Nidhi Sinha

What is Truth Social?

क्या है Truth Social? पीएम मोदी और प्रेसिडेंट ट्रंप भी एक्टिव हैं इस अकाउंट पर

पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स (Social Media Platform) न केवल बातचीत का माध्यम है, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक विमर्श को भी दिशा दे रहे हैं। इसी संदर्भ में एक नाम तेजी से चर्चा में आया है और वह है ट्रुथ सोशल (Truth Social)। इस प्लेटफॉर्म पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (American President Donald Trump) द्वारा और भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) का भी अकाउंट बना हुआ है।   ट्रुथ सोशल (Truth Social) क्या है? ट्रुथ सोशल (Truth Social) एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म  (Social Media Platform) है जिसे अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2021 में लॉन्च किया था। यह प्लेटफॉर्म ट्रंप मीडिया एंड टेक्नोलॉजी ग्रुप (Trump Media & Technology Group {TMTG}) के अंतर्गत आता है। इस प्लेटफॉर्म को लॉन्च करने का उद्देश्य था एक ऐसा मंच तैयार करना जो फ्री स्पीच (Free Speech) को प्राथमिकता दे और पारंपरिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स  (Social Media Platforms) जैसे ट्विटर (X), फेसबुक (Facebook) आदि के मुकाबले एक अन्य विकल्प हो। डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) का ट्विटर अकाउंट 2021 में अमेरिकी संसद पर हुए हमले के बाद स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने  ट्रुथ सोशल (Truth Social) की शुरुआत की। इस प्लेटफॉर्म को एक रूढ़िवादी विकल्प (Conservative alternative) के रूप में देखा गया, जो विशेष रूप से उन विचारधाराओं को मंच देने का दावा करता है जो मुख्यधारा के प्लेटफॉर्म्स पर सेंसर हो सकती हैं। ट्रुथ सोशल (Truth Social) की क्या है खासियत?  पीएम मोदी भी हैं Truth Social पर एक्टिव   2025 में यह खबर सामने आई कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने भी ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर अपना आधिकारिक अकाउंट बनाया है। यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे संकेत मिलता है कि भारत सरकार भी वैकल्पिक सोशल मीडिया मंचों पर अपनी मौजूदगी को मजबूत करना चाहती है। पीएम मोदी सोशल मीडिया (Social Media) के प्रभाव को समझने वाले नेताओं में से एक हैं। उन्होंने पहले भी ट्विटर, फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे मंचों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया है।  ट्रुथ सोशल (Truth Social) पर उनकी मौजूदगी यह दर्शाती है कि सरकार वैश्विक और वैकल्पिक मंचों पर भी सक्रिय रहना चाहती है, खासकर ऐसे प्लेटफॉर्म्स पर जो फ्री-स्पीच को प्राथमिकता देते हैं। इसे भी पढ़ें:-  Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान ट्रंप और  ट्रुथ सोशल का क्या है रिश्ता?  डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) इस प्लेटफॉर्म के संस्थापक और प्रमोटर हैं। उन्होंने ट्रुथ सोशल (Truth Social) को बिग टेक (Big Tech) के खिलाफ एक हथियार के रूप में खड़ा किया है। ट्रंप का आरोप रहा है कि ट्विटर, फेसबुक जैसी कंपनियां दक्षिणपंथी विचारों को दबाने का काम करती हैं। ट्रुथ सोशल के ज़रिए वे एक ऐसी जगह तैयार करना चाहते थे जहाँ उनके समर्थक बिना डर या सेंसरशिप के अपनी बात कह सकें। हालांकि ट्रंप को बाद में ट्विटर (अब एक्स) पर वापस बुला लिया गया, लेकिन उन्होंने अभी भी ट्रुथ सोशल (Truth Social) को बरकरार रखा है।  ट्रुथ सोशल (Truth Social) ने शुरुआत में बड़ी चर्चा बटोरी थी, लेकिन यह अभी भी ट्विटर या फेसबुक जैसी वैश्विक लोकप्रियता हासिल नहीं कर पाया है। इसके सीमित यूज़रबेस, तकनीकी गड़बड़ियों और राजनीतिक विवादों ने इसकी गति को कुछ हद तक धीमा कर दिया। इसके अलावा यह मंच मुख्य रूप से अमेरिकी उपयोगकर्ताओं पर केंद्रित रहा है। लेकिन पीएम मोदी जैसे वैश्विक नेता का इस पर आना इस बात का संकेत हो सकता है कि यह प्लेटफॉर्म आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी खुद को स्थापित करने की कोशिश करेगा। ट्रुथ सोशल एक वैकल्पिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म है जो फ्री स्पीच (Free Speech) के विचार को आगे बढ़ाने का दावा करता है। डोनाल्ड ट्रंप की पहल से शुरू हुआ यह मंच अब वैश्विक नेताओं के आकर्षण का केंद्र बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का इसमें शामिल होना इस दिशा में एक बड़ा संकेत है कि भारत वैश्विक डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की राजनीति में सक्रिय भागीदारी निभाना चाहता है। ट्रुथ सोशल (Truth Social) का भविष्य इस बात पर निर्भर करेगा कि यह किस तरह खुद को ग्लोबली रिप्रेजेंट करता है और क्या यह अपने वादे के अनुसार वाकई एक स्वतंत्र और निष्पक्ष मंच है या नहीं।  Latest News in Hindi Today Hindi Truth Social #truthsocial #PMModi #DonaldTrump #SocialMediaNews #TruthApp #ModiTrump #TrendingNews

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Shubhanshu Shukla's journey in Axiom-4 marks

