Nidhi Sinha

BJP leader Sudhanshu Trivedi asserts

हम संविधान को कुड़ेदान में फेंकने नहीं देंगे: सुधांशु त्रिवेदी

जैसे-जैसे बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) नजदीक आ रहे हैं, राज्य की सियासत भी गरमाती जा रही है। पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हाल ही में आयोजित एक बड़ी रैली ने इस राजनीतिक तापमान को और बढ़ा दिया है। यह रैली वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) के खिलाफ आयोजित की गई थी, जिसमें राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेता तेजस्वी यादव ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार बनती है, तो वे इस कानून को प्रदेश में लागू नहीं होने देंगे और उसे कूड़ेदान में फेंक देंगे। उनके इस बयान पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पलटवार किया है। तेजस्वी का एलान और सियासी संदेश RJD नेता तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) ने वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) को मुस्लिम समुदाय की जमीन और अधिकारों पर हमला बताते हुए इसे अस्वीकार्य बताया। उन्होंने मंच से कहा कि यह कानून प्रदेश के अल्पसंख्यकों के खिलाफ है और उनकी पार्टी इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेगी। तेजस्वी ने इसे धर्मनिरपेक्षता और संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ बताया और आरोप लगाया कि केंद्र सरकार धार्मिक ध्रुवीकरण की राजनीति कर रही है। तेजस्वी यादव के इस बयान को न सिर्फ उनके मुस्लिम वोट बैंक को साधने की कोशिश माना जा रहा है, बल्कि इसे एक बड़े राजनीतिक दांव के तौर पर भी देखा जा रहा है, जिससे वे NDA के खिलाफ एक मज़बूत सेकुलर गठबंधन का नेतृत्व करना चाहते हैं। भाजपा का पलटवार: संविधान और संसद का अपमान? भाजपा ने इस बयान पर सख्त प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. सुधांशु त्रिवेदी (Dr. Sudhanshu Trivedi) ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी के बयान को संविधान और संसद का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि जिस गांधी मैदान में कभी लोकतंत्र की रक्षा के लिए लाखों लोगों ने आंदोलन किया था, उसी जगह अब संविधान के विरुद्ध बयानबाजी हो रही है। सुधांशु त्रिवेदी (Sudhanshu Trivedi) ने कहा है कि तेजस्वी यादव ने संसद से पारित एक कानून को कूड़ेदान में फेंकने की बात कहकर न केवल लोकतांत्रिक व्यवस्था पर हमला किया है, बल्कि न्यायपालिका और संविधान का भी अनादर किया है। उन्होंने यह भी कहा कि वक्फ शब्द कुरान में नहीं है और यह एक बाद की व्याख्या है, जिसे मौलवियों और मुल्लाओं द्वारा गढ़ा गया है। उनके अनुसार इस्लाम देने और ज़कात की बात करता है, न कि संपत्ति इकट्ठा करने की। वक्फ कानून का संदर्भ वक्फ एक इस्लामिक व्यवस्था है, जिसके तहत मुसलमान अपनी संपत्ति को धार्मिक या सामाजिक उद्देश्य के लिए दान करते हैं। भारत में वक्फ संपत्तियों की देखरेख के लिए वक्फ बोर्ड (Wakf Amendment Act)  बनाए गए हैं और समय-समय पर इनसे संबंधित कानूनों में संशोधन होते रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा प्रस्तावित वक्फ संशोधन कानून का उद्देश्य पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया जा रहा है, लेकिन विरोधी दलों का आरोप है कि इससे मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों पर राज्य का नियंत्रण बढ़ेगा और अल्पसंख्यक अधिकारों का हनन होगा। नमाजवाद बनाम समाजवाद भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी (BJP Spokesperson Sudhanshu Trivedi) ने तेजस्वी यादव पर कटाक्ष करते हुए कहा कि वे समाजवाद की बात नहीं कर रहे, बल्कि नमाजवाद का प्रचार कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तेजस्वी बिहार में शरिया कानून लागू करना चाहते हैं? उन्होंने वक्फ प्रणाली को समाजवाद के विरोध में बताते हुए कहा कि यह कुछ लोगों को सारी संपत्तियों पर कब्जा करने का अधिकार देता है, जो सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है। इसे भी पढ़ें:-  महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन चुनावी रणनीति या सांप्रदायिक ध्रुवीकरण? इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक विश्लेषक आगामी बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) से जोड़कर देख रहे हैं। तेजस्वी यादव का यह बयान उन्हें मुस्लिम मतदाताओं के बीच लोकप्रिय बना सकता है, लेकिन साथ ही यह भाजपा को भी मौका देता है कि वह धर्म और संविधान के मुद्दे को केंद्र में रखकर अपने कोर वोट बैंक को सक्रिय करे। यह पूरा विवाद आने वाले चुनाव में ध्रुवीकरण की राजनीति को और तेज कर सकता है। वक्फ संशोधन कानून (Wakf Amendment Act) पर तेजस्वी यादव और भाजपा के बीच टकराव ने बिहार की सियासत में नया मोड़ ला दिया है। जहां एक तरफ तेजस्वी इसे अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं, वहीं भाजपा इसे लोकतंत्र और संविधान पर हमला मान रही है। यह साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा न केवल कानूनी बल्कि चुनावी बहस का भी केंद्र बनेगा। बिहार का मतदाता अब देखेगा कि सियासी दल धार्मिक भावनाओं से ऊपर उठकर सामाजिक और विकास संबंधी मुद्दों पर कितना ध्यान देते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi news Wakf Amendment Act #SudhanshuTrivedi #Constitution #BJP #IndianPolitics #ParliamentDebate #PoliticalNews

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Maharashtra Govt Scraps Old Language Policies

3-Language Policy: महाराष्ट्र में तीन भाषा नीति पर सरकार का बड़ा फैसला: पुरानी नीतियां रद्द, नई समिति का गठन

