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मीरा-भायंदर महापालिका की बैठक में हंगामा, BJP पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों से मारपीट के आरोप; FIR दर्ज

मीरा-भायंदर, 18 अक्टूबर 2026: महाराष्ट्र के ठाणे जिले में मीरा-भायंदर महानगरपालिका (MBMC) की जनरल बॉडी मीटिंग के दौरान हंगामे का मामला सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कई पार्षदों पर नागरिकों और पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की तथा मारपीट करने के आरोप लगे हैं। घटना के बाद भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में आरोपियों की संख्या को लेकर अंतर बताया गया है। मोबाइल से रिकॉर्डिंग को लेकर शुरू हुआ विवाद मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, महानगरपालिका की बैठक के दौरान दर्शक दीर्घा में मौजूद कुछ लोग मोबाइल फोन से कार्यवाही रिकॉर्ड कर रहे थे। इसी बात को लेकर विवाद शुरू हुआ। आरोप है कि इसके बाद कुछ BJP पार्षद दर्शक दीर्घा तक पहुंचे, जहां नागरिकों के साथ कहासुनी और धक्का-मुक्की हुई। पत्रकारों से मारपीट और मोबाइल तोड़ने के आरोप बैठक की कवरेज करने पहुंचे पत्रकारों ने भी उनके साथ मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, एक पत्रकार का मोबाइल फोन छीनकर तोड़ने और पत्रकारों की ओर जूते-चप्पल फेंकने के आरोप भी सामने आए हैं। घटना से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद पुलिस द्वारा उपलब्ध वीडियो और CCTV फुटेज की जांच किए जाने की जानकारी दी गई है। आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। BJP पार्षदों के खिलाफ FIR, आरोपियों की संख्या पर अलग-अलग दावे मामले में भायंदर पुलिस ने दो FIR दर्ज की हैं। Free Press Journal और कुछ मराठी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 16 BJP पार्षदों और एक पार्टी कार्यकर्ता के खिलाफ FIR दर्ज की गई है। वहीं, Amar Ujala की रिपोर्ट में एक FIR में 17 पार्षदों के नाम होने की बात कही गई है। रिपोर्टों में इस अंतर के कारण आरोपियों की अंतिम संख्या और प्रत्येक व्यक्ति के खिलाफ लगाए गए आरोपों की स्थिति पुलिस की जांच तथा आधिकारिक दस्तावेजों से स्पष्ट होगी। FIR दर्ज होना अपने आप में आरोपों को साबित नहीं करता। पुलिस की मौजूदगी में घटना होने का दावा कुछ नागरिकों ने आरोप लगाया है कि घटना पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में हुई और समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया गया। पुलिस ने शिकायतों के आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की है। घटना के दौरान पुलिस की भूमिका और सामने आए आरोपों की भी तथ्यों के आधार पर पड़ताल जरूरी है। पत्रकारों ने किया प्रदर्शन घटना के बाद पत्रकारों ने महानगरपालिका परिसर के बाहर प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पत्रकार संरक्षण कानून के तहत कार्रवाई की मांग की। विपक्षी दलों ने भी घटना पर आपत्ति जताई और पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। BJP नेतृत्व की प्रतिक्रिया BJP के समूह नेता हसमुख गेहलोत ने घटना को निंदनीय बताया। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने कहा कि जांच में यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। मामले में जवाबी शिकायतें दर्ज होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस दोनों पक्षों के बयानों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच कर रही है। जांच के नतीजों पर टिकी नजर मीरा-भायंदर महानगरपालिका की बैठक में हुए इस विवाद ने स्थानीय निकायों की बैठकों में नागरिकों और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े किए हैं। अब पुलिस जांच, वीडियो फुटेज और दोनों पक्षों के बयानों के आधार पर यह स्पष्ट होगा कि घटना में किसकी क्या भूमिका थी। स्रोत: The Indian Express/भाषा रिपोर्ट्स, Loksatta, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दिपके पर BJP नेता प्रवीण दरेकर का पलटवार, PM मोदी को लेकर बयान पर जताई आपत्ति