भारत ने रचा अंतरिक्ष इतिहास: Axiom-4 मिशन में शुभांशु शुक्ला की ऐतिहासिक उड़ान

भारत की अंतरिक्ष यात्रा ने एक नया और ऐतिहासिक मोड़ ले लिया है। Axiom-4 मिशन के तहत भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला  (Indian astronaut Shubhanshu Shukla) और तीन अन्य अंतरिक्ष यात्रियों को लेकर SpaceX का फाल्कन 9 रॉकेट सफलतापूर्वक अंतरिक्ष के लिए रवाना हो गया है। फ्लोरिडा के प्रतिष्ठित कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से लॉन्च हुआ यह मिशन न केवल भारत, बल्कि हंगरी और पोलैंड जैसे देशों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla), जो इस मिशन के पायलट हैं, भारत के लिए गौरव का प्रतीक बन चुके हैं, क्योंकि वे राकेश शर्मा (Rakesh Sharma) के बाद अंतरिक्ष में पहुंचने वाले दूसरे भारतीय हैं और पहले भारतीय हैं जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) तक पहुंचेंगे। सफल लॉन्च और 28 घंटे की यात्रा SpaceX के फाल्कन 9 रॉकेट ने 24 जून की रात को लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A से उड़ान भरी। इस रॉकेट के शीर्ष पर स्पेसएक्स का ही अंतरिक्ष यान ड्रैगन मौजूद है, जिसमें चारों अंतरिक्ष यात्री सवार हैं। यह यान अब 28 घंटे की यात्रा पर है और उम्मीद है कि यह गुरुवार, 26 जून को शाम 4:30 बजे (भारतीय समयानुसार) इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (International Space Station) पर डॉक करेगा। यह मिशन तकनीकी रूप से अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण है, लेकिन लॉन्च की सफलता ने इस पूरी यात्रा को मजबूत आधार प्रदान कर दिया है। मिशन की टीम: अनुभव और विविधता का संगम Axiom-4 मिशन (Axiom Space) की टीम में चार अंतरिक्ष यात्री शामिल हैं। भारत से शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) मिशन के पायलट हैं, जो ISRO (Indian Space Research Organisation) के प्रतिनिधि के रूप में इस मिशन में भाग ले रहे हैं। मिशन कमांडर हैं नासा (NASA) की अनुभवी अंतरिक्ष यात्री पैगी व्हिटसन, जिन्हें अमेरिका की सबसे अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री माना जाता है। उनके अनुभव ने इस मिशन को एक मजबूत नेतृत्व प्रदान किया है। इसके अलावा पोलैंड से स्लावोज उज़्नान्स्की-विस्नीव्स्की और हंगरी से टिबोर कापू मिशन विशेषज्ञ के रूप में टीम का हिस्सा हैं। यह मिशन न केवल विज्ञान की दृष्टि से बल्कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग की दृष्टि से भी एक मिसाल है। इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन पर 14 दिन का मिशन Axiom-4 मिशन (Axiom-4 Mission) के चारों सदस्य ISS पर लगभग 14 दिन बिताएंगे। इस दौरान वे 60 से अधिक वैज्ञानिक प्रयोग करेंगे। इनमें से सात प्रयोग भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा प्रस्तावित किए गए हैं, जो अंतरिक्ष में जैविक, भौतिक और तकनीकी अनुसंधान से संबंधित हैं। इन प्रयोगों के परिणामों से न केवल अंतरिक्ष विज्ञान को नई दिशा मिलेगी, बल्कि पृथ्वी पर जीवन की गुणवत्ता सुधारने में भी मदद मिलेगी। इसे भी पढ़ें:- भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज भरेंगे अंतरिक्ष की उड़ान Axiom Space और निजी अंतरिक्ष उड़ानों का नया युग Axiom-4 मिशन  (Axiom-4 Mission) चौथा निजी अंतरिक्ष मिशन है जिसे ह्यूस्टन स्थित कंपनी Axiom Space द्वारा नासा की साझेदारी में भेजा गया है। यह मिशन एक और संकेत है कि भविष्य में अंतरिक्ष यात्राएं केवल सरकारी एजेंसियों तक सीमित नहीं रहेंगी। निजी कंपनियां अब अंतरिक्ष अनुसंधान और पर्यटन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। Axiom Space का उद्देश्य है एक दिन पृथ्वी की कक्षा में एक पूर्णत: वाणिज्यिक अंतरिक्ष स्टेशन बनाना, जो वर्तमान ISS का स्थान ले सके। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@jairashtranews) भारत के लिए महत्व: वैश्विक अंतरिक्ष मंच पर नई पहचान भारत के लिए यह मिशन इसलिए भी खास है क्योंकि यह दिखाता है कि देश अब वैश्विक अंतरिक्ष प्रयासों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। शुभांशु शुक्ला की इस उड़ान ने भारत को उस क्लब में शामिल कर दिया है, जिसमें अब तक केवल कुछ ही देशों के नागरिक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन तक पहुंचे हैं। यह न केवल तकनीकी सफलता है, बल्कि भारत की वैज्ञानिक क्षमता, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और भविष्य की अंतरिक्ष नीतियों की दिशा में एक बड़ा कदम है। Axiom-4 मिशन (Axiom-4 Mission) ने भारत के अंतरिक्ष सफर में एक नया अध्याय जोड़ा है। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) की ऐतिहासिक उड़ान, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, वैज्ञानिक शोध और निजी कंपनियों की सक्रियता से यह मिशन भविष्य की अंतरिक्ष यात्राओं के लिए प्रेरणा बनेगा। यह मिशन साबित करता है कि भारत अब न केवल पृथ्वी पर, बल्कि अंतरिक्ष में भी एक उभरती हुई महाशक्ति है। Latest News in Hindi Today Hindi Shubhanshu Shukla Axiom Space #shubhanshushukla #axiom4 #indiaspace #spacexmission #indianastronaut #spacehistory #axiomspace #nasacollab #indianews #spacetravel

