Anu Sharma

Health issues in summer

Health issues in summer: गर्मी में होने वाली 5 सामान्य स्वास्थ्य समस्याएं और उनसे सुरक्षित रहने के टिप्स

गर्मी का महीना अपने साथ कड़कती धूप, लंबे दिन और छोटी रातें ले कर आता है। इन दिनों कई हेल्थ रिस्क्स का जोखिम भी रहता है। अधिक तापमान और ह्यूमिडिटी के कारण लोग कई बीमारियों का अनुभव कर सकते हैं। इनकी वजह से आंख, स्किन, बाल, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और न्यूलोजिकल प्रोब्लेम्स हो सकती हैं। इन हेल्थ प्रॉब्लम्स से बचाव के लिए इनके बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। आइए जानें गर्मी में हेल्थ इशूज के बारे में और यह भी जानकारी पाएं कि इस दौरान कैसे सुरक्षित रहा जा सकता है? सबसे पहले गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) के बारे में जान लेते हैं। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer): पाएं जानकारी वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन (World health Organisation) के अनुसार हीट स्ट्रेस मौसम संबंधी डेथस का प्रमुख कारण है और यह डायबिटीज, मानसिक स्वास्थ्य, अस्थमा जैसी अंडरलायिंग डिजीज को बढ़ा सकता है और कुछ संक्रामक रोगों के ट्रांसमिटेड के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। गर्मी से संबंधित बीमारी एक मेडिकल एमर्जेन्सी है। गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) इस प्रकार हैं:  हीट स्ट्रोक (Heat stroke) हीट स्ट्रोक (Heat stroke) ऐसी ऐसी बीमारी है, जो अधिक गर्म टेम्प्रेचर की वजह से होती है। हाई टेम्प्रेचर के कारण इसे हाइपरथर्मिया भी कहा जाता है। इसके लक्षणों में सिरदर्द, जी मिचलाना और कमजोरी आदि शामिल हैं। यही नहीं, गंभीर मामलों में यह ऑर्गन फेलियर, बेहोशी और मृत्यु का कारण बन सकती है। बचाव के तरीके: अगर आपको गर्मी में हीट स्ट्रोक (Heat stroke) से बचना है तो दोपहर को घर से बाहर जाने से बचें। हल्के रंग और कॉटन के कपडे पहनें। बाहर जाते हुए छाते और हैट का इस्तेमाल करें। अगर आपको इसके लक्षण नजर आते हैं तो ठंडे स्थान पर और हाइड्रेट रहें। डॉक्टर की सलाह भी लें।  फूड पोइजनिंग (Food Poisoning) फूड पोइजनिंग गर्मियों में सबसे अधिक होने वाली बीमारियों में से एक है और यह समस्या दूषित फूड्स को खाने से होती है। गर्मियों में फूड पॉइजनिंग होने का कारण यह है कि गर्मी के महीने में ह्यूमिड मौसम बैक्टीरियल ग्रोथ आसानी से होती है। यह समस्या बैक्टेरिया, वायरस, केमिकल या टॉक्सिन्स के कारण फैलती है और इसके कारण डिस्कम्फर्ट, जी मिचलाना, उलटी आना और डायरिया जैसी समस्या हो सकती है। बचाव के तरीके: अपने आहार का खास ध्यान रखें। फलों और सब्जियों को खाने से पहले धोना जरूरी है। स्ट्रीट फूड और बासी खाने को खाने से बचें। पानी को भी अच्छे से फिल्टर करके या उबाल के पीएं। डिहाइड्रेशन (Dehydration) गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में डिहाइड्रेशन (Dehydration) भी सामान्य है। इस रोग का कारण भी गर्म और ह्यूमिड कंडीशंस हैं। गर्मी में शरीर से पानी और नमक पसीने के माध्यम से बाहर निकल जाता है। इसके लक्षण हैं मुंह और जीभ का सुखना, थकावट, भूख न लगना, डार्क यूरिन और बहुत अधिक प्यास लगना आदि।  बचाव के तरीके: पानी और अन्य फ्लुइड्स को पर्याप्त मात्रा में पीएं, ताकि डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बच सके। इसके साथ ही इसके लक्षणों को नजरअंदाज न करें।  इन्फेक्शंस (Infections) मच्छरो और टिक के कारण होने वाले इन्फेक्शन, अमीबिक मेनिंगोएन्सेफेलाइटिस और समर वायरस ऐसे संक्रमण हैं, जो गर्मियों में होते हैं। कई बीमारियां मल, ओरल और सांस के द्वारा बीमार लोगों से फैलती हैं।  बचाव के तरीके:  इस रोग से बचाव के लिए बार -बार हाथ धोएं खासतौर पर खाना खाने से पहले। इसके अलावा संक्रमित व्यक्ति के सम्पर्क में आने से बचें और साफ-सफाई का खास ध्यान रखें।  इसे भी पढ़ें: पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स सनबर्न और स्किन रैशेज (Sunburn and skin rashes) बहुत अधिक पसीना आने के कारण हीट रैशेज हो सकते हैं।  इसके साथ ही अधिक समय तक धुप में रहने के कारण सनबर्न हो सकता है। इसके कारण स्किन में रेडनेस और अन्य समस्याएं हो सकती हैंl बचाव के तरीके: गर्मी में हेल्थ इशूज (Health issues in summer) में इस समस्या से बचाव के लिए कॉटन के कपडे पहनें ताकि यह पसीने को आसानी से सोख सके। इसके साथ ही घर से बाहर निकलते हुए SPF 30+ सनस्क्रीन को अप्लाई करें। अपनी त्वचा को फ्रेश और बैक्टीरिया फ्री रखने के लिए प्रतिदिन दो बार स्नान करें। नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Health issues in summer #Dehydration #FoodPoisoning #healthissuesinsummer #Heatstroke

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Ghibli

चेहरे की पहचान का खतरा: एआई के साथ घिबली का मजा लेने से पहले जानें क्या हो सकते हैं जोखिम?

