Anjali Choudhary

Importance of Taraweeh in Ramadan

रमजान में तरावीह नमाज का क्या है महत्व: जानिए क्यों है यह इबादत खास

रमजान (Ramadan) का पवित्र महीना मुसलमानों के लिए इबादत, रहमत और मगफिरत का समय होता है। यह महीना न केवल रोजे रखने का होता है, बल्कि इसमें नमाज, कुरान तिलावत और दूसरे इबादतों का विशेष महत्व होता है। रमजान के दौरान तरावीह की नमाज का विशेष स्थान है। यह नमाज रमजान की रातों में पढ़ी जाती है और इसे पूरे महीने नियमित रूप से अदा किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि तरावीह की नमाज क्यों पढ़ी जाती है और इसका क्या महत्व है? आइए, इसके बारे में जानते हैं। रमजान: इस्लाम का पवित्र महीना इस्लाम धर्म में रमजान (Ramadan) का महीना बेहद पवित्र माना जाता है। इस दौरान लोग रोजा रखते हैं और खुदा की इबादत करते हैं। भारत में इस साल रमजान 2 मार्च से शुरू हो चुका है। इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, रमजान साल का नौवां महीना होता है, जिसे खास महत्व दिया जाता है। पूरे महीने रोजे रखे जाते हैं, और जब शव्वाल के महीने का चांद नजर आता है, तो पहली तारीख को ईद-उल-फितर का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। रमजान के दौरान किए गए अच्छे कामों का 70 गुना ज्यादा सवाब (पुण्य) मिलता है। इस महीने हर मुस्लिम को पांच वक्त की नमाज पढ़नी जरूरी होती है, लेकिन इसके अलावा तरावीह की नमाज भी पढ़ना सुन्नत माना जाता है। यह नमाज ईशा के बाद और वित्र से पहले पढ़ी जाती है। तरावीह की नमाज से अल्लाह के प्रति आस्था और गहरी होती है, जिससे व्यक्ति को अधिक सवाब मिलता है। तरावीह नमाज क्या है? तरावीह (Taraweeh) शब्द अरबी भाषा के शब्द “तरवीह” से लिया गया है, जिसका अर्थ है “आराम करना” या “विश्राम करना”। यह नमाज रमजान के महीने में रात के समय पढ़ी जाती है और इसमें लंबी किरात (कुरान की आयतें पढ़ना) के बाद छोटे-छोटे विराम लिए जाते हैं। तरावीह की नमाज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है और इसमें आमतौर पर 8 या 20 रकात होती हैं। यह नमाज जमात के साथ मस्जिद में पढ़ी जाती है, हालांकि इसे अकेले भी पढ़ा जा सकता है। रमजान में तरावीह पढ़ना क्यों जरूरी है? मुस्लिम धर्मगुरु मौलाना कारी इसहाक गोरा ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि रमजान (Ramadan) मुसलमानों के लिए बेहद पवित्र महीना है, जिसकी महिमा कुरान और हदीसों में वर्णित है। इस महीने में किए गए हर नेक काम का सवाब (पुण्य) 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। रमजान के दौरान रोजे रखना हर बालिग मुसलमान के लिए अनिवार्य (फर्ज) माना गया है। जहां तक नमाज की बात है, तो रमजान में भी उतनी ही नमाज पढ़ी जाती है, जितनी आम दिनों में पढ़ी जाती है। नमाज हर मुसलमान पर फर्ज होती है, और इसे छोड़ने पर गुनाह माना जाता है। इसे भी पढ़ें:- कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत नमाज से पहले तरावीह पढ़ना क्यों जरूरी है? रमजान (Ramadan) के दौरान नमाज के साथ एक खास इबादत जुड़ जाती है, जिसे तरावीह कहा जाता है। यह नमाज ईशा के बाद और वित्र से पहले अदा की जाती है। इसे विभिन्न इस्लामी परंपराओं में सुन्नत-ए-मुवक्किदा माना गया है, यानी इसे पढ़ना बेहद जरूरी है, और अधिकतर इस्लामी विद्वान भी इस पर सहमत हैं। रमजान का महीना पवित्र होता है, और इस दौरान किए गए हर अच्छे काम का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। इस महीने लोग दान (जकात) देते हैं, जिससे जरूरतमंदों की मदद की जा सके। रमजान की आध्यात्मिकता (रूहानियत) इतनी गहरी होती है कि इसका प्रभाव अन्य धर्मों के लोगों पर भी पड़ता है। जो लोग तरावीह नहीं पढ़ते, उनके बारे में अलग-अलग विचार हैं, लेकिन इस्लाम में जो चीज फर्ज कर दी गई है, उसे पूरा करना जरूरी होता है। इसे न मानने पर व्यक्ति गुनहगार माना जाता है। तरावीह नमाज कैसे पढ़ें? तरावीह (Taraweeh) की नमाज ईशा की नमाज के बाद पढ़ी जाती है। इसमें हर दो रकात के बाद थोड़ा विराम लिया जाता है, जिसमें तस्बीह, दुआ या कुरान की तिलावत की जा सकती है। तरावीह की नमाज को 8 या 20 रकात के रूप में पढ़ा जा सकता है, जो अलग-अलग मसलक (सुन्नी, हनफी, शाफई आदि) के अनुसार भिन्न हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Ramadan #Ramadan2025 #Taraweeh #IslamicPrayer #RamadanBlessings #NightPrayers #RamadanWorship #QuranRecitation #Spirituality #RamadanSpecial #MuslimFaith