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। राज्य में पहले जारी किए गए दोनों सरकारी आदेश (GR) 16 अप्रैल 2025 और 17 जून 2025 के फैसले को अब औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस फैसले की जानकारी दी। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे (Dy. CM Eknath Shinde) और अजित पवार (Ajit Pawar) भी मौजूद थे। यह फैसला राज्य में तीन भाषा नीति (3-Language policy) को लेकर बढ़ते विरोध और भ्रम की स्थिति के बाद लिया गया है। तीन भाषा नीति (3-Language policy) पर बढ़ता विवाद दरअसल, महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने 16 अप्रैल 2025 को एक सरकारी आदेश जारी किया था, जिसके अंतर्गत अंग्रेजी और मराठी माध्यम के स्कूलों (English and Marathi Medium School) में कक्षा 1 से 5 तक के छात्रों के लिए हिंदी भाषा को तीसरी अनिवार्य भाषा के रूप में पढ़ाना अनिवार्य किया गया था। इस निर्णय के खिलाफ विभिन्न शिक्षाविदों, सामाजिक संगठनों और क्षेत्रीय राजनीतिक दलों ने विरोध दर्ज किया था। उनका तर्क था कि इससे मराठी भाषा (Marathi Language) और स्थानीय संस्कृति पीछे छूट सकती है। शिवसेना यूबीटी (Shivsena-UBT), एमएनएस (MNS), एनसीपी-एसपी (NCP-SP) और अन्य राजनीतिक पार्टियां एकजुट होकर विरोध कर रही हैं। वहीं राजनीतिक पार्टियों द्वारा किये जा रहे विरोध को ध्यान में रखते हुए सरकार ने 17 जून को दूसरा सरकारी आदेश जारी कर हिंदी को वैकल्पिक भाषा बना दिया, लेकिन इससे स्थिति साफ होने के बजाय और अधिक जटिल हो गई। कई स्कूलों और अभिभावकों में भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई कि कौन-सी भाषा अनिवार्य है और कौन-सी वैकल्पिक। मुख्यमंत्री फडणवीस का बयान मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Chief Minister Devendra Fadnavis) ने कहा है कि हम मराठी केंद्रित और मराठी छात्रों की जरूरतों को प्राथमिकता देने वाली भाषा नीति बनाएंगे। इस मुद्दे को लेकर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं की जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि उद्धव ठाकरे के मुख्यमंत्री रहते हुए डॉ. रघुनाथ माशेलकर समिति की सिफारिशों के आधार पर तीन भाषा नीति लागू करने का निर्णय लिया गया था। हालांकि, वर्तमान सरकार का मानना है कि भाषा नीति पर ऐसा कोई भी फैसला व्यापक संवाद और विचार-विमर्श के बिना लागू नहीं किया जा सकता। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? नई समिति का गठन राज्य सरकार ने इस विषय पर समीक्षा की और भविष्य की दिशा तय करने के लिए एक्सपर्ट डॉ. नरेंद्र जाधव की अध्यक्षता में एक नई समिति के गठन की घोषणा की है। यह समिति त्रिभाषा सूत्र पर अध्ययन करेगी, राज्य के सभी वर्गों के विचारों को ध्यान में रखेगी और सरकार को एक सर्वमान्य रिपोर्ट सौंपेगी। डॉ. नरेंद्र जाधव इस क्षेत्र में अनुभव रखते हैं और नीति विशेषज्ञ हैं। वे पहले भी शिक्षा और सामाजिक विकास से संबंधित कई महत्वपूर्ण नीतिगत सलाह दे चुके हैं। उनके नेतृत्व में बनी यह समिति यह सुनिश्चित करेगी कि भाषा नीति (Language policy) बच्चों की शिक्षा में सहायक हो, न कि बाधा। मराठी भाषा को प्राथमिकता महाराष्ट्र की नई नीति का फोकस मराठी भाषा (Marathi Language) को सुदृढ़ करना है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि मराठी भाषा राज्य की आत्मा है और इसे शिक्षा व्यवस्था में प्राथमिक स्थान दिया जाएगा। साथ ही, यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि छात्रों को अन्य भाषाओं के ज्ञान से भी वंचित न किया जाए। त्रिभाषा नीति (3-Language policy )का उद्देश्य विद्यार्थियों को भाषाई दृष्टि से समृद्ध बनाना है, लेकिन यह तभी संभव है जब नीति क्षेत्रीय आवश्यकताओं और सामाजिक संवेदनशीलता के अनुरूप बनाई जाए। महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) का यह फैसला भाषा नीति पर एक संतुलित और सोच-समझकर उठाया गया कदम माना जा सकता है। जहां एक ओर इससे मराठी भाषा और संस्कृति की सुरक्षा होती है, वहीं दूसरी ओर नई समिति के गठन से यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि भाषा नीति विद्यार्थियों के हित में हो। यह निर्णय राजनीति से ऊपर उठकर लिया गया है और इसका उद्देश्य राज्य की शैक्षिक नींव को मजबूत बनाना है। अब सबकी निगाहें डॉ. नरेंद्र जाधव समिति की रिपोर्ट पर टिकी हैं, जो भविष्य की भाषा नीति (Language policy) का खाका तैयार करेगी। उम्मीद की जा सकती है कि यह नीति राज्य के बहुभाषिक समाज के लिए लाभकारी सिद्ध होगी और शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक बदलाव लाएगी। Latest News in Hindi Today Hindi news Devendra Fadnavis #educationnews #3languagepolicy #governmentdecision #marathi #hindipolicy #englishpolicy

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Vivo T4 Lite 5G

Vivo ने लॉन्च किया 10,000 रुपये में दमदार 5G स्मार्टफोन: जानिए फीचर्स, कीमत और खासियत 

भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 5G तकनीक की मांग तेजी से बढ़ रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए चीनी स्मार्टफोन निर्माता Vivo ने एक बड़ा कदम उठाते हुए अपनी T-सीरीज में एक नया और किफायती 5G फोन लॉन्च कर दिया है। Vivo का यह नया मॉडल Vivo T4 Lite 5G है, जिसे कंपनी ने उन यूज़र्स को ध्यान में रखकर तैयार किया है जो कम बजट में दमदार फीचर्स वाले 5G फोन (5G Phone) की तलाश कर रहे हैं। Vivo T4 Lite 5G: कीमत और वेरिएंट Vivo T4 Lite 5G को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स में पेश किया गया है: Vivo T4 Lite 5G फोन की पहली सेल 2 जुलाई को दोपहर 12 बजे से Flipkart, Vivo के ऑफिशियल ई-स्टोर और अन्य रिटेल स्टोर्स पर शुरू होगी। Vivo ने इसे दो आकर्षक रंगों में पेश किया है प्रिज्म ब्लू और टाइटेनियम गोल्ड, जो इसे एक प्रीमियम लुक प्रदान करते हैं। Vivo T4 Lite 5G: डिस्प्ले और डिजाइन Vivo T4 Lite 5G में 6.74 इंच का LCD डिस्प्ले है, जो HD+ (720×1600 पिक्सल) रेजोलूशन और 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस डिस्प्ले की 1000 निट्स पीक ब्राइटनेस इसे तेज धूप में भी पढ़ने लायक बनाती है, जो कि इस प्राइस रेंज में कम ही देखने को मिलता है। इसका स्लीक डिजाइन और बड़ी स्क्रीन इसे मल्टीमीडिया और गेमिंग के लिए आदर्श बनाता है। प्रोसेसर और सॉफ्टवेयर फोन में MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, जो कि एक किफायती लेकिन शक्तिशाली 5G प्रोसेसर है। इसके साथ 8GB तक की RAM और 256GB तक की इंटरनल स्टोरेज मिलती है, जिसे microSD कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। यह फोन Android 15 पर आधारित FuntouchOS 15 पर चलता है, जो कि एक क्लीन और यूज़र फ्रेंडली इंटरफेस के लिए जाना जाता है। Vivo T4 Lite 5G: कैमरा फीचर्स कैमरा की बात करें तो Vivo T4 Lite 5G में डुअल रियर कैमरा सेटअप है, जिसमें 50MP का प्राइमरी सेंसर और 2MP का सेकेंडरी सेंसर दिया गया है। फ्रंट में 5MP का सेल्फी कैमरा मौजूद है जो बेसिक वीडियो कॉलिंग (Basic Video Calling) और सोशल मीडिया (Social Media) के लिए पर्याप्त है। यह कैमरा (Camera) सेटअप इस प्राइस रेंज में अच्छी डिटेल और कलर रिप्रोडक्शन प्रदान करता है। Vivo T4 Lite 5G: बैटरी और चार्जिंग फोन की सबसे बड़ी खासियत इसकी 6000mAh की विशाल बैटरी है। कंपनी का दावा है कि यह इस सेगमेंट का सबसे सस्ता फोन है जिसमें इतनी बड़ी बैटरी दी गई है। फोन 15W USB Type-C फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करता है, जिससे लंबी बैटरी लाइफ के साथ चार्जिंग भी सुविधाजनक हो जाती है। Vivo T4 Lite 5G: कनेक्टिविटी और सेफ़्टी  फोन में डुअल 5G, डुअल-बैंड Wi-Fi, और Bluetooth जैसे कनेक्टिविटी फीचर्स मौजूद हैं। सिक्योरिटी के लिए इसमें साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है जो तेज और सटीक है। यह फोन IP64 रेटेड है यानी यह धूल और हल्के पानी की बूंदों से सुरक्षित रहेगा। इसके अलावा इसमें SGS 5 स्टार एंटी फॉल प्रोटेक्शन और MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड शॉक रेसिस्टेंस सर्टिफिकेशन भी है, जिससे यह हल्की गिरावट में भी सुरक्षित रह सकता है। इसे भी पढ़ें:- Govt Warns Online Shoppers: सरकार की यह सलाह नहीं मानने पर अपना सबकुछ गँवा सकते हैं ऑनलाइन शॉपिंग करने वाले Vivo T4 Lite 5G: किसके लिए है यह फोन? Vivo T4 Lite 5G खासतौर पर उन यूज़र्स के लिए है जो बजट में रहते हुए भी लेटेस्ट तकनीक और मजबूत फीचर्स चाहते हैं। छात्र, नौकरीपेशा और पहली बार स्मार्टफोन (Smartphone) खरीदने वाले यूज़र्स के लिए यह एक आदर्श विकल्प हो सकता है। 10,000 रुपये से कम की कीमत में 5G, बड़ी बैटरी, 90Hz डिस्प्ले, और मजबूत डिज़ाइन जैसी खूबियों के साथ Vivo T4 Lite 5G इस सेगमेंट में एक शानदार विकल्प बनकर उभरा है। Vivo का यह कदम निश्चित ही बाजार में बजट 5G स्मार्टफोन्स की प्रतिस्पर्धा को और तेज करेगा। अगर आप कम बजट में एक भरोसेमंद और भविष्य-प्रूफ फोन की तलाश में हैं, तो Vivo T4 Lite 5G पर नज़र डालना फायदेमंद हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi Vivo T4 Lite 5G #VivoT4Lite5G #5Gsmartphone #BudgetPhone #Vivo #SmartPhone

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rashtriya janata dal bihar

Rashtriya Janata Dal: इन 5 नेताओं ने बनाई पार्टी की पहचान

बिहार की राजनीति (Bihar Politics) में राष्ट्रीय जनता दल (Rashtriya Janata Dal {RJD}) लंबे समय से एक मजबूत और प्रभावशाली राजनीतिक शक्ति के रूप में स्थापित है। इस पार्टी की नींव सामाजिक न्याय, पिछड़े वर्गों और वंचित समुदायों की आवाज़ उठाने के उद्देश्य से रखी गई थी। पार्टी के संस्थापक और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव (Former Chief Minister Lalu Prasad Yadav)ने जिस राजनीतिक विचारधारा और रणनीति से इस दल को खड़ा किया, वह आज भी राज्य की सियासत में अहम भूमिका निभा रही है। RJD सुप्रीमों और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव  लालू प्रसाद यादव (Lalu Prasad Yadav) का नाम बिहार की राजनीति में एक विचारधारा, एक आंदोलन और एक साहसिक नेतृत्व का प्रतीक बन चुका है। उन्होंने 1990 के दशक में बिहार की राजनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया। पिछड़े वर्गों, दलितों और अल्पसंख्यकों को सत्ता की मुख्यधारा में लाकर उन्होंने एक नया राजनीतिक समीकरण तैयार किया। भले ही लालू प्रसाद यादव कानूनी मामलों के चलते सक्रिय राजनीति से कुछ दूर हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक पकड़ और विचारधारा आज भी RJD की रीढ़ बनी हुई है। तेजस्वी यादव: युवा नेतृत्व की नई पहचान लालू प्रसाद यादव के छोटे बेटे और बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव (Former Deputy Chief Minister Tejaswi Yadav)ने अब पार्टी की कमान संभाल रखी है। 2020 के बिहार विधानसभा चुनावों (Bihar Assembly Election) में तेजस्वी ने आरजेडी (RJD) को सबसे बड़ी पार्टी बनाकर यह साबित कर दिया कि वे राज्य की जनता, खासकर युवाओं और वंचित वर्गों के बीच लोकप्रिय हैं। आगामी 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) के लिए भी पार्टी ने तेजस्वी को अपना चेहरा घोषित कर दिया है। उनका फोकस रोजगार (Employment), शिक्षा (Education) और स्वास्थ्य (Health) जैसे मुद्दों पर है, जो युवाओं को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं। पांच प्रमुख नेता जो बना रहे हैं RJD की रणनीति मजबूत RJD की मजबूती सिर्फ लालू या तेजस्वी तक सीमित नहीं है। पार्टी के कई वरिष्ठ नेता हैं जो नीति निर्माण, संगठन संचालन और चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनमें से पांच प्रमुख नेता निम्नलिखित हैं: स्व. रघुवंश प्रसाद सिंह – भले ही वे अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उन्होंने पार्टी की नीतिगत संरचना में जो योगदान दिया, उसके लिए उन्होंने हमेशा याद किया जाएगा। उनके विचार आज भी पार्टी की रणनीति में झलकते हैं। अब्दुल बारी सिद्दीकी – RJD के वरिष्ठ मुस्लिम चेहरे के रूप में सिद्दीकी न केवल पार्टी के अंदरूनी निर्णयों में शामिल रहते हैं, बल्कि राज्य में मुस्लिम वोट बैंक (Muslim Vote Bank) को भी पार्टी के पक्ष में संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिवानंद तिवारी – लंबे समय तक लालू यादव के करीबी रहे शिवानंद तिवारी ने पार्टी को वैचारिक मजबूती दी है। वे मीडिया और सार्वजनिक बहसों में पार्टी का मुखर पक्ष रखते हैं। जगदानंद सिंह – वर्तमान में RJD के प्रदेश अध्यक्ष, जगदानंद सिंह संगठन को ज़मीनी स्तर पर मज़बूत करने का कार्य कर रहे हैं। उनका प्रशासनिक अनुभव पार्टी के लिए एक बड़ी ताकत है। मनोज झा – राज्यसभा सांसद और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के रूप में मनोज झा ने RJD की छवि को राष्ट्रीय स्तर पर प्रखर और विचारशील पार्टी के रूप में प्रस्तुत किया है। उनकी वक्तृत्व शैली और सामाजिक न्याय के मुद्दों पर पकड़ उन्हें पार्टी का प्रमुख चेहरा बनाती है। सामाजिक समीकरणों में RJD की पकड़ बिहार में जातीय और सामाजिक समीकरण राजनीति को काफी हद तक प्रभावित करते हैं। RJD का परंपरागत समर्थन यादव, मुस्लिम और अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के बीच रहा है। पार्टी ने समय के साथ महादलित और अति पिछड़ा वर्गों को भी अपने पाले में लाने की कोशिश की है। इसके अलावा महिलाओं और युवाओं को लेकर भी पार्टी नई रणनीतियाँ बना रही है, जिसमें डिजिटल माध्यम, युवाओं के लिए रोजगार योजनाएँ और शिक्षा पर ज़ोर शामिल हैं। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? 2025 विधानसभा चुनाव: तैयारी ज़ोरों पर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) को लेकर RJD ने पहले से ही अपनी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। पार्टी ने हाल ही में अपना कैंपेन सॉन्ग भी लॉन्च किया है, जिसमें तेजस्वी यादव (Tejaswi Yadav) को मुख्य चेहरा बताया गया है। यह सॉन्ग रोजगार, बदलाव और न्याय के मुद्दों को प्रमुखता देता है। पार्टी की जमीनी पकड़, मजबूत संगठन और नेतृत्व के अनुभव ने उसे एक बार फिर से सत्ता के करीब ला दिया है। गठबंधन की संभावनाओं को लेकर भी बातचीत चल रही है, जिसमें कांग्रेस और वाम दलों के साथ तालमेल की कोशिशें हो रही हैं। RJD न सिर्फ बिहार की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक और राजनीतिक चेतना को प्रभावित करने वाली विचारधारा भी है। लालू यादव से लेकर तेजस्वी यादव तक, और अब्दुल बारी सिद्दीकी से लेकर मनोज झा तक, पार्टी एक संतुलित मिश्रण है अनुभव और युवा ऊर्जा का। 2025 के चुनाव में RJD का प्रदर्शन यह तय करेगा कि बिहार की राजनीति में सामाजिक न्याय की यह धारा कितनी प्रभावी बनी रहती है। Latest News in Hindi Today Hindi news Tejaswi Yadav #RJD #RashtriyaJanataDal #BiharPolitics #IndianPolitics #RJDLoyalists

