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भारत की हॉकी टीम पर बढ़ा दबाव! England से 2-4 की हार के बाद Pakistan के खिलाफ मुकाबला बेहद अहम

एफआईएच पुरुष हॉकी विश्व कप 2026 में भारतीय हॉकी टीम को इंग्लैंड के खिलाफ 2-4 से हार का सामना करना पड़ा। सोमवार को अम्स्टेलवीन में खेले गए पूल डी के मुकाबले में भारत ने पहले हाफ में 2-1 की बढ़त बना ली थी, लेकिन दूसरे हाफ में इंग्लैंड ने शानदार वापसी करते हुए लगातार तीन गोल दाग दिए। भारत के लिए कप्तान हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह ने गोल किए। एक समय भारतीय टीम मजबूत स्थिति में नजर आ रही थी, लेकिन दूसरे हाफ में रक्षात्मक गलतियों का खामियाजा भुगतना पड़ा और इंग्लैंड ने मुकाबला अपने नाम कर लिया। इंग्लैंड के खिलाफ हार के बाद भारत की नजरें अब पाकिस्तान के खिलाफ होने वाले बेहद अहम मुकाबले पर टिक गई हैं। यह मैच 19 अगस्त को खेला जाएगा और पूल डी में दोनों टीमों के लिए इसका परिणाम काफी महत्वपूर्ण होगा। भारत ने अपने अभियान की शुरुआत वेल्स के खिलाफ 3-1 की जीत के साथ की थी। इंग्लैंड से हार के बाद भारत के खाते में दो मैचों से तीन अंक हैं, जबकि इंग्लैंड दोनों मैच जीतकर अगले दौर में अपनी जगह पक्की कर चुका है। पाकिस्तान के खिलाफ भारत को कम से कम ड्रॉ की जरूरत है ताकि अगले दौर में पहुंचने की स्थिति मजबूत बनी रहे। वहीं, पाकिस्तान के लिए जीत बेहद जरूरी है, क्योंकि उसके पास दो मैचों से सिर्फ एक अंक है। ऐसे में भारत-पाकिस्तान मुकाबला दोनों टीमों के विश्व कप अभियान के लिए निर्णायक बन गया है। भारतीय टीम के मुख्य कोच क्रेग फुल्टन ने खिलाड़ियों से दबाव के बीच संयम बनाए रखने और रक्षात्मक अनुशासन पर ध्यान देने की अपील की है। इंग्लैंड के खिलाफ मिली हार के बाद अब टीम के लिए पाकिस्तान के खिलाफ गलतियों से बचना बेहद जरूरी होगा। भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाला यह मुकाबला सिर्फ पारंपरिक प्रतिद्वंद्विता तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों टीमों के लिए टूर्नामेंट में आगे बढ़ने की उम्मीदों से भी जुड़ा हुआ है। ऐसे में हॉकी प्रशंसकों की नजरें इस हाई-वोल्टेज मुकाबले पर टिकी हैं। स्रोत: Hockey India, NDTV, Times of India Jai Rashtra News

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मध्य प्रदेश में बड़ा सड़क हादसा, 8 मजदूरों की मौत और 32 लोग घायल

मध्य प्रदेश के भिंड जिले में मंगलवार तड़के एक भीषण सड़क हादसे में 8 मजदूरों की मौत हो गई, जबकि 32 लोग घायल हो गए। यह दुर्घटना भिंड-ग्वालियर नेशनल हाईवे-719 पर छीमका गांव के पास हुई, जहां मजदूरों से भरी पिकअप की सामने से आ रहे डंपर से जोरदार टक्कर हो गई। जानकारी के मुताबिक, हादसा सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे हुआ। पिकअप में सवार मजदूर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के रहने वाले थे और ग्वालियर में धान की रोपाई का काम पूरा करने के बाद अपने गांव लौट रहे थे। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हाईवे पर गायों का झुंड आ जाने के बाद उन्हें बचाने की कोशिश में पिकअप अनियंत्रित हो गई और सामने से आ रहे डंपर से भिड़ गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि कई मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को गोहद अस्पताल पहुंचाया गया। गंभीर रूप से घायल लोगों को बेहतर इलाज के लिए ग्वालियर रेफर किया गया है। हादसे के बाद मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया जारी है। घटना के बाद इलाके में शोक का माहौल है। पुलिस ने दुर्घटना के कारणों की जांच शुरू कर दी है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर हाईवे पर सुरक्षा व्यवस्था और आवारा पशुओं की समस्या को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन की ओर से हादसे की विस्तृत जांच की जा रही है। स्रोत: NDTV, Deccan Chronicle Jai Rashtra News

