सफाई, साथ ही ड्रग्स और शराब से जुड़ी समस्याओं का भी उल्लेख किया। राज्यपाल के इस बयान के बाद गोरखपुर की बुनियादी सुविधाओं और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। #Gorakhpur#AnandibenPatel#UPNews #YogiAdityanath #BreakingNews JayRashtraNews

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