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कोलकाता पंडाल हादसे के बाद अमित शाह के भव्य स्वागत पर सवाल, विपक्ष ने BJP को घेरा

कोलकाता, 19 अक्टूबर 2026: कोलकाता के चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में 19 लोगों की मौत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के एयरपोर्ट पर स्वागत को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। विपक्षी नेताओं ने आरोप लगाया कि हादसे के कुछ ही समय बाद ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ अमित शाह का स्वागत किया गया, जो संवेदनहीनता को दर्शाता है। हादसे और स्वागत के बीच करीब 35 मिनट का अंतर मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पंडाल में भगदड़ की घटना शाम करीब 7:40 बजे हुई, जबकि अमित शाह लगभग 8:15 बजे कोलकाता एयरपोर्ट पहुंचे। एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए ढोल-नगाड़ों और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसके वीडियो सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने इस आयोजन के समय और तरीके पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने साधा निशाना कांग्रेस नेताओं ने सोशल मीडिया पर हादसे और एयरपोर्ट स्वागत से जुड़े वीडियो साझा करते हुए BJP नेतृत्व की आलोचना की। विपक्ष का कहना था कि जिस समय शहर में लोग हादसे का शिकार हुए थे, उसी दौरान गृह मंत्री के स्वागत में समारोह आयोजित किया जा रहा था। हालांकि, ये राजनीतिक दलों की ओर से लगाए गए आरोप हैं। TMC ने भी BJP को घेरा तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी भगदड़ की घटना के बाद BJP और आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। पार्टी ने भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा इंतजाम और हादसे के लिए जिम्मेदार परिस्थितियों की जांच की मांग की। घटना के बाद राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। अमित शाह ने अस्पताल पहुंचकर घायलों से मुलाकात की एयरपोर्ट स्वागत को लेकर उठे विवाद के बीच अमित शाह ने अगले दिन अस्पताल पहुंचकर हादसे में घायल लोगों से मुलाकात की और उनकी स्थिति की जानकारी ली। उन्होंने घटना पर दुख जताया और पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की। भगदड़ में 19 लोगों की मौत, जांच जारी चोरबागान दुर्गा पूजा पंडाल में हुई भगदड़ में अब तक 19 लोगों की मौत की खबर है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मामले में सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विशेष जांच दल (SIT) भीड़ प्रबंधन में संभावित लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था और उस घोषणा की भूमिका की जांच कर रहा है, जिससे कथित तौर पर लोगों में घबराहट फैल गई थी। एयरपोर्ट स्वागत बना राजनीतिक विवाद का मुद्दा कोलकाता हादसे के बाद अमित शाह के स्वागत का मामला राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। विपक्ष इसे संवेदनशीलता और जवाबदेही से जोड़कर BJP की आलोचना कर रहा है। वहीं, हादसे से जुड़े तथ्यों, जिम्मेदारियों और प्रशासनिक चूक की जांच के निष्कर्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा। Source – Aaj Tak, Economic Times, Lagatar News, Times of India जय राष्ट्र न्यूज़

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शत्रुघ्न सिन्हा का BJP पर बड़ा आरोप, बोले—“चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का पूरा फायदा उठाया गया”