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शेयर बाजार में गिरावट! कच्चा तेल $91 के पार पहुंचा, Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव

भारतीय शेयर बाजार में मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को गिरावट देखने को मिली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 250-300 अंक तक गिरा, जबकि निफ्टी 24,250 के स्तर से नीचे चला गया। बाजार पर सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का रहा। ब्रेंट क्रूड 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्षविराम की अवधि खत्म होने और तनाव बढ़ने से वैश्विक स्तर पर तेल की सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। महंगा कच्चा तेल भारत के लिए खास तौर पर चिंता का विषय है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। तेल की कीमत बढ़ने से भारत का आयात बिल बढ़ सकता है, रुपये पर दबाव आ सकता है और महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 77,418.97 के स्तर पर खुला, जबकि निफ्टी 50 ने 24,223.85 के आसपास शुरुआत की। बाद में निफ्टी 24,177 के करीब आ गया और बाजार में गिरावट और गहरी हुई। आईटी शेयरों पर भी दबाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में आईटी सेक्टर प्रमुख गिरने वाले क्षेत्रों में रहा। ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कमजोर रुपया और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब पश्चिम एशिया के घटनाक्रम, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल आपूर्ति की स्थिति और कच्चे तेल की कीमतों पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में तेजी आगे भी जारी रहती है, तो भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। फिलहाल निवेशकों के लिए वैश्विक भू-राजनीतिक घटनाक्रम और कच्चे तेल की चाल बाजार की दिशा तय करने वाले प्रमुख संकेत बने हुए हैं। स्रोत: Reuters, NDTV, IIFL Jai Rashtra News

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रुपया फिर फिसला! डॉलर के मुकाबले ₹95.67 तक पहुंचा, महंगे कच्चे तेल और ईरान तनाव का दबाव

भारतीय रुपया एक बार फिर दबाव में नजर आया है। मंगलवार, 18 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया कमजोर होकर ₹95.67 प्रति डॉलर के स्तर तक पहुंच गया। रुपये में इस गिरावट के पीछे कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और ईरान से जुड़े भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख कारण माना जा रहा है। वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर कच्चे तेल का आयात करता है। तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ती है और इससे रुपये पर अतिरिक्त दबाव बनता है। वहीं, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक सुरक्षित परिसंपत्तियों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव देखने को मिल रहा है। रुपये की गिरावट को सीमित करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप किए जाने की भी खबर है। बाजार विशेषज्ञों की नजर अब कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर की मजबूती और ईरान से जुड़े घटनाक्रम पर बनी हुई है। रुपये में लगातार कमजोरी का असर भारत के आयात बिल पर पड़ सकता है। खासतौर पर कच्चा तेल, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य आयातित वस्तुएं महंगी हो सकती हैं। इससे आने वाले समय में महंगाई पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि, कमजोर रुपये से निर्यात करने वाली कुछ कंपनियों को फायदा मिल सकता है, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में होने वाली कमाई को रुपये में बदलने पर अधिक रकम प्राप्त होती है। फिलहाल बाजार की दिशा काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव पर निर्भर करेगी। अगर तेल की कीमतों में तेजी बनी रहती है, तो रुपये पर आगे भी दबाव देखने को मिल सकता है। स्रोत: Reuters Jai Rashtra News

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16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने तोड़ा अनशन, सदर अस्पताल में खत्म हुई भूख हड़ताल

