Excessive salt intake

Excessive Salt Intake: भारत में एक साइलेंट महामारी, जो स्वास्थ्य के लिए है एक बड़ा खतरा

नमक (Salt) यानी साल्ट खाने का एक जरूरी हिस्सा है, जिसकी मात्रा खाने में ज्यादा हो या कम, दोनों ही स्थितियों में खाने का स्वाद पूरी तरह से बदल जाता है। नमक शरीर के लिए फायदेमंद है और कई कार्यों को करने में उपयोगी है जैसे फ्लूइड बैलेंस, नर्व और मसल फंक्शन व मसल फंक्शन को मेंटेन करना। लेकिन क्या आप जानते हैं कि अधिक नमक (Salt) खाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? हाल ही में हुई एक रिसर्च के अनुसार भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) एक साइलेंट महामारी की तरह है, जो कई गंभीर समस्याओं के रिस्क को बढ़ा रही है। आइए जानें कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च के नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी (ICMR) के अनुसार हमारे देश में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) करना एक साइलेंट महामारी के समान है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट प्रॉब्लम्स और किडनी डिजीज का खतरा बढ़ रहा है। आइए जानें विस्तार में कि कौन-कौन से कारण है जिसकी वजह से भारत में अधिक नमक का सेवन (Excessive salt intake) को एक साइलेंट महामारी माना जा रहा है:  यह तो थी जानकारी कि भारत में अधिक नमक का सेवन क्यों है साइलेंट महामारी (Why high salt intake is a silent epidemic in India)? अब जानिए कि नमक की खपत कम करने के लिए आप क्या कर सकते हैं?  इसे भी पढ़ें:-  एयर पॉल्यूशन से बढ़ सकता है एंग्जायटी और डिप्रेशन जैसी समस्याओं का खतरा नमक की खपत कम करने के लिए क्या करें?  नमक का भी सही या कम मात्रा में सेवन करना चाहिए। नमक (Salt) की खपत को कम करने के लिए आप इन तरीकों को अपना सकते हैं: यह तो थी जानकारी भारत में अधिक नमक (Salt) के सेवन के बारे में। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी दोनों लोगों को कम सोडियम युक्त नमक के सेवन करने की सलाह देते हैं, ताकि कई गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचा जा सके। इसके साथ ही उन्होंने जागरूकता अभियान भी शुरू किया है ताकि लोगों को अधिक नमक से जुड़ी समस्याओं के बारे में जागरूक किया जा सके। याद रखें कि नमक (Salt) के शरीर के लिए लाभ और हानियां उसकी मात्रा पर निर्भर करती हैं। अगर इसको कम और सही मात्रा में लिया जाए तो यह स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है। नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #WhyhighsaltintakeisasilentepidemicinIndia #Excesssaltintake #silentepidemic #salt #heartproblems

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UPSC Recruitment 2025

UPSC Recruitment 2025: असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर और अन्य पदों के लिए योग्यता और आवेदन प्रक्रिया

यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (Union Public Service Commission) यानी यूपीएससी (UPSC) ने एक नई नोटिफिकेशन निकाली है। इसके अनुसार उन्होंने असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर (Assistant Drugs Controller) और जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर पोस्ट्स के लिए आवेदन शुरू किए हैं। अगर आप इनमें आवेदन करना चाहते हैं, तो आप इसके लिए अभी अप्लाई कर सकते हैं। यह भी बता दें कि अप्लाई करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। यानी इच्छुक कैंडिडेट इस तिथि से पहले अप्लाई करें अन्यथा इसके बाद वो अप्लाई नहीं कर पाएंगे। इससे मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ और फॅमिली वेलफेयर में 24 पदों को भरा जाएगा। आइए जानें यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के बारे में। यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) असिस्टेंट ड्रग्स कंट्रोलर (Assistant Drugs Controller), बॉटनिस्ट और जूनियर साइंटिफिक ऑफिसर पोस्ट्स के लिए अप्लाई करने की तिथि 12 जुलाई थी यानी यह 12 जुलाई से यह शुरू हो चुकी है। आइए जानें इसकी योग्यता और अन्य चीजों के बारे में: यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए योग्यता यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए आयु सीमा एप्लिकेशन फीस यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन द्वारा निकाली इन पोस्ट्स के लिए सामान्य, ओबीसी वर्गो के लिए एप्लिकेशन फीस 25 रुपए रखी गई है। जबकि एससी, एसटी, महिलाओं आदि को कोई भी फीस नहीं देनी है। उनके लिए यह पूरी तरह से फ्री है। इसे भी पढ़ें:- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें? कैसे करें अप्लाई? यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के लिए अप्लाई करने का तरीका इस प्रकार है:  यूपीएससी द्वारा निकाली वेकेंसीज (Vacancies by UPSC) के बारे में खास बात यह भी है कि इनमें कैंडिडेट्स को अच्छी सैलरीज के साथ ही हाउस रेंट, अलाउंस, मेडिकल फैसिलिटी, प्रोविडेंट फंड, ग्रेच्युटी, पेंशन आदि मिलेंगे। यानी अगर आप यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन यानी यूपीएससी (UPSC) की इन पोस्ट्स के लिए योग्य हैं तो इसके लिए अप्लाई करना न भूलें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। अधिक जानकारी के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं या गूगल सर्च करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  #VacanciesbyUPSC #UPSC #UnionPublicServiceCommission #AssistantDrugsController #Botanist #JuniorScientificOfficer

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London Plane Crash

London Plane Crash: एयरपोर्ट पर उड़ान भरते ही आग के गोले में बदला विमान, आसमान में दिखा भीषण आग के साथ धुएं का गुबार

