Anjali Choudhary

Akshaya Tritiya

अक्षय तृतीया 2025: 30 अप्रैल को दुर्लभ योगों में मनाएं यह पावन पर्व

सर्वार्थ सिद्धि योग और रोहिणी नक्षत्र का संयोग, खरीदारी और मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ अक्षय तृतीया, जिसे अखा तीज भी कहा जाता है, हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ और पुण्यदायी पर्व माना जाता है। इस दिन किए गए धार्मिक कार्य, दान-पुण्य और खरीदारी का फल अक्षय यानी कभी नष्ट न होने वाला होता है। वर्ष 2025 में अक्षय तृतीया 30 अप्रैल, बुधवार को मनाई जाएगी, जो कई शुभ योगों के संयोग के कारण विशेष महत्व रखती है।​ अक्षय तृतीया 2025: तिथि और महासंयोग इस वर्ष अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) का आयोजन 29 अप्रैल को सायं 05:31 मिनट से शुरू होकर 30 अप्रैल को दोपहर 02:31 मिनट तक रहेगा। इस बार अक्षय तृतीया पर महासंयोग बनेगा। पंचांग के अनुसार, अक्षय तृतीया इस वर्ष सर्वार्थ सिद्धि योग में मनाई जाएगी। ज्योतिष में इसे एक खास योग माना गया है, जिसका सीधा संबंध मां लक्ष्मी से है। इस विशेष योग में पूजा करने से मां लक्ष्मी भक्तों की हर इच्छा पूरी करती हैं। इस दिन स्वर्ण आभूषण की खरीदारी से उनकी अक्षय वृद्धि होती है। साथ ही इस दिन किए गए जप, तप, ज्ञान, स्नान, दान, और होम आदि कार्य भी अक्षय फल प्राप्त करते हैं, जिससे इसे अक्षय तृतीया कहा जाता है।  तीर्थ स्नान और अन्न-जल का दान अक्षय तृतीया ((Akshaya Tritiya) के इस पवित्र दिन पर तीर्थ स्नान का महत्व अत्यधिक है। धार्मिक ग्रंथों में यह कहा गया है कि इस दिन तीर्थ स्नान करने से सभी पाप समाप्त हो जाते हैं और हर तरह के दोष समाप्त हो जाते हैं, इसे दिव्य स्नान के रूप में जाना जाता है। यदि तीर्थ स्थल पर स्नान करने का अवसर न हो तो घर पर गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी पुण्यकारी होता है और तीर्थ स्नान के समान फल मिलता है। इसके बाद अन्न और जल का दान करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। जो व्यक्ति इस दिन दान का संकल्प लेकर जरूरतमंदों को अन्न और जल का दान करता है, उसे कई यज्ञ और कठिन तपस्या करने जितना पुण्य प्राप्त होता है।  पूजा विधि और दान-पुण्य इसे भी पढ़ें:-  विष्णु भक्ति से मिलेगा अक्षय पुण्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और भोग का महत्व अक्षय तृतीया पर कर सकते हैं ये विशेष कार्यअक्षय तृतीया, (Akshaya Tritiya) जिसे आखा तीज के नाम से भी जाना जाता है, एक अत्यंत शुभ और पवित्र पर्व है। इस दिन भगवान परशुराम की जयंती भी मनाई जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, सतयुग और त्रेतायुग की शुरुआत भी इसी दिन हुई थी। अक्षय तृतीया के दिन बिना किसी विशेष मुहूर्त के भी शुभ कार्य, जैसे विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत, और सोना-चांदी की खरीदारी आदि किए जा सकते हैं। इस दिन व्रत, उपवास और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है — यानी ऐसा पुण्य जो कभी समाप्त नहीं होता।​ भगवान विष्णु के अवतार अक्षय तृतीया (Akshaya Tritiya) को चिरंजीवी तिथि भी कहा जाता है, क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु (Lord Vishnu) के अवतार परशुराम जी का जन्म हुआ था। परशुराम जी को चिरंजीवी माना जाता है, अर्थात वे सदैव जीवित रहेंगे। इसके अतिरिक्त, भगवान विष्णु के नर-नरायण और हयग्रीव अवतार भी इसी तिथि पर प्रकट हुए थे। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Akshaya Tritiya #AkshayaTritiya2025 #AkshayaTritiya #HinduFestival #RareYogas #AuspiciousDay #HinduPuja #GoldBuying #AkshayaTritiyaYog #April30Festival #SpiritualCelebration