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो ने अपना 16 दिनों का अनशन समाप्त कर दिया है। उन्होंने रांची के सदर अस्पताल में सोमवार रात भूख हड़ताल खत्म की। सरकार के फैसले के बाद खत्म हुआ अनशन देवेंद्र नाथ महतो का अनशन उस समय समाप्त हुआ जब झारखंड सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा और TDPL के जरिए आयोजित परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा की। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 17 अगस्त को घोषणा की कि TDPL द्वारा आयोजित परीक्षाओं और उनसे जुड़े परिणामों एवं नियुक्ति प्रक्रियाओं को रद्द किया जाएगा। साथ ही 2014 से TDPL के जरिए हुई परीक्षाओं की जांच का फैसला भी लिया गया। सदर अस्पताल में जूस पिलाकर अनशन खत्म अनशन खत्म कराने के दौरान झारखंड सरकार के मंत्री दीपिका पांडे सिंह और इरफान अंसारी सदर अस्पताल पहुंचे। रिपोर्टों के अनुसार, देवेंद्र नाथ महतो ने जूस पीकर अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान उनके साथ मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों ने भी भूख हड़ताल समाप्त की। महतो ने सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए इसे छात्रों के संघर्ष की बड़ी उपलब्धि बताया। 16 दिनों तक जारी रहा संघर्ष देवेंद्र नाथ महतो ने भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और पारदर्शिता की मांग को लेकर 16 दिनों तक भूख हड़ताल की। लंबे समय तक भोजन नहीं लेने के कारण उनकी तबीयत बिगड़ गई थी और उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने उनके स्वास्थ्य में इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई थी। अस्पताल में भर्ती रहने के बावजूद महतो लगातार अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने पर जोर देते रहे। JSSC-CGL रद्द होने से छात्रों में खुशी सरकार के फैसले के बाद आंदोलनकारी छात्रों में खुशी देखी गई। JSSC-CGL समेत TDPL से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने को छात्र नेताओं ने अपनी बड़ी जीत बताया है। हालांकि, आंदोलन पूरी तरह खत्म हुआ है या नहीं, इस पर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। CBI जांच की मांग अभी बाकी छात्र आंदोलन से जुड़े संगठनों की एक प्रमुख मांग CBI जांच की भी रही है। सरकार द्वारा परीक्षाएं रद्द किए जाने के बावजूद छात्र संगठनों के एक धड़े ने कहा है कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच नहीं होती, तब तक उनका संघर्ष जारी रह सकता है। इसलिए परीक्षा रद्द होने के बाद भी झारखंड में भर्ती व्यवस्था और जांच को लेकर राजनीतिक एवं छात्र आंदोलन जारी रहने की संभावना है। अब आगे क्या होगा? अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रद्द की गई परीक्षाओं को दोबारा कब कराया जाएगा और नई परीक्षा व्यवस्था कैसी होगी। साथ ही, सरकार को उन अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर भी स्पष्ट व्यवस्था करनी होगी, जो पहले की चयन प्रक्रिया में सफल हुए थे। निष्कर्ष 16 दिनों के लंबे संघर्ष के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने रांची के सदर अस्पताल में अपना अनशन समाप्त कर दिया। यह फैसला झारखंड सरकार द्वारा JSSC-CGL और TDPL से जुड़ी परीक्षाओं को रद्द करने की घोषणा के बाद आया। हालांकि, CBI जांच और भर्ती प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन का अगला रुख महत्वपूर्ण रहेगा। Source: Hindustan Times, Indian Express, Navbharat Times, Amar Ujala जय राष्ट्र न्यूज़

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नागालैंड के नन्हे रॉकस्टार ‘याटो’ ने जीता देशवासियों का दिल, राष्ट्रगान की आवाज ने मचाई धूम

