Why +91, country dialing codes: कभी सोचा है, आखिर भारतीय फ़ोन नंबरों के आगे +91 ही क्यों लगता है, कोई और नंबर क्यों नहीं?

india country code +91 reason

चैट्जीपीटी और एआई के इस युग में हम में से कोई शायद ही ऐसा हो, जो मोबाइल न यूज़ करता हो। भारत में तकरीबन 90% परिवारों के पास अपना मोबाइल है। सभी का अपना मोबाइल नंबर भी है। सभी के मोबाइल नंबर 10 अंकों के होते हैं। सभी भारतीय नम्बरों के आगे +91 लगता है। विशेषकर तब, जब हम विदेशों में कॉल करने या व्हाट्सएप जैसे ऐप्स पर नंबर सेव करने की सोचते हैं। अपने देखा भी ही होगा। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि आखिर +91 ही क्यों? हम यही कोड क्यों लगाते (Why +91, country dialing codes) हैं? कोई और भी तो कोड लगा सकते हैं। और बड़ा सवाल यह कि आखिर ये कोड क्या है और क्यों लगता है? तो बता दें कि +91 भारत का कंट्री कोड है। यह एक तरह का डिजिटल पता है, यह दुनिया को बताता है कि यह फोन नंबर भारत से है। हर देश का एक खास कोड है मसलन, अमेरिका का +1,जापान का +81 और ब्रिटेन का +44, ठीक वैसे ही भारत का है +91

 यह फैसला इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) ने (Why +91, country dialing codes) किया

ऐसे में जब हम अपने नंबर के आगे +91 लगाते हैं तो पहली नजर में यह साफ हो जाता है कि नंबर भारत में रजिस्टर्ड है। यह कोड इंटरनेशनल डायलिंग सिस्टम का हिस्सा है, जो कि दुनिया भर में कॉलिंग को आसान बनाता है। अब बड़ा सवाल वही कि भारत के लिए +91 ही (Why +91, country dialing codes) क्यों? आखिर किसने चुना इस नंबर को? तो आपको बता दें कि यह फैसला इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन (आईटीयू) ने किया। दरअसल, यह एक ग्लोबल संगठन है। यह टेलीकॉम के नियमों को बनाता है। सूचना क्रांति के मद्देनजर आईटीयू ने साल 1960 के दशक में हर देश के लिए यूनिक कंट्री कोड तय करना शुरू किया था, ताकि पूरी दुनिया में कॉलिंग का एक स्टैंडर्ड सिस्टम हो। भारत को +91 कोड साल 1980 के दशक में मिला था। यह कोड आईटीयू की एक कमिटी ने तय किया, जिसमें भारत के डिपार्टमेंट ऑफ टेलीकम्युनिकेशंस (डीओटी)ने भी हिस्सा लिया। भारत ने आईटीयू के साथ मिलकर यह सुनिश्चित किया कि +91 कोड हमारे टेलीकॉम सिस्टम के लिए सही हो। +91 का इस्तेमाल 1990 के दशक से ज्‍यादा आम हुआ, जब भारत में मोबाइल फोन और इंटरनेशनल कॉलिंग का चलन बढ़ा। तब से यह कोड मोबाइल और लैंडलाइन दोनों के लिए इस्तेमाल होता आ रहा है। 

इसे भी पढ़ें:- राहुल गांधी ने क्यों ट्वीट किया ‘Not Found Suitable’ और BJP पर क्या लगाया आरोप?

आईटीयू ने दुनिया को 9 ज़ोन में बांटा है और हर जोन के कोड्स एक खास नंबर से शुरू (Why +91, country dialing codes) होते हैं

गौर करनेवाली बात यह कि आईटीयू ने दुनिया को 9 ज़ोन में बांटा है और हर जोन के कोड्स एक खास नंबर से शुरू होते हैं। एशिया के लिए ज्‍यादातर कोड्स +9 से ही शुरू होते हैं। भारत को +91 मिला (Why +91, country dialing codes), क्योंकि यह उस वक्त उपलब्ध था। और तो और एशिया जोन में फिट भी बैठता था। वैसे भी यदि अपने इर्द-गिर्द देशों के कोड्स देखें पाएंगे कि पाकिस्तान का +92 और श्रीलंका का +94, नेपाल का +977 और म्यांमार का +95 है। यह सब एक क्रम में बांटा गया है। कोड चुनते वक्त देश की आबादी, टेलीकॉम नेटवर्क की जरूरतें और पहले से बंटे कोड्स का भी ध्यान रखा जाता है। भारत जैसे बड़े देश को छोटा और आसान कोड चाहिए था ताकि कॉल में दिक्कत न हो। इसलिए आईटीयू ने हर देश को एक यूनिक कोड दिया ताकि कॉल्स सही जगह लगे। जब आप +91 डायल करते हैं तो, टेलीकॉम नेटवर्क को पता चलता है कि कॉल को भारत के नेटवर्क में भेजना है। वहां से नंबर के अगले हिस्से जैसे मोबाइल कोड या एरिया कोड के आधार पर कॉल सही फोन तक पहुंचती है। बता दें कि यह कोड तब काम आता है जब कोई विदेश से भारत में कॉल कर रहा हो या फिर भारत में बैठा कोई शख्स व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे ऐप्स पर नंबर सेव कर रहे हो, तो उस समय इंटरनेशनल फॉर्मेट मांगते हैं। यदि आप किसी ऑनलाइन फॉर्म में नंबर डाल रहे हो, जैसे गूगल,अमेजन या कोई इंटरनेशनल वेबसाइट। 

Latest News in Hindi Today Hindi news Why +91, country dialing codes

#IndiaCountryCode #Plus91 #IndianPhoneNumbers #DialingCodeIndia #WhyPlus91

Translate »