लंदन के साउथएंड एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही एक विमान दुर्घटनाग्रस्त (London Plane Crash) हो गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह एक छोटा व्यावसायिक विमान था और इसने रविवार की शाम 4 बजे एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। विमान दुर्घटना के बाद घटना स्थल से आसमान में आग की चपटों के काले धुएं का गुबार उठता देखा गया। जिससे आस-पास के इलाके के साथ एयरपोर्ट पर मौजूद यात्रियों में भी दहशत फैल गई। घटना के तुरंत बाद पुलिस, फायर ब्रिगेड और राहत टीमों ने बचाव का कार्य शुरू कर दिया। साथ ही एयरपोर्ट से विमानों का संचालन भी रोक दिया गया है। इस दुर्घटना (London Plane Crash) में कितने लोग हताहत हुए हैं, अभी इसकी कोई जानकारी नहीं है।   ब्रिटिश मीडिया ने प्रत्यक्षदर्शियों के हवाले से बताया कि, वो एयरपोर्ट (Airport) के पास ही हॉकी खेल रहे थे। विमान ने जब टेकऑफ किया तो कुछ लोगों ने हाथ हिलाकर पायलट को हैलो भी कहा। इसके कुछ ही पल बाद विमान (London Plane Crash) नीचे आने लगा और फिर जमीन से आसामन की तरफ विशाल आग का गोला उठता हुआ देखा गया। दुर्घटना का शिकार हुए विमान की पहचान बी200 सुपर किंग एयर के रूप में हुई है। यह विमान साउथएंड एयरपोर्ट से नीदरलैंड के लेलीस्टेड जाने के लिए उड़ान भरी थी।  विमान में एक बड़ा करोबारी और उनके सहयोगियों का होने का दावा    मीडिया ने साउथएंड एयरपोर्ट के फ्लाइट राडार के उड़ान डेटा के आधार पर बताया कि, इस विमान ने शाम 4 बजे रनवे से उड़ान भरी थी, लेकिन कुछ ही पल में यह दुर्घटनाग्रस्त (London Plane Crash) हो गया। सोशल मीडिया पर इस घटना के कई वीडियो वायरल हो रहे हैं। ब्रिटेन की स्काई न्यूज ने एसेक्स पुलिस के हवाले से बताया कि, यह शाम 4 बजे के आसपास एक 12 मीटर लंबा व्यवसायिक विमान नीचे गिर गया। जिसके बाद एयरपोर्ट का संचालन बंद कर आपातकालीन सेवाओं को शुरू कर दिया गया। यह बचाव कार्य कई घंटों तक जारी रह सकता है। फिलहाल अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि घटना के समय विमान में कितने लोग सवार थे। वहीं कुछ मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इस विमान में ब्रिटेन का एक बड़ा करोबारी अपने सहयोगियों के साथ सवार था। विमान गिरते ही जिस तरह से इसमें विस्फोट हुआ, उससे विमान में सवार किसी भी व्यक्ति के बचने की संभावना बेहद कम है।  साउथएंड वेस्ट और लेह के स्थानीय सांसद डेविड बर्टन-सैम्पसन ने इस घटना पर दुख जताते हुए सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए कहा, “मुझे साउथएंड एयरपोर्ट पर हुई दुर्घटना की जानकारी है। कृपया वहां से दूर रहें और आपातकालीन सेवाओं को अपना काम करने दें। मेरी संवेदनाएं इस दुर्घटना से प्रभावित हुए सभी संबंधित लोगों के साथ है।” इसे भी पढ़ें:- 7 Demanding Courses: ये हैं 7 डिमांडिंग कोर्स, जिसमें आप भी बना सकते हैं करियर अहमदाबाद विमान हादसे में 261 लोगों की मौत  बता दें कि बीते 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रहा एअर इंडिया का बोइंग ड्रीमलाइनर विमान एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त (Ahmedabad Plane Crash) हो गया था। भारत के सबसे भीषण विमान हादसों में से एक इस दुर्घटना में 12 सदस्यीय चालक दल और 241 समेत कुल 261 लोगों की मौत हो गई। वहीं विश्वास कुमार रमेश नाम का एक यात्री चमत्कारिक रूप से बच गया। इस विमान हादसे (Ahmedabad Plane Crash) में मरने वालों में गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी समेत 20 के करीब मेडिकल छात्र हैं। इस हादसे की प्रारंभिक रिपोर्ट हाल ही में आई है, जिसमें बताया गया है कि विमान के टेकऑफ करते समय फ्यूल सप्लाई बंद हो गई थी। हालांकि यह कैसे हुआ, इसको लेकर विस्तार से कोई जानकारी नहीं दी गई है। हादसे के कारणों के बारे में विस्तार से जानने के लिए अभी भी लोगों को विस्तृत रिपोर्ट का इंतजार है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #AhmedabadPlaneCrash #PlanCrash #LondonPlaneCrash #Filght #London

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26/11 Mumbai Terror Attack: 26/11 हमले का मास्टरमाइंड तहव्वुर राणा ने किए कई अहम खुलासे 