इस समय पूरा सोशल मीडिया घिबली (Ghibli) स्टाइल पोर्ट्रेट्स से भर चुका है और इसका पूरा श्रेय ओपनएआई (OpenAI) के चैटजीपीटी-4ओ को जाता है। फेसबुक, इंस्टाग्राम और एक्स प्लैटफॉर्म्स पर लोग अपने एआई (AI) द्वारा बनाए अवतारों को शेयर कर रहे हैं। लोग इस वायरल ट्रैंड का हिस्सा बनने के लिए अपनी और अपने बच्चों तक की तस्वीरों को अपलोड कर रहे हैं। यह अलग और अनोखी तस्वीरे क्यूट तो हैं, लेकिन यह अपने साथ कुछ परेशानियां भी ला सकती हैं। ऐसा माना जा रहा है कि घिबली (Ghibli) हमारा फेस चुरा सकता है। यानी, यह मजा आपके लिए सजा भी बन सकता है। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। घिबली ट्रेंड क्या है? घिबली (Ghibli)  हाल ही में प्रचलित एक मशहूर एक ऐसा ट्रेंड है जिसमें लोग अपनी तस्वीरों को क्रिएटिव तरीके से एक अलग तस्वीर में बदल सकते हैं। बड़े-बड़े सेलेब्रिटीज और हस्तियां अपनी तस्वीरों को बदलने के लिए इसका इस्तेमाल कर रही हैं। असल में घिबली एक जापानी एनिमेशन स्टूडियो है, जो अपनी अनोखी और कल्पनाशील फिल्मों के लिए प्रसिद्ध है। इन्होने ही सामान्य तस्वीरों को इस तरह का क्रिएटिव लुक देना शुरू किया था। हयाओ मियाजाकी, इसाओ ताकाहाटा, और तोशियो सुजुकी ने 1985 में प्रसिद्ध जापानी एनिमेशन कंपनी कंपनी घिबली की स्थापना की है। यह ट्रेंड आजकल बहुत प्रसिद्ध हो रहा है। क्या घिबली (Ghibli) चुरा सकता है आपका चेहरा?  घिबली (Ghibli) जहां लोगों के लिए उत्साह का कारण है वहीं यह चिंता का विषय भी है। जो लोग इस टूल का इस्तेमाल कर रहे हैं उनकी सुरक्षा और प्रिवेसी जोखिम में हो सकती है। कई डिजिटल प्राइवेसी से जुड़े लोगों ने ओपनएआई (OpenAI) के घिबली (Ghibli) को लेकर लोगों को सावधान किया है। कुछ लोगों का यह मानना है कि यह टूल ओपनएआई (OpenAI) के लिए हजारों पर्सनल फोटोज को प्राप्त करने की एक चाल हो सकती है। यानि इसका इस्तेमाल करने से यूजर की प्राइवेसी खतरे में पड़ सकती है।  एक्सपर्ट्स ने यह भी नोट किया है कि इन तस्वीरों का एआई (AI) द्वारा मिसयूज किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, किसी व्यक्ति की अपलोड की गई तस्वीर का उपयोग मिसलीडिंग या अपमानजनक कंटेंट तैयार करने के लिए किया जा सकता है। इसके लिए यूजर्स को सावधान रहने की आवश्यकता है ताकि वो भविष्य में किसी समस्या में न पड़ें। इसे भी पढ़ें: Taara chip launch: अब रोशनी से मिलेगी हाई स्पीड इंटरनेट किन बातों का रखें ध्यान? अगर आप अपनी बायोमेट्रिक आइडेंटिटी (Biometric Identity) की सुरक्षा करना चाहते हैं, तो इन बातों का खास ध्यान रखें इसके साथ ही जब जरूरी न हो तो कैमरा एक्सेस न दें। गवर्नमेंट से भी यह जानकारी लेना जरूरी है कि वो बायोमेट्रिक डेटा को कैसे इकठ्ठा करते हैं और उसक कैसे इस्तेमाल किया जाता है?। सरकार द्वारा इस सुविधा के इस्तेमाल को बंद करना चाहिए। बायोमेट्रिक आइडेंटिटी (Biometric Identity) की सुरक्षा के लिए यह बहुत जरूरी है  एआई (AI) ने हमारी जिंदगी को आसान तो बनाया है, लेकिन इससे हम मुश्किल में पड़ सकते हैं। इसलिए, डेटा लीक, आइडेंटिटी चोरी और साइबर धोखाधड़ी का जोखिम बढ़ सकता है, जिससे हमें घिबली (Ghibli) और अन्य टूल्स के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहना चाहिए। Latest News in Hindi Today Hindi  #BiometricIdentity #Ghibli #AI  #OpenAI