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Artificial Intelligence Specialist

Artificial Intelligence Specialists: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट कैसे बनें?

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) आज के वक्त में सबसे ज्यादा डिमांडिंग फिल्ड है क्योंकि हर क्षेत्र में इसकी जरूरत है अब चाहे वह स्वास्थ्य सेवा हो, शिक्षा, व्यापार या फिर परिवहन। जैसे-जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) का प्रभाव बढ़ रहा है, वैसे-वैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। यदि आप इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपको एक योजनाबद्ध तरीके से शिक्षा, कौशल और अनुभव हासिल करना होगा। आज इस आर्टिकल में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (Artificial Intelligence Specialists) बनने के लिए क्या-क्या जरूरी है ये समझेंगे।  कैसे बन सकते हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट?  आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस स्पेशलिस्ट (AI Specialists) बनने के लिए निन्मलिखित बातों को ध्यान रखें –  1. शैक्षणिक योग्यता (Educational Qualifications) AI विशेषज्ञ बनने के लिए सबसे पहले एक मजबूत शैक्षणिक आधार होना आवश्यक है। आप कंप्यूटर साइंस, डेटा साइंस, गणित, सांख्यिकी या सूचना प्रौद्योगिकी जैसे विषयों में स्नातक (Bachelor’s) की डिग्री प्राप्त करें। यह डिग्री आपके लिए AI की मूलभूत अवधारणाओं को समझने का आधार तैयार करती है। अधिकांश कंपनियाँ ऐसे उम्मीदवारों को वरीयता देती हैं जिन्होंने-  2. तकनीकी कौशल (Technical Skills) AI विशेषज्ञ बनने के लिए कुछ खास टेक्निकल स्किल का होना अत्यंत आवश्यक है: 3. ऑनलाइन कोर्स और सर्टिफिकेशन AI सीखने के लिए कई फ्री और पेड ऑनलाइन कोर्स आसानी से मिल जाते हैं, जो आपको इस क्षेत्र से जुड़ी सभी जरूरी जानकारी को शेयर करते हैं-  4. प्रोजेक्ट्स और प्रैक्टिकल अनुभव सिर्फ किताबी पढ़ाई से AI स्पेशियलिस्ट (AI Specialists) नहीं बना जा सकता। इसके लिए प्रैक्टिकल नॉलेज भी जरूरी है। इसलिए-  5. इंटर्नशिप और इंडस्ट्री अनुभव इंटर्नशिप करने से आपको उद्योग की वास्तविक समस्याओं को समझने और हल करने का अनुभव मिलता है। कॉलेज के दौरान या उसके बाद किसी कंपनी में AI से जुड़ी इंटर्नशिप करना लाभकारी होगा। इससे न केवल आपके स्किल्स में सुधार होगा, बल्कि नेटवर्किंग और करियर अवसर भी मिलेंगे। 6. नवीनतम तकनीकों से अपडेट रहना AI एक तेजी से बदलता हुआ क्षेत्र है। नई-नई तकनीकों, शोध पत्रों और टूल्स के बारे में जानकारी रखना जरूरी है। इसके लिए आप निम्न संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं: इसे भी पढ़ें:- रैंक नंबर 1, उत्कृष्टता की पहचान, जानिए आईआईएम अहमदाबाद के बारे में कुछ रोचक बातें 7. सॉफ्ट स्किल (Soft Skills) AI विशेषज्ञ  (AI Expert) को तकनीकी ज्ञान के साथ-साथ अच्छे संप्रेषण कौशल (Communication skills), समस्या सुलझाने की क्षमता, टीमवर्क और विश्लेषणात्मक सोच भी होनी चाहिए। AI का उपयोग अक्सर अन्य टीमों के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान में होता है, इसलिए इंटरडिसिप्लिनरी सहयोग जरूरी होता है। AI विशेषज्ञ (AI Expert) बनना कठिन हो सकता है, लेकिन सीखने पर आसानी से समझा जा सकता है और ये एक बेहतर करियर ऑप्शन भी है। इसके लिए आपको तकनीकी तौर से मजबूत, निरंतर सीखने की इच्छा और व्यावहारिक अनुभव की आवश्यकता होती है। यदि आप सही दिशा में मेहनत करते हैं और लगातार सीखते रहते हैं, तो आप इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में एक सफल करियर बना सकते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi AI Expert #artificialintelligence #aispecialist #aicareer #techjobs #futureofwork

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US Cuts Trade Ties with Canada Over Digital Tax