नई दिल्ली: नागालैंड के महज 5 साल के याटो वांगनाओ इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका ‘जन गण मन’ गाने का वीडियो वायरल हुआ, जिसे सुनकर देशभर के लोग उनकी मासूमियत, आत्मविश्वास और देशभक्ति की जमकर तारीफ कर रहे हैं। याटो के राष्ट्रगान ने मचाई धूम याटो का राष्ट्रगान गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ। छोटी सी उम्र में जिस आत्मविश्वास और भावनात्मक अंदाज में उन्होंने ‘जन गण मन’ प्रस्तुत किया, उसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। खास तौर पर राष्ट्रगान के अंतिम हिस्से ‘जय हे’ को जिस अंदाज में याटो ने गाया, उसकी सोशल मीडिया पर खूब चर्चा हुई। कई लोगों ने वीडियो को बार-बार देखने और सुनने की बात कही। आनंद महिंद्रा भी हुए प्रभावित याटो की प्रतिभा से प्रभावित होकर उद्योगपति आनंद महिंद्रा ने भी उनका वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने याटो की प्रस्तुति की तारीफ करते हुए नागालैंड की खूबसूरती और सांस्कृतिक पहचान को भी सामने रखा। महिंद्रा ने याटो के वीडियो को नागालैंड के लिए एक तरह का अनौपचारिक टूरिज्म प्रमोशन बताते हुए कहा कि इस छोटे बच्चे ने जिस तरह लोगों का ध्यान नागालैंड की ओर खींचा, वह बेहद खास है। छोटी उम्र, बड़ा आत्मविश्वास याटो की सबसे खास बात उनकी उम्र के मुकाबले उनका आत्मविश्वास है। महज पांच साल की उम्र में राष्ट्रगान को इस तरह पूरे जोश और भाव के साथ प्रस्तुत करना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी पसंद आया। उनके वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि देश के अलग-अलग हिस्सों में छिपी प्रतिभाएं किस तरह सोशल मीडिया के जरिए पूरे भारत तक पहुंच सकती हैं। नागालैंड की संस्कृति भी चर्चा में याटो की वायरल प्रस्तुति के साथ नागालैंड भी चर्चा में आ गया है। पूर्वोत्तर भारत की प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक विविधता को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है। आनंद महिंद्रा की पोस्ट के बाद कई यूजर्स ने नागालैंड को अपनी Travel Bucket List में शामिल करने की बात कही। सोशल मीडिया पर मिल रहा प्यार याटो के वीडियो पर देशभर से सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोग उनकी आवाज, मासूमियत और देशभक्ति की भावना की तारीफ कर रहे हैं। कई यूजर्स ने याटो को भविष्य का बड़ा कलाकार बताते हुए उनकी प्रतिभा को प्रोत्साहित करने की अपील भी की है। निष्कर्ष नागालैंड के 5 वर्षीय याटो वांगनाओ ने अपनी प्यारी आवाज और जोशीले अंदाज में राष्ट्रगान गाकर देशवासियों का दिल जीत लिया है। उनका वायरल वीडियो न सिर्फ उनकी प्रतिभा को सामने ला रहा है, बल्कि नागालैंड की खूबसूरती और पूर्वोत्तर भारत की सांस्कृतिक पहचान को भी देशभर में चर्चा में ला रहा है। Source: Times of India, Navbharat Times जय राष्ट्र न्यूज़

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अभिजीत दीपके की डिग्री और स्कॉलरशिप पर सवाल, बोले—“मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार”

नई दिल्ली: CJP संस्थापक अभिजीत दीपके की विदेश में पढ़ाई और उसकी फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। दीपके ने अपने ऊपर लगे आरोपों का जवाब देते हुए कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने BJP नेताओं और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। Boston University की पढ़ाई पर उठे सवाल विवाद तब शुरू हुआ जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने दीपके की विदेश में पढ़ाई के खर्च को लेकर सवाल उठाए। उनके पिता के वित्तीय मामलों की जांच की मांग भी की गई और यह सवाल उठाया गया कि अमेरिका में उनकी पढ़ाई का खर्च कैसे पूरा हुआ। दीपके ने इन सवालों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पढ़ाई के लिए स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन का इस्तेमाल हुआ था। उन्होंने कहा कि उनके पास इससे संबंधित दस्तावेज मौजूद हैं और जरूरत पड़ने पर उन्हें सार्वजनिक किया जा सकता है। “मैं अपनी डिग्री दिखाने को तैयार हूं” अभिजीत दीपके ने कहा कि अगर उनकी शिक्षा और डिग्री को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं तो वह अपनी Boston University की डिग्री दिखाने के लिए तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उनके पास स्कॉलरशिप लेटर और एजुकेशन लोन के दस्तावेज हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दीपके ने दावा किया है कि उन्हें Boston University से Dean’s Scholarship मिली थी और पढ़ाई के बाकी खर्च के लिए एजुकेशन लोन लिया गया था। PM मोदी की डिग्री पर भी उठाया सवाल दीपके ने अपने बचाव के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर भी सवाल खड़ा किया। उनका कहना है कि यदि उनसे उनकी शैक्षणिक योग्यता के दस्तावेज मांगे जा रहे हैं तो राजनीतिक नेताओं को भी अपनी डिग्रियों को सार्वजनिक करने के लिए तैयार रहना चाहिए। उनके इस बयान के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस और तेज हो गई है। विरोधियों को भी दिया जवाब 17 अगस्त को सामने आए एक वीडियो में दीपके ने उन लोगों पर भी निशाना साधा, जो उनकी Boston University की डिग्री को लेकर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह अपनी डिग्री दिखा देंगे और साथ ही अपने आलोचकों से भी अपनी शैक्षणिक योग्यता सार्वजनिक करने की मांग की। विवाद अब राजनीतिक मुद्दा बना यह मामला केवल दीपके की शिक्षा तक सीमित नहीं रहा है। उनके CJP आंदोलन और सरकार के खिलाफ उनके बयानों के कारण यह विवाद राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने भी दीपके की ओर से प्रधानमंत्री की डिग्री पर सवाल उठाने वाली टिप्पणी की आलोचना की और इसे अहंकार से जोड़कर देखा। निष्कर्ष अभिजीत दीपके की Boston University की डिग्री और विदेश में पढ़ाई की फंडिंग को लेकर उठे सवालों के बीच उन्होंने साफ कहा है कि वह अपनी डिग्री, स्कॉलरशिप और एजुकेशन लोन से जुड़े दस्तावेज दिखाने को तैयार हैं। वहीं प्रधानमंत्री की डिग्री को लेकर उनके सवालों ने इस विवाद को और राजनीतिक बना दिया है। फिलहाल दोनों पक्षों के बयानों के बीच यह मुद्दा सोशल मीडिया और राजनीतिक चर्चा में बना हुआ है। Source: PTI, India Today, ThePrint, ABP News, Navbharat Live जय राष्ट्र न्यूज़