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Lord Parashurama

अक्षय तृतीया के शुभ संयोग में होगी भगवान परशुराम की जयंती, ऐसे करें पूजा-अर्चना

भगवान विष्णु (Lord Parashurama) के छठे अवतार, भगवान परशुराम की जयंती हर वर्ष वैशाख महीने के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। यह दिन ‘अक्षय तृतीया’ के रूप में भी प्रसिद्ध है, जिसे अत्यंत शुभ माना जाता है। वर्ष 2025 में परशुराम जयंती का पर्व अप्रैल महीने में मनाया जाएगा। आइए जानते हैं इस पावन अवसर की तिथि, शुभ मुहूर्त और इससे जुड़े महत्वपूर्ण योगों के बारे में। परशुराम जयंती 2025: शुभ मुहूर्त और योग वैशाख मास की शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल को प्रारंभ होगी और यह 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 बजे समाप्त होगी। चूंकि भगवान परशुराम का जन्म प्रदोष काल में हुआ था, इसलिए परशुराम जयंती का पर्व 29 अप्रैल को मनाया जाएगा। अक्षय तृतीया 2025: शुभ मुहूर्त पंचांग के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 29 अप्रैल की शाम 5:31 बजे आरंभ होगी और 30 अप्रैल को दोपहर 2:12 बजे समाप्त होगी। चूंकि हिंदू धर्म में तिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है, इसलिए अक्षय तृतीया का पर्व 30 अप्रैल को मनाया जाएगा। इस दिन पूजन का शुभ समय प्रातः 5:41 बजे से लेकर दोपहर 12:18 बजे तक रहेगा। इस अवधि में पूजन करना अत्यंत मंगलकारी और फलदायी माना जाता है। परशुराम जयंती 2025: शुभ योग इस वर्ष परशुराम जयंती के दिन सौभाग्य योग का विशेष संयोग बन रहा है, जो दोपहर 3:54 बजे तक रहेगा। साथ ही इस दिन त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का भी शुभ संयोग बन रहा है। इन पुण्य योगों में भगवान परशुराम की आराधना करने से साधक की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और मां लक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसे भी पढ़ें:- जब एक मुसलमान बन गया कृष्ण भक्त: रसखान की भक्ति ने रचा इतिहास परशुराम जयंती का महत्व भगवान परशुराम (Lord Parashurama) को भगवान विष्णु (Lord Vishnu) का छठा अवतार माना जाता है। वे ऋषि जमदग्नि और माता रेणुका के पुत्र थे। परशुराम जी को उनके परशु (कुल्हाड़ी) धारण करने के कारण यह नाम मिला। उन्होंने अत्याचारी क्षत्रियों का संहार कर धर्म की स्थापना की थी।  पूजा विधि और अनुष्ठान परशुराम जयंती (Parashurama Jayanti) के दिन भक्तगण विशेष पूजा-अर्चना और व्रत का आयोजन करते हैं। इस दिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान परशुराम की प्रतिमा या चित्र के सामने दीप प्रज्वलित करें। उन्हें चंदन, तुलसी पत्र, कुंकुम, फूल और मिठाई अर्पित करें। परशुराम जी के मंत्रों का जाप करें और उनकी कथा का श्रवण करें। अंत में आरती कर प्रसाद का वितरण करें।   Latest News in Hindi Today Hindi news Lord Parashurama #ParshuramJayanti2025 #AkshayaTritiya #LordParshuram #HinduFestivals #PujaVidhi #AkshayaTritiya2025 #ParshuramWorship #HinduGods #ParshuramJayanti #AkshayaTritiyaSignificance

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Varuthini Ekadashi

वरूथिनी एकादशी 2025: विष्णु भक्ति से मिलेगा अक्षय पुण्य, जानें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और भोग का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को वरूथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) कहते हैं। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत फलदायक मानी जाती मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत और पूजा करने से सभी पापों का नाश होता है और भक्त को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। वरूथिनी एकादशी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त हिंदू पंचांग के अनुसार, वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि का आरंभ 23 अप्रैल को शाम 4 बजकर 43 मिनट पर होगा और इसका समापन 24 अप्रैल को दोपहर 2 बजकर 32 मिनट पर होगा। चूंकि हिंदू धर्म में उदया तिथि को विशेष महत्व दिया जाता है, इसलिए वरूथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) का व्रत 24 अप्रैल 2025 को रखा जाएगा। वरूथिनी एकादशी का महत्व वरूथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) का उल्लेख कई पुराणों में मिलता है। ‘वरूथिनी’ का अर्थ होता है – “सुरक्षा देने वाली”। इस दिन व्रत रखने वाले व्यक्ति को भगवान विष्णु का विशेष संरक्षण प्राप्त होता वरूथिनी एकादशी का व्रत धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। यह एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है और इसका पालन करने से भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति के साथ अनेक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। शास्त्रों के अनुसार, वरूथिनी एकादशी का व्रत सभी प्रकार के पापों का नाश करता है। इस एकादशी का व्रत मोक्ष की ओर अग्रसर करता है और व्यक्ति को जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और भक्ति भाव से की गई पूजा भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय होती है। इससे भगवान की विशेष कृपा प्राप्त होती है, जिससे जीवन में सुख, शांति, यश, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। इसे भी पढ़ें:-  पहली बार रख रही हैं व्रत? जानें संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां वरूथिनी एकादशी व्रत विधि वरूथिनी एकादशी (Varuthini Ekadashi) के दिन प्रातः स्नान करके व्रत का संकल्प लें। इसके लिए हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर भगवान विष्णु का ध्यान करें और संकल्प करें। फिर भगवान विष्णु (Lord Vishnu) की प्रतिमा का पंचामृत से अभिषेक करें और शुद्ध जल से स्नान कराएं। इसके बाद उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं और सुंदर रूप से शृंगारित करें। भगवान को पीला चंदन और रोली का तिलक लगाएं, पीले पुष्प और तुलसीदल अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर पूजा करें। भोग में केसर युक्त खीर, पंचामृत और धनिए की पंजीरी अर्पित करें।“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें और वरूथिनी एकादशी की कथा का पाठ या श्रवण करें। पूजा के अंत में विष्णु जी की आरती करें और अपनी इच्छाओं की पूर्ति हेतु प्रार्थना करें। व्रत का पारण अगले दिन नियमपूर्वक करें। भगवान विष्णु को लगाएं ये भोग नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Varuthini Ekadashi #VaruthiniEkadashi2025 #EkadashiVrat #LordVishnu #HinduFestival #EkadashiPuja #SpiritualIndia #EkadashiFasting #VaruthiniVrat #Ekadashi2025 #HinduDevotion