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US visa new rule

अमेरिका का नया वीज़ा नियम: सोशल मीडिया अकाउंट होना चाहिए पब्लिक 

अमेरिका में पढ़ाई, काम या रिसर्च के इरादे से जाने की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए एक बड़ा बदलाव सामने आया है। अमेरिकी सरकार (American government) ने अपनी वीज़ा नीति (Visa Policy) में बदलाव  करते हुए अब यह अनिवार्य कर दिया है कि वीज़ा के लिए आवेदन करने वाले आवेदकों के सोशल मीडिया अकाउंट्स (Social Media Accounts) सार्वजनिक यानी पब्लिक (Public) होने चाहिए। इसलिए अब अमेरिका के लिए किसी को भी F, M या J वीज़ा चाहिए तो उसका सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) होने के साथ-साथ अकाउंट पब्लिक भी होना चाहिए।  सोशल मीडिया और वीज़ा का कनेक्शन यह नया नियम अमेरिका की बढ़ती सुरक्षा चिंताओं के चलते लागू किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अब वीज़ा आवेदन (Visa Applicants) की प्रक्रिया में केवल दस्तावेज़ ही नहीं, बल्कि आवेदक की ऑनलाइन गतिविधियों को भी मॉनिटर किया जाएगा। आवेदक के पोस्ट, फोटोज़, कमेंट्स, शेयर और यहां तक कि लाइक्स तक की जांच की जाएगी। विशेष ध्यान उस कंटेंट पर होगा जिसमें हिंसा, नफरत, कट्टरता, आतंकवाद, धर्म या जाति के प्रति किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावना झलकती हो। अगर किसी का अकाउंट प्राइवेट है यानी उसकी गतिविधियां सिर्फ दोस्त या फॉलोअर्स तक सीमित हैं, तो वीज़ा अधिकारियों को शक हो सकता है कि वह कुछ छिपा रहा है और इसका सीधा असर वीज़ा अप्रूवल (Visa Approval) पर पड़ेगा। किसे मिलेगा कौन-सा वीज़ा? चिंतित हैं आवेदक  इस बदलाव के बाद कई युवा असमंजस और चिंता में हैं। खासकर वे छात्र जो अपने सोशल मीडिया को निजी (Private) रखना पसंद करते हैं, अब उन्हें अपने अकाउंट की सेटिंग्स बदलनी होंगी। कई छात्र और पेशेवर यह महसूस कर रहे हैं कि यह नियम उनकी निजता (Privacy) पर सीधा हमला है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अमेरिका में पढ़ाई या काम के अवसर की कीमत पर अपनी प्राइवेसी का त्याग करना होगा? सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) को सार्वजनिक करने का मतलब है कि न केवल अमेरिकी अधिकारी बल्कि कोई भी व्यक्ति आपकी निजी जानकारी तक पहुंच सकता है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? प्रोसेस में देरी की आशंका इस नियम के कारण वीज़ा प्रक्रिया और इंटरव्यू में देरी भी संभव है। हर आवेदक के सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) की समीक्षा करना एक बड़ा और समय लेने वाला काम है। इससे एम्बेसी पर दबाव बढ़ सकता है और वीज़ा मिलने में अधिक समय लग सकता है। हालांकि अमेरिका की मंशा अपने देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है, लेकिन इस नियम पर कई मानवाधिकार संगठनों और विशेषज्ञों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह कदम निजता के अधिकार (Right to Privacy) का उल्लंघन है। किसी भी व्यक्ति के सोशल मीडिया अकाउंट से जज करना ठीक नहीं माना जा रहा है। क्योंकि  कई बार लोग मज़ाक, ट्रेंड या दूसरों की पोस्ट शेयर करते हैं, जिसका उनके वास्तविक व्यवहार से कोई लेना-देना नहीं होता। अमेरिका का यह नया वीज़ा नियम (Visa Rule) एक तरफ जहाँ सुरक्षा को मजबूत करने का प्रयास है, वहीं दूसरी तरफ यह डिजिटल दुनिया (Digital World) में निजी आज़ादी और पारदर्शिता के बीच एक नई बहस को जन्म दे रहा है। स्टूडेंट्स, एक्सपर्ट्स और रिसर्च स्कॉलर्स को अब केवल अपने एजुकेशनल रिकॉर्ड या अनुभव ही नहीं, बल्कि सोशल मीडिया एक्टिविटी (Social Media Accounts) भी गौर किया जाएगा। अगर आप अमेरिका जाने की योजना बना रहे हैं, तो अब वीज़ा फॉर्म भरने से पहले अपने इंस्टाग्राम, फेसबुक, ट्विटर या अन्य सोशल मीडिया अकाउंट (Social Media Accounts) की सेटिंग्स जरूर चेक करें। क्योंकि अब पासपोर्ट के साथ-साथ, आपका डिजिटल चेहरा भी आपकी पहचान बन चुका है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) Latest News in Hindi Today Hindi news Social Media Accounts #usvisa #newvisarule #socialmedia #usimmigration #visaupdate2025

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Little Boy’s Wounds Still Bleed

Little Boy के दिए जख्म आज भी नहीं भरे: क्या दुनिया फिर उसी मोड़ पर है?