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मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग, VIDEO आया सामने; 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया

मुंबई: दक्षिण मुंबई के चर्चगेट इलाके में स्थित आयकर भवन (Aayakar Bhavan) के बेसमेंट में सोमवार दोपहर आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। आग से निकलने वाला घना धुआं पूरी इमारत में फैल गया, जिसके बाद दमकल विभाग ने बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। घटना का वीडियो भी सामने आया है। करीब 2 बजे लगी आग मुंबई फायर ब्रिगेड को सोमवार दोपहर करीब 2:01 बजे आयकर भवन में आग लगने की सूचना मिली। इसके बाद दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं। आग मुख्य रूप से भवन के बेसमेंट तक सीमित बताई गई, जहां बिजली की वायरिंग, इलेक्ट्रिकल इंस्टॉलेशन, रिकॉर्ड और अन्य सामान रखा था। पूरी इमारत में भर गया धुआं आग के कारण बेसमेंट से निकलने वाला धुआं केंद्रीय एयर-कंडीशनिंग सिस्टम के जरिए इमारत के दूसरे हिस्सों तक पहुंच गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि दमकलकर्मियों को धुआं बाहर निकालने के लिए कुछ खिड़कियों के शीशे तोड़ने पड़े। 28 से ज्यादा लोगों का रेस्क्यू दमकल विभाग ने इमारत के अलग-अलग हिस्सों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। रिपोर्टों के अनुसार कम से कम 28 लोगों को रेस्क्यू किया गया, जिनमें ऊपरी मंजिलों और टेरेस पर फंसे लोग भी शामिल थे। कुछ लोगों को सीढ़ियों और विशेष सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला गया। 20 फायर टेंडर मौके पर पहुंचे आग पर काबू पाने के लिए करीब 20 फायर टेंडर और कई अन्य दमकल वाहन तैनात किए गए। राहत की बात यह रही कि अब तक किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं है। आग लगने की वजह की जांच जारी फिलहाल आग लगने का सटीक कारण स्पष्ट नहीं हुआ है। शुरुआती जांच में इलेक्ट्रिकल वायरिंग और उपकरणों से जुड़ी संभावना पर ध्यान दिया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक जांच पूरी होने के बाद ही कारण की पुष्टि होगी। VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल आयकर भवन में लगी आग और धुएं का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। वीडियो में इमारत के आसपास धुआं और मौके पर मौजूद दमकल की गतिविधियां दिखाई दे रही हैं। निष्कर्ष चर्चगेट स्थित मुंबई के आयकर भवन के बेसमेंट में लगी आग ने कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बना दिया। दमकल विभाग की तेजी से कार्रवाई के कारण 28 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया और फिलहाल किसी जनहानि की खबर नहीं है। आग के कारणों और संपत्ति को हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। Source: Mumbai Fire Brigade, Mid-Day, Rediff, Free Press Journal जय राष्ट्र न्यूज़

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RBI की 19 अगस्त को आने वाली MPC मिनट्स पर बाजार की नजर, ब्याज दर और महंगाई के संकेतों का इंतजार

