होली का अद्भुत रंगारंग उत्सव: मथुरा की इन खास जगहों पर मनाएं रंगों का त्योहार

Celebrate Holi 2025 in Mathura

मथुरा, भारत के सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक होली का आगाज हो चुका है। यह शहर भगवान कृष्ण की जन्मस्थली होने के कारण होली के उत्सव के लिए विश्वभर में मशहूर है। मथुरा की गलियों में होली का जश्न देखने के लिए देश-विदेश से लाखों पर्यटक यहां आते हैं। आइए जानते हैं मथुरा की उन खास जगहों के बारे में, जहां होली का उत्सव अद्भुत और अविस्मरणीय होता है।

 बांके बिहारी मंदिर: होली की रंगत का केंद्र

मथुरा (Mathura) में होली का जश्न बांके बिहारी मंदिर (Banke Bihari Temple) से शुरू होता है। यह मंदिर भगवान कृष्ण के प्रमुख मंदिरों में से एक है और होली के मौके पर यहां का नजारा देखने लायक होता है। मंदिर में होली का उत्सव लगभग एक सप्ताह तक चलता है, जिसमें फूलों की होली, गुलाल की होली और लट्ठमार होली जैसे आयोजन होते हैं।

मंदिर के पुजारी भगवान कृष्ण को रंगों से सजाते हैं और भक्तों के साथ मिलकर होली का जश्न मनाते हैं। यहां की होली की खास बात यह है कि इसमें केवल प्राकृतिक रंगों और गुलाल का ही इस्तेमाल किया जाता है, जो पर्यावरण के लिए भी सुरक्षित होते हैं।

गोकुल की रंगीली होली

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, बालकृष्ण बचपन में अत्यंत चंचल और नटखट थे। गोकुल की गोपियां उनकी शरारतों से खूब आनंदित होती थीं। इसी कारण मथुरा में विशेष रूप से लठमार होली मनाई जाती है, जिसकी परंपरा सदियों से चली आ रही है। इस अनूठे आयोजन में महिलाएं लाठियां लेकर पुरुषों को हल्के-फुल्के अंदाज में हंसी-मजाक के रूप में मारती हैं।

बरसाना की लठमार होली विश्व प्रसिद्ध है, जहां नंदगांव (Nandgaon) के ग्वालों और बरसाना की गोपियों के बीच यह पारंपरिक उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। नंदगांव में ‘फाग आमंत्रण उत्सव’ आयोजित किया जाता है, जिसमें सखियों को होली खेलने का निमंत्रण दिया जाता है। इसी दिन बरसाना के श्रीराधारानी मंदिर में ‘लड्डू मार होली’ का आयोजन भी होता हैं।

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नंदगांव और बरसाना: लट्ठमार होली की धूम

मथुरा (Mathura) से कुछ किलोमीटर दूर स्थित नंदगांव (Nandgaon) और बरसाना की लट्ठमार होली पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। यहां की होली का अपना एक अलग ही इतिहास और परंपरा है। कहा जाता है कि भगवान कृष्ण नंदगांव से बरसाना आकर राधा और उनकी सखियों के साथ होली खेलते थे। इस दौरान महिलाएं पुरुषों को लाठियों से मारती थीं और पुरुष खुद को बचाने की कोशिश करते थे।

आज भी यह परंपरा जीवित है और लट्ठमार होली के दिन नंदगांव (Nandgaon) के पुरुष बरसाना जाते हैं, जहां महिलाएं उन्हें लाठियों से मारती हैं। यह नजारा बेहद ही मनोरंजक और अनोखा होता है। इसके अलावा, यहां की होली में रंग-गुलाल और पारंपरिक गीत-संगीत का भी विशेष महत्व होता है।

मथुरा की गलियों में होली का मजा

मथुरा (Mathura) की गलियों में होली का जश्न देखने के लिए हजारों लोग यहां आते हैं। यहां की गलियों में रंग-गुलाल और पानी के रंगों से होली खेली जाती है। लोग एक-दूसरे को रंग लगाकर और गले मिलकर होली का जश्न मनाते हैं।

मथुरा की गलियों में होली के दिन पारंपरिक गीत-संगीत और नृत्य का भी आयोजन किया जाता है। यहां के लोग होली के दिन घरों में पकवान बनाते हैं और एक-दूसरे के साथ मिलकर खाते हैं।

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