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डेटा सेंटर को मंजूरी देने से पहले बिजली-पानी की उपलब्धता साबित करनी होगी, NITI Aayog ने सुझाए सख्त मानक

नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 2026: भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती मांग के बीच नीति आयोग (NITI Aayog) के फ्रंटियर टेक हब ने राज्यों के लिए नया Data Centre Evaluation Framework जारी किया है। इसमें सुझाव दिया गया है कि बड़े डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देने से पहले बिजली, पानी, जमीन और सहायक बुनियादी ढांचे की वास्तविक उपलब्धता का आकलन किया जाए। केवल निवेश के वादे पर नहीं मिले मंजूरी फ्रेमवर्क के अनुसार, राज्यों को सिर्फ बड़े निवेश के वादों के आधार पर डेटा सेंटर परियोजनाओं को मंजूरी देने से बचना चाहिए। डेवलपर्स को यह साबित करना होगा कि स्थानीय बिजली ग्रिड परियोजना की अतिरिक्त मांग को पूरा करने में सक्षम है। यदि इसके लिए बिजली नेटवर्क में सुधार या अतिरिक्त बुनियादी ढांचे की जरूरत है, तो संबंधित अपग्रेड को समय पर पूरा करने की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पानी की उपलब्धता और स्थानीय जल संकट पर जोर डेटा सेंटर में कूलिंग सहित विभिन्न कामों के लिए बड़ी मात्रा में पानी की जरूरत पड़ सकती है। ऐसे में नीति आयोग ने मौसमी जल उपलब्धता और संबंधित क्षेत्र में पानी की कमी की स्थिति का आकलन करने की सलाह दी है। जल संकट वाले इलाकों में वैकल्पिक जल स्रोतों और समुद्री पानी को उपयोग योग्य बनाने वाली डिसैलिनेशन तकनीक जैसे विकल्पों पर भी विचार करने का सुझाव दिया गया है। आम उपभोक्ताओं के संसाधनों पर न पड़े अतिरिक्त दबाव फ्रेमवर्क का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि डेटा सेंटर की भारी बिजली और पानी की मांग के कारण घरों, कारोबारों और स्थानीय समुदायों के संसाधनों पर अनावश्यक दबाव न पड़े। भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विस्तार के साथ बिजली की खपत को लेकर चिंताएं भी बढ़ रही हैं। इसी बीच केंद्र सरकार एक समर्पित राष्ट्रीय डेटा सेंटर नीति पर काम कर रही है। प्रोत्साहन को रोजगार और स्थानीय लाभ से जोड़ने का सुझाव नीति आयोग ने राज्यों को सलाह दी है कि डेटा सेंटर कंपनियों को दिए जाने वाले प्रोत्साहनों का आकलन केवल निवेश की राशि के आधार पर न किया जाए। इसके बजाय रोजगार सृजन, स्थानीय स्तर पर खरीद, नवीकरणीय ऊर्जा में निवेश और मापे जा सकने वाले आर्थिक लाभों को भी महत्व दिया जाए। इससे राज्यों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि किसी परियोजना से स्थानीय अर्थव्यवस्था और जनता को वास्तविक लाभ कितना मिलेगा। AI के विस्तार से बढ़ रही डेटा सेंटर की मांग जनरेटिव AI, GPU कंप्यूटिंग और क्लाउड सेवाओं के तेजी से विस्तार ने भारत में बड़े डेटा सेंटरों की मांग बढ़ाई है। उपलब्ध अनुमानों के मुताबिक, फिलहाल डेटा सेंटर भारत की कुल बिजली खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत इस्तेमाल करते हैं। आने वाले दशक में यह हिस्सा बढ़कर 1 से 2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। बिजली और पानी की बढ़ती जरूरतों के कारण इन परियोजनाओं की योजना बनाते समय संसाधनों की उपलब्धता और पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन महत्वपूर्ण होता जा रहा है। फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन, अनिवार्य नियम नहीं यह फ्रेमवर्क फिलहाल राज्यों के लिए मार्गदर्शन के रूप में है, अनिवार्य नियमन नहीं। नीति आयोग ने डेटा सेंटरों को केवल निवेश परियोजनाओं के बजाय रणनीतिक बुनियादी ढांचे के रूप में देखने और उनके विकास में स्थिरता, जवाबदेही तथा स्थानीय जरूरतों को प्राथमिकता देने पर जोर दिया है। Source – NITI Aayog, The Indian Express जय राष्ट्र न्यूज़

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Jabil और Adani की AI डेटा सेंटर उपकरणों के लिए JV बनाने की तैयारी, 50:50 साझेदारी का प्रस्ताव