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Gayatri Mantra

गायत्री मंत्र जाप का सही तरीका: जानें कब, कैसे और क्यों करें इस दिव्य मंत्र का उच्चारण

हिंदू धर्म में मंत्रों का विशेष महत्व है और उन मंत्रों में भी गायत्री मंत्र को सबसे शक्तिशाली और पवित्र माना जाता है। यह मंत्र न केवल आध्यात्मिक उत्थान के लिए प्रभावशाली है, बल्कि मानसिक शांति, बुद्धि, ऊर्जा और आध्यात्मिक बल को भी बढ़ाता है। लेकिन अक्सर लोग बिना विधि-विधान और उचित जानकारी के मंत्र का जाप करने लगते हैं, जिससे उन्हें लाभ की जगह हानि भी हो सकती है। इस लेख में हम जानेंगे कि गायत्री मंत्र का जाप कब और कैसे करना चाहिए, इसके नियम क्या हैं और कौन-कौन सी गलतियां करने से बचना चाहिए। गायत्री मंत्र क्या है? ॐ भूर् भुवः स्वः, तत् सवितुर् वरेण्यं, भर्गो देवस्य धीमहि, धियो यो नः प्रचोदयात्” — इस मंत्र का उच्चारण वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और कंपन भर देता है। ‘ॐ’ की ध्वनि अपने आप में ब्रह्मांडीय ऊर्जा का प्रतीक है, और इसके जाप से शरीर और मन दोनों को लाभ मिलता है। जब पूरा मंत्र पढ़ा जाए, तो इसका भावार्थ होता है— “हे दिव्य शक्ति! कृपया अपनी शुद्ध और दिव्य ऊर्जा से सम्पूर्ण सृष्टि को आलोकित करें। हमारे मन की अज्ञानता और अंधकार को दूर करें और हमें ज्ञान, विवेक और आध्यात्मिक शक्ति से भर दें।” यह मंत्र ईश्वर से प्रार्थना है कि वह हमारे विचारों को सकारात्मक दिशा में प्रेरित करें और हमें सच्चाई की राह दिखाएं।  गायत्री मंत्र जाप का सही समय गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) के जाप से लाभ पाने के लिए उचित समय और विधि का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस मंत्र का जप दिन में तीन बार करना अत्यंत शुभ माना गया है। पहला जाप सूर्योदय से पूर्व यानी भोर में, दूसरा दोपहर के समय और तीसरा सूर्यास्त से पहले संध्या के दौरान करना चाहिए। मंत्र जप करते समय तुलसी या चंदन की माला का उपयोग करें और कुश के आसन पर बैठें। साथ ही, मुख की दिशा पूर्व या पश्चिम की ओर रखें। यह विशेष रूप से ध्यान रखें कि सूर्यास्त के बाद गायत्री मंत्र का उच्चारण नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह समय मंत्र जाप के लिए उचित नहीं माना जाता।  गायत्री मंत्र की 24 अक्षरों में छुपी हैं जीवन को संवारने वाली शक्तियां गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) में कुल 24 अक्षर होते हैं और प्रत्येक अक्षर एक विशेष शक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। इन शक्तियों में सफलता की शक्ति, पराक्रम की शक्ति, पालन और कल्याण की शक्ति, योग और प्रेम की शक्ति, धन और तेज की शक्ति, रक्षा और बुद्धि की शक्ति शामिल हैं। इसके अलावा, दमन, निष्ठा, धारण, प्राण, मर्यादा, तप, शांति, काल, उत्पादकता, रस, आदर्श, साहस, विवेक और सेवा जैसी शक्तियां भी इस मंत्र से जुड़ी हैं। ये सभी 24 शक्तियां मानव जीवन को सशक्त, संतुलित और सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाने में सहायक मानी जाती हैं। गायत्री मंत्र का नियमित जाप इन गुणों को जाग्रत करने में मदद करता है। इसे भी पढ़ें:-  पहली बार रख रही हैं व्रत? जानें संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां रोज़ 108 बार गायत्री मंत्र जाप करने के फायदेऐसा माना जाता है कि यदि कोई व्यक्ति प्रतिदिन 108 बार गायत्री मंत्र (Gayatri Mantra) का जाप करता है, तो उसकी स्मरण शक्ति तेज़ होती है और बुद्धि का विकास होता है। यह मंत्र विवेक, आत्मबल और मानसिक स्थिरता प्रदान करता है। विशेष रूप से छात्रों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं और मानसिक तनाव से गुजर रहे लोगों के लिए यह अत्यंत लाभकारी है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गायत्री मंत्र के नियमित जाप से जीवन में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति आती है। साथ ही यह भीतर की नकारात्मकता को दूर कर सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Gayatri Mantra #GayatriMantra #MantraChanting #SpiritualPractice #DailyMantra #VedicMantra #HinduSpirituality #DivineChanting #MeditationMantra #MorningRituals #PowerfulMantra