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Jio- 20 GB Extra Plan

जियो का तोहफा: 72 दिन वाले प्लान में अब 20GB डेटा मिलेगा एक्स्ट्रा

जियो (Jio) एक भारतीय टेलीकॉम ऑपरेटर और रिलायंस इंडस्ट्रीज की सहायक कंपनी है। जियो (Jio) ने 2016 में अपनी सेवाएं शुरू कीं और तब से यह भारत का सबसे बड़ा टेलीकॉम ऑपरेटर बन चुका है। जियो सर्विसेज अपने यूजर्स के लिए कई सुविधाएं प्रदान करती हैं। यह अपने फ्री वॉइस कॉल्स, सस्ती डेटा रेट्स और अन्य फैसिलिटीज के कारण प्रसिद्ध है। जियो (Jio) के पास अपने यूजर्स के लिए कई प्लान्स उपलब्ध हैं जैसे जियोफोन प्लान्स, ट्रू 5जी अनलिमिटेड प्लान्स, वार्षिक प्लान्स आदि। यूजर अपनी आवश्यकता के अनुसार प्लान को चुन सकता है। अब जियो यूजर्स के लिए एक अच्छी खबर है। क्योंकि, 72 दिन वाले प्लान में अब उन्हें 20GB एक्स्ट्रा डेटा मिलने वाला है। आइए जानें कि जियो का नया प्लान (New plan of Jio) क्या है? जियो का नया प्लान (New plan of Jio): पाएं जानकारी जियो (Jio) अपने ग्रहकों के लिए एक ऐसा ऑफर ले कर आया है, जो इनके ग्राहकों के लिए किसी धमाके से कम नहीं है। इनमें न केवल लम्बी वेलिडिटी दी जा रही है, बल्कि यूजर्ज को एक्स्ट्रा डेटा भी मिल रहा है। यही नहीं, उन्हें ओटीटी सब्सक्रिप्शन भी मिल रहा है। अगर बात की जाए जियो सब्सक्रिप्शन की, तो जियो अपने ग्राहकों के लिए सस्ते और महंगे दोनों तरह के प्लान्स ले कर आता है।  कुछ समय से लोग इंटरनेट डेटा का अधिक इस्तेमाल करते हैं और उसका कारण है ओटीटी स्ट्रीमिंग। इसके कारण डेटा की डिमांड बढ़ती जा रही है। आमतौर पर डेटा प्लान महंगे होते हैं और उसके लिए यूजर्ज को अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं। लेकिन, जियो का नया प्लान (New plan of Jio) यूजर्स को लंबी वैलिडिटी, अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ साथ ही एक्स्ट्रा डेटा भी दे रहा है। क्या है यह प्लान? जियो (Jio) के इस नए प्लान से आपको बार-बार रिचार्ज करने की समस्या से आजादी मिल जायेगी। इस प्लान की कीमत केवल 749 रुपये है और इससे यूजर्ज को  72 दिनों की लंबी वैलिडिटी मिल रही है। इसके फायदे यहीं ख़त्म नहीं हो रहे। इससे आप 72 दिनों के लिए लोकल और एसटीडी सभी नेटवर्क पर अनलिमिटेड कॉल्स कर सकते हैं। यह प्लान ले कर आपको रोजाना फ्री एसएमएस भी मिल जाएंगे।  अगर बात की जाए डेटा (Data) की तो इस प्लान में रोजाना यूजर को में 2GB डेटा भी मिलता है। अगर आप यह प्लान खरीदते हैं, तो आपको 20GB एक्स्ट्रा डेटा मिलेगा। यानी, इस पैक से न केवल आपके पैसों की बचत होगी बल्कि आपको एक्स्ट्रा डेटा भी मिलेगा। यह था जियो का नया प्लान (New plan of Jio), अब जानते हैं जियो (Jio) के अन्य रिचार्ज विकल्पों के बारे में।  इसे भी पढ़ें: Taara chip launch: अब रोशनी से मिलेगी हाई स्पीड इंटरनेट अन्य विकल्प  जियो (Jio) के रिचार्ज प्लान्स में कई अन्य विकल्प भी हैं, जिनमे से आप अपने लिए चुन सकते हैं: इसके अलावा और भी कई प्लान्स हैं, जो जियो (Jio) अपने ग्राहकों को प्रदान करता। आप अधिक जानकारी के लिए जियो (Jio) की ऑफिशियल वेबसाइट पर जा सकते हैं। इसके अलावा आप जियो या अन्य ऍप्लिकेशन्स से यह रिचार्ज आसानी से कर सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi New plan of Jio #NewplanofJio #Jioapps #Jio #Jiophone #Jiousers

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Heatwaves and dehydration

पानी पीना ही काफी नहीं, हीटवेव्स में हाइड्रेशन से बचाव के लिए अपनाएं ये टिप्स

गर्मी का मौसम अपने साथ कई समस्याओं को लेकर आता है। बढ़ते तापमान के कारण स्टमक इंफेक्शन, गर्मी से थकावट, जोड़ों में दर्द और मांसपेशियों में ऐंठन जैसी परेशानियों में बढ़ोतरी होती है। पिछले कुछ सालों से ग्लोबल वार्मिंग और कई अन्य कारणों से भारत के कई हिस्सों में बहुत अधिक गर्मी पड़ रही है। यह हीटवेव्स (Heatwaves) डिहाइड्रेशन (Dehydration) का कारण भी बन सकती हैं। शरीर को इस और कई अन्य समस्याओं से बचाने के लिए जरूरी है शरीर का डाइड्रेट रहना। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के लिए केवल पानी ही पर्याप्त नहीं है? आइए पाएं हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration) के बारे में पूरी जानकारी। हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration): पाएं जानकारी यूनिसेफ (UNICEF) के अनुसार हीटवेव्स (Heatwaves) में बहुत अधिक गर्मी और ह्यूमिडिटी न केवल परेशान करने वालो हो सकती है, बल्कि इससे कई हेल्थ रिस्क भी हैं खासतौर पर बच्चों, बुजर्गों और गर्भवती महिलाओं को। अगर सावधानी न बरती जाए, तो अधिक हीट, हीट स्ट्रोक या कई अन्य घातक प्रॉब्लेम्स का कारण बन सकती है। अगर बात की जाए हीटवेव्स (Heatwaves) की, तो इसे बहुत अधिक गर्मी के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। यह असामान्य रूप से गर्म मौसम का वो समय है, जो कई दिनों तक परेशान कर सकता है। हीटवेव का शरीर पर क्या प्रभाव हो सकता है? हीटवेव्स (Heatwaves) के दौरान हमारा शरीर तापमान को रेगुलेट करने के लिए संघर्ष करता है जिससे हीट से सम्बन्धित बीमारियां हो सकती हैं जैसे डिहाइड्रेशन (Dehydration)। गंभीर मामलों में यह हीटस्ट्रोक का कारण भी बन सकती है, जो जानलेवा है। डिहाइड्रेशन (Dehydration) में त्वचा सूख जाती है, होंठ फट जाते हैं, और रोगी को थकान महसूस होती है। यह तो थी हीटवेव्स और डिहाइड्रेशन (Heatwaves and dehydration) के बीच में सम्बन्ध के बारे में जानकारी। अब जाने डिहाइड्रेशन के बारे में। डिहाइड्रेशन और उसके लक्षण डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या तब होती है जब हमारा शरीर जितना फ्लूइड ग्रहण किया है, उससे अधिक खो या इस्तेमाल कर लेता है। इससे शरीर में पर्याप्त पानी या अन्य फ्लूइड नहीं होते जो शरीर के सामान्य कामों के लिए जरूरी हैं। अगर इन फ्लुइड्स का सेवन नहीं किया जाता है, तो डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या हो सकती है। इसके लक्षण इस प्रकार हैं:  वयस्कों में डिहाइड्रेशन के लक्षण इस प्रकार हैं: इसे भी पढ़ें: कॉफी पीने वालों का बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, लेकिन क्यों? छोटे बच्चों में इसके लक्षण इस प्रकार हैं: डिहाइड्रेशन (Dehydration) की समस्या हलकी हो सकती है या यह गंभीर भी हो सकती है। हीटवेव्स (Heatwaves) के दौरान इस समस्या से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा फ्लूइड लेना आवश्यक है। लेकिन, इससे बचाव के लिए केवल पानी ही पर्याप्त नहीं होता। जानिए इससे बचाव के तरीकों के बारे में।  डिहाइड्रेशन से कैसे बचें? डिहाइड्रेशन (Dehydration) से बचने के लिए केवल पानी ही नहीं बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स का इस्तेमाल करना भी जरूरी है। इन तरीकों से आप इससे बच सकते हैं:  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Heat waves and dehydration #Heatwaves #dehydration #Heatwavesanddehydration #Heatwave