आज दुनिया में एक बार फिर युद्ध की आशंकाओं से घिरी है—ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension), मिसाइल हमले और परमाणु शक्तियों की सक्रियता तो ऐसे में यह ज़रूरी हो जाता है कि हम अतीत के उस खौफनाक दिन को याद करें जब विज्ञान ने मानवता को पीछे छोड़ दिया था। 6 अगस्त 1945 को जापान के हिरोशिमा पर गिराया गया परमाणु बम लिटिल बॉय (Atomic Bomb Little Boy) न सिर्फ लाखों जिंदगियों खत्म कर दी, बल्कि यह एक ऐसा जख्म भी था जो आज तक भरा नहीं है।  6 अगस्त 1945 को सुबह 8:15 बजे जब जापान का शहर हिरोशिमा (Hiroshima) अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में व्यस्त था। बच्चे स्कूल जा रहे थे, दुकानदार खुल रही थीं और लोग अपने-अपने कामों में लगे थे। लेकिन कुछ ही पलों में ऐसा हुआ कि इंसानियत की रूह काँप उठी। आसमान में उड़ता अमेरिकी बॉम्बर विमान एनोला गे (American Bomber Aircraft Enola Gay) और उसके भीतर था लिटिल बॉय (Little Boy) एक यूरेनियम आधारित एटॉमिक बम (Atomic Bomb)। इस बम ने न सिर्फ़ शहर को तबाह किया, बल्कि आने वाले समय की चेतावनी भी छोड़ गया। लिटिल बॉय: नाम से ठीक विपरीत कारनामा  लिटिल बॉय (Little Boy) नाम जितना मासूम था उसका असर उतना ही भयावह। यह मानव इतिहास का पहला परमाणु हमला था, जिसमें करीब 70,000 से अधिक लोग तुरंत मारे गए और बाद में रेडिएशन और बीमारियों से मरने वालों की संख्या लाखों में जा पहुंची। हिरोशिमा जल उठा, इंसान राख में बदल गए और कुछ की परछाइयाँ आज भी उन दीवारों पर दर्ज हैं जो आज भी खड़े हैं, इंसान की बर्बरता की गवाही देते हुए। यह हमला एक चेतावनी थी कि विज्ञान यदि मानवता के विरुद्ध खड़ा हो जाए, तो उसका अंजाम कितना विध्वंसकारी हो सकता है। आज की दुनिया और परमाणु डर आज जब हम ईरान और इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव (Iran Israel Tension) और मिसाइल हमलों की खबरें सुनते हैं, तो मन में यह सवाल उठता है कि क्या वर्ल्ड वॉर 3 की आहट सुनाई दे रही है? आज की तकनीक, हथियारों की शक्ति और देशों के बीच की असुरक्षा को देखते हुए यह डर अनावश्यक नहीं है। कई देश आज भी परमाणु शक्ति (Atomic Power) से लैस हैं। अमेरिका, रूस, चीन, भारत, पाकिस्तान, उत्तर कोरिया और इज़राइल जैसे देश अपने परमाणु हथियारों को सुरक्षा का कवच बताते हैं, लेकिन जब कूटनीति असफल होती है और युद्धोन्माद हावी हो जाता है, तो यही कवच एक दिन तबाही बन सकता है। View this post on Instagram A post shared by JaiRashtra_News (@manishhmishra) क्या सीखा दुनिया ने 1945 से? इतिहास गवाह है कि हिरोशिमा और नागासाकी की त्रासदी ने दुनिया को यह दिखा दिया था कि परमाणु युद्ध (Nuclear war) में कोई जीतता नहीं, हर कोई हारता है। इसके बावजूद आज भी दुनिया के कई हिस्सों में परमाणु ताकत को शक्ति प्रदर्शन का माध्यम समझा जा रहा है। संयुक्त राष्ट्र और एनपीटी (Non-Proliferation Treaty) जैसे अंतरराष्ट्रीय समझौते बने हैं ताकि परमाणु हथियारों के प्रसार को रोका जा सके। लेकिन क्या ये समझौते वास्तव में प्रभावशाली हैं? जब शक्तिशाली देश खुद इन नियमों का पालन नहीं करते, तो बाकी दुनिया से उम्मीद करना बेमानी हो जाता है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! युद्ध नहीं, बल्कि बातचीत से निकले हल  आज की दुनिया को युद्ध नहीं, बल्कि संवाद की जरूरत है। वैश्विक नेता यदि अपने राजनीतिक स्वार्थों से ऊपर उठकर मानवता की भलाई के लिए सोचें, तो शायद लिटिल बॉय जैसी घटनाएं फिर कभी न दोहराई जाएं। लेकिन इसके लिए इच्छाशक्ति और समझ दोनों की जरूरत है। लिटिल बॉय (Little Boy) आज सिर्फ एक बम का नाम नहीं, बल्कि एक प्रतीक है कि मानव विनाश की चरम सीमा का प्रतीक। यह घटना हमें बार-बार याद दिलाती है कि यदि हमने इतिहास से नहीं सीखा, तो भविष्य हमारे लिए और भी भयानक हो सकता है। जब हम हिरोशिमा की राख में बसी परछाइयों को देखते हैं, तो ये सवाल फिर सिर उठाता है कि क्या हम एक बार फिर उसी राह पर बढ़ रहे हैं?  लिटिल बॉय (Little Boy) ने जो जख्म दिए, वे आज भी दुनिया के ज़हन में ताज़ा हैं। हमें यह समझने की जरूरत है कि शांति कोई विकल्प नहीं, बल्कि एकमात्र रास्ता है। युद्ध चाहे किसी भी कारण से हो उसका नतीजा हमेशा विनाश ही होता है। Latest News in Hindi Today Hindi Hiroshima #littleboy #hiroshima #nuclearwar #worldwariii #globalcrisis #historyrepeats

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Indian astronaut Shubhanshu Shukla

भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला आज भरेंगे अंतरिक्ष की उड़ान

भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला (Indian astronaut Shubhanshu Shukla) जल्द ही अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा पर रवाना होंगे। एक्सिओम-4 (Axiom-4) मिशन के तहत उनका यह अभियान 25 जून 2025 को अमेरिका के फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से लॉन्च किया जाएगा। यह मिशन अमेरिका की निजी स्पेस कंपनी Axiom Space, NASA और SpaceX के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। नासा ने दी लॉन्चिंग की जानकारी  नासा (NASA) के अनुसार एक्सिओम स्पेस और स्पेसएक्स (Axiom Space and Space X) ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए चौथे निजी अंतरिक्ष यात्री मिशन एक्सिओम मिशन 4 (Axiom Mission 4) की लॉन्चिंग बुधवार 25 जून को सुबह करने का निर्णय लिया है। यह मिशन निजी क्षेत्र की भागीदारी के साथ अंतरिक्ष अनुसंधान को नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। कौन-कौन होंगे इस मिशन का हिस्सा? इस मिशन का नेतृत्व कर रही हैं कमांडर पैगी व्हिटसन (Commander Peggy Whitson), जो अमेरिका की अनुभवी महिला अंतरिक्ष यात्री (American astronaut) हैं और कई बार अंतरिक्ष की यात्रा कर चुकी हैं। शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla)  इस मिशन के पायलट हैं और वे भारत से अंतरिक्ष जाने वाले चुनिंदा अंतरिक्ष यात्रियों में शामिल हो जाएंगे। इनके अलावा हंगरी के टिबोर कापू (Tibor Kaup) और पोलैंड के स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की (Slavoj Uznanski-Wiśniewski) भी इस मिशन में मिशन एक्सपर्ट की टीम में शामिल हैं। बार-बार टलती रही है लॉन्चिंग की तारीख  यह मिशन पहले 29 मई को तय हुआ था, लेकिन तकनीकी कारणों से इसे बार-बार टालना पड़ा। फाल्कन-9 रॉकेट (Falcon 9 rocket) में तरल ऑक्सीजन के रिसाव और अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन के पुराने रूसी मॉड्यूल में रिसाव की वजह से इसे पहले 8 जून, फिर 10 जून और 11 जून के लिए टाल दिया गया। इसके बाद लॉन्चिंग की तारीख 19 जून और फिर 22 जून निर्धारित की गई, लेकिन रूसी मॉड्यूल में रिपेयर वर्क और ऑर्बिटल लैब्रटोरी के संचालन का मूल्यांकन करने के बाद अब इसे 25 जून को फाइनल किया गया है। कहां से होगा प्रक्षेपण? एक्सिओम-4 मिशन की लॉन्चिंग अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य में स्थित नासा के कैनेडी स्पेस सेंटर (Kennedy Space Center) से की जाएगी, जो दुनिया के सबसे प्रमुख और ऐतिहासिक अंतरिक्ष प्रक्षेपण केंद्रों में से एक है। यह स्पेस सेंटर नासा की मानव अंतरिक्ष उड़ानों के लिए मुख्य प्रक्षेपण स्थल रहा है और इसी केंद्र से अपोलो मिशन, शटल प्रोग्राम और अब कमर्शियल स्पेस फ्लाइट्स की लॉन्चिंग होती रही है। इस मिशन के तहत रॉकेट को लॉन्च कॉम्प्लेक्स 39A (LC-39A) से प्रक्षेपित किया जाएगा। यह वही प्रक्षेपण स्थल है जहाँ से कई ऐतिहासिक मिशन जैसे अपोलो-11 (जिसमें नील आर्मस्ट्रॉन्ग चंद्रमा पर पहुँचे थे) को भी लॉन्च किया गया था। वर्तमान में स्पेसएक्स (SpaceX) इस लॉन्च पैड का इस्तेमाल अपने फाल्कन-9 और फाल्कन हेवी रॉकेट के लिए कर रही है। इसे भी पढ़ें:- गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट? शुभांशु शुक्ला का सफर शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) भारत के उन गिने-चुने वैज्ञानिकों और अंतरिक्ष यात्रियों में से एक हैं जिन्होंने अंतरिक्ष में जाने का गौरव प्राप्त किया है। उन्होंने अंतरिक्ष उड़ान के लिए कठोर प्रशिक्षण NASA और Axiom के कार्यक्रमों के तहत प्राप्त किया है। उनकी यह उपलब्धि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। एक्सिओम स्पेस का उद्देश्य Axiom Space का उद्देश्य भविष्य में पृथ्वी की कक्षा में स्थायी प्राइवेट स्पेस स्टेशन स्थापित करना है, जो वर्तमान अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन का उत्तराधिकारी हो सकता है। इस दिशा में एक्सिओम द्वारा भेजे गए निजी मिशनों का उद्देश्य वैज्ञानिक प्रयोग, अंतरिक्ष पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना है। भारत के लिए गर्व का समय  शुभांशु शुक्ला (Shubhanshu Shukla) की यह उड़ान भारतीय अंतरिक्ष इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। यह मिशन यह दर्शाता है कि भारत न केवल अंतरिक्ष अनुसंधान में आत्मनिर्भर हो रहा है, बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय का एक अहम भागीदार भी बन चुका है। यह मिशन निश्चित रूप से भारत के युवा वैज्ञानिकों और छात्रों के लिए प्रेरणा स्रोत बनेगा। Latest News in Hindi Today Hindi news Shubhanshu Shukla #shubhanshushukla #indianastronaut #spaceflight #isromission #june25launch #indiainspace #spacejourney

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Arvind Kejriwal- AAP

गुजरात और पंजाब में आम आदमी पार्टी की जीत और 2027 के तूफान की आहट?

हाल ही में हुए उपचुनावों में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर शानदार जीत हासिल की है। पहली जीत गुजरात की विसावदर (Visavadar Gujarat) और दूसरी जीत पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Punjab Ludhiana West) में मिली है। इस जीत के बाद पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल (Delhi Former Chief Minister Arvind Kejriwal) ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें उन्होंने इस विजय को जनता के विश्वास और पार्टी के कार्यों की स्वीकृति का प्रतीक बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि यह जीत साल 2027 के आम चुनावों का संकेत है और उस वर्ष तूफान आने वाला है। दो राज्यों में मिली बड़ी सफलता पांच राज्यों की पांच विधानसभा सीटों पर हुए उपचुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने दो पर जीत हासिल की। इन सीटों में गुजरात की विसावदर और पंजाब की लुधियाना पश्चिम (Visavadar Gujarat and Punjab Ludhiana West) शामिल हैं। इन दोनों ही जगहों पर पार्टी ने पिछली बार की तुलना में दोगुने अंतर से जीत दर्ज की है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहां पंजाब में उनकी सरकार पहले से है, वहीं गुजरात में भाजपा की मजबूत पकड़ के बावजूद जनता ने आम आदमी पार्टी को चुना। उन्होंने कहा कि “गुजरात में बीजेपी की शासन प्रणाली, पुलिस, प्रशासन और एजेंसियों पर मजबूत पकड़ है। इसके बावजूद, विसावदर की जनता ने हमें डबल मार्जिन से जिताया। यह इस बात का प्रमाण है कि लोग बीजेपी के 30 वर्षों के शासन से परेशान हो चुके हैं और अब बदलाव की उम्मीद कर रहे हैं।” View this post on Instagram A post shared by Aam Aadmi Party | AAP (@aamaadmiparty) लुधियाना पश्चिम की जीत और जनता का मूड लुधियाना पश्चिम सीट (Ludhiana West Seat) पर आप के उम्मीदवार संजीव अरोड़ा (Sanjeev Arora), जो राज्यसभा सांसद भी हैं और अब चुनाव भी जीत चुके हैं। यह सीट पहले कांग्रेस (Congress) के कब्जे में थी, लेकिन अब वहां की जनता ने आम आदमी पार्टी के पक्ष में मतदान कर यह स्पष्ट कर दिया है कि वे पार्टी के कामकाज से संतुष्ट हैं। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने कहा पंजाब में हमने जब 2022 में विधानसभा चुनाव जीता था, तब कहा गया था कि यह आम आदमी पार्टी की आंधी है। अब उपचुनाव में उसी सीट पर हम दुगने अंतर से जीते हैं, तो यह दर्शाता है कि जनता का भरोसा हम पर और मजबूत हुआ है। यह एक सेमीफाइनल जैसा है, 2027 में तो तूफान ही आएगा। राज्यसभा जाने की अटकलों पर जवाब प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) से पूछा गया कि क्या वे राज्यसभा जाने की योजना बना रहे हैं, तो उन्होंने साफ शब्दों में कहा, “मैं राज्यसभा नहीं जा रहा हूं। यह निर्णय पार्टी की राजनीतिक मामलों की समिति करेगी कि राज्यसभा कौन जाएगा।” इस उत्तर से उन्होंने यह संकेत भी दिया कि उनका लक्ष्य अभी ज़मीन पर रहकर पार्टी को आगे बढ़ाना है। इसे भी पढ़ें:- ट्रंप ने पाकिस्तान को बताया क्षेत्रीय शांति में अहम प्लेयर, मुनीर संग ईरान-इजरायल संघर्ष पर की चर्चा! क्या है जनता का संदेश? अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) ने जोर देकर कहा कि उपचुनाव के नतीजे केवल जीत का प्रमाण नहीं हैं, बल्कि जनता की ओर से एक स्पष्ट संदेश भी हैं कि जनता वही पार्टी चुनेगी जो उनके लिए काम करती है। दिल्ली और पंजाब में आम आदमी पार्टी की सरकारों ने शिक्षा, स्वास्थ्य और बिजली जैसे मुद्दों पर जो काम किया है, उसका असर अब दूसरे राज्यों में भी दिखने लगा है। गुजरात जैसे राज्य जहां बीजेपी (BJP) की मजबूत पकड़ रही है, वहां भी अब बदलाव की हवा बहती दिख रही है। विसावदर सीट पर मिली जीत इस बात का संकेत है कि लोग अब पारंपरिक राजनीति से ऊपर उठकर परिणामों पर ध्यान दे रहे हैं। गुजरात और पंजाब (Gujrat and Punjab) में मिली इस जीत ने आम आदमी पार्टी को नई ऊर्जा और दिशा दी है। यह जीत न सिर्फ़ पार्टी के कार्यकर्ताओं के लिए उत्साहवर्धक है, बल्कि यह पूरे देश की राजनीति में एक नया संकेत भी दे रही है कि जनता अब विकल्प चाहती है और वह विकल्प उन्हें काम करने वाली पार्टियों में दिख रहा है। अरविंद केजरीवाल (Arvind Kejriwal) के शब्दों में साल 2027 में तूफान आने वाला बयान सिर्फ एक राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि आने वाले सालों में भारतीय राजनीति की दिशा और दशा को दर्शाने वाला संकेत भी हो सकता है। Latest News in Hindi Today Hindi news Arvind Kejriwal #Visavadar #Ludhiana #Election2025 #AAP #Arvindkejriwal

