दीपिंदर गोयल के ₹85 हजार वाले ‘Temple’ डिवाइस पर बवाल! डॉक्टरों ने वैज्ञानिक दावों पर उठाए सवाल, Zomato फाउंडर ने दिया जवाब
नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: जोमैटो के संस्थापक दीपिंदर गोयल का नया हेल्थ-टेक डिवाइस ‘Temple’ इन दिनों विवादों में घिर गया है। लगभग ₹85,000 की कीमत वाले इस वियरेबल डिवाइस को लेकर कई डॉक्टरों ने इसकी वैज्ञानिक विश्वसनीयता और स्वास्थ्य संबंधी दावों पर सवाल उठाए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि सिर के किनारे लगाया जाने वाला एक छोटा सेंसर पूरे मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया का विश्वसनीय आकलन कर सकता है, इसका पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण अभी उपलब्ध नहीं है। बढ़ती आलोचना के बीच दीपिंदर गोयल ने 5 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डॉक्टरों को जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने इस परियोजना में अपनी निजी पूंजी से लगभग 20 मिलियन डॉलर का निवेश किया है और उन्हें अपनी तकनीक पर पूरा भरोसा है। क्या है दीपिंदर गोयल का Temple डिवाइस? Temple एक छोटा वियरेबल उपकरण है, जिसे सिर के किनारे कनपटी के पास लगाया जाता है। यह डिवाइस शरीर से जुड़े कुछ शारीरिक संकेतों की निगरानी करने के लिए विकसित किया गया है। कंपनी के अनुसार, इसका उद्देश्य रक्त प्रवाह से संबंधित संकेतों और ‘Entropy’ नामक एक नए मापदंड के जरिए शरीर की स्थिति को समझना है। दीपिंदर गोयल इस तकनीक को अपने शोध प्रोजेक्ट ‘Continue Research’ के तहत विकसित कर रहे हैं। कंपनी ने इस उपकरण को मस्तिष्क में रक्त प्रवाह और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़े शोध से भी जोड़ा है। हालांकि डिवाइस की इन क्षमताओं की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि और चिकित्सकीय उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं। ₹85 हजार कीमत को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा Temple डिवाइस की कीमत लगभग ₹85,000 रखी गई है। कंपनी ने 1 नवंबर 2026 से भारत में इसकी प्री-बुकिंग शुरू की थी। यह उपकरण छह रंगों में उपलब्ध कराने की योजना है, जिनमें ट्रू गोल्ड और रोज गोल्ड जैसे विकल्प शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार, डिवाइस ऑर्डर मिलने के बाद तैयार किया जाएगा और शुरुआती डिलीवरी 2027 में शुरू होने की उम्मीद है। इतनी अधिक कीमत के कारण सोशल मीडिया पर लोग इसकी उपयोगिता और वैज्ञानिक प्रमाणों के बारे में सवाल पूछ रहे हैं। ‘The Liver Doc’ ने Temple के दावों पर उठाए सवाल जाने-माने हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सिरिएक एबी फिलिप्स, जिन्हें सोशल मीडिया पर ‘The Liver Doc’ के नाम से जाना जाता है, ने Temple की आलोचना की है। उन्होंने डिवाइस की तकनीक और मस्तिष्क के रक्त प्रवाह को मापने की क्षमता पर सवाल उठाए। डॉ. फिलिप्स का कहना है कि कनपटी पर लगा सेंसर सतह के पास होने वाले रक्त प्रवाह से जुड़े संकेत दर्ज कर सकता है, लेकिन इससे पूरे मस्तिष्क के रक्त प्रवाह को सटीक रूप से मापने का दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं होता। उन्होंने डिवाइस के स्वास्थ्य संबंधी दावों को लेकर भी चिंता जताई। डॉ. फिलिप्स ने इसे कथित हेल्थ स्कैम तक बताया है। हालांकि यह उनका आरोप है और किसी नियामक संस्था या अदालत ने Temple को धोखाधड़ी घोषित नहीं किया है। एक छोटे सेंसर से पूरे दिमाग का हाल कैसे पता चलेगा? Temple को लेकर डॉक्टरों का सबसे प्रमुख सवाल इसकी