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coffee and cholesterol

कॉफी पीने वालों का बढ़ सकता है कोलेस्ट्रॉल, लेकिन क्यों?

कॉफी (Coffee) एक ऐसा पेय पदार्थ है, जो अधिकतर लोगों को सुबह उठते ही चाहिए होता है। कॉफी को फोकस और एनर्जी लेवल को बूस्ट करने के लिए जाना जाता है। यही कारण है कि अधिकतर लोग इस पर निर्भर रहते है। ज्यादा मात्रा में इसका सेवन करना हेल्थ के लिए हानिकारक हो सकता है, लेकिन अगर इसे सही मात्रा में पीया जाए तो इसके कुछ फायदे भी हैं। कुछ मामलों में ऐसा पाया गया है कि कॉफी (Coffee) पीने से टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क कम होता है और लोगों को वजन कम करने में मदद मिलती है। अगर आप भी कॉफी (Coffee) के शौकीन हैं, तो आपके लिए यह जानना भी जरूरी है कि इससे कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) भी बढ़ सकता है। इसके लिए ऑफिस या अन्य स्थानों में मौजूद कॉफी मशीन (Coffee machine) को जिम्मेदार पाया गया है। यह बात एक स्टडी से साबित हुई है। आइए जानें कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol) के बारे में। कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol): पाएं जानकारी हेल्थलाइन (Healthline) के अनुसार कॉफी (Coffee) सिर्फ एनर्जी को ही बूस्ट नहीं करती है, बल्कि इससे वजन सही रहता है, डिप्रेशन कम होता है और डायबिटीज का रिस्क भी कम रहता है। लेकिन, कुछ लोगों को इसका सेवन करने से बचना चाहिए जैसे गर्भवती और ब्रेस्टफीडिंग कराने वाली महिलाओं को।  एक स्टडी में ऐसा पाया गया है कि ऑफिस में पायी जाने वाली कॉफी मशीन (Coffee machine) में बनी कॉफी में कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) बढ़ाने वाला पदार्थ का लेवल अधिक होता है। यानी, ऑफिस में कॉफी (Coffee) पीने से कोलेस्ट्रॉल लेवल बढ़ सकता है। इसके लिए कई कॉफी मशीनों (Coffee machine) पर स्टडी की गयी और पाया गया कि इस मशीनों में बनी कॉफी (Coffee) में कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाले पदार्थ का लेवल ज्यादा होता है। लेकिन, अगर रेगुलर रूप से ड्रिप-फिल्टर कॉफी मेकर में पेपर फ़िल्टर का इस्तेमाल किया जाए तो यह हानिकारक पदार्थ फ़िल्टर हो सकते हैं और इससे इसके नुकसान से बचा जा सकता है। यह तो थी कॉफी और कोलेस्ट्रॉल के बीच के बारे में की गयी स्टडी (Study on relationship between coffee and cholesterol) । जानिए कि इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है? क्या है उपाय?  अधिकतर लोग ऑफिस में कॉफी मशीन (Coffee machine) का इस्तेमाल करते हैं। इससे उनकी कैफीन की जरूरत पूरी होती है। लेकिन, अगर आप इससे कोलेस्ट्रॉल (Cholesterol) की बढ़ती समस्या से बचना चाहते हैं तो इसका सरल उपाय या है कि पेपर फिल्टर वाले कॉफी मेकर का इस्तेमाल किया जाए। शोधकर्ताओं के अनुसार जो लोग कॉफी के शौकीन है उनके लिए ड्रिप-फिल्टर कॉफी (Coffee) या अन्य अच्छी तरह से फिल्टर की गई कॉफी पीना एक बेहतर उपाय है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कोलेस्ट्रॉल के लेवल पर इस कॉफी (Coffee) के प्रभावों के बारे में और अधिक रिसर्च करना जरूरी है। कॉफी के और साइड इफेक्ट्स क्या हो सकते हैं, यह भी जानिए। इसे भी पढ़ें: मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं? कॉफी के और साइड इफेक्ट्स  हालांकि, कॉफी (Coffee) पीने के कुछ लाभ हो सकते हैं. लेकिन अगर बहुत अधिक मात्रा में पीया जाए तो इसके कुछ साइड इफेक्ट्स भी हैं। इसके कुछ साइड इफेक्ट्स इस प्रकार हैं:  नोट:– यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Study on link between coffee and cholesterol #Studyonlinkbetweencoffeeandcholesterol #coffee #cholesterol #coffeemachine #coffeeandcholesterol