अमेरिका ने कनाडा से तोड़े व्यापारिक रिश्ते, डिजिटल सर्विस टैक्स बना विवाद की जड़

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (President Donald Trump) ने एक बड़ा और चौंकाने वाला कदम उठाते हुए कनाडा के साथ सभी व्यापारिक संबंध तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए हैं। ट्रंप प्रशासन ने कनाडा को व्यापार के लिए कठिन देश करार देते हुए यह फैसला लिया है। इस निर्णय के पीछे कनाडा की ओर से लगाए गए डिजिटल सर्विस टैक्स (Digital Service Tax) और अत्यधिक टैरिफ को जिम्मेदार ठहराया गया है, जिससे अमेरिकी कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। ट्रंप ने सोहल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर पोस्ट कर लिखा है कि जब कनाडा अमेरिकी डेयरी उत्पादों पर 400 प्रतिशत तक टैरिफ लगा सकता है और अब डिजिटल सेवाओं पर कर थोप रहा है, तो अमेरिका ऐसे देश के साथ व्यापारिक रिश्ता क्यों बनाए रखे? इस फैसले से अमेरिका-कनाडा (America-Canada) के लंबे समय से चले आ रहे व्यापारिक संबंधों को तगड़ा झटका लगा है। कनाडा पर संभावित असर कनाडा की अर्थव्यवस्था (Canada’s Economy) में अमेरिका की हिस्सेदारी अत्यधिक है। साल 2024 में कनाडा ने कुल निर्यात का लगभग 75% और आयात का 50% हिस्सा अमेरिका के साथ किया था। अमेरिका-कनाडा (America-Canada) का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार रहा है। ऐसे में अमेरिका के साथ व्यापार का टूटना कनाडा के लिए बहुआयामी संकट खड़ा कर सकता है। समस्या खासकर ऊर्जा, ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्र इस निर्णय से सीधे प्रभावित होंगे। कनाडा की GDP में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आने की संभावना जताई जा रही है। यह गिरावट बेरोजगारी और आर्थिक अस्थिरता को जन्म दे सकती है। ओंटारियो, क्यूबेक जैसे प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में लाखों नौकरियों पर संकट मंडरा सकता है। तेल, इलेक्ट्रॉनिक्स और उपभोक्ता वस्तुओं पर संकट अमेरिका द्वारा रोजाना लगभग 4 मिलियन बैरल तेल कनाडा से आयात किया जाता था। इस आयात के रुकते ही कनाडा की ऑयल और एनर्जी कंपनियों को भारी नुकसान हो सकता है। वहीं दूसरी ओर, अमेरिका से इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी और उपभोक्ता वस्तुओं का निर्यात भी बंद हो जाएगा, जिससे कनाडा में उत्पादन लागत और महंगाई में इजाफा होगा। कनाडा को विकल्प के रूप में चीन, भारत या यूरोप जैसे देशों के साथ नए व्यापार समझौते करने होंगे, जो न केवल समय लेगा बल्कि जियोपॉलिटिकल के अनुसार भी चुनौतीपूर्ण भी होगा। ऑटोमोबाइल सेक्टर को बड़ा झटका कनाडा का ऑटो सेक्टर (Canada’s Auto Sector) भी इस फैसले से खासा प्रभावित होगा। अमेरिका से व्यापार रुकने के कारण फोर्ड, जनरल मोटर्स (GM), स्टेलेंटिस जैसी बड़ी कंपनियों के संचालन पर असर पड़ेगा। संभावनाएं हैं कि इन कंपनियों को या तो उत्पादन कम करना पड़े या फिर ऑफिस बंद करने पड़ें। इससे न केवल रोजगार पर असर पड़ेगा, बल्कि तकनीकी निवेश पर भी ब्रेक लग जाएगा। कमजोर होता कनाडाई डॉलर और निवेश में गिरावट इस निर्णय के चलते कनाडाई डॉलर पर दबाव बढ़ेगा और उसकी वैल्यू में गिरावट हो सकती है। इसका सीधा असर आयातित वस्तुओं की कीमतों पर पड़ेगा, जिससे आम जनता को महंगाई का सामना करना पड़ेगा। अमेरिका से निवेश बंद होने के कारण कनाडा के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स भी रुक सकते हैं। इसे भी पढ़ें:-  ‘जरूरत पड़ने पर बिना सवाल ईरान पर फिर से बरसाएंगे बम’, सीनेट में समर्थन मिलने के बाद बोले ट्रंप रणनीतिक साझेदारियों पर भी खतरा अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको के बीच हुआ USMCA (पूर्व NAFTA) समझौता भी इस निर्णय से टूट सकता है। इससे न केवल व्यापारिक बल्कि सामरिक सहयोग पर भी असर पड़ेगा। NORAD और NATO जैसे रक्षा संगठनों में साझेदारी कमजोर हो सकती है, जिससे उत्तर अमेरिका की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का यह फैसला केवल आर्थिक ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बड़े प्रभाव वाला है। कनाडा के लिए अमेरिका के बिना व्यापार चलाना एक अत्यंत चुनौतीपूर्ण कार्य होगा। जहां एक ओर अमेरिका कनाडा पर कर नीति को लेकर सख्ती बरत रहा है, वहीं कनाडा को अपने व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना होगा। निकट भविष्य में दोनों देशों के बीच रिश्तों में तनाव और गहराने की संभावना है, जिसका असर वैश्विक स्तर पर भी देखा जा सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Truth Social #uscanadadispute #digitalservicestax #ustraderelations #canadataxrow #tradeconflict

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Maharashtra Made Liquor - MML