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इजरायल-ईरान और रूस-यूक्रेन तनाव के बीच शेयर बाजार में भारी गिरावट, सेंसेक्स 511 अंक लुढ़का

देश और दुनिया में बढ़ते तनावों के बीच सोमवार यानी 23 जून को भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में भारी गिरावट दर्ज की गई। खासकर इजरायल-ईरान (Israel-Iran) और रूस-यूक्रेन (Russia-Ukraine) के बीच जारी संघर्ष और इसके बीच अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु ठिकानों पर किए गए अचानक हमले ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता पैदा कर दी, जिसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार पर पड़ा। बाजार का हाल सोमवार को कारोबार के अंत में बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) 511.38 अंकों की गिरावट के साथ 81,896.79 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 50 (NSE Nifty 50) 140.5 अंक गिरकर 24,971.90 पर बंद हुआ, जो कि 25,000 के अहम स्तर से नीचे है। यह गिरावट हाल के हफ्तों में भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आई सबसे बड़ी गिरावटों में से एक मानी जा रही है। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल के दाम बीते सप्ताह अमेरिका द्वारा ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों पर किए गए हवाई हमले ने वैश्विक स्तर पर तनाव को और बढ़ा दिया। इसके चलते कच्चे तेल की कीमतों में तेज़ उछाल देखा गया, जिससे ब्रेंट क्रूड की कीमत $90 प्रति बैरल के पार चली गई। भारत, जो अपनी ज़रूरत का 85% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, के लिए यह स्थिति बेहद चिंताजनक बन गई है। इससे न केवल व्यापार घाटा बढ़ सकता है बल्कि मुद्रास्फीति (महंगाई) भी ऊंचाई पकड़ सकती है। किन सेक्टरों पर पड़ा असर भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में सोमवार को आई गिरावट में अधिकांश सेक्टर्स लाल निशान में बंद हुए। सबसे ज्यादा नुकसान बैंकिंग, आईटी, ऑटो और रियल एस्टेट सेक्टर्स में देखा गया। निफ्टी बैंक इंडेक्स में 1% से अधिक की गिरावट दर्ज हुई, जिसमें HDFC बैंक, ICICI बैंक, और Axis बैंक जैसे दिग्गज शेयरों में गिरावट देखी गई। आईटी सेक्टर की बड़ी कंपनियां जैसे Infosys और TCS भी वैश्विक अनिश्चितता और क्लाइंट खर्चों में संभावित गिरावट के चलते प्रभावित हुईं। तेल और गैस सेक्टर में मिली-जुली प्रतिक्रिया रही — जहाँ ONGC जैसी अपस्ट्रीम कंपनियों को फायदा हुआ, वहीं रिफाइनरी और डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों पर दबाव बना रहा। महंगाई की चिंता कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी ने एक बार फिर से आयातित महंगाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चा तेल ऊंचे स्तर पर बना रहता है, तो इससे घरेलू ईंधन की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिसका असर आम उपभोक्ताओं पर पड़ना तय है। इस समय भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) महंगाई को लेकर सतर्क रुख अपनाए हुए है। ऐसे में तेल की कीमतों में उछाल उसकी नीतियों के सामने नई चुनौती खड़ी कर सकता है। विशेषज्ञों की राय बाजार विश्लेषकों का मानना है कि सोमवार को शेयर बाजार (Stock Market) में जो गिरावट आई, वह मुख्यतः भावनात्मक प्रतिक्रिया थी। शेयर बाजार (Stock Market) से जुड़े जानकारों के अनुसार बाजार की गिरावट फिलहाल डर और अनिश्चितता के कारण है। अगर वैश्विक तनाव कम होता है, तो बाजार में तेज़ रिकवरी भी देखने को मिल सकती है। इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? निवेशकों के लिए सलाह ऐसे अस्थिर माहौल में विशेषज्ञ निवेशकों को धैर्य और विवेक से काम लेने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार: ईरान, इजरायल और रूस-यूक्रेन के बीच बढ़ते संघर्षों ने वैश्विक बाज़ारों की स्थिरता को चुनौती दी है, और भारतीय शेयर बाजार भी इससे अछूता नहीं रहा। हालांकि देश की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की मौलिक स्थिति मजबूत बनी हुई है, लेकिन निकट भविष्य में बाजार की चाल पूरी तरह से वैश्विक घटनाओं और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। Latest News in Hindi Today Hindi  RBI NSE Nifty 50 #sensex #stockmarket #marketcrash #israeliran #russiaukraine #globaltensions #sharemarketnews #nifty #bse #nse