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Google X Taara chip

Taara chip launch: अब रोशनी से मिलेगी हाई स्पीड इंटरनेट

गूगल एक्स (Google X) गूगल द्वारा स्थापित रिसर्च और डेवलपमेंट कंपनी है, जिसकी स्थापना साल 2010 में की गई थी। अगर बात की जाए इस कंपनी के मिशन की, तो इसका मिशन है ऐसी नयी टेक्निक्स का विकास करना जो दुनिया की सबसे बड़ी चुनौतियों को सॉल्व कर सके। गूगल एक्स अपने इनोवेशन और एक्सपेरिमेंट्स के लिए जानी जाती है। हाल ही में गूगल एक्स (Google X) ने तारा चिप (Taara chip) को लांच किया है, जिसमें फाइबर के बिना लाइट बीम्स के माध्यम से हाई स्पीड इंटरनेट प्राप्त (High speed internet) किया जा सकता है। यह इंटरनेट कनेक्टिविटी को आसान और फास्ट बनाने की एक नयी टेक्निक है। आइए जानें गूगल एक्स की तारा चिप (Google X Taara Chip) के बारे में।  गूगल एक्स की तारा चिप (Google X Taara chip): पाएं जानकारी गूगल एक्स (Google X) की यह नई तकनीक है, जिसमें लाइट बीम्स का इस्तेमाल करके हाई स्पीड इंटरनेट (High speed internet) एफेक्ट को प्राप्त किया जा सकता है। यह तकनीक दो पॉइंट्स के बीच लाइट बीम्स के माध्यम से डाटा को ट्रांसमिट करती है। इससे सिग्नल इंटरफेरेंस कम होती है और बुनियादी ढांचे की कॉस्ट भी कम रहती है। यानी, यह फास्ट इंटरनेट प्राप्त करने का आसान तरीका साबित हो सकती है। गूगल एक्स की तारा चिप (google X Taara chip) के फायदे ऐसा माना जा रहा है कि गूगल एक्स की तारा चिप (google X Taara chip) के बहुत से फायदे हैं। यह चिप के शुरुआत फील्ड टेस्ट्स के अनुसार तारा चिप (Taara chip) एक किलोमीटर के आउटडोर पर 10 जीबीपीएस की स्पीड से डेटा ट्रांसमिट कर सकती है। इस तकनीक से ग्लोबल मेश नेटवर्क बनाने की उम्मीद है, जिससे सीमलेस, इंटरफेयरेंस-फ्री कनेक्टिविटी मिलने में मदद मिलेगी। इससे दूरदराज के क्षेत्रों में हाई-स्पीड इंटरनेट मिलने में बहुत अधिक मदद मिलेगी। यानी, इससे इंटरनेट अधिक फास्ट, स्केलेबल और आसानी से उपलब्ध हो सकता है। यह तकनीक उन ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रो के लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है, जहां अभी तक इंटरनेट सुविधा नहीं है।  अगर बात की जाए पुराने सिस्टम की, तो पुराने फाइबर-ऑप्टिक नेटवर्क्स में अंडरग्राउंड इंस्टॉलेशन की आवश्यकता होती है। इसके लिए बहुत अधिक समय और अन्य संसाधनों की आवश्यकता होती है। लेकिन, तारा सिस्टम को कुछ ही देर में  बिना किसी केबल के इन्टॉल किया जा सकता है। हालांकि, यह फाइबर ऑप्टिक्स के समान सिद्धांत को ही फॉलो करता है, लेकिन इसके लिए फिजिकल केबल्स की जरूरत नहीं होती। ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रो के अलावा यह तारा चिप (Taara chip) डाटा सेंटर्स और ऑटोनोमॉस व्हीकल कम्युनिकेशन के लिए एक लचीला, स्केलेबल और लागत प्रभावी विकल्प प्रदान कर सकती है। इसे भी पढ़ें: आईपीएल के लिए जियो ने लाया धांसू प्लान, इतने दिनों तक फ्री मिलेगा Jio Hotstar कब तक उपलब्ध होगी यह तकनीक? जैसा की पहले ही बताया गया है कि यह तारा चिप (Taara chip) डाटा को लाइट सिग्नल्स के रूप में ब्रॉडकास्ट करेगी और इससे केबल्स को जमीन पर बिछाने की जरूरत खत्म हो जाएगी। यही नहीं इसे थोड़ी ही देर में स्थापित किया जा सकता है। गूगल एक्स की तारा चिप (google X Taara chip) को छोटा, अधिक कुशल और ब्रॉडर ऍप्लिकेशन्स के लिए बनाया गया है। ऐसा माना जा रहा है कि गूगल एक्स (Google X) साल 2026 तक इसका कमर्शियल वर्जन लॉन्च करने की योजना बना रहा है। उम्मीद है कि आने वाले समय पर इस तकनीक से व्यापक रूप से हाई स्पीड इंटरनेट (High speed internet) मिलेगा। इससे स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, चिकित्सा और स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और अनुसंधान आदि में आसानी से हाई स्पीड इंटरनेट (High speed internet) मिलेगा और अधिक लोग इस सुविधा का लाभ ले पाएंगे।  Latest News in Hindi Today Hindi google X taara chip #googleXtaarachip #googleX  #taarachip #taara #google #highspeedinternet