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April Masik Janmashtami rituals

मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2025: अप्रैल में कब है व्रत, क्या है शुभ मुहूर्त और पूजन विधि?

भगवान श्रीकृष्ण की मासिक जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) हर महीने कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। यह व्रत उन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है जो हर महीने श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की उपासना करते हैं और उनसे कृपा प्राप्त करना चाहते हैं। अप्रैल 2025 में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनाया जाएगा। इस दिन व्रत, पूजन, भजन-कीर्तन और रात के समय श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की परंपरा है। आइए जानें अप्रैल में मासिक कृष्ण जन्माष्टमी की तिथि, शुभ मुहूर्त और पूजन विधि। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी 2025 तिथि और समय वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि की शुरुआत 20 अप्रैल को शाम 7 बजे से होगी और यह तिथि 21 अप्रैल को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर समाप्त हो जाएगी। इस गणना के आधार पर मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत और पूजन 20 अप्रैल को संपन्न किया जाएगा। मासिक कृष्ण जन्माष्टमी का महत्व हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को विष्णु जी का आठवां अवतार माना जाता है। माघ मास की मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) पर भगवान श्रीकृष्ण (Lord Krishna) की पूजा करने से भक्त को यश, सम्मान, धन-वैभव, पराक्रम, संतान सुख, लंबी आयु और समृद्ध जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास एवं पूजन करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-शांति का वास होता है। इसलिए यह व्रत अत्यंत शुभ और फलदायक माना गया है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखकर और श्रीकृष्ण (Lord Krishna) का ध्यान करने से पापों का नाश होता है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। विशेष रूप से महिलाएं इस व्रत को संतान की दीर्घायु और कल्याण के लिए करती हैं। इसे भी पढ़ें:-  पहली बार रख रही हैं व्रत? जानें संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां मासिक कृष्ण जन्माष्टमी व्रत और पूजा विधि मासिक कृष्ण जन्माष्टमी (Masik Krishna Janmashtami) के दिन प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान सूर्य को अर्घ्य दें। फिर लड्डू गोपाल की मूर्ति को जल, दूध और दही से स्नान कराएं। स्नान के बाद उन्हें सुंदर वस्त्र पहनाएं और तिलक करें। भगवान को पुष्पमाला अर्पित करें, देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें और भक्ति भाव से मंत्रों का जप करें। इसके बाद फल, मिठाई और अन्य प्रसाद अर्पित करें। पूजा के अंत में जरूरतमंदों को दान देना पुण्यकारी माना जाता है। दान और पुण्य का महत्व इस दिन दान-पुण्य का विशेष महत्व है। वस्त्र, अन्न, फल, मिश्री, घी, धन और तुलसी सहित पूजन सामग्री का दान करने से भगवान श्रीकृष्ण अत्यंत प्रसन्न होते हैं। जरूरतमंदों को भोजन कराने से जीवन में शुभ फल और समृद्धि प्राप्त होती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News  Masik Krishna Janmashtami #MasikKrishnaJanmashtami2025 #JanmashtamiApril2025 #KrishnaVrat2025 #KrishnaPujaVidhi #MasikJanmashtami #KrishnaBhakti #KrishnaJanmashtami2025 #HinduFestivals2025 #AprilVrat2025 #JanmashtamiRituals

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Bhanu Saptami 2025 Date, Significance & Puja Vidhi

भानु सप्तमी 2025: सूर्य देव की उपासना का पावन पर्व, जानें तिथि, महत्व और पूजा विधि

