हिंदू धर्म में रक्षा सूत्र यानी कलावा (Kalava) बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह सिर्फ एक धार्मिक धागा नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसे हाथ में बांधने से न केवल नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी लाता है। परंतु, इसे कब बांधना चाहिए, कितने दिनों तक रखना उचित है और इसे खोलने के क्या नियम हैं? आइए जानते हैं रक्षा सूत्र से जुड़े नियम और इसकी धार्मिक मान्यताएं।
रक्षा सूत्र (कलावा) क्या है?
रक्षा सूत्र जिसे कलावा (Kalava) या मौली भी कहा जाता है जो एक पवित्र धागा होता है जिसे हिंदू धर्म में विशेष रूप से पूजा-पाठ, व्रत, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यों के दौरान बांधा जाता है। इसे मुख्य रूप से लाल, पीले और काले रंग के धागों से बनाया जाता है। यह धागा भगवान की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है और इसे बांधने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और दुष्ट शक्तियों से रक्षा मिलती है।
कलावा बांधने के नियम
रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधने से पहले और बाद में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। सही विधि से इसे धारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
1. किस हाथ में बांधना चाहिए कलावा?
- पुरुषों और अविवाहित महिलाओं को दाएं हाथ में कलावा बांधना चाहिए।
- विवाहित महिलाओं को बाएं हाथ में इसे बांधना चाहिए।
- संन्यासियों और ब्राह्मणों के लिए भी इसे दाएं हाथ में बांधने का नियम है।
2. कौन-से दिन कलावा बांधना शुभ होता है?
- रक्षा सूत्र किसी भी शुभ दिन जैसे रविवार, मंगलवार, गुरुवार या पूर्णिमा को बांधना सबसे उत्तम माना जाता है।
- विशेष रूप से, रक्षा बंधन, एकादशी, गुरु पूर्णिमा, राम नवमी और नवरात्रि के समय इसे बांधना बहुत शुभ होता है।
- किसी भी धार्मिक अनुष्ठान, हवन, या पूजा के समय इसे धारण करना लाभकारी होता है।
रक्षा सूत्र कितने दिनों तक पहनना चाहिए
अक्सर लोग रक्षा सूत्र या कलावा (Kalava) बांधने के बाद इसे लंबे समय तक उतारना भूल जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, समय के साथ कलावे का रंग फीका पड़ने लगता है, जिससे उसकी ऊर्जा भी धीरे-धीरे कम हो जाती है और अंततः समाप्त हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इसे अधिकतम 21 दिनों तक ही पहनना चाहिए, क्योंकि इस अवधि के बाद इसका रंग बदलने लगता है। जिस कलावे का रंग उतर जाए, उसे धारण नहीं करना चाहिए।
कलावा बांधने से मिलने वाले लाभ
रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधने से कई आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ होते हैं।
1. बुरी नजर से बचाव
कलावा बांधने से व्यक्ति पर बुरी नजर नहीं लगती और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है।
2. ग्रह दोषों का निवारण
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षा सूत्र धारण करने से शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं।
3. आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है
इससे व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है।
4. स्वास्थ्य लाभ
कलावा को सही तरीके से बांधने से रक्त संचार बेहतर होता है और यह स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है।
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कलावा बांधने की सही विधि
रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधते समय विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। यह मंत्र इस प्रकार है –
“ॐ भद्रायै च विद्महे, भीमायै च धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्।”
इस मंत्र को बोलते हुए रक्षा सूत्र को बांधना चाहिए। इससे इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है।
रक्षा सूत्र को कब और कैसे खोलना चाहिए?
- यदि रक्षा सूत्र स्वतः ही टूट जाए, तो इसे गंगा जल में प्रवाहित कर देना चाहिए।
- यदि इसे खोलना हो, तो इसे किसी पवित्र स्थान पर रखना चाहिए और बाद में जल में प्रवाहित करना चाहिए।
- इसे कभी भी कूड़े में नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि यह अपवित्र माना जाता है।
नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।
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