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Samsung Galaxy A26 5G

सैमसंग गैलेक्सी A26 5G भारत में लॉन्च: जानें कीमत और स्पेसिफिकेशन्स

सैमसंग (Samsung) एक प्रसिद्ध कंपनी है, जो इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, और घरेलू उपकरणों को बनाती है। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्मार्टफोन (Smartphone) निर्माता कंपनियों में से एक है। इस कंपनी के स्मार्टफोन (Smartphone) अपने डिजाइन, गुणवत्ता और सुरक्षा के लिए जाने जाते हैं। सैमसंग (Samsung) समय-समय पर अपने नए फोन लांच करती रहती है। इन्ही में से एक सीरीज है सैमसंग गैलेक्सी। यह फोन स्मार्टफोन (Smartphone) एंड्रॉयड ऑपरेटिंग सिस्टम पर चलते हैं और विभिन्न प्रकार की विशेषताओं और सुविधाओं के साथ आते हैं, जैसे कि टचस्क्रीन डिस्प्ले, कैमरा, वाई-फाई कनेक्टिविटी आदि। हाल ही में भारत में सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) को लांच किया गया है, जो किफायती होने के साथ-साथ अपने फीचर्स के लिए चर्चा में है। आइए जानें सैमसंग के इस नए फोन के बारे में विस्तार से। भारत में सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) : पाएं जानकारी भारत में सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) स्मार्टफोन में यूजर्स को सर्कल टू सर्च, एआई सेलेक्ट, ऑब्जेक्ट इरेजर और अन्य जैसी कई एआई सुविधाएं मिलेंगी। इन सुविधाओं में एएमओएलईडी डिस्प्ले, एक्सिनॉस 1380 प्रोसेसर और 50एमपी ओआईएस कैमरा शामिल हैं। इसके अलावा यह फोन वाटर और डस्ट प्रूफ भी है। इस स्मार्टफोन (Smartphone) में कई फीचर्स हैं। भारत में हाल ही ले लांच हुए सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) के फीचर्स के बारे में जानें:  डिजाइन सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) आपके रोजाना के कार्यो को स्मार्ट और आसान बनाने में फायदेमंद है। इसमें कई अच्छी फैसिलिटीज हैं। इसका प्रीमियम ग्लास बैक डिजाइन है और इसकी मोटाई केवल 7.7mm है। जिससे इसे पकड़ना अन्य मॉडल्स की तुलना में आसान है। यह मोटाई सैमसंग (Samsung) के अन्य स्मार्टफोन्स की तुलना में कम है। सैमसंग गैलेक्सी A26 5G का डिस्प्ले सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) का सुपर एएमओएलईडी डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट के साथ उपलब्ध है, जिससे इसका इस्तेमाल अपने आप में अनोखा अनुभव है। इससे यूजर्स के लिए वीडियो देखना, गेमिंग आदि का अनुभव बेहतरीन बनता है। यानी, हर उम्र के यूजर के लिए यह एक अच्छा स्मार्टफोन (Smartphone) है। सैमसंग गैलेक्सी A26 5G परफॉरमेंस सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) में एक्सिनॉस 1380 प्रोसेसर है, जो गेमिंग और मल्टीटास्किंग के लिए बेहतरीन है।  सैमसंग गैलेक्सी A26 5G कैमरा इस फोन में 50एमपी ओआईएस मैन कैमरा, 8एमपी अल्ट्रावाइड शूटर लैंडस्केप और आउटडोर कैप्चर करने के लिए 2एमपी मैक्रो लेंस क्लोज़-अप शॉट्स के लिए है। सेल्फी के लिए इसमें13एमपी फ्रंट कैमरा भी है। यही नहीं, इस फोन में 5000mAh बैटरी है जो फास्ट चार्जिंग करता है और एक बार चार्ज करने पर पूरा दिन यह फोन डिस्चार्ज नहीं होता। इसे भी पढ़ें: Oppo का शानदार वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन 24,000 से कम में? सैमसंग गैलेक्सी A26 5G सेफ्टी सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस है, जो स्क्रैच से बचाता है। सैमसंग (Samsung) ने पहली बार गैलेक्सी ए सीरीज पर वन यूआई 7.0 को इंटेग्रेट किया है। सैमसंग (Samsung) नॉक्स वॉल्ट सुरक्षा की एक लेयर जोड़ता है, और फोन में चोरी का पता लगाने और नॉक्स मैट्रिक्स जैसी सिक्योरिटी फीचर्स मौजूद हैं। इसके साथ ही यह फोन चार रंगों में उपलब्ध है पीच, मिंट, सफेद और काला। आप इनमे से अपनी पसंद के फोन को खरीद सकते हैं। अगर बात की जाए इस स्मार्टफोन (Smartphone) की कीमत की, तो 8GB रैम/128GB स्टोरेज वाले फोन की कीमत 22,999 रुपये है जबकि 8GB/256GB वेरिएंट के लिए यह कीमत 25,999 रुपये हैं। सैमसंग गैलेक्सी A26 5G (Samsung Galaxy A26 5G) को आप ऑनलाइन या ऑफलाइन दोनों तरीकों से खरीद सकते हैं। आपको इनमे कुछ छूट और ऑफर भी मिल सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Samsung Galaxy A26 5G #SamsungGalaxyA26-5G #SamsungGalaxyA26 #SamsungGalaxy #Samsung

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Breast Cancer

नैनोटेक्नोलॉजी का कैंसर पर हमला! ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर के इलाज में नई उम्मीद

ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) एक ऐसी बीमारी है, जिसमें असमान्य ब्रेस्ट सेल्स अनियंत्रित रूप से ग्रो होते हैं और ट्यूमर का रूप ले लेते हैं। अगर इसकी सही जांच न हो पाए ,तो यह ट्यूमर पूरे शरीर में फैल जाता है और घातक हो सकता है। ब्रेस्ट कैंसर सेल्स की शुरुआत मिल्क डक्ट्स के मिल्क प्रोड्यूसिंग लोब्यूल्स के अंदर होती हैं।  ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) के इलाज के कई विकल्प हैं और यह मरीज की उम्र, हेल्थ, कैंसर टाइप आदि पर निर्भर करते हैं। हाल ही में हुई एक स्टडी यह बताती है कि नैनोटेक्नोलॉजी में एक महत्वपूर्ण सफलता ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज में सुधार कर सकती है। आइए जानें नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) के बारे में। नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर: पाएं जानकारी मायोक्लिनिक (Mayoclinic) के अनुसार स्किन कैंसर के बाद ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) महिलाओं में होने वाला सामान्य कैंसर है। लेकिन ब्रेस्ट कैंसर सिर्फ महिलाओं को नहीं होता बल्कि यह समस्या पुरुषों को भी हो सकती है। हर कोई कुछ ब्रेस्ट टिश्यूज के साथ पैदा होता है इसलिए यह समस्या किसी को भी हो सकती है। यह एक गंभीर समस्या है। जैसा कि पहले ही बताया गया है ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) एक गंभीर समस्या है और इसके उपचार के कई विकल्प मौजूद हैं। इसके लिए शोधकर्ता ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के अभी मौजूद ट्रीटमेंट को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए नेक्स्ट जनरेशन नैनोपार्टिकल्स को डेवलेप कर रहे हैं। ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) इस रोग का सबसे घातक रूप है। अब जानिए नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) के बारे में। नैनोटेक्नोलॉजी और ब्रेस्ट कैंसर के बारे में स्टडी (Study on nanotechnology and breast cancer) ऑस्ट्रेलिया में वैज्ञानिक एक नए और एडवांस तरीके से ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज के लिए काम कर रहे हैं। उनका उद्देश्य इस खतरनाक बीमारी के खिलाफ शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने के लिए नए नैनोपार्टिकल्स बनाना है। ये नैनोपार्टिकल्स बहुत छोटे हैं। इन नैनोपार्टिकल्स को शरीर की इम्युनिटी को मजबूत करने और कैंसर सेल्स को पहचानने और हमला करने में मदद करने के लिए बनाया किया गया है। इस शोध को 3 मिलियन ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के ग्रांट से सपोर्ट मिला है और यह ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के अलावा अन्य मुश्किल इलाज योग्य कैंसर के इलाज में भी मदद कर सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह रिसर्च ट्रिपल-नेगेटिव ब्रेस्ट कैंसर (Triple-Negative Breast Cancer) के इलाज में बहुत फायदेमंद साबित हो सकती है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि वे इस खतरनाक बीमारी का जल्दी प्रभावी इलाज विकसित कर सकते हैं। यह इलाज उन महिलाओं के लिए आशा की किरण हो सकता है, जो इस बीमारी का सामना कर रही हैं। इसे भी पढ़ें: मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं? क्या ब्रेस्ट कैंसर से बचाव संभव है? हालांकि, ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) से बचाव संभव नहीं है, लेकिन इसके डेवलेप होने के रिस्क को कम किया जा सकता है। इसके लिए नियमित जांच और मैमोग्राम्स जरुरी है ताकि ब्रेस्ट कैंसर का जल्दी निदान हो सके। लेकिन, कुछ अन्य तरीकों से इसके रिस्क को कम किया जा सकता है: कुछ महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) का जोखिम इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि उनके परिवार के सदस्यों को यह बीमारी है या इसका कारण जेनेटिक म्युटेशन है। अगर आपकी स्थिति भी ऐसी ही है, तो आपको निम्नलिखित बातों पर विचार करना चाहिए: अगर आपको ब्रेस्ट कैंसर (Breast cancer) का अधिक खतरा है, तो अपने डॉक्टर से इसके बारे में बात करें ताकि जल्दी निदान या बचाव की संभावनाओं को बढ़ाया जा सके।  नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi Breast Cancer #Studyonnanotechnologyandbreastcancer #Triple-NegativeBreastCancer #breastcancer #cancer