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026: वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज कंपनी Jabil और Adani Enterprises ने भारत में AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण तथा असेंबली के लिए प्रस्तावित 50:50 जॉइंट वेंचर (JV) बनाने को लेकर समझौता किया है। दोनों कंपनियों ने इस संबंध में गैर-बाध्यकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह प्रस्ताव ऐसे समय सामने आया है, जब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं के विस्तार के साथ भारत में डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर की मांग बढ़ रही है। AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण पर रहेगा फोकस प्रस्तावित जॉइंट वेंचर का मुख्य उद्देश्य भारत में AI और डेटा सेंटर इकोसिस्टम के लिए जरूरी उपकरणों का स्थानीय स्तर पर निर्माण और असेंबली करना है। इससे देश में उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षमता विकसित करने और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, परियोजना के तहत किन उपकरणों का निर्माण किया जाएगा और उत्पादन कब शुरू होगा, इसकी विस्तृत जानकारी अभी उपलब्ध नहीं है। 50:50 हिस्सेदारी वाला होगा प्रस्तावित जॉइंट वेंचर समझौते के तहत Adani Enterprises और Jabil प्रस्तावित संयुक्त उद्यम में 50-50 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने की योजना बना रहे हैं। इसका अर्थ है कि दोनों कंपनियां प्रस्तावित कारोबार में बराबर भागीदारी करना चाहती हैं। फिलहाल समझौता गैर-बाध्यकारी चरण में है। इसलिए अंतिम निवेश राशि, संचालन की शर्तें, उत्पादन क्षमता और अन्य व्यावसायिक विवरण आगे होने वाले निश्चित समझौतों तथा आवश्यक मंजूरियों पर निर्भर करेंगे। भारत में डेटा सेंटर की मांग बढ़ने के बीच समझौता भारत में AI सेवाओं, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल कारोबार के विस्तार से डेटा सेंटर की जरूरत बढ़ रही है। इन सुविधाओं को चलाने के लिए सर्वर, नेटवर्किंग सिस्टम, बिजली प्रबंधन और अन्य विशेष उपकरणों की आवश्यकता होती है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का डेटा सेंटर बाजार 2029 तक लगभग चार गुना होने का अनुमान जताया गया है। वैश्विक हाइपरस्केल कंपनियों ने भी भारत में 50 अरब डॉलर से अधिक के निवेश की योजनाएं घोषित की हैं। हालांकि, बाजार के अनुमान और घोषित निवेश योजनाएं भविष्य की संभावनाओं को दर्शाती हैं; इन्हें पूरी हो चुकी परियोजनाओं या वास्तविक निवेश के बराबर नहीं माना जाना चाहिए। Jabil की मैन्युफैक्चरिंग विशेषज्ञता और Adani का इंफ्रास्ट्रक्चर नेटवर्क Jabil इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, उत्पाद विकास और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला से जुड़ी सेवाएं प्रदान करती है। वहीं, Adani Group ऊर्जा और बुनियादी ढांचे सहित विभिन्न क्षेत्रों में कारोबार करता है। प्रस्तावित साझेदारी के जरिए दोनों कंपनियां अपनी संबंधित क्षमताओं का इस्तेमाल भारत में AI और डेटा सेंटर उपकरणों के निर्माण का कारोबार विकसित करने के लिए करना चाहती हैं। यदि यह योजना आगे बढ़ती है, तो इससे देश में डेटा सेंटर हार्डवेयर की स्थानीय आपूर्ति और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़े अवसर पैदा हो सकते हैं। भारत की AI मैन्युफैक्चरिंग क्षमता को मिल सकता है बढ़ावा स्थानीय स्तर पर डेटा सेंटर उपकरणों का उत्पादन बढ़ने से घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने और कुछ आयातित उपकरणों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। इससे संबंधित विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स और तकनीकी सेवाओं से जुड़े कारोबारों के लिए भी अवसर बन सकते हैं। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब भारत में डेटा सेंटर क्षेत्र के विकास और उससे जुड़ी बिजली की खपत जैसे मुद्दों को ध्यान में रखते हुए नई नीतिगत व्यवस्थाओं पर भी चर्चा हो रही है। हालांकि, प्रस्तावित JV का वास्तविक प्रभाव निवेश, उत्पादन क्षमता, स्थानीय स्तर पर होने वाले निर्माण और परियोजना के क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। आगे के समझौतों पर टिकी रहेंगी निगाहें Jabil और Adani Enterprises के बीच प्रस्तावित साझेदारी भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में एक संभावित नई पहल है। लेकिन अभी यह समझौता शुरुआती गैर-बाध्यकारी चरण में है। अब निवेश, अंतिम समझौते, उत्पादन योजना और परियोजना की समयसीमा से जुड़ी जानकारी महत्वपूर्ण होगी। इन विवरणों के सामने आने के बाद ही इस साझेदारी के संभावित व्यावसायिक और औद्योगिक प्रभाव का अधिक स्पष्ट आकलन किया जा सकेगा। Source: Reuters / Adani Enterprises / Jabil / Yahoo Finance जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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AI Infrastructure और Data Centers में निवेश की दौड़ तेज, भारत वैश्विक टेक कंपनियों का प्रमुख निवेश केंद्र बनता जा रहा है