मुंबई: भारतीय शेयर और बॉन्ड बाजार की नजर अब 19 अगस्त 2026 को जारी होने वाली RBI Monetary Policy Committee (MPC) की बैठक की मिनट्स पर है। निवेशक यह समझने की कोशिश करेंगे कि केंद्रीय बैंक आने वाले महीनों में ब्याज दर, महंगाई और मौद्रिक नीति को लेकर किस दिशा में आगे बढ़ सकता है। RBI ने हालिया बैठक में रेपो रेट 5.25% पर रखा RBI की 3 से 5 अगस्त को हुई MPC बैठक में समिति ने रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया था। MPC ने लगातार चौथी बैठक में दरों में बदलाव नहीं किया और अपना रुख Neutral बनाए रखा। अब बाजार की नजर मिनट्स पर इसलिए है क्योंकि इसमें MPC के छह सदस्यों के विचारों और भविष्य की नीति को लेकर उनके आकलन से आगे की दिशा के संकेत मिल सकते हैं। महंगाई पर भी निवेशकों की नजर जुलाई 2026 में भारत की खुदरा महंगाई बढ़कर 4.45% हो गई, जो RBI के 4% मध्यम अवधि के लक्ष्य से ऊपर है। हालांकि यह अभी भी RBI की 2-6% सहनशीलता सीमा के भीतर है। खाद्य महंगाई में बढ़ोतरी ने कुल CPI को ऊपर खींचा है। ऐसे में निवेशक यह देखना चाहेंगे कि MPC सदस्य महंगाई में हालिया तेजी को अस्थायी मानते हैं या आने वाले महीनों के लिए इसे बड़ा जोखिम समझते हैं। अगली ब्याज दर नीति के संकेत मिल सकते हैं हालिया बैठक में RBI ने रेपो रेट में बदलाव नहीं किया था। अब MPC मिनट्स से बाजार को यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि मौजूदा परिस्थितियों में आगे दरों में कटौती, लंबे समय तक यथास्थिति या भविष्य में दरों में बढ़ोतरी की संभावना को लेकर सदस्यों की सोच क्या है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि महंगाई, कच्चे तेल की कीमत और वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे की नीति के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी। रुपये और बॉन्ड बाजार पर भी असर MPC मिनट्स का असर केवल ब्याज दरों पर ही नहीं बल्कि रुपये और सरकारी बॉन्ड यील्ड पर भी पड़ सकता है। भारतीय रुपया हाल में डॉलर के मुकाबले दबाव में रहा है। RBI के हस्तक्षेप ने गिरावट को सीमित किया है, जबकि पश्चिम एशिया में तनाव और ऊंची तेल कीमतें रुपये के लिए चुनौती बनी हुई हैं। वहीं बॉन्ड बाजार में निवेशक यह देख रहे हैं कि RBI की नीति आगे चलकर liquidity और ब्याज दरों को किस तरह प्रभावित कर सकती है। अमेरिका-ईरान तनाव भी अहम फैक्टर बाजार के लिए RBI की नीति के साथ-साथ अमेरिका-ईरान तनाव और कच्चे तेल की कीमतें भी महत्वपूर्ण हैं। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत के आयात बिल और महंगाई दोनों पर दबाव डाल सकती है। इसी वजह से MPC मिनट्स में वैश्विक जोखिमों और महंगाई के बीच RBI के आकलन पर बाजार की खास नजर रहेगी। निवेशकों की नजर इन संकेतों पर 19 अगस्त को जारी होने वाली मिनट्स में बाजार मुख्य रूप से इन बातों पर ध्यान देगा: निष्कर्ष 19 अगस्त की RBI MPC मिनट्स बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत साबित हो सकती हैं। रेपो रेट फिलहाल 5.25% पर है, लेकिन जुलाई की 4.45% महंगाई और पश्चिम एशिया से जुड़े जोखिमों के बीच निवेशक यह जानना चाहते हैं कि RBI आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर कितना सतर्क रहेगा। Source: Reuters, RBI-related reports, NDTV Profit, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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AI और टेक सेक्टर में बड़ा बदलाव, भारतीय IT कंपनियों के AI निवेश और रणनीति पर बाजार की नजर