मापने की क्षमता से जुड़ा है। मानव मस्तिष्क में रक्त की आपूर्ति कई अलग-अलग धमनियों और रक्त वाहिकाओं के जरिए होती है। मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों में रक्त प्रवाह की मात्रा और जरूरत अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में सिर के एक स्थान पर लगाया गया सेंसर पूरे मस्तिष्क के रक्त प्रवाह का प्रतिनिधित्व कर सकता है या नहीं, यह वैज्ञानिक जांच का विषय है। गुरुग्राम के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. प्रवीण गुप्ता के अनुसार, कनपटी पर लगा सेंसर कुछ शारीरिक संकेत दर्ज कर सकता है, लेकिन इससे पूरे मस्तिष्क के रक्त संचार की स्थिति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। इसी वजह से विशेषज्ञों ने स्वतंत्र परीक्षण और वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता बताई है। क्या Temple उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को माप सकता है? दीपिंदर गोयल का Temple प्रोजेक्ट ‘Gravity Ageing Hypothesis’ नामक एक परिकल्पना से भी जुड़ा है। इस परिकल्पना के अनुसार, गुरुत्वाकर्षण का लंबे समय तक रक्त संचार पर पड़ने वाला प्रभाव उम्र बढ़ने की प्रक्रिया में भूमिका निभा सकता है। गोयल की शोध पहल इसी विषय पर काम कर रही है। हालांकि चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, उम्र बढ़ना एक जटिल जैविक प्रक्रिया है। इसमें कोशिकाओं में बदलाव, आनुवंशिक कारक, चयापचय, सूजन और रक्त वाहिकाओं की कार्यप्रणाली सहित कई कारक शामिल होते हैं। वर्तमान में इस बात के पर्याप्त वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं कि गुरुत्वाकर्षण के कारण मस्तिष्क में होने वाले सामान्य रक्त प्रवाह संबंधी बदलाव मानव उम्र बढ़ने का प्रमुख कारण हैं। इसलिए Temple के जरिए उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से जुड़े व्यापक निष्कर्ष निकालना फिलहाल वैज्ञानिक रूप से स्थापित नहीं है। डॉक्टरों की आलोचना पर दीपिंदर गोयल का जवाब 5 नवंबर को दीपिंदर गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर डॉक्टरों की आलोचना का जवाब दिया। उन्होंने अपने पोस्ट में कहा कि Temple को विकसित करने में लगभग 30 मिलियन डॉलर खर्च हो चुके हैं। इसमें से करीब 20 मिलियन डॉलर उनकी निजी पूंजी है। गोयल ने तर्क दिया कि यदि डिवाइस की तकनीक काम नहीं करती, तो उपयोगकर्ताओं को इसका पता इस्तेमाल के शुरुआती दिनों में ही चल जाएगा। उन्होंने बताया कि कंपनी ग्राहकों को 14 दिनों की बिना सवाल पूछे रिटर्न पॉलिसी दे रही है। गोयल के अनुसार, उनका उद्देश्य केवल पैसे कमाना नहीं, बल्कि एक उपयोगी तकनीक विकसित करना है। हालांकि किसी उत्पाद में बड़ा निवेश और रिटर्न पॉलिसी होना उसकी वैज्ञानिक सटीकता का प्रमाण नहीं माना जा सकता। ‘यह मेडिकल डिवाइस नहीं, वेलनेस ट्रैकर है’ बढ़ते विवाद के बीच दीपिंदर गोयल ने स्पष्ट किया कि Temple को चिकित्सकीय उपकरण के बजाय फिटनेस और वेलनेस से जुड़ी तकनीक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि डिवाइस के विकास से संबंधित वैज्ञानिक शोध और परीक्षण आगे भी जारी रहेंगे। गोयल ने बताया कि कंपनी अपने शोध के प्री-प्रिंट प्रकाशित करने की तैयारी कर रही है। उनका दावा है कि डिवाइस की तकनीक की स्वतंत्र रूप से जांच की जा सकती है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि Temple के कुछ महत्वपूर्ण फीचर्स अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र वैज्ञानिक पुष्टि के लिए प्रकाशित शोध, परीक्षण और बाहरी विशेषज्ञों की समीक्षा…