महाराष्ट्र में एल्कोहॉल की कीमतों में 30% से 50% तक की होगी बढ़त

महाराष्ट्र सरकार ने हाल ही में एक बड़ा और प्रभावशाली कदम उठाते हुए राज्य की आबकारी नीति में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। नए निर्णय के तहत शराब पर उत्पाद शुल्क (Excise duty) में भारी बढ़ोतरी की गई है, जिसका सीधा असर शराब की खुदरा कीमतों पर पड़ेगा। इस बदलाव का उद्देश्य सरकारी राजस्व बढ़ाना और स्थानीय शराब उद्योग को प्रोत्साहन देना है, लेकिन इसके साथ-साथ इससे उपभोक्ताओं और स्थानीय व्यापारियों के सामने नई चुनौतियाँ भी खड़ी हो सकती हैं। उत्पाद शुल्क में भारी बढ़ोतरी कैबिनेट के इस नए फैसले के अनुसार भारत में बनी अंग्रेजी शराब (Indian Made Foreign Liquor – IMFL) पर अब उत्पाद शुल्क को उसकी विनिर्माण लागत के तीन गुना से बढ़ाकर 4.5 गुना कर दिया गया है। इसका सबसे अधिक असर उन ब्रांड्स पर पड़ेगा जिनकी विनिर्माण लागत लगभग 260 रुपये प्रति बल्क लीटर है। साथ ही देशी शराब पर भी शुल्क बढ़ा दिया गया है, जो पहले 180 रुपये प्रति प्रूफ लीटर था, उसे अब 205 रुपये प्रति प्रूफ लीटर कर दिया गया है। इस बदलाव के कारण शराब की कीमतों में औसतन 30-50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। उदाहरण के लिए, देशी शराब की 180 ml बोतल अब 60-70 रुपये की बजाय 80 रुपये में बिकेगी। IMFL की सामान्य श्रेणी की बोतल 115-130 रुपये से बढ़कर 205 रुपये की हो सकती है, जबकि प्रीमियम विदेशी शराब की कीमत 210 रुपये से बढ़कर 360 रुपये तक पहुंचने की संभावना है। नई शराब श्रेणी – महाराष्ट्र निर्मित शराब (MML) सरकार ने एक नई श्रेणी की घोषणा भी की है, जिसे “महाराष्ट्र निर्मित शराब” (Maharashtra Made Liquor – MML) नाम दिया गया है। यह श्रेणी देशी और अंग्रेजी शराब के बीच की कड़ी के रूप में विकसित की जाएगी। इसका निर्माण केवल अनाज आधारित शराब से किया जाएगा, और केवल वे उत्पाद ही इसमें शामिल होंगे जो महाराष्ट्र के भीतर निर्मित और पंजीकृत हैं। इससे राज्य के स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जबकि इसमें विदेशी या राष्ट्रीय ब्रांडों को शामिल नहीं किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इससे एक नई बाजार श्रेणी विकसित होगी, जिससे उत्पादों की विविधता बढ़ेगी और उपभोक्ताओं के पास स्थानीय विकल्प उपलब्ध होंगे। सरकार की उम्मीदें और संभावित लाभ सरकार को इस नई नीति से सालाना आबकारी संग्रह में 14,000 करोड़ रुपये (Maharashtra Made Liquor – MML) की बढ़ोतरी की उम्मीद है। इसके अलावा, MML श्रेणी से अलग से 3,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त राजस्व जुटाए जाने की संभावना भी जताई गई है। एक अन्य लाभ स्थानीय किसानों को हो सकता है, क्योंकि MML श्रेणी के तहत अनाज आधारित शराब का उत्पादन बढ़ेगा। इससे कृषि उत्पादों की मांग बढ़ेगी और किसानों की आय में भी इज़ाफा हो सकता है। इसके अलावा राज्य में जिन 38 शराब निर्माण इकाइयों की गतिविधियाँ फिलहाल ठप हैं, उन्हें भी इस नई नीति के माध्यम से पुनर्जीवित किया जा सकता है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? आलोचना और चुनौतियाँ हालांकि सरकार इस नीति को राजस्व और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद मान रही है, लेकिन उद्योग विशेषज्ञ और कई व्यापारिक संगठनों ने इसकी आलोचना की है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी दर से उत्पाद शुल्क बढ़ाने से शराब की तस्करी बढ़ सकती है, खासकर पड़ोसी राज्यों से, जहां शराब सस्ती है। इससे राज्य को राजस्व में अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा और स्थानीय व्यवसायों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, उपभोक्ताओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ेगा। मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोग, जो पहले ही महंगाई से जूझ रहे हैं, उनके लिए शराब अब और अधिक महंगी हो जाएगी। इससे अवैध शराब की बिक्री या उत्पादन बढ़ने का खतरा भी है, जो जनस्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। महाराष्ट्र सरकार की नई आबकारी नीति दूरगामी आर्थिक लक्ष्यों और राजस्व बढ़ाने की दिशा में एक साहसिक कदम है। हालांकि इससे राज्य को वित्तीय रूप से लाभ मिल सकता है और स्थानीय उद्योगों को नई ऊर्जा मिल सकती है, लेकिन इसके साथ जुड़ी चुनौतियों को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। यह आवश्यक है कि सरकार इस नई नीति के क्रियान्वयन के दौरान तस्करी, अवैध व्यापार और उपभोक्ता हितों पर विशेष ध्यान दे। साथ ही, शराब के दुरुपयोग को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत करना होगा। केवल राजस्व बढ़ाना ही नहीं, बल्कि संतुलित और जिम्मेदार नीति ही इस बदलाव को सफल बना सकती है। Latest News in Hindi Today Hindi Maharashtra Made Liquor – MML #maharashtra #alcoholpricehike #liquornews #taxincrease #2025news #alcoholnews #maharashtranews

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Sharad Pawar says imposition of Hindi

हिंदी अनिवार्यता पर बोले शरद पवार, कहा राजनीति नहीं, समझदारी है ज़रूरी

हाल ही में देशभर में हिंदी भाषा (Hindi Language) को अनिवार्य किए जाने को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। महाराष्ट्र में हिंदी को तीसरी भाषा के रूप अनिवार्य किये जाने पर सभी राजनीतिक पार्टियों की अपनी-अपनी सोच है। कुछ राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं, तो कुछ इसका समर्थन। अब इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र के वरिष्ठ नेता और एनसीपी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार (NCP (SP) Sharad Pawar) का बड़ा बयान सामने आया है। शरद पवार ने न सिर्फ हिंदी के महत्व को स्वीकार किया, बल्कि यह भी समझाने की कोशिश की कि भाषा के सवाल पर संतुलन और संवेदनशीलता ज़रूरी है। हिंदी को पूरी तरह इग्नोर नहीं किया जा सकता शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि हिंदी को देश की एक महत्वपूर्ण भाषा के रूप में नकारा नहीं जा सकता। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने यह भी माना कि देश में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली भाषा हिंदी (Sharad Pawar) है और इसे अनदेखा करना उचित नहीं होगा। हालांकि उन्होंने इस विषय को भावनात्मक नहीं बल्कि तर्कसंगत तरीके से देखने की सलाह दी है। पांचवी कक्षा के बाद हिंदी अनिवार्य करने का सुझाव शरद पवार (Sharad Pawar) ने कहा है कि पहली से चौथी कक्षा तक हिंदी को अनिवार्य करने से बच्चों पर दबाव पड़ सकता है। उनके अनुसार इस उम्र में मातृभाषा और स्थानीय भाषाओं पर अधिक ध्यान देना चाहिए ताकि बच्चे अपनी मूल भाषा में मजबूत आधार बना सकें। उन्होंने यह सुझाव दिया कि पांचवीं कक्षा के बाद हिंदी को अनिवार्य किया जा सकता है, जिससे बच्चे बिना मानसिक दबाव के हिंदी सीखने में सक्षम हो सकते हैं। महाराष्ट्र के लोग हिंदी विरोधी नहीं शरद पवार (Sharad Pawar) ने ये भी कहा कि महाराष्ट्र के लोग हिंदी के विरोध में नहीं हैं। महाराष्ट्र की जनता अन्य भाषाओं के प्रति भी उतना ही स्नेह रखते हैं जितना मराठी के प्रति। उन्होंने यह भी कहा कि हिंदी को लेकर जो विरोध दिखाई देता है, वह भाषा से अधिक राजनीतिक भावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता से जुड़ा है। ठाकरे परिवार की बातों पर गौर शरद पवार ने यह भी बताया कि उन्होंने उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) और राज ठाकरे (Raj Thackeray) दोनों की इस मुद्दे पर राय सुनी है। उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं के विचारों को समझना और उनका विश्लेषण करना ज़रूरी है। पवार ने यह संकेत दिया कि वह किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने से पहले उसके उद्देश्य और एजेंडे को पूरी तरह से समझना चाहेंगे। राज ठाकरे के मोर्चे पर प्रतिक्रिया जब पवार से पूछा गया कि क्या वे राज ठाकरे के हिंदी-विरोधी मोर्चे में शामिल होंगे, तो उन्होंने कहा कि उन्होंने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी के बुलावे पर सिर्फ़ इसलिए शामिल नहीं हो सकते कि वह कोई बड़ा नेता है। यदि मुद्दा वाकई में जनहित का है और गंभीरता से उठाया गया है, तो ही वह उसका समर्थन करेंगे। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? सभी राजनीतिक दलों से समझदारी की अपील शरद पवार ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की कि भाषा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर जल्दबाज़ी या भावनात्मक बयानबाज़ी से बचें। उन्होंने कहा कि किसी भी भाषा को थोपना या किसी भाषा को नीचा दिखाना देश की एकता और विविधता के लिए ठीक नहीं है। क्योंकि भाषा संस्कृति से जुड़ी होती है और इस पर संवाद, समझ और सम्मान की ज़रूरत होती है। शरद पवार (Sharad Pawar) का बयान ऐसे वक्त में महत्वपूर्ण है जब देशभर में भाषायी पहचान और राष्ट्रीय एकता के सवाल पर बहस चल रही है। उनका दृष्टिकोण संतुलित, व्यावहारिक और भविष्य को ध्यान में रखकर है। भाषा का सवाल केवल शिक्षा या प्रशासन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज और सांस्कृतिक दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। ऐसे में शरद पवार जैसे अनुभवी नेताओं की भूमिका इस बहस को सही दिशा देने में अहम हो सकती है। वैसे अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या केंद्र सरकार (Central Government) इस दिशा में कोई नई नीति अपनाती है और क्या राज्य सरकारें इस पर सहयोग करती हैं।  Latest News in Hindi Today Hindi news Sharad Pawar #sharadpawar #hindiimposition #languagepolitics #indianpolitics #hindidebate

