विटामिन डी डेफिशिएंसी: इस कमी से बढ़ सकता है इन 5 बीमारियों का जोखिम

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विटामिन डी (Vitamin D) एक ऐसा जरूरी न्यूट्रिएंट है, जिसका इस्तेमाल हमारा शरीर कैल्शियम और फोस्फरस को एब्जॉर्ब करने के लिए करता है। अगर बात की जाए कैल्शियम और फोस्फरस की, तो यह हमारी हड्डियों और दांतों को बनाने और मजबूत बनाये रखने में मददगार हैं। इसके साथ ही इनके कई अन्य लाभ भी हैं। विटामिन डी (Vitamin D) का मुख्य स्त्रोत सूरज की रोशनी को माना गया है है। हालांकि, कुछ फूड्स से भी इसे प्राप्त किया जा सकता है। शरीर में विटामिन डी की कमी यानी डेफिशिएंसी होने से कई समस्याएं होने का रिस्क रहता है। आइए जानें विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) के बारे में।

विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency)

क्लेवलैंडक्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार विटामिन डी (Vitamin D) को सूरज की रोशनी, कई फूड्स और सप्लीमेंट्स से प्राप्त किया जा सकता है। इसके बाद भी विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) दुनिया भर में सामान्य समस्याओं में से सबसे सामान्य है।  विटामिन डी डेफिशिएंसी से होने वाली प्रॉब्लम्स (Problems caused by vitamin D deficiency) इस प्रकार हैं 

रिकेट्स

रिकेट्स बच्चों में होने वाली समस्या है, जिसमें उनकी हड्डियां कमजोर और सॉफ्ट हो जाती है। इससे हड्डियों का आकर अलग हो जाता है। ऐसा माना गया है कि इसका मुख्य कारण होता है विटामिन डी (Vitamin D) की कमी। लोग इस समस्या को गरीबी और कुपोषण से जोड़ कर देखते हैं। वयस्कों में इस स्थिति को ऑस्टियोमलेशिया के नाम से जाना जाता है। इसके कारण हड्डियों में दर्द हो सकता है और मसल्स कमजोर हो सकते हैं। यह नहीं इससे फ्रैक्चर का रिस्क भी बढ़ सकता है।

ऑस्टियोपोरोसिस

शरीर में कैल्शियम के एब्ज़ोर्प्शन के लिए विटामिन डी (Vitamin D) जरूरी है। इसकी कमी के कारण बोन डेंसिटी कम होती है और ऑस्टियोपोरोसिस का रिस्क बढ़ता है। यही नहीं इससे हड्डियों के टूटने का रिस्क भी अधिक हो जाता है। यह समस्या किसी भी व्यक्ति को हो सकती है लेकिन उम्र के बढ़ने के साथ ही इस रोग के विकसित होने की संभावना बढ़ती है।

ऑटोइम्यून डिजीज 

ऐसा पाया गया है कि विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) ऑटोइम्यून डिजीज में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। ऑटोइम्यून कंडीशन से पीड़ित व्यक्तियों में अक्सर लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल पाया गया है। यह कंडीशंस हैं मल्टीप्ल स्क्लेरोसिस, टाइप 1 डायबिटीज, इंफ्लेमेटरी बाउल डिजीज, रूमेटाइड आर्थराइटिस आदि। हालांकि, इसके बारे में अधिक रिसर्च की जानी जरूरी है।

कुछ कैंसर

विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) से कुछ कैंसर होने का रिस्क भी बढ़ता है। कुछ स्टडीज भी इन दोनों के लिंक के बारे में बताती हैं। ऐसा माना गया है कि इस कमी से ब्रेस्ट कैंसर और बाउल कैंसर का रिस्क बढ़ता है। ऐसा भी पाया गया है कि लो विटामिन डी (Vitamin D) लेवल से सम्पूर्ण कैंसर मोर्टेलिटी में बढ़ोतरी होती है। इसके साथ ही यह भी पाया गया है कि इससे प्रोस्टेट और पैंक्रियाटिक कैंसर का रिस्क बढ़ता है। यानी, यह कमी कैंसर की संभावना को बढ़ा सकती है, जो एक गंभीर समस्या का विषय है।

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कार्डियोवैस्कुलर डिजीज

विटामिन डी डेफिशिएंसी (Vitamin D deficiency) को कार्डियोवैस्कुलर डिजीज  से भी जोड़ा गया है, जिसमें कई हार्ट डिजीज शामिल हैं।  यह भी पाया गया है कि इससे बुजुर्गों की मसल्स कमजोर हो सकती हैं और उन्हें दर्द हो सकता है। विटामिन डी की कमी से डिप्रेशन और अन्य मेंटल प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं। यह कमी मूड डिसऑर्डर्स का कारण भी बन सकती है। 

नोट:- यहां दी गई जानकारी केवल रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से सलाह लेना न भूलें।

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