मुंबई: महाराष्ट्र BJP के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य प्रवीण दरेकर ने CJP संस्थापक अभिजीत दिपके के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को लेकर दिए गए बयानों पर कड़ी आपत्ति जताई है। दरेकर ने आरोप लगाया कि शिवाजी पार्क में हुए CJP के प्रदर्शन के दौरान राजनीतिक नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी की गई और आंदोलन अपने मूल मुद्दों से भटककर राजनीतिक मंच बन गया। शिवाजी पार्क प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद 2 अक्टूबर को मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस दौरान अभिजीत दिपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमित शाह, ज्ञानेश कुमार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर तीखे राजनीतिक हमले किए थे। PM मोदी पर दिपके की टिप्पणी पर आपत्ति अभिजीत दिपके ने अपने भाषण में प्रधानमंत्री मोदी के चाय बेचने से जुड़े पुराने संदर्भ को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की थी। उन्होंने सवाल किया था कि जनता ने उन्हें चाय बेचने के लिए नहीं बल्कि सरकार चलाने के लिए चुना है। इसी तरह उन्होंने ‘Melody chocolate’ का जिक्र करते हुए भी प्रधानमंत्री पर निशाना साधा था। दरेकर बोले- आंदोलन राजनीतिक ड्रामा बन गया प्रवीण दरेकर ने CJP के प्रदर्शन पर हमला करते हुए इसे ‘political drama’ करार दिया। उनका कहना था कि शुरुआत में आंदोलन को छात्रों और चुनावी मुद्दों से जुड़ा बताया गया, लेकिन बाद में इसका इस्तेमाल प्रधानमंत्री मोदी, अमित शाह और महाराष्ट्र सरकार को निशाना बनाने के लिए किया गया। बाबासाहेब आंबेडकर को लेकर भी उठाया मुद्दा दरेकर ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़े कुछ तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने CJP से आंबेडकरी समाज और महाराष्ट्र की जनता से माफी मांगने की मांग भी की। यह BJP नेता का आरोप है और इस पर CJP की अलग राजनीतिक व्याख्या सामने आई है। ‘राजनीतिक नेताओं का अपमान स्वीकार नहीं’ दरेकर ने कहा कि राजनीतिक असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन प्रधानमंत्री और अन्य संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को लेकर अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं है। उन्होंने CJP नेतृत्व पर आंदोलन के जरिए केवल राजनीतिक सुर्खियां बटोरने का आरोप लगाया। फडणवीस को भी निशाना बना चुके हैं दिपके अभिजीत दिपके ने शिवाजी पार्क के भाषण में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस पर भी निशाना साधा था। उन्होंने मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणी की और कहा कि अगर सरकार चाहे तो उन्हें तीन दिन नहीं बल्कि तीन महीने जेल में डालकर देख सकती है। BJP नेताओं का CJP पर लगातार हमला प्रवीण दरेकर के अलावा BJP नेता राम कदम ने भी अभिजीत दिपके के बयानों की आलोचना की है। राम कदम ने संविधान और बाबासाहेब आंबेडकर से जुड़ी टिप्पणियों को लेकर सवाल उठाए और इसे आंबेडकर के सम्मान से जोड़ा। CJP का दावा- मुद्दा चुनाव आयोग की जवाबदेही का दूसरी ओर CJP का कहना है कि उसका आंदोलन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, voter-list revision और चुनाव आयोग की जवाबदेही से जुड़ा है। संगठन ने इन मुद्दों पर देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन जारी रखने की घोषणा की है। राजनीतिक टकराव और तेज CJP के प्रदर्शन के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में BJP और अभिजीत दिपके के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है। एक तरफ BJP नेता दिपके पर प्रधानमंत्री और अन्य नेताओं को लेकर मर्यादा तोड़ने का आरोप लगा रहे हैं, वहीं CJP सरकार और चुनाव आयोग के खिलाफ अपना अभियान जारी रखने की बात कह रही है। source – Loksatta / Reuters / IANS / Pudhari / The Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र UCC समिति में विवाद के बीच जस्टिस आरसी चव्हाण का इस्तीफा, पब्लिक फीडबैक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