26/11 मुंबई आतंकवादी हमलों (26/11 Mumbai Terror Attack) की भयावह यादें आज भी भारतवासियों के मन में ताजा हैं। इस हमले में 166 लोगों की जान गई थी और सैकड़ों घायल हुए थे। यह हमला पाकिस्तान-आधारित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) द्वारा सुनियोजित रूप से अंजाम दिया गया था। इस हमले से जुड़े कई किरदारों के नाम सामने आ चुके हैं, जिसमें से एक प्रमुख नाम तहव्वुर हुसैन राणा (Tahawwur Hussain Rana) का भी है। हाल ही में इस मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा किए गए पूछताछ में राणा ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिससे हमलों की साजिश का अंदाजा मिलने के साथ-साथ पाकिस्तान की भूमिका भी सामने आई है। पाकिस्तानी सेना का ‘भरोसेमंद’ व्यक्ति तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) इस समय राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की कस्टडी में है और उससे मुंबई क्राइम ब्रांच (Mumbai Crime Branch) ने अप्रैल 2025 में गहन पूछताछ की। राणा ने दावा किया कि वह कभी पाकिस्तानी सेना का भरोसेमंद व्यक्ति था। उसने यह भी बताया कि 1990 में इराक द्वारा कुवैत पर हमले के समय उसे सऊदी अरब में एक गुप्त सैन्य मिशन पर भेजा गया था। इससे साफ होता है कि उसे पाकिस्तानी सेना (Pakistan Army) के भीतर एक महत्वपूर्ण भूमिका मिली थी। राणा ने बताया कि उसने 1986 में रावलपिंडी स्थित आर्मी मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस किया और फिर क्वेटा में सेना के डॉक्टर के रूप में तैनात हुआ। इसके अलावा उसने पाकिस्तान के संवेदनशील इलाकों जैसे सिंध, बलूचिस्तान, बहावलपुर और सियाचिन-बालोतरा सेक्टर में भी सेवा दी। कट्टर विचारधारा और पुराने बयान मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राणा मानसिक रूप से अभी भी अपने पुराने बयानों पर अडिग है। वह जानकारी तो दे रहा है, लेकिन उसकी बातचीत में उसकी कट्टरपंथी विचारधारा की झलक साफ दिखती है। उसकी बातों से यह भी समझा जा सकता है कि वह अब भी भारत के खिलाफ नकारात्मक भावनाएं रखता है। अन्य साजिशकर्ताओं से संबंध 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने पूछताछ में माना कि वह 26/11 के अन्य प्रमुख साजिशकर्ताओं में शामिल साजिद मीर, मेजर इकबाल और अब्दुल रहमान पाशा को जानता था। ये तीनों पाकिस्तान से ताल्लुक रखते हैं और लश्कर-ए-तैयबा  (Lashkar E Taiba) के अहम सदस्य है। भारत में हुए सबसे बड़े आतंकी हमले में इन सभी की भूमिका को पहले ही दस्तावेजी तौर पर दर्ज किया जा चुका है। डेविड हेडली से जुड़ी जानकारियां 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) ने अमेरिकी-पाकिस्तानी नागरिक डेविड हेडली के बारे में भी कई खुलासे किए। उसने बताया कि हेडली ने 2003-2004 के दौरान लश्कर-ए-तैयबा (Lashkar E Taiba) के तीन प्रशिक्षण शिविरों में भाग लिया था। हालांकि वह इन कोर्सों के नाम स्पष्ट रूप से नहीं बता सका। जब मुंबई में खुले इमिग्रेशन सेंटर के विचार पर सवाल किया गया, तो राणा ने दावा किया कि यह विचार उसका था, न कि हेडली का। उसने यह भी कहा कि उसने हेडली को जो पैसे भेजे, वे व्यवसायिक खर्चों के लिए थे। हालांकि, वह यह स्वीकार करता है कि मुंबई में दफ्तर होने के बावजूद ग्राहकों को आकर्षित करने में समस्याएं आ रही थीं। सैन्य करियर और बर्खास्तगी 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा ने अपने सैन्य करियर के बारे में बताते हुए कहा कि सियाचिन पोस्टिंग के दौरान उसे पल्मोनरी एडिमा (फेफड़ों से जुड़ी एक गंभीर स्थिति) हो गई थी, जिससे वह लंबे समय तक ड्यूटी पर नहीं लौट सका। इस कारण उसे पाकिस्तानी सेना द्वारा भगोड़ा घोषित कर दिया गया और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। अमेरिका से भारत तक का सफर तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) मूल रूप से पाकिस्तान का निवासी है लेकिन बाद में कनाडा की नागरिकता ले ली थी और अमेरिका में बस गया था। वह एक व्यवसायी के रूप में अमेरिका में कार्य कर रहा था। राणा की अमेरिका में गिरफ्तारी के बाद भारत ने उसके प्रत्यर्पण की मांग की थी। लंबी कानूनी लड़ाई के बाद अप्रैल 2024 में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने राणा की अपील खारिज कर दी और उसका भारत प्रत्यर्पण सुनिश्चित हुआ। इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में हिंदी के विरोध में एकजुट दिखे उद्धव और राज ठाकरे, 20 साल बाद एक ही मंच पर आए साथ 26/11 मुंबई आतंकवादी हमले (26/11 Mumbai Terror Attack) का आरोपी तहव्वुर राणा (Tahawwur Rana) से हुई पूछताछ भारत की सुरक्षा एजेंसियों के लिए बेहद अहम है। उसके बयानों से यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान की सेना और खुफिया एजेंसियों की भूमिका 26/11 जैसे हमलों में कितनी गहरी है। राणा जैसे व्यक्ति, जो पहले डॉक्टर थे और सेना में सेवा कर चुके थे, किस प्रकार आतंकवाद की ओर मुड़े, यह न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कट्टरपंथ कैसे शिक्षित और प्रशिक्षित लोगों को भी प्रभावित कर सकता है। आने वाले समय में तहव्वुर राणा  (Tahawwur Rana) से और भी खुलासे होने की संभावना है, जो इस हमले से जुड़े शेष रहस्यों से पर्दा उठा सकते हैं। साथ ही, यह भारत के लिए वैश्विक मंच पर पाकिस्तान के खिलाफ ठोस सबूत भी प्रस्तुत कर सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news  #TahawwurRana #MumbaiTerrorAttack #Kasab #MumbaiAttack

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India won’t bow to Pakistan’s nuclear blackmail

India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail: पाकिस्तान के न्यूक्लियर ब्लैकमेल से नहीं डरेंगे- विदेश मंत्री एस. जयशंकर