हिंदू धर्म में सूर्य को अत्यंत शक्तिशाली और पूजनीय देवता माना गया है। वे न केवल जीवनदाता हैं, बल्कि स्वास्थ्य, ऊर्जा और सफलता के प्रतीक भी हैं। सूर्य की उपासना से जुड़े अनेक पर्व और तिथियां साल भर मनाई जाती हैं, उन्हीं में से एक महत्वपूर्ण तिथि है भानु सप्तमी (Bhanu Saptami)। यह दिन सूर्य भगवान (Lord Surya) को समर्पित होता है और इस दिन व्रत एवं पूजा का विशेष महत्व होता है। भानु सप्तमी 2025 कब है? वैदिक पंचांग के अनुसार, वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि की शुरुआत 19 अप्रैल को शाम 6:21 बजे से होगी और इसका समापन 20 अप्रैल को शाम 7:00 बजे पर होगा। चूंकि सनातन धर्म में तिथि की गणना सूर्योदय से की जाती है, इस कारण 20 अप्रैल 2025 को भानु सप्तमी (Bhanu Saptami) का पर्व मनाया जाएगा। भानु सप्तमी के विशेष योग (Shubh Yog)ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, इस भानु सप्तमी पर एक दुर्लभ सिद्ध योग का संयोग बन रहा है, जो इसे और भी अधिक शुभ बनाता है। इसके साथ ही त्रिपुष्कर योग सहित कई अन्य मंगलकारी योग भी बन रहे हैं। इसके अलावा, पूर्वाषाढ़ा और उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों का मिलन भी इस दिन को विशेष बना रहा है। इन शुभ योगों में सूर्य देव की आराधना करने से समस्त सुखों, समृद्धि और उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। भानु सप्तमी का धार्मिक महत्व भानु सप्तमी (Bhanu Saptami) को सूर्य सप्तमी भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन सूर्य देव की आराधना करने से सभी प्रकार के रोगों और कष्टों से मुक्ति मिलती है। विशेष रूप से, यह दिन नेत्र रोग, त्वचा संबंधी समस्याएं और मानसिक तनाव को दूर करने में सहायक माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सूर्य देव (Lord Surya) ने अपने रथ पर सवार होकर समस्त संसार को प्रकाश और ऊर्जा प्रदान की थी। इस कारण इस दिन को सूर्य देव का अवतरण दिवस भी माना जाता है। भानु सप्तमी पर किए गए दान-पुण्य का प्रभाव कई गुना अधिक होता है और यह व्रत संतान सुख, अच्छे स्वास्थ्य और दीर्घायु के लिए किया जाता है। इसे भी पढ़ें:-  पहली बार रख रही हैं व्रत? जानें संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां भानु सप्तमी व्रत एवं पूजा विधि  भानु सप्तमी (Bhanu Saptami) के दिन व्रती को सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करना चाहिए। स्नान के जल में गंगाजल, रोली और हल्दी मिलाना शुभ माना जाता है। इसके बाद तांबे के लोटे में जल, लाल पुष्प, अक्षत, रोली और शक्कर मिलाकर “ॐ घृणि सूर्याय नमः” मंत्र के साथ सूर्य देव (Lord Surya) को अर्घ्य देना चाहिए। पूजा के बाद व्रत का संकल्प लें और दिनभर फलाहार करें। सूर्यास्त से पूर्व पुनः सूर्य की पूजा करें। इस दिन गेहूं, गुड़, चना दाल, तांबे के बर्तन, लाल वस्त्र और घी का दान करना शुभ माना जाता है। ब्राह्मणों को भोजन और दक्षिणा देने से पुण्य प्राप्त होता है। साथ ही, सूर्य चालीसा या आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करने से आत्मबल और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। सूर्य मंत्र 1. ॐ ऐहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजो राशे जगत्पते, अनुकंपयेमां भक्त्या, गृहाणार्घय दिवाकर:। 2. ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा।। 3. ऊँ आदित्याय विदमहे दिवाकराय धीमहि तन्न: सूर्य: प्रचोदयात ।। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News   #BhanuSaptami2025 #SunGodWorship #SuryaDevPuja #HinduFestivals #PujaVidhi #VratKatha #BhanuSaptamiSignificance #Bhakti #Spirituality #SunWorship

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Vat Savitri Vrat 2025

वट सावित्री व्रत 2025: पहली बार रख रही हैं व्रत? जानें संपूर्ण विधि और जरूरी सावधानियां

