₹634 करोड़ कथित नौकरी घोटाला: सुप्रीम कोर्ट ने K. N. Nehru के खिलाफ FIR और जांच पर रोक से किया इनकार
नई दिल्ली/चेन्नई: तमिलनाडु के पूर्व मंत्री और डीएमके नेता K. N. Nehru को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने सोमवार, 2 नवंबर 2026, को उनकी उस याचिका को खारिज कर दिया जिसमें कथित ₹634 करोड़ के नौकरी के बदले पैसे मामले में मद्रास हाईकोर्ट के FIR दर्ज करने और जांच आगे बढ़ाने वाले आदेश को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप से किया इनकार न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और शील नागू की पीठ ने कहा कि मद्रास हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं बनता। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियां केवल उस मामले के निपटारे के संदर्भ में मानी जाएंगी और आगे जांच या मुकदमे में नेहरू को अपना बचाव रखने का पूरा अधिकार रहेगा। 2,538 पदों की भर्ती से जुड़ा है मामला मामला तमिलनाडु के नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग में 2,538 पदों की भर्ती में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है। आरोप है कि विभिन्न पदों पर नौकरी दिलाने के बदले बड़े पैमाने पर रिश्वत ली गई और इस कथित नेटवर्क का कुल आकार करीब ₹634 करोड़ था। ये आरोप अभी जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। ED ने पुलिस को भेजी थी जानकारी प्रवर्तन निदेशालय ने अक्टूबर 2025 में तमिलनाडु पुलिस को कथित नौकरी घोटाले से संबंधित सामग्री भेजी थी। ईडी ने दावा किया था कि तलाशी और डिजिटल उपकरणों की जांच के दौरान व्हाट्सऐप चैट, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड मिले, जिनसे कथित रिश्वत और पदस्थापन नेटवर्क का संकेत मिलता है। पहले कार्रवाई न होने पर पहुंचा मामला हाईकोर्ट ईडी की ओर से सामग्री भेजे जाने के बाद तत्काल FIR दर्ज नहीं हुई थी। इसके बाद एआईएडीएमके सांसद I. S. Inbadurai समेत याचिकाकर्ताओं ने मद्रास हाईकोर्ट का रुख किया। फरवरी 2026 में हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय यानी DVAC को FIR दर्ज कर मामले की जांच का निर्देश दिया। जून में दर्ज हुई FIR हाईकोर्ट के निर्देश के बाद 5 जून 2026 को DVAC ने मामला दर्ज किया। बाद में K. N. Nehru ने हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करते हुए कहा कि उनके खिलाफ आदेश पारित करने से पहले उन्हें सुनवाई का उचित अवसर नहीं दिया गया। 26 अक्टूबर को हाईकोर्ट ने भी याचिका खारिज की मद्रास हाईकोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को नेहरू की पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी। हाईकोर्ट ने कहा था कि FIR दर्ज करना किसी व्यक्ति को दोषी घोषित करना नहीं है, बल्कि जांच शुरू करने का प्रारंभिक चरण है। अदालत ने यह भी कहा कि आरोपों की सच्चाई जांच के दौरान ही सामने आएगी। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचे K. N. Nehru हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद नेहरू ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। उनकी ओर से दलील दी गई कि जिस मूल मामले में ईडी को सामग्री मिली थी, वह बाद में समाप्त हो चुका था, इसलिए उस दौरान एकत्र किए गए दस्तावेजों के आधार पर नई आपराधिक कार्रवाई आगे बढ़ाना उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह दलील स्वीकार नहीं की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? शीर्ष अदालत ने कहा कि इस स्तर पर हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। साथ ही अदालत ने यह भी सुनिश्चित किया कि हाईकोर्ट की टिप्पणियों को नेहरू के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष न माना जाए और वह जांच या आगे की न्यायिक प्रक्रिया में अपना पक्ष रख सकें। ₹634 करोड़ का आंकड़ा कैसे सामने आया? मामले में आरोप है कि नगर प्रशासन एवं जल आपूर्ति विभाग की भर्तियों में उम्मीदवारों से कथित तौर पर बड़ी रकम ली गई। कुछ रिपोर्टों के अनुसार विभिन्न पदों के लिए ₹25 लाख से ₹35 लाख तक रिश्वत मांगे जाने का आरोप है। जांच एजेंसियों को कथित भुगतान से जुड़े डिजिटल रिकॉर्ड भी मिले हैं। इन दावों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी। ₹10 के नोट से लेनदेन पहचानने का भी दावा जांच एजेंसियों ने दावा किया है कि कथित हवाला लेनदेन में भुगतान की पहचान या पुष्टि के लिए ₹10 के नोटों की तस्वीरों और क्रमांक का इस्तेमाल किया जाता था। यह दावा ईडी द्वारा तमिलनाडु पुलिस को भेजी गई सामग्री का हिस्सा बताया गया है। K. N. Nehru ने आरोपों से किया इनकार K. N. Nehru ने पहले इन आरोपों से इनकार किया है और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। इसलिए खबर में यह स्पष्ट रखना जरूरी है कि ₹634 करोड़ का आंकड़ा और रिश्वत संबंधी आरोप अभी जांच एजेंसियों के दावे हैं, अदालत की ओर से दोष सिद्ध नहीं किया गया है। अब क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद DVAC की जांच आगे जारी रह सकेगी। जांच एजेंसी अब उपलब्ध दस्तावेजों, डिजिटल रिकॉर्ड, कथित वित्तीय लेनदेन और संबंधित व्यक्तियों के बयानों की जांच करेगी। इसके बाद ही तय होगा कि आरोपपत्र दाखिल करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं या नहीं। तमिलनाडु की राजनीति में बढ़ी हलचल मामला राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील बन गया है। डीएमके इसे राजनीतिक कार्रवाई बताती रही है, जबकि विपक्ष इसे कथित भ्रष्टाचार के गंभीर मामले के रूप में उठा रहा है। अब सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद इस मामले में जांच की दिशा और आने वाले कानूनी कदमों पर नजर रहेगी। स्रोत – सुप्रीम कोर्ट कार्यवाही, मद्रास हाईकोर्ट, लाइव लॉ, बार एंड बेंच, इंडिया टुडे, इंडियन एक्सप्रेस जय राष्ट्र न्यूज़