ऑपेरशन सिंदूर के बाद से भारत पाकिस्तान पर हमलावर है। पाकिस्तान की करतूतों को उजागर करने का एक भी मौका भारत जाने नहीं देता। इस कड़ी में पाकिस्तान को खरी-खरी सुनाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम आतंकवादी हमला आर्थिक युद्ध का नया कृत्य था। जिसका मकसद कश्मीर में पर्यटन खत्म करना था। इसका उद्देश्य धार्मिक हिंसा को भड़काना भी था क्योंकि लोगों को मारने से पहले उनसे उनके धर्म के बारे में पूछा गया था।” पाकिस्तान को आइना दिखाते हुए उन्होंने कहा कि “भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है कि परमाणु ब्लैकमेल (nuclear blackmail) की पाकिस्तान की नीति भारत को पड़ोसी देश से उत्पन्न आतंकवाद का जवाब देने से नहीं रोक (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) पाएगी।” दरअसल, समाचार पत्रिका न्यूजवीक के सीईओ देव प्रगाद के साथ मैनहट्टन में 9/11 स्मारक के पास वन वर्ल्ड ट्रेड सेंटर स्थित प्रकाशन के मुख्यालय में आयोजित एक बातचीत के दौरान उन्होंने यह टिप्पणी की।  पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था, इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) करना था जयशंकर ने कहा कि “भारत में पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान से प्रेरित कई आतंकवादी हमले हुए हैं और 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद देश में यही भावना है कि अब बहुत हो गया।” विदेश मंत्री जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) ने कहा कि “पहलगाम हमला एक आर्थिक युद्ध का कृत्य था। इसका उद्देश्य कश्मीर में पर्यटन को तबाह करना था, जो वहां की अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) है। इसलिए हमने तय किया कि हम आतंकवादियों को दंडित किए बिना नहीं छोड़ सकते। वे सीमा के उस तरफ हैं और इसलिए उनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जा सकती, मुझे लगता है कि इस तरह के विचार को चुनौती देने की आवश्यकता है और हमने यही किया।” जयशंकर ने कहा कि “हम यह भी बहुत लंबे समय से सुनते आ रहे हैं कि भारत और पाकिस्तान दोनों परमाणु संपन्न देश हैं और इसलिए कोई और शख्स आएगा और खौफनाक चीजें करेगा, लेकिन आप कुछ नहीं कर सकते क्योंकि इससे दुनिया चिंतित हो जाती है। अब हम इसके झांसे में नहीं आने (nuclear blackmail) वाले हैं। अगर वे आकर कुछ करेंगे तो हम वहां जाएंगे और जिन्होंने ऐसा किया है, उन्हें निशाना बनाएंगे। हम परमाणु ब्लैकमेल के आगे नहीं झुकने वाले हैं, आतंकवादियों को कोई छूट नहीं मिलेगी, उनके छिप छिपकर हमलों को बख्शा नहीं जाएगा। हमें अपने लोगों की रक्षा के लिए जो करना है, करेंगे।” उन्होंने कहा कि हम बहुत स्पष्ट हैं कि आतंकवादियों को कोई छूट नहीं दी जाएगी। हम अब उन पर परोक्ष रूप से नहीं बल्कि सीधा सीधा हमला करेंगे और उस सरकार को नहीं बख्शेंगे जो उनका समर्थन, वित्तपोषण और कई तरीकों से उन्हें बढ़ावा देती है। परमाणु ब्लैकमेल की नीति हमें जवाब देने से नहीं रोकेगी।  इसे भी पढ़ें:- महाराष्ट्र में मराठी बनाम हिंदी विवाद फिर गरमाया ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था-जयशंकर   गौरतलब हो कि जयशंकर (External Affairs Minister S Jaishankar) अमेरिका की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस बीच मंगलवार को चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद क्वाड के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए वाशिंगटन डीसी जाएंगे। क्वाड चार देशों – भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका का समूह है। विदेश मंत्री ने अपनी यात्रा की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में भारत के स्थायी मिशन द्वारा आयोजित आतंकवाद की मानवीय कीमत शीर्षक वाली एक प्रदर्शनी का उद्घाटन करके (India Won’t Fear Pakistan’s Nuclear Blackmail) की। इस दौरान जयशंकर ने कहा कि “भारत के खिलाफ हमलों को अंजाम देने वाले पाकिस्तान के आतंकवादी गुप्त रूप से काम नहीं करते हैं और इन आतंकी संगठनों के पाकिस्तान के घनी आबादी वाले शहरों में कॉरपोरेट मुख्यालय सरीखे ठिकाने हैं। हर कोई जानता है कि संगठन ‘ए’ और संगठन ‘बी’ का मुख्यालय क्या है और ये वे इमारतें, मुख्यालय हैं जिन्हें भारत ने ऑपरेशन सिंदूर में नष्ट कर दिया।” बता दें कि ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ढांचे को निशाना बनाने के लिए शुरू किया गया था, जिसका उद्देश्य पहलगाम हमले का बदला लेना था। पहलगाम आतंकवादी हमले में 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे और पाकिस्तान के आतंकवादी समूह लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट ने जिम्मेदारी ली थी।  Latest News in Hindi Today Hindi news  S Jaishankar #India #Pakistan #NuclearThreat #SJaishankar #NationalSecurity #IndiaForeignPolicy

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AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman

Bihar Assembly Election 2025: क्या है AIMIM की नई रणनीति और तीसरे मोर्चे की तैयारी?