विवाहित महिलाओं के लिए वट सावित्री व्रत 2025 (Vat Savitri Vrat 2025) एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो पति की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना के लिए रखा जाता है। यदि आप इस व्रत को पहली बार रख रही हैं, तो इसके महत्व, तिथि, पूजा विधि और आवश्यक सामग्री की जानकारी होना आवश्यक है। वट सावित्री व्रत 2025 की तिथि और विशेष संयोग वर्ष 2025 में वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) सोमवार, 26 मई को मनाया जाएगा। इस दिन ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि दोपहर 12:12 बजे से प्रारंभ होकर 27 मई को सुबह 8:32 बजे तक रहेगी। इस बार व्रत के दिन सोमवती अमावस्या और शनि जयंती का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस व्रत का महत्व और भी बढ़ जाता है ।​ व्रत का महत्व वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat)  सुहागिन महिलाओं के लिए अत्यंत पूजनीय और खास माना जाता है। मान्यता है कि इस व्रत को श्रद्धा से करने से पति को लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है। पौराणिक कथा के अनुसार, सावित्री ने इसी व्रत की शक्ति से अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से पुनः प्राप्त किए थे। यही कारण है कि यह व्रत अत्यंत फलदायी और कल्याणकारी माना गया है।  पूजा विधि आवश्यक पूजा सामग्री वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) की पूजा के लिए कई प्रकार की सामग्रियों की आवश्यकता होती है, जिनमें शामिल हैं– रक्षा सूत्र, कच्चा सूत, बरगद का फल, बांस का पंखा, कुमकुम, सिंदूर, विभिन्न प्रकार के फल-फूल, रोली, चंदन, अक्षत, दीपक, गंध, इत्र, धूपबत्ती, सुहाग का पूरा सामान, सवा मीटर कपड़ा, बताशे, पान, सुपारी, व्रत कथा की पुस्तक, जल से भरा हुआ कलश, नारियल, मिठाइयाँ, मखाना, घर पर बना हुआ प्रसाद, भिगोया हुआ चना, मूंगफली, पूड़ियाँ और गुड़ आदि। यदि आपके घर के पास वट वृक्ष नहीं है, तो उसकी एक डाल कहीं से लाकर पूजन में उपयोग करें। इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर पहली बार व्रत रखने वाली महिलाओं के लिए सुझाव वट सावित्री व्रत (Vat Savitri Vrat 2025) के दिन महिलाएं निर्जल उपवास करती हैं, ऐसे में अपने स्वास्थ्य का विशेष ख्याल रखें। इस पावन अवसर पर मन को शांत और सकारात्मक बनाए रखें तथा ईश्वर का ध्यान करें। किसी से कटु शब्दों का प्रयोग या गलत व्यवहार करने से बचें। परिवार के बुजुर्गों का आशीर्वाद जरूर लें, क्योंकि उनका आशीर्वाद जीवन में सुख-शांति लाता है। व्रत के दिन सुहागिन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करती हैं और लाल रंग के वस्त्र धारण करती हैं, जो शुभ माने जाते हैं। साथ ही, इस दिन मांसाहार और अन्य तामसिक वस्तुओं से दूर रहना चाहिए। पति से किसी प्रकार की अनबन या बहस से बचना भी इस दिन अत्यंत जरूरी माना जाता है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News  Vat Savitri Vrat 2025 #VatSavitriVrat2025 #VatSavitriVrat #SavitriVratRituals #HinduVrat #MarriedWomenVrat #PujaVidhi #FastingTradition #SavitriSatyavan #HinduFestivals #SpiritualGuide