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Chaitra Navratri 2025: कब से शुरू हो रहे हैं नवरात्र, जानें मां दुर्गा के आगमन का संकेत

भारत में हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल 2025 में चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) का पर्व 30 मार्च से शुरू हो रहा है, जो 7 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान देवी दुर्गा (Devi Durga) की पूजा अर्चना की जाती है और भक्त पूरे नौ दिनों तक उपवासी रहकर मां के नौ रूपों की पूजा करते हैं। इस पर्व को विशेष रूप से हिंदू धर्म में महत्व दिया जाता है क्योंकि यह समय देवी के आदिशक्ति स्वरूप की उपासना के लिए समर्पित होता है। चैत्र नवरात्र क्यों मनाए जाते हैं? चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) का पर्व भारतीय पंचांग के अनुसार हर साल बहुप्रतीक्षित होता है। यह पर्व विशेष रूप से हिंदू धर्म के अनुयायियों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अवसर है। इस पर्व के दौरान, भक्त विशेष रूप से देवी दुर्गा की पूजा करते हैं। चैत्र नवरात्र का पर्व बसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है, जब धरती हरियाली से आच्छादित होती है और नया जीवन मिलता है। इस दौरान देवी दुर्गा की पूजा से जीवन में समृद्धि, सुख, शांति और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। शुभ मुहूर्त  चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) हर साल चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से शुरू होती है। साल 2025 में इसकी शुरुआत 30 मार्च को होगी। पंचांग के अनुसार, प्रतिपदा तिथि 29 मार्च को शाम 4:27 बजे शुरू होकर 30 मार्च को दोपहर 12:49 बजे समाप्त होगी। उदयातिथि के अनुसार, 30 मार्च को ही नवरात्रि की पूजा और कलश स्थापना की जाएगी। यह पर्व 7 अप्रैल को समाप्त होगा, और इसी दिन रामनवमी भी मनाई जाएगी। घटस्थापना समय पंचांग के अनुसार 30 मार्च को घटस्थापना के लिए शुभ समय सुबह 6:13 बजे से 10:22 बजे तक रहेगा। इसके अलावा, अभिजीत मुहूर्त में भी घटस्थापना की जा सकती है, जो दोपहर 12:01 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इन दोनों शुभ समय में कलश स्थापना करना शुभ माना जाता है। नवरात्रि के नौ दिनों का महत्व चैत्र नवरात्र (Chaitra Navratri) के नौ दिनों में विशेष रूप से मां दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है। यह नौ रूप हैं – शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री। प्रत्येक दिन इन रूपों की पूजा की जाती है और भक्त उनसे आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए श्रद्धा भाव से अर्चना करते हैं। इसे भी पढ़ें:- इन 3 दिनों तक बंद रहते हैं कपाट, बंटता है अनोखा प्रसाद! नवरात्रि के दौरान विशेष पूजा विधि चैत्र नवरात्रि (Chaitra Navratri) के दौरान विशेष पूजा विधि का पालन किया जाता है। भक्तों को नौ दिनों तक उपवासी रहने की परंपरा है, और इस दौरान वे देवी दुर्गा (Devi Durga) की उपासना करते हैं। इस दौरान शुद्धता बनाए रखने के लिए विशेष ध्यान रखना होता है। साथ ही, घरों में विशेष रूप से कलश स्थापना की जाती है और मां दुर्गा (Maa Durga) की तस्वीर या मूर्ति स्थापित कर उनकी पूजा की जाती है। इस दौरान नवरात्रि की आरती और भजन-कीर्तन भी किए जाते हैं। यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news  Chaitra Navratri #ChaitraNavratri2025 #NavratriDates #DurgaPuja #FestivalsOfIndia #Navratri2025 #MaaDurga #HinduFestivals #NavratriCelebration #ChaitraNavratri #DurgaAgman