जय राष्ट्र न्यूज़ | टेक्नोलॉजी डेस्क | 20 जून 2026 मुख्य समाचार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते उपयोग के बीच दुनिया भर की टेक कंपनियां AI Infrastructure और Data Centers में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही हैं। इस वैश्विक दौड़ में भारत एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है। मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम, विशाल इंटरनेट उपयोगकर्ता आधार और तेजी से बढ़ती डेटा मांग के कारण भारत वैश्विक टेक कंपनियों के लिए आकर्षक निवेश गंतव्य बन गया है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत एशिया-प्रशांत क्षेत्र के सबसे बड़े AI और क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर बाजारों में शामिल हो सकता है। AI की बढ़ती मांग से बढ़ा निवेश Generative AI, Machine Learning, Large Language Models (LLMs) और Advanced Analytics जैसी तकनीकों के विस्तार के कारण दुनिया भर में उच्च क्षमता वाले Data Centers की मांग बढ़ रही है। AI मॉडल्स को प्रशिक्षित करने और संचालित करने के लिए भारी कंप्यूटिंग क्षमता और विशाल डेटा स्टोरेज की आवश्यकता होती है। इसी वजह से वैश्विक टेक कंपनियां AI-सक्षम इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण में अरबों डॉलर का निवेश कर रही हैं। भारत क्यों बन रहा है निवेश का केंद्र? विशेषज्ञों के अनुसार भारत में निवेश बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं: इन कारणों से भारत वैश्विक टेक निवेशकों के लिए रणनीतिक महत्व का बाजार बन गया है। Data Center सेक्टर में तेजी भारत में कई बड़े Data Center प्रोजेक्ट्स पर काम जारी है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय कंपनियां नई सुविधाएं विकसित कर रही हैं ताकि बढ़ती डेटा मांग को पूरा किया जा सके। विश्लेषकों का कहना है कि AI सेवाओं, वीडियो स्ट्रीमिंग, ई-कॉमर्स, फिनटेक और डिजिटल सरकारी सेवाओं के विस्तार से Data Centers की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है। रोजगार के नए अवसर AI Infrastructure और Data Center उद्योग के विस्तार से रोजगार के नए अवसर भी पैदा हो रहे हैं। Cloud Engineers, Data Scientists, AI Specialists, Cyber Security Experts और Network Engineers की मांग तेजी से बढ़ रही है। करियर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र लाखों युवाओं के लिए नए रोजगार अवसर पैदा कर सकता है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भारत की स्थिति मजबूत दुनिया की प्रमुख टेक कंपनियां भारत में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रही हैं। कई कंपनियां नए Data Centers, AI Research Facilities और Cloud Infrastructure विस्तार योजनाओं की घोषणा कर चुकी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक डिजिटल अर्थव्यवस्था में भूमिका और मजबूत होगी। ऊर्जा और स्थिरता पर भी फोकस नई पीढ़ी के Data Centers में ऊर्जा दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को प्राथमिकता दी जा रही है। कई कंपनियां Renewable Energy आधारित सुविधाओं का विकास कर रही हैं ताकि बढ़ती ऊर्जा मांग को टिकाऊ तरीके से पूरा किया जा सके। यह रुझान भविष्य के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। आगे की संभावनाएं उद्योग विशेषज्ञों का अनुमान है कि AI आधारित सेवाओं की मांग में लगातार वृद्धि के कारण भारत में Data Center क्षमता और Cloud Infrastructure निवेश आने वाले वर्षों में और बढ़ सकता है। इसके साथ ही भारत वैश्विक AI विकास और डिजिटल नवाचार के प्रमुख केंद्रों में शामिल हो सकता है। निष्कर्ष AI Infrastructure और Data Centers में बढ़ते निवेश ने भारत को वैश्विक तकनीकी मानचित्र पर मजबूत स्थिति दिलाई है। डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार, तकनीकी प्रतिभा और बढ़ती डेटा मांग के कारण भारत वैश्विक टेक कंपनियों का प्रमुख निवेश केंद्र बनता जा रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र आर्थिक विकास, नवाचार और रोजगार सृजन का महत्वपूर्ण आधार बन सकता है। स्रोत: Reuters मूल रिपोर्ट:https://www.reuters.com/world/india/indias-data-centre-boom-fuels-race-for-ai-infrastructure-2026-06-18/ जय राष्ट्र न्यूज़

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