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Shubhanshu Shukla

इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पहुंचे शुभांशु शुक्‍ला, अब अंतरिक्ष में रहकर करेंगे रिसर्च 

भारत के लिए अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में यह एक ऐतिहासिक क्षण है, जब ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने Axiom Mission 4 (Ax-4) के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की ओर उड़ान भरें और सफलतापूर्वक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) 28 घंटे में अपने 3 अन्य अंतरिक्ष यात्रियों के साथ पहुंच चुके हैं। यह मिशन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि इसके माध्यम से भारत कई महत्वपूर्ण वैज्ञानिक शोधों की नींव रख रहा है, जो भविष्य में अंतरिक्ष में मानव जीवन और खेती को संभव बना सकते हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) को भारतीय वायुसेना से चयनित किया गया है और वे इस मिशन में 14 दिनों तक अंतरिक्ष में रहकर कुल सात प्रमुख प्रयोग करेंगे। ये सभी प्रयोग अत्यधिक वैज्ञानिक महत्व रखते हैं और भारत के गगनयान मिशन से लेकर भविष्य के अंतरिक्ष उपनिवेश की नींव तक जुड़ते हैं। अंतरिक्ष में  शुभांशु शुक्ला क्या-क्या करेंगे रिसर्च?  1. मायोजेनेसिस पर रिसर्च – अंतरिक्ष में गुरुत्वाकर्षण न के बराबर होता है, जिसे माइक्रोग्रैविटी कहते हैं। ऐसे में शरीर की मांसपेशियां कमजोर पड़ जाती हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) इस पर मायोजेनेसिस नाम का प्रयोग करेंगे, जो Institute of Stem Cell Science and Regenerative Medicine द्वारा प्रस्तावित है। इसका मकसद यह समझना है कि अंतरिक्ष में लंबे समय तक रहने वाले यात्रियों की मांसपेशियों को कैसे सुरक्षित रखा जाए। यह रिसर्च ना केवल अंतरिक्ष यात्रियों के लिए, बल्कि धरती पर बुजुर्गों और मांसपेशी से जुड़ी समस्या से जूझ रहे मरीजों के लिए भी अहम हो सकता है। 2. फसलों के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी का असर- शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) अंतरिक्ष में छह अलग-अलग फसलों के बीजों पर माइक्रोग्रैविटी के प्रभाव का अध्ययन करेंगे। खास बात यह है कि वे अपने साथ मूंग और मेथी के बीज ले गए हैं। इसका उद्देश्य यह जानना है कि बिना गुरुत्वाकर्षण के बीज कैसे अंकुरित होते हैं, उनमें कौन-कौन से जेनेटिक बदलाव होते हैं, उनकी पोषण क्षमता में क्या फर्क आता है और वे कितने सूक्ष्मजीव प्रतिरोधी बनते हैं। यह रिसर्च केरल कृषि विश्वविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है और इसका दीर्घकालिक उद्देश्य अंतरिक्ष में खेती को संभव बनाना है। एक ऐसी तकनीक जो भविष्य में मंगल या चंद्रमा जैसे ग्रहों पर मानव जीवन की कल्पना को साकार कर सकती है। 3. टार्डीग्रेड्स पर रिसर्च-  टार्डीग्रेड्स एक तरह का सूक्ष्म जीव होता हैजो अत्यंत विषम परिस्थितियों में भी जीवित रह सकते हैं, चाहे वह अत्यधिक गर्मी हो या ठंड हो। शुभांशु माइक्रोग्रैविटी में इन टार्डीग्रेड्स के जीवन चक्र, अनुकूलन क्षमता और व्यवहार का अध्ययन करेंगे। इस शोध से यह समझने में मदद मिलेगी कि कौन-कौन से जीव अंतरिक्ष में जीवन बनाए रख सकते हैं और क्या हम किसी प्रकार की जैविक अनुकूलता के जरिए दूसरे ग्रहों पर जीवन संभव कर सकते हैं। 4. माइक्रोएल्गी- शुभांशु अंतरिक्ष में तीन प्रकार की एककोशिकीय माइक्रोएल्गी (unicellular microalgae) पर अध्ययन करेंगे। इसका उद्देश्य यह जानना है कि क्या ये एल्गी माइक्रोग्रैविटी में भी सही रूप से बढ़ सकती हैं और क्या वे अंतरिक्ष यात्रियों के लिए पोषण, ऑक्सीजन रिसाइक्लिंग और कचरा प्रबंधन जैसी जरूरतों को पूरा कर सकती हैं। 5. सायनोबैक्टीरिया पर प्रयोग- शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) का अगला प्रयोग सायनोबैक्टीरिया की जैव रासायनिक प्रक्रियाओं पर आधारित है। ये जीव अपनी प्रकाश-संश्लेषण क्षमता के लिए जाने जाते हैं और ऑक्सीजन उत्पन्न कर सकते हैं। माइक्रोग्रैविटी में इनकी क्रियाशीलता को समझकर लाइफ-सस्टेनेबिलिटी के लिए मॉडल तैयार किया जा सकता है, जिससे अंतरिक्ष में बायोसिस्टम बनाया जा सके। इसे भी पढ़ें:-  Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान 6. स्पेस स्क्रीन और आँखों पर प्रभाव- एक और अहम अध्ययन अंतरिक्ष में स्क्रीन टाइम और उसके मानसिक और शारीरिक असर से जुड़ा है। शुभांशु यह देखेंगे कि कंप्यूटर स्क्रीन का आंखों की गतिविधि, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता और नींद पर क्या असर पड़ता है। यह प्रयोग गगनयान मिशन के लिए भी जरूरी है, क्योंकि अंतरिक्ष यात्रियों का ध्यान, थकावट और मानसिक संतुलन मिशन की सफलता के लिए बेहद अहम होते हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) की यह अंतरिक्ष यात्रा केवल भारत के लिए एक गर्व का विषय नहीं, बल्कि भविष्य की पीढ़ियों के लिए विज्ञान, कृषि और जीवन प्रणाली की नई दिशा भी है। उनके प्रयोग अंतरिक्ष में जीवन को संभव बनाने, खेती करने और स्वास्थ्य को बनाए रखने की नींव रख सकते हैं। इस मिशन से यह समझा जा सकता है कि भारत अब सिर्फ अंतरिक्ष की दौड़ में शामिल नहीं, बल्कि अग्रणी भूमिका निभा रहा हैऔर शुभांशु शुक्ला इस वैज्ञानिक युग के आइडल भी बन चुके हैं। Latest News in Hindi Today Hindi Shubhanshu Shukla #shubhanshushukla #internationalspacestation #indianinscience #spaceresearch #space2025 #issmission #indiaspace