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Oppo F29

Oppo का शानदार वॉटरप्रूफ स्मार्टफोन 24,000 से कम में?

ओप्पो (Oppo) कंपनी के फोन उच्च गुणवत्ता वाले कैमरे, पावरफुल परफॉरमेंस और बेहतरीन डिजाइन के लिए जाने जाते हैं। यह कंपनी अपने कस्टमर्स को नई सुविधाएं और टेक्निक्स प्रदान करती हैं जैसे फास्ट चार्जिंग, एआई पॉवर्ड कैमरा आदि। यह फोन कई सीरीज में उपलब्ध हैं। ओप्पो कंपनी समय-समय पर नए उत्पादों को लांच करती रहती है। हाल ही में इन्होने वाटरप्रूफ फोन (Waterproof phone) बाजार में उतारे हैं जो बहुत ही कम दामों में मिल रहे हैं। यानी, आपको कम कीमत में बेहतरीन वाटरप्रूफ फोन (Waterproof phone) मिल सकते हैं। आइए जानें किफायती ओप्पो वाटरप्रूफ फोन (Affordable Oppo waterproof phone) के बारे में और इनके फीचर्स के बारे में भी जानें। किफायती ओप्पो वाटरप्रूफ फोन (Affordable Oppo waterproof phone): पाएं जानकारी ओप्पो  (Oppo) ने भारत में अपनी नई F29 सीरीज को लांच किया है। यह सीरीज दो हैंडसेट्स के साथ आई है एक है ओप्पो F29 प्रो (Oppo F29 Pro) और दूसरा है F29 । यह दोनों हैंडसेट एडवांस सिग्नल बूस्टर फीचर के साथ आते हैं और स्ट्रांग कनेक्टिविटी प्रदान करते हैं। इन फोन्स को बहुत अच्छे से डिजाइन किया गया। लेकिन, इनका खास बात यह है कि फोन के अंदर पानी जाने पर भी यह फोन खराब नहीं होंगे। ओप्पो F29 (Oppo F29) 5G की कीमत 23,999 रुपये से शुरू होती है। इन्हें आप ओप्पो  (Oppo) के ई-स्टोर पहले ही आर्डर कर सकते हैं। बुक किए गए फोन 27 मार्च के बाद डिलीवर किए जाएंगे। ओप्पो F29 प्रो (Oppo F29 Pro) के दूसरे वेरिएंट की कीमत 27,999 रुपये है। इसके कुछ अन्य वेरिएंट भी उपलब्ध हैं, जिनकी कीमत इससे थोड़ी ज्यादा है।  ओप्पो वाटरप्रूफ फोन: क्या हैं इसके फीचर्स? ओप्पो वाटरप्रूफ फोन (Waterproof phone) कई फीचर्स के साथ आते हैं। इसकी सबसे खास बात तो यही है कि यह कम कीमत के हैं और वाटरप्रूफ हैं।  आइए जानें इनके बारे में विस्तार से:  डिस्प्ले: ओप्पो F29 प्रो (Oppo F29 Pro) और F29 में 6.7 इंच का फुल-एचडी और AMOLED डिस्प्ले है। अगर बात की जाए इसके रिफ्रेश रेट का तो इसका रिफ्रेश रेट 120Hz है और टच सैंपलिंग रेट 240Hz तक है। ओप्पो F29 का स्टैंडर्ड वेरिएंट कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i के साथ आ रहा है। प्रोसेसर: इस फोन के स्टैंडर्ड मॉडल में क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 6 जेन 1 प्रोसेसर दिया गया है। वहीं, इसका प्रो मॉडल मीडिया टेक डीमेंसिटी 7300 एनर्जी प्रोसेसर के साथ आता है। इस सीरीज के स्मार्टफोन 12GB LPDDR4X रैम और 256जीबी UFS 3.1 स्टोरेज को सपोर्ट करते हैं। ये एंड्राइड 15 पर बेस्ड कलर ओएस 15 पर काम करते हैं। इसे भी पढ़ें: आईपीएल के लिए जियो ने लाया धांसू प्लान, इतने दिनों तक फ्री मिलेगा Jio Hotstar बैटरी: ओप्पो F29 5G 6,500mAh की बैटरी है और यह बैटरी 45W SuperVOOC चार्जिंग को सपोर्ट करती है। F29 प्रो में 6,000mAh की बैटरी है और यह बैटरी 80W SuperVOOC चार्जिंग को सपोर्ट करती है। यह दोनों फोन इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर के साथ उपलब्ध हैं, इसके साथ ही इनमें 5G, 4G, वाई-फाई 6, ब्लूटूथ, OTG, GPS और USB टाइप-C हैं।  कैमरा: कैमरे की बात करें तो F29 Pro 5G में OIS के साथ 50MP का प्राइमरी कैमरा और 2MP का डेप्थ सेंसर है, जबकि F29 5G में भी यही 50MP का सेंसर है, लेकिन OIS के बिना। दोनों डिवाइस में 16MP का सेल्फी कैमरा है। आप किफायती ओप्पो वाटरप्रूफ फोन (Affordable Oppo waterproof phone) को ऑनलाइन आसानी से खरीद सकते हैं। F29 Pro 5G को मार्बल व्हाइट और ग्रेनाइट ब्लैक रंग में लांच किया गया है, जबकि F29 5G सॉलिड पर्पल और ग्लेशियर ब्लू रंग में मिलेगा। आप अपनी पसंद का फोन चुन सकते हैं और आसानी से उसे आर्डर कर सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Oppo F29 Pro #OppoF29Pro #Oppo #AffordableOppowaterproofphone #OppoF29 #waterproofphone

