महाभारत के युद्ध में गूंजे थे दिव्य अस्त्रों के नाम, जानिए उनकी अद्भुत शक्तियां

Mahabharata war weapons

महाभारत (Mahabharata) केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं है, बल्कि यह भारतीय इतिहास का एक ऐसा महाकाव्य है जिसमें धर्म, नीति, राजनीति, रणनीति, युद्ध कौशल और आध्यात्मिकता का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। खास बात यह है कि कुरुक्षेत्र के मैदान में लड़े गए इस महायुद्ध में केवल तलवारें और धनुष-बाण ही नहीं, बल्कि अत्यंत शक्तिशाली और दिव्य अस्त्र-शस्त्रों का भी प्रयोग हुआ था, जिनकी शक्ति आज के आधुनिक हथियारों से भी कहीं अधिक थी। आइए जानते हैं उन प्रमुख अस्त्र-शस्त्रों के बारे में, जो महाभारत के युद्ध को निर्णायक बनाने में सहायक बने।

1. ब्रह्मास्त्र

ब्रह्मा जी द्वारा प्रदान किया गया यह अस्त्र सबसे शक्तिशाली माना जाता था। इसका प्रयोग अर्जुन, अश्वत्थामा और कर्ण जैसे योद्धाओं के पास था। कहा जाता है कि यह अस्त्र जहाँ गिरता, वहाँ कई मीलों तक जीवन समाप्त हो जाता और भूमि बंजर हो जाती। इस अस्त्र का प्रयोग अंतिम उपाय के रूप में ही किया जाता था क्योंकि इसका प्रभाव अत्यंत विनाशकारी था।

2. पाशुपतास्त्र

भगवान शिव द्वारा प्रदान किया गया यह अस्त्र केवल परम भक्तों को ही प्राप्त होता था। अर्जुन को यह अस्त्र भगवान शिव ने खुद एक परीक्षा के बाद दिया था। इसकी विशेषता यह थी कि यह शत्रु का संपूर्ण नाश कर देता था और इसे मन, वाणी, दृष्टि या धनुष से चलाया जा सकता था।

3. नारायणास्त्र

नारायणास्त्र एक ऐसा दिव्य शस्त्र था जिससे पूरे ब्रह्मांड में भय व्याप्त हो जाता था। यह भगवान विष्णु का अस्त्र माना जाता है। महाभारत के युद्ध में जब अश्वत्थामा ने इसे पांडवों की सेना पर प्रयोग किया, तो देखते ही देखते हजारों सैनिक मारे गए। इसकी शक्ति इतनी प्रचंड थी कि इसका सामना कोई भी अस्त्र नहीं कर सकता था। इसे शांत करने का केवल एक ही उपाय था—पूरा समर्पण भाव और शांति का मार्ग अपनाना।

4. वरुणास्त्र

इसका प्रयोग जल उत्पन्न करने के लिए किया जाता था। यह विरोधी के चारों ओर जल का घेरा बना देता था जिससे उसकी गति बाधित होती थी। युद्ध के दौरान इसे कई बार अग्नि को शांत करने के लिए भी प्रयोग किया गया।

5. सुदर्शन चक्र

सुदर्शन चक्र को भगवान विष्णु का प्रमुख प्रतीक माना जाता है और यह श्रीकृष्ण के पास था। महाभारत (Mahabharata) युद्ध में कौरव और पांडव केवल बाहरी पात्र थे, जबकि असल में पापियों को उनके पापों की सजा श्रीकृष्ण अपने सुदर्शन चक्र से देते थे। यह तथ्य बर्बरीक के कटे सिर ने भी सबके सामने रखा था। सुदर्शन चक्र को न्याय और धर्म की अद्भुत शक्ति का प्रतीक माना जाता है।

6. वज्रास्त्र

इंद्रदेव का यह अस्त्र भीषण गर्जना और प्रकाश के साथ वार करता था। इसकी टक्कर का कोई अस्त्र नहीं था, और यह भारी विनाश करने की क्षमता रखता था।

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7. वसावी शक्ति

इंद्र देव के पास वसावी शक्ति नामक एक बेहद प्रभावशाली और एकबारगी प्रयोग होने वाला अस्त्र था। यह अस्त्र इंद्र ने कर्ण को दिया था। कर्ण ने इसे अर्जुन को हराने के लिए रखा था, लेकिन परिस्थितियों के कारण उसे इसका इस्तेमाल भीम के पुत्र घटोत्कच पर करना पड़ा। ऐसा माना जाता है कि यदि यह अमोघ शक्ति अर्जुन पर प्रयोग किया जाता, तो अर्जुन का बचना लगभग असंभव होता।

8. गांडीव धनुष

यह अर्जुन का धनुष था जो अग्निदेव ने उन्हें खांडव वन दहन के समय दिया था। इसकी विशेषता यह थी कि इससे निकले प्रत्येक बाण अपने लक्ष्य को भेदते थे। यह धनुष दिव्य था और इससे लगातार बिना थके तीर चलाए जा सकते थे।

9. ब्रह्मास्त्र

ब्रह्मास्त्र एक अत्यंत शक्तिशाली दिव्य अस्त्र था, जिसे महाभारत (Mahabharata) के महान योद्धा जैसे अर्जुन, कर्ण और श्रीकृष्ण ने चलाने का ज्ञान प्राप्त था। युद्ध में अश्वत्थामा ने इसका उपयोग किया, जिससे गर्भ में रहे हुए शिशु तक की मृत्यु हो गई। हालांकि, अश्वत्थामा के पास इसे वापस लेने का तरीका नहीं था। शास्त्रों के अनुसार, ब्रह्मास्त्र के प्रभाव को खत्म करने के लिए एक और ब्रह्मास्त्र का प्रहार करना आवश्यक होता है।

नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें।

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