देश की राजधानी दिल्ली इस समय एक गंभीर जल संकट (Water crisis in Delhi) से जूझ रही है। गर्मी के चरम पर पहुंचते ही राजधानी में पानी की भारी किल्लत ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। इस संकट को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) की दिल्ली सरकार पर कड़ा हमला बोला है। आप नेता सौरभ भारद्वाज (AAP Politician Saurabh Bharadwaj) ने बीजेपी पर आरोप लगाते हुए कहा कि “चार इंजन वाली सरकार” के बावजूद दिल्ली के नागरिक बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बीजेपी सरकार (BJP Government) बने चार महीने हो चुके हैं, लेकिन जनता की सबसे बुनियादी ज़रूरत यानी पीने के पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने में यह सरकार पूरी तरह नाकाम रही है।
राजधानी के कई इलाकों में जनता परेशान
आप नेता सौरभ भारद्वाज (AAP Politician Saurabh Bharadwaj) ने बताया कि अंबेडकर नगर, देवली, तुगलकाबाद, छतरपुर, मेहरौली, पालम, हरिनगर, रजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश और जनकपुरी जैसे कई इलाकों में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। खास बात यह है कि ग्रेटर कैलाश जैसे क्षेत्रों में पहले कभी पानी की कमी नहीं थी, लेकिन अब वहां भी टंकियों में पानी नहीं आ रहा है। इस संकट के चलते जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं। लोग सड़कों पर उतर आए हैं, पानी की टंकी और मटके लेकर विरोध कर रहे हैं, और दिल्ली जल बोर्ड (DJB) के दफ्तरों का घेराव कर रहे हैं। बुधवार को दक्षिणी दिल्ली में महिलाओं ने मटके फोड़कर अपना गुस्सा जताया और “भाजपा हाय-हाय” के नारे लगाए।
NGT की फटकार ने खोली पोल

नेशनल ग्रीन ट्राइब्यूनल (NGT) ने भी दिल्ली जल बोर्ड को गंभीर फटकार लगाई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक NGT ने राजधानी में दूषित पानी की आपूर्ति को लेकर सख्त टिप्पणी करते हुए इसे नागरिकों के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक बताया। विशेषज्ञों का मानना है कि पीने के पानी में पाए जाने वाले प्रदूषक तत्व, जैसे की ई. कोलाई, लेड और आर्सेनिक, गंभीर बीमारियों को जन्म दे सकते हैं। वहीँ ICMR की रिपोर्ट के अनुसार गर्मियों में दूषित जल के सेवन से होने वाले संक्रमणों, जैसे कि डायरिया, टायफाइड और हेपेटाइटिस-A, के मामलों में 25–30% की वृद्धि दर्ज की जाती है।
जल संकट के पीछे क्या कारण है?
जानकारों के अनुसार दिल्ली की जल समस्या (Water crisis in Delhi) के पीछे कई वजहें हैं:-
- यमुना का जल स्तर गिरना: हरियाणा से आने वाले यमुना के जल में कमी एक बड़ा कारण है।
- जल संरक्षण में लापरवाही: वर्षाजल संचयन की योजनाएं अधूरी हैं या निष्क्रिय हो चुकी हैं।
- पुरानी पाइपलाइन प्रणाली: जगह-जगह से लीक होती पाइपलाइनों के कारण बड़ी मात्रा में पानी बर्बाद हो रहा है।
- बढ़ती आबादी और अव्यवस्थित शहरीकरण: दिल्ली की बढ़ती जनसंख्या और अवैध बस्तियों ने जल मांग में तेज़ी से इजाफा किया है।
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क्या कर रही है सरकार?
दिल्ली में बीजेपी (BJP) की तरफ से कोई ठोस योजना सामने नहीं आई है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (CM Rekha Gupta) ने अब तक स्थिति पर कोई विस्तृत बयान नहीं दिया है, जिससे जनता में नाराजगी और बढ़ गई है। हालांकि सरकार का कहना है कि जल बोर्ड की कार्यप्रणाली में सुधार किया जा रहा है और जल्द ही अतिरिक्त टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी। लेकिन ये प्रयास तब तक अधूरे लगते हैं जब तक ज़मीन पर बदलाव दिखाई न दे।
दिल्ली का जल संकट (Water crisis in Delhi) एक चेतावनी है कि यदि अब भी सरकारें सचेत नहीं हुईं तो भविष्य में ये परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। आम आदमी पार्टी की तरफ से उठाए गए सवाल जायज हैं और यह सरकार की जवाबदेही तय करने का समय है। इस पूरे मसले में यह स्पष्ट होता जा रहा है कि पानी सिर्फ एक संसाधन नहीं, बल्कि राजनीति का भी केंद्र बन चुका है। लेकिन इस राजनीति के बीच आम दिल्लीवासी की प्यास कौन बुझाएगा, यह सबसे बड़ा सवाल है।
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