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BPSC Special Teacher Vacancy 2025

BPSC ने निकाली स्पेशल टीचर पोस्ट्स, 7279 पदों पर निकली भर्ती, जानें कैसे करें आवेदन

बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन यानी बीपीएससी (BPSC) एक स्टेट लेवल रिक्रूटमेंट एजेंसी है, जो कॉम्पिटिटिव एग्जाम लेती है और बिहार में कई सरकारी पदों के लिए सही कैंडिडेट्स को चुनती है। बीपीएससी (BPSC) यह भी सुनिश्चित करती है कि यह परीक्षाएं पूरी पारदर्शित्ता और निष्पक्षता के साथ हों। बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar Public Service Commission) ने हाल ही में एक नोटिफिकेशन जारी की है। इसमें यह बताया गया है कि अध्यापकों की सात हजार से भी अधिक पोस्ट्स निकाली गई हैं। इसके बारे में अधिक जानकारी आप को बीपीएससी (BPSC) की वेबसाइट पर मिल जाएगी। आइए जानें कि आप इसके लिए कैसे अप्लाई कर सकते हैं? इसके साथ ही बीपीएससी द्वारा निकाली टीचर्स पोस्ट्स (Teachers posts by BPSC) के लिए योग्यता क्या होनी चाहिए, यह भी जानें? बीपीएससी द्वारा निकाली टीचर्स पोस्ट्स (Teachers posts by BPSC) जैसा की पहले ही बताया गया है कि बिहार पब्लिक सर्विस कमीशन (Bihar Public Service Commission) द्वारा स्पेशल टीचर (Special teacher) की नियुक्ति की जा रही है। जब भी इसकी रेजिस्ट्रेशन प्रोसेस शुरू होगी, इच्छुक कैंडिडेट्स इसके लिए ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं। बीपीएससी द्वारा निकाली टीचर्स पोस्ट्स (Teachers posts by BPSC) के लिए कैंडिडेट्स की योग्यता के बारे में जानें: क्वालिफिकेशन इन पोस्ट्स के लिए कुल 7279 पदों पर स्पेशल टीचर्स (Special teacher) की भर्ती की जाएगी। इनमे से 5534 पोस्ट्स पहली से पांचवीं कक्षा के लिए हैं जबकि 1754 पोस्ट्स छठी से आठवीं कक्षा के लिए हैं। इन पदों के लिए सिलेक्शन रिटेन एग्जाम के आधार पर की जाएगी और इसमें इंटरव्यू नहीं लिया जाएगा। फीस  बीपीएससी द्वारा निकाली टीचर्स पोस्ट्स (Teachers posts by BPSC) के लिए भी आवेदन शुरू नहीं हुए हैं। यह 2 जुलाई से शुरू होंगे और 28 जुलाई तक आप इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। इसके बाद यह प्रक्रिया बंद कर दी जाएगी। यह बात ध्यान में रखें कि आप इस डेट के बाद आवेदन नहीं कर सकते हैं। अगर बात करें फीस की तो स्पेशल टीचर (Special teacher) के लिए सामान्य और अनारक्षित श्रेणी के लोगों के लिए यह फीस 750 रुपये है जबकि अनुसूचित जाति, जनजाति, महिलाओं आदि को इसमें छूट दी गई है। उनके लिए यह फीस केवल 200 रुपये है।  इसे भी पढ़ें: यूपीएससी रिक्रूटमेंट: 400 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी, पढ़ें डिटेल्स कैसे करें अप्लाई? Latest News in Hindi Today Hindi news Teachers posts by BPSC #BPSC #TeacherRecruitment #BiharJobs #GovernmentJobs #BPSC2025 #EducationJobs

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wiper blade replacement

Car wiper and windshield: कार की विंडशील्ड और वाइपर की मानसून में मेंटेनेंस गाइड

भारत में मानसून का मौसम एक तरफ जहां राहत और हरियाली लेकर आता है, वहीं यह कार चालकों के लिए कुछ गंभीर चुनौतियाँ भी पैदा करता है। तेज़ बारिश, फिसलन भरी सड़कें और लो विजिबिलिटी के कारण कार ड्राइव करने वालों के सामने कई परेशानियां खड़े कर देती है। बारिश के मौसम में सबसे अहम भूमिका निभाते हैं कार के वाइपर और विंडशील्ड (Car wiper and windshield) क्योंकि यही दो चीज़ें आपको बारिश के दौरान सामने साफ देखने में मदद करती है। अगर इनकी देखभाल समय रहते नहीं की गई, तो ये न केवल आपकी सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं बल्कि आपकी कार को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। भारत में मानसून का मौसम जून से सितंबर तक रहता है। खासतौर पर मुंबई, केरल, असम, उत्तराखंड और कोलकाता जैसे इलाकों में भारी बारिश होती है। ऐसे में ड्राइविंग के दौरान सामने ठीक से ना दिखना परेशानी पैदा करती है। इसीलिए विंडशील्ड का अच्छा  होना बेहद ज़रूरी है। भारतीय मौसम विभाग के अनुसार हर साल सड़कों पर बारिश की वजह से हजारों एक्सीडेंट दर्ज किए जाते हैं, जिनमें से अधिकतर सामने साफ ना देखपाना और गाड़ी की ख़राब स्थिति की वजह से होते हैं। Car wiper and windshield: कार की विंडशील्ड और वाइपर से जुड़ी जरूरी बातें  साफ़ और स्क्रैच-फ्री विंडशील्ड  (Car wiper and windshield) इसे भी पढ़ें:- कौन सा रिचार्ज प्लान आपके लिए हो सकता है बेस्ट? वाइपर की देखभाल  कुछ अतिरिक्त कार केयर टिप्स मानसून के लिए मानसून में कार की विंडशील्ड और वाइपर (Car wiper and windshield) का मेंटेनेंस कोई ऐच्छिक काम नहीं, बल्कि एक आवश्यक सुरक्षा कदम है। जैसे-जैसे भारतीय सड़कों पर बारिश तेज़ होती है, वैसे-वैसे इन दो भागों की भूमिका और भी अहम हो जाती है। साफ़ विंडशील्ड और सही वाइपर न केवल आपको एक बेहतर दृश्य देते हैं, बल्कि आपके और आपके परिवार की सुरक्षा भी सुनिश्चित करते हैं। Latest News in Hindi Today Hindi  Car wiper and windshield #MonsoonCarCare #WiperMaintenance #WindshieldCare #RainySeasonTips #SafeDriving