आसनसोल: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद शत्रुघ्न सिन्हा ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और चुनाव आयोग को लेकर गंभीर राजनीतिक आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि BJP ने चुनाव आयोग का “पूरा फायदा” उठाया है और खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में उसे लाभ मिला। सिन्हा ने कहा कि वह लंबे समय तक BJP में रहे हैं और पार्टी की कार्यशैली से अच्छी तरह परिचित हैं। हालांकि, ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। “BJP चुनाव आयोग का पर्याय बन गई” शत्रुघ्न सिन्हा ने आरोप लगाया कि मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में BJP और चुनाव आयोग के बीच अंतर कम होता दिखाई दे रहा है। उन्होंने कहा कि वह वर्षों तक BJP में रहे हैं और इस दौरान पार्टी के नेताओं तथा उनकी कार्यशैली को करीब से समझा है। ज्ञानेश कुमार का नाम लेकर लगाया आरोप TMC सांसद ने अपने बयान में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का फायदा उठाया है। हालांकि, सिन्हा ने अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र प्रमाण सार्वजनिक नहीं किया। 2024 के बाद के चुनावों की वैधता पर उठाए सवाल सिन्हा ने 2024 के बाद हुए चुनावों की वैधता पर भी सवाल उठाए और उन्हें गैर-कानूनी बताया। यह उनका राजनीतिक दावा है। किसी अदालत द्वारा 2024 के बाद हुए सभी चुनावों को अवैध घोषित किए जाने की जानकारी इस रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं है। राहुल गांधी और ममता बनर्जी के रुख का समर्थन शत्रुघ्न सिन्हा ने चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विपक्ष के अन्य नेताओं की चिंताओं का समर्थन किया। उन्होंने राहुल गांधी और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ओर से चुनावी प्रक्रिया पर उठाए जा रहे सवालों से सहमति जताई। SIR विवाद से बढ़ा राजनीतिक टकराव यह बयान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर जारी राजनीतिक विवाद के बीच आया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि मतदाता सूचियों से बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने की प्रक्रिया से BJP को फायदा हो सकता है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने पक्षपात और हेरफेर के आरोपों से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, मतदाता सूची के पुनरीक्षण का उद्देश्य डुप्लिकेट, मृत और अपात्र मतदाताओं से जुड़ी प्रविष्टियों को दुरुस्त करना है। ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग CJP, कांग्रेस, TMC और अन्य विपक्षी समूह मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 12 अक्टूबर को भी विपक्षी नेताओं ने विरोध प्रदर्शन किया और चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को लेकर सुप्रीम कोर्ट का रुख करने की खबरें सामने आईं। BJP ने आरोपों को खारिज किया BJP ने चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष के आरोपों को राजनीतिक करार दिया है। पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक बयान में कहा था कि BJP की मदद “ज्ञानेश जी नहीं, गणेश जी” कर रहे हैं। उन्होंने विपक्ष पर चुनावी हार के बाद चुनाव आयोग को निशाना बनाने का आरोप लगाया। BJP का दावा—संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र BJP का कहना है कि चुनाव आयोग सहित देश की संवैधानिक संस्थाएं स्वतंत्र रूप से काम करती हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त से संबंधित याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी किए जाने के बाद भी पार्टी ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाएं निर्धारित प्रक्रिया के तहत काम कर रही हैं। CJP आंदोलन से गरमाया विवाद ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP के नेतृत्व में हुए प्रदर्शनों के बाद चुनाव आयोग की निष्पक्षता का मुद्दा राष्ट्रीय राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है। दिल्ली में बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आईं। विपक्ष ने चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठाए, जबकि BJP ने प्रदर्शनों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं शत्रुघ्न सिन्हा का यह दावा कि BJP ने चुनाव आयोग और खासकर ज्ञानेश कुमार का “पूरा फायदा” उठाया, एक राजनीतिक आरोप है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्थापित नहीं होता कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने BJP को अनुचित चुनावी लाभ पहुंचाया है। BJP और चुनाव आयोग पक्षपात के आरोपों से इनकार करते रहे हैं। स्रोत: पत्रिका, नवभारत टाइम्स, रॉयटर्स, NDTV जय राष्ट्र न्यूज़

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बंगाल उपचुनाव में बड़ा ट्विस्ट! नंदीग्राम से रेजीनगर तक बदले समीकरण

पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव से पहले राजनीतिक घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। उम्मीदवारों के नाम वापस लेने, फैसले पलटने और गिरफ्तारियों ने दोनों सीटों के मुकाबले को नया रूप दे दिया है। नंदीग्राम में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे ने कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन दिया है, जबकि रेजीनगर में उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद अपना फैसला बदल दिया। पश्चिम बंगाल की दो चर्चित विधानसभा सीटों नंदीग्राम और रेजीनगर में 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है, जबकि मतगणना 9 अक्टूबर को होगी। मतदान से पहले ही दोनों सीटों पर ऐसे घटनाक्रम सामने आए हैं, जिन्होंने राजनीतिक दलों की चुनावी रणनीति को प्रभावित किया है। नंदीग्राम में उम्मीदवार हटा, कांग्रेस को मिला समर्थन नंदीग्राम में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया जब ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपनी उम्मीदवारी वापस ले ली। इसके बाद ममता बनर्जी ने कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को समर्थन देने की घोषणा की। इस फैसले के कारण नंदीग्राम में चुनावी मुकाबले की संरचना बदल गई और कांग्रेस उम्मीदवार पर राजनीतिक ध्यान बढ़ गया। लेकिन इसके तुरंत बाद एक और घटनाक्रम सामने आया। कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को नंदीग्राम भूमि अधिग्रहण आंदोलन से जुड़े पुराने मामलों के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया। कांग्रेस नेताओं ने गिरफ्तारी के समय को लेकर राजनीतिक दबाव के आरोप लगाए, जबकि राज्य सरकार ने अदालत में मामलों और लंबित वारंट से जुड़ी जानकारी दी। ये आरोप राजनीतिक पक्षों के दावे हैं और इन पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। 22 सितंबर को पश्चिम बंगाल सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट को बताया कि मिलन प्रधान से संबंधित पांच मामलों को वापस लिया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान फिलहाल अन्य मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं। अदालत ने मामले पर आगे सुनवाई के लिए तारीख तय की है। BJP ने हसीरानी रथ को उतारा मैदान में भारतीय जनता पार्टी ने नंदीग्राम उपचुनाव के लिए हसीरानी रथ को उम्मीदवार बनाया है। हसीरानी रथ चंद्रनाथ रथ की मां हैं। वहीं वाम मोर्चे की ओर से CPI उम्मीदवार शांतिगोपाल गिरि मैदान में हैं। इस तरह नंदीग्राम में उम्मीदवारों और दलों के बीच मुकाबले की तस्वीर पिछले कुछ दिनों में लगातार बदली है। नंदीग्राम पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से ही महत्वपूर्ण विधानसभा क्षेत्र रहा है। मौजूदा उपचुनाव मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के यह सीट छोड़कर भवानीपुर सीट बरकरार रखने के बाद आवश्यक हुआ। रेजीनगर में कुछ घंटों में पलटा फैसला नंदीग्राम के बाद रेजीनगर में भी नाटकीय घटनाक्रम देखने को मिला। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल खेमे के उम्मीदवार रबीउल आलम चौधरी ने पहले उपचुनाव से हटने की घोषणा कर दी थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रबीउल ने चुनाव चिह्न और प्रचार से जुड़ी समस्याओं सहित कई कारण बताए थे। हालांकि कुछ ही घंटों बाद उन्होंने अपना निर्णय बदल दिया और कहा कि वे रेजीनगर से चुनाव लड़ेंगे। ममता बनर्जी और पार्टी नेतृत्व से बातचीत के बाद उनका यह फैसला सामने आया। इस यू-टर्न के बाद रेजीनगर में मुकाबले की तस्वीर फिर बदल गई और रबीउल आलम चौधरी चुनावी मैदान में बने हुए हैं। रेजीनगर में उम्मीदवार की गिरफ्तारी से बढ़ी राजनीतिक हलचल रेजीनगर में एक अन्य घटनाक्रम में निर्दलीय उम्मीदवार सैफुल इस्लाम को पुलिस ने गिरफ्तार किया। पुलिस के अनुसार गिरफ्तारी 2021 के विधानसभा चुनाव के दौरान दो समूहों के बीच हुई झड़प से जुड़े एक पुराने मामले में की गई। सैफुल इस्लाम का संबंध हुमायूं कबीर के नेतृत्व वाली आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से बताया गया है। AJUP प्रमुख हुमायूं कबीर ने भी चुनाव से पहले पुलिस कार्रवाई को लेकर आरोप लगाए हैं और निर्वाचन आयोग में शिकायत की है। उन्होंने दावा किया कि उनकी पार्टी से जुड़े लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। ये हुमायूं कबीर के आरोप हैं; पुलिस और राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों की ओर से घटनाओं की अलग-अलग व्याख्याएं सामने आई हैं। रेजीनगर सीट हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। BJP ने यहां शाखरव सरकार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि वाम मोर्चे की ओर से CPI(M) के सैयद असद अली चुनाव मैदान में हैं। नंदीग्राम से रेजीनगर तक क्यों बदले समीकरण? पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम को देखें तो नंदीग्राम में तृणमूल खेमे के उम्मीदवार के हटने और कांग्रेस उम्मीदवार को समर्थन मिलने से पहले से घोषित मुकाबले की संरचना बदली है। दूसरी ओर कांग्रेस उम्मीदवार की गिरफ्तारी और उससे जुड़ी कानूनी प्रक्रिया भी चुनाव प्रचार का प्रमुख मुद्दा बन गई है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी के पहले पीछे हटने और फिर चुनाव लड़ने के फैसले ने वहां उम्मीदवारों की स्थिति को बदल दिया। इसके साथ निर्दलीय उम्मीदवार की गिरफ्तारी तथा हुमायूं कबीर के पुलिस कार्रवाई संबंधी आरोपों ने चुनावी बहस को और व्यापक बनाया है। इन घटनाओं का मतदाताओं पर क्या असर पड़ेगा, इसका स्पष्ट जवाब मतदान और मतगणना के बाद ही मिलेगा। फिलहाल दोनों सीटों पर राजनीतिक दल प्रचार, उम्मीदवारों और कानूनी घटनाक्रम के बीच अपनी-अपनी रणनीति के साथ मैदान में हैं। मुख्य बातें: नंदीग्राम और रेजीनगर में मतदान 6 अक्टूबर 2026 को होगा और नतीजे 9 अक्टूबर को आएंगे। नंदीग्राम में संचिता प्रधान डे की उम्मीदवारी वापस होने के बाद कांग्रेस के मिलन प्रधान को ममता बनर्जी खेमे का समर्थन मिला है। रेजीनगर में रबीउल आलम चौधरी ने चुनाव से हटने की घोषणा के कुछ घंटे बाद चुनाव लड़ने का फैसला बरकरार रखा। दोनों सीटों पर गिरफ्तारियों और पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी जारी हैं।

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