जैसे-जैसे बिहार में विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) का समय करीब आ रहा है, राज्य का सियासी पारा बढ़ता जा रहा है। सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी  तैयारी में जुट गए हैं और इसी कड़ी में अब असदुद्दीन ओवैसी (Asaduddin Owaisi) की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने एक नई सियासी चाल चली है। AIMIM ने बिहार में फिर से राजनीतिक समीकरण बदलने की कोशिशें शुरू कर दी हैं और यह साफ कर दिया है कि पार्टी इस बार कोई बड़ा दांव खेलने को तैयार है। महागठबंधन को दिया प्रस्ताव AIMIM के बिहार प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने मीडिया से बातचीत की और बताया कि उन्होंने करीब 15 दिन पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD), कांग्रेस (Congress) और वाम दलों (Wam Dal) को एक प्रस्ताव भेजा था। इस प्रस्ताव में AIMIM ने महागठबंधन में शामिल होने की इच्छा जताई थी। उन्होंने कहा कि बिहार के हित में खासकर युवाओं और सामाजिक दृष्ट्रिकों से यह कदम उठाया गया है। अख्तरुल ईमान ने कहा है कि सीटों के बंटवारे को लेकर अभी कोई बातचीत नहीं हुई है, लेकिन 2020 के चुनाव में हासिल सीटों और प्रदर्शन के आधार पर कोई फॉर्मूला तय किया जा सकता है। गौरतलब है कि 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) में महागठबंधन ने कुल 112 सीटें जीती थीं, जबकि AIMIM ने 20 में से 5 सीटें अपने नाम की थीं। तीसरे मोर्चे की अटकलें तेज हालांकि AIMIM की ओर से महागठबंधन में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन पार्टी ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि अगर गठबंधन में उन्हें जगह नहीं मिली, तो वे तीसरे मोर्चे का विकल्प भी तलाश सकते हैं। अख्तरुल ईमान (Akhtarul Iman) ने बताया कि कुछ अन्य दलों से बातचीत चल रही है, हालांकि उन्होंने इन दलों के नामों का खुलासा नहीं किया। यह संकेत इशारा करता है कि बिहार की राजनीति में एक नया मोर्चा उभर सकता है जो न तो एनडीए (NDA) का हिस्सा होगा और न ही महागठबंधन (UPA) का। AIMIM का यह रुख संभावित सहयोगी दलों के साथ एक अलग सेक्युलर फ्रंट खड़ा करने की मंशा दर्शाता है। वोटर लिस्ट पर सवाल और NRC का डर AIMIM ने चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा की जा रही वोटर लिस्ट पुनरीक्षण प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े किए हैं। अख्तरुल ईमान ने आरोप लगाया कि यह प्रक्रिया NRC जैसी है, जिसके जरिए दलित, महादलित और अल्पसंख्यकों को सूची से हटाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने कहा कि AIMIM का प्रतिनिधिमंडल जल्द ही चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा और इस मुद्दे पर अपना विरोध दर्ज कराएगा। AIMIM का बिहार में राजनीतिक दखल 2020 के विधानसभा चुनाव (2020 Assembly Election) से खासा बढ़ा है। उस चुनाव में पार्टी ने ग्रैंड डेमोक्रेटिक सेक्युलर फ्रंट के तहत 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था और 5 सीटों पर जीत हासिल की थी। यह सीटें बिहार के सीमांचल क्षेत्र से थीं, जहाँ मुस्लिम आबादी अधिक है। पार्टी को कुल 5.23 लाख वोट मिले थे और उसका वोट शेयर लगभग 1.3% रहा था। हालांकि चुनाव के बाद AIMIM के चार विधायक RJD में शामिल हो गए थे, जिससे पार्टी को झटका लगा था। लेकिन इस बार पार्टी फिर से सीमांचल को केंद्र में रखकर चुनावी रणनीति बना रही है। AIMIM और पुराने सहयोगी दल 2020 में AIMIM ने जिन दलों के साथ गठबंधन कर चुनाव लड़ा था, उनमें उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोकसमता पार्टी, बहुजन समाज पार्टी (BSP), समाजवादी जनता दल, सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी और जनवादी पार्टी (सोशलिस्ट) शामिल थे। आज इनमें से कई दल एनडीए का हिस्सा बन चुके हैं, जबकि कुछ ने खुद को नए राजनीतिक स्वरूप में ढाल लिया है। उदाहरण के तौर पर उपेंद्र कुशवाहा अब राष्ट्रीय लोक मंच बनाकर एनडीए में शामिल हैं, जबकि ओमप्रकाश राजभर की सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी भी एनडीए के साथ है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) में AIMIM की सक्रियता और उसकी रणनीतिक पहल यह दर्शाती है कि पार्टी इस बार निर्णायक भूमिका निभाने की मंशा रखती है। महागठबंधन से प्रस्ताव स्वीकार नहीं होने की स्थिति में तीसरा मोर्चा बनाना AIMIM के लिए एक बड़ा राजनीतिक कदम हो सकता है, जिससे बिहार की चुनावी तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। जहां एक ओर AIMIM भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिए विपक्षी दलों से हाथ मिलाने को तैयार है, वहीं दूसरी ओर वह अपने सीमांचल प्रभाव का इस्तेमाल कर एक स्वतंत्र शक्ति बनकर उभरना चाहती है। आने वाले हफ्ते और महीने यह तय करेंगे कि यह रणनीति AIMIM को चुनावी फायदे दिलाएगी या फिर सियासी नुकसान। लेकिन एक बात तो तय है कि इस बार बिहार की राजनीति में AIMIM एक बार फिर से सुर्खियों में है। Latest News in Hindi Today Hindi news AIMIM- Asaduddin owaisi and Akhtarul Iman #BiharAssemblyElection2025 #AssemblyElection #AIMIM #AsaduddinOwaisi #AkhtarulIman

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Vivo T4 Lite 5G

Vivo ने लॉन्च किया 10,000 रुपये में दमदार 5G स्मार्टफोन: जानिए फीचर्स, कीमत और खासियत 