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Nitish Kumar vs Tejashwi Yadav

Bihar Assembly Election 2025: बदलते समीकरणों में 2025 के चुनाव में बिहार की जनता किसका देगी साथ?

बिहार, ऐतिहासिक दृष्टि से भारत की राजनीति का अहम केंद्र रहा है। यहां की राजनीति में जातीय समीकरण, सामाजिक न्याय, क्षेत्रीय अस्मिता और विकास के मुद्दे हमेशा प्रभावी भूमिका निभाते रहे हैं। जैसे-जैसे 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) नज़दीक आ रहे हैं, बिहार की राजनीति में हलचल तेज़ हो गई है। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी रणनीतियों से चुनाव जीतने का मौका तलाश रहें हैं। राजनीतिक परिदृश्य मौजूदा समय में बिहार में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सत्ता में है, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) प्रमुख हैं। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) एक बार फिर से NDA का चेहरा हैं, जो अपने लंबे राजनीतिक अनुभव और प्रशासनिक कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष में राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के नेतृत्व में एकजुटता लाने की कोशिश हो रही है, जिसमें कांग्रेस और अन्य क्षेत्रीय दल भी शामिल हो सकते हैं। 2025 बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Election) के प्रमुख मुद्दे 2025 के विधानसभा चुनाव में कई मुद्दे चर्चा में रहेंगे: विकास और बेरोजगारी- बिहार में शिक्षा और युवाओं की बेरोजगारी (Unemployment) लंबे समय से बड़ी चुनौती रही है। RJD जहां सरकार की बेरोजगारी नीति पर सवाल उठा रही है, वहीं सरकार यह दावा कर रही है कि नए उद्योगों और योजनाओं के ज़रिए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। जातीय जनगणना और सामाजिक न्याय- जातीय जनगणना (Caste Census) एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसे RJD और अन्य विपक्षी दल जोरशोर से उठा रहे हैं। यह सवाल न केवल वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा है, बल्कि इससे सरकारी योजनाओं के पुनर्गठन की मांग भी जुड़ी हुई है। कानून व्यवस्था और महिला सुरक्षा- हाल के वर्षों में बढ़ते अपराध और महिला उत्पीड़न के मामले भी चुनावी एजेंडे का हिस्सा बनने वाले हैं। माई समीकरण और नया जनाधार- RJD अपने पारंपरिक M-Y (मुस्लिम-यादव) समीकरण को मजबूत करने में जुटी है, वहीं BJP ने महिला वोटर्स, अति पिछड़े वर्गों और दलितों पर ज़ोर देना शुरू कर दिया है। नए गठजोड़ और समीकरण- राजनीति में कोई स्थायी मित्र या दुश्मन नहीं होता। इसी सिद्धांत पर बिहार की राजनीति (Bihar Politics) आगे बढ़ती रही है। जहां एक ओर JDU और BJP के बीच मतभेद की खबरें आती रही हैं, वहीं दूसरी ओर यह भी देखा गया है कि RJD और कांग्रेस के बीच तालमेल में कई बार दरार आती है। बिहार विधानसभा 2025 के चुनाव (Bihar Assembly Election 2025) में यह देखना रोचक होगा कि क्या तेजस्वी यादव के नेतृत्व में RJD एक प्रभावशाली विपक्ष खड़ा कर पाएगी या फिर नीतीश कुमार (Chief Minister Nitish Kumar) अपने शासन के अनुभव और विकास योजनाओं के दम पर एक बार फिर सरकार बनाने में सफल होंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भूमिका बिहार में NDA की चुनावी रणनीति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) की लोकप्रियता एक बड़ा फैक्टर रही है। 2024 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Election 2025) में भी भाजपा ने बिहार में अच्छा प्रदर्शन किया था, जिसे वह विधानसभा में दोहराना चाहेगी। पीएम मोदी (PM Modi) द्वारा बिहार को दी जा रही विकास परियोजनाएं, जैसे कि रेलवे, सड़कों और प्रधानमंत्री आवास योजना, लोगों के बीच में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इसे भी पढ़ें:- विधानसभा चुनाव से पहले बिहार को पीएम मोदी ने दिया तोहफा युवा और महिला मतदाता 2025 का चुनाव युवाओं और महिलाओं के रुझान पर बहुत हद तक निर्भर करेगा। युवा मतदाता शिक्षा, रोज़गार और टेक्नोलॉजी से जुड़ी नीतियों की ओर देख रहे हैं, जबकि महिला मतदाता सुरक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी योजनाओं में भागीदारी के आधार पर वोट कर सकती हैं। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 (Bihar Assembly Election 2025) महज सत्ता परिवर्तन नहीं, बल्कि राज्य की सामाजिक और आर्थिक दिशा तय करने का महत्वपूर्ण मौका होगा। राजनीतिक दलों को यह समझना होगा कि अब मतदाता केवल जाति और परंपरा के आधार पर वोट नहीं करते, बल्कि विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और पारदर्शिता जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। आगामी चुनाव में किसके सिर जीत का सेहरा बंधेगा, यह तो समय बताएगा, लेकिन इतना तय है कि बिहार की राजनीति (Bihar Politics) एक बार फिर देशभर के लिए चर्चा का केंद्र बनने वाली है। Latest News in Hindi Today Hindi  Chief Minister Nitish Kumar #BiharElection2025 #NitishKumar #TejashwiYadav #BiharPolitics #BJPvsRJD #BiharVoters #INDIABloc #NDABihar

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