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CBSE Class 10 students will appear for board exams

CBSE 10वीं बोर्ड परीक्षा 2026 से साल में दो बार होगी परीक्षा 

भारत की शिक्षा व्यवस्था में एक अहम बदलाव किया गया है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (CBSE) ने घोषणा की है कि साल 2026 से कक्षा 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं (10th Board Exam) साल में दो बार आयोजित की जाएंगी। एक ही साल में दो बार परीक्षा लेने का उद्देश्य छात्रों पर परीक्षा का दबाव कम करना है। यह निर्णय राष्ट्रीय शिक्षा नीति (National Education Policy) 2020 की सिफारिशों के अनुरूप लिया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य छात्रों को मल्टीपल एग्जिट और एंट्री विकल्प देना है। CBSE के इस फैसले के अनुसार पहली परीक्षा फरवरी के मध्य में होगी और दूसरी मई में आयोजित की जाएगी। छात्र इन दोनों परीक्षाओं में भाग ले सकेंगे, लेकिन उनके पास यह विकल्प भी होगा कि वे केवल एक बार परीक्षा दें। यदि कोई छात्र पहली परीक्षा में दिए गए जवाब से संतुष्ट नहीं होते हैं, तो वह दूसरी परीक्षा में शामिल होकर अपनी स्कोर में सुधार ला सकते हैं। यह मॉडल काफी हद तक जेईई मेन (JEE Main) और सीयूईटी (CUET) जैसी परीक्षाओं के जैसा होगा, जिसमें स्टूडेंट्स को साल में एक से ज्यादा मौके मिल सकते हैं। बदलाव का मकसद क्या है? CBSE के अनुसार इस पहल का मकसद छात्रों को एक परीक्षा, एक मौका जैसी मानसिकता से बाहर निकालना है। अभी तक की छात्रों को केवल एक मौका मिलता था, जिससे उनमें असफलता का डर और तनाव बहुत अधिक होता था। साल में दो बार परीक्षा का मौका मिलने से छात्रों को कई तरह से लाभ मिलेंगे-   एक ही साल में 2 बार परीक्षा देने का मौका मिलेगा।  तनाव कम होगा।  परीक्षा बेहतर तरीके से दे पाएंगे।  व्यक्तिगत विकास और आत्मविश्वास बढ़ेगा।  किन छात्रों को होगा ज्यादा लाभ? इस नई व्यवस्था से खासतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्र, मध्यम या कमजोर स्टूडेंट्स के साथ-साथ परीक्षा के दिन बीमार या मानसिक रूप से अस्वस्थ छात्र को ज्यादा फायदा मिलेगा। अब उन्हें पूरे साल की मेहनत सिर्फ एक दिन पर निर्भर नहीं करनी पड़ेगी। CBSE के इस निर्णय के साथ-साथ बोर्ड ने यह भी कहा है कि अब प्रश्नपत्र इस तरह से बनाए जाएंगे कि छात्रों को परेशानी ना हो और मूल्यांकन (Marking) करने में भी समस्या ना हो। साल 2024 से ही CBSE ने प्रश्नपत्रों में केस-स्टडी, एप्लिकेशन-बेस्ड सवालों को शामिल करना शुरू कर दिया है और यह प्रक्रिया 2026 तक और भी बेहतर हो जाएगी। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? क्या छात्रों को दोनों परीक्षाएं देनी होंगी? नहीं। CBSE ने साफ कहा है कि दोनों परीक्षाएं वैकल्पिक (Optional Exam) होंगी। यानी अगर कोई छात्र पहली परीक्षा में ही अच्छा स्कोर कर लेता है, तो उसे दूसरी परीक्षा देने की आवश्यकता नहीं होगी। वहीं, जो छात्र सुधार करना चाहते हैं, वे दूसरी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं। अंतिम रिपोर्ट कार्ड में उसी प्रयास के अंक शामिल किए जाएंगे जिसमें छात्र का स्कोर बेहतर होगा। यह व्यवस्था छात्रों को एक अतिरिक्त मौका देती है, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ परीक्षा दे सकें। पहली परीक्षा को एक ट्रायल रन की तरह लिया जा सकता है, जबकि दूसरी परीक्षा (Second Exam) उन छात्रों के लिए सहायक होगी जो पहले प्रयास में अपने प्रदर्शन से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं सभी स्कूल, शिक्षक और छात्र 2026 तक इस सिस्टम के लिए खुद को तैयार कर सकें इसलिए इसकी घोषणा अभी ही कर दी गई है, जिससे इसका फायदा साल 2026 में बोर्ड परीक्षा (2026 Board Exam) देने वाले स्टूडेंट्स उठा सकें। इसके साथ ही CBSE यह सुनिश्चित कर रहा है कि परीक्षा के बीच पर्याप्त अंतर हो, जिससे छात्रों को दोबारा तैयारी करने का समय मिल सके। यह नया ढांचा छात्रों की मानसिक सेहत (Mental Health), आत्म-विश्लेषण (Self-analysis) और सुधार की प्रक्रिया को बेहतर बनाएगा। उम्मीद है इस पहल से एजुकेशन सिस्टम (Education System) और बेहतर होगा और NEP 2020 (National Education Policy 2020) के विजन का एक प्रमुख हिस्सा है।  Latest News in Hindi Today Hindi news JEE Main CBSE #cbse2026 #class10board #cbsenews #cbseupdate #boardexam2026

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