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 5G तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीनी स्मार्टफोन निर्माता Vivo ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी T-सीरीज में एक नया और किफायती 5G फोन लॉन्च कर दिया है। Vivo का यह नया मॉडल Vivo T4 Lite 5G है, जिसे कंपनी ने उन यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है जो कम बजट में दमदार फीचर्स वाले 5G फोन (5G Phone) की तलाश कर रहे हैं। Vivo T4 Lite 5G: कीमत और वेरिएंट Vivo T4 Lite 5G को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में पेश किया गया है: Vivo T4 Lite 5G फोन की पहली सेल 2 जुलाई को दोपहर 12 बजे से Flipkart, Vivo के ऑफिशियल ई-स्टोर और अन्य रिटेल स्टोर्स पर शुरू होगी। Vivo ने इसे दो आकर्षक रंगों में पेश किया है प्रिज्म ब्लू और टाइटेनियम गोल्ड, जो इसे एक प्रीमियम लुक प्रदान करते हैं। Vivo T4 Lite 5G: डिस्प्ले और डिजाइन Vivo T4 Lite 5G में 6.74 इंच का LCD डिस्प्ले है, जो HD+ (720×1600 पिक्सल) रेजोलूशन और 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस डिस्प्ले की 1000 निट्स पीक ब्राइटनेस इसे तेज धूप में भी पढ़ने लायक बनाती है, जो कि इस प्राइस रेंज में कम ही देखने को मिलता है। इसका स्लीक डिजाइन और बड़ी स्क्रीन इसे मल्टीमीडिया और गेमिंग के लिए आदर्श बनाता है। प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, जो कि एक किफायती लेकिन शक्तिशाली 5G प्रोसेसर है। इसके साथ 8GB तक की RAM और 256GB तक की इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसे microSD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह फोन Android 15 पर आधारित FuntouchOS 15 पर चलता है, जो कि एक क्लीन और यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस के लिए जाना जाता है। Vivo T4 Lite 5G: कैमरा फीचर्स कैमरा की बात करें तो Vivo T4 Lite 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 2MP का सेकेंडरी सेंसर दिया गया है। फ्रंट में 5MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है जो बेसिक वीडियो कॉलिंग (Basic Video Calling) और सोशल मीडिया (Social Media) के लिए पर्याप्त है। यह कैमरा (Camera) सेटअप इस प्राइस रेंज में अच्छी डिटेल और कलर रिप्रोडक्शन प्रदान करता है। Vivo T4 Lite 5G: बैटरी और चार्जिंग फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की विशाल बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का सबसे सस्ता फोन है जिसमें इतनी बड़ी बैटरी दी गई है। फोन 15W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे लंबी बैटरी लाइफ के साथ चार्जिंग भी सुविधाजनक हो जाती है। Vivo T4 Lite 5G: कनेक्टिविटी और सेफ़्टी  फोन में डुअल 5G, डुअल-बैंड Wi-Fi, और Bluetooth जैसे कनेक्टिविटी फीचर्स मौजूद हैं। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है जो तेज और सटीक है। यह फोन IP64 रेटेड है यानी यह धूल और हल्के पानी की बूंदों से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा इसमें SGS 5 स्टार एंटी फॉल प्रोटेक्शन और MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड शॉक रेसिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी है, जिससे यह हल्की गिरावट में भी सुरक्षित रह सकता है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले Vivo T4 Lite 5G: किसके लिए है यह फोन? Vivo T4 Lite 5G खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए है जो बजट में रहते हुए भी लेटेस्ट तकनीक और मजबूत फीचर्स चाहते हैं। छात्र, नौकरीपेशा और पहली बार स्मार्टफोन (Smartphone) खरीदने वाले यूज़र्स के लिए यह एक आदर्श विकल्प हो सकता है। 10,000 रुपये से कम की कीमत में 5G, बड़ी बैटरी, 90Hz डिस्प्ले, और मजबूत डिज़ाइन जैसी खूबियों के साथ Vivo T4 Lite 5G इस सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है। Vivo का यह कदम निश्चित ही बाजार में बजट 5G स्मार्टफोन्स की प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अगर आप कम बजट में एक भरोसेमंद और भविष्य-प्रूफ फोन की तलाश में हैं, तो Vivo T4 Lite 5G पर नज़र डालना फायदेमंद हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi Vivo T4 Lite 5G #VivoT4Lite5G #5Gsmartphone #BudgetPhone #Vivo #SmartPhone

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Arvind Kejriwal- AAP

गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट?