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AMH Test

मां बनने की उम्र का लग सकता है अंदाजा: अब एक टेस्ट से पता चलेगा महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं?

आजकल के जमाने के जिंदगी एक दौड़ की तरह हो कर रह गयी है, जिसमें हर कोई पहले नंबर पर आना चाहता है। पहले पढ़ाई, फिर कैरियर उसके बाद नौकरी और इसी में पूरी जिंदगी निकल जाती है। इसी दौड़ में लोग आजकल अधिक उम्र के होने पर शादी के बारे में सोच रहे हैं और इससे उनके परिवार की शुरुआत भी देरी से होती है। इसका सीधा असर होता है महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर।  ऐसे में एक ऐसा टेस्ट है, जिससे यह पता चल सकता है कि महिला के शरीर में कितने एग बचे हैं और वो कितने समय तक हेल्दी रहेंगे? इसके साथ ही अगर उनके अंडाशय में कोई समस्या है, तो उसका पता भी इससे चल सकता है। इस टेस्ट का नाम है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) या एएमएच टेस्ट (AMH test)। आइए जानें इसके बारे में विस्तार से। क्या है एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test)?  क्लीवलैंड क्लिनिक (Clevelandclinic) के अनुसार एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) से खून में एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) की मात्रा को मापा जाता है। सभी लोगों में इन हॉर्मोन्स का उत्पादन होता है, लेकिन डॉक्टर महिलाओं में इस टेस्ट का उपयोग करते हैं। एंटी मुलेरियन हार्मोन (Anti mullerian hormone) गर्भाशय में भ्रूण के सेक्स ऑर्गन्स के विकास में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। यह हॉर्मोन लेवल मेल फीटस में अधिक होते हैं, है क्योंकि यह उन्हें महिला प्रजनन अंगों के विकास से रोकता है। फीमेल फिट्स को अपने विकास के लिए कम मात्रा में इन हॉर्मोन्स की जरूरत होती है। एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) को कब कराया जाता है? डॉक्टर यह जानने के लिए एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) की सलाह दे सकते हैं कि ओवेरियन मास कहीं ग्रैनुलोसा सेल ट्यूमर तो नहीं है। इसके साथ ही इसका का उपयोग इन चीजों को जांचने के लिए भी किया जा सकता है: एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) से पता चलता है कि महिला में कितने एग बचे हैं और यह कब तक हेल्दी रह सकते हैं? इससे पता चल सकता है कि महिला के पास गर्भवती होने के लिए कम समय है या नहीं। इस टेस्ट से यह भी पता चल सकता है कि इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की तैयारी के लिए ओवरीज को कई अंडों को फर्टिलाइज करने के लिए स्टिमुलेट करने वाले इंजेक्टेबल फर्टिलिटी ड्रग्स के प्रति महिला कितने अच्छे से रिस्पॉन्ड कर सकती है या नहीं। एंटी मुलेरियन टेस्ट से क्या पता नहीं चलता है? एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) यानी एएमएच टेस्ट (AMH test) को एग काउंट से कनेक्ट किया जाता है। इससे फर्टिलिटी (उपचार के साथ या बिना) या मेनोपॉज से गुजरने के समय का पता नहीं लगता है। इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल सामान्य सीमा में होनी चाहिए। कुछ अन्य फैक्टर भी गर्भधारण करने की क्षमता को प्रभावित कर सकते हैं, जैसे: उम्र के अनुसार कितना एंटी मुलेरियन हॉर्मोन लेवल अच्छा है? एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल एक उम्र के बाद कम हो सकता है, इसलिए 30, 40 और 50 की उम्र में ओवेरियन रिजर्व क्षमता में कमी आना सामान्य बात है। इन हॉर्मोन्स का लेवल इस प्रकार होना अच्छा माना गया है: इसे भी पढ़ें: सिंगल पेरेंटिंग नहीं है आसान: सिंगल पैरेंट को करना पड़ता है इन 5 चुनौतियों का सामना यह भी ध्यान रखना चाहिएअधिक एंटी मुलेरियन हॉर्मोन (Anti mullerian hormone) लेवल हमेशा अच्छी बात नहीं होती। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के रोगियों में में यह लेवल अधिक हो सकता है। यह एंटी मुलेरियन टेस्ट (Anti mullerian test) आसानी से घर पर किया जा सकता है। हालांकि, घर पर किए जाने वाले टेस्ट सुविधाजनक होते हैं, लेकिन इसके बाद सलाह के लिए डॉक्टर से बात करें। नोट:- यहां दी गई जानकारी रिसर्च के आधार पर दी गई है। लेकिन अगर आप किसी भी शारीरिक समस्या से परेशान हैं, तो अपने हेल्थ एक्सपर्ट से ज़रूर सलाह लें। Latest News in Hindi Today Hindi AMH Test #Hormone #AMHtest #AntiMullerianTest, #AntiMullerianHormone

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