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Raksha Sutra Bandhne ke Niyam

Raksha Sutra Bandhne ke Niyam: कितने दिनों तक रखना चाहिए कलावा? 

हिंदू धर्म में रक्षा सूत्र यानी कलावा (Kalava) बांधने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। यह सिर्फ एक धार्मिक धागा नहीं, बल्कि आस्था, सुरक्षा और शुभता का प्रतीक माना जाता है। इसे हाथ में बांधने से न केवल नकारात्मक शक्तियों से बचाव होता है, बल्कि यह व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी लाता है। परंतु, इसे कब बांधना चाहिए, कितने दिनों तक रखना उचित है और इसे खोलने के क्या नियम हैं? आइए जानते हैं रक्षा सूत्र से जुड़े नियम और इसकी धार्मिक मान्यताएं। रक्षा सूत्र (कलावा) क्या है? रक्षा सूत्र जिसे कलावा (Kalava) या मौली भी कहा जाता है जो एक पवित्र धागा होता है जिसे हिंदू धर्म में विशेष रूप से पूजा-पाठ, व्रत, अनुष्ठान और धार्मिक कार्यों के दौरान बांधा जाता है। इसे मुख्य रूप से लाल, पीले और काले रंग के धागों से बनाया जाता है। यह धागा भगवान की कृपा और आशीर्वाद का प्रतीक माना जाता है और इसे बांधने से व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा और दुष्ट शक्तियों से रक्षा मिलती है। कलावा बांधने के नियम रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधने से पहले और बाद में कुछ नियमों का पालन करना आवश्यक होता है। सही विधि से इसे धारण करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। 1. किस हाथ में बांधना चाहिए कलावा? 2. कौन-से दिन कलावा बांधना शुभ होता है? रक्षा सूत्र कितने दिनों तक पहनना चाहिए अक्सर लोग रक्षा सूत्र या कलावा (Kalava) बांधने के बाद इसे लंबे समय तक उतारना भूल जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, समय के साथ कलावे का रंग फीका पड़ने लगता है, जिससे उसकी ऊर्जा भी धीरे-धीरे कम हो जाती है और अंततः समाप्त हो जाती है। शास्त्रों के अनुसार, इसे अधिकतम 21 दिनों तक ही पहनना चाहिए, क्योंकि इस अवधि के बाद इसका रंग बदलने लगता है। जिस कलावे का रंग उतर जाए, उसे धारण नहीं करना चाहिए। कलावा बांधने से मिलने वाले लाभ रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधने से कई आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ होते हैं। 1. बुरी नजर से बचाव कलावा बांधने से व्यक्ति पर बुरी नजर नहीं लगती और नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है। 2. ग्रह दोषों का निवारण ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रक्षा सूत्र धारण करने से शनि, राहु और केतु के बुरे प्रभाव कम होते हैं। 3. आत्मबल और आत्मविश्वास बढ़ता है इससे व्यक्ति को मानसिक और आत्मिक शक्ति मिलती है, जिससे वह जीवन की कठिनाइयों का सामना करने में सक्षम होता है। 4. स्वास्थ्य लाभ कलावा को सही तरीके से बांधने से रक्त संचार बेहतर होता है और यह स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव डालता है। इसे भी पढ़ें:- इन 3 दिनों तक बंद रहते हैं कपाट, बंटता है अनोखा प्रसाद! कलावा बांधने की सही विधि रक्षा सूत्र (Raksha Sutra) को बांधते समय विशेष मंत्रों का उच्चारण किया जाता है। यह मंत्र इस प्रकार है – “ॐ भद्रायै च विद्महे, भीमायै च धीमहि, तन्नो देवी प्रचोदयात्।” इस मंत्र को बोलते हुए रक्षा सूत्र को बांधना चाहिए। इससे इसका प्रभाव और अधिक बढ़ जाता है। रक्षा सूत्र को कब और कैसे खोलना चाहिए? नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi news Kalava #RakshaSutra #KalawaSignificance #HinduTradition #SacredThread #KalawaRules #SpiritualBeliefs #HinduCustoms #ThreadOfProtection #VedicRituals #KalawaWearing

