चंद्र महादशा: कैसे प्रभावित करती है आपका जीवन और क्या हैं इससे मुक्ति के उपाय?

Chandra Mahadasha

ज्योतिष शास्त्र में नवग्रहों की दशाओं का जीवन पर गहरा प्रभाव होता है। इनमें चंद्र की महादशा (Chandra Mahadasha) विशेष मानी जाती है क्योंकि यह व्यक्ति के मन, भावनाओं, स्वास्थ्य और पारिवारिक संबंधों को प्रभावित करती है। यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में चंद्रमा शुभ स्थिति में हो, तो यह दशा अत्यंत लाभकारी होती है, लेकिन यदि अशुभ स्थिति में हो तो मानसिक अशांति, भ्रम, अनिद्रा और भावनात्मक असंतुलन जैसे प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं कि चंद्र की महादशा (Chandra Mahadasha)  कितने वर्षों तक चलती है, इसका जीवन पर क्या प्रभाव पड़ता है, और सोम देव को प्रसन्न करने के उपाय क्या हैं।

चंद्र महादशा कितने वर्षों तक चलती है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा की महादशा  (Chandra Mahadasha) लगभग 10 वर्षों तक प्रभावी रहती है। इस अवधि में प्रारंभ में चंद्रमा की ही अंतर्दशा और प्रत्यंतर दशा चलती है। माना जाता है कि चंद्र देव विशेष रूप से वृषभ और कर्क राशि के जातकों के लिए शुभ परिणाम प्रदान करते हैं। यदि कुंडली में चंद्रमा बलवान स्थिति में हो, तो व्यक्ति निर्णय लेने में सक्षम और मानसिक रूप से स्थिर रहता है।

यदि चंद्रमा का संयोग शुभ ग्रहों के साथ हो, तो इसका प्रभाव अत्यंत सकारात्मक होता है। हालांकि, जब चंद्रमा की महादशा  (Chandra Mahadasha) में राहु या केतु की अंतर्दशा आती है, तो फल अनुकूल नहीं माने जाते। इसके पश्चात मंगल और राहु की अंतर्दशा व प्रत्यंतर दशा आती है, जबकि केतु की अंतर्दशा करीब 10 महीनों तक रहती है। इसके बाद मंगल और शुक्र की दशाएं आती हैं।

चंद्र महादशा  (Chandra Mahadasha) में यदि जातक अच्छे और धार्मिक कर्मों का पालन करे, तो उसे शुभ फलों की प्राप्ति होती है। विशेषकर भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना करने से इस अवधि में सुख, शांति और मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।

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कैसे करें सोम देव (चंद्रमा) को प्रसन्न?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्र देव की कृपा प्राप्त करने के लिए भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना अत्यंत प्रभावी मानी जाती है। विशेष रूप से सोमवार और शुक्रवार के दिन, प्रातः काल स्नान करने के बाद शिवलिंग पर गाय के कच्चे दूध से अभिषेक करना अत्यंत शुभ फलदायी होता है। चाहें तो इस दूध में थोड़ी मात्रा में गंगाजल मिलाकर भी अभिषेक किया जा सकता है। इसके साथ ही, सफेद वस्त्र, चावल, दूध, दही या चीनी जैसी सफेद वस्तुओं का दान करने से भी चंद्र देव प्रसन्न होते हैं और जीवन में शांति, मानसिक संतुलन एवं सौम्यता का संचार होता है। शिव चालीसा और शिव आरती का पाठ करें चंद्रमा भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान हैं। अतः शिव की आराधना चंद्र दोष के निवारण में अत्यंत प्रभावी मानी जाती है।

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