भारत के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने सिंगापुर में आयोजित प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग में ऑपरेशन सिंदूर को लेकर अहम बयान दिया। उन्होंने प्रतिष्ठित शांगरी-ला डायलॉग के मंच से कहा है कि पाकिस्तान को 40 देशों के सामने बेनकाब किया गयाऔर बताया कि कैसे भारत ने सैन्य और रणनीतिक कौशल का प्रदर्शन करते हुए एक बड़ी उपलब्धि हासिल की। जनरल चौहान ने कहा कि इस ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) के दौरान युद्ध केवल सैन्य मोर्चे तक सीमित नहीं था, बल्कि उसमें राजनीतिक संकेत भी जुड़े थे। यह युद्ध की आधुनिक शैली को दर्शाता है, जिसमें डिप्लोमैसी और सैन्य कार्रवाई साथ-साथ चलती है।
हवाई हमले में मिली सफलता
पुणे विश्वविद्यालय में भविष्य के युद्ध और युद्धकला विषय पर बात करते हुए जनरल चौहान ने ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) को हवाई युद्ध की दृष्टि से एक ऐतिहासिक कदम बताया। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन सिंदूर के जरिए भारत ने विरोधी की हवाई रक्षा प्रणाली को भेदते हुए गहराई तक सफलतापूर्वक हमला किया। यह इस बात का संकेत है कि भारतीय वायुसेना सटीकता और आक्रामक रणनीति के साथ कार्य करने में सक्षम है।
पाकिस्तान की सीमित क्षमताएं और भारत की तैयारी
जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने पाकिस्तान की ड्रोन क्षमताओं को भारत के मुकाबले कमजोर बताया और कहा कि भारतीय सेना पूरी तरह से पेशेवर है जो केवल नुकसान पर नहीं, बल्कि परिणामों पर ध्यान केंद्रित करती है। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान भारत के साथ 48 घंटे की लड़ाई की योजना बना रहा था, लेकिन भारत ने उसे महज 8 घंटे में ध्वस्त कर दिया। भारत की इस रणनीतिक प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया कि भारत अब पारंपरिक युद्धों की बजाय त्वरित, निर्णायक और तकनीकी रूप से उन्नत सैन्य कार्रवाइयों में विश्वास रखता है।
परमाणु धमकी नहीं सहन करेगा भारत
सीडीएस (CDS) ने पाकिस्तान को साफ चेतावनी दी है कि भारत किसी भी प्रकार की परमाणु धमकी को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि पहलगाम में जो कुछ हुआ वह अमानवीय था और इसकी प्रतिक्रिया उसी स्तर पर दी गई। यह संदेश अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत के मजबूत रुख को दर्शाता है।
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लंबे युद्ध से परहेज, लेकिन सतर्कता आवश्यक
जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) ने कहा कि भारत लंबे समय तक चलने वाले संघर्ष में नहीं पड़ना चाहता। उन्होंने ऑपरेशन प्रकरम और बालाकोट हमले के बाद की स्थितियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे संघर्षों में भारी संसाधनों की आवश्यकता होती है और यह आर्थिक, सामाजिक और रणनीतिक रूप से नुकसानदेह हो सकते हैं। ऑपरेशन सिंदूर की खास बात यह थी कि यह एक सीमित लेकिन प्रभावी कार्रवाई थी, जिसे समय रहते रोक दिया गया, ताकि अनावश्यक युद्ध को टाला जा सके।
ऑपरेशन सिंदूर: जारी है संघर्ष
सीडीएस (CDS) ने यह भी स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर अभी खत्म नहीं हुआ है। यह एक सतत प्रक्रिया है जिसमें भारत को अपनी चौकसी बनाए रखनी होगी। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने महसूस किया कि वह लगातार अपनी स्थिति खो रहा है और अगर यह स्थिति अधिक समय तक बनी रहती, तो उसकी स्थिति और खराब हो सकती थी। इसी डर के चलते उसने बातचीत का विकल्प चुना।
ऑपरेशन सिंदूर (Operation Sindoor) भारत की नई सैन्य सोच और रणनीतिक दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की राजनीतिक, कूटनीतिक और रणनीतिक दृढ़ता का प्रतीक है। जनरल अनिल चौहान के वक्तव्य ने यह स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब केवल प्रतिक्रिया देने वाला देश नहीं रहा, बल्कि आवश्यकता पड़ने पर पहल करने से भी पीछे नहीं हटेगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर बेनकाब किया, बल्कि भारत की सैन्य नीति और आत्मनिर्भरता को भी मजबूती से प्रस्तुत किया।
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