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते प्रभाव के बीच भारतीय टेक और IT सेक्टर में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। निवेशकों की नजर अब इस बात पर है कि भारतीय कंपनियां AI, डेटा सेंटर, ऑटोमेशन और डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन में कितना निवेश कर रही हैं और इन निवेशों से भविष्य में कमाई कितनी बढ़ सकती है। AI अब IT कंपनियों की रणनीति का अहम हिस्सा भारतीय IT कंपनियां पारंपरिक IT सेवाओं से आगे बढ़कर AI आधारित समाधान, ऑटोमेशन और नए डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोर दे रही हैं। बाजार में यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि AI कंपनियों के काम करने के तरीके और कर्मचारियों की जरूरतों को बदल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में कंपनियों के प्रदर्शन को केवल कर्मचारियों की संख्या या बिल योग्य घंटों से मापना पर्याप्त नहीं होगा। AI से होने वाली आय, AI प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल और recurring revenue जैसे नए संकेतक ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकते हैं। TCS, Infosys और HCLTech पर खास नजर देश की प्रमुख IT कंपनियों TCS, Infosys और HCLTech की AI रणनीति निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण बनी हुई है। AI के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इन कंपनियों में bench strength कम करने और कर्मचारियों को अधिक specialised तथा AI-केंद्रित कामों में लगाने की दिशा में बदलाव देखने को मिल रहा है। इसका संकेत यह है कि IT कंपनियां अब केवल ज्यादा कर्मचारियों के सहारे विकास करने के बजाय AI और automation के जरिए productivity बढ़ाने पर जोर दे रही हैं। AI Data Centre बन रहे हैं अगला बड़ा निवेश क्षेत्र AI के विस्तार के साथ data centre infrastructure की मांग भी बढ़ रही है। भारतीय कंपनियां AI workloads को संभालने के लिए बड़े स्तर पर computing और data-centre क्षमता विकसित करने पर ध्यान दे रही हैं। इसी दिशा में Yotta Data Services ने AI infrastructure expansion को बढ़ावा देने के लिए करीब ₹8,000 करोड़ तक के IPO की योजना बनाई है। कंपनी इस पूंजी का इस्तेमाल AI infrastructure को मजबूत करने के लिए करना चाहती है। वहीं HCLTech की ओर से भी AI data-centre capacity में निवेश की योजनाओं ने इस क्षेत्र को बाजार की निगाह में ला दिया है। भारत में AI Infrastructure की दौड़ तेज भारत में global technology कंपनियां भी AI infrastructure पर बड़ा फोकस कर रही हैं। Microsoft ने हाल ही में भारत में अपना नया data-centre region शुरू किया है, जिससे देश में cloud और AI workloads के लिए infrastructure capacity बढ़ी है। इससे भारतीय कंपनियों के लिए AI applications, cloud services और enterprise solutions के क्षेत्र में नए अवसर बनने की उम्मीद है। निवेशकों के लिए AI Opportunity और Risk दोनों AI सेक्टर में बढ़ते निवेश के बावजूद बाजार के सामने चुनौतियां भी हैं। AI से productivity बढ़ने की संभावना है, लेकिन इससे traditional IT services के पुराने business models पर दबाव भी पड़ सकता है। Reuters की हालिया analysis के मुताबिक, AI के दौर में IT कंपनियों के लिए headcount और billable hours जैसे पुराने valuation metrics की अहमियत कम हो रही है, जबकि AI revenue और software-like recurring revenue जैसे नए मॉडल महत्वपूर्ण बन रहे हैं। भारतीय IT सेक्टर के लिए बड़ा बदलाव AI के कारण भारतीय IT industry अब केवल outsourcing और manpower-based services तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनियां AI platforms, automation, cloud, cybersecurity और enterprise AI solutions की ओर तेजी से बढ़ रही हैं। बाजार की नजर अब इस बात पर होगी कि कौन-सी कंपनी AI को सिर्फ technology investment के रूप में इस्तेमाल करती है और कौन उसे सीधे revenue और profit growth में बदलने में सफल होती है। निष्कर्ष भारत में AI और टेक सेक्टर का अगला दौर investment, infrastructure और innovation पर केंद्रित दिखाई दे रहा है। TCS, Infosys और HCLTech जैसी IT कंपनियों की AI रणनीति से लेकर Yotta जैसी कंपनियों के data-centre expansion तक, AI अब भारतीय technology ecosystem में बड़ा business driver बनता जा रहा है। Source: Reuters, India Today, Moneycontrol, Microsoft, Economic Times जय राष्ट्र न्यूज़

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