अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर विवाद, राजघाट पर मां सोनी देवी बेहोश; न्याय की मांग को लेकर प्रदर्शन
नई दिल्ली, 6 नवंबर 2026: उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की मांग कर रहे उनके माता-पिता के साथ दिल्ली पुलिस की कार्रवाई को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। बुधवार, 4 नवंबर को दिल्ली के राजघाट पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे अंकिता के पिता वीरेंद्र भंडारी और मां सोनी देवी को पुलिस ने धरनास्थल से हटा दिया। इस दौरान सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह बेहोश हो गईं। उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के बुराड़ी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। घटना के वीडियो सामने आने के बाद कई राजनीतिक नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। राजघाट पर बेटी के लिए न्याय मांग रहे थे माता-पिता अंकिता भंडारी के माता-पिता बुधवार शाम दिल्ली के राजघाट पहुंचे थे। उनके साथ सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और कांग्रेस नेता मुमताज पटेल भी मौजूद थीं। परिजनों ने महात्मा गांधी की समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की और इसके बाद राजघाट के सार्वजनिक प्रवेश द्वार के पास बैठकर विरोध प्रदर्शन शुरू किया। परिवार का कहना है कि वे अपनी बेटी की हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच और न्याय की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान माता-पिता ने सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों से अपनी मांगों पर कार्रवाई करने की अपील की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को राजघाट से हटाया दिल्ली पुलिस के अनुसार, राजघाट राष्ट्रीय महत्व का स्मारक स्थल है और वहां धरना-प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं है। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से निर्धारित नियमों का हवाला देते हुए वहां से हटने के लिए कहा। हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर वहीं बैठे रहे। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उन्हें वहां से हटाने की कार्रवाई शुरू की। घटना के सामने आए वीडियो में पुलिसकर्मियों को अंकिता के पिता और अन्य प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाते देखा जा सकता है। सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ जबरदस्ती की। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों से अलग अपना पक्ष रखा है। पुलिस कार्रवाई के दौरान बेहोश हुईं सोनी देवी प्रदर्शनकारियों को हटाए जाने के दौरान अंकिता की मां सोनी देवी की तबीयत अचानक बिगड़ गई। प्रत्यक्षदर्शियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार, सोनी देवी पुलिस कार्रवाई का विरोध कर रही थीं। इसी दौरान वह बेहोश होकर गिर पड़ीं। इसके बाद उन्हें पुलिस वाहन से बुराड़ी सरकारी अस्पताल ले जाया गया। सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना ने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए आरोप लगाया कि सोनी देवी की तबीयत बिगड़ने के बावजूद उन्हें तत्काल उचित सहायता नहीं दी गई। हालांकि पुलिस सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य संबंधी परेशानी की जानकारी मिलने के बाद उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया। हिरासत में लेने के दावे पर पुलिस की सफाई घटना के बाद कुछ मीडिया रिपोर्टों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि अंकिता भंडारी के माता-पिता को पुलिस ने हिरासत में लिया था। हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस दावे का खंडन किया है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, प्रदर्शनकारियों को केवल राजघाट से हटाया गया था, क्योंकि वह प्रदर्शन के लिए निर्धारित स्थान नहीं है। पुलिस का कहना है कि किसी को औपचारिक रूप से हिरासत में नहीं लिया गया। पुलिस के अनुसार, सोनी देवी को मेडिकल जांच के लिए बुराड़ी अस्पताल ले जाया गया था, लेकिन माता-पिता ने मेडिकल परीक्षण कराने से इनकार कर दिया। बाद में आम आदमी पार्टी के विधायक संजीव झा अस्पताल पहुंचे और अंकिता के माता-पिता उनके साथ चले गए। डिंपल यादव और अन्य नेताओं ने उठाए सवाल अंकिता भंडारी के माता-पिता के साथ हुई पुलिस कार्रवाई की कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की है। समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव ने सोशल मीडिया पर दिल्ली पुलिस के व्यवहार को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल उठाया कि अपनी बेटी के लिए न्याय मांग रहे माता-पिता के साथ इस तरह की कार्रवाई क्यों की गई। शिवसेना (यूबीटी) की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी घटना पर प्रतिक्रिया दी। अभिनेत्री ऋचा चड्ढा ने भी सोशल मीडिया के जरिए अंकिता के परिवार के प्रति समर्थन जताया और पुलिस कार्रवाई की आलोचना की। क्या है अंकिता भंडारी हत्याकांड? उत्तराखंड की रहने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास स्थित वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनकी हत्या कर दी गई थी। चार दिन बाद उनका शव चीला नहर से बरामद हुआ था। इस घटना के बाद उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए थे। मामले में रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य और उसके दो सहयोगियों को गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। हालांकि अंकिता का परिवार मामले में कथित वीआईपी की भूमिका की जांच की मांग लगातार करता रहा है। कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर जारी है विवाद अंकिता भंडारी हत्याकांड में एक कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर लंबे समय से राजनीतिक विवाद जारी है। परिवार और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मामले के सभी पहलुओं की पूरी तरह जांच नहीं की गई। अंकिता के माता-पिता इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। हालांकि किसी विशेष व्यक्ति की कथित संलिप्तता से जुड़े आरोपों को अदालत द्वारा दोषसिद्धि के बराबर नहीं माना जा सकता। परिवार का कहना है कि सभी सवालों के स्पष्ट जवाब मिलने तक उनकी न्याय की लड़ाई जारी रहेगी। पहले भी दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान हुई थी कार्रवाई यह पहली बार नहीं है जब अंकिता भंडारी के माता-पिता को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा हो। 14 अक्टूबर 2026 को इंडिया गेट के पास प्रदर्शन करते समय भी उन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया था। उस समय परिवार सिक्किम के राज्यपाल के रूप में दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति का विरोध कर रहा था। परिवार और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले में कथित वीआईपी की भूमिका को लेकर आरोप लगाए थे। हालांकि इन आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है। न्याय की मांग को लेकर जारी रहेगा संघर्ष राजघाट की घटना के बाद अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर चर्चा में आ गया है। एक ओर परिवार अपनी बेटी की हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की जांच और न्याय की मांग कर…