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Masan Holi 2025: बनारस में कब और कैसे मनाई जाएगी यह रहस्यमयी होली?

होली के रंगों में रंगी भारत की धरती पर बनारस का एक विशेष पर्व हर साल अनूठे अंदाज में मनाया जाता है, जिसे मसान होली के नाम से जाना जाता है। इस होली का संबंध मृत्यु और मुक्ति से जुड़ा है, क्योंकि यह महाश्मशान में मनाई जाती है। बनारस में मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर खेले जाने वाली यह होली देशभर के अन्य होली उत्सवों से अलग है। 2025 में मसान होली (Masan Holi) कब मनाई जाएगी, इसकी परंपरा कैसे शुरू हुई और इसका क्या महत्व है? आइए जानते हैं। मसान होली 2025 की तिथि मसान होली (Masan Holi)  हर साल रंगभरी एकादशी के दिन मनाई जाती है, जो महादेव के भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। 2025 में मसान होली 11 मार्च को मनाई जाएगी। रंगभरी एकादशी के दिन काशी के कोतवाल माने जाने वाले बाबा कालभैरव का विशेष पूजन होता है, और इस दिन से ही काशी में होली की धूम शुरू हो जाती है। मसान होली का आयोजन मणिकर्णिका घाट (Manikarnika Ghat) पर होता है, जहाँ भक्त और साधु-संत महाश्मशान में बाबा विश्वनाथ के साथ रंगों से खेलते हैं। मसान होली की अनूठी परंपरा मसान होली (Masan Holi) को दुनिया की सबसे रहस्यमयी और अद्भुत होली कहा जाता है। अन्य स्थानों पर जहाँ होली उत्सव प्रेम, उल्लास और भाईचारे का प्रतीक होती है, वहीं काशी की यह होली मृत्यु, अघोरी साधना और मोक्ष की अवधारणा को दर्शाती है। इस दिन अघोरी और साधु-संत बाबा महाकाल के रंग में रंगे नजर आते हैं। मणिकर्णिका घाट पर चिता भस्म से होली खेली जाती है और बाबा विश्वनाथ की भक्ति में पूरा वातावरण शिवमय हो जाता है। इसे ‘चिता भस्म होली’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसमें साधु-संत और भक्त चिता की राख को गुलाल की तरह उपयोग करते हैं। मसान होली का आयोजन कैसे होता है? मसान होली (Masan Holi) का पर्व मणिकर्णिका घाट पर अत्यंत श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाता है। इस विशेष दिन पर साधु-संत और शिव भक्त भगवान महादेव की पूजा-अर्चना और हवन का आयोजन करते हैं। इसके पश्चात, चिता की भस्म से होली खेली जाती है, जो इस उत्सव को अनूठा और अद्भुत बनाता है। पूरे घाट पर “हर-हर महादेव” के जयघोष से दिव्य वातावरण निर्मित हो जाता है। इस पावन अवसर पर साधु और श्रद्धालु एक-दूसरे को चिता की भस्म का तिलक लगाते हैं, जिससे वे सुख, समृद्धि, वैभव और भगवान शिव (Lord Shiva) का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। यह अनोखी परंपरा शिव भक्ति और मृत्यु से परे जीवन के गूढ़ रहस्यों को दर्शाती है। इसे भी पढ़ें:- रंग, भक्ति और परंपराओं से सराबोर ब्रज की होली है कब? जानें पूरा शेड्यूल मसान होली का महत्व कैसे पहुँचे बनारस? नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन, अगर आपको इस बारे में कोई भी संदेह है तो किसी एक्सपर्ट से बात करें या गूगल सर्च की मदद लें। Latest News in Hindi Today Hindi News Manikarnika Ghat Masan Holi #MasanHoli2025 #VaranasiFestivals #HoliWithAshes #LordShivaCelebration #ManikarnikaGhat #HarishchandraGhat #NagaSadhus#UniqueHoli #SpiritualFestivals #KashiTraditions