मुंबई: महाराष्ट्र में Uniform Civil Code (UCC) के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने वाली समिति से बॉम्बे हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने जनता की राय लेने के लिए तैयार की जा रही प्रश्नावली, समिति में पर्याप्त चर्चा न होने और 19 सितंबर की बैठक में एक गैर-सदस्य की मौजूदगी पर सवाल उठाए। चव्हाण ने 19 सितंबर को इस्तीफा भेजा, जिसे महाराष्ट्र सरकार ने 21 सितंबर को स्वीकार कर लिया। ‘हां या ना’ वाले सवालों पर जताई आपत्ति जस्टिस चव्हाण की प्रमुख आपत्ति UCC को लेकर जनता से फीडबैक लेने के तरीके पर थी। समिति की योजना कई जटिल सामाजिक और वैवाहिक मुद्दों पर लोगों से मुख्य रूप से ‘हां’ या ‘ना’ में जवाब लेने की थी। चव्हाण का मानना था कि विवाह, पारिवारिक संबंध और विवाद समाधान जैसे विषयों पर विस्तृत राय लेने की जरूरत है और केवल दो विकल्पों में जवाब सीमित करने से लोगों के विचार पूरी तरह सामने नहीं आ पाएंगे। प्रश्नावली पहले ही फाइनल होने का किया दावा 19 सितंबर को समिति की दूसरी ऑनलाइन बैठक हुई थी। चव्हाण ने अपने इस्तीफे में कहा कि कुछ सदस्यों ने प्रश्नावली में बदलाव और विशेषज्ञों से उसकी समीक्षा कराने का सुझाव दिया था। लेकिन उनके मुताबिक समिति की अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई पहले ही एक प्रश्नावली तैयार कर सदस्यों को भेज चुकी थीं और वेबसाइट तैयार होने के बाद उसे अपलोड करने की बात कही गई थी। यह चव्हाण द्वारा अपने इस्तीफे में व्यक्त किया गया पक्ष है। ‘गैर-सदस्य’ की मौजूदगी पर भी सवाल चव्हाण ने बैठक में सेवानिवृत्त IAS अधिकारी शत्रुघ्न सिंह की मौजूदगी और उनकी भूमिका पर भी सवाल उठाया था। उस समय सिंह मूल सात सदस्यीय समिति में शामिल नहीं थे। चव्हाण के अनुसार सिंह ने UCC की वेबसाइट में बदलाव को लेकर सुझाव दिए और उसके बाद समिति अध्यक्ष ने अधिकारियों को आवश्यक बदलाव करने के निर्देश दिए। चव्हाण ने सवाल किया कि जब वह औपचारिक सदस्य नहीं थे तो बैठक में उनकी भूमिका किस आधार पर तय हुई थी। दो दिन बाद शत्रुघ्न सिंह समिति में शामिल इस पूरे विवाद में एक नया घटनाक्रम 21 सितंबर को सामने आया। The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार महाराष्ट्र सरकार ने शत्रुघ्न सिंह को UCC समिति में Member-cum-Senior Adviser नियुक्त कर दिया। यानी जिस अधिकारी की 19 सितंबर की बैठक में मौजूदगी पर जस्टिस चव्हाण ने सवाल उठाया था, उन्हें दो दिन बाद औपचारिक रूप से समिति से जोड़ दिया गया। सिंह इससे पहले उत्तराखंड की UCC समिति में भी जस्टिस रंजना देसाई के साथ काम कर चुके हैं। उत्तराखंड UCC में भी काम कर चुके हैं शत्रुघ्न सिंह शत्रुघ्न सिंह उत्तराखंड में UCC तैयार करने वाली पांच सदस्यीय समिति का हिस्सा थे। वह कानून का मसौदा तैयार करने और विभिन्न पक्षों से बातचीत करने वाली टीम में शामिल रहे। उत्तराखंड विधानसभा ने फरवरी 2024 में UCC विधेयक पारित किया था और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद 27 जनवरी 2025 से वहां समान नागरिक संहिता लागू हुई। UCC के विरोधी नहीं हैं जस्टिस चव्हाण इस्तीफे के बाद जस्टिस चव्हाण ने स्पष्ट किया कि उनकी आपत्ति UCC की अवधारणा से नहीं, बल्कि समिति में अपनाई जा रही प्रक्रिया से है। उन्होंने कहा कि वह करीब दस वर्षों से इस विषय पर काम कर रहे हैं और UCC लागू किया जा सकता है, लेकिन ऐसा करते समय अलग-अलग समुदायों के बीच टकराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने व्यक्तिगत स्वतंत्रता, gender neutrality और न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप पर जोर दिया। जुलाई में बनाई गई थी सात सदस्यीय समिति महाराष्ट्र सरकार ने जुलाई 2026 में UCC का मसौदा और सिफारिशें तैयार करने के लिए सात सदस्यीय समिति बनाई थी। इसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज जस्टिस रंजना देसाई कर रही हैं। समिति को विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, गोद लेने और अन्य व्यक्तिगत कानूनों से संबंधित कानूनी, सामाजिक, सांस्कृतिक और प्रशासनिक पहलुओं का अध्ययन कर छह महीने के भीतर रिपोर्ट देने का जिम्मा दिया गया है। सरकार ने आरोपों पर नहीं दी विस्तृत प्रतिक्रिया Times of India की रिपोर्ट के मुताबिक महाराष्ट्र सरकार के एक मंत्री ने कहा कि सरकार जस्टिस चव्हाण की ओर से उठाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया नहीं देगी और समिति अपना काम जारी रखेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि चव्हाण की जगह अलग से नया सदस्य नियुक्त नहीं किया जाएगा। हालांकि इसके साथ ही 21 सितंबर को शत्रुघ्न सिंह को Member-cum-Senior Adviser नियुक्त किए जाने की खबर भी सामने आई है। फिलहाल समिति UCC को लेकर जनता से राय लेने और आगे की सिफारिशें तैयार करने की प्रक्रिया में है। source – The Indian Express / Hindustan Times / Times of India / Bar & Bench जय राष्ट्र न्यूज़

