Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire: महाकुंभ भगदड़ पर चौतरफा घिरी योगी सरकार, हाईकोर्ट ने दागे बड़े सवाल

Kumbh stampede 2025

उत्तर प्रदेश स्थित प्रयागराज में 114 साल बाद लगे महाकुंभ का आयोजन और समापन दोनों बड़े धूमधाम से हुआ। लेकिन महाकुंभ के इस आयोजन में हुई भगदड़ में कई लोगों के जानमाल का नुकसान हुआ था। सूबे की योगी सरकार के मुताबिक इस भगदड़ में 37 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। लेकिन एक मीडिया ने अपनी जाँच पड़ताल में 82 लोगों की मौत का दावा किया। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि महाकुंभ भगदड़ में 37 लोग मरे थे या फिर 82? दरअसल, योगी सरकार की ओर से बताया गया था कि भगदड़ में कुल 37 श्रद्धालुओं की मौत हुई है, लेकिन मीडिया ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि कम से कम 82 लोगों मारे गए थे। खैर, अब इस मामले पर इलाहाबाद हाईकोर्ट भी योगी सरकार से तीखे सवाल (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) पूछ चुका। यही नहीं, समाजवादी पार्टी के मुखिया और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी इस मामले पर सवाल उठा चुके हैं। 

प्रशासन ने भगदड़ में जान गंवाने वाले परिजनों को मुआवजा देने का किया (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था वादा 

ध्यान देने वाली महत्वपूर्ण बात यह कि इस मामले में पत्रकार और विपक्ष ही नहीं बल्कि अदालत भी योगी सरकार को फटकार लगा चुकी हैं। अभी दो दिन पहले ही इसी मामले पर सुनवाई के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार की काफी क्लास लगाई थी। प्राप्त जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार और प्रशासन ने भगदड़ में जान गंवाने वाले परिजनों को मुआवजा देने का वादा किया (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था। यह तो ठीक, लेकिन इस इल्जाम यह कि अब तक उन्हें मुआवजा नहीं मिल सका है। मामला जब इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष पहुंचा, तो उन्होंने सरकार के ढुलमुल रवैये को ठीक न मानते हुए इसे नागरिकों की तकलीफ के प्रति उदासीन रुख बताया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज सौमित्र दयाल सिंह और जस्टिस संदीप जैन की बेंच ने इस मामले में सख्त टिप्पणी की। दरअसल, उदय प्रताप सिंह नामक एक याचिकाकर्ता द्वारा याचिका में कहा गया था, याचिककर्ता की पत्नी सुनैना देवी की कुंभ भगदड़ में गंभीर चोट लगने से मौत हो गई थी। सुनैना देवी की तब उम्र 52 साल से कुछ ज्यादा थी। 

28 और 29 जनवरी की दरमियानी रात मची भगदड़ में सरकार ने 30 लोगों की मौत (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) का दावा किया था। 

UP High Court on Kumbh

मामल संज्ञान में आते ही अदालत ने कहा, जब सरकार ने मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की बात कही थी, तो फिर सरकार को इसे पूरा करना था। कोर्ट ने साफ कहा था कि ऐसे मामलों में नागरिकों की कोई गलती नहीं होती। गौरतलब हो कि 28 और 29 जनवरी की दरमियानी रात प्रयागराज में भगदड़ हुआ था। इसमें तब सरकार ने माना था कि 30 लोगों की मौत हुई (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) है। जिसे बाद में सरकार 37 तक मानने पर सहमत हुई थी। सरकार ने मृतकों के परिवारों को 25-25 लाख रुपये देने का वादा किया था पर ये अब पीड़ित परिवारों को नहीं दिया गया है। कोर्ट ने मामले में चिकित्सा संस्थानों, जिला प्रशासन और अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे एक ऐसा हलफनामा दाखिल करें, जिसमें 28 जनवरी को मरने वाले सभी मृतकों और मरीजों का ब्यौरा शामिल हो। यही नहीं, अदालत ने उन सभी डॉक्टरों का की जानकारी भी मांगी है, जिन्होंने घायलों का इलाज किया।  और इलाज के बाद जो मृत घोषित किए गए। कहने की जरूरत नहीं, अगर इस तरह से अदालत के हस्तक्षेप के बाद डॉक्टर और प्रशासन की और तफसील से जानकारी सामने आती है तो मृतकों और घायलों के बारे में और अधिक जानकारी सामने आएगी। 

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अदालत ने इसे सरकारी संस्थानों की एक गंभीर चूक माना (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था

इस मामले में याचिकाकर्ता का कहना था कि उनकी पत्नी के शव का न तो पोस्टमार्टम हुआ और न ही उनके परिवार को ये जानकारी दी गई कि महिला कब, किस हालत में अस्पताल ले जाई गईं। हालाँकि अदालत ने इसे सरकारी संस्थानों की एक गंभीर चूक माना (Kumbh Stampede: Yogi Govt Under Fire) था। कोर्ट में घिरा देख अखिलेश यादव ने बीजेपी सरकार पर निशाना साधा है। सपा मुखियां न कहा कि जो लोग किसी की मृत्यु के लिए झूठ बोल सकते हैं…ऐसे भाजपाइयों पर विश्वास भी विश्वास नहीं करेगा। महत्वपूर्ण सवाल उठाते हुए अखिलेश ने यह सवाल ये भी किया है कि अगर किसी को मुआवजा दिया भी गया है, तो उसे नकद में क्यों दिया गया, नकदी का आदेश कहां से आया? इस विवाद के बीच ध्यान भी देना चाहिए कि इलाहाबाद हाईकोर्ट भी कुंभ भगदड़ पर काफी तीखे सवाल योगी सरकार से पूछ चुका है। 

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