महाराष्ट्र के स्कूलों में हिंदी अनिवार्यता को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच जारी घमासान है कि थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। इस बीच मुंबई के मीरा रोड में हुआ भाषा विवाद भी अब तूल पकड़ता जा रहा है। दरअसल, मनसे के कार्यकर्ताओं ने मीरा रोड स्थित जोधपुर स्वीट शॉप के 48 वर्षीय मालिक बाबूलाल खिमजी चौधरी को मराठी भाषा न आने के चलते मारापीटा (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) था। इस घटना के विरोध में गुरुवार को मीरा भाईंदर के व्यापारियों ने दुकानें बंद रखी थी। पीड़ित बाबूभाई खिमाजी चौधरी ने मीरा भाईंदर वसई विरार के पुलिस को एक ज्ञापन भी सौंपा जिसमें मारपीट करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मनसे कार्यकर्ताओं की पिटाई के बाद बाबूलाल चौधरी ने कानूनी तरीके से लड़ने का फैसला किया है ताकि इस तरह की हरकत किसी और के साथ न हो। हालांकि पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हुई है
दर्ज एफआईआर के मुताबिक मनसे के कार्यकर्ता पानी की बोतलें खरीदना चाहते थे, लेकिन जब उन्होंने उनसे हिंदी में बात की, तो उन्होंने मराठी में बात करने की मांग की। मैंने कहा कि “हम सभी भाषाएं बोलते हैं, इसलिए उन्होंने मुझे पीटने की धमकी दी। इसके वह आगे खड़े चौधरी के पास पहुंच गए। इसके बाद उन्होंने पूछा कि महाराष्ट्र में कौन सी भाषा बोली जाती (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है? तो चौधरी ने कहा कि “सभी भाषाएं बोली जाती हैं।” इसके बाद चौधरी को मनसे कार्यकर्ताओं ने पीटना शुरू कर दिया। इस मार-पिटाई का वीडियो ऑनलाइन वायरल हुआ है। खैर, इस बीच सीसीटीवी फुटेज के जरिए इस थप्पड़ कांड के तीन आरोपियों की पहचान हुई है। जिनके नाम क्रमशा: प्रमोद निलेकर, अक्षय सालवी और करन कंदानगिरे हैं। मजे की बात यह कि 72 घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस ने आरोपियों गिरफ्तार नहीं किया है। मनसे का आरोप है कि बेवजह इस घटना को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है।
मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) करें

इस मुद्दे पर एकनाथ शिंदे की पार्टी के नेता संजय निरुपम ने मुख्यमंत्री फडणवीस से कार्रवाई की मांग की है। निरुपम ने कहा है कि “कार्रवाई नहीं हुई तो गैर मराठी भारी खतरे में आ जाएंगे।” संजय निरुपम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा था कि “महाराष्ट्र में रहनेवाले सभी लोगों को मराठी में संवाद करना चाहिए। यह आग्रह उचित है, परंतु इसके लिए गुंडागर्दी और मारपीट सर्वथा अनुचित (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) है। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री देवेंद्र फडणवीस ऐसी घटनाओं का संज्ञान लें और सख्त कार्रवाई करें। वरना बीएमसी चुनाव तक मुंबई और आसपास के इलाकों में रहने वाले गरीब और कमजोर गैर मराठी भाषी लोगों की सुरक्षा लगातार खतरे में रहेगी। कृपया इसकी गंभीरता को समझें और कड़ा एक्शन लेने का आदेश जारी करें।”
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क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है?
हालाँकि यह पहली बार नहीं है जब मनसे के कार्यकर्ताओं ने गैर-मराठियों को मारा न (Sanjay Nirupam Demands Action in Meera Road Slap Case) हो। ऐसे में बड़ा सवाल यह कि क्या देश के नागरिक को इस तरह भाषा न आने के नाम पर सरे आम मारा पीटा जा सकता है? देश में कानून व्यवस्था है भी कि नहीं? एक तरफ बीजेपी कहती है, बाटोगे तो काटोगे तो वहीं दूसरी तरफ भाषा और प्रांत के नाम पर देश के नागरिकों को बेवजह पीटा जा रहा है। बड़ा सवाल यह कि प्रसाशन कब तक इस तरह की घटनाओं पर आँख मूंदे बैठा रहेगा? कुल-मिलाकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है बीएमसी चुनाव और मराठी वोटो के छिटकने के डर से प्रशासन कड़ी कार्रवाई करने से बच रहा है।
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