हाल ही में हुए उपचुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। पहली जीत गुजरात की विसावदर (Visavadar Gujarat) और दूसरी जीत पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Punjab Ludhiana West) में मिली है। इस जीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Former Chief Minister Arvind Kejriwal) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने इस विजय को जनता के विश्वास और पार्टी के कार्यों की स्वीकृति का प्रतीक बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह जीत साल 2027 के आम चुनावों का संकेत है और उस वर्ष तूफान आने वाला है। दो राज्यों में मिली बड़ी सफलता पांच राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो पर जीत हासिल की। इन सीटों में गुजरात की विसावदर और पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Visavadar Gujarat and Punjab Ludhiana West) शामिल हैं। इन दोनों ही जगहों पर पार्टी ने पिछली बार की तुलना में दोगुने अंतर से जीत दर्ज की है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां पंजाब में उनकी सरकार पहले से है, वहीं गुजरात में भाजपा की मजबूत पकड़ के बावजूद जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना। उन्होंने कहा कि “गुजरात में बीजेपी की शासन प्रणाली, पुलिस, प्रशासन और एजेंसियों पर मजबूत पकड़ है। इसके बावजूद, विसावदर की जनता ने हमें डबल मार्जिन से जिताया। यह इस बात का प्रमाण है कि लोग बीजेपी के 30 वर्षों के शासन से परेशान हो चुके हैं और अब बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।” View this post on Instagram A post shared by Aam Aadmi Party | AAP (@aamaadmiparty) लुधियाना पश्चिम की जीत और जनता का मूड लुधियाना पश्चिम सीट (Ludhiana West Seat) पर आप के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora), जो राज्यसभा सांसद भी हैं और अब चुनाव भी जीत चुके हैं। यह सीट पहले कांग्रेस (Congress) के कब्जे में थी, लेकिन अब वहां की जनता ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी के कामकाज से संतुष्ट हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा पंजाब में हमने जब 2022 में विधानसभा चुनाव जीता था, तब कहा गया था कि यह आम आदमी पार्टी की आंधी है। अब उपचुनाव में उसी सीट पर हम दुगने अंतर से जीते हैं, तो यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा हम पर और मजबूत हुआ है। यह एक सेमीफाइनल जैसा है, 2027 में तो तूफान ही आएगा। राज्यसभा जाने की अटकलों पर जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूछा गया कि क्या वे राज्यसभा जाने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं राज्यसभा नहीं जा रहा हूं। यह निर्णय पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति करेगी कि राज्यसभा कौन जाएगा।” इस उत्तर से उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उनका लक्ष्य अभी ज़मीन पर रहकर पार्टी को आगे बढ़ाना है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! क्या है जनता का संदेश? अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने जोर देकर कहा कि उपचुनाव के नतीजे केवल जीत का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि जनता की ओर से एक स्पष्ट संदेश भी हैं कि जनता वही पार्टी चुनेगी जो उनके लिए काम करती है। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे मुद्दों पर जो काम किया है, उसका असर अब दूसरे राज्यों में भी दिखने लगा है। गुजरात जैसे राज्य जहां बीजेपी (BJP) की मजबूत पकड़ रही है, वहां भी अब बदलाव की हवा बहती दिख रही है। विसावदर सीट पर मिली जीत इस बात का संकेत है कि लोग अब पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर परिणामों पर ध्यान दे रहे हैं। गुजरात और पंजाब (Gujrat and Punjab) में मिली इस जीत ने आम आदमी पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा दी है। यह जीत न सिर्फ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति में एक नया संकेत भी दे रही है कि जनता अब विकल्प चाहती है और वह विकल्प उन्हें काम करने वाली पार्टियों में दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के शब्दों में साल 2027 में तूफान आने वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आने वाले सालों में भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को दर्शाने वाला संकेत भी हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Arvind Kejriwal #Visavadar #Ludhiana #Election2025 #AAP #Arvindkejriwal

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PM Modi Bihar Visit: विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा

बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। इसी क्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने एक बार फिर बिहार का दौरा (PM Modi Bihar Visit) किया और सीवान की धरती से कई विकास परियोजनाओं की सौगात दी। साथ ही अपने संबोधन में उन्होंने विपक्ष पर तीखा हमला करते हुए जनता को सतर्क रहने का संदेश दिया। यह दौरा चुनावी दृष्टिकोण से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह छह महीने में पीएम मोदी का चौथा और बीते 20 दिनों में दूसरा बिहार दौरा है। संविधान और स्वतंत्रता संग्राम की भूमि को नमन सीवान में आयोजित विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बिहार की ऐतिहासिक भूमिका को याद किया। उन्होंने कहा, “यह धरती संविधान को ताकत देने वाली, स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा देने वाली है। बिहार ने देश को नेतृत्व दिया है और आने वाले समय में भारत को तीसरी सबसे बड़ी महाशक्ति बनाने में बिहार की बड़ी भूमिका होगी।” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बताया कि वह हाल ही में विदेश यात्रा से लौटे हैं और समृद्ध देशों के नेताओं से मुलाकात की है। उन्होंने बताया कि विदेशी नेता भारत की तेज प्रगति और वैश्विक स्तर पर बढ़ती भूमिका से प्रभावित हैं। ऐसे में बिहार (Bihar) को इस प्रगति का केंद्र बताया और राज्य की जनता से आग्रह किया कि वे अपने बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए सतर्क रहें। विपक्ष पर हमला: जंगलराज और पलायन का जिक्र अपने संबोधन में पीएम मोदी (PM Modi) ने आरजेडी और कांग्रेस (RJD and Congress) पर सीधा हमला करते हुए कहा कि “जंगलराज वाले फिर से मौके तलाश रहे हैं और तरह-तरह के हथकंडे अपना रहे हैं।” उन्होंने लालू यादव की पार्टी और उनके सहयोगियों को निशाने पर लेते हुए कहा कि “पंजे और लालटेन वाले दलों ने बिहार की पहचान पलायन से जोड़ दी थी। उन्होंने बिहार के स्वाभिमान को गहरी ठेस पहुंचाई।” उन्होंने आगे कहा कि एनडीए सरकार (NDA Government) को जब बिहार की जनता ने मौका दिया, तब गरीबी हटाने का वास्तविक प्रयास दिखा और देशभर में 25 करोड़ लोग गरीबी रेखा से बाहर आए। पीएम ने बताया कि आज दुनिया भारत के इस प्रयास की तारीफ कर रही है। विकास की बौछार: 5736 करोड़ की योजनाएं इस दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने बिहारवासियों को 5736 करोड़ रुपये की 22 बड़ी विकास योजनाओं की सौगात दी। इनमें प्रमुख योजनाएं शामिल हैं: इन योजनाओं से न केवल राज्य के बुनियादी ढांचे को बल मिलेगा, बल्कि रोजगार और जीवनस्तर में भी सुधार होगा। इसे भी पढ़ें:- Rahul Gandhi’s Entry Into Politics: जन्मदिन विशेष: इस तरह हुई थी राहुल गाँधी की सियासत में इंट्री राजनीतिक हलचल: विपक्ष का तंज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) के इस दौरे पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी देखने को मिली। राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि “पीएम मोदी बिहार आएंगे (PM Modi Bihar Visit) और फिर से जंगलराज की स्क्रिप्ट पढ़ेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा बार-बार पुराने मुद्दों को उछालती है और असल समस्याओं से ध्यान हटाती है। बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का यह दौरा न केवल राजनीतिक बल्कि विकासात्मक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। जनता के सामने एक बार फिर एनडीए सरकार की योजनाओं और विकास कार्यों की झलक पेश की गई है। वहीं, विपक्ष को घेरते हुए पीएम मोदी (PM Modi) ने जनता से अपील की कि वे विकास के इस मार्ग को बनाए रखें और भूतकाल की राजनीति से सावधान रहें। आने वाले महीनों में बिहार की राजनीतिक दिशा तय करने में इस दौरे की बड़ी भूमिका होगी। Latest News in Hindi Today Hindi  PM Modi Bihar Visit #PMModiBiharVisit #PMModi #BiharElection #BiharAssemblyElection