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महाराष्ट्र | महाराष्ट्र के विधायकों के लिए ₹1,200 करोड़ का आवास प्रोजेक्ट? सरकारी खर्च पर उठे सवाल

महाराष्ट्र में विधायकों के लिए प्रस्तावित ₹1,200 करोड़ के आवासीय प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक और सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। समर्थकों का कहना है कि यह परियोजना निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के लिए आधिकारिक आवास की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से है। वहीं, आलोचकों का सवाल है कि इतनी बड़ी सरकारी राशि विधायकों के आवास पर खर्च करना कितना उचित है? सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि इस राशि का इस्तेमाल शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बुनियादी सुविधाओं और अन्य जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जा सकता है। यह मुद्दा एक बार फिर सरकारी खर्च, जवाबदेही और टैक्सपेयर्स के पैसे के इस्तेमाल को लेकर बहस के केंद्र में है। 💬 आपकी राय क्या है? ₹1,200 करोड़ का यह प्रोजेक्ट जरूरी है या यह पैसा जनकल्याण के लिए इस्तेमाल होना चाहिए? #Maharashtra#MLA#HousingProject#news#breakingnews PublicAccountability JayRashtraNews

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महाराष्ट्र में शिवसेना सांसदों की राजनीतिक हलचल, नए समीकरणों पर बढ़ी चर्चा

जय राष्ट्र न्यूज़ | राजनीति डेस्क | 23 जून 2026 मुख्य समाचार महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है, जहां शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसदों ने आधिकारिक रूप से एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का दामन थाम लिया है। इस घटनाक्रम ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले चुनावों से पहले राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मुंबई में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और शिवसेना नेता एकनाथ शिंदे ने इन सांसदों का स्वागत किया। शिंदे ने इसे 2022 में शुरू हुए राजनीतिक आंदोलन का दूसरा बड़ा चरण बताया। किन सांसदों ने बदला पक्ष? शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में संजय दीना पाटिल, संजय देशमुख, संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, नागेश पाटिल-अष्टीकर और ओमप्रकाश राजेनिंबालकर शामिल हैं। इन नेताओं के कदम को उद्धव ठाकरे गुट के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे गुट पर असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम से लोकसभा में उद्धव ठाकरे गुट की ताकत प्रभावित हो सकती है। हाल के दिनों में पार्टी के भीतर असंतोष और संभावित टूट की चर्चाएं पहले से चल रही थीं। रिपोर्ट्स के अनुसार कुछ विधायकों की गतिविधियों को लेकर भी राजनीतिक हलकों में अटकलें लगाई जा रही हैं, जिससे भविष्य में और बदलावों की संभावना पर चर्चा हो रही है। शिंदे गुट की बढ़ती ताकत एकनाथ शिंदे ने इस घटनाक्रम को अपनी राजनीतिक रणनीति की सफलता बताया है। उनके समर्थकों का दावा है कि इससे पार्टी की लोकसभा में स्थिति और मजबूत होगी। कुछ नेताओं ने इसे “ऑपरेशन टाइगर” की सफलता करार दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र में शिवसेना की आंतरिक शक्ति संतुलन को और बदल सकता है। आगामी चुनावों पर प्रभाव राजनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार यह बदलाव केवल वर्तमान शक्ति प्रदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर आगामी स्थानीय निकाय, विधानसभा और संसदीय चुनावों पर भी पड़ सकता है। महाराष्ट्र में गठबंधन राजनीति के चलते हर राजनीतिक बदलाव का व्यापक प्रभाव देखने को मिलता है। राष्ट्रीय राजनीति में महत्व महाराष्ट्र देश के सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक राज्यों में से एक है। यहां होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम अक्सर राष्ट्रीय राजनीति को भी प्रभावित करते हैं। इसलिए शिवसेना के भीतर यह नया बदलाव राष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। स्रोत: News On AIR, Economic Times मूल रिपोर्ट:https://newsonair.gov.in/six-shiv-sena-ubt-mps-join-shiv-sena-says-maharashtra-dy-cm-eknath-shinde/ जय राष्ट्र न्यूज़