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Navkar Mantra

नवकार मंत्र: आत्मशुद्धि और मोक्ष का दिव्य पथ 

भारत की प्राचीन धार्मिक परंपराओं में जैन धर्म का विशेष स्थान है। इस धर्म में नवकार मंत्र (Navkar Mantra) को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। नवकार मंत्र न केवल एक प्रार्थना है, बल्कि आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की ओर अग्रसर होने का मार्ग भी है। इसे “पंच परमेष्ठी” की आराधना कहा जाता है, जिसमें पांच महान आत्माओं को वंदना की जाती है। आइए विस्तार से जानते हैं कि क्या है नवकार मंत्र, इसका महत्व और इसे जपने से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। क्या है नवकार मंत्र? नवकार मंत्र (Navkar Mantra) जैन धर्म (Jain Dharma) का सबसे प्राचीन और पवित्र मंत्र है। नवकार महामंत्र जैन धर्म से गहराई से जुड़ा हुआ है। सरल शब्दों में कहें तो जैन धर्म (Jain Dharma) के अनुयायी इस पवित्र मंत्र का जप सामूहिक रूप से करते हैं। इस मंत्र का उच्चारण विशेष ध्यान और एकाग्रता के साथ किया जाता है। नवकार महामंत्र को ‘नमस्कार मंगल’ या ‘परमेष्ठी मंत्र’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मंत्र जैन धर्म के संतों—जैसे साधु-साध्वी और मुनियों—की वंदना स्वरूप होता है और उनके प्रति गहन श्रद्धा को प्रकट करता है। नवकार मंत्र का अर्थ और भाव इस मंत्र का अर्थ केवल वंदना करना नहीं है, बल्कि यह आत्मा की ऊँचाई तक पहुँचने की प्रेरणा देता है। नवकार मंत्र हमें बताता है कि जीवन में सच्चा आदर्श क्या है और किसे अपना गुरु मानना चाहिए। यह मंत्र यह भी सिखाता है कि किसी धर्म विशेष के प्रति भक्ति से अधिक महत्वपूर्ण है आत्मा की शुद्धि और मोक्ष की प्राप्ति। इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर नवकार मंत्र कितनी बार जपें? जैन धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का जाप विषम और सम—दोनों प्रकार की गिनती में किया जा सकता है। साधक अपनी सुविधा और साधना के स्तर के अनुसार 1 से 25 बार तक इसका जप कर सकते हैं। हालांकि, इस मंत्र का जप करते समय मन की एकाग्रता अत्यंत आवश्यक मानी जाती है। इसलिए, जप से पहले ध्यान की मुद्रा में बैठकर मन को शांत करना और फिर मंत्र का उच्चारण करना चाहिए, जिससे इसका पूर्ण प्रभाव प्राप्त हो सके। नवकार मंत्र का ऐतिहासिक महत्व इतिहास में नवकार महामंत्र (Navkar Mantra) का उल्लेख कई प्राचीन शिलालेखों में मिलता है। शुरुआती शिलालेखों में ‘नमो अरहंताणं’ और ‘नमो सवे सिद्धाणं’ जैसे अंश मिलते हैं, जबकि समय के साथ शिलालेखों में पूरे नवकार मंत्र का उल्लेख मिलने लगा। यह मंत्र जैन धर्म का अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली स्तोत्र है, जिसे व्यक्ति अकेले या समूह में सामूहिक रूप से भी जप सकते हैं। नवकार मंत्र को ‘सिद्धिकारक मंत्र’ माना जाता है, यानी यह मंत्र न केवल आत्मिक शुद्धि करता है, बल्कि संपूर्ण सृष्टि के कल्याण की भावना से जुड़ा हुआ है। Latest News in Hindi Today Hindi News  Navkar Mantra #NavkarMantra #JainMantra #SpiritualPath #Moksha #SelfPurification #MantraChanting #PeaceMantra #DivineWisdom #Jainism #SacredChant

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Surya Gochar 2025

सूर्य गोचर 2025: 14 अप्रैल को मेष राशि में प्रवेश करते ही चमकेंगी इन 3 राशियों की किस्मत 

साल 2025 में 14 अप्रैल को सूर्य देवता अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करने जा रहे हैं। इस खगोलीय घटना को ज्योतिष शास्त्र में “सूर्य गोचर” (Surya Gochar) कहा जाता है, जिसका सीधा प्रभाव सभी 12 राशियों पर पड़ता है। लेकिन इस बार सूर्य के राशि परिवर्तन से विशेष रूप से तीन राशियों के लिए समय बहुत ही शुभ रहने वाला है। इन जातकों के लिए आने वाला समय तरक्की, सफलता और समृद्धि से भरपूर रहेगा। सूर्य का राशि परिवर्तन – एक विशेष घटना ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य हर माह एक राशि से दूसरी में प्रवेश करते हैं, लेकिन जब वे अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करते हैं, तो इसका प्रभाव और महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस साल सूर्य का यह विशेष गोचर 14 अप्रैल 2025 को होगा। सूर्य देव का मेष राशि में प्रवेश न केवल व्यक्ति के जीवन में, बल्कि राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक क्षेत्रों में भी महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आता है। सूर्य की मेष राशि में उच्चता का क्या है महत्व? मेष राशि सूर्य की उच्च राशि मानी जाती है। जब सूर्य मेष में आते हैं, तो उनका तेज, ऊर्जा और प्रभाव सबसे अधिक होता है। यह समय आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता, निर्णय शक्ति और मान-सम्मान में वृद्धि के लिए आदर्श माना जाता है। विशेष रूप से उन लोगों को लाभ होता है जो प्रशासन, राजनीति, सरकारी सेवा, व्यापार या नेतृत्व से जुड़े क्षेत्र में कार्यरत हैं। इन 3 राशियों (Zodiac Signs) के लिए शुरू हो रहे हैं सुनहरे दिन: मेष राशि14 अप्रैल को सूर्य (Surya Gochar) के मेष राशि में उच्च स्थिति में प्रवेश से आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव आएंगे। यह गोचर आपकी बौद्धिक क्षमता को निखारेगा और समाज व परिवार में आपके विचारों को सराहा जाएगा। करियर से जुड़ी अड़चनें दूर होंगी और आप काम में पहले से अधिक ऊर्जावान महसूस करेंगे। इस दौरान आप अपने सभी कार्य समय से पहले पूरे कर पाएंगे। साथ ही, कार्य संबंधी यात्राएं होंगी जो लाभदायक सिद्ध होंगी। इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर कर्क राशिसूर्य (Surya) जब आपके दशम भाव में उच्च स्थिति में आएंगे, तब यह समय आपके लिए विशेष रूप से लाभकारी होगा। इस भाव में सूर्य का होना दिग्बली माना जाता है, जिससे करियर में उन्नति के योग बनते हैं। अप्रैल से मई के मध्य तक आपको नई नौकरी या प्रमोशन मिल सकता है। पारिवारिक जीवन में भी सौहार्द और सकारात्मक बदलाव देखने को मिलेंगे। पिताजी या किसी बुजुर्ग की सलाह आपके लिए अत्यंत लाभकारी साबित हो सकती है। आर्थिक समस्याओं से राहत मिलेगी और आप परिवार तथा प्रोफेशनल ज़िंदगी में एक कुशल नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाएंगे। धनु राशिसूर्य (Surya Gochar) जब आपके पंचम भाव में प्रवेश करेंगे, तो यह शिक्षा, प्रेम और रचनात्मकता के क्षेत्रों में प्रगति का संकेत देगा। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को सफलता मिल सकती है। स्कूल या कॉलेज के छात्र अपनी प्रतिभा से सबका ध्यान आकर्षित करेंगे। यह समय प्रेम जीवन के लिए भी अनुकूल है—आप अपने पार्टनर के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। आपकी बातों में सच्चाई और गहराई होगी, जिससे लोग आप पर भरोसा करेंगे। सामाजिक पहचान बढ़ेगी, और अगर आप लेखन, संगीत या कला क्षेत्र से जुड़े हैं तो आपकी कोई रचना लोगों के बीच प्रसिद्ध हो सकती है। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Surya Gochar #SuryaGochar2025 #SunTransit2025 #AriesTransit #LuckyZodiacSigns #Astrology2025 #Horoscope2025 #April14SuryaGochar #SunInAries #ZodiacLuck #AstroUpdate