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Amit Shah

हमारी भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर कहा है कि अब समय आ गया है जब भारत को अपनी भाषाई विरासत पर गर्व करते हुए, देसी भाषाओं के बल पर वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ना चाहिए। गुरुवार को एक कार्यक्रम में बोलते हुए अमित शाह ने साफ किया कि “हमारी भाषाएं केवल संचार का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और पहचान का प्रतीक है।” अंग्रेज़ी का मोह छोड़, देसी भाषाओं का अभिमान ज़रूरी अमित शाह (Amit Shah) ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा, “अब वह समय दूर नहीं जब अंग्रेज़ी बोलने वालों को शर्म महसूस होगी। हम एक ऐसे समाज की ओर बढ़ रहे हैं जहां देसी भाषाओं को सम्मान और गर्व का प्रतीक माना जाएगा।” उन्होंने कहा कि केवल दृढ़ संकल्प वाले लोग ही सामाजिक बदलाव ला सकते हैं और भारतीय भाषाओं को अपनाकर हम एक सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में अग्रसर हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि “भाषाएं हमारी संस्कृति का रत्न हैं और इन रत्नों के बिना हम सच्चे भारतीय नहीं बन सकते।” विदेशी भाषाएं भारत की आत्मा को नहीं समझ सकतीं गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने अपने भाषण में इस बात पर बल दिया कि किसी भी विदेशी भाषा के जरिए भारत को पूरी तरह से समझा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, “देश, संस्कृति, इतिहास और धर्म को जानने और समझने के लिए भारतीय भाषाएं (Mother tongue) ही पर्याप्त हैं। हम अधूरी विदेशी भाषाओं के सहारे संपूर्ण भारत की कल्पना नहीं कर सकते।” उन्होंने स्वीकार किया कि यह बदलाव आसान नहीं होगा, क्योंकि दशकों से देश में अंग्रेज़ी को श्रेष्ठता का प्रतीक माना जाता रहा है, लेकिन उन्होंने यह भी विश्वास जताया कि भारतीय समाज इस बदलाव में सफल होगा। पंच प्रण से जुड़े भाषाई गर्व का संदेश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) द्वारा प्रस्तुत पांच प्रतिज्ञा का उल्लेख करते हुए अमित शाह ने कहा कि यह अब 130 करोड़ भारतीयों का संकल्प बन चुका है। ये पंच प्रण हैं: उन्होंने कहा कि इन प्रतिज्ञाओं को पूरा करने की दिशा में भाषाओं की भूमिका अहम होगी। “2047 तक जब भारत आज़ादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब तक हम शिखर पर होंगे – और इस यात्रा की बुनियाद भारतीय भाषाएं ही होंगी।” प्रशासनिक प्रशिक्षण में भारतीय भाषाओं का समावेश ज़रूरी गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने यह भी ज़ोर दिया कि प्रशासनिक अधिकारियों के प्रशिक्षण में अब बदलाव की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमें अपनी सिविल सेवाओं को भारतीय भाषाओं में कार्य करने के लिए प्रशिक्षित करना होगा। इससे न केवल प्रशासन लोगों के और करीब आएगा, बल्कि नीति निर्माण और क्रियान्वयन में भी स्थानीय सांस्कृतिक और भाषाई जरूरतों को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा।” इसे भी पढ़ें:- Rahul Gandhi’s Entry Into Politics: जन्मदिन विशेष: इस तरह हुई थी राहुल गाँधी की सियासत में इंट्री नई शिक्षा नीति से मिला भाषाओं को समर्थन गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) का यह वक्तव्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 की उस भावना के अनुरूप है, जिसमें मातृभाषा में शिक्षा देने पर बल दिया गया है। नीति में कहा गया है कि कक्षा 5 तक और यदि संभव हो तो कक्षा 8 तक बच्चों को मातृभाषा या स्थानीय भाषा में शिक्षा दी जाए। इससे न केवल बच्चों की सीखने की क्षमता बढ़ती है, बल्कि वे अपनी जड़ों से भी जुड़े रहते हैं। भारत जैसे बहुभाषी देश के लिए भाषाई गौरव केवल संस्कृति की बात नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय एकता की नींव भी है। गृहमंत्री अमित शाह (Amit Shah) का यह आह्वान कि भारतीय भाषाएं ही हमारी असली शक्ति हैं, एक महत्वपूर्ण संदेश है — खासकर उस समय जब वैश्वीकरण के दबाव में देश अपनी भाषाई विविधता और गहराई को खोता जा रहा है। अब यह आवश्यक हो गया है कि नीतियों, प्रशासन और शिक्षा में भारतीय भाषाओं को प्राथमिकता दी जाए ताकि भारत न केवल आर्थिक और तकनीकी रूप से, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी आत्मनिर्भर बन सके। Latest News in Hindi Today Hindi  #mothertongue #AmitShah #PMModi #Hindi #HindiLanguage

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