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उद्धव ठाकरे की पार्टी में आंतरिक संकट गहराया, कई सांसदों के रुख पर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज

जय राष्ट्र न्यूज़ | राजनीति डेस्क | 20 जून 2026 मुख्य समाचार महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) गुट के भीतर बढ़ते असंतोष और कई सांसदों के कथित बागी रुख ने पार्टी नेतृत्व की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हाल के दिनों में पार्टी के कई सांसदों की गतिविधियों और बैठकों से जुड़े घटनाक्रमों ने राजनीतिक गलियारों में नए समीकरणों की चर्चा को जन्म दिया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम महाराष्ट्र की राजनीति पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य में विभिन्न दल आगामी राजनीतिक रणनीतियों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। सांसदों की अनुपस्थिति से बढ़ी अटकलें हाल ही में पार्टी की एक महत्वपूर्ण बैठक में कई सांसदों की अनुपस्थिति ने आंतरिक संकट की चर्चाओं को और हवा दे दी। रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी नेतृत्व द्वारा जारी निर्देशों के बावजूद कुछ सांसद बैठक में शामिल नहीं हुए, जिसके बाद उनके भविष्य को लेकर अटकलें तेज हो गईं। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह केवल अनुशासन का मामला नहीं बल्कि पार्टी के भीतर बढ़ती असंतुष्टि का संकेत भी माना जा रहा है। उद्धव ठाकरे का भावुक संदेश पार्टी के स्थापना दिवस कार्यक्रम के दौरान उद्धव ठाकरे ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि यदि कार्यकर्ताओं का उन पर विश्वास नहीं है तो वे नेतृत्व छोड़ने के लिए भी तैयार हैं, लेकिन पार्टी की विचारधारा से समझौता नहीं करेंगे। उनके इस बयान को पार्टी के भीतर चल रहे संकट के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अनुशासनात्मक कार्रवाई के संकेत पार्टी नेतृत्व ने अनुपस्थित सांसदों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। साथ ही यह संकेत भी दिए गए हैं कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह कदम पार्टी संगठन को एकजुट रखने की कोशिश का हिस्सा है। महाराष्ट्र की राजनीति पर असर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि पार्टी के भीतर मतभेद और बढ़ते हैं तो इसका असर राज्य की विपक्षी राजनीति और आगामी चुनावी समीकरणों पर भी पड़ सकता है। शिवसेना (UBT) महाराष्ट्र की राजनीति का एक महत्वपूर्ण घटक है और उसके भीतर होने वाले बदलावों पर सभी दलों की नजर बनी हुई है। विपक्ष और सत्तापक्ष की प्रतिक्रियाएं इस घटनाक्रम पर विभिन्न राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं। सत्तापक्ष के नेताओं ने इसे उद्धव ठाकरे के नेतृत्व के प्रति असंतोष का परिणाम बताया है, जबकि ठाकरे गुट इसे राजनीतिक दबाव और दल-बदल की कोशिशों से जोड़ रहा है। आगे क्या? राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सांसदों के रुख, पार्टी नेतृत्व के अगले कदम और संभावित राजनीतिक वार्ताएं महाराष्ट्र की राजनीति की दिशा तय कर सकती हैं। फिलहाल सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व इस चुनौती से कैसे निपटता है। निष्कर्ष उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली शिवसेना (UBT) में बढ़ते आंतरिक संकट ने महाराष्ट्र की राजनीति को नया मोड़ दे दिया है। कई सांसदों के रुख को लेकर जारी चर्चाओं और संगठनात्मक कदमों के बीच पार्टी के सामने एकजुटता बनाए रखने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। आने वाले दिनों में इस घटनाक्रम का राजनीतिक प्रभाव और स्पष्ट हो सकता है। स्रोत: The Economic Times मूल रिपोर्ट:https://m.economictimes.com/news/politics-and-nation/uddhav-apologises-amid-fresh-revolt-by-6-mps-sena-factions-hold-rival-rallies-to-mark-foundation-day/articleshow/131865291.cms जय राष्ट्र न्यूज़

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