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Remedies to Remove Shani Effects

हनुमान जन्मोत्सव 2025: हनुमान जयंती पर जरूर करें ये उपाय, ढैय्या-साढ़ेसाती का असर होगा दूर

आज देशभर में आस्था और श्रद्धा के साथ हनुमान जन्मोत्सव (Hanuman Janmotsav) मनाया जा रहा है।  इस वर्ष यह पर्व शनिवार को पड़ रहा है, जो और भी अधिक शुभ माना गया है क्योंकि शनिवार और हनुमान जी का विशेष संबंध है। माना जाता है कि शनिवार के दिन हनुमान जी (Hanuman Ji) की उपासना करने से शनि से संबंधित समस्त दोष जैसे साढ़ेसाती, ढैय्या और शनि पीड़ा से राहत मिलती है। इस दिन भक्त विशेष उपाय और पूजा-अर्चना करके बजरंगबली की विशेष कृपा पा सकते हैं। हनुमान जन्मोत्सव का महत्व हनुमान जी (Hanuman Ji)को संकटमोचन कहा गया है, जो अपने भक्तों की हर पीड़ा को हर लेते हैं। वे रामभक्त, बल-बुद्धि और ज्ञान के प्रतीक हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, चैत्र माह की पूर्णिमा को हनुमान जी का जन्म हुआ था। इस दिन श्रद्धालु उपवास रखते हैं, हनुमान चालीसा, सुंदरकांड और बजरंग बाण का पाठ करते हैं। मंदिरों में विशेष झांकियां सजाई जाती हैं और हनुमान जी को उनका प्रिय भोग अर्पित किया जाता है। शनिवार और हनुमान जी का विशेष संबंध धार्मिक ग्रंथों में बताया गया है कि हनुमान जी (Hanuman Ji) के सच्चे भक्तों पर शनि देव अपनी कड़ी दृष्टि नहीं डालते। इसी कारण शनि से जुड़े दोषों और कष्टों को दूर करने के लिए हनुमान जी की पूजा को सबसे प्रभावी माना जाता है। इस वर्ष हनुमान जन्मोत्सव शनिवार के दिन आ रहा है, जो एक शुभ और दुर्लभ योग है। ऐसे में यदि आप इस विशेष दिन पर कुछ खास उपाय अपनाते हैं, तो न केवल जीवन की कई समस्याओं से मुक्ति मिल सकती है, बल्कि शनि की दशा, महादशा, साढ़ेसाती या ढैय्या जैसे कष्टों का प्रभाव भी कम हो सकता है। इस दिन अवश्य करें ये उपाय इसे भी पढ़ें:- बजरंगबली की कृपा चाहिए तो लगाएं ये भोग, हर परेशानी होगी दूर विशेष भोग: जो बनेंगे कृपा का माध्यम हनुमान जी (Hanuman Ji) को प्रसन्न करने के लिए उनके प्रिय भोग जैसे बेसन के लड्डू, बूंदी, इमरती, गुड़-चना, केला और खीर अर्पित करें। यह मान्यता है कि इन वस्तुओं का भोग लगाने से हनुमान जी की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन से संकट दूर हो जाते हैं। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News Hanuman Janmotsav #HanumanJayanti2025 #HanumanJanmotsav #ShaniDosh #SadeSatiRemedy #HanumanRemedies #SpiritualTips #DhaiyyaRelief #HanumanPuja #RemoveNegativity #ShaniRemedies

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