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Kharmas March 2025 : मार्च 2025 में कब से शुरू होगा खरमास? जानिए तिथि और इसका धार्मिक महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार खरमास एक विशेष काल होता है जिसमें किसी भी प्रकार के शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है। यह तब शुरू होता है जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं। इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, नए व्यापार की शुरुआत, वाहन या संपत्ति खरीदने जैसे मांगलिक कार्यों पर रोक लग जाती है। 2025 में मार्च महीने में खरमास का प्रारंभ हो रहा है, जिससे कई धार्मिक और सामाजिक कार्यों पर अस्थायी विराम लग जाएगा। मार्च 2025 में कब से शुरू होगा खरमास? 2025 में खरमास 14 मार्च से प्रारंभ होकर 13 अप्रैल तक रहेगा। इस एक महीने की अवधि के दौरान कोई भी शुभ कार्य नहीं किए जाएंगे। जैसे ही सूर्य अपनी राशि बदलकर मेष में प्रवेश करेंगे, खरमास समाप्त हो जाएगा और मांगलिक कार्य पुनः शुरू हो सकेंगे। खरमास की अवधि और महत्वपूर्ण तिथियां खरमास में क्यों वर्जित हैं शुभ कार्य? खरमास के दौरान सभी शुभ कार्यों पर रोक लगाने के पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं हैं। जब सूर्य देव गुरु की राशि धनु या मीन में प्रवेश करते हैं, तो उनकी तेजस्विता और प्रभाव में कमी आ जाती है। हिंदू धर्म में सूर्य को सभी ग्रहों का राजा और ऊर्जा का स्रोत माना जाता है, लेकिन इस अवधि में उनका प्रभाव कमजोर होने के कारण शुभ कार्यों के लिए उचित समय नहीं माना जाता। खरमास के दौरान किन कार्यों पर रोक होती है? इसे भी पढ़ें:- शिवलिंग पर चढ़े प्रसाद को खा सकते हैं या नहीं? जानिए धार्मिक मान्यताएं और नियम खरमास में कौन से कार्य किए जा सकते हैं? हालांकि खरमास के दौरान शुभ कार्यों पर रोक होती है, लेकिन यह समय धार्मिक और आध्यात्मिक कार्यों के लिए बेहद उत्तम माना जाता है। इस दौरान किए गए पुण्य कार्यों से विशेष लाभ प्राप्त होता है। खरमास समाप्त होने के बाद शुभ कार्य कब शुरू होंगे? खरमास 13 अप्रैल 2025 को समाप्त हो जाएगा। इसके बाद सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करेंगे, जिसे हिंदू नववर्ष की शुरुआत भी माना जाता है। 14 अप्रैल 2025 से पुनः शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाएगी। नोट: यहां दी गई जानकारी धर्म से जुड़े ग्रंथों के अनुसार साझा की गई है। अगर आप कोई विशेष पूजा करवाना चाहते हैं, तो अपने धर्म गुरुओं के बताये अनुसार करें। Latest News in Hindi Today Hindi News खरमास #Kharmas2025 #HinduAstrology #MarchKharmas #ReligiousBeliefs #SunInPisces #SpiritualSignificance #HinduFestivals #KharmasDoDonts #AuspiciousDates #VedicAstrology

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